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नए दौर में मीडिया और पत्रकारों को समझनी होगी यह बात: शहजाद पूनावाला
‘गवर्नेंस नाउ’ के एमडी कैलाशनाथ अधिकारी के साथ बातचीत में राजनीतिक विश्लेषक शहजाद पूनावाला ने नए दौर की पत्रकारिता पर अपने विचार रखे।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 5 years ago
मीडिया पर तीखा हमला बोलते हुए राजनीतिक विश्लेषक शहजाद पूनावाला का कहना है कि मीडिया का समय अब समाप्त हो चुका है और आज की तारीख में जिस व्यक्ति के पास सोशल मीडिया अकाउंट है और स्मार्टफोन है, वह पत्रकार हो सकता है।
‘गवर्नेंस नाउ’ (Governance Now) के एमडी कैलाशनाथ अधिकारी के साथ एक बातचीत में शहजाद पूनावाला का कहना था, ‘सोशल मीडिया के लोकतांत्रिक होने और इसका विस्तार होने के साथ ही आजकल एक नई प्रकार की पत्रकारिता उभर रही है, जहां कोई भी व्यक्ति फोटो ले सकता है, स्टोरी लिख सकता है और सीधे इसे पोस्ट कर सकता है।’
पब्लिक पॉलिसी प्लेटफॉर्म पर ‘विजिनरी टॉक सीरीज’ (Visionary Talk series) के तहत होने वाले इस वेबिनार के दौरान शहजाद पूनावाला ने कहा, ‘पत्रकारों और मीडिया को समझना चाहिए कि पत्रकारिता आजकल लोकतांत्रिक और डायनिमिक हो गई है। अब यह किसी विशेष विचारधारा, पार्टी या परिवार से अधिक जुड़ी नहीं है, जिस तरह से पिछले 70 वर्षों से होता रहा है। आजकल तो जिस व्यक्ति के हाथ में स्मार्टफोन है और उसका सोशल मीडिया अकाउंट है, वह पत्रकार है।’
एक मीडिया हाउस पर निशाना साधते हुए पूनावाला का कहना था, ‘उनके पत्रकारों के संबंध सरकार के साथ काफी गहरे होते थे और वे अपने फोन पर कैबिनेट के गठन का फैसला करते थे। आजकल इन लोगों के पास इस तरह की पावर नहीं है। आजकल कोई इन्हें नहीं पहचानता, क्योंकि ये लोग एक खास परिवार के लिए प्रोपेगैंडा कर रहे थे। अब इस तरह की पत्रकारिता खत्म हो चुकी है।’
इस बातचीत के दौरान भारत के कोविड टीकाकरण अभियान के बारे में पूनावाला का कहना था, ‘शुरू में स्वास्थ्य संकट से निपटने का राजनीतिकरण किया गया था। पहले प्रधानमंत्री से सवाल किया गया कि उन्होंने लॉकडाउन क्यों नहीं लगाया और लॉकडाउन लगाने के बाद उन्होंने कहना शुरू कर दिया कि लॉकडाउन ने अर्थव्यवस्था को नष्ट कर दिया है और प्रवासियों को घर जाने की अनुमति देने की मांग करने लगे। जब प्रवासियों को घर भेजा गया तो ये लोग सवाल उठाने लगे कि संक्रमण के खतरे के बीच प्रवासियों को घर क्यों भेजा गया। जब सरकार ने देश मे अनलॉक करने का फैसला लिया तो इन लोगों ने तब भी सवाल उठाए।’
पूनावाला के अनुसार, ‘इसके बाद इन लोगों ने कहना शुरू कर दिया कि जब यूके और यूएस में वैक्सीन आ गई है तो भारत ने अभी तक इसे क्यों नहीं बनाया है। जब भारत में वैक्सीन आई तो उन्होंने कहा कि यह भाजपा की वैक्सीन है और व्यक्ति को नपुंसक बना देती है और पूछा कि पीएम को वैक्सीन क्यों नहीं लग रही है। क्या महामारी और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर राजनीति की जा सकती है? कोविद -19 संकट से निपटने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दुनिया भर में तारीफ हो रही है। प्रधानमंत्री ने साफ कर दिया है कि पहले चरण में फ्रंटलाइन वर्कर्स को वैक्सीन दी जाएगा, ऐसा कर उन्होंने पात्रता के वीवीआईपी कल्चर को समाप्त कर दिया है।’
उन्होंने कहा, ‘यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जब वह राष्ट्रवाद की बात करते हैं या जवानों का सम्मान करते हैं तो उन्हें मोदी समर्थक माना जाता है। विपक्ष को यह सोचना और तय करना होगा कि अगर कोई राष्ट्रवाद की बात करता है तो उसे किसी विशेष राजनीतिक दल से क्यों जोड़ा जाना चाहिए?’
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