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NCLT ने सुभाष चंद्रा के खिलाफ इंडियाबुल्स की निजी दिवाला याचिका को किया स्वीकार
NCLT की दिल्ली पीठ ने कथित तौर पर विवेक इंफ्राकॉन नामक कंपनी को दी गई गारंटी पर ZEEL के मानद चेयरमैन सुभाष चंद्रा के खिलाफ निजी दिवाला याचिका को स्वीकार कर लिया है
समाचार4मीडिया ब्यूरो 1 year ago
नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की दिल्ली पीठ ने कथित तौर पर विवेक इंफ्राकॉन नामक कंपनी को दी गई गारंटी पर जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (ZEEL) के मानद चेयरमैन सुभाष चंद्रा के खिलाफ निजी दिवाला (personal insolvency) याचिका को स्वीकार कर लिया है। दरअसल, इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंशियल सर्विसेज (IBHF) ने चंद्रा के खिलाफ निजी दिवाला की याचिका दी थीI
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चंद्रा ने दलील दी थी कि व्यक्तिगत तौर पर गारंटी देने वाला दिवाला कार्यवाही के लिए उत्तरदायी नहीं हो सकता है और NCLT के पास उसके खिलाफ प्रक्रिया शुरू करने की कोई शक्ति नहीं है।
हालांकि, मई 2022 में NCLT ने इसे खारिज कर दिया था और उसने माना कि उसके पास व्यक्तिगत दिवाला कार्यवाही पर फैसला करने का अधिकार है।
इसके बाद, इसे चंद्रा ने नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) के समक्ष चुनौती दी। हालांकि, मामला वापस ले लिया गया क्योंकि सभी पक्षों ने मामले को सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझाने का फैसला किया था।
IBHF ने 2022 में सुभाष चंद्रा के खिलाफ निजी इंसोल्वेंसी शुरू करने के लिए याचिका दायर की थी, क्योंकि IBHF ने चंद्रा की पर्सनल गारंटी पर विवेक इंफ्राकॉन प्राइवेट को 170 करोड़ रुपये का लोन दिया था, जिस पर कंपनी ने डिफॉल्ट कर दिया और लोन गैर-निष्पादित संपत्ति (non-performing assets) में बदल गया।
एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, “IBHF ने दावा किया कि चंद्रा ने विवाद को सेटलमेंट करने के संकेत दिए थे, लेकिन महीनों बाद भी यह सफल नहीं हुआ है। इस प्रकार, वे निजी दिवाला याचिका को पुनर्जीवित करने के लिए बाध्य हैं। याचिका दिवाला और दिवालियापन संहिता, 2016 (Insolvency and Bankruptcy Code, 2016) के तहत दायर की गई थी।
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