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मीडिया व एंटरटेनमेंट सेक्टर में छंटनियों की लहर, साल के अंत तक और बढ़ने के आसार

मीडिया व एंटरटेनमेंट (M&E) सेक्टर में इस साल बड़े पैमाने पर छंटनियां हो रही हैं और अभी तो सिर्फ मार्च का महीना ही चल रहा है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 11 months ago

चहनीत कौर, सीनियर कॉरेस्पोंडेंट, एक्सचेंज4मीडिया ग्रुप ।। 

मीडिया व एंटरटेनमेंट (M&E) सेक्टर में इस साल बड़े पैमाने पर छंटनियां हो रही हैं और अभी तो सिर्फ मार्च का महीना ही चल रहा है। कंटेंट, टेक, ऐड सेल्स और एडमिनिस्ट्रेशन विभागों में करीब 1,000 एम्प्लॉयीज की नौकरियां खतरे में आ चुकी हैं। इंडस्ट्री के दिग्गजों का कहना है कि घटते राजस्व, लागत में कटौती और एम्प्लॉयीज की संख्या कम करने के प्रयास इन छंटनियों की मुख्य वजह हैं।

छंटनियां केवल छोटी कंपनियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि बड़ी मीडिया कंपनियां भी अपने एम्प्लॉयीज को नौकरी से निकाल रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर 2024 की स्थिति खराब थी, तो 2025 इससे भी बुरा साबित हो सकता है।

JioStar से सबसे बड़ा झटका, 600 एम्प्लॉयीज की छंटनी की तैयारी

अब तक का सबसे बड़ा झटका JioStar की ओर से आया है, जो रिलायंस व डिज्नी के मर्जर से बनी नई मीडिया इकाई है। कंपनी ने देशभर में करीब 600 एम्प्लॉयीज की छंटनी करने का फैसला लिया है। यह छंटनी रिलायंस और स्टार इंडिया दोनों के एम्प्लॉयीज को प्रभावित करेगी, क्योंकि यह नया गठजोड़ अपने ऑपरेशन्स को अधिक कुशल बनाने और दोहराए जाने वाले पदों को हटाने की योजना बना रहा है।

इसके अलावा, गूगल और मेटा जैसी अन्य बड़ी टेक कंपनियां भी एम्प्लॉयीज की संख्या घटा रही हैं।

मर्जर और मार्केट कंसोलिडेशन से छंटनियों में तेजी

सिंप्ली ग्रुप (Simpli Group) के सीईओ (TV18 ग्रुप में HR डिपार्टमेंट के पूर्व ग्रुप हेड) रजनीश सिंह के अनुसार, मार्केट में इस समय कंसोलिडेशन यानी बड़ी कंपनियों के आपस में विलय का दौर चल रहा है, जिससे स्वाभाविक रूप से छंटनियां और पुनर्गठन हो रहा है। उनका कहना है कि यह ट्रेंड आगे भी जारी रहेगा।

इसके अलावा, देशभर के कई छोटे मीडिया नेटवर्क भी चुपचाप अपने एम्प्लॉयीज की संख्या घटा रहे हैं। चूंकि कई मामलों में छंटनियों की औपचारिक घोषणा नहीं होती, इसलिए सटीक संख्या का पता लगाना मुश्किल है। लेकिन एचआर और हायरिंग विशेषज्ञों का अनुमान है कि अभी तक कम से कम 1,000 लोगों की नौकरियां जा चुकी हैं और यह आंकड़ा साल के अंत तक दोगुना हो सकता है।

नौकरियों की कमी से हालात और मुश्किल

नवीनतम नौकरी (Naukri) डेटा के मुताबिक, मीडिया व एंटरटेनमेंट सेक्टर में हायरिंग को लेकर स्थिति निराशाजनक बनी हुई है। फरवरी 2025 में इस क्षेत्र में सिर्फ 1% साल-दर-साल ग्रोथ देखने को मिली।

  • कंटेंट, एडिटोरियल और जर्नलिज्म सेगमेंट में 5% की गिरावट आई।
  • प्रिंटिंग और पब्लिशिंग सेक्टर में 14% की गिरावट दर्ज की गई।
  • मुंबई, जो मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री का प्रमुख केंद्र है, वहां हायरिंग में 4% की गिरावट आई।

रजनीश सिंह कहते हैं, "फिलहाल पूरे इंडस्ट्री में बड़े पैमाने पर पुनर्गठन चल रहा है, जिससे नौकरी छूटने के मामले बढ़ रहे हैं। हालांकि प्रभाव बहुत अधिक नहीं है, लेकिन यह पूरे साल स्थिर बना हुआ है।"

अनुभव के आधार पर देखें तो:

  • फ्रेशर्स (नए उम्मीदवारों) की भर्ती में 5% की वृद्धि हुई।
  • 4-7 साल के अनुभव वाले पेशेवरों के लिए हायरिंग में 2% की गिरावट आई।
  • 8-12 साल के अनुभवी प्रोफेशनल्स के लिए नौकरियों में 15% की भारी गिरावट दर्ज की गई।

रजनीश सिंह के मुताबिक, कंपनियां नई भर्तियों के लिए इंटरव्यू तो कर रही हैं, लेकिन उन पदों को फाइनल नहीं कर रही हैं। यह अनिश्चितता न सिर्फ कैम्पस प्लेसमेंट बल्कि अनुभवी प्रोफेशनल्स की भर्ती पर भी असर डाल रही है।

Konverz AI के सीईओ लोकेश निगम का कहना है, "यह सिर्फ मीडिया इंडस्ट्री की समस्या नहीं है, बल्कि कई उद्योगों में यह ट्रेंड देखा जा रहा है। 10-15 साल के अनुभव वाले प्रोफेशनल्स के लिए यह मुश्किल समय है, क्योंकि कंपनियां अब डिजिटल और एआई स्किल्स की ओर शिफ्ट हो रही हैं। जो लोग इन बदलावों के साथ नहीं चल पा रहे हैं, उनके लिए खुद को प्रासंगिक बनाए रखना मुश्किल हो रहा है।"

छंटनी का सीधा संबंध बिजनेस में गिरावट से

छंटनियों की इस लहर का सीधा संबंध कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन से है, खासकर पारंपरिक मीडिया संगठनों में। उदाहरण के लिए, 'टाइम्स इंटरनेट लिमिटेड' (TIL) ने हाल ही में 200 एम्प्लॉयीज की छंटनी की। वित्त वर्ष 2023-24 में कंपनी ने 199.31 करोड़ रुपये का कुल नुकसान दर्ज किया। ऑनलाइन और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से ऐड रेवेन्यू 690.73 करोड़ रुपये रहा, जो 2022-23 के मुकाबले 2.7% कम था।

इसी तरह, 'द क्विंट' ने भी वित्त वर्ष 2025 की दूसरी तिमाही में 30 लाख रुपये का ऑपरेटिंग लॉस और 4.51 करोड़ रुपये का नेट लॉस दर्ज किया। इस दौरान कई एम्प्लॉयीज की छंटनी की गई, जिसके बाद कंपनी ने अपने नुकसान को अगले कुछ तिमाहियों में कम करने में सफलता पाई।

यह केवल कुछ उदाहरण हैं। कई अन्य मीडिया कंपनियों के आंकड़े भी तेजी से विकास की ओर इशारा नहीं कर रहे हैं।

रोजगार की बजाय उद्यमिता पर जोर देने की जरूरत

हालात को देखते हुए रजनीश सिंह का मानना है कि नौकरी ढूंढने वालों को अब नौकरी देने वाले बनने पर विचार करना चाहिए। उनका कहना है कि वर्तमान स्थिति में केवल पारंपरिक नौकरियों पर निर्भर रहना व्यावहारिक नहीं है।

"दुर्भाग्य से, हम अभी नए निवेश या नए उभरते व्यवसाय नहीं देख रहे हैं जो भर्ती में तेजी ला सकें। मीडिया और एंटरटेनमेंट सेक्टर फिलहाल ठहरा हुआ नजर आ रहा है, और मुझे जल्द इसमें कोई सुधार दिखता नहीं दिख रहा। करियर की संभावनाओं को मीडिया इंडस्ट्री से बाहर भी तलाशने की जरूरत है।"

लोकेश निगम ने 2025 के ट्रेंड पर बात करते हुए कहा कि प्रिंट मीडिया फिलहाल स्थिर रहेगा, डिजिटल मीडिया का विस्तार जारी रहेगा, लेकिन बाकी क्षेत्रों (जैसे सिनेमा और प्रोडक्शन) में स्किल अपग्रेडेशन की अधिक जरूरत होगी बजाय नए एम्प्लॉयीज की भर्ती के। इंडस्ट्री बदल रही है, और खुद को अपडेट रखना और नए कौशल सीखना अब जरूरी हो गया है।


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