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खबरों के लिए देश में किस माध्यम पर सबसे ज्यादा भरोसा करते हैं लोग, सामने आई ये रिपोर्ट
‘सेंटर फॉर स्टडी डेवलपमेंट सोसाइटीज’ ने ‘Konrad Adenauer Stiftung’ के साथ मिलकर देश के 19 राज्यों में किया सर्वे। इस सर्वे में ट्रेडिनशन और न्यू मीडिया दोनों पर फोकस किया गया था।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 3 years ago
देश में भले ही न्यूज का प्रमुख और पसंदीदा स्रोत टेलिविजन है, लेकिन बात यदि विश्वसनीयता की हो तो मीडिया उपभोक्ताओं के बीच अखबार सूचना का सबसे भरोसेमंद सोर्स बने हुए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ‘सेंटर फॉर स्टडी डेवलपमेंट सोसाइटीज’ (CSDS) के लोकनीति कार्यक्रम के तहत कराए गए एक सर्वे में यह बात सामने आई है। गुरुवार को इस सर्वे के नतीजे जारी किए गए हैं। ‘Konrad Adenauer Stiftung’ (KAS) के साथ मिलकर 'Media in India: Access, Practices, Concerns and Effects' नाम से किए गए इस सर्वे में ट्रेडिनशन और न्यू मीडिया दोनों पर फोकस किया गया था।
19 राज्यों- आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में 15 साल और उससे ऊपर की उम्र के 7463 लोगों को इस सर्वे में शामिल किया गया।
शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के नागरिकों के बीच कराए गए सर्वे में यह भी सामने आया कि पिछले तीन वर्षों में देश में स्मार्टफोन का इस्तेमाल बढ़ा है। इसके साथ ही मोबाइल पर इंटरनेट और सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने वालों की संख्या में भी इजाफा हुआ है। सर्वे के अनुसार, इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाले प्रत्येक 10 यूजर्स में से नौ यूजर्स सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय हैं। एक्टिव इंटरनेट यूजर्स यानी इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाले सक्रिय उपभोक्ताओं में से तीन चौथाई सर्च इंजन का इस्तेमाल करते हैं। दस में से सात ऐसे यूजर्स न्यूज और करेंट अफेयर्स वेबसाइट्स को ब्राउस करते हैं। वहीं, दो तिहाई लोग ई-मेल का इस्तेमाल करते हैं, हालांकि वे नियमित रूप से ऐसा नहीं करते हैं।
रोचक तथ्य यह है कि अधिकांश इंटरनेट यूजर्स का कहना था कि सरकारी सेवाओं की तुलना में इंटरनेट पर अपने व्यक्तिगत डेटा और गतिविधियों की गोपनीयता सुनिश्चित करने के लिए वे इंटरनेट सेवा प्रदाताओं (Internet Service Providers) पर अधिक भरोसा करते हैं।
इस सर्वे के अनुसार, करीब 46 प्रतिशत सोशल मीडिया यूजर्स का कहना था कि सरकार को यह तय नहीं करना चाहिए कि सोशल मीडिया पर क्या पोस्ट किया जाए और क्या नहीं। 36 प्रतिशत इंटरनेट यूजर्स ने कानून और व्यवस्था के आधार पर सरकार द्वारा इंटरनेट सेवा बंद किए जाने का विरोध किया, जबकि 37 प्रतिशत ने सरकार की ओर से की जाने वाली इस तरह की कार्रवाइयों का समर्थन किया।
सर्वे में यह भी बताया गया है कि 45 प्रतिशत सोशल मीडिया यूजर्स इस बात से असहमत हैं कि लोग सरकार के बारे में कुछ भी कहने के लिए स्वतंत्र हैं, चाहे वह आपत्तिजनक ही क्यों न हो। सर्वे में शामिल आधे से ज्यादा लोगों का कहना था कि यूजर्स द्वारा सोशल मीडिया अथवा वॉट्सऐप पर आपत्तिजनक अथवा भड़काऊ पोस्ट करना गलत है। हालांकि, 35 प्रतिशत लोगों ने कहा कि इसमें कुछ भी गलत नहीं है, वहीं 40 प्रतिशत सोशल मीडिया यूजर्स ने कहा कि उन्हें सोशल मीडिया पर सरकार के खिलाफ अपने विचार व्यक्त करने के लिए स्वतंत्र होना चाहिए।
सर्वे के अनुसार, 49 प्रतिशत लोगों का मानना था कि सरकार यह निगरानी करती है कि लोग इंटरनेट पर क्या करते हैं। 17 प्रतिशत इस बात से असहमत थे, जबकि अन्य ने कहा कि उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं है।
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