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समय आ गया है, जब राजनीतिक दलों व मीडिया घरानों को इस बारे में बात करनी चाहिए: उदय माहुरकर
‘ई4एम न्यूजनेक्स्ट‘ 2022 कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय सूचना आयुक्त उदय माहुरकर ने कहा कि सच्ची रिपोर्टिंग के लिए एक साझा न्यूनतम एजेंडा (common minimum agenda) होना चाहिए।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 3 years ago
केंद्रीय सूचना आयुक्त उदय माहुरकर का कहना है कि पत्रकारिता में सच्चाई और ईमानदारी से रिपोर्ट करने की हमेशा जगह होती है। उनका कहना है कि न्यूज मीडिया इंडस्ट्री और राजनीतिक दलों को राष्ट्र को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर आवाज उठाने के लिए एक साथ आना चाहिए।
‘ई4एम न्यूजनेक्स्ट’ 2022 कॉन्फ्रेंस के दौरान ‘बिजनेसवर्ल्ड’ (Business World) के सीनियर एडिटर रुहैल अमीन के साथ ‘Journalism of Impact’ टॉपिक पर बातचीत के दौरान राजनीतिक विश्लेषक और लेखक उदय माहुरकर ने राष्ट्र सर्वोपरि (nation-first) सिद्धांत के महत्व के बारे में भी बताया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कैसे न्यूज मीडिया इंडस्ट्री और राजनीतिक दलों को एक साथ काम करना चाहिए।
इस बातचीत के दौरान उदय माहुरकर का कहना था, ‘पहले किसी न्यूज की रिपोर्ट करना और फिर उसके प्रभाव के लिए लहरें (waves) पैदा करना पत्रकारिता है। किसी स्टोरी को ब्रेक करना प्रभावोत्पादक पत्रकारिता (impact-making journalism) है। यह काफी बड़ा कैनवास है और इसलिए हमें पत्रकारिता के वास्तविक प्रभाव पर ध्यान देना चाहिए। आज के दौर की पत्रकारिता में तमाम पारदर्शिता और सोशल मीडिया द्वारा निभाई जाने वाली भूमिका के बावजूद हमें अभी भी एक लंबा रास्ता तय करना है। मेरा मानना कि बेशक हमारी विभिन्न विचारधाराएं हो सकती है, लेकिन पत्रकारिता में हमेशा सच्चाई और ईमानदारी से रिपोर्ट करने की जगह होती है।’
माहुरकर के अनुसार, ‘जब विचारधारा पर बहस हो तो लोगों को अपने विचार जरूर रखने चाहिए। लेकिन जब किसी विकास की बात हो, जो समाज को प्रभावित कर रहा हो और जिसका समाज के भविष्य और शांति पर गहरा असर हो, तो सच्ची रिपोर्टिंग के लिए एक साझा न्यूनतम एजेंडा (common minimum agenda) होना चाहिए। सच्ची प्रभावोत्पादक पत्रकारिता के लिए सच्चाई के साथ रिपोर्टिंग होनी चाहिए।’
इसके साथ ही उनका कहना था, ‘मुझे लगता है कि मीडिया में आत्मचिंतन होना चाहिए और दूसरी बात हमें राष्ट्र सर्वोपरि की भावना अपनानी चाहिए। हमें पहले राष्ट्र हित के सिद्धांत का पालन करना होगा। पार्टी, नौकरी और मीडिया घरानों की बारी इसके बाद आती है। अगर हम इस दृष्टिकोण को अपनाना चाहते हैं तो शीर्ष नेताओं को आगे आना होगा और इसके बारे में बात करनी होगी। समय आ गया है, जब राजनीतिक दलों और मीडिया घरानों को इसके बारे में बात करनी चाहिए।’
बातचीत के दौरान माहुरकर का यह भी कहना था, ‘मीडिया और राजनीतिक दलों के बीच एक साझा न्यूनतम एजेंडा होना चाहिए। राष्ट्र हित को लेकर एक ऐसी कॉन्फ्रेंस होनी चाहिए, जहां सभी शीर्ष नेताओं को पूरी ईमानदारी और विनम्रता के साथ एक योजना बनानी चाहिए और राष्ट्र से जुड़े मुद्दों पर एक स्वर में बोलना चाहिए।’
माहुकर ने अक्टूबर 2020 तक एक सक्रिय पत्रकार के रूप में मीडिया इंडस्ट्री में हुए अपने अनुभव भी शेयर किए। बाद में उन्हें केंद्रीय सूचना आयोग में आयुक्त के रूप में नियुक्त किया गया है। माहुरकर ने 34 साल से ज्यादा समय तक गुजरात में एक पत्रकार के रूप में काम किया है। इस दौरान उन्होंने तत्कालीन सीएम और अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शासन काल में तमाम प्रमुख घटनाओं और मुद्दों को कवर किया है। माहुरकर ने गुजरात के सीएम व देश के पीएम के रूप में नरेंद्र मोदी के शासनकाल पर दो किताबें भी लिखी हैं।
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