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‘मीडिया कंपनियों को कानून के समर्थन में एकजुट होकर आगे आना चाहिए’
e4m-DNPA डायलॉग्स में ‘मिंडेरू फाउंडेशन’ की सीनियर पॉलिसी एडवाइजर एम्मा मैकडॉनल्ड और ‘दि ऑस्ट्रेलिया इंस्टीट्यूट’ के डायरेक्टर पीटर लुईस के बीच काफी ज्ञानपरक व रोचक चर्चा हुई।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 3 years ago
डिजिटल मीडिया ईकोसिस्टम (पारिस्थितिकी तंत्र) की चुनौतियों और अवसरों पर चर्चा करने के लिए एक्सचेंज4मीडिया और डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (डीएनपीए) ने इंटरशनेशनल स्पीकर्स के साथ 25 नवंबर को वर्चुअल रूप से गोलमेज सम्मेलन (राउंडटेबल कॉन्फ्रेंस) का आयोजन किया।
इस कार्यक्रम के दौरान e4m ‘DNPA Dialogues’ के उद्घाटन सत्र में इंटरनेशनल स्पीकर्स एक मंच पर आए और तेजी से हो रहे डिजिटलीकरण के दौर में प्लेटफॉर्म्स और पब्लिशर्स के संबंधों पर अपने विचार रखे।
इस आयोजन के दौरान एक सेशन में ‘मिंडेरू फाउंडेशन’ (Minderoo Foundation) की सीनियर पॉलिसी एडवाइजर एम्मा मैकडॉनल्ड (Emma McDonald) और ‘दि ऑस्ट्रेलिया इंस्टीट्यूट’ (The Australia Institute) के डायरेक्टर पीटर लुईस (Peter Lewis) के बीच बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों को लेकर चर्चा हुई।
बता दें कि बतौर जनरल काउंसिल मैकडॉनल्ड्स के पास नीति (policy), विनियामक (regulatory) और सार्वजनिक मामलों (public affairs) में काम करने का 25 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वह ऑस्ट्रेलियाई कम्युनिकेशंस मिनिस्टर की सीनियर पॉलिसी एडवाइजर भी रह चुकी हैं। वहीं, लुईस ऑस्ट्रेलिया के प्रमुख सार्वजनिक प्रचारकों में से एक हैं और उन्हें मीडिया, पॉलिटिक्स व कम्युनिकेशंस में काम करने का दो दशक से ज्यादा का अनुभव है।
इस सेशन की अध्यक्षता ‘DNPA’ के चेयरपर्सन तन्मय माहेश्वरी और ‘डीबी कॉर्प लिमिटेड’ के डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर पवन अग्रवाल ने की। बता दें कि डीएनपीए (Digital News Publishers Association) प्रिंट व टेलिविजन के क्षेत्र में काम कर रही देश की शीर्ष मीडिया कंपनियों की डिजिटल विंग का प्रतिनिधित्व करता है।
इस सेशन की शुरुआत में मैकडॉनल्ड्स ने ऑस्ट्रेलिया सरकार द्वारा बड़े टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म्स से दूर जाने के फैसले के बारे में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि ऑस्ट्रेलिया में पिछले 10 वर्षों या उससे अधिक समय से सरकारों को डिजिटल में हो रहे क्रांतिकारी बदलाव और इन प्लेटफॉर्म्स द्वारा मीडिया इंडस्ट्री पर पड़ रहे प्रभाव के बारे में जानकारी थी। मैं एक मीडिया कंपनी से आई थी, इसलिए मैंने इसे पहली बार देखा था। ऑस्ट्रेलिया में सरकार पिछले कुछ समय से इस समस्या से निपट रही है। सरकार ने इस दौरान विभिन्न कार्यक्रमों और फंडिंग योजनाओं के माध्यम से इससे निपटने की कोशिश की और इसके समाधान के बारे में बहुत सारी लिखा-पढ़ी भी की।’
मैकडॉनल्ड्स के अनुसार, ‘प्रस्तावित स्वैच्छिक कोड (voluntary code) का वह शुरुआती चरण था और मुझे लगता है कि हर कोई आशावादी था कि गूगल और फेसबुक इस मुद्दे पर साथ बैठेंगी और मीडिया कंपनियों के साथ मिलकर काम करेंगी। अप्रैल 2020 में कोविड-19 महामारी के आने के बाद जब मैं मंत्री कार्यालय में काम कर रही थी, तमाम पब्लिशर्स हमारे पास आते थे। वे इस बात को लेकर बहुत चिंतित थे कि उनका भविष्य क्या होगा और हम उनकी मदद कैसे कर सकते हैं।’
मैकडॉनल्ड ने इस बात पर भी जोर दिया कि मीडिया कंपनियों को एक संयुक्त मोर्चा (United Front) बनाना चाहिए और इसके फलने-फूलने के लिए कानून का समर्थन करना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘जब सभी मीडिया कंपनियां एक साथ आएंगी, तो इससे कानून का रास्ता साफ होगा। यह उस समय में वाकई में काफी महत्वपूर्ण है, जब सरकार इस दिशा में अपने कदम उठा रही है।’ इसके साथ ही मैकडॉनल्ड का यह भी कहना था कि हालांकि यह पूरी तरह से सही नहीं है। यदि कानून से परिणाम निकलता है तो यह सब व्यर्थ नहीं है। पत्रकारिता के समर्थन में यह बहुत अच्छा किया गया है।
वहीं, लुईस का कहना था कि जब लोग फेसबुक और गूगल जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स लाते हैं तो वे इन टेक्नोलॉजी कंपनियों के बारे में नहीं बल्कि विज्ञापन एकाधिकार (advertising monopolies) के बारे में बात कर रहे होते हैं। उन्होंने कहा, ‘विज्ञापन एकाधिकार पर रोक के लिए हमारे नियामक आयोग ने तमाम सिफारिशें (recommendations) पास कीं। मुझे लगता है कि उन्होंने 27 सिफारिशों की एक श्रंखला पास की, जिनमें सिर्फ एक न्यूज मीडिया बार्गेनिंग कोड था। लेकिन अगर यह सिर्फ एक मंत्री के कार्यालय में बैठकर बनाई हुई नीति होती तो गूगल और फेसबुक दोनों की ओर से विरोध होता।’
लुईस के अनुसार, ‘वे इस सिद्धांत से पीछे नहीं हटने वाले थे क्योंकि इस प्रस्ताव को राष्ट्रीय स्तर पर विनियमित करना था। जिस तरह से प्लेटफॉर्म्स संचालित होते हैं, वह कुछ ऐसा है जो उन्होंने पहले कभी नहीं किया है।’ इस सेशन के आखिर में अपनी बात रखते हुए लुईस ने कहा, ‘मेरा मानना है कि इन प्लेटफॉर्म्स ने इस तरह की बातों को शांत करने के लिए ऑस्ट्रेलियाई मीडिया कंपनियों को भुगतान किया और मुझे लगता है कि उन्हें उम्मीद थी कि बाकी दुनिया में इसकी गूंज नहीं हो रही होगी।’
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