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प्रसार भारती ने कहा, कुछ मीडिया संस्थान ने फैलायी इस तरह की भ्रामक खबरें
सार्वजनिक प्रसारक संस्थान प्रसार भारती ने आधुनिक तकनीक की ओर कदम बढ़ा दिए हैं और वह पुरानी पड़ चुकी एनलॉग टेक्नालॉजी की जगह डिजिटल प्लेटफॉर्म का प्रयोग बढ़ा रही है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 4 years ago
सार्वजनिक प्रसारक संस्थान प्रसार भारती ने आधुनिक तकनीक की ओर कदम बढ़ा दिए हैं और वह पुरानी पड़ चुकी एनलॉग टेक्नालॉजी की जगह डिजिटल प्लेटफॉर्म का प्रयोग बढ़ा रही है। इस कड़ी में अभी तक सभी एनालॉग ट्रांसमीटरों में से लगभग 70% को चरणबद्ध तरीके से बाहर कर दिया गया है। बाकी को चरणबद्ध तरीके से हटाया जा रहा है। वहीं, कर्मचारियों की पुन: तैनाती के लिए उचित उपाय सुनिश्चित किए जा रहे हैं।
सार्वजनिक प्रसारक ने कहा कि सामरिक महत्त्व के स्थानों में लगभग 50 एनालॉग टेरेस्ट्रियल टीवी ट्रांसमीटरों को छोड़कर प्रसार भारती 31 मार्च 2022 तक शेष अप्रचलित एनालॉग ट्रांसमीटरों को बाहर कर देगा। इसी क्रम में 2017-18 में 306, 2018-19 में 468, 2019-20 में 6 और 2020-21 में 46 टेरिस्ट्रियल टीवी ट्रांसमीटर हटाये गए हैं।
प्रसार भारती ने साफ किया है कि सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण कुछ क्षेत्रों को छोड़कर बाकी जगहों से अब एनालॉग तकनीकी पर आधारित टेरिस्ट्रियल टीवी ट्रांसमीटर को हटाया जा रहा है।
प्रसार भारती ने उल्लेख किया कि एनालॉग टेरेस्ट्रियल टीवी (एटीटी) एक अप्रचलित तकनीक है और इसे चरणबद्ध रूप से हटाना सार्वजनिक और राष्ट्रीय हित दोनों में है, क्योंकि यह बिजली पर होने वाले व्यर्थ खर्च को कम करने के अलावा 5जी जैसी नई व उभरती टेक्नोलॉजी के लिए मूल्यवान स्पेक्ट्रम उपलब्ध कराता है। एटीटी के चरणबद्ध तरीके से हटाने के चलते कई मेगाहर्ट्स के सेपेक्ट्रम मुक्त होंगे, साथ ही परिचालन खर्च में 100 करोड़ रुपए सालाना तक की बचत होने की उम्मीद है। साथ ही इससे आधुनिक प्रौद्योगिकियों और नए अवसरों की दिशा खुलेगी।
पिछले कुछ वर्षों में दूरदर्शन और ऑल इंडिया रेडियो में प्रसारण सुधारों को लागू करते हुए, प्रसार भारती एनालॉग टेरेस्ट्रियल टीवी ट्रांसमीटर जैसी अप्रचलित प्रसारण तकनीकों को तेजी से समाप्त कर रहा है, जिससे उभरती प्रौद्योगिकियों और नए कंटेंट के अवसरों में बदलाव का मार्ग प्रशस्त हो रहा है।
प्रसार भारती ने साफ किया कि कुछ स्थानों पर इस संबंध में गलत जानकारी प्रसारित की जा रही है कि दूरदर्शन से जुड़ा कोई केन्द्र बंद होने जा रहा है। प्रसार भारती ने स्पष्ट किया कि अप्रचलित एनालॉग टेरेस्ट्रियल टीवी ट्रांसमीटरों को चरणबद्ध तरीके से हटाने के लिए प्रसारण सुधार कदमों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है। हाल ही में ‘डीडी सिलचर’, ‘डीडी कलबुर्गी’ आदि के बारे में ऐसी झूठी खबरें सामने आई हैं।
प्रसार भारती ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ये डीडी केंद्र यूट्यूब और सोशल मीडिया सहित डिजिटल मीडिया पर अपनी उपस्थिति बनाए रखने के अलावा अपने-अपने राज्यों को समर्पित दूरदर्शन के सभी सैटेलाइट चैनल प्रसारण के लिए कार्यक्रम कंटेंट तैयार करना जारी रखेंगे। उदाहरण के लिए ‘डीडी सिलचर’ और ‘डीडी कलबुर्गी’ द्वारा बनाये गए कार्यक्रम अब क्रमशः ‘डीडी असम’ और ‘डीडी चंदना’ पर प्रसारित किए जायेंगे।
प्रसार भारती ने साफ किया कि वह अन्य फ्री टू एयर निजी चैनल सहित दूरदर्शन के सभी चैनल डीडी फ्री डिश और डीटीएच के माध्यम से उपलब्ध करा रहा है। डीडी फ्री डिश डीटीएच चैनलों को ‘फ्री टू एयर मोड’ में प्राप्त करने के लिए सेट-टॉप बॉक्स बाजार से एकमुश्त निवेश के रूप में खरीदे जा सकते हैं और इसके माध्यम से कई शैक्षिक चैनलों के साथ-साथ आकाशवाणी के 40 से अधिक सैटेलाइट रेडियो चैनलों सहित 120 से अधिक फ्री-टू-एयर टीवी चैनल देखे जा सकते हैं।
प्रसार भारती ने यह भी जानकारी दी कि 5जी ब्रॉडकास्ट जैसे उभरते मानकों के अनुरूप डिजिटल टेरेस्ट्रियल ब्रॉडकास्टिंग के लिए नेक्स्ट जेन ब्रॉडकास्ट सॉल्यूशन/रोडमैप विकसित करने के लिए प्रसार भारती ने आईआईटी कानपुर के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं, ताकि डायरेक्ट टू मोबाइल ब्रॉडकास्टिंग जैसे नए एप्लिकेशन को सक्षम बनाया जा सके और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एल्गोरिदम के इस्तेमाल के जरिए नए कंटेंट के अवसर पैदा किए जा सकें।
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