होम / इंडस्ट्री ब्रीफिंग / आज कैसा रहा अखबारों का फ्रंट पेज, किसने कौन सी स्टोरी को बनाया लीड
आज कैसा रहा अखबारों का फ्रंट पेज, किसने कौन सी स्टोरी को बनाया लीड
कर्नाटक का सियासी नाटक और यमुना एक्सप्रेस वे पर हुआ हादसा दिल्ली के अखबारों के फ्रंट पेज की बड़ी खबरें हैं
नीरज नैयर 6 years ago
कर्नाटक का सियासी नाटक और यमुना एक्सप्रेस वे पर हुआ हादसा राजधानी दिल्ली के अखबारों के फ्रंट पेज की सबसे बड़ी खबरें हैं। ‘नवभारत टाइम्स’ के पास आज जगह का अभाव रहा, लेकिन संपादकीय टीम ने सभी अहम समाचारों को पेज पर लगाने का प्रयास किया है। कर्नाटक की खबर को टॉप बॉक्स रखा गया है, जिसके ठीक नीचे हादसे का समाचार है। इस न्यूज को लीड का दर्जा मिला है। बड़े विज्ञापन और सिंगल कॉलम के बीच में लगी लीड का शीर्षक ‘यमुना एक्सप्रेस वे पर बस ड्राइवर ने झपकी ली, 29 मौतें’ तीन लाइनों में है, जबकि लीड बॉक्स की लम्बाई ज्यादा नहीं है। इस वजह से लीड का लेआउट कुछ ऐसा हो गया है. जैसे सिर बड़ा और धड़ छोटा। यदि हेडलाइन दो लाइन की होती तो ज्यादा आकर्षक लगती।
लीड के नीचे शेयर बाजार में साल की सबसे बड़ी गिरावट और दिल्ली यूनिवर्सिटी की कटऑफ लिस्ट के समाचार को रखा गया है। चूंकि आज क्रिकेट वर्ल्ड कप का अहम मुकाबला है, इसलिए अखबार ने एंकर क्रिकेट के नाम समर्पित किया है। पत्रकार संजीव कुमार की एक्सक्लूसिव स्टोरी ‘पूरा इंडिया मानो मैनचेस्टर आ गया’, सेमीफाइनल के लिए भारतीयों के क्रेज को दर्शाती है। इसके अलावा संक्षिप्त बॉक्स में दो स्थानीय खबरों को लगाया गया है।
‘हिन्दुस्तान’ के पास भी ‘नवभारत टाइम्स’ की तरह जगह की कमी रही। अखबार में हाफ पेज विज्ञापन है। लीड यहां भी हादसे वाली खबर है, लेकिन ‘नवभारत टाइम्स’ के विपरीत लीड स्पेस के अनुपात में शीर्षक को सही ढंग से लगाया गया है, जिससे वह अटपटा नहीं लग रहा। हालांकि घटनास्थल की फोटो के बजाय विलाप करती महिला की तस्वीर लगाना कुछ अजीब है। यदि दोनों फोटो होतीं तो भी समझा जा सकता था। क्रिकेट की न्यूज को रोचक जानकारी के साथ बॉक्स में रखा गया है, जिसमें दोनों टीमों के कप्तानों के पोट्रेट हैं। मनोज सिन्हा द्वारा बनाये गए इन पोट्रेट से खबर आकर्षक लग रही है। खास बात यह है कि इस बॉक्स में ज्यादा खबरें भरने के बजाय केवल आवश्यक और रोचक जानकारी को ही रखा गया है।
सेंसेक्स में गिरावट वाली न्यूज को समझने में शायद संपादकीय टीम से चूक हो गई, इसलिए उसे महज आधे कॉलम में समेट दिया गया है। यह इस साल की सबसे बड़ी गिरावट है, इस लिहाज से उसे विस्तार से बताया जाना चाहिए था। खबर का शेष अंदर के पृष्ठ पर जरूर दिया है, लेकिन फ्रंट पेज का अपना अलग ही महत्व होता है। पत्रकार सौरभ शुक्ला की कर चोरों से निपटने के लिए कड़े कानून वाली स्टोरी अच्छी है, कर्नाटक की कलह को भी उचित स्थान दिया गया है। इसके अलावा पासपोर्ट की फर्जी वेबसाइट से जुड़े महत्वपूर्ण समाचार को फ्रंट पेज पर रखा गया है।
‘अमर उजाला’ के फ्रंट पेज पर कोई विज्ञापन नहीं है, इसलिए संपादकीय टीम ने सभी महत्वपूर्ण खबरों के साथ पूरा न्याय किया है। लीड एक्सप्रेस वे हादसा है, जिसे बॉक्स, पॉइंटर और फोटो के साथ अच्छी तरह पेश किया गया है। ‘अमर उजाला’ ने शेयर बाजार में गिरावट के मायनों को समझा है और इस न्यूज को ऊपर बॉक्स में लगाया है। इसके नीचे कर्नाटक की खबर है। बजट में प्राइवेट ट्रेन चलाये जाने का जिक्र किया गया था, ‘अमर उजाला’ ने यह भी बता दिया है कि वो पहली ट्रेन कौन सी होगी। यह न्यूज दूसरे प्रमुख समाचारपत्रों के फ्रंट पेज पर नहीं है। स्थानीय समाचार जैसे डीयू कटऑफ, मेट्रो फेज चार को भी प्रमुखता से लगाया गया है। एंकर पर क्रिकेट है, जिसमें आंकड़ों और इतिहास को खंगालकर अच्छी जानकारी परोसी गई है।
‘दैनिक जागरण’ का फ्रंट पेज बाकी दिनों की अपेक्षा देखने में आज ज्यादा अच्छा लग रहा है। टॉप बॉक्स पर क्रिकेट है, जिसका शीर्षक ‘जीत की धुन सुनने को बेताब है भारत’ पढ़कर अच्छा लगता है। अभिषेक त्रिपाठी की यह बाईलाइन स्टोरी पढ़ने लायक है। ‘दैनिक जागरण’ ने लीड बाकी अखबारों के उलट कर्नाटक को बनाया है। दिल्ली-आगरा के बीच ज्यादा दूरी नहीं है, इस लिहाज से देखा जाए तो एक्सप्रेस वे हादसे को लीड लगाना अपेक्षाकृत ज्यादा बेहतर होता। शेयर बाजार में गिरावट को अखबार ने अच्छी तरह से पेश किया है। रनिंग खबर के बजाय महत्वपूर्ण बॉक्स और आंकड़े रखे गए हैं, ताकि पाठकों को एक ही झटके में सबकुछ पता चल जाए। वैसे ‘दैनिक जागरण’ में इस तरह के प्रयोग कम ही देखने को मिलते हैं। एंकर में नीलू रंजन की बाईलाइन स्टोरी है, जिसे लोग जरूर पढ़ना चाहेंगे। नीलू ने बताया है कि किस तरह अब अपराधियों के लिए पहचान छिपाना आसान नहीं होगा।
आप अपनी राय, सुझाव और खबरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। (हमें फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन और यूट्यूब पर फॉलो करें)
टैग्स हिन्दुस्तान दैनिक जागरण अमर उजाला अखबार नवभारत टाइम्स न्यूज पेपर्स अखबारी कवरेज अखबारों की समीक्षा अखबारों का विश्लेषण