वॉइट हाउस ने कहा कि ये संगठन कट्टरपंथी जलवायु नीतियों, ग्लोबल गवर्नेंस और वैचारिक कार्यक्रमों को बढ़ावा देते हैं, जो अमेरिकी संप्रभुता और आर्थिक ताकत के साथ टकराव में हैं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को एक बड़ा कदम उठाते हुए एक मेमोरंडम पर हस्ताक्षर किया है, जिससे अमेरिका उन 60 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय संगठनों और संस्थाओं से अलग हो जाएगा, जो अमेरिका के हितों के खिलाफ काम करते हैं। इसमें भारत की अगुआई वाला इंटरनेशनल सोलर अलायंस (ISA) भी शामिल है।
इस जानकारी के सामने आने के बाद वरिष्ठ पत्रकार हर्षवर्धन त्रिपाठी ने उनके इस कदम पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने एक्स पर लिखा, डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका को 66 अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से बाहर कर लिया है और कहा है कि इन संगठनों से अमेरिकी हितों को नुकसान हो रहा था। इनमें 31 संस्थाएँ संयुक्त राष्ट्र से जुड़ी हैं, जबकि 35 अन्य वैश्विक संस्थाएँ शामिल हैं।
ट्रंप के इस फैसले से साफ संकेत मिलता है कि वे दुनिया की मौजूदा अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को बदलने की कोशिश कर रहे हैं। सवाल यह है कि क्या अमेरिका इस तरह मनमानी फैसले लेकर लंबे समय तक ताकतवर बना रह पाएगा, और अगर ऐसा हुआ तो वह दुनिया के साथ आगे क्या-क्या करेगा।
यह स्थिति वैश्विक संतुलन और भविष्य की अंतरराष्ट्रीय राजनीति को लेकर गंभीर चिंताएँ खड़ी करती है। आपको बता दें, ट्रंप प्रशासन ने इंटरनेशनल सोलर अलायंस और 65 अन्य एजेंसियों को अमेरिका विरोधी, बेकार या फिजूलखर्ची वाले अंतरराष्ट्रीय संगठन बताया है। वॉइट हाउस ने कहा कि ये संगठन कट्टरपंथी जलवायु नीतियों, ग्लोबल गवर्नेंस और वैचारिक कार्यक्रमों को बढ़ावा देते हैं, जो अमेरिकी संप्रभुता और आर्थिक ताकत के साथ टकराव में हैं।
#DonaldTrump ने अमेरिका को 66 संस्थाओं से बाहर कर लिया है और कहा कि, इनसे अमेरिकी हित प्रभावित हो रहे थे। इसमें 31 संस्थाएं संयुक्त राष्ट्र संघ से जुड़ी हुई हैं और 35 दूसरी संस्थाएं हैं। डोनाल्ड ट्रंप दुनिया का पूरा ढाँचा ही बदलते दिख रहे हैं। अमेरिका इस तरह से मनमानी करके… https://t.co/56V3E4hWsJ
— हर्ष वर्धन त्रिपाठी ??Harsh Vardhan Tripathi (@MediaHarshVT) January 8, 2026
वरिष्ठ पत्रकार अमिताभ अग्निहोत्री ने ‘TV9 उत्तर प्रदेश’ और उनके डिबेट शो ‘अब उत्तर चाहिए’ से अलग होने की घोषणा की है। वे अपनी नई शुरुआत की तैयारियाँ कर रहे हैं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
वरिष्ठ पत्रकार अमिताभ अग्निहोत्री ने लोकप्रिय हिंदी न्यूज चैनल TV9 उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड से अपनी पारी को समाप्त कर दिया है और इससे जुड़ा डिबेट शो ‘अब उत्तर चाहिए’ में अब शामिल नहीं होंगे। अग्निहोत्री ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए यह जानकारी दी कि चैनल और शो दोनों से अलग होने के बाद हर शाम 5 बजे ‘अब उत्तर चाहिए’ में उन्हें ढूँढने की आवश्यकता नहीं रहेगी।
उन्होंने कहा कि वे जल्द ही एक 'बड़े मंच और नए मंच' पर दर्शकों से फिर मुलाकात करेंगे। अमिताभ अग्निहोत्री कई दशकों से भारतीय पत्रकारिता में सक्रिय हैं। टीवी9 उत्तर प्रदेश में अमिताभ अग्निहोत्री कंसल्टिंग एडिटर के रूप में चार साल तक जुड़े रहे और इस दौरान उन्होंने अपने विश्लेषण, डिबेट और धारदार पत्रकारिता के लिए दर्शकों के बीच एक मजबूत पहचान बनाई थी।
‘अब उत्तर चाहिए’ शो में उन्होंने सियासत से जुड़ी भारी बहसें, सामाजिक मुद्दों और राजनीतिक विवादों पर धारदार बहस प्रस्तुत की, जिससे दर्शकों और राजनीतिक आलोचकों दोनों के बीच उनकी छवि मजबूत रही। अग्निहोत्री ने अपने पोस्ट में यह संकेत भी दिया कि यह अलविदा केवल एक चैनल या शो के लिए है, लेकिन वे पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने नए अभियान के साथ फिर से सक्रिय होंगे।
आवश्यक सूचना -----------
— Amitabh Agnihotri (@Aamitabh2) January 8, 2026
बड़ी संख्या में आप सब मेरे प्रियजन लगातार यह पूछ रहे हैं कि क्या मैं TV9 उत्तर प्रदेश पर शाम 5 बजे आने वाले डिबेट शो --अब उत्तर चाहिए ---- में नहीं आऊंगा ??--- मैंने TV9 छोड़ा है तो स्वाभाविक है मैं इस डिबेट में भी नहीं रहूँगा ---इसलिए मेरा निवेदन है कि…
वरिष्ठ पत्रकार अमिताभ अग्निहोत्री ने ‘TV9 उत्तर प्रदेश’ और उनके डिबेट शो ‘अब उत्तर चाहिए’ से अलग होने की घोषणा की है। वे अपनी नई शुरुआत की तैयारियाँ कर रहे हैं।
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वरिष्ठ पत्रकार अमिताभ अग्निहोत्री ने लोकप्रिय हिंदी न्यूज चैनल TV9 उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड से अपनी पारी को समाप्त कर दिया है और इससे जुड़ा डिबेट शो ‘अब उत्तर चाहिए’ में अब शामिल नहीं होंगे। अग्निहोत्री ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए यह जानकारी दी कि चैनल और शो दोनों से अलग होने के बाद हर शाम 5 बजे ‘अब उत्तर चाहिए’ में उन्हें ढूँढने की आवश्यकता नहीं रहेगी।
उन्होंने कहा कि वे जल्द ही एक 'बड़े मंच और नए मंच' पर दर्शकों से फिर मुलाकात करेंगे। अमिताभ अग्निहोत्री कई दशकों से भारतीय पत्रकारिता में सक्रिय हैं। टीवी9 उत्तर प्रदेश में अमिताभ अग्निहोत्री कंसल्टिंग एडिटर के रूप में चार साल तक जुड़े रहे और इस दौरान उन्होंने अपने विश्लेषण, डिबेट और धारदार पत्रकारिता के लिए दर्शकों के बीच एक मजबूत पहचान बनाई थी।
‘अब उत्तर चाहिए’ शो में उन्होंने सियासत से जुड़ी भारी बहसें, सामाजिक मुद्दों और राजनीतिक विवादों पर धारदार बहस प्रस्तुत की, जिससे दर्शकों और राजनीतिक आलोचकों दोनों के बीच उनकी छवि मजबूत रही। अग्निहोत्री ने अपने पोस्ट में यह संकेत भी दिया कि यह अलविदा केवल एक चैनल या शो के लिए है, लेकिन वे पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने नए अभियान के साथ फिर से सक्रिय होंगे।
आवश्यक सूचना -----------
— Amitabh Agnihotri (@Aamitabh2) January 8, 2026
बड़ी संख्या में आप सब मेरे प्रियजन लगातार यह पूछ रहे हैं कि क्या मैं TV9 उत्तर प्रदेश पर शाम 5 बजे आने वाले डिबेट शो --अब उत्तर चाहिए ---- में नहीं आऊंगा ??--- मैंने TV9 छोड़ा है तो स्वाभाविक है मैं इस डिबेट में भी नहीं रहूँगा ---इसलिए मेरा निवेदन है कि…
प्रशासन ने कहा है कि फैज़-ए-इलाही मस्जिद पूरी तरह सुरक्षित है और फर्जी खबरें फैलाने वालों के खिलाफ जांच जारी है, जबकि इलाके में शांति बहाल रखे जाने के प्रयास भी तेज़ किए गए हैं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में 7 जनवरी 2026 की सुबह Municipal Corporation of Delhi (MCD) ने फैज़-ए-इलाही मस्जिद के पास अवैध अतिक्रमण हटाने के लिए बुलडोजर कार्रवाई की। इसके बावजूद सोशल मीडिया पर यह झूठ फैलाया गया कि मस्जिद को गिराया जा रहा है, जिससे तनाव फैल गया और कुछ लोगों ने पुलिस पर पत्थर चलाए, जिसमें पाँच पुलिसकर्मी घायल हुए।
वरिष्ठ पत्रकार और एंकर रुबिका लियाकत ने इस पूरी घटना की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने एक्स पर लिखा, देश की पुलिस पर पत्थर फेंकने वालों को वीडियो में कोई ‘शेर’ कह रहा है। इससे बड़ी जहालत क्या हो सकती है। सोशल मीडिया पर यह झूठ फैलाया गया कि ‘मस्जिद गिराई जा रही है’, जबकि सच्चाई यह है कि मस्जिद को खरोंच तक नहीं आई।
अदालत के आदेश के अनुसार तुर्कमान गेट स्थित फ़ैज़-ए-इलाही मस्जिद के आसपास का अतिक्रमण हटाया जाना था। यह कार्रवाई अचानक नहीं हुई। 24 नवंबर 2025 को डिप्टी कमिश्नर की अध्यक्षता में सुनवाई हुई, जिसमें DDA, L&DO और दिल्ली वक्फ बोर्ड के प्रतिनिधि शामिल थे।
उसी बैठक में अतिक्रमण हटाने का फैसला लिया गया, नोटिस जारी किए गए और तय प्रक्रिया अपनाई गई। फिर इतना आक्रोश क्यों? गैरकानूनी काम को आखिर कैसे जायज़ ठहराया जा सकता है? आपको बता दें, पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में लिया है और एफआईआर दर्ज की है। प्रशासन ने कहा है कि फैज़-ए-इलाही मस्जिद पूरी तरह सुरक्षित है और फर्जी खबरें फैलाने वालों के खिलाफ जांच जारी है, जबकि इलाके में शांति बहाल रखे जाने के प्रयास भी तेज़ किए गए हैं।
देश की पुलिस पर पत्थरों से हमला करने वालों को विडियो में कोई शख़्स शेर कह रहा है। इससे बड़ी जहालत और क्या हो सकती है!
— Rubika Liyaquat (@RubikaLiyaquat) January 7, 2026
‘मस्जिद गिरा रहे हैं’ ये झूठ सोशल मीडिया पर फैलाया गया
जबकि सच ये हे कि मस्जिद को खरोंच तक नहीं आई
कोर्ट ने आदेश दिया कि तुर्कमान गेट पर स्थित फ़ैज़-ए-इलाही… pic.twitter.com/lXAVFbrvbO
बांग्लादेश ने ICC से अपने मैचों को भारत से हटाकर श्रीलंका में स्थानांतरित करने का अनुरोध किया है, लेकिन ICC ने यह स्पष्ट किया है कि शेड्यूल और मूल स्थल परिवर्तन संभव नहीं है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) ने 2026 टी20 विश्व कप के अपने मैच भारत में नहीं खेलने का रूख दोहराया है। बांग्लादेश ने ICC से अपने मैचों को भारत से हटाकर श्रीलंका में स्थानांतरित करने का अनुरोध किया है, लेकिन ICC ने यह स्पष्ट किया है कि शेड्यूल और मूल स्थल परिवर्तन संभव नहीं है और टीम को निर्धारित अनुसार भारत में खेलना होगा।
इस मामले पर वरिष्ठ खेल पत्रकार विक्रांत गुप्ता ने अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स से एक पोस्ट कर अपनी राय दी। उन्होंने लिखा, कुछ लोग बांग्लादेश के भारत में खेलने से इनकार करने और भारत-पाकिस्तान मामले पर आईसीसी के रुख को एक जैसा बता रहे हैं, जो पूरी तरह गलत है।
पहली बात, भारत-पाक के बीच वर्षों से खराब इतिहास और मिसालें रही हैं, जबकि भारत-बांग्लादेश के रिश्तों में यह तनाव हाल का है। दूसरी बात, चाहे जितनी कोशिश की जाए, बांग्लादेश आईसीसी के लिए उतना अनिवार्य नहीं है जितना भारत-पाक मैच होता है।
बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड का बयान उनकी सरकार के आदेश से बिल्कुल अलग है, जिसमें कहा गया है कि वे टी20 विश्व कप के सुचारु आयोजन के लिए “मैत्रीपूर्ण और व्यावहारिक समाधान” की उम्मीद करते हैं। अब देखना यह है कि आखिरकार क्या होता है। आपको बता दें, इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में बांग्लादेशी तेज़ गेंदबाज़ मुस्तफिज़ुर रहमान को उनकी टीम से रिलीज़ कर दिया गया, जिससे द्विपक्षीय तनाव बढ़ गया है।
See quite a few equating Bangladesh’s refusal to play in India and the ICC response to the India-Pakistan situation. That’s quite dumb: (a) India-Pak have a bad history/precedent for years now while Ind-Bangla is more recent and (b) much as they are trying Bangladesh aren’t…
— Vikrant Gupta (@vikrantgupta73) January 7, 2026
यानी 150 करोड़ की आबादी वाले देश में सालाना 10 लाख रुपये से ज़्यादा (करीब 83 हज़ार रुपये महीना या 920 डॉलर) कमाने वाले लोगों की कुल संख्या सिर्फ़ 1 करोड़ 61 लाख है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
भारत में उच्च आय वाले करदाताओं की संख्या अपेक्षा से कम है, जिससे देश में आय असमानता और काले धन की स्थिति पर बहस तेज़ हो गई है। सरकारी आंकड़ों और टैक्स विशेषज्ञों के अनुसार, 50 लाख रुपये या उससे अधिक वार्षिक आय दिखाने वाले टैक्सपेयर्स की संख्या अपेक्षाकृत मामूली है, जबकि ज़्यादातर आयकर रिटर्न 10 लाख रुपये से नीचे की आय वालों ने भरे हैं।
इस मामले पर वरिष्ठ पत्रकार अजय कुमार ने अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स से एक पोस्ट कर आँकड़े समझाए। उन्होंने लिखा, भारत में काले धन की स्थिति समझने के लिए ज़्यादा दिमाग़ लगाने की ज़रूरत नहीं है, क्योंकि आँकड़े खुद ही सच बयान कर रहे हैं।
सरकार द्वारा जारी आयकर (इनकम टैक्स) के आँकड़ों के अनुसार दिसंबर 2025 तक पूरे देश में व्यक्तिगत आयकर भरने वालों की कुल संख्या 8 करोड़ 19 लाख है। इनमें से सिर्फ़ 11 लाख भारतीय ऐसे हैं जिनकी सालाना आय 50 लाख रुपये से ज़्यादा है, जबकि 10 लाख से 50 लाख रुपये सालाना कमाने वालों की संख्या लगभग 1 करोड़ 50 लाख है।
यानी 150 करोड़ की आबादी वाले देश में सालाना 10 लाख रुपये से ज़्यादा (करीब 83 हज़ार रुपये महीना या 920 डॉलर) कमाने वाले लोगों की कुल संख्या सिर्फ़ 1 करोड़ 61 लाख है। इसका सीधा मतलब यह है कि बाकी लगभग 148.4 करोड़ लोग इस आय स्तर से नीचे हैं, और ऐसे में देश में तरक़्क़ी और आम जनता की आर्थिक स्थिति को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। आपको बता दें, पिछले कुछ वर्षों में 50 लाख से अधिक कमाने वाले करदाताओं की संख्या बढ़ी है, लेकिन यह कुल आबादी का बहुत छोटा हिस्सा ही है।
भारत में काले धन का बोलबाला कितना मज़बूत है, इसको जानने और समझने के लिए दिमाग़ लगाने कि ज़रूरत बिलकुल नहीं है। आँकड़े सब कुछ खुद-ब-खुद बोल रहे हैं।
— Ajay Kumar (@AjayKumarJourno) January 7, 2026
सरकार के द्वारा जारी Income Tax Data के आघार पर Dec 2025 में Personal Income Tax जमा करने वालो कि कुल संख्य पूरे देश में 8 करोड़ 19… pic.twitter.com/yjul2nlgKb
अब जिन लोगों के नाम सूची से हटा दिए गए हैं, वे 6 फरवरी 2026 तक दावे और आपत्तियाँ दर्ज कर सकते हैं ताकि उन्हें अंतिम मतदाता सूची में जोड़ा जा सके। उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
special-intensive-revision-sir-constitutional-process-sudhanshu-trivedi-uttar-pradeshउत्तर प्रदेश में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत मतदाता सूची से कुल लगभग 2.89 करोड़ नाम हटा दिए गए हैं, जो ड्राफ्ट मतदाता सूची का करीब 18.7% हिस्सा है। इस मामले पर बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद डॉक्टर सुधांशु त्रिवेदी ने एक टीवी डिबेट में अपने विचार व्यक्त किये।
उन्होंने कहा, SIR एक सामान्य संवैधानिक प्रक्रिया है और यह 20–22 वर्षों के बाद हो रही है। चूंकि उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य है और यहां जनसंख्या भी सबसे अधिक है, इसलिए तुलनात्मक दृष्टि से नाम कटने वालों की संख्या यहां ज्यादा दिखाई देती है। चुनाव आयोग ने बहुत स्पष्ट रूप से पूरा विवरण दिया है कि कितने लोग मृत पाए गए, कितने लोग दूसरी जगह शिफ्ट हो चुके हैं, कितनों के नाम डबल वोटर के रूप में दर्ज थे और कितने लोग अवेलेबल नहीं हैं।
जो यह कहा जा रहा है कि इस प्रक्रिया में कितने घुसपैठिए निकाले गए, तो इसे अपने-आप समझना चाहिए कि SIR की प्रक्रिया के बाद जो लोग गायब हैं या सामने नहीं आ रहे हैं, वे घुसपैठिए हैं या कौन हैं। उदाहरण के तौर पर, बिहार में 42 लाख लोगों के नाम कटे, लेकिन 42 लोग भी सामने नहीं आए।
मान लीजिए उत्तर प्रदेश में 70 लाख लोग गायब हैं, तो जो लोग अवेलेबल नहीं हैं, उनके नाम पर भी इस बात की संभावना रहती थी कि कोई और आकर वोट डाल दे।जो संभावना अब समाप्त हो गई है। अब SIR की प्रक्रिया में यदि इतने लोग गायब हैं और उनमें से कोई भी दावेदार सामने नहीं आ रहा, तो यह समझा जा सकता है कि ये कौन लोग हैं? जो संदिग्ध और संदेहास्पद परिस्थितियों में वोटर लिस्ट में दर्ज थे, लेकिन वास्तविकता में उनका भौतिक सत्यापन नहीं हो पा रहा है।
SIR एक सामान्य संवैधानिक प्रक्रिया है और यह 20–22 वर्षों के बाद हो रही है। चूंकि उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य है और यहां जनसंख्या भी सबसे अधिक है, इसलिए तुलनात्मक दृष्टि से नाम कटने वालों की संख्या यहां ज्यादा दिखाई देती है। चुनाव आयोग ने बहुत स्पष्ट रूप से पूरा विवरण दिया… pic.twitter.com/5vskv0azag
— Dr. Sudhanshu Trivedi (@SudhanshuTrived) January 6, 2026
जेएनयू प्रशासन ने वीडियो के आधार पर दिल्ली पुलिस को शिकायत भेजकर एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया है और कहा है कि ऐसी गतिविधियाँ विश्वविद्यालय को घृणा का केन्द्र नहीं बनने दे सकतीं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में सुप्रीम कोर्ट द्वारा उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत न मिलने के बाद कुछ छात्रों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ विवादित नारे लगाए, जिसमें ‘मोदी-शाह की कब्र खुदेगी’ जैसे भड़काऊ शब्द भी शामिल थे।
इस मामले पर वरिष्ठ पत्रकार दीपक चौरसिया ने अपने सोशल मीडिया हैंडल से एक पोस्ट कर कहा कि देश को असली खतरा अर्बन नक्सलियों से है। उन्होंने लिखा, देश से नक्सली भले ही खत्म हो जाएँ, लेकिन असली खतरा उन तथाकथित अर्बन नक्सलियों से है, जो समाज के भीतर बारूद की तरह काम कर रहे हैं।
दिल्ली दंगों के कथित मास्टरमाइंडों को सुप्रीम कोर्ट से ज़मानत न मिलने के बाद जेएनयू में ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ फिर सक्रिय होता दिख रहा है। जिस तरह खुलेआम प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री के खिलाफ नारे लगाए जा रहे हैं, उससे यह संकेत मिलता है कि इनके पीछे भारत-विरोधी ताकतें काम कर रही हैं और इन्हें मोहरे की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है।
यह भी याद रखना चाहिए कि उमर खालिद इसी जेएनयू से जुड़ा रहा है और अब उसके पक्ष में आवाज़ें अमेरिका से उठती दिखाई दे रही हैं। आपको बता दें, जेएनयू प्रशासन ने वीडियो के आधार पर दिल्ली पुलिस को शिकायत भेजकर एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया है और कहा है कि ऐसी गतिविधियाँ विश्वविद्यालय को घृणा का केन्द्र नहीं बनने दे सकतीं।
देश से नक्सली तो ख़त्म हो जाएंगे लेकिन असली खतरा इन अर्बन नक्सलियों से है जो समाज में बारूद का काम कर रहे हैं. दिल्ली दंगों के मास्टरमाइंडों को सुप्रीम कोर्ट से जमानत नहीं मिलने पर JNU में टुकड़े-टुकड़े गैंग फिर एक्टिव हो गया है. जिस तरह ये पीएम मोदी और गृह मंत्री के लिए बे झिझक…
— Deepak Chaurasia (@DChaurasia2312) January 6, 2026
ट्रंप ने यह भी कहा कि अगर भारत रूसी तेल के मसले पर उनके अनुरूप सहयोग नहीं करता है तो अमेरिका जल्दी से टैरिफ बढ़ा सकता है, जिससे भारत को भारी नुकसान हो सकता है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ़ करते हुए कहा है कि 'मोदी एक अच्छे आदमी हैं' और 'वे जानते थे कि मैं खुश नहीं था।' ट्रंप यह बात 5 जनवरी 2026 को वॉशिंगटन से फ्लोरिडा में एयर फ़ोर्स वन पर मीडिया से बातचीत में कह रहे थे। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस बयान का वरिष्ठ पत्रकार अजय कुमार ने विश्लेषण किया है।
उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट की और लिखा, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने एक बार फिर कहा कि प्रधानमंत्री मोदी 'अच्छे आदमी' हैं, लेकिन यह बात उन्होंने इस संदर्भ में कही कि मोदी उन्हें खुश करना चाहते थे, इसलिए भारत ने रूस से तेल आयात कम किया। इसका मतलब यह निकाला जा रहा है कि अमेरिकी टैरिफ के दबाव में भारत को झुकना पड़ा।
मामला यहीं खत्म नहीं होता, क्योंकि ट्रंप के मुताबिक अमेरिका आगे भी भारत पर टैरिफ बढ़ा सकता है, यानी भारत के लिए मुश्किलें अभी खत्म नहीं हुई हैं। वेनेजुएला में आक्रामक कार्रवाई के बाद अमेरिका की नजरें कोलंबिया, ईरान और अन्य देशों पर भी बताई जा रही हैं। ‘डॉन’ डोनाल्ड ट्रंप अब खुद को एक तरह का ‘अंतरराष्ट्रीय डॉन’ बनाने की कोशिश में दिखते हैं।
इसका असर यह भी हो सकता है कि ताइवान के मुद्दे पर चीन और यूक्रेन के मामले में रूस को खुली छूट मिल जाए। ऐसे माहौल में सवाल यह है कि क्या भारत सरकार इस स्थिति का फायदा उठाकर संसद में किए गए अपने वादे-पाक अधिकृत कश्मीर को भारत का हिस्सा बनाने की दिशा में कोई ठोस कदम उठाएगी?
आपको बता दें, ट्रंप ने यह भी कहा कि अगर भारत रूसी तेल के मसले पर उनके अनुरूप सहयोग नहीं करता है तो अमेरिका जल्दी से टैरिफ बढ़ा सकता है, जिससे भारत को भारी नुकसान हो सकता है। ट्रंप की इस टिप्पणी को व्यापारिक दबाव और रणनीतिक कूटनीति दोनों की मिसाल के रूप में देखा जा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ‘अच्छे आदमी है” - अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने एक बार फिर दोहराया।
— Ajay Kumar (@AjayKumarJourno) January 5, 2026
लेकिन context ये था - प्रधानमंत्री मोदी, मुझे खुश करना चाहते थे, इसलिए भारत ने रूस से तेल import करना कम किया - ट्रंप ने इस बात पर ज़ोर दिया।
मतलब, भारत ने अमेरिकी #tariff के आगे घुटने टेक दिये।… pic.twitter.com/5BNcLA1zTj
अपने इस फैसले के बारे में सूचना देते हुए सौरभ द्विवेदी ने दो ट्वीट किए हैं। जिनमें से एक में उन्होंने यहां से ‘अलग होने’ और दूसरे में उन्होंने एक ‘अल्पविराम के बाद नई यात्रा’ का इशारा किया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
इंडिया टुडे समूह में संपादक और डिजिटल प्लेटफॉर्म द लल्लनटॉप के संपादक सौरभ द्विवेदी ने यहां से अलविदा कह दिया है। सौरभ द्विवेदी लंबे वक्त से इंडिया टुडे से जुड़े हैं। वह द लल्लनटॉप के संस्थापक संपादक हैं। उनके नेतृत्व में इस डिजिटल प्लेटफॉर्म ने हिंदी मीडिया में अपनी एक अलग पहचान बनाई।
इस जानकारी के सामने आने के बाद वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने भी एक पोस्ट कर कहा कि ‘द लल्लनटॉप’ वाकई एक ट्रेंडसेटर रहा है। उन्होंने लिखा, सौरभ, हम सब आपको बहुत याद करेंगे और मैं तो आपको और भी ज़्यादा मिस करूँगा। मेरे लिए ‘नेता नगरी’ हमेशा एक खास शो रहेगा और ‘द लल्लनटॉप’ वाकई एक ट्रेंडसेटर रहा है।
उम्मीद है कि आगे चलकर हमारे रास्ते फिर मिलेंगे। आपको ढेरों शुभकामनाएँ और ईश्वर का आशीर्वाद। आपको बता दें, अपने इस फैसले के बारे में सूचना देते हुए सौरभ द्विवेदी ने दो ट्वीट किए हैं। जिनमें से एक में उन्होंने यहां से ‘अलग होने’ और दूसरे में उन्होंने एक ‘अल्पविराम के बाद नई यात्रा’ का इशारा किया है। फिलहाल, सौरभ के लल्लनटॉप से अलग होने की वजहें साफ नहीं हो पाई हैं। साथ ही उनके आगामी निर्णय को लेकर भी कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।
We will all miss you @saurabhtop and I will miss you even more. For me,Neta Nagri will always remain a special show . And @TheLallantop a real trend setter. Hopefully our paths will cross again. Good luck and god bless!⭐️? https://t.co/vQHigVZEOT
— Rajdeep Sardesai (@sardesairajdeep) January 5, 2026
इसका मतलब यह है कि अदालत के सामने मौजूद सबूत यह दिखाते हैं कि उमर और शरजील के भाषणों और गतिविधियों ने हिंसा की योजना बनाने और उसे बढ़ावा देने में भूमिका निभाई।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इंकार कर दिया है, जबकि इसी मामले में पाँच अन्य आरोपियों को ज़मानत मिल गई है। इस मामले पर वरिष्ठ पत्रकार राणा यशवंत ने अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स से एक पोस्ट की और अपनी राय व्यक्त की।
उन्होंने लिखा, सुप्रीम कोर्ट के आज के फ़ैसले में उमर खालिद और शरजील इमाम को ज़मानत देने से इनकार किया गया है। इस पर बहस चाहे जितनी हो, लेकिन देश की सर्वोच्च अदालत के निर्णय को समझना ज़रूरी है। अदालत ने साफ़ कहा है कि पहली नज़र में यूएपीए के तहत मामला बनता है और साज़िश तथा भड़काऊ भाषणों को हल्के में नहीं लिया जा सकता।
इसका मतलब यह है कि अदालत के सामने मौजूद सबूत यह दिखाते हैं कि उमर और शरजील के भाषणों और गतिविधियों ने हिंसा की योजना बनाने और उसे बढ़ावा देने में भूमिका निभाई। साथ ही यह सवाल भी उठता है कि बलात्कार और हत्या के दोषी राम रहीम को अब तक 405 दिनों की पैरोल कैसे और क्यों मिल चुकी है।
क्या क़ानून सभी के लिए समान है, या फिर कुछ लोगों के लिए अलग मानदंड अपनाए जाते हैं? आपको बता दें, अदालत ने कहा कि दोनों आरोपी यूएपीए के तहत दर्ज मामले में अपेक्षित मानदंड पर खरे नहीं उतरते हैं, इसलिए उन्हें रिहा नहीं किया जाएगा, लेकिन वे एक साल बाद या संरक्षित गवाहों के बयान के पूरा होने के बाद पुनः जमानत याचिका दाखिल कर सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट का आज का फ़ैसला कि उमर खालिद और शरजील इमाम को ज़मानत नहीं दी जाएगी, इस पर बहस चाहे जैसी और जितनी हो जाए, लेकिन देश की सबसे बड़ी अदालत के फ़ैसले को समझना ज़रूरी है. अदालत ने साफ़ कहा कि prima facie UAPA के तहत मामला बनता है, और साज़िश एवं भड़काऊ भाषणों को हल्के में… pic.twitter.com/RwMnl5j7ak
— Rana Yashwant (@RanaYashwant1) January 5, 2026