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जानें, न्यूज चैनलों के लिए किस तरह फायदे का सौदा साबित हो रहे चुनाव
ज्यादा से ज्यादा व्युअरशिप हासिल करने के लिए तमाम स्ट्रैटेजी अपना रहे हैं चैनल्स
समाचार4मीडिया ब्यूरो 6 years ago
देश में 17वीं लोकसभा के गठन के लिए विभिन्न चरणों में चल रही मतदान प्रक्रिया सोमवार को पांचवे चरण में प्रवेश कर चुकी है। चुनाव के दौरान हिंदी न्यूज चैनलों की व्युअरशिप में काफी इजाफा देखने को मिला है। इन चैनलों के विज्ञापन रेट में भी काफी बढ़ोतरी हो गई है। सिर्फ हिंदी ही नहीं, अंग्रेजी न्यूज चैनलों की व्युअरशिप भी चुनाव के दौरान काफी बढ़ गई है। चुनाव का ज्यादा से ज्यादा फायदा उठाया जा सके, इसके लिए चैनलों की ओर से तमाम स्ट्रैटेजी अपनाई जा रही हैं।
इस बार में ‘रिपब्लिक टीवी’ (Republic TV) के सीईओ विकास खनचंदानी का कहना है, ‘इलेक्शन कवरेज को लेकर हमने काफी तैयारी की है। हम अपने दर्शकों को चुनाव कवरेज के साथ विश्लेषणात्मक कार्यक्रम भी दिखा रहे हैं। इसके अलावा हमारे पास एक विशेष बस भी है जो देश के विभिन्न राज्यों में जाकर लोगों से बात कर रही हैं और वहां की राजनीतिक स्थिति को दर्शाने का काम कर रही है। मतदान के दिन, मतगणना वाले दिन और जिस दिन सरकार का गठन होता है, उस दिन चैनलों की व्युअरशिप में काफी इजाफा हो जाता है। मतगणना वाले दिन बड़े चैनलों का विज्ञापन रेट प्रति सेंकेंड के लिए डेढ़ लाख रुपए तक हो जाता है, क्योंकि इस दिन व्युअरशिप काफी ज्यादा होती है। ज्यादा से ज्यादा व्युअरशिप हासिल करने के लिए हम कई स्ट्रैटेजी पर काम कर रहे हैं। इस दौरान हमें विज्ञापन भी काफी मिल रहे हैं।’
वहीं ‘टाइम्स नाउ’ (Times Now) और ‘मिरर नाउ’ (Mirror Now) ने बढ़ी हुई विज्ञापन दरों को सिर्फ मतगणना वाले दिन के लिए सीमित नहीं रखा है। उनकी ओर से एडवर्टाइजर्स को तीन महीने का एजेंडा ऑफर किया जा रहा है। ‘टाइम्स नाउ’ के प्रेजिडेंट (रेवेन्यू) निखिल गांधी का कहना है, ‘जहां तक अंग्रेजी न्यूज चैनलों की बात है, हमारे नए विज्ञापन रेट तीन महीने के एजेंडे पर हैं और यह अप्रैल से चल रहे हैं। इसमें सरकार गठन वाले दिन से लेकर शपथ ग्रहण समारोह आदि शामिल हैं। जब भी चुनाव आते हैं, हम विज्ञापन रेट को 30-40 प्रतिशत तक बढ़ा देते हैं। दरअसल हम क्रेडिबिलिटी पर ज्यादा ध्यान देते हैं और लोगों को हमारे चैनल्स पर सटीक खबरें मिलती हैं, यही कारण है कि चुनावों में हमारे चैनलों की व्युअरशिप 55 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ जाती है।’
इस बारे में ‘न्यूज18 नेटवर्क’ (News18 Network) के सीईओ (इंग्लिश और बिजनेस न्यूज क्लस्टर) बसंत धवन का कहना है, ‘विभिन्न इलेक्शन शो और कॉमर्शियल इन्वेंट्री के अलावा हमने एडवर्टाइजर्स को अपने खास इलेक्शन टूल्स से जुड़ने का मौका दिया है। इसके लिए हमने ‘मैजिक वॉल’ तैयार की है, जिसमें व्युअर्स को विषय के गहन विश्लेषण के बारे में जानकारी दी जाएगी। ब्रैंड्स इसके साथ जुड़कर ज्यादा से ज्यादा लोगों तक अपनी पहुंच बना सकते हैं। पिछले दिनों पांच राज्यों में हुए चुनाव में व्युअरशिप सात गुना तक बढ़ गई थी, हालांकि, इन राज्यों से टीवी व्युअरशिप ज्यादा नहीं आती है। अब आम चुनाव पर तो पूरे देश की नजर है, ऐसे में व्युअरशिप में रिकॉर्ड तोड़ इजाफा होने की उम्मीद है।’ बसंत धवन का यह भी कहना है, ‘चुनाव के दौरान बढ़ी व्युअरशिप को देखते हुए एडवर्टाइजिंग रेट पहले ही बढ़े हुए हैं। मतगणना वाले दिन व्युअरशिप बहुत बढ़ने से चैनलों को विज्ञापन के मोर्चे पर भी काफी फायदा होगा।’
इस बारे में ‘बार्क इंडिया’ (BARC India) के सीईओ पार्थो दासगुप्ता का कहना है, ‘लोकसभा चुनाव के दौरान ज्यादा से ज्यादा लोगों को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए न्यूज चैनल्स ने पहले ही कई नए प्रयोग किए हैं। इस दिशा में हिंदी न्यूज चैनलों के साथ ही अंग्रेजी न्यूज चैनल भी कई तरह की कवायद कर रहे हैं। पिछले चुनावों की तुलना में इंग्लिश न्यूज चैनलों की व्युअरशिप में काफी इजाफा देखने को मिला है।’ एक उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया, ‘कर्नाटक में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान मतणगना वाले दिन अंग्रेजी न्यूज जॉनर में व्युअपशिप साढ़े चार गुना तक बढ़ गई थी। इसके अलावा कुछ समय पूर्व पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव परिणाम के दौरान भी इस जॉनर में व्युअरशिप साढ़े तीन गुना बढ़ गई थी।
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