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पत्रकारिता केवल 'वॉचडॉग' नहीं, बल्कि जिम्मेदारी का प्रतीक भी है: कार्तिकेय शर्मा
ITV मीडिया नेटवर्क के संस्थापक और राज्यसभा सांसद कार्तिकेय शर्मा ने ‘विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस’ के अवसर पर मीडिया की वर्तमान स्थिति और पत्रकारिता के बदलते परिदृश्य पर अपने विचार साझा किए।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 9 months ago
विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस (वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम डे) के अवसर पर एक्सचेंज4मीडिया ग्रुप की ओर से एक विशेष वेबिनार का आयोजन किया गया, जिसमें भारतीय मीडिया जगत की जानी-मानी हस्तियों ने भाग लिया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य जिम्मेदार पत्रकारिता का उत्सव मनाना और मीडिया की बदलती भूमिका पर विचार-विमर्श करना था।
वेबिनार में शामिल प्रमुख वक्ताओं में डॉ. अनुराग बत्रा (चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ, BW बिजनेसवर्ल्ड और एक्सचेंज4मीडिया ग्रुप), कार्तिकेय शर्मा (संस्थापक, ITV मीडिया नेटवर्क और राज्यसभा सांसद), आलोक मेहता (वरिष्ठ पत्रकार और पद्मश्री सम्मानित), प्रो. (डॉ.) के. जी. सुरेश (वरिष्ठ मीडिया विशेषज्ञ और निदेशक, इंडिया हैबिटैट सेंटर) और संकेत उपाध्याय (वरिष्ठ पत्रकार और ‘द रेड माइक’ के सह-संस्थापक) शामिल रहे।
एक्सचेंज4मीडिया द्वारा आयोजित वेबिनार कार्यक्रम में बोलते हुए ITV मीडिया नेटवर्क के संस्थापक और राज्यसभा सांसद कार्तिकेय शर्मा ने ‘विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस’ के अवसर पर मीडिया की वर्तमान स्थिति और पत्रकारिता के बदलते परिदृश्य पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि मीडिया का दायरा आज बहुत बदल चुका है और इस बदलाव का सबसे ज्यादा असर पत्रकारों पर पड़ा है।
उन्होंने मीडिया में हो रहे इस बदलाव को स्वीकार करते हुए कहा, “हाल ही में मैं WAVE Summit में मुंबई गया था, जहां यह साफ नजर आया कि भविष्य में कंटेंट और पत्रकारिता किस ओर बढ़ रही है। आज एक सामान्य व्यक्ति भी कंटेंट क्रिएटर बन चुका है और उसकी पहुंच दुनिया के कोने-कोने तक चंद सेकंडों में हो सकती है। यह एक बड़ा बदलाव है और इस नए परिदृश्य में सबसे ज्यादा प्रभावित वर्ग पत्रकारों का है।”
उन्होंने यह भी बताया कि कंटेंट निर्माण की ताकत अब सभी के पास है और पत्रकारों को अपनी मूल जिम्मेदारी निभानी चाहिए, “जब हम NewsX को 'News Not Noise' के नारे के साथ शुरू कर रहे थे, तो यही सोच थी कि पत्रकारिता केवल 'वॉचडॉग' नहीं, बल्कि जिम्मेदारी का प्रतीक भी है।”
शर्मा ने यह स्पष्ट किया कि आज पत्रकारों को केवल अपनी पुरानी तकनीकों को दोबारा सीखने की जरूरत नहीं, बल्कि यह भी समझना होगा कि संचार, नैरेटिव और दृश्यों की भूमिका बढ़ चुकी है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि “पत्रकारिता पहले से कहीं ज्यादा असुरक्षित हो गई है और इसका कारण सिर्फ राजनीति नहीं, बल्कि तकनीकी कंपनियाँ, एल्गोरिद्म और प्लेटफॉर्म्स की ताकत भी हैं।”
एक प्रमुख बिंदु पर उन्होंने कहा, “आज किसी भी न्यूज वेबसाइट पर एडिटर की भूमिका सीमित हो चुकी है। एल्गोरिद्म तय करते हैं कि क्या दिखेगा, क्या चलेगा और क्या नहीं।” इसके अलावा, उन्होंने प्रेस की स्वतंत्रता पर भी ध्यान आकर्षित करते हुए बताया कि खतरा केवल सरकारों से नहीं आता, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की नीतियां भी इसमें भूमिका निभाती हैं।
कार्तिकेय शर्मा ने पत्रकारिता के नए खतरों और चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि “हम एक ध्रुवीकृत दुनिया में जी रहे हैं और पत्रकारों के अपने विचार और मत हैं, जो उनके लेखन में झलकते हैं। पत्रकारिता की स्वतंत्रता को नए खतरों और जरूरतों के संदर्भ में देखना होगा।”
उन्होंने AI (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) के बढ़ते प्रभाव पर भी बात की और बताया कि यह भविष्य में पत्रकारिता को बहुत प्रभावित करेगा। “हम अब भी हार्डवेयर की बात कर रहे हैं, जबकि असली बदलाव AI ला रहा है। पत्रकारिता को इसे गंभीरता से समझना होगा,” उन्होंने कहा।
अंत में उन्होंने पत्रकारों को अपनी मूल बातों, सिद्धांतों और नैतिकता के प्रति ईमानदार रहने की अपील की और कहा, “हर कोई कंटेंट बना रहा है, लेकिन पत्रकारों को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।” उन्होंने पत्रकार और कंटेंट क्रिएटर के बीच अंतर को स्पष्ट करते हुए कहा कि पत्रकार की विश्वसनीयता, सिद्धांत और जवाबदेही ही उसे दूसरों से अलग बनाती है।
जब उनसे पूछा गया कि क्या हम ‘जिम्मेदार पत्रकारिता’ की दिशा में पर्याप्त कर पा रहे हैं, तो इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, “हमने खुद को बहुत ज्यादा महत्व देना शुरू कर दिया है, जैसे कि हमें सब कुछ पता है।” उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि पहले एडिटर यह तय करता था कि पाठक क्या पढ़ना चाहते हैं, लेकिन अब डेटा के आधार पर यह तय होता है कि लोग क्या देखना या पढ़ना चाहते हैं।
उन्होंने यह भी कहा, “हम ‘हार्ड न्यूज’ को ही पत्रकारिता मान बैठे हैं, जबकि लोग विभिन्न प्रकार की सामग्री देखना पसंद करते हैं, जैसे मनोरंजन और वायरल वीडियो।” उन्होंने यह भी बताया कि ‘ब्रेकिंग न्यूज’ अब उतनी अहमियत नहीं रखती क्योंकि सबकुछ तुरंत ऑनलाइन आ जाता है। फर्क अब सिर्फ आपकी प्रस्तुति और विश्लेषण में होता है।
अंत में उन्होंने पत्रकारिता को फिर से परिभाषित करने की जरूरत पर बल देते हुए कहा, “अच्छे पत्रकार और अच्छी पत्रकारिता हमेशा अपनी जगह बनाए रखेंगे, जैसे अच्छी किताबों और कॉलम्स की हमेशा अहमियत रहती है।”
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