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डिजिटल मीडिया की जवाबदेही तय करने का समय आ चुका है: अनुराग ठाकुर
देश के बड़े न्यूज ब्रॉडकास्टर्स में शुमार ‘आईटीवी नेटवर्क’ ने देश के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक हालातों पर चर्चा करने के लिए ‘इंडिया न्यूज मंच’ का गुरुवार को आयोजन किया।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 4 years ago
देश के बड़े न्यूज ब्रॉडकास्टर्स में शुमार ‘आईटीवी नेटवर्क’ (iTV Network) ने देश के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक हालातों पर चर्चा करने के लिए ‘इंडिया न्यूज मंच’ का गुरुवार को आयोजन किया। इस कार्यक्रम का आयोजन दिल्ली स्थित इम्पीरियल होटल (Imperial Hotel) में किया गया।
इस दौरान मुख्य अतिथि के तौर पर सूचना-प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर भी मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि दुनियाभर में आज डिजिटल इको सिस्टम और सेमीकंडक्टर की बहुत बड़ी भूमिका है और भारत दूसरे देशों पर निर्भर रहता है, ऐसा नहीं होना चाहिए। अब समय आ गया है कि भारत आत्मनिर्भर बने, लिहाजा इसके लिए निर्णय लिया गया है कि अगले 6 वर्षों में 76,000 करोड़ रुपए खर्च किया जाएगा और इसका फायदा ये होगा कि अगले 6 सालो में 9.5 लाख करोड़ रुपए की मैन्युफैक्चरिंग होगी, जिसमें से हम 5 लाख करोड़ का एक्सपोर्ट करेंगे। 1 लाख 33 हजार से ज्यादा लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे। इस वजह से हमें उम्मीद है कि आने वाले तीन-चार वर्षों में भारत इस मामले में आत्मनिर्भर बन जाएगा।
उन्होंने आगे कहा कि राम भक्तों पर जिन्होंने गोली चलायी, आज वे राम मंदिर का भी विरोध करते हैं और काशी का भी विरोध करते हैं। उन्होंने कहा कि काशी के न राम के, अखिलेश हैं अब्बाजान के... पहले हम लोग कहते थे कि रामलला हम आएंगे, राम मंदिर वहीं बनवाएंगे... तब अखिलेश यादव जी कहते थे कि आप राम मंदिर का नारा तो लगाते हैं, पर तारीख कब बताएंगे। इसलिए हमने न सिर्फ तारीख बतायी, बल्कि भव्य राम मंदिर का निर्माण भी किया। 250 वर्षों के बाद काशी विश्वनाथ धाम को बनाने का काम हो, काशी कॉरिडोर बनाने की बात हो, गंगाजी से जल लेकर शिवजी का अभिषेक करने की बात हो और वह मोदी जी के कारण संभव हुआ और वह भी पांच वर्षों में बिना किसी मुकदमें के संपन्न हुआ।
उन्होंने कहा कि आज ये लोग मोदी जी की आलोचना करते है, लेकिन जनता का पूरा साथ मोदी जी को मिला है। घाट वही थे, पर चमकते नहीं थे, स्वच्छता अभियान के तहत वह भी चमकाया। घाटो पर दिए भी जलाए। जनता के सहयोग से दिव्य काशी में भव्यता लाने का काम भी किया। बनारस के लोगों को आज रोजगार मिल रहा है, कारिगरों को उनका हक मिल रहा है। तीन तलाक और धारा 370 खत्म हुई। आज एक आम आदमी हवाई जहाज की यात्रा भी कर पाता है। लेकिन आलोचना आज भी मोदी जी की ही की जाति है, ऐसा क्यों है?
सूचना-प्रसारण मंत्री ने कार्यक्रम के दौरान आगे कहा कि यूपी में सपा की सरकार में भ्रष्टाचार और माफियाराज की तूती बोलती थी, लेकिन आज मैं गर्व के साथ कह सकता हूं कि योगीराज में गुंडाराज और माफियाराज को कुचलने का काम किया गया है। गुंडाराज मुक्त करने का काम यदि किसी ने किया है तो वह योगी सरकार ने किया है। पहले दुकानदारों को लुट जाने का खौफ होता था, लेकिन आज के समय मे वह बेखौफ होकर रात 11 बजे भी अपने घर जा सकता है।
गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा को लेकर चल रहे विवाद पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि क्या विपक्ष को देश की कानून व्यवस्था और न्यायालय व्यवस्था पर विश्वास है कि नहीं, यह समझना होगा। जब अनुच्छेद 370 व 35ए हमने हटाया तो इन्होंने कहा कि हम न्यायालय जाएंगे, लेकिन इस पर कुछ नहीं हुआ। ट्रिपल तलाक के मुद्दे पर भी ये न्यायालय गए, पर इस मामले में भी कुछ नहीं हुआ। फिर राम मंदिर की बात आयी तो न्यायालय से ही उसका निर्णय हुआ। राफेल डील को लेकर भी ये न्यायालय गए पर वहां सच सामने आया। आखिरकार इस मामले में भी एसआईटी की कमेटी गठित करके सुप्रीम कोर्ट के निर्देश में यदि जांच चल रही है, इस पर सवाल... क्या विपक्ष का देश की न्यायालयों से विश्वास हट गया है। क्या ये वापस इंदिरा गांधी के युग में चले गए। आपातकाल के समय जब बड़े-2 लोगों को पत्रकारों से लेकर न्यायधीषों तक जेलों में बंद कर दिया गया था, क्या उस समय में हम जी रहे हैं... नहीं।
यहां जब केंद्रीय मंत्री से पूछा गया कि जो रिपोर्ट्स आ रही हैं वह खुशखबरी लेकर नहीं आ रही हैं। यह मुद्दा सिर्फ एक्सीडेंट का मुद्दा नहीं था, यह दर्दनाक घटना थी। इसका जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि क्या ये टीवी चैनल्स पर तय होगा कि क्या था इसके पीछे? कितने पत्रकार वहां मौजूद थे। एक वीडियो पर देखकर यह तय कर लिया गया कि वहां के लोकल हालात क्या थे क्या नहीं थे। इस मामले पर एक जांच कमेटी बैठी है, इसलिए मुझे और आप सभी को कम से कम इतना तो संयम रखना होगा कि वह जांच कमेटी न्याय करे, जो दोषी हो उसे जेल भेजने के पीछे का काम कोर्ट करे और जो दोषी नहीं है उसे मीडिया कटघरे में खड़ा करने का न करे। मेरा मीडिया से केवल इतना अनुरोध है कि मीडिया ट्रायल करना बंद करे। बहुत से लोग तो मीडिया ट्रायल की वजह से ही खत्म हो जाते हैं। हमें न्याय व्यवस्था पर भरोसा रखना चाहिए और अगर कोई गलत होगा, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने आगे कहा कि सोशल मीडिया पर तो आजकल ऐसी-ऐसी खबरें आती है कि खबर तो वेबपोर्टल पर चल रही होती है, लेकिन उसके तार बॉर्डर पार से जुड़े होते हैं। सिखों का नरसंहार करने वाले जिन्होंने 30 साल तक पीड़ितों को इंसाफ नहीं दिया, क्या उन्होंने माफी मांगी फिर वे किस मुंह से साल 2004 में सत्ता मे आये?
राज्यसभा से निलंबित हुए सांसदों पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि जिन लोगों को वहां की जनता ने चुनकर संसद पहुंचाया, उन्हें संसद में बहस करने के बजाय जनता से जुड़े मुद्दों को उठाना चाहिए। जो सांसद राज्यसभा से निलंबित हुए उन्होंने शर्मनाक काम किया है और किस बुनियाद पर वे गांधीजी की प्रतिमा के नीचे बैठे हैं?
जब हम मेनस्ट्रीम मीडिया की बात करते हैं, तो एक अखबार या टेलिविजन के साथ बहुत सारे पत्रकार होते हैं, जुड़ा हुआ ईकोसिस्टम होता है। बहुत बड़ा नेटवर्क होता है, लिहाजा जिम्मेदारी भी बहुत बड़ी हो जाती है। उसी तरह से आपकी जवाबदेही भी बन जाती है। डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म अपने आप में एक ऐसा बड़ा अवसर है जहां पर हर नागरिक अपनी बात कह सकता है और हम फ्री स्पीच के पक्षधर हैं। हम चाहते हैं कि लोग अपनी बात खुलकर कहें, इसकी स्वतंत्रता होनी चाहिए। अभिव्यक्ति की आजादी से मुझे लगता है कि हर कोई सहमत होगा, लेकिन क्या वे ताकतें जो देश को तोड़ने का काम करती हैं, जो दुष्प्रचार करती हैं, जिसकी वजह से कोरोना काल के समय भी पेंडिमिक से ज्यादा मार इंफोडेमिक ने की। उनकी जवाबदेही तय नहीं होनी चाहिए। जो सोशल मीडिया के माध्यम से गलत खबरें दी जाती थीं, उससे सैकड़ों नहीं हजारों लोगों की जानें दुनियाभर में गईं। इसके लिए कौन जिम्मेदार है? लिहाजा कोई दुष्प्रचार करता है तो किसी न किसी की तो जवाबदेही तो तय होनी ही चाहिए।
डिजिटल मीडिया की जवाबदेही तय करने का समय आ चुका है, अगर सीमा पार से कोई एजेंडा चल रहा है तो हम उसे कैसे अनुमति दे सकते हैं। न्यूज हो, कंटेंट हो या ओटीटी प्लेटफॉर्म हो, हर शिकायत पर हमने तुरंत कार्यवाही की है।
विचारों के इस मंच पर कई क्षेत्रों से जुड़े लोगों को सुनने का मौका मिला। इस मंच पर देश के वर्तमान हालात के अलावा आने वाले पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों को लेकर भी मंथन किया गया।
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