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फेक न्यूज के खिलाफ जंग में सरकार को मिला ‘हथियार’
तमाम कवायद के बाद भी फेक न्यूज की समस्या पर नहीं लग पा रही है लगाम
समाचार4मीडिया ब्यूरो 6 years ago
आज के दौर में फेक न्यूज की समस्या दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। फेक न्यूज के खतरे से सिर्फ भारत ही नहीं, अन्य देश भी जूझ रहे हैं। हालांकि फेक न्यूज से निपटने के लिए तमाम कवायद भी की जा रही है, इसके बावजूद यह समस्या काबू में नहीं आ रही है।
अब फेक न्यूज के खिलाफ लड़ाई में सिंगापुर ने एक बड़ा कदम उठाया है। दरअसल, सिंगापुर ने बुधवार को फेक न्यूज विरोधी कानून पास किया है। इस कानून के तरह फेक न्यूज के खिलाफ लड़ाई में वहां की सरकार के पास काफी अधिकार होंगे। इस कानून के तहत वहां की सरकार फेसबुक, ट्विटर और गूगल जैसी सोशल मीडिया साइट्स को अपने प्लेटफॉर्म्स से फेक कंटेंट को ब्लॉक करने अथवा उसे हटाने का आदेश दे सकती है।
इस कानून के अनुसार, फेक न्यूज फैलाने के मामले में दोषी पाए जाने पर दस साल की कैद अथवा 3.77 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया जा सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सिंगापुर की विपक्षी वर्कर्स पार्टी के सांसद डेनियल गोह ने फेसबुक पर एक पोस्ट में बताया कि बुधवार को पारित इस बिल के पक्ष में 72 और विरोध में नौ वोट पड़े। हालांकि, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को डर है कि कथित फेक न्यूज के नाम पर इस कानून का दुरुपयोंग किया जा सकता है।
हालांकि फेक न्यूज के खिलाफ कानून पारित करने वाला सिंगापुर पहला देश नहीं है। इसी साल अप्रैल में रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमिर पुतिन ने ऐसे कानून पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें सरकार को फेक न्यूज फैलाने वाली साइट्स को ब्लॉक करने और उन पर जुर्मान लगाने के अधिकार दिए गए थे।
वहीं, फ्रांस ने वर्ष 2018 में फेक न्यूज विरोधी कानून पास किया था। इस कानून में अधिकारियों को ये अधिकार दिया गया है कि वे बाहरी निकाय द्वारा संचालित ऐसे टीवी चैनलों को सस्पेंड कर सकते हैं, जो फेक न्यूज फैला रहे हों। वहां पर इस कानून का उल्लंघन करने पर एक साल की सजा और 75000 यूरो के जुर्माने का प्रावधान है। इसके अलावा जर्मनी में भी पिछले साल इस तरह का कानून परित किया जा चुका है।
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