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ओडिशा की उड़ान: पाञ्चजन्य का सुशासन संवाद 2025
पाञ्चजन्य द्वारा आयोजित "ओडिशा की उड़ान" संवाद 28 जुलाई 2025 को भुवनेश्वर में आयोजित होगा। मुख्यमंत्री मोहन माझी सहित कई प्रमुख वक्ता राज्य के सुशासन और विकास मॉडल पर विचार साझा करेंगे।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 6 months ago
28 जुलाई 2025 को भुवनेश्वर के ताज विवांता में एक विशेष आयोजन होने जा रहा है, जो ओडिशा के सुशासन मॉडल और विकास यात्रा को नई ऊँचाइयों पर ले जाने का संकेत देता है। 'पाञ्चजन्य' द्वारा आयोजित यह संवाद — "ओडिशा की उड़ान" — न केवल राज्य के प्रशासनिक और सामाजिक बदलावों को रेखांकित करेगा, बल्कि सुशासन की दिशा में उठाए गए प्रभावी कदमों को देश के समक्ष प्रस्तुत करने का भी माध्यम बनेगा।
इस आयोजन के मुख्य अतिथि होंगे ओडिशा के मुख्यमंत्री श्री मोहन चरण माझी, जिनके नेतृत्व में राज्य ने हाल ही में सामाजिक और आर्थिक क्षेत्र में कई उल्लेखनीय सफलताएँ प्राप्त की हैं। उनके कार्यकाल में पारदर्शिता, जनहित और समावेशी विकास को प्राथमिकता दी गई है, जिसका असर राज्य के दूरस्थ क्षेत्रों तक स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।
कार्यक्रम की शोभा बढ़ाने के लिए कई विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति सुनिश्चित की गई है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक श्री मुकुल कानिटकर, ओडिशा की उपमुख्यमंत्री श्रीमती प्रभाती परिड़ा, प्रज्ञा प्रवाह के राष्ट्रीय संयोजक श्री जे. नंदकुमार, महाराष्ट्र सरकार के कैबिनेट मंत्री श्री नितेश राणे और उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक डॉ. विक्रम सिंह जैसे नाम इस संवाद में अपने अनुभव और दृष्टिकोण साझा करेंगे।
इस संवाद का उद्देश्य ओडिशा में हो रहे व्यापक परिवर्तन और सुशासन के प्रयासों को रेखांकित करना है। जनजातीय क्षेत्रों में विकास, केंद्र और राज्य की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन, शिक्षा, स्वास्थ्य, आधारभूत संरचना और सांस्कृतिक पुनर्जागरण जैसे विषयों पर गंभीर चर्चा की जाएगी। यह मंच केवल सरकार या नीति निर्माताओं का नहीं, बल्कि समाज और शासन के बीच एक पुल की तरह कार्य करेगा।
पाञ्चजन्य के संपादक श्री हितेश शंकर ने स्पष्ट किया कि यह संवाद केवल एक बौद्धिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह शासन और समाज के बीच सार्थक संवाद को बढ़ावा देने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। इस अवसर पर देशभर से प्रतिष्ठित बुद्धिजीवी, पत्रकार, अधिकारी और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहेंगे, जो ओडिशा के विकास की इस उड़ान को नज़दीक से देखेंगे और समझेंगे। "ओडिशा की उड़ान" सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि यह एक दिशा है — सुशासन, संवाद और समरसता की दिशा में।
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