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उदय शंकर ने बताई वजह, क्यों करनी पड़ी पहले से आधी सैलरी पर नौकरी

‘स्टार’ और ‘डिज्नी इंडिया’ के चेयरमैन और ‘द वॉल्ट डिज्नी कंपनी, एशिया पैसिफिक’ के प्रेजिडेंट उदय शंकर ने ‘एएएआई-सुभाष घोषाल मेमोरियल लेक्चर’ में बताईं अपने जीवन से जुड़ी कई घटनाएं

समाचार4मीडिया ब्यूरो 6 years ago

‘स्टार’ (Star) और ‘डिज्नी इंडिया’ (Disney India) के चेयरमैन और ‘द वॉल्ट डिज्नी कंपनी, एशिया पैसिफिक’ (The Walt Disney Company, Asia Pacific) के प्रेजिडेंट उदय शंकर ने मुंबई में 11 नवंबर को ‘एएएआई-सुभाष घोषाल मेमोरियल लेक्‍चर’ (AAAI-Subhas Ghosal Memorial Lecture) 2019 को संबोधित किया।  

कार्यक्रम का आयोजन ‘एडवर्टाइजिंग एजेंसीज एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ (AAAI)  और सुभाष घोषाल फाउंडेशन ने मिलकर किया था। मीडिया, एडवर्टाइजिंग और मार्केटिंग की दुनिया की जानी-मानी हस्तियों के बीच उदय शंकर ने मीडिया इंडस्ट्री में अपने करियर के साथ ही बिजनेस चलाने के दौरान सामने आईं चुनौतियों का भी जिक्र किया।

उदय शंकर का कहना था, ‘करीब तीन दशक पहले जब मैंने एक अखबार में बतौर पत्रकार अपना करियर शुरू किया था, तो उस समय मैंने कल्पना भी नहीं की थी कि किसी दिन मुझे इस मंच पर इतने प्रतिष्ठित लोगों को संबोधित करने का मौका मिलेगा। तब मुझे इस बात का अंदाजा नहीं था कि मैं आजीविका के लिए सिर्फ यह शुरुआत नहीं कर रहा हूं, बल्कि मैं ऐसे भारत की तलाश शुरू करने जा रहा हूं, जिससे मुझे इस देश को एक नए रूप में जानने का मौका मिलेगा, जो शायद किसी और प्रोफेशन में संभव नहीं होता। करियर के शुरुआती दौर में बतौर पत्रकार और बाद में एक मीडिया प्रोफेशनल के रूप में सक्रिय उदय शंकर ने बताया कि कैसे उन्हें इस देश को गहराई से जानने-समझने का मौका मिला।

इस दौरान उदय शंकर ने यहां तक के सफर में अपने जीवन में घटी कुछ घटनाओं के बारे में भी बताया। एक घटना का जिक्र करते हुए उदय शंकर ने बताया कि यह उन दिनों की बात है, जब उन्हें ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ को जॉइन किए मुश्किल से कुछ हफ्ते ही हुए थे। एक दिन संपादक ने उनसे सरकार द्वारा चलाई जा रही टीकाकरण योजना का रिव्यू करने के लिए कहा। लोगों को बीमारियों से बचाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा लोगों के लिए टीकाकरण अभियान शुरू किया गया था।  उदय शंकर को इस बात की पड़ताल करनी थी कि सरकार की इस टीकाकरण योजना का आम लोगों की जीवन पर क्या प्रभाव पड़ रहा है।     

उदय शंकर के अनुसार, ‘उस समय मैंने सोचा था कि पत्रकारिता में करियर के दौरान मुझे बड़े-बड़े लोगों से जुड़ने का मौका मिलेगा, लेकिन यहां तो मेरे संपादक के दिमाग में कुछ और ही चल रहा था।’ शंकर ने बताया कि टीकाकरण अभियान की वास्तविकता जानने के लिए उन्हें बिहार के पूर्णिया में भेजा गया, जहां उन्होंने अत्यधिक गरीबी में रह रहे लोगों के बीच एक हफ्ता गुजारा और वहां उन्होंने जो देखा, उससे दुनिया को देखने का उनका नजरिया हमेशा के लिए बदल गया।

उन्होंने कहा, ‘वहां मैंने देखा कि दिल्ली में मैंने एक रेस्टोरेंट में खाने के लिए जितना भुगतान किया, उससे कम कीमत में कैसे एक वैक्सीन किसी बच्चे अथवा किसी परिवार का भविष्य बचा सकती है। वहां के लोग बहुत गरीब थे और ऐसे एक-दो परिवार नहीं थे, बल्कि मैंने ऐसे कई गांव देखे। मैंने देखा कि उन ग्रामीणों तक वैक्सीन पहुंचाना कितना मुश्किल था, जिससे किसी की जिंदगी बदल सकती थी। यहां मुझे ऐसे कुछ समर्पित स्वास्थ्य कर्मी भी दिखे, जो निस्वार्थ भाव से काम कर रहे थे। जेएनयू में पढ़ने वाले मेरे जैसे फायरब्रैंड स्टूडेंट और एक्टिविस्ट के लिए यहां के हालात बिल्कुल नई बात थी।’ उदय शंकर ने बताया कि इस अनुभव ने देश को देखने का उनका नजिरया ही बदल दिया।

एक और घटना का जिक्र करते हुए उदय शंकर ने बताया कि यह बात करीब 20 साल पुरानी है, जब वह ‘आजतक’ में थे। उदय शंकर के अनुसार, ‘हमने नोएडा में एक स्कूल बस के एक्सीडेंट के बारे में न्यूज ब्रेक की थी। यह जानकारी थोड़ी सही थी। दरअसल, एक्सीडेंट की बात तो सही थी, लेकिन हमने जिस स्कूल का जिक्र किया था, उसकी कई ब्रांच थीं और हमने गलत ब्रांच का जिक्र कर दिया था। हमने अपनी गलती पकड़ भी ली और इसे 20-30 मिनट में ठीक कर दिया। इस पूरे दिन मुझे एक महिला के फोन आते रहे। मेरी सहायक ने मुझे बताया कि वह महिला मुझसे बात करने के लिए काफी इच्छुक थी। कई घंटे बाद मैंने उस महिला की कॉल का जवाब दिया। उसने मुझे धन्यवाद दिया और काफी अच्छे से बात की।

उदय शंकर के अनुसार, ‘उस महिला ने मुझे जो बात बताई, वह मुझे अभी भी परेशान करती है। वह महिला एक सैनिक की विधवा थी, जिसके दोनों बच्चे उसी स्कूल में पढ़ते थे, जिसकी बस के एक्सीडेंट के बारे में हमसे गलती हुई थी। वह एक्सीडेंट उस महिला के घर के पास ही हुआ था। महिला ने मुझे बताया कि कारगिल में पति की शहादत के बाद से उसे हमेशा कहीं न कहीं कुछ ऐसा घटित होने का डर लगा रहता था, जिससे उसकी बची हुई दुनिया छिन सकती थी। उसने बताया कि वह अपने घर पर हमेशा ‘आजतक’ चैनल को चलाकर रखती थी, क्योंकि उसका मानना था कि कहीं भी कुछ होने पर  चैनल के माध्यम से उसे हमेशा जानकारी मिलती रहेगी।’

उदय शंकर का कहना था, ‘महिला ने मुझे बताया कि एक पल के लिए उसे लगा कि आजतक ने उसकी दुनिया उजाड़ दी है। कुछ मिनट के लिए उसे लगा कि इस दुनिया में जिस चैनल पर वह सबसे ज्यादा भरोसा करती है, उसी ने उसकी दुनिया को खराब कर दिया। महिला का यह भी कहना था कि उसे लगा था कि यह चैनल हमेशा भरोसेमंद और सही जानकारी देने वाला है, लेकिन इस गलती से हमने उसका यह भरोसा तोड़ दिया और वह दोबारा हम पर कभी भरोसा नहीं कर सकेगी। थोड़ी देर के लिए तो मुझे लगा कि वह महिला ओवररिएक्ट कर रही है, आखिर हम भी तो इंसान हैं, हमसे भी तो गलती हो सकती है, लेकिन फिर मेरी समझ में आ गया कि आखिर उसके कहने का क्या मतलब था।‘

‘उस महिला ने मुझे अपने बिजनेस में विश्वास और क्रेडिबिलिटी के बारे में एक बहुमूल्य सबक दे दिया था। हालांकि, वह न्यूज के बारे में बात कर रही थी, लेकिन एंटरटेनमेंट और एडवर्टाइजिंग के साथ-साथ हमारे बिजनेस का कोई अन्य पार्ट भी इससे अलग नहीं है। पिछले बीस सालों से उसके शब्द आज भी मेरे कानों में गूंज रहे हैं और आज भी उसकी आवाज मुझे सतर्क करती रहती है। मुझे लगता है कि क्या मैं अपने बिजनेस को आगे बढ़ाने अथवा अपने निजी हित के लिए किसी के भरोसे को तोड़ रहा हूं। मुझे उम्मीद है कि मैं उसे दोबारा निराश नहीं करूंगा।‘   

यही नहीं, इस कार्यक्रम के दौरान उदय शंकर ने उस घटना के बारे में भी बताया, जिसने उनकी जिंदगी ही बदलकर रख दी। उदय शंकर ने बताया, ‘अखबार में रिपोर्टर होने के बाद भी मैं टीवी में काम करने के लिए इच्छुक था। वर्ष 1991 में CNN पर खाड़ी युद्ध का प्रसारण किया जा रहा था। मैं भी टीवी न्यूज के लिए काम करना चाहता था। एक दिन मेरी पत्नी ने कहा कि इस बारे में अवसर मिलने के बारे में सोचने के बजाय मैं इसके लिए कोई कदम क्यों नहीं उठाता हूं। मैं उस समय अच्छी तरह से सैटल्ड हो चुका था और ‘Down To Earth’  नामक एक पब्लिकेशन में सीनियर एडिटर था, लेकिन मेरी पत्नी के शब्दों ने मुझ पर ऐसा प्रभाव डाला कि अगले दिन मैंने नौकरी छोड़ दी।’

उदय शंकर का यह भी कहना था कि छह महीने तक उन्हें कहीं से रेगुलर इनकम नहीं हुई और पत्नी की कमाई से किसी तरह घर का खर्च चला। काफी भटकने के बाद उन्हें ‘जी’ (Zee)  द्वारा लॉन्च किए जा रहे एक न्यूज बुलेटिन में नौकरी मिली, लेकिन वहां एक अलग तरह की समस्या हो गई। पहले के मुकाबले उनकी सैलरी में आधी से ज्यादा कमी हो गई थी। उदय शंकर के अनुसार, ‘एक पत्रकार की सैलरी वैसे भी ज्यादा नहीं थी, लेकिन पचास प्रतिशत की कटौती तो बेहद कम थी। लेकिन मैंने वहां पर काम किया। इसके बाद करीब पांच साल तक तमाम आर्थिक चुनौतियों से जूझना पड़ा। इसके बाद ‘आजतक’ आया और स्थिति में भी काफी सुधार हुआ।

उदय शंकर का कहना था, ‘संघर्ष के इस दौर में मुझे पर्सनल और प्रोफेशनल तौर पर काफी कुछ सीखने को मिला। हालांकि, मैंने जो सबसे अच्छा सबक सीखा, वह है कि हमेशा अपने अंतरात्मा की आवाज सुननी चाहिए, अपने दिल की माननी चाहिए और परिणामों के बारे में ज्यादा नहीं सोचना चाहिए, जब आपको पता हो कि आप सही कर रहे हैं। मैंने तब से हमेशा इन सबक का पालन किया है और यह मेरे लिए काफी अच्छा भी रहा है।’


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