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वरिष्ठ पत्रकार ओम थानवी व राहुल देव में हुई ‘ट्विटर वॉर’, जानें वजह
लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद मोदी व बीजेपी की ऐतिहासिक जीत बनी चर्चा का सबब
समाचार4मीडिया ब्यूरो 6 years ago
लोकसभा चुनाव 2019 के नतीजे आने के बाद अब चारों ओर बीजेपी और नरेंद्र मोदी को मिली ऐतिहासिक जीत की चर्चा हो रही है। आखिर हो भी क्यों न, मोदी के नेतृत्व में बीजेपी को मिली जीत है ही इतनी बड़ी, लेकिन इसके साथ ही मोदी और राष्ट्रवाद को लेकर बनी उनकी छवि भी बहस का मुद्दा बन गई है।
मोदी की इसी छवि को लेकर ‘जनसत्ता’ के पूर्व संपादक ओम थानवी और जनसत्ता के ही उनके पूर्व सहयोगी पत्रकार राहुल देव के बीच ट्विटर पर काफी बहस हुई। एक ओर ओम थानवी का मानना था कि राष्ट्रवाद आयातित अवधारणा है और इसके स्थान पर देशप्रेम की अवधारण पुख्ता होनी चाहिए। इस दौरान राहुल देव का कहना था कि राष्ट्रवाद नया नहीं है, बल्कि आजादी के आंदोलन से ही यह राजनीति का प्रमुख अंग रहा है।
सबसे पहले राहुल देव ने ट्विटर पर लिखा, ‘अगर कहूं कि मोदीवाद राष्ट्रवाद से भी बड़ा हो गया है तो ग़लत होगा क्या? मोदी राष्ट्र से बड़े नहीं मोदीवाद...।’ इस पर ओम थानवी का कहना था, ‘चलेगा। राष्ट्रवाद एक बीमारी है। मोदीवाद उससे कहीं बड़ी बीमारी होगी। आयातित राष्ट्रवाद ने देशप्रेम को पीछे धकेल दिया। मोदी तो कइयों को धकियाते हुए ही आगे बढ़े हैं! पर क्या मोदी ने किसी मौलिक विचार को जन्म दिया है, जो उनके नाम से मोदीवाद खड़ा हो गया?’
इसके जवाब में राहुल देव ने लिखा, ‘राष्ट्रवाद एक रोग है, इस बात से घोर असहमत हूं। भारतीय राष्ट्रवाद आयातित नहीं उसे बीमारी मानने का विचार आयातित है। मोदीवाद इस अर्थ में कह रहा हूं कि इस चुनाव में मोदी ही मुद्दा थे। भाजपा ने तो यह किया ही कांग्रेस और राहुल गांधी ने भी इस जाल में फंसकर अपना नुकसान किया।’
राष्ट्रवाद एक रोग है, इस बात से घोर असहमत हूं। भारतीय राष्ट्रवाद आयातित नहीं उसे बीमारी मानने का विचार आयातित है। मोदीवाद इस अर्थ में कह रहा हूं कि इस चुनाव में मोदी ही मुद्दा थे। भाजपा ने तो यह किया ही कांग्रेस और राहुल गांधी ने भी इस जाल में फंस कर अपना नुकसान किया।
— राहुल देव Rahul Dev (@rahuldev2) May 23, 2019
इस पर ओम थानवी ने ट्वीट करते हुए कहा कि राष्ट्रवाद को रोग की संज्ञा तो प्रेमचंद ने दी थी। अपने ट्वीट में उनका कहना था।
राष्ट्रवाद को रोग की संज्ञा तो प्रेमचंद ने दी थी: 'कोढ़' बताया था। राष्ट्रवाद 19वीं सदी में यूरोप में पनपा। बरबादी के दो-दो विश्वयुद्ध लड़े। राष्ट्रवाद की अवधारणा पर ही पाकिस्तान बना। संघ को भी राष्ट्रवाद भाता है। उग्र राष्ट्रवाद फासीवाद लाता है। इसके उदाहरण देखने को मिल रहे हैं। https://t.co/582WSTVUVI
— Om Thanvi (@omthanvi) May 23, 2019
ओम थानवी के ट्वीट का रिप्लाई देते हुए राहुल देव का कहना था
पाकिस्तान राष्ट्रवाद नहीं द्विराष्ट्रवाद की धर्माधारित और नकली अवधारणा से बना था। बांग्लादेश के निर्माण ने इस अवधारणा को रद्द कर दिया। मैं गांधी के हिन्दू-मुस्लिम-ईसाई समाविष्ट भारतीय राष्ट्रवाद को मानता हूं। उग्र राष्ट्रवाद उतना ही घातक है जितना उग्र साम्यवाद, उग्र माओवाद।
— राहुल देव Rahul Dev (@rahuldev2) May 23, 2019
उनका यह भी कहना था।
गांधी, नेहरू से लेकर स्वतंत्रता आंदोलन केे बड़े से बड़े नेता राष्ट्रवाद के भाव से अनुप्राणित रहे, राष्ट्र-राष्ट्रीयता के नाम पर संघर्षरत रहे। यूरोपीय राष्ट्रवाद के उदाहरण भारतीय संदर्भ में क्यों दिए जाने चाहिए जब दोनों समाजों-सभ्यताओं में बुनियादी भेद हैं?
— राहुल देव Rahul Dev (@rahuldev2) May 23, 2019
ओम थानवी ने राहुल देव की इस बात से असहमति जताई। उनका कहना था कि देशप्रेम व राष्ट्रवाद को एक करना उचित नहीं है और देशप्रेम की बात होनी चाहिए।
देश और राष्ट्र में फ़र्क़ है। Nation की धारणा गठन-संगठन-सत्ताप्रतिष्ठान की द्योतक है। देश में देश और देशवासियों की धड़कन का वास है। फ़र्क़ न करने पर ही तो सरकार-विरोध यानी राजद्रोह को देशद्रोह या ग़द्दारी ठहरा दिया गया था।
— Om Thanvi (@omthanvi) May 23, 2019
राहुल देव का कहना था कि मैं देश-राष्ट्र में कोई भेदभाव नहीं मानता हूं।
चलिए राष्ट्रवाद नहीं पसन्द तो देशवाद कह देते हैं। मैं खुद को भारतवादी कहता हूं। एक ही तत्व विचार रूप में राष्ट्रवाद है भाव रूप में राष्ट्रप्रेम। क्या देशप्रेमी लड़ते नहीं? क्या राष्ट्रवाद अनिवार्यत: अन्य-विरोधी, संकीर्ण होता है? नहीं। देश-राष्ट्र में कोई अनिवार्य भेद नहीं मानता।
— राहुल देव Rahul Dev (@rahuldev2) May 23, 2019
राहुल देव के ट्वीट का जवाब देते हुए ओम थानवी का यह भी कहना था।
देश और राष्ट्र में फ़र्क़ है। Nation की धारणा गठन-संगठन-सत्ताप्रतिष्ठान की द्योतक है। देश में देश और देशवासियों की धड़कन का वास है। फ़र्क़ न करने पर ही तो सरकार-विरोध यानी राजद्रोह को देशद्रोह या ग़द्दारी ठहरा दिया गया था।
— Om Thanvi (@omthanvi) May 23, 2019
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