इस रिपोर्ट पर टिकी हैं प्रिंट इंडस्ट्री की निगाहें, लगाए जा रहे ये अनुमान

प्रिंट इंडस्ट्री के लोगों को इस रिपोर्ट का बेसब्री से इंतजार है

Last Modified:
Friday, 26 April, 2019
NEWSPAPER

इंडियन रीडरशिप सर्वे (IRS) 2019 की पहली तिमाही के डाटा जल्द जारी होने वाले हैं। इंडस्ट्री को इन डाटा का बेसब्री से इंतजार है। रिपोर्ट में इस बड़े सवाल का जवाब मिलने की उम्मीद है कि डिजिटल मीडिया के इस युग में प्रिंट का प्रदर्शन कैसा रहा है। इस बारे में हमारी सहयोगी वेबसाइट ‘एक्सचेंज4मीडिया’ (exchange4media) ने इंडस्ट्री के कुछ एक्सपर्ट्स के साथ बातचीत कर यह जानने की कोशिश की कि आखिर आईआरएस के डाटा को लेकर उन्हें क्या उम्मीदें हैं।

इस बारे में ‘मातृभूमि’ (Mathrubhumi) मीडिया समूह के जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर एमवी श्रेयम्स कुमार का कहना है, ‘भीषण बाढ़ और विभिन्न राजनीतिक व सामाजिक कारणों की वजह से वर्ष 2018 केरल के लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहा है। इसका प्रभाव सभी प्रकार के बिजनेस पर पड़ा है। अभी तो हम इस नुकसान की भरपाई में जुटे हैं। उम्मीद है कि आईआरएस की रिपोर्ट मार्केट और मीडिया के उपभोग को लेकर एक समग्र डाटा पेश करेगी, जिससे मार्केट में हमें अपनी वर्तमान स्थिति को समझने में काफी सहायता मिलेगी।’ श्रेयम्स कुमार की तरह प्रिंट मीडिया के अन्य दिग्गज भी इस रिपोर्ट का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

दैनिक भास्‍कर ग्रुप की चीफ कॉरपोरेट मार्केटिंग ऑफिसर काकून सेठी का कहना है,’हम आईआरएस रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं। हमारे पास हर तिमाही का डाटा मौजूद होगा। इस तरह से पूर्वानुमान लगाना इंडस्ट्री के लिए अच्छा है।’ ‘कन्नड़ प्रभा’ (Kannada Prabha) और ‘सुवर्णा न्यूज’ (Suvarna News) के बिजनेस हेड एनके अप्पाचू (N K Appachoo) का कहना है, ‘यह देखना वाकई में काफी दिलचस्प होगा कि अखबारों की रीडरशिप को लेकर आईआरएस की रिपोर्ट क्या कहती है। ‘ऑडिट ब्यूरो ऑफ सर्कुलेशन’  (ABC) के अनुसार कर्नाटक के अधिकांश अखबारों के सर्कुलेशन में गिरावट देखने को मिली है। मुझे लगता है कि रीडरशिप के मामले में आईआरएस 2019 की रिपोर्ट में ही ऐसा ही कुछ देखने को मिलेगा।’ वहीं, अधिकांश प्रिंट मीडिया प्लेयर्स को उम्मीद है कि आईआरएस 2019 के डाटा से पता चल जाएगा कि प्रिंट को पढ़ने वाले पाठकों की अभी भी बड़ी संख्या है।

इस बारे में ‘विक्तान ग्रुप’ (Vikatan Group) के मैनेजिंग डायरेक्टर बी. श्रीनिवासन का कहना है, ‘एक लंबे समय अंतराल के बाद आईआरएस 2017 से पाठकों के समग्र दृष्टिकोण के बारे में पता चला था। अपने अनुभव से हम यह भलीभांति जानते हैं कि बेशक डिजिटल मीडिया की ग्रोथ डबल अंक में हो गई हो, टीवी की पहुंच भी लगातार बढ़ रही है, लेकिन प्रिंट ने भी अपनी पहुंच और पाठक संख्या के मामले में काफी बढ़ोतरी की है। हमें उम्मीद है कि आईआरएस में ये डाटा शामिल होंगे।’

‘पंजाब केसरी’ ग्रुप के मालिक अमित चोपड़ा ने भी यही भरोसा जताया है कि उनके ग्रुप ने काफी बढ़ोतरी की है और आईआरएस में ये देखने को मिलेगा। उन्होंने कहा, ‘पिछले आईआरएस में नवोदय टाइम्स शामिल नहीं था। इस बार इसे शामिल किया गया है और इसका असर हमारी संख्या पर पड़ेगा। इस बात में कोई शक नहीं है कि डिजिटल की काफी ग्रोथ हुई है, लेकिन प्रिंट में भी कमी नहीं आई है। वास्तव में डिजिटल का उदय पब्लिशर्स के लिए काफी अच्छा है, क्योंकि इससे पेवॉल मॉडल (paywall model) काफी लोकप्रिय हो रहा है और हमें फायदा दे रहा है। कुल मिलाकर आईआरएस के डाटा से हमें काफी उम्मीदें हैं।’

तमिल अखबार ‘दिनामलार’ (Dinamalar) के नेशनल हेड (ऐडवर्टाइजिंग) मार्टिन किंग का कहना है, ‘हमारी इंडस्ट्री में आईआरएस की काफी वैल्यू है। मेरा मानना है कि भाषाई समाचार पत्रों के लिए मीडिया एजेंसियों और क्लाइंट्स को अखबार को और स्थानीय मजबूती देने की जरूरत है।’ वहीं, क्रिएटिव एक्सपर्ट भी इन डाटा को लेकर काफी उम्मीद जता रहे हैं। ‘डेंट्सू इंपैक्ट’ के प्रेजिडेंट अमित वाधवा का कहना है, ‘क्रिएटिविटी के नजरिये से देखें तो प्रिंट काफी दिलचस्प माध्यम है। पिछली बार के आईआरएस में हमें पता चल चुका है कि कंज्यूमर की जिंदगी में इसका कितना महत्व है। हमें इस बार कुछ दिलचस्प निष्कर्षों की उम्मीद कर रहे हैं, जो हमें और क्रिएटिव काम करने के लिए प्रेरित करेगा।’

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कोरोना संकट के बीच कई मैगजींस हुईं बंद, वहीं अरुण पुरी ने दिलाया ये भरोसा

कोरोना के खौफ ने मीडिया इंडस्ट्री को भी हिलाकर रख दिया है। भारत सहित पूरी दुनिया में स्थिति खराब है और आने वाले दिनों में इसके ज्यादा खराब होने की आशंका जताई जा रही है

Last Modified:
Thursday, 02 April, 2020
Aroon Purie

कोरोना के खौफ ने मीडिया इंडस्ट्री को भी हिलाकर रख दिया है। भारत सहित पूरी दुनिया में स्थिति खराब है और आने वाले दिनों में इसके ज्यादा खराब होने की आशंका जताई जा रही है। कोरोना को लेकर फैली अफवाहों के चलते लोगों के दिलोदिमाग में यह बात घर कर गई है कि अखबार भी वायरस फैला सकता है। इस वजह से अखबारों के सर्कुलेशन में तो कमी आई ही है, साथ ही उन्हें मिलने वाले विज्ञापन भी घटे हैं।

अकेले मध्य प्रदेश में 300 से अधिक छोटे और मझोले अखबार मालिकों ने अस्थायी रूप से प्रकाशन बंद कर दिया है। वहीं, मैगज़ीन भी इससे अछूती नहीं हैं। न्यूज़ीलैंड के विख्यात मैगज़ीन प्रकाशन ‘बाऊर मीडिया’ ने इस संकट की घड़ी में अपने हाथ खड़े कर दिए हैं। बाऊर मीडिया ‘द लिसनर, वुमन डे, न्यूजीलैंड वुमन वीकली, नॉर्थ एंड साउथ और नेक्स्ट’ नामक पत्रिकाओं का प्रकाशन करता है। इस संबंध में कंपनी के मुख्य कार्यकारी ब्रेंडन हिल का कहना है कि COVID-19 से मुकाबले के लिए चल रहे लॉकडाउन से मैगजींस के प्रकाशन पर रोक लगी हुई है और इससे व्यवसाय अस्थिरता की स्थिति में पहुंच गया है। लिहाजा, हमें मज़बूरी में प्रकाशन बंद करने का फैसला लेना पड़ रहा है। उन्होंने आगे कहा कि पत्रिकाएं विज्ञापन पर निर्भर करती हैं और मौजूदा हालातों को देखते हुए यह कहना मुश्किल है कब तक सब कुछ ठीक हो पाएगा।

बाऊर मीडिया ने अपनी मैगजींस के खरीदारों की तलाश करने के लिए व्यावसायिक सलाहकार फर्म EY को नियुक्त किया है। कंपनी ने इस फैसले के बारे में कर्मचारियों को आज सुबह ही जानकारी दी है। हालांकि, ब्रेंडन हिल का कहना है कि कर्मचारियों को उनका वाजिब हक दिया जाएगा। बाऊर मीडिया के इस फैसले ने जहां मीडिया जगत को हिला दिया है, वहीं ‘इंडिया टुडे’ समूह के चेयरमैन अरुण पुरी की तरफ से मीडियाकर्मियों के लिए एक राहत देने वाला समाचार आया है। अरुण पुरी ने साफ किया है कि 'इंडिया टुडे' मैगजीन पहले की तरह ही प्रकाशित होती रहेगी और हम कोरोना वायरस को जीतने नहीं देंगे।

उन्होंने ट्वीट के जरिये इसकी जानकारी देते हुए लिखा है, ‘पिछले 44 सालों से 'इंडिया टुडे' का हर अंक समय पर आया है और हम COVID-19 को अपना रिकॉर्ड खराब करने नहीं देंगे। हम हर हफ्ते बेहतरीन विश्लेषण प्रदान करना जारी रखेंगे।’ उन्होंने आगे लिखा है, ‘इस हफ्ते की शुरुआत से हमने मैगजीन के ऑनलाइन और प्रिंट दोनों संस्करण प्रकाशित करने का फैसला लिया है। 21 दिनों के लॉकडाउन पर हमारी विशेष कवरेज पढ़ने के लिए तैयार रहें। साथ ही हम कोरोना वायरस संकट पर रोजाना एक न्यूजलेटर भी प्रकाशित कर रहे हैं।’ 

 

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ABP न्यूज नेटवर्क ने जुल्फिया वारिस को अपनी इस नई इकाई का बनाया बिजनेस हेड

एबीपी न्यूज नेटवर्क (ABP News Network) ने जुल्फिया वारिस को नियुक्त किया है

Last Modified:
Thursday, 02 April, 2020
zulfia

'एबीपी न्यूज नेटवर्क' (ABP News Network) ने जुल्फिया वारिस को ‘एबीपी न्यूज नेटवर्क कंटेंट स्टूडियो’ (ABP News Network Content Studio) का बिजनेस हेड नियुक्त किया है। जुल्फिया की जिम्मेदारी कंपनी की नई सहायक इकाई  ‘एएनएन कंटेंट स्टूडियो’ (ANN Content Studio) के साथ-साथ सभी प्लेटफार्म्स के लिए कंटेंट प्रड्यूस करने की होगी।

जुल्फिया को मीडिया इंडस्ट्री में 20 सालों से भी ज्यादा का अनुभव है। इससे पहले वे डिस्कवरी इंडिया (Discovery India) में प्रीमियम हेड और डिजिटल नेटवर्क की वीपी-प्रॉडक्ट हेड थीं। अपनी इस भूमिका में जुल्फिया डिस्कवरी इंडिया चैनल्स के लिए फैक्चुअल और लाइफ स्टाइल कैटेगरी में अपना योगदान देती थीं। उन्होंने इसके अलावा ‘टीवी18 इंडिया’ (TV18 India Ltd), ‘एमटीवी इंडिया’ (M.T.V India), ‘चैनल वी इंडिया’ (Channel V India), ‘स्टार टीवी नेटवर्क’ (Star TV Network) और जी एंटरटेनमेंट (Star TV Network) जैसी कंपनियों के साथ काम किया है।

जुल्फिया ने 1998 में सोफिया कॉलेज मुंबई से इंग्लिश लिट्रेचर में ग्रेजुएशन किया और इसके बाद 1999 में सोफिया पॉलिटेक्निक मुंबई से सोशल कम्युनिकेशंस एंड मीडिया में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है।

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लॉकडाउन की कवरेज कर रहे पत्रकार के साथ पुलिस ने ये किया सलूक

पूरा देश 21 दिनों के लॉकडाउन का पालन कर रहा है। कोरोना से बचने व लोगों में जागरूकता फैलाने को लेकर देश की मीडिया भी अपना बड़ा योगदान दे रही है।

Last Modified:
Thursday, 02 April, 2020
journalist

पूरा देश 21 दिनों के लॉकडाउन का पालन कर रहा है। कोरोना से बचने व लोगों में जागरूकता फैलाने को लेकर देश की मीडिया भी अपना बड़ा योगदान दे रही है। लिहाजा मीडिया को काम करने में परेशानी न हो इसके लिए पीएम मोदी ने मीडिया को इमरजेंसी जरूरत में शामिल किया है। लेकिन फिर अलग-अलग जगहों से पुलिस के द्वारा पत्रकारों के साथ बर्बरता के मामले सामने आ रहे हैं। ताजा मामला ग्वालियर से सामने आया है।

बता दें कि घटना ग्वालियर के चेतकपुरी गेट की है। यहां शहर में लगे लॉकडाउन की रिपोर्टिंग कर रहे इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के युवा पत्रकार चेतन सेठ के साथ पुलिसकर्मियों ने दुर्व्यवहार करते हुए न सिर्फ उन्हें गालियां दीं, बल्कि विरोध करने पर पत्रकार के साथ मारपीट भी की, जिसमें चोटिल हो गया है। पत्रकार का जेएएच अस्पताल में इलाज कराया गया।

दरअसल, पुलिसकर्मियों ने पत्रकार को रिर्पोटिंग करने से मना किया, जिसका विरोध करने पर रिर्पोटर को पुलिसकर्मियों ने यह कहते हुए गालियां दी कि तुम मीडिया वाले ज्यादा परेशान कर रह हो। इसके बाद, पुलिसकर्मियों ने बर्बरता दिखाते हुए पत्रकार पर लाठियों से हमला कर दिया, जिससे पत्रकार के बायां हाथ फ्रेक्चर हो गया।

इसके बाद शहर के प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के तमाम पत्रकारों ने फूलबाग चौराहे पर अपने कैमरा बैग सड़क पर रख लग पुलिसकर्मियों के गलत व्यवहार का विरोध किया है। घटना की जानकारी मिलने के बाद एसपी नवनीत भसीन ने तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है, जिनमें एएसआई के.के शाक्य, आकक्षक गौरव शर्मा और आरक्षक बालेंद्र शर्मा के नाम शामिल है।

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CNBC Awaaz की एंकर मुग्धा मिश्रा ने लिया ये फैसला

जानी-मानी न्यूज एंकर मुग्धा मिश्रा इस चैनल के साथ एक दशक से ज्यादा समय से जुड़ी हुई थीं और एसोसिएट एडिटर की भूमिका निभा रही थीं।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 01 April, 2020
Last Modified:
Wednesday, 01 April, 2020
Mugdha Mishra

हिंदी के बिजनेस न्यूज चैनल ‘सीएनबीसी आवाज’ (CNBC Awaaz) से खबर है कि मुग्धा मिश्रा ने ग्रुप को अलविदा कह दिया है। जानी-मानी न्यूज एंकर मुग्धा मिश्रा यहां एसोसिएट एडिटर की भूमिका निभा रही थीं। वे पिछले एक दशक से ज्यादा समय से चैनल के साथ थीं।

हमारी सहयोगी वेबसाइट ‘एक्सचेंज4मीडिया’ (exchange4media) से इस खबर की पुष्टि करते हुए मुग्धा ने कहा, ‘हां मैंने ‘सीएनबीसी आवाज’ को बाय बोल दिया है और अब मैं एक प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए ऑटो सेक्शन को कवर करूंगी।

मुग्धा ने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 2005 में ‘सीएनबीसी आवाज’ में एडिटेरियल डेस्क पर बतौर सीनियर रिसर्च एनालिस्ट के रूप में शुरू की थी। यहां वह 10 एनालिस्ट की टीम का नेतृत्व करती थीं, जो 24x7 आधार पर रिसर्च इनपुट्स उपलब्ध कराती थी।

2008 में उन्होंने ब्लूमबर्ग-यूटीवी (यूटीवी समूह और ब्लूमबर्ग के बीच एक जॉइंट वेंचर, जिसे बाद में BTVi  के नाम से जाना गया) को जॉइन कर लिया था। यहां उन्होंने सीनियर रिसर्च एनालिस्ट के तौर पर काम किया और एडिटोरियल डेस्क पर भी अपना योगदान दिया।

वर्ष 2009 में मुग्धा ने ‘सीएनबीसी आवाज’ को जॉइन कर लिया और यहां अपने करियर की सबसे लंबी पारी खेली। यहां उन्होंने ‘आवाजओवर ड्राइव’ (Awaaz Overdrive) शो की एंकरिंग की। इस साप्ताहिक शो में वह कार और मोटरसाइकिलों के बारे में बात करती थीं।

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NBA ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का किया स्वागत

‘न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन’ ने इस बात पर सहमति जताई है कि मीडिया को काफी जिम्मेदारी से अपनी भूमिका निभानी चाहिए

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 01 April, 2020
Last Modified:
Wednesday, 01 April, 2020
NBA

फेक न्यूज को फैलने से रोकने की दिशा में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए आदेशों का निजी टेलिविजन न्यूज चैनल्स का प्रतिनिधित्व करने वाले समूह ‘न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन’ (NBA) ने स्वागत किया है। ‘न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन’ ने इस बात पर सहमति जताई है कि मीडिया को काफी जिम्मेदारी से अपनी भूमिका निभानी चाहिए। इसके साथ ही कोरोनावायरस (कोविड-19) के संकट के दौरान किसी भी न्यूज को टेलिकास्ट करते समय सोशल मीडिया पर चल रहीं तमाम ‘फेक न्यूज’ से बचना चाहिए और तथ्यों की जांच कर लेनी चाहिए।

‘एनबीए’ के वाइस प्रेजिडेंट और इंडिया टीवी के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा की ओर से जारी एक पत्र में इस बात पर भी प्रसन्नता जताई गई है कि सोशल मीडिया समेत विभिन्न मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर सरकार की ओर से एक डेली बुलेटिन भी चलाया जाएगा, ताकि लोगों में फैल रहीं तमाम आशंकाओं को दूर किया जा सके। इससे मीडिया को भी तमाम संदेहों को स्पष्ट करने और उन्हें सटीक रिपोर्टिंग करने में सक्षम बनाने में मदद मिलेगी।

पत्र में ‘एनबीए’ ने इस बात के लिए भी सुप्रीम कोर्ट की सराहना की है, जिसमें कोर्ट ने कहा है कि इस महामारी को लेकर मीडिया में होने वाली चर्चाओं, डिबेट और कवरेज में हस्तक्षेप करने का उसका कोई इरादा नहीं है।

गौरतलब है कि देशभर में जारी लॉकडाउन के दौरान लाखों लोगों के पलायन के लिए फेक न्यूज तथा भ्रम फैलाने वाले संदेशों को जिम्मेदार ठहराते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 31 मार्च को ऐसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने के आदेश दिए हैं। 

इसके साथ ही चीफ जस्टिस एसए बोब्डे और जस्टिस नागेश्वर राव की खंडपीठ ने सरकार से फेक न्यूज फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई करने के लिए भी कहा था। सुप्रीम कोर्ट ने मीडिया को भी जिम्मेदारी दर्शाने के निर्दश दिए थे। कोर्ट का कहना था कि मीडिया संस्थान तथ्यपूर्ण खबरों को ही प्रकाशित/प्रकाशित करें।

 

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कोरोना की चपेट में आया यह न्यूज एंकर, ट्वीट कर खुद दी जानकारी

दुनिया भर के लिए जानलेवा बन चुका कोरोना वायरस अभी भी तबाही मचा रहा है। यह तबाही चीन के बाद इटली, स्पेन, फ्रांस और अमेरिका जैसे देशों में ज्यादा देखने को मिल रही हैं।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 01 April, 2020
Last Modified:
Wednesday, 01 April, 2020
Corona

दुनिया भर के लिए जानलेवा बन चुका कोरोना वायरस अभी भी तबाही मचा रहा है। यह तबाही चीन के बाद इटली, स्पेन, फ्रांस और अमेरिका जैसे देशों में ज्यादा देखने को मिल रही हैं। अमेरिका में प्रतिदिन मरने वाले लोगों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। वहीं इससे संक्रमित लोगों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। अमेरिकी न्यूज चैनल ‘सीएनएन’ के एंकर क्रिस्टोफर कूमो (Christopher Cuomo) भी अब कोरोना का शिकार हो गए है। उनकी जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आयी है।  

खास बात ये है कि पॉजिटिव पाए जाने के बाद भी क्रिस्टोफर अपने शो को घर से होस्ट करेंगे। मंगलवार को उन्होंने खुद ही एक ट्वीट कर इसकी जानकारी दी है। उन्होंने लिखा कि उनके कोरोना का टेस्ट पॉजिटिव पाया गया है। उन्होंने कहा, ‘हालात बहुत मुश्किल हैं और हर दिन ये बिगड़ते ही जा रहे हैं। मैं भी संक्रमित हो गया हूं, पिछले दिनों मैं कई लोगों से मिला, उनमें से कुछ संक्रमित थे। मुझे बुखार और सांस लेने में दिक्कत है। आशा है कि बच्चों और पत्नी तक संक्रमण नहीं पहुंचेगा।’ बता दें कि कि सीएनएन के एंकर न्यूयॉर्क के गवर्नर एंड्रयू क्‍यूमो के भाई हैं।

 

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पत्रकारोंं की सुरक्षा को लेकर हाई कोर्ट में उठी ये मांग

सरकार द्वारा लॉकडाउन के दौरान मीडिया कर्मियों को छूट दी गई है ताकि वे कोरोना वायरस से जुड़ी खबरों को समाज में रह रहे लोगों तक सही और सटीक जानकारी पहुंचाते रहें

Last Modified:
Tuesday, 31 March, 2020
Journalist

कोरोना से जंग लड़ रही आशा कार्यकर्ताओं, स्वच्छता कर्मचारियों, मेडिकल और पैरा-मेडिकल स्टाफ के लिए 50 लाख रुपए के बीमा कवर का ऐलान किया है, जिसका फायदा 20 लाख मेडिकल स्टाफ और कोरोना वॉरियर्स को मिलेगा। लेकिन अपनी जान जोखिम में डालकर ग्राउंड रिपोर्टर के जरिए देश को जागरूक करने वाले पत्रकारों को इस बीमा कवर से दूर रखा गया है। लिहाजा, ऐसे में उनकी सुरक्षा के मद्देनजर दिल्ली हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है, जिसमें पत्रकारों के लिए स्वास्थ्य सुविधा और प्रत्येक पत्रकार के लिए 50 लाख रुपए बीमा कराने की मांग की गई है।

बता दें कि इस याचिका पर तत्काल सुनवाई का आग्रह किया गया, लेकिन कोर्ट ने कहा कि इस याचिका पर सुनवाई की अभी कोई जल्दी नहीं है। लॉकडाउन के खत्म होने के बाद सुनवाई की जाएगी।  यह याचिका वकील अर्पित भार्गव की ओर से हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार के समक्ष दायर की गई है।

याचिका में मांग की गई है कि कोरोना वायरस महामारी के बावजूद फील्ड में रिपोर्टिंग कर रहे प्रत्येक रिपोर्टर को स्वास्थ्य और जीवन बीमा देने के लिए केन्द्र सरकार को निर्देश दिए जाएं। याचिका में यह भी कहा गया है कि रिपोर्टर चाहे कांट्रैक्चुअल हों, एडहोक पर हों या स्थायी हों, सभी को यह सुविधा प्रदान की जाए। याचिका में ये मांग की गई है कि प्रत्येक रिपोर्टर को कम से कम 50 लाख रुपए का स्वास्थ्य और जीवन बीमा मुहैया करवाया जाए।

याचिका में कहा गया है कि सरकार द्वारा लॉकडाउन के दौरान मीडिया कर्मियों को छूट दी गई है ताकि वे कोरोना वायरस से जुड़ी खबरों को समाज में रह रहे लोगों तक सही और सटीक जानकारी पहुंचाते रहें, इसलिए रिपोर्टरों के लिए यह कदम उठाया जाना बेहद जरूरी है। हालांकि हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार ने कहा कि लॉकडाउन की स्थिति सामान्य हो जाने के बाद ही इस याचिका पर विचार किया जा सकता है।

गौरतलब है कि इससे पहले भारत सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकारों की संस्था  प्रेस एसोसिएशन ने कोरोना महामारी को देखते हुए पीएम मोदी को पत्र लिखकर पत्रकारों के लिए भी 50 लाख रुपए के बीमा की मांग की है। उन्होंने कहा कि पत्रकार भी महामारी के खिलाफ लड़ाई में योगदान दे रहे हैं, जिस तरह वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने डॉक्टरों, स्वास्थ्य कर्मचारियों आदि के लिए 50 लाख बीमे की घोषणा की उसी तरह यह सुविधा पत्रकारों को भी मिलनी चाहिए।

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BCCL से आई बड़ी खबर, एस. शिवकुमार को मिली ये जिम्मेदारी

‘बेनेट कोलमैन एंड कंपनी लिमिटेड’ (BCCL) से एक बड़ी खबर निकलकर सामने आई है।

Last Modified:
Tuesday, 31 March, 2020
S. Sivakumar

जानी-मानी मीडिया कंपनी ‘बेनेट कोलमैन एंड कंपनी लिमिटेड’ (BCCL) से एक बड़ी खबर निकलकर सामने आई है। खबर यह है कि एस. शिवकुमार को ‘बीसीसीएल’ में एग्जिक्यूटिव कमेटी का चेयरमैन नियुक्त किया गया है। उनकी यह नियुक्ति एक अप्रैल से प्रभावी होगी। नई भूमिका में ‘बीसीसीएल’ से संबंधित सभी कार्य शिवकुमार के जिम्मे होंगे।

बता दें कि एस. शिवकुमार चार्टर्ड अकाउंटेंट्स और कॉस्ट एंड मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के फेलो मेंबर हैं। वह ‘बीसीसीएल’ के साथ करीब तीस वर्षों से जुड़े हुए हैं। जुलाई 2016 में उन्हें प्रेजिडेंट (रेवेन्यू) की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। 

इसके साथ ही शिवकुमार और मोहित जैन ‘बीसीसीएल’ के बोर्ड में एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर्स की भूमिका में भी रहेंगे। वहीं, ‘बीसीसीएल’ के सीईओ के रूप में राज जैन का कार्यकाल खत्म होने जा रहा है, वह इस संस्थान से करीब पांच वर्षों से जुड़े हुए हैं। उन्होंने नवंबर 2014 में इस समूह को जॉइन किया था। इससे पहले वह 'भारती रिटेल' में अपनी जिम्मेदारी संभाल रहे थे।  

 

 

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PIB ने Corona से जुड़ी इन दो खबरों को बताया गलत

कोरोनावायरस (Coronavirus) के संक्रमण को लेकर जितना डर फैला हुआ है, उससे कहीं ज्यादा इससे जुड़ी निरधार खबरें।

Last Modified:
Monday, 30 March, 2020
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कोरोनावायरस (Coronavirus) के संक्रमण को लेकर जितना डर फैला हुआ है, उससे कहीं ज्यादा इससे जुड़ी निरधार खबरें। कोरोनावायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने देश में 21 दिन का लॉकडाउन किया है। सोमवार को लॉकडाउन का छठा दिन है। वहीं कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में ये दावा किया जा रहा है कि लॉकडाउन की समयसीमा बढ़ सकती है।

तो यहां बता दें कि यह खबर पूरी तरह से गलत है, क्योंकि 21 दिनों के लॉकडाउन को आगे बढ़ाने वाली खबरों का केंद्र सरकार ने खंडन करते हुए इसे अफवाह करार दिया है। सरकार का कहना है कि इन खबरों को कोई आधार नहीं है।

पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट कर ये जानकारी दी है। पीआईबी ने अपने पहले ट्वीट में कहा कि अफवाह पर ध्यान न दें। अफवाहें और मीडिया रिपोर्ट के माध्यम से यह दावा किया जा रहा है कि सरकार #Lockdown21 की अवधि समाप्त होने के बाद इसे बढ़ा देगी। कैबिनेट सचिव ने इन रिपोर्टों का खंडन किया है और कहा है कि वे निराधार हैं।

पीआईबी ने एक अन्य ट्वीट में कैबिनेट सचिव ने क्या कहा, इसकी जानकारी दी। ट्वीट में लिखा, ‘राजीव गौबा ने इन खबरों खंडन किया है और कहा है इस तरह की खबरें आधारहीन हैं। उन्होंने कहा कि अफवाहों और मीडिया में चल रही खबरों में यह दावा किया जा रहा है कि सरकार लॉकडाउन की अवधि समाप्त होने के बाद इसे बढ़ा देगी। कैबिनेट सचिव ने इन रिपोर्टों का खंडन किया है और कहा है कि वे निराधार हैं।’

वहीं सोशल मीडिया पर फैलायी जा रही एक अन्य खबर को भी पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) ने गलत बताया है। दरअसल, इस खबर में यह झूठ फैलाया जा रहा है कि गृह मंत्रालय के प्रमुख सचिव रवि नायक के कहा कि केंद्र सरकार द्वारा कोरोना वायरस से सम्बंधित कोई भी पोस्ट को दंडनीय अपराध घोषित कर दिया गया है। गलत पोस्ट या मैसेज करने पर ग्रुप एडमिन सहित पूरे ग्रुप के सदस्यों पर आईटी एक्ट के अन्तर्गत मुकदमा पंजीकृत कर कार्यवाही की जाएगी, इसलिए ध्यान रखें, सतर्क रहें, सुरक्षित रहे।

इस खबर को लेकर पीआईबी ने ट्वीट कर कहा कि गृह मंत्रालय द्वारा ऐसा कोई भी निर्देश सोशल मीडिया को लेकर नहीं जारी किया गया है।

 

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कोरोना का खौफ: प्रशासन की कार्रवाई से पत्रकारों में नाराजगी

शासकीय आदेशों का उल्लंघन करने पर थाना श्यामला हिल्स ने कोरोना पॉजिटिव पाए गए पत्रकार केके सक्सेना के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है।

नीरज नैयर by
Published - Saturday, 28 March, 2020
Last Modified:
Saturday, 28 March, 2020
corona-virus

वरिष्ठ पत्रकार केके सक्सेना के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद से भोपाल प्रशासन सकते में है। प्रशासन द्वारा पत्रकारों के घर पर ‘Covid19 डू नॉट विजिट’ पोस्टर चस्पा किये जा रहे हैं। ताज्जुब की बात यह है कि इनमें वह पत्रकार भी शामिल हैं, जो पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की प्रेस कांफ्रेंस में मौजूद नहीं थे। इसी बात को लेकर प्रशासन और पत्रकारों में ठन गई है। पोस्टर लगाने पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम से कई पत्रकारों का विवाद भी हुआ। पत्रकारों का कहना है कि सरकार बिना वजह दहशत फैला रही है। हमने खुद आगे बढ़कर टेस्ट कराने को कहा है, लेकिन वह पोस्टर चिपकाने तक सीमित है। जो पत्रकार प्रेस कांफ्रेंस में गए भी नहीं थे, उनके भी नाम संदिग्धों की सूची में डाल दिए गए हैं। आखिर ऐसा किस आधार पर किया जा रहा है?

शुक्रवार को भी स्वास्थ्य विभाग की टीम कुछ पत्रकारों के घर पोस्टर लगाने गई थी। इस दौरान उनका पत्रकारों से विवाद भी हुआ। पत्रकारों ने प्रेस कांफ्रेंस में न होने का हवाला भी दिया, लेकिन कर्मचारी कुछ सुनने को तैयार नहीं थे। हालांकि, कड़े विरोध को देखते हुए उन्हें बिना पोस्टर लगाये ही वापस लौटना पड़ा।

कर्मचारियों का कहना है कि वह सिर्फ कलेक्टर के आदेश की तालीम कर रहे हैं। उन्हें जिन पत्रकारों की सूची सौंपी गई है, उसी के आधार पर पोस्टर लगाये जा रहे हैं।

सोशल मीडिया पर एक विडियो भी वायरल हो रहा है, जिसमें पत्रकार को पोस्टर लगाने पहुंचे स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों को भगाते हुए दिखाया गया है। विडियो में पत्रकार पूछता है कि क्या कमलनाथ या शिवराज सिंह के घर पर पोस्टर लगाये हैं? नहीं, तो फिर यहां कैसे आये’? इस विडियो के सामने आने के बाद जहां कुछ पत्रकारों उक्त पत्रकार के बर्ताव पर नाराजगी जाता रहे हैं। वहीं कुछ की नजर में यह प्रशासन की बेवकूफी से उपजा गुस्सा है। नाराजगी जताने वालों का कहना है कि भले ही प्रशासन ने गलती की, लेकिन अधिकारियों का गुस्सा कर्मचारियों पर नहीं निकाला जाना चाहिए।
केके सक्सेना के खिलाफ केस दर्ज

वहीं, शासकीय आदेशों का उल्लंघन करने पर थाना श्यामला हिल्स ने कोरोना पॉजिटिव पाए गए पत्रकार केके सक्सेना के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। सक्सेना के खिलाफ धारा 188, 269, 270 भा.द.वि. के तहत अपराध पंजीबद्ध कर वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। सक्सेना ने न केवल कोरोना संक्रमित होकर लापरवाही की बल्कि इलाज के लिये गए सरकारी डॉक्टरों के साथ दुर्व्यवहार भी किया था।

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