2026 का प्रिंट मीडिया परिदृश्य: विज्ञापन, लागत और डिजिटल युग की जंग

भारत में प्रिंट मीडिया की स्थिति वैश्विक ट्रेंड से थोड़ा अलग दिख रही है, जहां यह अभी भी स्थिरता और कुछ हद तक विकास की ओर अग्रसर है।

Vikas Saxena by
Published - Wednesday, 07 January, 2026
Last Modified:
Wednesday, 07 January, 2026
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2026 में प्रिंट मीडिया की स्थिति वैश्विक और घरेलू दोनों स्तरों पर परिवर्तनशील है। वैश्विक रूप से पारंपरिक समाचार पत्रों की गिरती रुझान की बात हो या डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के दबदबे का सामना, यह इंडस्ट्री एक संवेदनशील संक्रमण काल से गुजर रही है। इसके बावजूद भारत में प्रिंट मीडिया की स्थिति वैश्विक ट्रेंड से थोड़ा अलग दिख रही है, जहां यह अभी भी स्थिरता और कुछ हद तक विकास की ओर अग्रसर है। आइए एक नजर डालते हैं विषय-वार वर्तमान तथ्यों और हाल के आंकड़ों के आधार पर प्रिंट मीडिया की स्थिति पर-

प्रिंट मीडिया का वैश्विक परिदृश्य

वैश्विक स्तर पर प्रिंट समाचार पत्र और पत्रिकाओं का मार्केट आज पूरी तरह समाप्त नहीं हो रहा, लेकिन यह एक मंदी की ओर बढ़ता हुआ सेक्टर है। उदाहरण के लिए, Statista के आंकड़ों के अनुसार 2025 में वैश्विक प्रिंट समाचारपत्र एवं मैगजीन का राजस्व लगभग USD 108.38 बिलियन रहने का अनुमान है, और 2025‑2030 के बीच इसका CAGR लगभग ‑3.05 % रहने की संभावना है, जिससे 2030 तक यह मार्केट लगभग USD 92.85 बिलियन तक गिर सकता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि राजस्व में समग्र गिरावट जारी रहेगी, न कि बड़ी वृद्धि। 

इसी तरह, IBISWorld की रिपोर्ट बताती है कि ग्लोबल न्यूजपेपर पब्लिशिंग इंडस्ट्री का राजस्व पिछले पांच वर्षों में CAGR ‑3.8 % की दर से घटा है, और आगे भी इस गिरावट की प्रवृत्ति जारी रहने की संभावना है, मुख्यतः प्रिंट पाठकों और विज्ञापनदारों के डिजिटल प्लेटफॉर्मों की ओर शिफ्ट होने के कारण।  

दूसरी ओर, कुछ मार्केट रिसर्च (जैसे Mordor Intelligence) थोड़ा अलग परिप्रेक्ष्य देता है कि विश्व के समाचार पत्र उद्योग का आकार 2025 में लगभग USD 82.17 बिलियन था और 2030 तक इसे लगभग USD 89.85 बिलियन तक बढ़ने का अनुमान है, जिसका मतलब है कि कुल मार्केट वैल्यू कुछ हद तक स्थिर या मामूली वृद्धि दिखा सकता है, लेकिन यह वृद्धि मुख्यतः डिजिटल और प्रीमियम मॉडल के जोड़ से है, न कि केवल पारंपरिक प्रिंट से। 

इन आंकड़ों से वास्तविक और व्यापक निष्कर्ष यह है कि वैश्विक प्रिंट मीडिया उद्योग प्रिंट सर्कुलेशन और विज्ञापन राजस्व दोनों में दबाव का सामना कर रहा है, और डिजिटल उपभोग तथा ऑनलाइन विज्ञापन प्लेटफॉर्म्स की ओर शिफ्टिंग की वजह से पारंपरिक राजस्व संरचना कमजोर हो रही है। लेकिन इसका यह अर्थ नहीं है कि इंडस्ट्री पूरी तरह समाप्त होने वाली है बल्कि वह समायोजन और संक्रमण के दौर से गुजर रही है, जिसमें डिजिटल और प्रिंट का मिश्रण, सस्क्रिप्शन मॉडल और नए राजस्व स्रोत शामिल हैं।

भारत में प्रिंट मीडिया का वर्तमान परिदृश्य

भारत में प्रिंट मीडिया का हाल कुछ हद तक मजबूत और स्थिर दिख रहा है, जो दुनिया के रुझान से अलग है। WARC की रिपोर्ट के अनुसार भारत न्यूज ब्रैंड पर विज्ञापन खर्च में 6% सालाना वृद्धि दर्ज कर रहा है, जबकि विश्व स्तर पर न्यूज ब्रैंड विज्ञापन खर्च गिरने की प्रवृत्ति में है। 

प्रिंट समाचार पत्रों की प्रतियां (सरकारी आंकड़ों के अनुसार) 2026 तक 139 मिलियन प्रतियों तक पहुंचने की संभावना रखती हैं, जो भारतीय बाजार को चीन के आगे दुनिया का सबसे बड़ा प्रिंट संस्करण पाठक बाज़ार बनाती है।  

प्रिंट मीडिया में विज्ञापन राजस्व की स्थिति

2026 के लिए भारत का विज्ञापन बाजार बढ़ने की उम्मीद में है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, कुल विज्ञापन राजस्व लगभग ₹2 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है, जिसमें प्रिंट विज्ञापन लगभग ₹17,090 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है- लगभग 4.5% की वृद्धि के साथ।  

इसका मतलब है कि भले ही डिजिटल प्लेटफॉर्म तेजी से बढ़ रहे हैं, प्रिंट अभी भी वित्तीय रूप से एक मजबूत आधार बना हुआ है। विशेष रूप से बड़े शहरों और राज्य स्तरीय अखबारों के लिए विज्ञापन राजस्व एक महत्वपूर्ण आय का स्रोत है। छोटे शहरों और क्षेत्रीय भाषाओं के अखबारों में विज्ञापन की पकड़ धीरे‑धीरे बढ़ रही है, जो इंडस्ट्री के लिए संतुलित विकास का संकेत देती है।

इसके अलावा, विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार द्वारा हाल ही में विज्ञापन दरों में की गई बढ़ोतरी ने प्रिंट मीडिया के लिए राजस्व स्थिरता सुनिश्चित करने में मदद की है। हालांकि प्रिंट में वृद्धि डिजिटल की तुलना में धीमी है, फिर भी यह माध्यम अभी भी पाठकों और विज्ञापनदाताओं के लिए विश्वसनीय विकल्प बना हुआ है, और आने वाले वर्षों में इसका महत्व कम नहीं होने वाला।

सरकार की नीतियां और समर्थन

हालांकि प्रिंट विज्ञापन दरों में 26% की वृद्धि कई महीने पहले की गई थी, इसके प्रभाव अब तक प्रिंट मीडिया पर दिखने लगे हैं। सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने डीएवीपी/सीबीसी के माध्यम से सरकारी विज्ञापनों के लिए प्रिंट मीडिया की दरें ₹47.40 से ₹59.68 प्रति वर्ग सेमी तक बढ़ाई थीं। इस कदम का उद्देश्य बढ़ती उत्पादन लागत, विशेषकर न्यूजप्रिंट और मुद्रण खर्च के दबाव को कम करना था। साथ ही यह छोटे और मध्यम स्तर के प्रकाशकों को वित्तीय राहत और स्थानीय पत्रकारिता की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद करने के लिए भी लिया गया था। हालांकि इंडस्ट्री बॉडीज का मानना है कि यह सुधार अपेक्षाकृत देर से आया और पर्याप्त नहीं है, क्योंकि विभागीय बजट की वृद्धि दर इसके अनुरूप नहीं रही, जिससे वास्तविक राजस्व वृद्धि केवल 10‑15% के आसपास ही रही।

नीति निर्माण के व्यापक पहलू पर सरकार ने केवल विज्ञापन दर बढ़ाने तक ही सीमित नहीं रहकर अन्य मीडिया क्षेत्रों की भी समीक्षा शुरू की है। रेडियो, टीवी और DTH जैसे पारंपरिक मीडिया पर भी नीतिगत सुधारों की संभावना तलाशी जा रही है ताकि डिजिटलीकरण के बढ़ते दबाव के बीच प्रिंट मीडिया की स्थिरता बनी रह सके। विशेषज्ञों का कहना है कि इस दिशा में और ठोस कदम, जैसे मुद्रण इनपुट पर कर राहत, सब्सिडी और डिस्ट्रीब्यूशन ढांचे में सुधार, आने वाले वर्षों में प्रिंट मीडिया को अधिक मजबूत बना सकते हैं।

प्रिंट मीडिया पर बढ़ती लागत का दबाव

प्रिंट की लागत का सबसे बड़ा हिस्सा न्यूजप्रिंट की बढ़ती कीमत, इंपोर्ट शुल्क, वेतन वृद्धि, मुद्रास्फीति और डिस्ट्रीब्यूशन खर्च (फ्यूल, लॉजिस्टिक्स) से आता है। इन इनपुट लागतों में लगातार वृद्धि ने छोटे और बड़े दोनों प्रकार के प्रकाशकों पर गंभीर दबाव डाला है, जिससे राजस्व और लाभ की मार्जिनें कम हुई हैं। खासकर ग्रामीण और छोटे शहरों तक पेपर पहुंचाने में लगने वाला खर्च तेजी से बढ़ा है, जिससे डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क चलाना चुनौतीपूर्ण हो गया है।

सरकार द्वारा हाल ही में विज्ञापन दरों में वृद्धि का बड़ा आधार इसी निरंतर लागत वृद्धि की चुनौती को मानना है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इन लागतों का संतुलित समाधान नहीं मिला तो प्रिंट मीडिया के लिए लंबे समय तक टिकना मुश्किल हो सकता है। साथ ही, कच्चे माल की कीमतों और मुद्रास्फीति के चलते अखबार की खुद की बिक्री कीमतों में बढ़ोतरी होना भी अनिवार्य हो गई है, जिससे पाठकों पर भी आर्थिक दबाव बढ़ता है।

पाठक व्यवहार और डिजिटल प्रतिस्पर्धा

भारत में पाठकों की खबरें पढ़ने की आदतें तेजी से बदल रही हैं और इसका सीधा असर प्रिंट मीडिया पर दिखाई दे रहा है। डिजिटल मीडिया का दबदबा लगातार बढ़ रहा है और आज डिजिटल विज्ञापन कुल विज्ञापन बाजार का लगभग आधा हिस्सा अपने कब्जे में ले चुका है। इससे विज्ञापनदाताओं का झुकाव तेजी से ऑनलाइन और मोबाइल प्लेटफॉर्म की ओर बढ़ा है, जिसका दबाव पारंपरिक प्रिंट मीडिया पर साफ नजर आता है।

युवा वर्ग की प्राथमिकताएं भी इस बदलाव को और तेज कर रही हैं। नई पीढ़ी के पाठक खबरों के लिए मोबाइल, सोशल मीडिया और डिजिटल न्यूज ऐप्स पर ज्यादा निर्भर होते जा रहे हैं। त्वरित अपडेट, वीडियो कंटेंट और इंटरएक्टिव फॉर्मेट की वजह से युवा पाठकों को प्रिंट की तुलना में डिजिटल प्लेटफॉर्म ज्यादा आकर्षक लगते हैं, जिससे प्रिंट मीडिया की प्रतिस्पर्धा और कठिन होती जा रही है।

हालांकि इसके बावजूद प्रिंट मीडिया की लोकप्रियता और विश्वसनीयता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। खासकर छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में आज भी अखबार को भरोसेमंद सूचना का स्रोत माना जाता है। नियमित रूप से अखबार पढ़ने की आदत, स्थानीय खबरों की गहराई और तथ्यात्मक प्रस्तुति के कारण प्रिंट मीडिया अब भी बड़ी संख्या में पाठकों के दैनिक जीवन का अहम हिस्सा बना हुआ है।

डिस्ट्रीब्यूशन की चुनौतियां

भारत के विविध भौगोलिक और लॉजिस्टिक नेटवर्क की वजह से छोटे मीडिया हाउसों के लिए डिस्ट्रीब्यूशन लागत और नेटवर्क विस्तार, खासकर पूर्वोत्तर, हिमालयी और दूरदराज ग्रामीण इलाकों में, एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। ईंधन की बढ़ती कीमतें, परिवहन खर्च और स्थानीय एजेंटों की कमी के कारण अखबार समय पर और किफायती तरीके से पहुंचाना लगातार मुश्किल होता जा रहा है।

इसके साथ ही शहरी इलाकों में भी डिस्ट्रीब्यूशन मॉडल पर दबाव बढ़ा है, जहां हाकर कमीशन और रिटर्न कॉपी का बोझ प्रकाशकों की लागत को और बढ़ा देता है। इन आवागमन और डिस्ट्रीब्यूशन से जुड़ी खर्चीली व्यवस्थाओं को संतुलित करना आज हर प्रिंट प्रकाशक के लिए एक गंभीर आर्थिक चुनौती बन चुका है।

2026 में स्थिति का निष्कर्ष

2026 में भारत का प्रिंट मीडिया विज्ञापन के मोर्चे पर सीमित लेकिन सकारात्मक स्थिरता की स्थिति में दिखाई देता है। सरकारी विज्ञापन दरों में हालिया बढ़ोतरी के चलते विज्ञापन राजस्व में हल्की वृद्धि के संकेत मिल रहे हैं, जिससे खासकर छोटे और मध्यम अखबारों को कुछ राहत मिली है। हालांकि यह वृद्धि इतनी मजबूत नहीं है कि उसे तेज ग्रोथ कहा जा सके, लेकिन मौजूदा हालात में यह प्रिंट मीडिया के लिए एक सहारा जरूर बनी हुई है।

डिजिटल प्लेटफॉर्म के बढ़ते दबाव और ऑनलाइन न्यूज कंजम्पशन में तेजी के बावजूद प्रिंट मीडिया की सबसे बड़ी ताकत उसकी स्थानीय पकड़ बनी हुई है। छोटे शहरों और कस्बों में पाठकों की वफादारी अभी भी मजबूत है, जहां अखबार न केवल सूचना का स्रोत है बल्कि भरोसे और आदत का हिस्सा भी है। यही कारण है कि पूरी तरह डिजिटल शिफ्ट के बावजूद प्रिंट मीडिया अपनी प्रासंगिकता बनाए हुए है।

इसके साथ ही लागत से जुड़ी चुनौतियां लगातार गंभीर होती जा रही हैं। कागज, प्रिंटिंग, लॉजिस्टिक्स और मानव संसाधन की बढ़ती लागत के सामने विज्ञापन से होने वाली आय अकेले पर्याप्त साबित नहीं हो रही है। यही वजह है कि कई प्रकाशक मार्जिन के दबाव में काम कर रहे हैं और खर्च नियंत्रण उनकी प्राथमिकता बनता जा रहा है।

सरकार की ओर से नीति समर्थन और दरों में सुधार की दिशा में कदम जरूर उठाए गए हैं, लेकिन दीर्घकालिक स्थिरता के लिए अभी और ठोस नीतियों की जरूरत है। कागज और प्रिंटिंग इनपुट्स पर कर राहत, टैक्स प्रोत्साहन, डिस्ट्रीब्यूशन और मुद्रण से जुड़ी सब्सिडी जैसे उपाय अगर लागू होते हैं, तो प्रिंट मीडिया आने वाले वर्षों में कहीं ज्यादा मजबूती के साथ अपनी भूमिका निभा सकेगा।

वित्तीय दबाव में संतुलन की कोशिश

भारत के बड़े प्रिंट मीडिया समूहों के हालिया वित्तीय नतीजे यह साफ दिखाते हैं कि भले ही कुल रेवेन्यू ग्रोथ सीमित रही हो, लेकिन कॉस्ट कंट्रोल और मल्टी-प्लेटफॉर्म स्ट्रैटेजी के जरिए कई कंपनियां खुद को संतुलित रख पाने में सफल रही हैं। अखबार कंपनियों की कमाई का बड़ा हिस्सा अभी भी विज्ञापन से आता है, लेकिन प्रिंट विज्ञापनों की ग्रोथ धीमी होने के कारण मैनेजमेंट का फोकस अब ऑपरेशनल एफिशिएंसी, पेज ऑप्टिमाइजेशन और एड रेट्स के बेहतर इस्तेमाल पर है। न्यूजप्रिंट, ट्रांसपोर्टेशन और मैनपावर की बढ़ती लागत ने मार्जिन पर दबाव डाला है, हालांकि सरकारी विज्ञापन दरों में हालिया बढ़ोतरी से कुछ राहत जरूर मिली है।

डिजिटल अब सपोर्ट नहीं, मुख्य रणनीति

डिजिटल के मोर्चे पर लगभग सभी बड़े अखबार समूह अब इसे सहायक प्लेटफॉर्म नहीं बल्कि कोर बिजनेस मानकर आगे बढ़ रहे हैं। वेबसाइट, मोबाइल ऐप, ई-पेपर और सोशल मीडिया के जरिए रीडर एंगेजमेंट बढ़ाने पर खास जोर है। कई मीडिया हाउस डिजिटल सब्सक्रिप्शन, प्रीमियम कंटेंट और ब्रैंडेड कंटेंट जैसे मॉडल अपना रहे हैं, ताकि केवल विज्ञापन पर निर्भरता कम की जा सके। हालांकि डिजिटल से होने वाली कमाई अभी प्रिंट की भरपाई नहीं कर पा रही, लेकिन भविष्य की ग्रोथ का रास्ता यहीं से निकलता दिख रहा है।

हाइब्रिड मॉडल पर टिका भविष्य

आने वाले समय को देखते हुए प्रिंट मीडिया कंपनियां हाइब्रिड मॉडल को सबसे व्यावहारिक रास्ता मान रही हैं, जहां प्रिंट अपनी विश्वसनीयता और स्थानीय पकड़ बनाए रखेगा और डिजिटल उसकी पहुंच और विस्तार बढ़ाएगा। छोटे शहरों और क्षेत्रीय भाषाओं के अखबारों के लिए यह रणनीति खास तौर पर फायदेमंद मानी जा रही है। इंडस्ट्री विशेषज्ञों का कहना है कि 2026 का साल प्रिंट मीडिया के लिए केवल अस्तित्व बचाने का नहीं बल्कि खुद को नए रूप में ढालने का साल होगा, जहां कंटेंट की गुणवत्ता, टेक्नोलॉजी और बिजनेस मॉडल का संतुलन सबसे अहम साबित होगा।

भविष्य की दिशा

आने वाले समय में प्रिंट मीडिया के लिए सबसे बड़ी जरूरत समेकन और डिजिटल एकीकरण की होगी। प्रिंट को अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के साथ मजबूती से जोड़ना अनिवार्य हो गया है ताकि बदलती पाठक आदतों और विज्ञापन बाजार के बीच न तो पाठक छूटें और न ही विज्ञापनदाता। डिजिटल और प्रिंट के साझा मॉडल ही आगे चलकर इसकी प्रासंगिकता और पहुंच को बनाए रख सकते हैं।

इसी क्रम में सब्सक्रिप्शन-आधारित मॉडल की भूमिका भी बढ़ती जा रही है। कई बड़े प्रकाशक पहले ही इस दिशा में कदम बढ़ा चुके हैं, जहां पाठकों को प्रीमियम कंटेंट के साथ डिजिटल और प्रिंट का संयुक्त सब्सक्रिप्शन ऑफर किया जा रहा है। इससे एक तरफ नियमित और स्थिर आमदनी का रास्ता खुलता है और दूसरी तरफ गंभीर पाठकों से सीधा जुड़ाव भी मजबूत होता है।

स्थानीय सामग्री पर फोकस प्रिंट मीडिया की सबसे बड़ी ताकत बना रहेगा। छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में आज भी स्थानीय खबरों की मांग मजबूत है, जहां डिजिटल माध्यमों की पहुंच और भरोसा दोनों सीमित हैं। यही स्थानीय पत्रकारिता भारत में प्रेस की स्वतंत्रता और विश्वसनीयता का जीवंत आधार बनी हुई है, जिसे प्रिंट मीडिया आने वाले समय में और मजबूती दे सकता है।

सरकारी नीतियों की भूमिका भी इस भविष्य को तय करने में अहम होगी। विज्ञापन दरों में बढ़ोतरी एक जरूरी कदम जरूर है, लेकिन दीर्घकालिक स्थिरता के लिए केवल यही पर्याप्त नहीं है। GST में राहत, कागज के आयात शुल्क में सुधार और डिस्ट्रीब्यूशन ढांचे को सशक्त करने जैसे ठोस नीतिगत फैसले ही प्रिंट मीडिया को आर्थिक रूप से मजबूत बना सकते हैं और इसे आने वाले वर्षों की चुनौतियों के लिए तैयार कर सकते हैं।

2026 में प्रिंट मीडिया पूरी तरह से समाप्त होने वाला नहीं है, बल्कि बदलते आर्थिक, तकनीकी और उपभोक्ता व्यवहार के बीच एक मजबूती से संघर्षरत लेकिन रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में अपनी भूमिका बना रहा है। विश्लेषण यह संकेत देता है कि अगर यह डिजिटल और पारंपरिक रणनीतियों का सही मिश्रण अपनाता है और नीतिगत समर्थन के और कदम मिलते हैं, तो 2026 और उसके बाद यह अपने पाठकों और विज्ञापनदाताओं दोनों की आवश्यकताओं के अनुरूप खुद को ढाल सकता है। 

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CCI कार्टेल जांच: मैडिसन मीडिया केस में सरकार की लापरवाही पर दिल्ली हाई कोर्ट सख्त

केंद्र सरकार ने गुरुवार को मैडिसन मीडिया की उस याचिका पर अपना जवाब अदालत के रिकॉर्ड में पेश नहीं किया, जिसमें उसने भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) की जांच को चुनौती दी है।

Samachar4media Bureau by
Published - Friday, 09 January, 2026
Last Modified:
Friday, 09 January, 2026
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केंद्र सरकार ने गुरुवार को मैडिसन मीडिया की उस याचिका पर अपना जवाब अदालत के रिकॉर्ड में पेश नहीं किया, जिसमें उसने भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) की जांच को चुनौती दी है। यह जांच बड़े मीडिया और विज्ञापन एजेंसियों पर कथित कार्टेल बनाने के आरोपों से जुड़ी है। सरकार की इस चूक पर दिल्ली हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया और केंद्र को चेतावनी दी कि यदि वह आगे भी जवाब दाखिल नहीं करती है तो इसके गंभीर नतीजे हो सकते हैं।

मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार गेडेला की बेंच ने केंद्र सरकार को आखिरी मौका देते हुए दो हफ्ते का समय दिया है कि वह अपना हलफनामा दाखिल करे। कोर्ट ने साफ कहा कि अगर तय समय में जवाब नहीं आया तो अदालत सरकार के खिलाफ प्रतिकूल निष्कर्ष निकाल सकती है। इस मामले की अगली सुनवाई 26 फरवरी 2026 को होगी।

मार्च महीने में CCI ने मीडिया रेट्स और डिस्काउंट को लेकर कथित मिलीभगत की जांच के तहत कई विज्ञापन एजेंसियों और ब्रॉडकास्टर्स पर छापेमारी की थी। मैडिसन भी उन्हीं एजेंसियों में शामिल थी। यह जांच भारतीय विज्ञापन इंडस्ट्री में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है।

CCI की यह जांच 2024 की शुरुआत में उसकी लेनिएंसी स्कीम के तहत दी गई जानकारी के बाद शुरू हुई थी। बताया जा रहा है कि यह जानकारी डेंट्सू की ओर से दी गई थी। शुरुआती जांच में यह संकेत मिले थे कि कई बड़ी एजेंसियां अनौपचारिक तरीकों से एक-दूसरे के साथ मिलकर कीमत तय कर रही थीं, जिनमें मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल भी शामिल था।

मैडिसन का कहना है कि खुद CCI के आदेश में यह बात सामने आई थी कि इंडियन सोसाइटी ऑफ एडवर्टाइजर्स (ISA) के सदस्यों ने एक मॉडल एजेंसी एग्रीमेंट फैलाया था, जिससे बातचीत की ताकत सीमित हुई और एजेंसियों की कमाई पर असर पड़ा। मैडिसन का दावा है कि एडवर्टाइजिंग एजेंसिज एसोसिएशन ऑफ इंडिया के सदस्य असल में पीड़ित हैं, दोषी नहीं।

इसके बावजूद मैडिसन का आरोप है कि जांच एजेंसी ने सिर्फ विज्ञापन एजेंसियों को निशाना बनाया और ISA के सदस्यों के खिलाफ कोई ऐसी तलाशी कार्रवाई नहीं की गई। कंपनी का कहना है कि यह प्रक्रिया मनमानी थी और इससे उसकी छवि को काफी नुकसान पहुंचा है।

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Alchemist मार्केटिंग सॉल्यूशंस ग्रुप ने Triton ब्रैंड का किया अधिग्रहण

देश के प्रमुख Integrated Marketing Communications (IMC) ग्रुप्स में से एक Alchemist Marketing Solutions (Alchemist) ने आज एक बड़ी रणनीतिक घोषणा की है।

Samachar4media Bureau by
Published - Thursday, 08 January, 2026
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Thursday, 08 January, 2026
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देश के प्रमुख Integrated Marketing Communications (IMC) ग्रुप्स में से एक Alchemist Marketing Solutions (Alchemist) ने आज एक बड़ी रणनीतिक घोषणा की है। कंपनी ने दिग्गज और पुरानी एजेंसी ब्रैंड Triton के अधिग्रहण (acquisition) का ऐलान किया है। बता दें कि Alchemist रियल एस्टेट कम्युनिकेशन में मार्केट लीडर माना जाता है।

यह कदम Alchemist के लिए एक नए और बड़े बदलाव का संकेत है। पिछले 15 सालों में Alchemist ने 200 से ज्यादा लोगों की टीम, 4 ऑफिस और पूरे देश में सर्विस देने की क्षमता के साथ अपनी मजबूत पहचान बनाई है। अब Triton के अधिग्रहण के बाद Alchemist अपने बिजनेस पोर्टफोलियो को तेजी से अलग-अलग सेक्टर्स में फैलाने की तैयारी कर रहा है। Triton ब्रैंड के तहत अब ग्रुप FMCG, सर्विसेज, ड्यूरेबल्स, D2C, अन्य न्यू-एज सेक्टर्स और कॉरपोरेट ब्रैंड्स को भी अपनी खास IMC सर्विसेज देगा।

Triton Communications की शुरुआत 1991 में इंडस्ट्री के दिग्गज अली मर्चेंट और मुनव्वर सैयद ने की थी। यह एजेंसी इंडिपेंडेंट एजेंसी दौर की एक बड़ी पहचान रही है। 30 साल से ज्यादा समय तक Triton ने कई नामी भारतीय ब्रैंड्स के लिए रणनीति और क्रिएटिव काम किया। इनमें Eureka Forbes (Aquaguard), Vicco, ABD (Officers Choice), Adani Wilmar (Fortune), NECC, Gujarat Ambuja, Mother’s Recipe, UB Group, Shaw Wallace (Haywards Franchise), Paras (Moov, D’Cold, SetWet), Wagh Bakri, Yes Bank, Gujarat और Karnataka Tourism जैसे कई बड़े नाम शामिल हैं।

हालांकि महामारी के बाद बाजार में आए बदलावों के कारण एजेंसी को चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन आइकॉनिक भारतीय ब्रैंड्स बनाने का Triton का इतिहास और उसकी ब्रैंड वैल्यू आज भी बेजोड़ मानी जाती है। Moov का ‘आह से आहा तक’, SetWet का ‘very very sexy’ और Aquaguard का “पानी का डॉक्टर” जैसे कैंपेन Triton की पहचान रहे हैं।

इस अधिग्रहण पर बात करते हुए Alchemist Marketing Solutions के ग्रुप मैनेजिंग डायरेक्टर मनीष पोरवाल ने कहा, “Triton सिर्फ एक एजेंसी नहीं है, यह एक संस्था है, जिसे अली और मुनव्वर ने अपने जुनून से खड़ा किया। पिछले 15 सालों में Alchemist ने रियल एस्टेट और हेल्थ सेक्टर में मजबूत लीडरशिप बनाई है, लेकिन हमारा सपना रहा है कि यही सफलता हम दूसरे सेक्टर्स में भी दोहराएं। Triton के साथ हम इस ब्रैंड में नई ऊर्जा भरना चाहते हैं और साथ ही इसकी खास पहचान और DNA को आगे बढ़ाना चाहते हैं। हम सिर्फ एक नाम नहीं खरीद रहे, बल्कि एक विरासत को फिर से जिंदा कर रहे हैं।”

Alchemist Marketing Solutions के डायरेक्टर राजकुमार रेमल्ली ने कहा, “यह अधिग्रहण हमें ब्रैंड बनाने की एक समृद्ध विरासत देता है, जिसे हम Alchemist की तेज, इंटीग्रेटेड और स्ट्रैटेजी-फर्स्ट सोच के साथ आगे बढ़ाएंगे। मकसद उस मजबूत क्रिएटिव आत्मा को बनाए रखते हुए, आज के Alchemist ग्रुप की स्पीड और परफॉर्मेंस-ड्रिवन सोच से जोड़ना है।”

Alchemist Marketing Solutions की डायरेक्टर और CEO (Digital) अनुजिता जैन ने कहा, “हमारे पास Triton को एक नए दौर का, फ्रेश और न्यू-एज प्रोडक्ट बनाने का खास मौका है। महामारी के बाद उपभोक्ता और मार्केटिंग का माहौल काफी बदल चुका है, जहां ज्यादा फुर्ती और इंटीग्रेशन की जरूरत है। हम ‘नए’ Triton को इन्हीं बदली हुई जरूरतों के हिसाब से तैयार करेंगे, ताकि यह आने वाले 30 सालों तक उतना ही प्रासंगिक रहे, जितना पिछले 30 सालों तक रहा है।”

इस बदलाव पर प्रतिक्रिया देते हुए Triton Communications के फाउंडर अली मर्चेंट, जिन्होंने हाल ही में अपना 80वां जन्मदिन मनाया, ने कहा, “तीन दशकों से ज्यादा समय तक Triton भारतीय ब्रैंड्स को मजबूती देने का पर्याय रहा है। लेकिन इंडस्ट्री बहुत तेजी से बदली है और महामारी के बाद की दुनिया में आगे बढ़ने के लिए नई तरह की फुर्ती और एक मजबूत स्ट्रैटेजिक इकोसिस्टम की जरूरत है। मेरे लिए यह जरूरी था कि Triton की जिम्मेदारी ऐसे ग्रुप को सौंपी जाए जो Triton की आत्मा को समझता हो और उसे भविष्य के लिए सुरक्षित भी कर सके। मनीष और Alchemist में मुझे हमारे अतीत के लिए सम्मान और भविष्य को आगे ले जाने की भूख- दोनों का सही मेल दिखता है।”

लीडरशिप की तलाश: को-फाउंडर की भूमिका

ब्रैंड को एक बार फिर उद्यमी सोच के साथ आगे बढ़ाने के लिए Alchemist ने बताया है कि उसे कई सकारात्मक प्रतिक्रियाएं मिली हैं, लेकिन वह सही व्यक्ति की तलाश में समय ले रहा है। कंपनी Triton के लिए एक CEO की तलाश कर रही है, जिसे वह को-फाउंडर की तरह देख रही है। यह व्यक्ति Alchemist बोर्ड के साथ मिलकर Triton को एक इंडिपेंडेंट एजेंसी के रूप में चलाएगा। उसे स्टार्ट-अप फाउंडर जैसी आजादी मिलेगी, लेकिन साथ ही भारत के सबसे बड़े IMC ग्रुप्स में से एक की ताकत, संसाधन, इंफ्रास्ट्रक्चर, महत्वाकांक्षा और स्थिरता का पूरा समर्थन भी होगा।

जानिए, Alchemist Marketing Solutions Group के बारे में:

Alchemist भारत का एक अग्रणी Integrated Marketing Communications ग्रुप है। 15 सालों के अनुभव के साथ यह 360-डिग्री मार्केटिंग सॉल्यूशंस देता है, जिसमें क्रिएटिव स्ट्रैटेजी, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, ग्राउंड-लेवल एक्टिवेशन, सेलेब्रिटी एसोसिएशन, फिल्म प्रोडक्शन और इवेंट्स शामिल हैं। इसका मुख्यालय मुंबई में है और गुरुग्राम, पुणे और बेंगलुरु में इसके ऑफिस हैं। इसके अलावा चेन्नई, इंदौर और जयपुर में पार्टनर ऑफिस भी हैं।
Alchemist अपनी अलग-अलग यूनिट्स के जरिए सेवाएं देता है, जैसे Clay (रियल एस्टेट स्ट्रैटेजी और कम्युनिकेशन), Dotwise (डिजिटल), Aurange (हेल्थकेयर और BFSI), Auntourage (सेलेब्रिटी एसोसिएशन), Crew (फिल्म प्रोडक्शन और कंटेंट), Alchemist Live (IPs और फॉर्मैट्स), Beep (एक्सपीरिएंशियल मार्केटिंग), Dotmatic (प्रोग्रामैटिक), Buzzwise (इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग), Earthwise (सस्टेनेबिलिटी मार्केटिंग) आदि।
Alchemist रियल एस्टेट मार्केटिंग में सबसे मजबूत खिलाड़ी है और हेल्थकेयर व फाइनेंशियल सर्विसेज में भी इसकी खास मौजूदगी है। फिलहाल कंपनी अलग-अलग कंज्यूमर कैटेगरी में अपना दायरा बढ़ा रही है। इसके कुछ चर्चित IPs में Delhi Theatre Festival, Bengaluru Theatre Festival, Hyderabad Theatre Festival, Celebscore और Clay Dialogues शामिल हैं।

Triton Communications के बारे में जानें:

1991 में शुरू हुई Triton Communications एक पुरानी और प्रतिष्ठित भारतीय एडवरटाइजिंग एजेंसी है, जो देश के कई भरोसेमंद ब्रैंड्स के साथ लंबे समय से जुड़ी रही है। तीन दशकों से ज्यादा समय में Triton ने इंडिपेंडेंट एजेंसी स्पेस में अपनी अलग पहचान बनाई है और भारतीय उपभोक्ताओं की गहरी समझ के लिए जानी जाती है।

 

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‘Brut India’ ने इस बड़े पद पर अश्वनी डंडोना को किया नियुक्त

अश्वनी डंडोना इससे पहले फोर्क मीडिया (Fork Media) में बिजनेस हेड–ब्रैंडेड पार्टनरशिप्स के पद पर कार्यरत थे।

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Published - Thursday, 08 January, 2026
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Thursday, 08 January, 2026
Ashwani Dandona

डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ब्रूट इंडिया’ (Brut India) ने अश्वनी डंडोना (Ashwanii Dandonnaa) को अपना नया चीफ कमर्शियल ऑफिसर (CCO) नियुक्त किया है।

अपनी इस भूमिका में अश्वनी डंडोना ‘ब्रूट इंडिया’ के लिए राजस्व वृद्धि, प्रभावशाली ब्रैंड साझेदारियां विकसित करने और कंपनी के कमर्शियल उद्देश्यों को उसके एडिटोरियल विजन से मजबूती से जोड़ने की जिम्मेदारी संभालेंगे।

डिजिटल मीडिया, कंटेंट और रेवेन्यू लीडरशिप के क्षेत्र में अश्वनी डंडोना को एक दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने कंटेंट और बिजनेस के बीच संतुलन बनाते हुए कई अहम जिम्मेदारियां निभाई हैं।

इस नियुक्ति के बारे में ‘ब्रूट इंडिया’ की कंट्री मैनेजर और एडिटर-इन-चीफ महक कसबेकर ने कहा, ‘ब्रूट में हमेशा से यह विश्वास रहा है कि बेहतर पत्रकारिता और मजबूत बिजनेस साथ-साथ आगे बढ़ते हैं। अश्वनी में व्यावसायिक समझ, कंटेंट के प्रति सम्मान और सहयोगात्मक नेतृत्व शैली का दुर्लभ संयोजन है। ब्रूट इंडिया के विस्तार के इस दौर में उनकी भूमिका ऐसे साझेदारियां बनाने में अहम होगी जो कंपनी के मूल्यों के अनुरूप हों और दीर्घकालिक विकास को समर्थन दें।’

वहीं, अश्वनी डंडोना ने कहा कि ब्रूट नेतृत्व द्वारा उन पर जताए गए भरोसे के लिए वह आभारी हैं। उन्होंने कहा कि संस्कृति, उद्देश्य और स्टोरीटेलिंग के अनूठे मेल के साथ ब्रूट एक मजबूत वैश्विक मंच बन चुका है। भारत में इसके प्रभाव को और विस्तार देने की बड़ी संभावनाएं हैं और वह टीम, पार्टनर्स व क्रिएटर्स के साथ मिलकर मूल्य-आधारित और सार्थक विकास के लिए काम करने को उत्साहित हैं।

गौरतलब है कि अश्वनी डंडोना इससे पहले फोर्क मीडिया (Fork Media) में बिजनेस हेड–ब्रैंडेड पार्टनरशिप्स के पद पर कार्यरत थे। वह राष्ट्रीय स्तर की सरकारी साझेदारियों का नेतृत्व भी कर चुके हैं।

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एनडीटीवी ने लॉन्च किया AutoMate : मोबिलिटी के भविष्य को समझने का नया मंच

AutoMate का कंटेंट ऑटोमोबाइल अनुभव के हर पहलू को कवर करता है। ‘AutoMate Reviews’ और ‘Head-to-Head’ कारों, बाइक्स और इलेक्ट्रिक वाहनों की समीक्षा और तुलना पर केंद्रित हैं।

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Published - Thursday, 08 January, 2026
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Thursday, 08 January, 2026
ndtvautomate

मोबिलिटी की अवधारणा अब पूरी तरह बदल रही है। जो कभी इंजन, दक्षता और इंफ्रास्ट्रक्चर तक सीमित थी, वह अब इंटेलिजेंस, सस्टेनेबिलिटी और डिजिटल कनेक्टिविटी से आकार ले रही है। ऐसे में जब भारत इस परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है, एनडीटीवी ने AutoMate लॉन्च किया है। एक ऐसा मंच, जो दर्शकों को मोबिलिटी के भविष्य को समझने, उसका विश्लेषण करने और उससे जुड़ने में मदद करेगा।

AutoMate को एक मल्टी-फॉर्मेट फ्रेंचाइज़ के रूप में विकसित किया गया है, जो पारंपरिक ऑटोमोबाइल कार्यक्रमों से आगे बढ़कर नई सोच प्रस्तुत करता है। इसमें एनडीटीवी की भरोसेमंद एडिटोरियल दृष्टि को आधुनिक विज़ुअल स्टोरीटेलिंग के साथ जोड़ा गया है। यहां मोबिलिटी को टेक्नोलॉजी, लाइफस्टाइल और रोज़मर्रा के फैसलों से जुड़ा विषय माना गया है।

इसका उद्देश्य इंडस्ट्री से जुड़ी जटिल जानकारियों को आम दर्शकों के लिए आसान और प्रासंगिक बनाना है। इस प्लेटफॉर्म को सिद्धार्थ शर्मा, एग्जीक्यूटिव एडिटर, एनडीटीवी ऑटो द्वारा क्यूरेट किया गया है और इसे मॉड्यूलर, प्लेटफॉर्म-फर्स्ट डिज़ाइन में तैयार किया गया है।

हर एपिसोड अलग-अलग सेगमेंट्स में विभाजित है, जिससे कंटेंट एक साप्ताहिक टीवी शो के साथ-साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए छोटे फॉर्मेट में भी प्रस्तुत किया जा सकता है। AutoMate का कंटेंट ऑटोमोबाइल अनुभव के हर पहलू को कवर करता है। ‘AutoMate Reviews’ और ‘Head-to-Head’ कारों, बाइक्स और इलेक्ट्रिक वाहनों की समीक्षा और तुलना पर केंद्रित हैं, जिससे दर्शकों को खरीद और इस्तेमाल से जुड़े व्यावहारिक फैसलों में मदद मिलती है।

वहीं ‘AutoMate Shift’ हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, कनेक्टेड व्हीकल्स और उभरती ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी से जुड़े विकासों की पड़ताल करता है। इस मौके पर सिद्धार्थ शर्मा ने कहा,"मोबिलिटी बहुत तेज़ी से बदल रही है और इसके आसपास होने वाली बातचीत भी।

अब इसमें टेक्नोलॉजी, ऊर्जा विकल्प, नियम और लोगों की रोज़मर्रा की आवाजाही शामिल है। AutoMate इन बदलावों को सरल और व्यावहारिक तरीके से देखने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिसमें प्रोडक्ट्स, पॉलिसी और रियल-वर्ल्ड एक्सपीरियंस को एक साथ लाया गया है।" प्रोडक्ट्स और टेक्नोलॉजी के अलावा, ‘AutoMate Culture’ और ‘AutoMate Travel’ भारत की ऑटोमोटिव संस्कृति को आकार देने वाले लोगों, समुदायों और यात्रा अनुभवों को एक्सप्लोर करते हैं।

इसके साथ ही ‘AutoMate CXO’ और ‘AutoMate News’ के जरिए इंडस्ट्री अपडेट्स, पॉलिसी डिस्कशन और लीडरशिप पर्सपेक्टिव्स को ‘Drive Cast’ सीरीज़ के माध्यम से पेश किया जाता है। NDTV AutoMate साफ़ और आधुनिक विज़ुअल लैंग्वेज को अपनाता है, जिसमें हाई-क्वालिटी प्रोडक्शन और ग्राफिक्स शामिल हैं, जो कंटेंट को समझने में मदद करते हैं। इसका एडिटोरियल टोन संतुलित और सहज है, जो एनडीटीवी की निष्पक्ष पत्रकारिता की परंपरा को बनाए रखते हुए नए खरीदारों से लेकर अनुभवी ऑटो एंथूज़ियास्ट्स तक सभी को जोड़ता है।

AutoMate का प्रसारण 10 जनवरी, 2026 से एनडीटीवी 24x7, प्रॉफिट टीवी और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर होगा। AutoMate के जरिए एनडीटीवी का उद्देश्य दर्शकों को यह समझने में मदद करना है कि भारत में मोबिलिटी कैसे बदल रही है। जहां प्रोडक्ट्स, पॉलिसी, टेक्नोलॉजी और संस्कृति को एकीकृत फॉर्मेट में प्रस्तुत किया गया है।

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ENIL की रेटिंग ‘वॉच डेवलपिंग’ पर, BCCL से THPL में बदलाव पर CRISIL रख रहा नजर

एंटरटेनमेंट नेटवर्क (इंडिया) लिमिटेड (ENIL) से जुड़ी बैंक सुविधाओं और कर्ज से जुड़े इंस्ट्रूमेंट्स की क्रेडिट रेटिंग को क्रिसिल ने फिलहाल ‘वॉच डेवलपिंग’ की कैटेगरी में बनाए रखा है

Vikas Saxena by
Published - Thursday, 08 January, 2026
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एंटरटेनमेंट नेटवर्क (इंडिया) लिमिटेड (ENIL) से जुड़ी बैंक सुविधाओं और कर्ज से जुड़े इंस्ट्रूमेंट्स की क्रेडिट रेटिंग को क्रिसिल (Credit Rating Information Services of India Limited) ने फिलहाल ‘वॉच डेवलपिंग’ की कैटेगरी में बनाए रखा है। कंपनी ने इसकी जानकारी 7 जनवरी 2026 को शेयर मार्केट को दी।

क्रिसिल (CRISIL) के मुताबिक ENIL की कुल 150 करोड़ रुपये की बैंक लोन सुविधाओं की लॉन्ग टर्म रेटिंग Crisil AA+ / Watch Developing और शॉर्ट टर्म रेटिंग Crisil A1+ / Watch Developing बनी हुई है। इसके अलावा कंपनी के 50 करोड़ रुपये के नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स और 200 करोड़ रुपये के कमर्शियल पेपर की रेटिंग भी इसी कैटेगरी में रखी गई है।

क्रिसिल ने बताया कि अक्टूबर 2025 में ENIL की रेटिंग को ‘वॉच डेवलपिंग’ में इसलिए डाला गया था क्योंकि इसकी पैरेंट कंपनी बेनेट कोलमैन एंड कंपनी लिमिटेड (BCCL) अपने नॉन-पब्लिशिंग बिजनेस को अलग करने की तैयारी कर रही है। इस प्रस्ताव के तहत BCCL का नॉन-पब्लिशिंग बिजनेस टाइम्स होराइजन प्राइवेट लिमिटेड (THPL) में ट्रांसफर किया जाएगा। इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद ENIL की पैरेंट कंपनी भी BCCL से बदलकर THPL हो जाएगी। हालांकि यह पूरा मामला अभी NCLT और अन्य सरकारी मंजूरियों के अधीन है।

वैसे बता दें कि BCCL और Times Horizon के बोर्ड ने इस योजना को 22 सितंबर 2025 को मंजूरी दी थी। लागू होने की तारीख 1 अप्रैल 2026 तय की गई है, या योजना के प्रभावी होने की तारीख, जो भी पहले हो।

क्रिसिल ने साफ किया है कि जब तक यह री-ऑर्गनाइजेशन पूरी तरह से लागू नहीं हो जाता, तब तक BCCL सभी ग्रुप कंपनियों को पहले की तरह वित्तीय और ऑपरेशनल सपोर्ट देता रहेगा। क्रिसिल इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है और डिमर्जर का ENIL की फाइनेंशियल स्थिति पर क्या असर पड़ेगा, इसका आकलन कर रहा है।

रेटिंग एजेंसी के अनुसार ENIL भारत की एफएम रेडियो इंडस्ट्री में एक मजबूत और लीडिंग कंपनी है। रेडियो मिर्ची ब्रैंड की अच्छी पहचान, देश के 63 शहरों में मौजूदगी और मजबूत कैश पोजिशन कंपनी की बड़ी ताकत हैं। सितंबर 2025 तक कंपनी के पास करीब 345 करोड़ रुपये की नकद राशि थी और कंपनी पर कोई कर्ज नहीं है।

हालांकि क्रिसिल ने यह भी कहा कि डिजिटल और दूसरे नए बिजनेस में निवेश की वजह से कंपनी के ऑपरेटिंग मार्जिन पर दबाव बना है। विज्ञापन रेवेन्यू पर ज्यादा निर्भरता और रेडियो इंडस्ट्री में कड़ी प्रतिस्पर्धा भी कंपनी के लिए चुनौती बनी हुई है।

कुल मिलाकर, क्रिसिल का मानना है कि ENIL की वित्तीय स्थिति मजबूत है, लेकिन पैरेंट कंपनी में होने वाले बदलाव के चलते फिलहाल रेटिंग को ‘वॉच डेवलपिंग’ में रखा गया है। जैसे ही इस डिमर्जर को लेकर स्थिति साफ होगी, क्रिसिल अंतिम रेटिंग पर फैसला लेगा।

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TRAI रिपोर्ट: 2027 तक 3.07 ट्रिलियन का होगा देश का मीडिया व एंटरटेनमेंट सेक्टर

टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) ने साल 2024–25 के दौरान डिजिटल एड्रेसेबल सिस्टम (DAS) के 500 से ज्यादा ऑडिट किए।

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Published - Thursday, 08 January, 2026
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टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) ने साल 2024–25 के दौरान डिजिटल एड्रेसेबल सिस्टम (DAS) के 500 से ज्यादा ऑडिट किए। यह जानकारी TRAI ने अपनी एनुअल रिपोर्ट 2024–25 में दी है। इन ऑडिट्स के जरिए ब्रॉडकास्टिंग और केबल टीवी सेक्टर में नियमों के पालन और पारदर्शिता पर खास ध्यान दिया गया।

TRAI के मुताबिक टीवी और रेडियो ब्रॉडकास्टिंग इंडस्ट्री भारत के मीडिया और एंटरटेनमेंट सेक्टर का एक अहम हिस्सा बनी हुई है। देश की युवा आबादी और जानकारी व मनोरंजन की बढ़ती मांग से इस इंडस्ट्री को लगातार फायदा मिल रहा है। इंडस्ट्री के आंकड़ों का हवाला देते हुए TRAI ने बताया कि भारत का मीडिया और एंटरटेनमेंट सेक्टर 2024 में 3.3 फीसदी की बढ़त के साथ 2.5 ट्रिलियन रुपये तक पहुंच गया। अनुमान है कि यह सेक्टर 2027 तक बढ़कर 3.07 ट्रिलियन रुपये का हो जाएगा और इस दौरान इसकी सालाना ग्रोथ दर करीब 7 फीसदी रहेगी।

समीक्षा अवधि के दौरान TRAI ने ब्रॉडकास्टिंग और केबल सेवाओं को मजबूत करने के लिए कई रेगुलेटरी कदम उठाए। इनमें नेशनल ब्रॉडकास्टिंग पॉलिसी पर कंसल्टेशन पेपर और सिफारिशें, एफएम रेडियो चैनलों की नीलामी के लिए रिजर्व प्राइस, इंटरकनेक्शन रेगुलेशंस में बदलाव, डिजिटल एड्रेसेबल सिस्टम से जुड़े ऑडिट प्रावधान और प्राइवेट ब्रॉडकास्टर्स के लिए डिजिटल रेडियो ब्रॉडकास्टिंग पॉलिसी तैयार करना शामिल है। इसके अलावा TRAI ने टेलीकम्युनिकेशंस एक्ट 2023 के तहत ग्राउंड-बेस्ड ब्रॉडकास्टर्स और सर्विस ऑथराइजेशन के लिए भी एक रेगुलेटरी फ्रेमवर्क जारी किया।

निगरानी और नियमों के पालन के तहत TRAI ने 2024–25 में एम्पैनल्ड ऑडिटर्स के जरिए कुल 518 डिजिटल एड्रेसेबल सिस्टम का ऑडिट कराया। इसका मकसद पारदर्शिता, जवाबदेही और ऑपरेशनल एफिशिएंसी को मजबूत करना था।

TRAI के अनुसार भारत का ब्रॉडकास्टिंग सिस्टम केबल टीवी, डायरेक्ट-टू-होम (DTH), हेडएंड-इन-द-स्काई (HITS) और इंटरनेट प्रोटोकॉल टेलीविजन (IPTV) प्लेटफॉर्म्स के जरिए चलता है। रिपोर्ट में दिए गए इंडस्ट्री डेटा के मुताबिक देश में करीब 6 करोड़ केबल टीवी घर हैं, लगभग 20 लाख HITS सब्सक्राइबर हैं और 31 मार्च 2025 तक 5.69 करोड़ से ज्यादा एक्टिव DTH सब्सक्राइबर मौजूद थे। IPTV सेवाएं अभी शुरुआती दौर में हैं और इस अवधि में इनके करीब 7 लाख सब्सक्राइबर दर्ज किए गए।

टीवी ब्रॉडकास्टिंग सेक्टर में करीब 329 ब्रॉडकास्टर्स काम कर रहे हैं, जो सूचना और प्रसारण मंत्रालय से मंजूरी पाए करीब 918 प्राइवेट सैटेलाइट टीवी चैनल चला रहे हैं। इनमें 232 स्टैंडर्ड डेफिनिशन पेड चैनल और 101 हाई डेफिनिशन पेड चैनल शामिल हैं, जिन्हें 35 ब्रॉडकास्टर्स ऑपरेट करते हैं। डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर में एक HITS ऑपरेटर, चार DTH ऑपरेटर्स और 53 IPTV ऑपरेटर्स शामिल हैं। इसके अलावा जनवरी 2022 तक देश में 81,700 से ज्यादा रजिस्टर्ड लोकल केबल ऑपरेटर्स थे।

पब्लिक ब्रॉडकास्टर प्रसार भारती की मौजूदगी ऑल इंडिया रेडियो, दूरदर्शन और फ्री-टू-एयर DTH प्लेटफॉर्म DD फ्री डिश के जरिए मजबूत बनी रही। TRAI के मुताबिक DD फ्री डिश भारत का सबसे बड़ा DTH प्लेटफॉर्म है, जो करीब 4.9 करोड़ घरों तक पहुंच रखता है, खासतौर पर ग्रामीण, दूरदराज और कम आय वाले इलाकों में। इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल मनोरंजन के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि से जुड़ी जानकारी पहुंचाने के लिए भी बड़े स्तर पर किया जाता है।

वित्तीय मोर्चे पर TRAI ने बताया कि 2024 के अंत तक भारतीय टेलीविजन इंडस्ट्री की कुल कमाई 67,900 करोड़ रुपये रही। इसमें से 38,500 करोड़ रुपये सब्सक्रिप्शन से आए जबकि 29,400 करोड़ रुपये विज्ञापन से हासिल हुए। इससे साफ है कि इस सेक्टर में कंज्यूमर पेमेंट और विज्ञापन दोनों की अहम भूमिका बनी हुई है।

रेडियो ब्रॉडकास्टिंग सेक्टर ने भी साल के दौरान स्थिर प्रदर्शन किया। प्राइवेट एफएम रेडियो ऑपरेटर्स द्वारा TRAI को दी गई जानकारी के मुताबिक 31 मार्च 2025 तक देश में 388 प्राइवेट एफएम रेडियो स्टेशन चालू थे। इसके अलावा ऑल इंडिया रेडियो 591 चैनल चला रहा था। कम्युनिटी रेडियो का भी दायरा बढ़ा है, जहां 639 में से 531 स्टेशन ऑपरेशनल हैं। 2024–25 में प्राइवेट एफएम रेडियो स्टेशनों की विज्ञापन से होने वाली कमाई 1,818.71 करोड़ रुपये रही।

TRAI ने दोहराया कि तेज़ी से बदलती टेक्नोलॉजी और डिजिटल बदलाव के दौर में वह ब्रॉडकास्टिंग सेक्टर के संतुलित विकास, उपभोक्ताओं की सुरक्षा और सभी के लिए बराबरी का माहौल बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

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'TV9 Media Network' में शामिल होंगी प्रीति साहनी

Fortune India और OPEN Media की CEO रहीं प्रीति ने आरपी–संजिव गोयनका ग्रुप से विदाई ले ली है। सूत्रों के मुताबिक, वह TV9 Media Network में सीनियर लीडरशिप भूमिका में शामिल होने जा रही हैं।

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Published - Wednesday, 07 January, 2026
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Wednesday, 07 January, 2026
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प्रीति साहनी ने 'RP–Sanjiv Goenka Group' के अंतर्गत आने वाले Fortune India और OPEN Media के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पद से इस्तीफा दे दिया है। सूत्रों के अनुसार, वह अगले सप्ताह TV9 Media Network में एक सीनियर लीडरशिप भूमिका संभालने जा रही हैं।

इस घटनाक्रम पर हमारी सहयोगी वेबसाइट e4m ने प्रीति सहनी और TV9 Media Network के शीर्ष प्रबंधन से संपर्क करने की कोशिश की, हालांकि खबर लिखे जाने तक किसी भी पक्ष से आधिकारिक पुष्टि या प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी। प्रीति को जनवरी 2024 में Fortune India और OPEN Media का CEO नियुक्त किया गया था।

उन्हें इन दोनों प्रतिष्ठित ब्रांड्स के संपादकीय और बिज़नेस तालमेल को मज़बूत करने, साथ ही प्रिंट और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अगले चरण की ग्रोथ को आगे बढ़ाने की ज़िम्मेदारी सौंपी गई थी। उनके कार्यकाल के दौरान, उन्होंने ब्रांड पोजिशनिंग को स्पष्ट करने और तेज़ी से बदलते मीडिया परिदृश्य में संस्थानों को प्रतिस्पर्धी बनाए रखने पर खास ध्यान दिया।

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फॉर्च्यून इंडिया और OPEN मीडिया की CEO प्रीति साहनी ने दिया इस्तीफा

आरपी–संजिव गोयनका ग्रुप के तहत फॉर्च्यून इंडिया और OPEN मीडिया की मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रीति साहनी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। जनवरी 2024 में शुरू हुआ उनका कार्यकाल अब समाप्त हो गया है।

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Published - Wednesday, 07 January, 2026
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Wednesday, 07 January, 2026
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RP–Sanjiv Goenka Group के अंतर्गत Fortune India और OPEN Media की मुख्य कार्यकारी अधिकारी Preeti Sahni ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उच्च पदस्थ सूत्रों ने इस घटनाक्रम की पुष्टि की है। साहनी का कार्यकाल जनवरी 2024 में शुरू हुआ था।

CEO के रूप में, प्रीति साहनी को संपादकीय फोकस को धार देने, ब्रांड पोजिशनिंग मजबूत करने और मल्टी-प्लेटफॉर्म बिज़नेस ग्रोथ को गति देने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। उनके नेतृत्व में दोनों प्रकाशनों ने ऐसे दौर का सामना किया, जहां मीडिया इंडस्ट्री में पाठक व्यवहार, विज्ञापनदाताओं की अपेक्षाएं और डिजिटल-फर्स्ट खपत तेज़ी से बदल रही थीं।

आरपी–संजिव गोयनका ग्रुप से पहले साहनी ने 'Network18 Media & Investments Limited' में सात वर्षों से अधिक समय तक काम किया। वहां वह 'Forbes India' की चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर रहीं और साथ ही सीनियर वाइस प्रेसिडेंट – इंटरनेशनल बिज़नेस के रूप में वैश्विक साझेदारियों और प्रीमियम मीडिया गठबंधनों का नेतृत्व किया।

करीब दो दशकों के करियर में साही ने 'The Times Group, India Today Group' और 'Hindustan Times' जैसे प्रमुख मीडिया संस्थानों में नेतृत्व भूमिकाएं निभाईं। इसके अलावा, Oracle में कॉर्पोरेट कंसल्टिंग का अनुभव भी उनके प्रोफाइल में शामिल रहा, जिसने उनकी रणनीतिक और टेक्नोलॉजी समझ को और मज़बूत किया।

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पांच साल बाद प्राइम वीडियो से अलग हुईं अदिति चड्डा

अदिति चड्डा ने प्राइम वीडियो से अलग होने का ऐलान किया है।

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Published - Wednesday, 07 January, 2026
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Wednesday, 07 January, 2026
AditiChada78

अदिति चड्डा ने प्राइम वीडियो से अलग होने का फैसला किया है। उन्होंने स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म और उसकी पैरेंट कंपनी एमेजॉन MGM स्टूडियोज के साथ पांच साल का सफर पूरा किया है। अपने करियर में वे इससे पहले वायकॉम18, मोंडेलीज इंटरनेशनल, मैरिको और वैष्णवी कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस जैसी कंपनियों के साथ भी काम कर चुकी हैं।

लिंक्डइन पर इस बारे में जानकारी साझा करते हुए अदिति चड्डा ने लिखा, “पांच शानदार सालों के बाद मैं प्राइम वीडियो को अलविदा कह रही हूं। इस सफर के लिए मैं दिल से आभारी हूं और मुझे गर्व है। भारत में ब्रैंड को बनाने और उसे नई पहचान दिलाने में मुझे जो मौका मिला, उस पर मुझे बेहद खुशी है। हमने मिलकर जो हासिल किया है, उस पर मुझे बहुत गर्व है। इस काम ने मुझे चुनौती दी, आगे बढ़ाया और मुझे बहुत कुछ सिखाया, ये अनुभव और सीख मैं हमेशा अपने साथ रखूंगी।”

अदिति चड्डा 2021 में प्राइम वीडियो इंडिया में पीआर मैनेजर के तौर पर जुड़ी थीं। इसके बाद उन्होंने बेहद प्रतिस्पर्धी स्ट्रीमिंग मार्केट में ब्रैंड की कम्युनिकेशन और पहचान मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई। प्राइम वीडियो से अलग होने के साथ ही उन्होंने संकेत दिया है कि वे जल्द ही अपनी अगली नई भूमिका की शुरुआत करेंगी।

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विग्नेश नारायणन को जियो प्लेटफॉर्म्स में बड़ी जिम्मेदारी : JioPC संभालेंगे

जियो प्लेटफॉर्म्स ने विग्नेश नारायणन को नई जिम्मेदारी सौंपी है। अब वह उपाध्यक्ष के तौर पर JioPC का नेतृत्व करेंगे और घरेलू स्तर पर इसके विस्तार पर फोकस करेंगे।

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Published - Wednesday, 07 January, 2026
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Wednesday, 07 January, 2026
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Jio Platforms में नेतृत्व स्तर पर अहम बदलाव हुआ है। कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी Vignesh Narayanan अब अपने उपाध्यक्ष (Vice President) की भूमिका में JioPC को संभालेंगे। इस नई जिम्मेदारी के तहत वह प्रोडक्ट, टेक्नोलॉजी और प्लेटफॉर्म टीमों के साथ मिलकर JioPC के लिए मजबूत आधार तैयार करेंगे, ताकि देशभर में इसके घरेलू उपयोग और ग्रोथ को रफ्तार दी जा सके।

इससे पहले विग्नेश नारायणन मई 2023 से दिसंबर 2025 तक जियो में Vice President – Jio Ads की भूमिका निभा चुके हैं। इस दौरान उन्होंने एजेंसियों और प्रमुख ब्रांड्स के साथ रणनीतिक साझेदारियां विकसित कीं, जिससे जियो एड्स के बिज़नेस अवसरों को मजबूती मिली और विज्ञापन इकोसिस्टम को विस्तार मिला।

जियो से पहले विग्नेश नारायणन ने लगभग दो साल तक Airtel Ads में VP – Head of Business के रूप में काम किया था। वहां उन्होंने डिजिटल विज्ञापन और ब्रांड सॉल्यूशंस के क्षेत्र में अहम योगदान दिया।

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