आज राजकुमार रेमल्ली का जन्मदिन है। यह मौका उनके तीन दशक से ज्यादा लंबे प्रोफेशनल सफर और भारत की मीडिया-ऐडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री में आए बदलावों को देखने का भी है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
आज राजकुमार रेमल्ली का जन्मदिन है। यह मौका सिर्फ उनकी निजी जिंदगी के एक और पड़ाव को सेलिब्रेट करने का नहीं, बल्कि उनके उस प्रोफेशनल सफर को देखने का भी है, जो भारत के मीडिया और ऐडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री में हुए बदलावों की कहानी भी बताता है।
प्रिंट और टेलीविजन से लेकर डिजिटल प्लेटफॉर्म, प्रोग्रामेटिक एडवरटाइजिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तक, रेमल्ली ने तीन दशकों से ज्यादा समय टीम बनाने, रेवेन्यू बढ़ाने और नए अवसर तलाशने में बिताए हैं। उनके करियर की खास बात यह रही है कि उन्होंने समय के साथ खुद को लगातार बदला, लेकिन बिजनेस की बुनियादी समझ, पारदर्शिता और मापे जा सकने वाले नतीजों पर अपना फोकस बनाए रखा।
रेमल्ली ने अपने प्रोफेशनल करियर की शुरुआत 1990 के दशक की शुरुआत में Modi Xerox से की थी। यहां उन्होंने Territory Sales Manager के तौर पर काम किया। इस भूमिका ने उन्हें सेल्स, कस्टमर रिलेशनशिप और मार्केट डेवलपमेंट की बारीकियां समझने का मौका दिया। यही स्किल्स आगे चलकर उनके पूरे करियर का अहम हिस्सा बनीं।
मीडिया बिजनेस में उनकी बड़ी एंट्री 1995 में हुई, जब उन्होंने The Times of India जॉइन किया। यहां करीब पांच साल के कार्यकाल के दौरान उन्होंने उत्तर भारत में Delhi Times की लॉन्चिंग में भूमिका निभाई। यह सप्लीमेंट आगे चलकर अखबार की सिटी-केंद्रित पेशकश का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बना। उन्होंने Times Card की लॉन्चिंग में भी योगदान दिया, जो The Times of India और Citibank की को-ब्रैंडेड क्रेडिट कार्ड पहल थी।
2001 में रेमल्ली Hindustan Times में Deputy General Manager के तौर पर शामिल हुए। उन्होंने दो साल तक दिल्ली में कॉरपोरेट सेल्स की जिम्मेदारी संभाली और इसके बाद मुंबई बिजनेस की कमान संभाली। इस भूमिका ने उन्हें भारत के दो सबसे महत्वपूर्ण विज्ञापन बाजारों में काम करने का अनुभव दिया और प्रिंट मीडिया इंडस्ट्री की कारोबारी गतिविधियों को समझने का मौका भी मिला।
Times Business Solutions में Regional Manager—West के तौर पर काम करने के बाद रेमल्ली ने 2006 में Magicbricks.com जॉइन किया। यहां उन्होंने National Sales Head की जिम्मेदारी संभाली। उस समय भारत का डिजिटल क्लासीफाइड्स मार्केट अभी शुरुआती दौर में था। रेमल्ली ने सेल्स टीम को शुरुआत से तैयार किया, बड़े रेवेन्यू टारगेट तय किए और प्लेटफॉर्म के कमर्शियल ऑपरेशंस को मजबूत करने में मदद की।
इसके बाद उनके करियर का अगला पड़ाव टेलीविजन रहा। मई 2008 से जून 2010 तक उन्होंने NDTV में National Sales Head के तौर पर काम किया। इस भूमिका के साथ उनके मीडिया अनुभव में ब्रॉडकास्ट सेल्स और टेलीविजन मॉनेटाइजेशन भी जुड़ गया।
2010 में रेमल्ली ने उद्यमिता की दिशा में कदम बढ़ाया और Alchemist Marketing & Talent Solutions की को-फाउंडिंग की। वर्षों के दौरान कंपनी ने मार्केटिंग, मीडिया, टैलेंट और टेक्नोलॉजी के बीच काम किया है। Alchemist के साथ उनकी लंबी पारी इस बात को दिखाती है कि वह पारंपरिक कॉरपोरेट भूमिकाओं से आगे बढ़कर अपनी इंडस्ट्री समझ के आधार पर एक संगठन तैयार करना चाहते थे।
उनके करियर का सबसे नया और शायद सबसे बड़ा बदलाव 2025 में BidVid की लॉन्चिंग के साथ आया। इसके फाउंडर के तौर पर रेमल्ली अब मीडिया बिजनेस को मैनेज करने से आगे बढ़कर ऐसी टेक्नोलॉजी तैयार करने की दिशा में काम कर रहे हैं, जो विज्ञापन की एक पुरानी समस्या को हल करने की कोशिश करती है—मीडिया खरीदारी में होने वाली अक्षमता।
BidVid आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग का इस्तेमाल कर डिजिटल एडवरटाइजिंग बिड्स को रियल टाइम में ऑप्टिमाइज करता है। इसकी टेक्नोलॉजी को इस तरह तैयार किया गया है कि यह किसी विज्ञापनदाता के मौजूदा कैंपेन एनवायरनमेंट के भीतर काम कर सके। इसके लिए ब्रैंड के क्रिएटिव, ऑडियंस चॉइस या पसंदीदा इन्वेंट्री में बदलाव करने की जरूरत नहीं होती। इसका फोकस विज्ञापनदाताओं को वही मीडिया ज्यादा कुशल तरीके से खरीदने में मदद करना है, जबकि उनके पास विजिबिलिटी और कंट्रोल बना रहे।
प्लेटफॉर्म के मुताबिक, अलग-अलग कैंपेन में मीडिया-एफिशिएंसी में 20 से 50 फीसदी तक सुधार देखने को मिला है। इसके काम का विस्तार Marico, Jyothy Labs, Zouk, Glenmark Pharma और Unilever जैसे ब्रैंड्स तक हुआ है। कंपनी भारत के अलावा दूसरे बाजारों में भी काम कर रही है।
BidVid ने भारत, Southeast Asia, Australia और Middle East में अपनी मौजूदगी स्थापित की है। अब कंपनी United States, Canada और Europe की ओर भी विस्तार की तैयारी कर रही है। इसके साथ ही Amazon और तेजी से बढ़ते quick-commerce ecosystem के लिए भी समाधान विकसित किए जा रहे हैं।
रेमल्ली का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मीडिया बायर्स की जगह नहीं लेगा। इसके बजाय AI उन्हें बार-बार किए जाने वाले काम को कम करने, तेजी से फैसले लेने और अक्षमताओं को दूर करने में मदद करेगा। यह सोच उनके पूरे करियर में दिखाई देने वाले संतुलन को भी दर्शाती है—टेक्नोलॉजी को अपनाना, लेकिन इंसानी विशेषज्ञता, भरोसे और जवाबदेही को नजरअंदाज नहीं करना।
उनके प्रोफेशनल सफर की सबसे खास बात खुद को लगातार नए रूप में ढालने की क्षमता है। उन्होंने ऑफिस टेक्नोलॉजी बेचने से शुरुआत की, फिर प्रिंट मीडिया बिजनेस खड़ा करने और उसे आगे बढ़ाने का काम किया, डिजिटल और टेलीविजन सेल्स की जिम्मेदारी संभाली, एक मार्केटिंग कंपनी की को-फाउंडिंग की और आखिर में AI आधारित AdTech प्लेटफॉर्म तैयार किया।
उनके करियर का हर बदलाव उनकी जिज्ञासा, बदलती परिस्थितियों के मुताबिक खुद को ढालने की क्षमता और नए अध्याय की शुरुआत करने के साहस को दिखाता है।
आज जब राजकुमार रेमल्ली अपने जीवन का एक और साल पूरा कर रहे हैं, उनका सफर यह याद दिलाता है कि मीडिया इंडस्ट्री में लंबे समय तक बने रहना सिर्फ इस इंडस्ट्री का हिस्सा बने रहने का नाम नहीं है। असली बात लगातार सीखते रहने, समय के साथ खुद को बदलने और आने वाले समय के लिए कुछ नया तैयार करने में है।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) मीडिया, ब्रॉडकास्टिंग और क्रिएटिव इकोनॉमी के क्षेत्र में केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल बनाने पर जोर दे रहा है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) मीडिया, ब्रॉडकास्टिंग और क्रिएटिव इकोनॉमी के क्षेत्र में केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल बनाने पर जोर दे रहा है। मंगलवार को हुई एक राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में केबल ऑपरेटर्स के लिए राइट ऑफ वे (RoW) व्यवस्था लागू करने, WAVES 2027 की तैयारियों और फिल्मों की शूटिंग व लाइव इवेंट्स के लिए सिंगल-विंडो परमिशन सिस्टम अपनाने जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हुई।
मंत्रालय ने नई दिल्ली में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सूचना एवं जनसंपर्क विभागों के सचिवों की नेशनल कॉन्फ्रेंस आयोजित की। इसमें वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। बैठक में केंद्र सरकार की विभिन्न पहलों को लागू करने और भारत की क्रिएटिव इकोनॉमी की ग्रोथ को तेज करने के लिए राज्य स्तर पर बेहतर तालमेल की संभावनाओं पर चर्चा की गई।
MIB के सचिव चंचल कुमार ने कॉन्फ्रेंस की अध्यक्षता की। उन्होंने भारत की क्रिएटिव क्षमता का बेहतर इस्तेमाल करने, पब्लिक कम्युनिकेशन को मजबूत बनाने और क्षेत्रीय स्तर पर क्रिएटिव इकोसिस्टम तैयार करने के लिए केंद्र और राज्यों के बीच ज्यादा मजबूत और व्यवस्थित सहयोग की जरूरत बताई।
यह चर्चा ऐसे समय में हुई है जब सरकार क्रिएटिव इकोनॉमी या "ऑरेंज इकोनॉमी" को रोजगार, निवेश, उद्यमिता और भारत की ग्लोबल सॉफ्ट पावर में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले क्षेत्र के रूप में तेजी से आगे बढ़ा रही है।
केबल ऑपरेटर्स के लिए RoW मैकेनिज्म पर फोकस
कॉन्फ्रेंस में जिन अहम मुद्दों पर चर्चा हुई, उनमें राज्य सरकारों की ओर से केबल ऑपरेटर्स के लिए राइट ऑफ वे (RoW) मैकेनिज्म लागू करना भी शामिल रहा।
केबल टीवी इंडस्ट्री के लिए नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर बिछाने और उसकी देखभाल के लिए RoW परमिशन काफी महत्वपूर्ण हैं। राज्य और केंद्र सरकार के बीच बेहतर तालमेल से प्रक्रियाओं में आने वाली रुकावटों को दूर करने और केबल नेटवर्क के विस्तार को ज्यादा आसान और व्यवस्थित बनाने में मदद मिल सकती है।
यह चर्चा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत का ब्रॉडकास्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से व्यापक डिजिटल कनेक्टिविटी इकोसिस्टम से जुड़ रहा है। राज्य स्तर पर परमिशन की प्रक्रिया को आसान बनाने से केबल ऑपरेटर्स के लिए कारोबार करना आसान हो सकता है। साथ ही इससे डिस्ट्रीब्यूशन इंफ्रास्ट्रक्चर के लगातार विस्तार और आधुनिकीकरण को भी बढ़ावा मिल सकता है।
WAVES 2027 के रोडमैप को लेकर केंद्र-राज्य स्तर पर जोर
WAVES 2027 का रोडमैप भी कॉन्फ्रेंस में चर्चा का एक बड़ा मुद्दा रहा। मंत्रालय सरकार की इस प्रमुख पहल में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ज्यादा भागीदारी चाहता है। इसका उद्देश्य भारत की मीडिया, एंटरटेनमेंट और क्रिएटिव इंडस्ट्री के लिए एक ग्लोबल प्लेटफॉर्म तैयार करना है।
मंत्रालय ने WAVES Bazaar को मजबूत करने पर भी चर्चा की। इसमें क्रिएटर्स, स्टार्टअप्स और क्रिएटिव इकोनॉमी से जुड़े दूसरे लोगों के लिए मार्केट तक पहुंच बेहतर बनाने पर जोर दिया गया।
मंत्रालय के मुताबिक WAVES 2027, WAVES Bazaar, WaveX और Create in India Challenges जैसे प्लेटफॉर्म देश के अलग-अलग हिस्सों के क्रिएटर्स और स्टार्टअप्स को बाजार, निवेशकों, टेक्नोलॉजी और इंटरनेशनल पार्टनरशिप तक पहुंच उपलब्ध करा सकते हैं।
राज्यों की ज्यादा भागीदारी पर जोर यह दिखाता है कि सरकार मानती है कि भारत की क्रिएटिव इकोनॉमी को विकसित करने के लिए सिर्फ एक राष्ट्रीय मॉडल पर्याप्त नहीं है।
चंचल कुमार ने कहा कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की अपनी अलग सांस्कृतिक ताकत, संस्थागत क्षमता और क्षेत्रीय प्रतिभाएं हैं। इनका इस्तेमाल उनकी संबंधित क्रिएटिव इकोनॉमी को विकसित करने के लिए किया जाना चाहिए।
इसी वजह से सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर, कारोबार करने में आसानी, क्षमता निर्माण, क्षेत्रीय कंटेंट और स्थानीय क्रिएटिव इकोसिस्टम के विकास जैसे क्षेत्रों में केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग बढ़ाने पर काम कर रही है।
सिंगल-विंडो फिल्म परमिशन भी एजेंडे में
कॉन्फ्रेंस में फिल्मों की शूटिंग और लाइव इवेंट्स से जुड़ी परमिशन के लिए Indian Cine Hub (ICH) को सिंगल-विंडो पोर्टल के रूप में अपनाने पर भी चर्चा हुई।
मंत्रालय ने Indian Cine Hub और Film Facilitation Office (FFO) के पोर्टल्स के बीच टू-वे इंटीग्रेशन पर भी चर्चा की। इसका उद्देश्य फिल्म शूटिंग और इवेंट्स को आसान बनाने वाली अलग-अलग व्यवस्थाओं के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना और परमिशन की प्रक्रिया को ज्यादा प्रभावी बनाना है।
परमिशन की ज्यादा व्यवस्थित व्यवस्था भारत के लिए आगे और महत्वपूर्ण हो सकती है, क्योंकि देश घरेलू और इंटरनेशनल प्रोडक्शंस को आकर्षित करने के साथ-साथ लाइव-इवेंट्स इकोनॉमी को भी बढ़ाना चाहता है।
मंत्रालय फिल्म सेक्टर में कारोबार करना आसान बनाने के लिए ICH को एक प्लेटफॉर्म के रूप में भी आगे बढ़ा रहा है। इसमें राज्य सरकारों की भूमिका काफी अहम है, क्योंकि फिल्मों की शूटिंग के लिए जरूरी कई परमिशन स्थानीय और राज्य स्तर पर दी जाती हैं।
पब्लिक ब्रॉडकास्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का होगा विस्तार
पब्लिक सर्विस ब्रॉडकास्टिंग भी कॉन्फ्रेंस का एक प्रमुख फोकस रहा।
बैठक में पब्लिक सर्विस ब्रॉडकास्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के साथ-साथ कंटेंट को-प्रोडक्शन, राज्य विशेष प्रोग्रामिंग और पब्लिक आउटरीच को मजबूत करने पर चर्चा हुई।
मंत्रालय ने Press Information Bureau (PIB) के रीजनल ऑफिस, राज्य के सूचना एवं जनसंपर्क विभागों और दूरदर्शन व आकाशवाणी की क्षेत्रीय इकाइयों के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत भी बताई।
इसका उद्देश्य राज्य विशेष कंटेंट तैयार करना और पब्लिक कम्युनिकेशन से जुड़ी पहलों की पहुंच को बढ़ाना है।
रीजनल प्रोग्रामिंग पर जोर ऐसे समय में दिया जा रहा है जब भारत का मीडिया कंजम्पशन लैंडस्केप काफी विविध है। स्थानीय भाषाएं, क्षेत्रीय सांस्कृतिक पहचान और राज्यों से जुड़े मुद्दे ऑडियंस की भागीदारी और जुड़ाव तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
मंत्रालय ने कहा कि वह नए विचारों, राज्य स्तर से आने वाली पहलों और ऐसे पार्टनरशिप मॉडल के लिए तैयार है, जो पब्लिक कम्युनिकेशन और क्रिएटिव इकोनॉमी को मजबूत कर सकें।
Waves OTT पर यूजर-जेनरेटेड क्रिएटिव कंटेंट को बढ़ावा
कॉन्फ्रेंस में Waves OTT प्लेटफॉर्म पर यूजर-जेनरेटेड क्रिएटिव कंटेंट को बढ़ावा देने पर भी चर्चा हुई। इससे संकेत मिलता है कि सरकार पारंपरिक प्रोडक्शन हाउस और स्थापित मीडिया संस्थानों से आगे बढ़कर आम क्रिएटर्स को भी अपने डिजिटल कंटेंट इकोसिस्टम में शामिल करना चाहती है।
व्यक्तिगत क्रिएटर्स और क्षेत्रीय प्रतिभाओं की ज्यादा भागीदारी से प्लेटफॉर्म पर कंटेंट का दायरा बढ़ सकता है। साथ ही क्रिएटर्स को अपना काम दिखाने के लिए एक अतिरिक्त प्लेटफॉर्म भी मिल सकता है।
यूजर-जेनरेटेड कंटेंट को लेकर हुई चर्चा मंत्रालय के उस व्यापक उद्देश्य से भी जुड़ी है, जिसके तहत भारत की क्रिएटिव प्रतिभाओं को ऑडियंस और बाजार से जोड़ने वाले प्लेटफॉर्म तैयार किए जा रहे हैं।
लाइव इवेंट्स भी ग्रोथ का बड़ा क्षेत्र
लाइव-इवेंट्स सेक्टर भी अधिकारियों की चर्चा में शामिल रहा। मंत्रालय लाइव एंटरटेनमेंट और इवेंट्स के आसपास के इकोसिस्टम को मजबूत करना चाहता है।
ICH के जरिए सिंगल-विंडो मैकेनिज्म अपनाने से बड़े स्तर के इवेंट्स के लिए अलग-अलग परमिशन लेने की प्रक्रिया में आने वाली जटिलता को कम करने में मदद मिल सकती है।
कॉन्फ्रेंस में इस सेक्टर को सपोर्ट करने के लिए क्षमता निर्माण और संस्थागत स्तर पर बेहतर तालमेल पर भी चर्चा की गई।
पब्लिशिंग सेक्टर में डिजिटल बदलाव
कॉन्फ्रेंस में Press and Registration of Periodicals Act, 2023 के तहत Press Sewa Portal के जरिए डिजिटल फ्रेमवर्क की ओर बढ़ने की प्रक्रिया की भी समीक्षा की गई।
इस डिजिटल फ्रेमवर्क का उद्देश्य पीरियोडिकल्स के रजिस्ट्रेशन और रेगुलेटरी प्रक्रियाओं को आधुनिक बनाना और पुराने तरीकों पर निर्भरता को कम करना है।
राज्य के सूचना एवं जनसंपर्क विभागों में काम करने वाले अधिकारियों की क्षमता बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। मंत्रालय ने कहा कि Indian Institute of Mass Communication (IIMC) की सुविधाओं के जरिए ट्रेनिंग को और मजबूत किया जा सकता है।
कॉन्फ्रेंस में Samagra Shiksha फ्रेमवर्क के तहत राज्य सरकारों को किताबें उपलब्ध कराकर लाइब्रेरी को मजबूत करने पर भी चर्चा की गई।
राज्यों ने केंद्र से ज्यादा सहयोग की मांग की
राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकारियों ने मंत्रालय की अलग-अलग पहलों को लागू करने के दौरान अपने अनुभव और चिंताएं साझा कीं। राज्य स्तर पर क्षमता निर्माण को एक महत्वपूर्ण जरूरत के रूप में सामने रखा गया। राज्यों ने बेहतर कम्युनिकेशन, ज्यादा जुड़ाव और नियमित कॉन्फ्रेंस के जरिए केंद्र से ज्यादा सहयोग की मांग की।
कॉन्फ्रेंस में शामिल अधिकारियों ने भारत की ऑरेंज इकोनॉमी को मजबूत करने के लिए मंत्रालय के साथ ज्यादा करीब से काम करने की इच्छा भी जताई।
वहीं, चंचल कुमार ने क्रिएटिव इकोनॉमी की क्षमता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि संस्कृति, क्रिएटिविटी और कॉमर्स को साथ लाने वाली क्रिएटिव इकोनॉमी रोजगार पैदा करने, निवेश आकर्षित करने और वैश्विक स्तर पर भारत के प्रभाव को बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकती है।
यह कॉन्फ्रेंस मीडिया और क्रिएटिव इकोनॉमी से जुड़ी नीतियों के लिए केंद्र और राज्यों के बीच ज्यादा बेहतर तालमेल की दिशा में मंत्रालय की कोशिश को दिखाती है। WAVES, ICH और Waves OTT जैसे राष्ट्रीय प्लेटफॉर्म को राज्य स्तर के इंफ्रास्ट्रक्चर, प्रतिभाओं और प्रशासनिक व्यवस्थाओं से तेजी से जोड़ा जा रहा है।
अब सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन चर्चाओं को राज्य स्तर पर प्रभावी तरीके से लागू करने की होगी। खासकर फिल्म परमिशन, केबल इंफ्रास्ट्रक्चर, पब्लिक ब्रॉडकास्टिंग और क्रिएटर्स के लिए बाजार तक पहुंच जैसे क्षेत्रों में इन पहलों का असर जमीन पर दिखाई देना महत्वपूर्ण होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने तहलका के पूर्व एडिटर-इन-चीफ तरुण तेजपाल को दो हफ्ते के भीतर सरेंडर करने का निर्देश दिया है। उन्हें 22 सितंबर तक सरेंडर सर्टिफिकेट जमा करना होगा।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
तहलका (Tehelka) के पूर्व एडिटर-इन-चीफ तरुण तेजपाल (Tarun Tejpal) को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) से तत्काल राहत नहीं मिली है। अदालत ने उनकी उस मांग को स्वीकार नहीं किया, जिसमें उन्होंने सरेंडर करने से छूट देने की अपील की थी। कोर्ट ने उन्हें दो सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक, तेजपाल को 22 सितंबर तक सरेंडर करना होगा और इसके बाद आत्मसमर्पण का प्रमाण पत्र अदालत में जमा करना होगा। प्रमाण पत्र जमा होने के बाद ही मामले से जुड़ी आगे की कार्यवाही और सुनवाई का रास्ता आगे बढ़ेगा।
सुनवाई के दौरान तेजपाल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल (Kapil Sibal) ने कोर्ट से उनकी सरेंडर से छूट संबंधी इंटरलोक्यूटरी एप्लीकेशन (Interlocutory Application) को 31 अगस्त को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया था। उनकी ओर से दलील दी गई कि जब तक इस आवेदन पर सुनवाई नहीं होती, तब तक तेजपाल को आत्मसमर्पण से राहत दी जानी चाहिए।
गोवा सरकार (Goa Government) ने इस मांग का विरोध किया। सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता (Tushar Mehta) अदालत में पेश हुए। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के नियमों और पहले दिए गए फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि दोषी व्यक्ति को पहले अदालत के सामने सरेंडर करना जरूरी है।
सरकार की ओर से यह भी दलील दी गई कि यदि कोई दोषी आत्मसमर्पण नहीं करता है, तो उसकी अपील को तब तक सूचीबद्ध नहीं किया जा सकता, जब तक उसके साथ सरेंडर से छूट मांगने वाली अर्जी भी मौजूद न हो। सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार करते हुए तेजपाल को निर्धारित अवधि में आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया।
यह मामला 2013 में सामने आए रेप केस से जुड़ा है। इस मामले में गोवा की ट्रायल कोर्ट ने तरुण तेजपाल को बरी कर दिया था। इसके बाद गोवा सरकार ने उस फैसले को चुनौती देते हुए अपील दायर की थी।
मामले में 6 अगस्त को बॉम्बे हाई कोर्ट (Bombay High Court) की गोवा बेंच ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को पलट दिया। हाई कोर्ट ने तेजपाल को दोषी ठहराते हुए उन्हें 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई।
राहुल पाधगन ने InCred Financial Services में AVP – Corporate Communications के तौर पर नई जिम्मेदारी संभाली है। इससे पहले वह JM Financial से जुड़े थे।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
राहुल पाधगन (Rahul Padghan) ने InCred Financial Services में AVP – Corporate Communications के तौर पर नई पारी शुरू की है। उन्होंने लिंक्डइन पोस्ट के जरिए अपनी नई भूमिका की जानकारी साझा की।
पाधगन JM Financial Ltd से InCred Financial Services में आए हैं, जहां वह करीब दो साल तक AVP – Corporate Communications के पद पर कार्यरत रहे। इससे पहले वह blinkX के साथ भी AVP – Corporate Communications की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।
उनके करियर में HDFC Securities का भी महत्वपूर्ण अनुभव रहा है। वह कंपनी के साथ तीन साल से अधिक समय तक जुड़े रहे और इस दौरान कॉरपोरेट कम्युनिकेशन, कम्युनिकेशन स्ट्रैटेजी, राइटिंग और इससे जुड़े अन्य क्षेत्रों में काम किया।
पाधगन के पास कॉरपोरेट कम्युनिकेशन और रणनीतिक संचार का अनुभव है। InCred Financial Services में अपनी नई भूमिका के तहत वह कंपनी के कॉरपोरेट कम्युनिकेशन से जुड़े कार्यों और रणनीति की जिम्मेदारी संभालेंगे।
उनकी नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब वित्तीय सेवा क्षेत्र में कंपनियों के लिए मजबूत कॉरपोरेट कम्युनिकेशन और स्पष्ट ब्रांड पोजिशनिंग की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है।
गुजरात स्थित मीडिया कंपनी The Sandesh Limited ने वित्त वर्ष 2025-26 की अपनी 83वीं Annual Report जारी कर दी है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
गुजरात स्थित मीडिया कंपनी The Sandesh Limited ने वित्त वर्ष 2025-26 की अपनी 83वीं Annual Report जारी कर दी है। कंपनी की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनौतीपूर्ण कारोबारी माहौल के बावजूद वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी के ऑपरेशनल प्रदर्शन में मजबूती देखने को मिली। कंपनी का ऑपरेशंस से राजस्व 49.76% बढ़कर ₹437.82 करोड़ हो गया, जो पिछले वित्त वर्ष में ₹292.34 करोड़ था। हालांकि, मुनाफे में पिछले साल के मुकाबले कमी दर्ज की गई।
ऑपरेशनल रेवेन्यू में करीब 50% की बढ़ोतरी
कंपनी के स्टैंडअलोन आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में ऑपरेशंस से राजस्व ₹437.82 करोड़ रहा, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में यह ₹292.34 करोड़ था। इस तरह इसमें 49.76% की बढ़ोतरी हुई। कंपनी की कुल आय भी बढ़कर ₹456.06 करोड़ हो गई, जो पिछले वित्त वर्ष में ₹329.40 करोड़ थी।
हालांकि, कंपनी का EBITDA करीब ₹106.31 करोड़ रहा, जो पिछले वित्त वर्ष के ₹105.94 करोड़ से लगभग समान स्तर पर रहा। EBITDA मार्जिन 32.16% से घटकर 23.31% हो गया।
वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का टैक्स से पहले मुनाफा ₹97.18 करोड़ रहा, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह ₹98.99 करोड़ था। टैक्स के बाद कंपनी का मुनाफा यानी PAT ₹67.40 करोड़ रहा, जो पिछले साल के ₹77.46 करोड़ से कम है। PAT मार्जिन भी 26.50% से घटकर 15.40% रहा।
कंसोलिडेटेड आधार पर भी आय बढ़ी
कंपनी और उसकी सहायक कंपनी को मिलाकर कंसोलिडेटेड आधार पर वित्त वर्ष 2025-26 में ऑपरेशंस से राजस्व ₹439.70 करोड़ रहा, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह ₹294.18 करोड़ था।
कंसोलिडेटेड कुल आय ₹458.07 करोड़ रही, जो पिछले साल के ₹331.48 करोड़ से अधिक है। हालांकि, कंसोलिडेटेड PAT घटकर ₹65.84 करोड़ रहा, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में यह ₹77.12 करोड़ था। कंसोलिडेटेड PAT मार्जिन 26.21% से घटकर 14.97% हो गया।
शेयरधारकों को ₹5 प्रति शेयर डिविडेंड देने का प्रस्ताव
कंपनी के बोर्ड ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ₹10 फेस वैल्यू वाले प्रत्येक इक्विटी शेयर पर ₹5 का अंतिम डिविडेंड देने की सिफारिश की है। इस प्रस्ताव पर 15 सितंबर 2026 को होने वाली वार्षिक आम बैठक में शेयरधारकों की मंजूरी ली जाएगी।
कंपनी के मुताबिक, डिविडेंड के लिए कुल ₹3.78 करोड़ के भुगतान का प्रस्ताव है। अगर शेयरधारक इसे मंजूरी देते हैं तो रिकॉर्ड डेट 14 अगस्त 2026 तक रजिस्टर में दर्ज सदस्यों को इसका भुगतान किया जाएगा। कंपनी ने बताया है कि डिविडेंड का भुगतान 12 अक्टूबर 2026 या उससे पहले किया जाना प्रस्तावित है।
15 सितंबर को होगी वार्षिक आम बैठक
The Sandesh Limited की 83वीं वार्षिक आम बैठक 15 सितंबर 2026 को दोपहर 2 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग या अन्य ऑडियो-विजुअल माध्यम से होगी। बैठक में वित्त वर्ष 2025-26 के स्टैंडअलोन और कंसोलिडेटेड वित्तीय विवरणों को मंजूरी के लिए रखा जाएगा।
बैठक में डिविडेंड के प्रस्ताव के अलावा राहुल राजीवकुमार शाह को रोटेशन के आधार पर दोबारा निदेशक नियुक्त करने का प्रस्ताव भी रखा गया है।
फाल्गुनभाई पटेल की दोबारा नियुक्ति का प्रस्ताव
AGM में कंपनी के चेयरमैन & मैनेजिंग डायरेक्टर फाल्गुनभाई पटेल को पांच साल के लिए दोबारा चेयरमैन & मैनेजिंग डायरेक्टर नियुक्त करने का विशेष प्रस्ताव भी रखा गया है। प्रस्तावित कार्यकाल 1 अप्रैल 2027 से 31 मार्च 2032 तक रहेगा।
कंपनी ने प्रस्ताव में उनके लिए अधिकतम ₹7 करोड़ सालाना पारिश्रमिक की सीमा रखी है। इसके अलावा कंपनी की बोनस योजना के तहत परफॉर्मेंस बोनस, बोर्ड की मंजूरी के अनुसार वैरिएबल पेआउट और कंपनी के प्रदर्शन के आधार पर मुनाफे के प्रतिशत के रूप में कमीशन का प्रावधान भी प्रस्ताव में शामिल है। कमीशन कंपनी के नेट प्रॉफिट के 5% से अधिक नहीं होगा।
कंपनी के रिकॉर्ड के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में फाल्गुनभाई पटेल को ₹4.98 करोड़ का पारिश्रमिक और ₹19.50 लाख का पोस्ट-एम्प्लॉयमेंट बेनिफिट मिला। पिछले वित्त वर्ष में उनका पारिश्रमिक ₹3.74 करोड़ था।
पन्नाबेन पटेल के निदेशक पद पर बने रहने का प्रस्ताव
AGM में पन्नाबेन एफ. पटेल को नॉन एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर के रूप में जारी रखने का प्रस्ताव भी रखा गया है। कंपनी के मुताबिक, वह 17 अक्टूबर 2027 को 75 वर्ष की उम्र पूरी करेंगी। इसके बावजूद प्रस्ताव के जरिए उन्हें नॉन एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर के रूप में पद पर बने रहने की मंजूरी मांगी गई है।
₹1,500 करोड़ तक की उधारी के लिए संपत्तियों पर चार्ज बनाने का प्रस्ताव
कंपनी AGM में एक और महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखने जा रही है। इसके तहत बोर्ड को कंपनी की चल और अचल संपत्तियों तथा अन्य परिसंपत्तियों पर मॉर्गेज, चार्ज, प्लेज या हाइपोथिकेशन जैसी सुरक्षा बनाने की मंजूरी देने का प्रस्ताव है।
यह व्यवस्था बैंकों, NBFCs, वित्तीय संस्थानों और अन्य कर्जदाताओं से लिए जाने वाले कर्ज को सुरक्षित करने के लिए होगी। प्रस्ताव में इस तरह की उधारी की कुल सीमा ₹1,500 करोड़ रखी गई है।
लोन, गारंटी और निवेश की सीमा ₹2,000 करोड़ करने का प्रस्ताव
कंपनी ने Companies Act की धारा 186 के तहत लोन देने, गारंटी या सिक्योरिटी देने और दूसरी कंपनियों की सिक्योरिटीज में निवेश करने की सीमा बढ़ाकर ₹2,000 करोड़ करने का प्रस्ताव भी रखा है।
प्रस्ताव के मुताबिक, कंपनी के कुल लोन, निवेश, गारंटी और सिक्योरिटी की बकाया राशि किसी भी समय ₹2,000 करोड़ से ज्यादा नहीं होगी।
Sandesh Digital का The Sandesh में विलय करने की तैयारी
The Sandesh Limited की 100 फीसदी स्वामित्व वाली सहायक कंपनी Sandesh Digital Private Limited भी सालाना रिपोर्ट में महत्वपूर्ण रूप से सामने आई है। यह कंपनी डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए न्यूज, वीडियो और विज्ञापन उपलब्ध कराने के कारोबार में काम करती है।
वित्त वर्ष 2025-26 में Sandesh Digital का ऑपरेशंस से राजस्व ₹2.09 करोड़ रहा, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह ₹2.05 करोड़ था। हालांकि, इस दौरान कंपनी को टैक्स से पहले ₹1.65 करोड़ का घाटा हुआ। टैक्स के बाद घाटा ₹1.56 करोड़ रहा। पिछले वित्त वर्ष में टैक्स के बाद घाटा ₹33.51 लाख था।
इसी बीच, 5 अगस्त 2026 को The Sandesh के बोर्ड ने Sandesh Digital Private Limited का The Sandesh Limited में विलय करने की योजना को मंजूरी दे दी। हालांकि, इस विलय के लिए शेयरधारकों, NCLT, स्टॉक एक्सचेंज और अन्य संबंधित वैधानिक मंजूरियां लेनी होंगी। कंपनी के मुताबिक, विलय का मकसद आपसी कंपनी लेनदेन को कम करना, प्रशासनिक खर्च घटाना और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करना है।
डिजिटल मीडिया पर कंपनी का बढ़ता फोकस
कंपनी ने अपनी सालाना रिपोर्ट में डिजिटल मीडिया को भारत के मीडिया और मनोरंजन उद्योग के प्रमुख विकास क्षेत्रों में से एक बताया है। रिपोर्ट के मुताबिक, देश में इंटरनेट की पहुंच बढ़ने और डिजिटल कंटेंट की खपत में लगातार इजाफे के साथ डिजिटल विज्ञापन, सब्सक्रिप्शन, कंटेंट निर्माण और टेक्नोलॉजी आधारित सेवाओं में आगे भी बढ़ने की काफी संभावना है।
कंपनी का कहना है कि उसकी मोबाइल ऐप और डिजिटल एडिशन जैसी पहलें उसे प्रिंट और क्षेत्रीय मीडिया कारोबार के साथ-साथ डिजिटल क्षेत्र में भी इस ग्रोथ का फायदा उठाने की स्थिति में रखती हैं।
FY26 में CSR पर ₹1.92 करोड़ खर्च
वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी ने Corporate Social Responsibility यानी CSR गतिविधियों पर कुल ₹1.92 करोड़ खर्च किए। इसमें ₹25 लाख Old Age Home के संचालन और रखरखाव पर, ₹1.32 करोड़ मेडिकल उपकरणों की खरीद पर और ₹35 लाख बच्चों और महिलाओं के विकास से जुड़ी गतिविधियों पर खर्च किए गए।
ऑडिटर की रिपोर्ट में कोई प्रतिकूल टिप्पणी नहीं
Annual Report के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 के लिए Statutory Auditor की रिपोर्ट में कोई Qualification, Reservation, Disclaimer या Adverse Remark नहीं है। ऑडिटर्स ने यह भी बताया कि वित्त वर्ष के दौरान कंपनी में किसी तरह की धोखाधड़ी की जानकारी Audit Committee को रिपोर्ट नहीं की गई।
राजस्व बढ़ा, लेकिन मुनाफे पर दबाव
कुल मिलाकर, वित्त वर्ष 2025-26 में The Sandesh Limited के ऑपरेशंस से राजस्व में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि, खर्च बढ़ने और अन्य कारणों के चलते कंपनी के टैक्स के बाद मुनाफे में कमी आई।
अब कंपनी की 83वीं सालाना आम बैठक (AGM) में डिविडेंड, निदेशकों की नियुक्ति और दोबारा नियुक्ति, उधारी के लिए कंपनी की संपत्तियों पर सुरक्षा बनाने और निवेश व लोन की सीमा बढ़ाने जैसे कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर शेयरधारकों की मंजूरी ली जाएगी।
मीडिया सेल्स, ब्रैंडेड कंटेंट, स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप्स और बिजनेस डेवलपमेंट के क्षेत्र में मधुर शाही को 20 वर्षों से अधिक का अनुभव है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
‘टाइम्स नेटवर्क’ (Times Network) ने मधुर शाही को एसोसिएट वाइस प्रेजिडेंट–जोनल हेड, टाइम्स इन्फ्लुएंस–रेवेन्यू के पद पर नियुक्त किया है। मधुर शाही स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप्स, ब्रैंडेड कंटेंट, इंटीग्रेटेड मीडिया सॉल्यूशंस और आईपी-आधारित अवसरों के माध्यम से बिजनेस ग्रोथ को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी संभालेंगी। वह मुंबई से अपना कामकाज संभालेंगी और राजेश मदामपथ को रिपोर्ट करेंगी। मुंबई की बीसीए टीम तत्काल प्रभाव से उन्हें रिपोर्ट करेगी।
मीडिया सेल्स, ब्रैंडेड कंटेंट, स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप्स और बिजनेस डेवलपमेंट के क्षेत्र में मधुर शाही को 20 वर्षों से अधिक का अनुभव है। उन्होंने टेलीविजन, डिजिटल, प्रिंट, इवेंट्स और इंटीग्रेटेड मीडिया प्लेटफॉर्म्स में काम किया है।
मधुर शाही इससे पहले जून 2024 से एनडीटीवी नेटवर्क (NDTV Network) में ग्रुप लीड-वेस्ट के पद पर कार्यरत थीं। यहां वह पश्चिमी क्षेत्र के लिए कंटेंट स्ट्रैटेजी, इवेंट्स और महत्वपूर्ण ब्रैंड कोलैबोरेशंस से जुड़े कार्यों का नेतृत्व कर रही थीं। साथ ही ब्रैंडेड कंटेंट, स्पॉन्सरशिप, आईपी मोनेटाइजेशन और विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप्स की जिम्मेदारी भी उनके पास थी।
बता दें कि टाइम्स नेटवर्क में मधुर शाही की यह वापसी भी है। इससे पहले वह करीब नौ वर्षों तक बेनेट कोलमैन एंड कंपनी लिमिटेड (Bennett Coleman & Co. Ltd.) से जुड़ी रही हैं। यहां उन्होंने प्रमुख कैटेगरी और कॉरपोरेट अकाउंट्स को संभाला तथा इंटीग्रेटेड मीडिया बिजनेस और प्रमुख प्रॉपर्टीज को विकसित करने और विस्तार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
पूर्व में वह वर्ल्डवाइड मीडिया प्राइवेट लिमिटेड (Worldwide Media Pvt. Ltd.), वीजेएम मीडिया प्राइवेट लिमिटेड (VJM Media Pvt. Ltd.) और टीवी लाइव इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (T.V. Live India Pvt. Ltd.) में भी विभिन्न जिम्मेदारियां संभाल चुकी हैं।
मधुर शाही की नियुक्ति के बारे में टाइम्स नेटवर्क ने कहा है कि मीडिया इकोसिस्टम की उनकी मजबूत समझ, क्लाइंट्स और एजेंसियों के साथ गहरे संबंधों तथा ब्रैंडेड कंटेंट और इंटीग्रेटेड सॉल्यूशंस के क्षेत्र में उनके अनुभव से नेटवर्क को अपने अगले विकास चरण में लाभ मिलने की उम्मीद है।
गुंतास रंधावा ने Unilever में 17 साल की लंबी पारी के बाद कंपनी छोड़ दी है। वह हाल तक Hindustan Unilever में एक अहम जिम्मेदारी संभाल रही थीं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
गुंतास रंधावा (Guntas Randhawa) ने यूनिलीवर (Unilever) में करीब 17 साल बिताने के बाद कंपनी से विदाई ली है। वह हाल तक हिंदुस्तान यूनिलीवर (Hindustan Unilever) में India Head – Vitamins, Minerals and Supplements के पद पर थीं।
रंधावा ने 2009 में कंपनी के साथ Business Leadership Trainee के तौर पर अपना करियर शुरू किया था। करीब डेढ़ दशक से ज्यादा के कार्यकाल में उन्होंने कई वरिष्ठ पदों पर काम किया और अलग-अलग कारोबारों की जिम्मेदारियां संभालीं।
उनके अनुभव का दायरा हेल्थ और वेलनेस ब्रांड्स, सप्लीमेंट्स, प्रीमियम डिजिटल-फर्स्ट बिजनेस और P&L मैनेजमेंट तक रहा है। उन्होंने ब्रांड्स की लंबी अवधि की ग्रोथ और बिजनेस विस्तार से जुड़े कामों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कंपनी से विदाई की जानकारी साझा करते हुए रंधावा ने लिंक्डइन पोस्ट में अपने 17 साल के अनुभव को याद किया। उन्होंने लिखा कि यूनिलीवर ने उन्हें यह समझने के लिए 17 साल दिए कि कोई ब्रांड लोगों की यादों में अपनी छोटी-सी जगह कैसे बनाता है और उस जगह को बनाए रखने के लिए लगातार क्या करना पड़ता है।
कम्युनिकेशंस इंडस्ट्री में दो दशक से ज्यादा का सफर तय करने वाले कुणाल किशोर का जन्मदिन ऐसे समय आया है, जब Value 360 नए विकास चरण में है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
वैल्यू 360 (Value 360) के मैनेजिंग डायरेक्टर और चेयरमैन कुणाल किशोर (Kunal Kishore) आज अपना जन्मदिन मना रहे हैं। उनके लिए यह मौका इसलिए भी खास है क्योंकि दो दशक से ज्यादा लंबे कम्युनिकेशंस करियर के बाद उनके द्वारा खड़ा किया गया कारोबार अब एक नए दौर में प्रवेश कर चुका है।
कुणाल किशोर की अगुआई में बनी वैल्यू 360 कम्युनिकेशंस (Value 360 Communications) इस साल एनएसई इमर्ज (NSE Emerge) पर सूचीबद्ध हुई है। कंपनी के हालिया वित्तीय आंकड़े भी कारोबार के विस्तार के साथ उसकी बढ़ती लाभप्रदता की तस्वीर पेश करते हैं।
वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का रेवेन्यू 68.96 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले 26.4 फीसदी अधिक है। इसी अवधि में EBITDA 59.9 फीसदी बढ़कर 19.17 करोड़ रुपये पहुंच गया। कंपनी का टैक्स के बाद मुनाफा पहली बार 10 करोड़ रुपये के आंकड़े से ऊपर गया।
मई में हुई लिस्टिंग ने भी वैल्यू 360 के सफर में एक अहम अध्याय जोड़ा। कंपनी देश की पहली सूचीबद्ध इंटीग्रेटेड कम्युनिकेशंस कंसल्टेंसी बनी, जिससे पब्लिक मार्केट में पीआर बिजनेस के प्रदर्शन को मापने का एक नया नजरिया सामने आया।
किशोर का करियर ऐसे समय शुरू हुआ था, जब कम्युनिकेशंस इंडस्ट्री मुख्य रूप से पत्रकारों, मीडिया रिलेशन और कॉरपोरेट प्रतिष्ठा पर केंद्रित थी। अब डिजिटल, कंटेंट, इन्फ्लुएंसर्स और नए ब्रांड कम्युनिकेशन मॉडल इस क्षेत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। वर्ष 2020 में क्लैनकनेक्ट (ClanConnect) की शुरुआत भी इसी बदलाव की दिशा में एक कदम रही।
कंपनी की मौजूदा संरचना में भी बदलाव आया है। अतुल शर्मा (Atul Sharma) के सीईओ बनने के बाद किशोर की भूमिका अब रोजमर्रा के ऑपरेशनल फैसलों से आगे संगठन की व्यापक दिशा तय करने पर ज्यादा केंद्रित है। इसके साथ ही वह 2025-27 कार्यकाल के लिए पीआरसीएआई (PRCAI) के प्रेसिडेंट के तौर पर इंडस्ट्री से जुड़े मुद्दों में सक्रिय हैं।
ऐसे में कुणाल किशोर का यह जन्मदिन सिर्फ एक व्यक्तिगत पड़ाव नहीं, बल्कि उस कम्युनिकेशंस कारोबार के नए चरण का भी प्रतीक है, जिसे उन्होंने वर्षों की मेहनत से विकसित किया है।
प्रसेनजीत बसु को वोल्टास लिमिटेड में हेड-मार्केटिंग और कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस नियुक्त किया गया है। इससे पहले वह वोल्टास बेको में मार्केटिंग प्रमुख थे।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
वोल्टास लिमिटेड (Voltas Limited) ने प्रसेनजीत बसु (Prasenjit Basu) को हेड-मार्केटिंग और कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस नियुक्त किया है। नई भूमिका में वह कंपनी की मार्केटिंग रणनीति और कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस से जुड़े कार्यों का नेतृत्व करेंगे।
बसु इससे पहले वोल्टास बेको (Voltas Beko) में हेड-मार्केटिंग, प्रोडक्ट एंड ई-कॉमर्स के पद पर कार्यरत थे। वोल्टास बेको से पहले वह वोल्टास लिमिटेड में ही सीनियर जनरल मैनेजर-मार्केटिंग की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। मार्केटिंग और बिजनेस स्ट्रैटेजी के क्षेत्र में बसु को कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, रिटेल, एफएमसीजी और मीडिया सहित कई इंडस्ट्रीज का अनुभव है। अपने करियर के दौरान उन्होंने अलग-अलग संगठनों में मार्केटिंग, ब्रांड और बिजनेस से जुड़े कार्यों का नेतृत्व किया है।
बसु के पिछले कार्य अनुभव में टेन स्पोर्ट्स नेटवर्क (TEN Sports Network), वीडियोकॉन कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (Videocon Consumer Durables), रिलायंस डिजिटल रिटेल (Reliance Digital Retail) और एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स (LG Electronics) जैसी कंपनियां शामिल हैं।
इसके अलावा उन्होंने बर्सन-मार्स्टेलर-जेनेसिस पीआर (Burson-Marsteller - Genesis PR), डीएलएफ यूनिवर्सल (DLF Universal) और कोडक (Kodak) के साथ भी काम किया है। वोल्टास में उनकी नई जिम्मेदारी ऐसे समय आई है, जब कंपनी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेगमेंट में अपनी ब्रांड और मार्केटिंग मौजूदगी को मजबूत करने पर लगातार काम कर रही है।
दिल्ली हाई कोर्ट ने पर्सनैलिटी राइट्स यानी किसी व्यक्ति की पहचान, नाम, चेहरा और व्यक्तित्व से जुड़े अधिकारों के इस्तेमाल को लेकर एक अहम सवाल उठाया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
दिल्ली हाई कोर्ट ने पर्सनैलिटी राइट्स यानी किसी व्यक्ति की पहचान, नाम, चेहरा और व्यक्तित्व से जुड़े अधिकारों के इस्तेमाल को लेकर एक अहम सवाल उठाया है। कोर्ट यह देख रहा है कि क्या इन अधिकारों का इस्तेमाल सटायर, पैरोडी, कैरिकेचर या किसी कथित गलत काम से जुड़ी जानकारी को रोकने के लिए किया जा सकता है, खासकर तब जब मामला किसी व्यक्ति की व्यावसायिक छवि के गलत इस्तेमाल से जुड़ा न हो।
यह मुद्दा 'फिजिक्सवाला' के फाउंडर अलख पांडे की ओर से दायर एक मुकदमे की सुनवाई के दौरान सामने आया। अलख पांडे ने आरोप लगाया है कि उनकी पहचान और व्यक्तित्व का इस्तेमाल उनकी अनुमति के बिना आपत्तिजनक तरीके से किया जा रहा है और उन्होंने इससे सुरक्षा की मांग की है।
मामले की सुनवाई जस्टिस अनूप जयराम भमभानी कर रहे हैं। कोर्ट ने संकेत दिया कि पांडे की ओर से मांगी गई सुरक्षा का दायरा जरूरत से ज्यादा व्यापक हो सकता है। अदालत अब यह जांचना चाहती है कि पर्सनैलिटी राइट्स कहीं ऐसे कंटेंट को रोकने का जरिया तो नहीं बन रहे, जो किसी व्यक्ति की व्यावसायिक पहचान का गलत इस्तेमाल किए बिना कानूनी तौर पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे में आता हो।
सटायर और पैरोडी पर भी कोर्ट की नजर
अदालत ने पहले के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि पर्सनैलिटी राइट्स का इस्तेमाल किसी कथित गलत काम से जुड़ी जानकारी के प्रसार को रोकने या कैरिकेचर, पैरोडी और व्यंग्य जैसे पूरे तरह के अभिव्यक्ति के रूपों को खत्म करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए, अगर उनमें किसी व्यक्ति के Personality या Publicity Rights का व्यावसायिक शोषण नहीं हो रहा है।
इसका मतलब यह है कि कोर्ट एक तरफ किसी व्यक्ति की पहचान के अनधिकृत और आपत्तिजनक इस्तेमाल से उसके अधिकारों की रक्षा करना चाहता है, वहीं दूसरी तरफ यह भी सुनिश्चित करना चाहता है कि इन अधिकारों का इस्तेमाल आलोचना, व्यंग्य या पैरोडी को रोकने के लिए न हो।
5 अगस्त के अंतरिम आदेश में क्या कहा था?
यह मुद्दा 5 अगस्त को दिए गए एक अंतरिम आदेश के साथ सामने आया। उस आदेश में कोर्ट ने कंटेंट हटाने के निर्देशों को कथित उल्लंघन की तीन श्रेणियों तक सीमित रखा था। इनमें अश्लील सामग्री, अपमानजनक कंटेंट और पांडे की पहचान या व्यक्तित्व का बिना अनुमति व्यावसायिक इस्तेमाल शामिल था।
कोर्ट ने आपत्तिजनक सामग्री अपलोड करने के आरोपी पक्षों को समन भी जारी किए और उनसे जवाब मांगा है। इसके अलावा Google, Telegram, X और Automatic Inc को मामले में बताए गए कुछ वेबसाइट्स के पीछे मौजूद लोगों से जुड़ी बेसिक सब्सक्राइबर जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।
दूसरी वेबसाइट्स की भी शिकायत कर सकते हैं अलख पांडे
कोर्ट ने अलख पांडे को यह अनुमति भी दी है कि अगर उन्हें लगता है कि दूसरी वेबसाइट्स भी उनके अधिकारों का उल्लंघन कर रही हैं, तो वह उनके बारे में संबंधित इंटरमीडियरी को जानकारी दे सकते हैं। ऐसे मामलों में इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर और डोमेन रजिस्ट्रार तकनीकी तौर पर यह जांच करेंगे कि संबंधित वेबसाइट का संबंध उस वेबसाइट से है या नहीं, जिसके खिलाफ कोर्ट पहले ही रोक का आदेश दे चुका है।
हालांकि, कोर्ट ने यह साफ किया कि इस तकनीकी जांच का मतलब यह नहीं है कि ISP या डोमेन रजिस्ट्रार खुद यह तय कर सकते हैं कि किसी वेबसाइट को ब्लॉक किया जाए या नहीं। उनकी भूमिका केवल यह जांचने तक सीमित रहेगी कि अलख पांडे की ओर से बताई गई वेबसाइट पहले से प्रतिबंधित वेबसाइट का मिरर, अल्फान्यूमेरिक या रीडायरेक्ट वर्जन है या नहीं।
अलख पांडे की ओर से क्या आरोप लगाए गए?
अलख पांडे की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट जे. साईं दीपक ने कोर्ट के सामने आरोप रखा कि उनकी तस्वीर और पहचान का इस्तेमाल कई जगहों पर उनकी अनुमति के बिना किया जा रहा है।
उनकी ओर से कहा गया कि टेलीग्राम स्टीकर में अलख पांडे के चेहरे का इस्तेमाल किया जा रहा है और उन्हें व्यावसायिक तौर पर बेचा जा रहा है। इसके अलावा कुछ कंटेंट में कथित तौर पर आपत्तिजनक, अश्लील और यौन रूप से अपमानजनक सामग्री भी दिखाई जा रही है।
अलख पांडे की ओर से यह भी कहा गया कि वह आलोचना के प्रति अत्यधिक संवेदनशील नहीं हैं, लेकिन उनके मुताबिक कुछ सीमाओं का पालन किया जाना चाहिए।
पैरोडी वीडियो हटाने से कोर्ट ने किया इनकार
सुनवाई के दौरान अदालत के सामने पांडे से जुड़ा एक पैरोडी और सटायरिक वीडियो भी पेश किया गया। कोर्ट ने वीडियो देखने के बाद उसे हटाने का आदेश देने से इनकार कर दिया। यही पहलू इस मामले को खास बनाता है। कोर्ट अब यह अंतर समझने पर जोर दे रहा है कि किसी व्यक्ति की पहचान का अनधिकृत व्यावसायिक या अश्लील इस्तेमाल एक अलग मामला है, जबकि सटायर, पैरोडी या व्यंग्यात्मक अभिव्यक्ति अलग श्रेणी में आ सकती है।
आगे की सुनवाई में दिल्ली हाई कोर्ट यह तय करने की दिशा में आगे बढ़ेगा कि पर्सनैलिटी राइट्स की सुरक्षा की सीमा क्या होनी चाहिए और किस स्थिति में इन अधिकारों का इस्तेमाल किसी व्यक्ति की पहचान की रक्षा के लिए किया जा सकता है, तथा किस स्थिति में इसका इस्तेमाल अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सीमित करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
इंडिया टुडे ग्रुप ने दिल्ली की हवा को बेहतर बनाने के लिए ‘पॉल्यूशन का सॉल्यूशन’ (Pollution Ka Solution) नाम से पांच हफ्ते का एक कैंपेन शुरू किया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
दिल्ली के प्रदूषण की समस्या पर लंबे समय से चर्चा होती रही है, लेकिन अब इसे सिर्फ चर्चा तक सीमित रखने के बजाय समाधान तलाशने पर जोर दिया जा रहा है। इंडिया टुडे ग्रुप ने दिल्ली की हवा को बेहतर बनाने के लिए ‘पॉल्यूशन का सॉल्यूशन’ (Pollution Ka Solution) नाम से पांच हफ्ते का एक कैंपेन शुरू किया है।
इस पहल का मकसद दिल्ली के प्रदूषण पर बार-बार बात करने और समस्या बताने से आगे बढ़कर ऐसे व्यावहारिक, बड़े स्तर पर लागू किए जा सकने वाले और नतीजे मापने योग्य समाधान तलाशना है, जिनसे शहर की हवा को वास्तव में बेहतर किया जा सके।
वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर खास फोकस
इस कैंपेन में वाहनों से निकलने वाले प्रदूषण को दिल्ली की खराब हवा की एक प्रमुख वजह मानते हुए क्लीन मोबिलिटी और ट्रांसपोर्ट से जुड़े उत्सर्जन पर खास ध्यान दिया जाएगा।
कैंपेन के तहत आम लोग भी अपने सुझाव और आइडिया दे सकेंगे। इसके लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए प्रस्ताव जमा किए जा सकते हैं। इसके बाद इन आइडिया की विशेषज्ञों और इंडस्ट्री से जुड़े लोगों की मदद से व्यवस्थित तरीके से जांच की जाएगी।
सिर्फ कागज पर अच्छे दिखने वाले सुझावों के बजाय ऐसे समाधानों को आगे बढ़ाने की कोशिश होगी, जिन्हें जमीन पर लागू किया जा सके और जिनके नतीजों को मापा भी जा सके।
विशेषज्ञों की जूरी करेगी आइडिया का मूल्यांकन
कैंपेन में विज्ञान, प्रशासन, स्वास्थ्य, मीडिया और खेल जगत से जुड़े लोगों को जूरी में शामिल किया गया है। जूरी में IIT Kanpur के Director Prof. Manindra Agrawal, इंडिया टुडे ग्रुप की वाइस चेयरपर्सन और एग्जिक्यूटिव एडिटर-इन-चीफ कली पुरी, दिल्ली पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी के नरेश प्रियदर्शी, Medanta – The Medicity में Pediatrics की सीनियर डायरेक्टर व HOD डॉ. नीलम मोहन और भारत की 1983 क्रिकेट विश्व कप विजेता टीम के कप्तान कपिल देव शामिल हैं।
इन विशेषज्ञों की टीम अलग-अलग सुझावों की उपयोगिता और उन्हें वास्तविक परिस्थितियों में लागू किए जाने की संभावना का आकलन करेगी।
जमीन पर भी परखे जा सकते हैं समाधान
इस कैंपेन की खास बात यह है कि सिर्फ आइडिया चुनकर आगे नहीं बढ़ा जाएगा। चुनिंदा प्रस्तावों को जमीन पर टेस्ट भी किया जा सकता है। इसका मकसद यह देखना होगा कि वास्तविक परिस्थितियों में कोई समाधान कितना प्रभावी है और क्या उससे प्रदूषण कम करने के मापने योग्य नतीजे मिलते हैं। यानी कैंपेन का फोकस केवल ‘अच्छा आइडिया’ खोजने पर नहीं, बल्कि उसे वास्तव में लागू करके उसके नतीजे देखने पर भी रहेगा।
पांच हफ्ते बाद होगा ग्रैंड फिनाले
पांच हफ्ते तक चलने वाला यह कैंपेन ग्रैंड फिनाले के साथ खत्म होगा। इसमें चुने गए समाधान विशेषज्ञों और संबंधित पक्षों के सामने पेश किए जाएंगे। कैंपेन के तहत चुने गए विजेता आइडिया को दिल्ली के मुख्यमंत्री द्वारा बड़े स्तर पर लागू किए जाने के लिए विचार किया जाएगा।
इसके अलावा विजेता प्रस्ताव के लिए 50 लाख रुपये का नकद पुरस्कार भी रखा गया है। इससे ऐसे लोगों और टीमों को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है, जो दिल्ली के प्रदूषण से निपटने के लिए कोई प्रभावी और व्यावहारिक समाधान लेकर सामने आ सकते हैं।
सवाल सिर्फ यह नहीं कि प्रदूषण कितना बढ़ा, बल्कि समाधान क्या है
‘Pollution Ka Solution’ कैंपेन का मुख्य उद्देश्य दिल्ली के प्रदूषण को लेकर होने वाली चर्चा का तरीका बदलना है। अब सवाल सिर्फ यह नहीं होगा कि दिल्ली की हवा कितनी खराब हो गई है, बल्कि यह भी पूछा जाएगा कि इसे बेहतर करने के लिए वास्तव में क्या किया जा सकता है।
इंडिया टुडे ग्रुप इस पहल को लोगों की भागीदारी, तथ्यों और जमीन पर समाधान लागू करने की सोच के साथ आगे बढ़ा रहा है। उम्मीद है कि इस कैंपेन के जरिए दिल्ली के प्रदूषण पर होने वाली अगली बहस में सिर्फ समस्या की चर्चा नहीं होगी, बल्कि ऐसा समाधान भी सामने आएगा जिसे वास्तव में लागू किया जा सके।