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मीडिया में हाथरस पीड़िता की तस्वीर छापने पर रोक लगाने की सुनवाई से SC का इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने हाथरस कांड मामले में दायर उस याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है, जिसमें मीडिया में हाथरस पीड़िता की फोटो छापने पर सवाल उठाया गया था
समाचार4मीडिया ब्यूरो 5 years ago
सुप्रीम कोर्ट ने हाथरस कांड मामले में दायर उस याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है, जिसमें मीडिया में हाथरस पीड़िता की फोटो छापने पर सवाल उठाया गया था और बलात्कार और गंभीर चोटों से संबंधित कानूनों में सुधार की मांग की गई थी। कोर्ट ने कहा कि हम कानून पर कानून नहीं बना सकते है और याचिकाकर्ता मामले पर सरकार से निवेदन कर सकता है।
याचिका में यौन हिंसा के मामलों की सुनवाई में देरी का मुद्दा भी उठाया गया। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि पीड़िता की तस्वीर छापी गई। जस्टिस एनवी रमना की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने मामले की सुनवाई की। इस बेंच में जस्टिस सूर्यकांत और अनिरुद्ध बोस भी शामिल हैं। बेंच ने कहा कि इन मुद्दों का कानून से कोई लेना-देना नहीं है। लोग ऐसी चीजें करना चाहते हैं। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार है। इसके लिए पर्याप्त कानून है लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि ऐसी घटनाएं होती हैं।
बेंच ने कहा, हम कानून पर कानून नहीं बना सकते। यहां कानून बनाने के लिए अदालत का विवेक सही नहीं होगा। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता सरकार का प्रतिनिधित्व कर सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम याचिकाकर्ता के इस मामले को हमारे संज्ञान में लाने के प्रयासों की सराहना करते हैं लेकिन हम इस मामले में कानून नहीं बना सकते। कोर्ट ने कहा कि हम उम्मीद करते हैं और विश्वास करते हैं कि प्रतिवादी इस पर गौर करेंगे।
शीर्ष अदालत ने 27 अक्टूबर को कहा था कि हाथरस मामले में सीबीआई जांच की निगरानी इलाहाबाद उच्च न्यायालय करेगा और सीआरपीएफ पीड़िता के परिवार और गवाहों को सुरक्षा मुहैया कराएगा। न्यायालय ने अक्टूबर में कुछ याचिकाओं पर फैसला सुनाया था जिसमें घटना और अंतिम संस्कार के तौर तरीकों को लेकर चिंता व्यक्त की गई थी।
आपको बता दें कि 19 सितंबर को हाथरस में चार आरोपियों ने 19 वर्षीय दलित युवती के साथ कथित रूप से सामूहिक बलात्कार किया गया था। इसके बाद इलाज के दौरान 29 सितंबर को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में उसकी मृत्यु हो गई थी। इसके बाद उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा कथित तौर पर उसके माता-पिता की सहमति के बिना रात में उसका दाह संस्कार कर दिया था, जिसके बाद देश में इस मामले को लेकर काफी आक्रोश फैल गया था। वहीं पुलिस अधिकारियों का कहना है कि परिवार की इच्छा के मुताबिक ही अंतिम संस्कार किया गया था।
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