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सुप्रीम कोर्ट ने कुछ इस अंदाज में ‘कठघरे’ में खड़ी की प्रेस की स्वतंत्रता
सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी और आरोपितों द्वारा याचिका वापस लेने के बाद न्यूज पोर्टल के खिलाफ मुकदमा चलाने का रास्ता साफ
समाचार4मीडिया ब्यूरो 6 years ago
गृहमंत्री अमित शाह के बेटे जय शाह के खिलाफ आपत्तिजनक आर्टिकल पब्लिश करने के मामले में न्यूज पोर्टल ‘द वायर’ (The Wire) के संपादक और पत्रकार के खिलाफ मानहानि का मुकदमा चलेगा। मानहानि के केस को निरस्त करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई याचिका को पत्रकार रोहिणी सिंह ने वापस ले लिया है। इस बारे में रोहिणी सिंह के वकील कपिल सिब्बल ने कोर्ट से कहा कि वे मानहानि केस में ट्रायल का सामना करना चाहती हैं।
लगभग डेढ़ साल तक सुप्रीम कोर्ट में लंबित रहने के बाद मानहानि के केस को निरस्त करने वाली याचिका को वापस लेने की अनुमति देते हुए कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी भी की। सुप्रीम कोर्ट का कहना था कि प्रेस की स्वतंत्रता सर्वोच्च है, लेकिन यह एकतरफा नहीं हो सकती और पीत पत्रकारिता (Yellow Journalism) नहीं होनी चाहिये।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि न्यूज पोर्टल किसी व्यक्ति का पक्ष जानने के लिये प्रतिक्रिया मांगने के बाद 5-6 घंटे भी इंतजार नहीं करते हैं और आर्टिकल पब्लिश कर देते हैं। न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा, न्यायमूर्ति एमआर शाह और न्यायमूर्ति बीआर गवई की पीठ का कहना था कि जिस तरह से देश में पत्रकारिता हो रही है, उससे हाल के समय में न्यायपालिका को काफी कुछ झेलना पड़ा है। पीठ ने कहा कि उनके खिलाफ मुकदमे की सुनवाई सक्षम अदालत तेजी से पूरा करेगी।
याचिका वापस लेने की अनुमति देते हुए पीठ ने कहा कि वह इस टिप्पणी के साथ मामले का निपटारा कर रही है कि ‘द वायर’ ने प्रतिक्रिया मांगने के 12 घंटे के भीतर जवाब आने से पहले ही आर्टिकल प्रकाशित करके शाह की छवि धूमिल की।
इस बारे में न्यूज पोर्टल के संस्थापक संपादकों में से एक सिद्धार्थ वरदराजन का कहना है, ‘‘मुकदमे में इन चीजों से लड़कर हम साक्ष्यों के जरिये साफ तौर पर साबित करेंगे कि हमने हर पत्रकारीय मानकों का पूरी सावधानी से पालन किया और हमने सिर्फ उसी चीज को पब्लिश किया, जिसका हम बचाव कर सकते हैं।’
गौरतलब है कि ‘द वायर’ ने गुजरात चुनाव के पहले 2014 में मोदी सरकार बनने के बाद जय शाह की एक कंपनी में कई गुना ज्यादा लेन-देन की न्यूज पब्लिश की थी। इसके बाद जय शाह ने पत्रकार रोहिणी सिंह, न्यूज पोर्टल के संस्थापक संपादक सिद्धार्थ वर्द्धराजन, सिद्धार्थ भाटिया और एमके वेणु, प्रबंध संपादक मोनोबिना गुप्ता और ‘द वायर’ का प्रकाशन करने वाली फाउण्डेशन फार इंडिपेन्डेन्ट जर्नलिज्म के खिलाफ अदालत में मानहानि का मुकदमा दायर किया था।
अदालत ने शुरूआती सुनवाई में आरोपों को सही पाते हुए केस चलाने का फैसला किया था, लेकिन इससे बचने के लिए सभी आरोपितों ने अहमदाबाद हाई कोर्ट में केस को रद्द करने की गुहार लगाई थी। अहमदाबाद हाई कोर्ट में मानहानि के आरोपों को सही मानते हुए केस चलाने की इजाजत दे दी थी। हाई कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ सभी आरोपित सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। लेकिन अब याचिका वापस लेने के बाद उनके खिलाफ निचली अदालत में सुनवाई शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है।
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