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वरिष्ठ पत्रकार विनोद दुआ को सुप्रीम कोर्ट से मिली ये बड़ी राहत
वरिष्ठ पत्रकार विनोद दुआ को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। बीजेपी नेता श्याम ने विभिन्न धाराओं के तहत दुआ के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 4 years ago
वरिष्ठ पत्रकार विनोद दुआ को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने विनोद दुआ के खिलाफ शिमला में दर्ज राजद्रोह का मुकदमा खारिज करने का आदेश दिया है। दुआ का कहना था कि यू-ट्यूब चैनल में केंद्र की आलोचना के चलते उन्हें परेशान किया जा रहा है।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने पत्रकार विनोद दुआ के खिलाफ उनके एक यू-ट्यूब कार्यक्रम को लेकर हिमाचल प्रदेश में भाजपा के एक स्थानीय नेता द्वारा राजद्रोह और अन्य अपराधों के आरोप में दर्ज कराई गई प्राथमिकी निरस्त करने के अनुरोध वाली याचिका पर गुरुवार को फैसला सुनाया।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में प्राथमिकी और कार्यवाही को रद्द करते हुए कहा कि केदार नाथ सिंह के मामले में उसके 1962 के फैसले के अनुसार ही प्रत्येक पत्रकार की रक्षा की जाएगी।
बता दें कि बीते साल 6 अक्टूबर को न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित और न्यायमूर्ति विनीत सरन की पीठ ने अपना फैसला सुरक्षित रखा था, जिसके बाद आज उन्होंने फैसला सुनाया।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने विनोद दुआ की दूसरी प्रार्थना को खारिज कर दिया, जिसमें 10 साल या उससे अधिक के कई पत्रकारों के खिलाफ लगाए गए राजद्रोह के आरोपों की जांच के लिए प्रत्येक राज्य में एक उच्च स्तरीय समिति गठित करने के लिए कोर्ट से निर्देश देने की मांग की गई थी।
अपनी इस अपील में उन्होंने कहा था कि जब तक गठित की गई उच्च स्तरीय समिति अनुमति नहीं दे देती, तब तक पत्रकारिता का 10 साल से अधिक का अनुभव रखने वाले किसी मीडियाकर्मी के खिलाफ कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की जा सकती। पीठ ने कहा कि दूसरी प्रार्थना के संदर्भ में कोई भी भरोसा विधायिका के क्षेत्र का अतिक्रमण होगा।
बता दें कि दुआ के खिलाफ उनके यू-ट्यूब कार्यक्रम के संबंध में छह मई को शिमला के कुमारसेन थाने में बीजेपी नेता श्याम ने राजद्रोह, सार्वजनिक उपद्रव मचाने, मानहानिकारक सामग्री छापने आदि के आरोप में भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई थी। श्याम ने आरोप लगाया था कि दुआ ने अपने यू-ट्यूब शो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर वोट पाने की खातिर 'मौत और आतंकी हमलों' का इस्तेमाल करने के आरोप लगाए थे।
न्यायमूर्ति यू.यू. ललित और न्यायमूर्ति विनीत सरन की पीठ ने पिछले साल छह अक्टूबर को दुआ, हिमाचल प्रदेश सरकार और मामले में शिकायतकर्ता की दलीलें सुनने के बाद याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया था। कोर्ट ने कहा था कि दुआ को इस मामले के संबंध में हिमाचल प्रदेश पुलिस द्वारा पूछे जा रहे किसी भी पूरक सवाल का जवाब देने की जरूरत नहीं है। इससे पहले, कोर्ट ने पिछले साल 14 जून को अप्रत्याशित सुनवाई करते हुए विनोद दुआ को अगले आदेश तक गिरफ्तारी से संरक्षण प्रदान कर दिया था लेकिन उसने उनके खिलाफ चल रही जांच पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था।
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