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Star व ZEEL के क्रिकेट राइट्स विवाद में समझौते की संभावना, पुनीत गोयनका ने दिए संकेत
रिलायंस और डिज्नी स्टार के विलय के बाद स्टार इंडिया और जी एंटरटेनमेंट के बीच क्रिकेट ब्रॉडकास्टिंग राइट्स को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद में अब एक नया मोड़ आता दिख रहा है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 9 months ago
रिलायंस और डिज्नी स्टार के विलय के बाद स्टार इंडिया और जी एंटरटेनमेंट के बीच क्रिकेट ब्रॉडकास्टिंग राइट्स को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद में अब एक नया मोड़ आता दिख रहा है। अब तक कानूनी लड़ाई की दिशा में आगे बढ़ रहे इस मामले में दोनों पक्ष अब शायद समझौते की ओर भी देख रहे हैं।
वित्त वर्ष 2024-25 की चौथी तिमाही के नतीजों के दौरान जी एंटरटेनमेंट ने संकेत दिया कि वह स्टार के साथ चल रही मध्यस्थता प्रक्रिया में अब सभी संभावनाओं के लिए तैयार है, चाहे वो कानूनी हों या गैर-कानूनी, जिसमें कोर्ट से बाहर समझौता भी शामिल हो सकता है।
यह बयान उस विवाद की पृष्ठभूमि में आया है, जो 1.5 अरब डॉलर के ICC मीडिया राइट्स की सब-लाइसेंसिंग डील के टूटने के बाद शुरू हुआ था। जुलाई 2024 में डिज्नी के स्वामित्व वाली स्टार इंडिया ने जी के साथ अपनी समझौता संधि को गैर-अनुपालन का हवाला देते हुए रद्द कर दिया था। इसके बाद अगस्त में स्टार ने जी के खिलाफ मध्यस्थता की प्रक्रिया शुरू करते हुए 940 मिलियन डॉलर के हर्जाने की मांग की थी। आरोप था कि जी दिसंबर 2023 तक 203.56 मिलियन डॉलर की अहम किश्त नहीं चुका सका।
नतीजों के दौरान जी एंटरटेनमेंट के सीईओ पुनीत गोयनका ने कहा, “हम सभी संभावनाओं के लिए खुले हैं, चाहे वो कानूनी हों या गैर-कानूनी… लेकिन फिलहाल इस पर कुछ कहना जल्दबाजी होगी।” कंपनी के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भी इसी रुख को दोहराते हुए कहा कि जी रणनीतिक रूप से सभी विकल्पों की पड़ताल कर रहा है।
पिछले साल स्टार की मध्यस्थता याचिका और उसके तुरंत बाद सितंबर 2024 में जी की सिंगापुर में इन्वेस्टर मीट को कुछ विश्लेषकों ने इस कानूनी जोखिम के बीच निवेशकों को भरोसा दिलाने की कोशिश के रूप में देखा था। जी लगातार स्टार के आरोपों को खारिज करता रहा है और उसका कहना है कि वह इन दावों का पुरजोर विरोध करता रहेगा।
हालांकि अब रिलायंस और डिज्नी स्टार के विलय के बाद परिदृश्य बदल गया है। रिलायंस की अब पारंपरिक टीवी, ओटीटी और खेल अधिकारों के क्षेत्र में मजबूत पकड़ है। उद्योग के जानकारों का मानना है कि ऐसे में दोनों पक्षों के लिए यह ज्यादा मुफ़ीद हो सकता है कि वे कानूनी लड़ाई को लंबा खींचने की बजाय किसी सुलह की दिशा में बढ़ें।
भले ही अभी तक किसी ठोस समझौते की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन जी की हालिया भाषा से यह संकेत जरूर मिला है कि बातचीत का रास्ता अब पूरी तरह बंद नहीं रहा, भले ही वह रास्ता अभी बहुत संकरा ही क्यों न हो।
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