सोशल मीडिया पर वायरल ₹22,000 करोड़ की कहानी कितनी सच? जानिए सुभाष चंद्रा का पूरा मामला

सोशल मीडिया पर दावा है कि सुभाष चंद्रा ने ₹22,006 करोड़ का कर्ज लिया और सिर्फ ₹6.5 करोड़ में मामला खत्म हो गया। लेकिन इस दावे में गारंटी (Guarantee) की अहम भूमिका को नजरअंदाज किया गया है।

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Friday, 28 August, 2026
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पलक शाह, खोजी पत्रकार ।।

यह लेख मूल रूप से BW Businessworld में प्रकाशित हुआ था।

सोशल मीडिया पर एक पोस्ट कुछ इस तरह वायरल हो रही है: सुभाष चंद्रा ने भारतीय बैंकों से ₹22,006 करोड़ उधार लिए, पैसे चुकाने से इनकार कर दिया, ट्रिब्यूनल में पहुंचे और सिर्फ ₹6.5 करोड़ देकर मामला खत्म हो गया। इसके साथ यह भी कहा जा रहा है कि वह बीजेपी सांसद थे, इसलिए उन्हें आसानी से राहत मिल गई। कहानी सुनने में सीधी और साफ लगती है, लेकिन इसमें एक अहम शब्द को गलत समझा गया है और वह शब्द है- गारंटी (Guarantee)।

इस दावे को जोर-शोर से आगे बढ़ाने वालों में विजय माल्या भी शामिल हैं। वही विजय माल्या, जो इस समय लंदन से अपने प्रत्यर्पण के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं और भारतीयों को बता रहे हैं कि बैंक की वसूली किस तरह होनी चाहिए।

असल में हुआ क्या था, आसान भाषा में समझिए

इसे इस तरह समझिए। मान लीजिए आपका कोई रिश्तेदार फैक्ट्री लगाने के लिए बैंक से लोन लेता है। बैंक आपसे उस लोन के लिए गारंटर बनने को कहता है। आपने उस पैसे में से एक रुपया भी नहीं लिया। बाद में फैक्ट्री घाटे में चली जाती है और बंद हो जाती है। अब बैंक उस गारंटी के आधार पर आपसे पैसे की वसूली कर सकता है।

सुभाष चंद्रा के मामले में भी कुछ ऐसा ही हुआ, लेकिन बहुत बड़े औद्योगिक स्तर पर। उनके ग्रुप की कंपनियों ने लोन लिया था और सुभाष चंद्रा ने व्यक्तिगत तौर पर उन लोन की गारंटी दी थी। जब ग्रुप आर्थिक संकट में फंस गया, तो कर्जदाताओं ने गारंटर यानी सुभाष चंद्रा की तरफ रुख किया।

₹22,006 करोड़ वह पैसा नहीं है जो सुभाष चंद्रा के बैंक खाते में गया था। यह उन सभी कर्जदाताओं के दावों का कुल आंकड़ा है, जिनके पास सुभाष चंद्रा की गारंटी थी। अलग-अलग लोन के ये दावे एक-दूसरे से जुड़े हुए थे और एक के ऊपर एक जमा होते गए। ये गारंटियां उन लोन के लिए थीं जो दूसरी कंपनियों ने लिए और इस्तेमाल किए थे।

यह मामला शुरुआत में ₹22,000 करोड़ का था ही नहीं। अप्रैल 2024 में इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस ने ₹170 करोड़ के एक लोन की गारंटी को लेकर सुभाष चंद्रा के खिलाफ नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) का दरवाजा खटखटाया था। यह लोन विवेक इंफ्राकॉन नाम की कंपनी को दिया गया था।

एक बार यह मामला खुला तो जिन-जिन कर्जदाताओं के पास सुभाष चंद्रा की गारंटी थी, उन्होंने भी अपने दावे दाखिल करने शुरू कर दिए। इसी तरह धीरे-धीरे कुल दावों की रकम बढ़कर ₹22,006 करोड़ तक पहुंच गई।

फिर सिर्फ ₹6.5 करोड़ क्यों?

क्योंकि उनके पास लगभग उतना ही बचा था। इंसॉल्वेंसी कोर्ट सजा देने वाली अदालत नहीं होती। यह संपत्ति के बंटवारे की प्रक्रिया होती है। यहां एक सीधा सवाल पूछा जाता है- इस व्यक्ति के पास वास्तव में कितना पैसा या संपत्ति बची है और उसे किस कर्जदाता को कितना हिस्सा दिया जा सकता है?

कोर्ट की ओर से नियुक्त रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल ने सुभाष चंद्रा की निजी संपत्ति का मूल्यांकन किया। निष्कर्ष यह था कि उनकी संपत्ति की कीमत ₹6.5 करोड़ की पेशकश से भी कम थी।

इस ₹6.5 करोड़ में से ₹6.25 करोड़ कर्जदाताओं को दिए जाने हैं, जबकि ₹25 लाख प्रक्रिया से जुड़े खर्चों के लिए रखे गए हैं। इसके बाद खुद बैंकों ने इस प्रस्ताव पर मतदान किया। इंसॉल्वेंसी कानून के तहत फैसला कर्जदाता लेते हैं, जज नहीं। नवंबर 2024 में वोटिंग में 80.81% हिस्सेदारी रखने वाले कर्जदाताओं ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। इसके बाद 2026 में ट्रिब्यूनल ने भी इसे मंजूरी दे दी। यह फैसला पहले बंटा हुआ था, जिसे तीसरे सदस्य के जरिए अंतिम रूप दिया गया।

ट्रिब्यूनल की दलील साफ थी- सिर्फ इसलिए कि बैंकों को मिलने वाली रकम बहुत कम दिखाई दे रही है और यह फैसला शर्मनाक लग सकता है, अदालत बैंकों के व्यावसायिक फैसले को खारिज नहीं कर सकती। 

अगर यह प्रस्ताव खारिज कर दिया जाता तो सुभाष चंद्रा पूरी तरह दिवालिया प्रक्रिया में चले जाते। ऐसे में जिन कर्जदाताओं ने इस प्रस्ताव का विरोध किया था, उन्हें संभवतः इससे भी कम पैसा मिलता। जिस संपत्ति में ₹32 करोड़ ही हों, वहां से ₹22,000 करोड़ की वसूली नहीं की जा सकती। किसी भी अदालत के पास ऐसी कोई मशीन नहीं है जो गायब पैसा पैदा कर सके।

"उन्होंने एक रुपया भी वापस नहीं किया" - यह भी पूरी सच्चाई नहीं है

IL&FS संकट के बाद जब भारत के क्रेडिट मार्केट पर बड़ा दबाव आया, तब एस्सेल ग्रुप पर करीब ₹20,000 करोड़ का कर्ज था। परिवार के पास मौजूद Zee के शेयर कर्जदाताओं के पास गिरवी रखे गए थे। अगर घबराहट में Zee के शेयरों की बिक्री शुरू हो जाती, तो पूरा कारोबार बिखर सकता था।

सुभाष चंद्रा के परिवार ने खुद Zee में अपनी हिस्सेदारी कम की। उन्होंने उस कारोबार को भी बेचने का रास्ता अपनाया जिसे उन्होंने खड़ा किया था और जिसे वह अपना 'क्राउन ज्वेल' यानी सबसे कीमती कारोबार मानते थे। इसके साथ ही अन्य कंपनियों को भी बेचकर कर्जदाताओं का पैसा चुकाया गया।

2021 में सुभाष चंद्रा ने कहा था कि 43 कर्जदाताओं और 110 खातों से जुड़े कुल कर्ज का 91.2% निपटाया जा चुका था।

इसलिए इसे ऐसे व्यक्ति के तौर पर पेश करना सही नहीं है जिसने पैसा लिया और विजय माल्या की तरह देश से भाग गया। उन्होंने कर्ज चुकाने के लिए अपना कारोबारी साम्राज्य तक बेच दिया। इसके बाद जो बचा, वह व्यक्तिगत गारंटियां थीं, जो लगभग खाली हो चुकी निजी संपत्ति के ऊपर थीं।

और बीजेपी सांसद होने वाली बात?

सुभाष चंद्रा कभी बीजेपी सांसद नहीं थे। वह 2016 से 2022 के बीच हरियाणा से निर्दलीय राज्यसभा सांसद थे। उन्हें बीजेपी के समर्थन से चुनाव में जीत मिली थी। 2022 में वह दोबारा राज्यसभा के लिए चुने नहीं जा सके। उनके खिलाफ इंसॉल्वेंसी केस 2024 में शुरू हुआ। रिजॉल्यूशन प्लान को 2026 में मंजूरी मिली। यानी इस पूरी कानूनी प्रक्रिया के शुरू होने से कई साल पहले ही वह संसद से बाहर हो चुके थे।

अब वह हिस्सा जो वाकई चिंता पैदा करता है।

इसे क्लीन चिट समझने की गलती न करें-

कर्जदाताओं ने यह सवाल जरूर उठाया कि पुराने नेट-वर्थ सर्टिफिकेट में कभी सुभाष चंद्रा की संपत्ति की कीमत ₹40,000 करोड़ से ज्यादा बताई गई थी। जबकि इस मामले में उन्होंने अपनी नेट वर्थ करीब ₹32 करोड़ बताई। इन दोनों आंकड़ों के बीच इतना बड़ा अंतर निश्चित रूप से जांच की मांग करता है।

ट्रिब्यूनल ने भी माना कि यह सवाल उठाना उचित है। लेकिन साथ ही कहा कि इंसॉल्वेंसी कानून के तहत किसी रिजॉल्यूशन प्लान को मंजूरी देने से पहले फॉरेंसिक ऑडिट कराना जरूरी नहीं है।

इसके अलावा यह आरोप भी लगाए गए कि 'हां' में वोट करने वाले कुछ कर्जदाता या संस्थाएं सुभाष चंद्रा के करीबी हो सकते हैं। अगर अपील में यह आरोप कभी साबित हो जाता है, तो 80% से ज्यादा की मंजूरी की पूरी तस्वीर काफी ज्यादा गंभीर हो सकती है। इस मामले की कीमत भी वास्तविक है। LIC Housing Finance ने इस प्लान के खिलाफ वोट किया था। उसका ₹1,322 करोड़ का स्वीकार किया गया दावा इस प्रक्रिया में करीब ₹38 लाख ही वापस ला पाएगा।

इंसॉल्वेंसी कानून के तहत असहमति जताने वाले कर्जदाता भी बहुमत से लिए गए फैसले से बंधे होते हैं।

सीधी और सच्ची बात

सुभाष चंद्रा ने अपने ग्रुप के कर्ज के लिए जरूरत से ज्यादा गारंटी दी। ग्रुप आर्थिक संकट में फंस गया। उन्होंने ज्यादातर कर्जदाताओं का पैसा चुकाने के लिए Zee पर अपना नियंत्रण तक बेच दिया। इसके बाद जो बचा, वह एक ऐसी निजी संपत्ति थी जो बहुत कम थी, जबकि उसके ऊपर बड़ी-बड़ी व्यक्तिगत गारंटियां थीं।

बैंकों ने खुद यह फैसला किया कि ₹6.5 करोड़ लेना उन संपत्तियों के पीछे लंबी कानूनी लड़ाई लड़ने से बेहतर है, जिनकी कीमत शायद इससे भी कम होती। यह बहुत बड़ा हेयरकट है और भारत में व्यक्तिगत गारंटरों से जुड़े इंसॉल्वेंसी कानून की व्यवस्था में एक गंभीर खामी की तरफ भी इशारा करता है। लेकिन यह इस बात का सबूत नहीं है कि किसी पूर्व निर्दलीय सांसद ने ₹22,000 करोड़ चुराए और राजनीतिक फायदे के कारण खुद को छूट दिला ली।

अगर आपको इस मामले पर गुस्सा आ रहा है, तो सख्त जांच की मांग कीजिए। यह एक गंभीर और जिम्मेदारी भरा सवाल है। लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल हो रही कहानी सिर्फ आंकड़ों को देखकर बनाई गई कहानी है, पूरी फाइल को समझकर नहीं।

(पलक शाह एक अनुभवी खोजी पत्रकार हैं और The Market Mafia: Chronicle of India’s High-Tech Stock Market Scandal & The Cabal That Went Scot-Free के लेखक हैं। करीब दो दशकों के पत्रकारिता अनुभव के साथ, उन्होंने मुंबई में जमीनी स्तर पर रिपोर्टिंग करते हुए पैसे, ताकत और नियमों के बीच के गठजोड़ को उजागर किया है। उनके लेख The Economic Times, Business Standard, The Financial Express और The Hindu Business Line जैसे प्रमुख प्रकाशनों में प्रकाशित हो चुके हैं।) 

 

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2030 तक ₹36.7 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है भारत का मीडिया-एंटरटेनमेंट मार्केट: PwC रिपोर्ट

भारत का मीडिया और एंटरटेनमेंट कारोबार लंबे समय से ज्यादा सब्सक्राइबर, ज्यादा डाउनलोड और ज्यादा दर्शक जुटाने की होड़ में रहा है।

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Friday, 28 August, 2026
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भारत का मीडिया और एंटरटेनमेंट कारोबार लंबे समय से ज्यादा सब्सक्राइबर, ज्यादा डाउनलोड और ज्यादा दर्शक जुटाने की होड़ में रहा है। लेकिन अब यह तस्वीर धीरे-धीरे बदल रही है। PwC India के Global Entertainment and Media Outlook के मुताबिक, भारतीय मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री अब सिर्फ बड़े पैमाने पर दर्शक जुटाने के बजाय टिकाऊ कमाई और लंबे समय तक बने रहने वाली वैल्यू पर ज्यादा ध्यान दे रही है।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत का Entertainment & Media (E&M) बाजार 2025 में करीब 25.7 अरब डॉलर से बढ़कर 2030 तक 36.7 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। इस दौरान बाजार की सालाना चक्रवृद्धि वृद्धि दर (CAGR) 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है। यह वैश्विक मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री की करीब 4 प्रतिशत की अनुमानित वृद्धि दर से लगभग दोगुनी है।

इंटरनेट विज्ञापन सबसे बड़ा ग्रोथ इंजन

भारत के मीडिया कारोबार की इस ग्रोथ में इंटरनेट विज्ञापन सबसे अहम भूमिका निभा रहा है। PwC के मुताबिक, इंटरनेट विज्ञापन बाजार 2025 के 7.5 अरब डॉलर से बढ़कर 2030 तक 14.3 अरब डॉलर हो सकता है। यानी इसमें करीब 13.9 प्रतिशत की CAGR से बढ़ोतरी का अनुमान है।

सर्च और वीडियो विज्ञापन इसके प्रमुख ग्रोथ ड्राइवर होंगे। कंपनियां डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सिर्फ ज्यादा लोगों तक पहुंचने के बजाय अब विज्ञापन से बेहतर कमाई और ज्यादा प्रभावी नतीजे हासिल करने पर जोर दे रही हैं।

OTT में सब्सक्राइबर से आगे बढ़ी सोच

OTT कारोबार भी तेजी से परिपक्व हो रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत का OTT बाजार 2.2 अरब डॉलर से बढ़कर 2030 तक 3.6 अरब डॉलर हो सकता है। हालांकि, OTT प्लेटफॉर्म के लिए अब सिर्फ सब्सक्राइबर बढ़ाना ही सबसे बड़ा लक्ष्य नहीं रह गया है। प्लेटफॉर्म विज्ञापन आधारित प्लान, यूजर्स को लंबे समय तक जोड़े रखने और प्रति यूजर ज्यादा कमाई (Revenue Per User) पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं।

इसका मतलब है कि OTT कंपनियों के लिए अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि उनके पास कितने सब्सक्राइबर हैं, बल्कि यह भी है कि वे उन यूजर्स से कितनी टिकाऊ कमाई कर पा रही हैं।

गेमिंग और ई-स्पोर्ट्स भी तेजी से बढ़ेंगे

भारत में गेमिंग और ई-स्पोर्ट्स का बाजार भी लगातार मजबूत हो रहा है। PwC के अनुमान के मुताबिक, यह बाजार 2025 के 1.5 अरब डॉलर से बढ़कर 2030 तक 2.6 अरब डॉलर हो सकता है।

इन-गेम विज्ञापन और स्पॉन्सरशिप आधारित मॉडल के बढ़ने से इस क्षेत्र में कमाई के नए रास्ते खुल रहे हैं। यह सेक्टर अभी मीडिया कारोबार के दूसरे बड़े हिस्सों से छोटा है, लेकिन इसकी ग्रोथ की रफ्तार काफी तेज है।

AI बनेगा मीडिया कारोबार का अहम हिस्सा

PwC India के मीडिया, एंटरटेनमेंट और स्पोर्ट्स लीडर Sethi के मुताबिक, भारत ने बड़ी संख्या में दर्शक जुटाने की क्षमता पहले ही साबित कर दी है। अब असली चुनौती इस जुड़ाव को लंबे समय तक टिकने वाली कमाई में बदलने की है।

इस बदलाव के केंद्र में Artificial Intelligence (AI) तेजी से अपनी जगह बना रहा है। AI का इस्तेमाल कंटेंट बनाने और उसे दर्शकों तक पहुंचाने के तरीके को बदल रहा है। इसमें डी-एजिंग, अलग-अलग भाषाओं में आवाज तैयार करना, पर्सनलाइजेशन और Generative Engine Optimisation जैसे क्षेत्रों में इसका इस्तेमाल बढ़ रहा है।

यानी AI अब सिर्फ एक नई तकनीक या प्रयोग नहीं रह गया है। यह धीरे-धीरे मीडिया कारोबार के पूरे सिस्टम का हिस्सा बन रहा है और कंटेंट बनाने से लेकर उसे खोजने और उससे कमाई करने तक की प्रक्रिया को बदल रहा है।

TV और प्रिंट की पकड़ अभी भी कायम

डिजिटल के तेजी से बढ़ने के बावजूद भारत में पारंपरिक मीडिया को खत्म मान लेना जल्दबाजी होगी। PwC के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में टेलीविजन की कमाई 2025 के 7.2 अरब डॉलर से बढ़कर 2030 तक 7.5 अरब डॉलर हो सकती है। इसी तरह प्रिंट मीडिया का कारोबार भी 3.0 अरब डॉलर से बढ़कर 3.5 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।

भारत में क्षेत्रीय भाषाओं के दर्शकों और विज्ञापनदाताओं के भरोसे की वजह से टीवी और प्रिंट अभी भी अपनी जगह बनाए हुए हैं। कई दूसरे विकसित बाजारों में जहां पारंपरिक मीडिया पर दबाव बढ़ा है, वहीं भारत में इन माध्यमों की पकड़ पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।

कनेक्टिविटी पर भी बढ़ेगा बड़ा खर्च

मीडिया और एंटरटेनमेंट के साथ-साथ कनेक्टिविटी इंफ्रास्ट्रक्चर भी तेजी से बढ़ रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, फाइबर, ब्रॉडबैंड और 5G के विस्तार के साथ कनेक्टिविटी से जुड़ा बाजार 36.5 अरब डॉलर से बढ़कर 2030 तक 58.6 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।

बेहतर इंटरनेट कनेक्टिविटी का सीधा फायदा OTT, गेमिंग, डिजिटल विज्ञापन और ऑनलाइन कंटेंट जैसे क्षेत्रों को मिलेगा। ज्यादा लोगों तक तेज इंटरनेट पहुंचने से इन सेवाओं के लिए संभावित दर्शकों और ग्राहकों का आधार भी बढ़ेगा।

क्षेत्रीय भाषाओं और प्रीमियम अनुभवों पर जोर

भारत के मीडिया कारोबार में क्षेत्रीय भाषाओं का कंटेंट भी बड़ा बदलाव ला रहा है। लंबे समय तक जिन दर्शकों को बड़े पैन-इंडिया प्लेटफॉर्म पर्याप्त ध्यान नहीं देते थे, अब वही ऑडियंस नए अवसर पैदा कर रही है।

इसके साथ ही प्रीमियम लाइव इवेंट और खास अनुभवों के लिए भुगतान करने वाले दर्शकों की संख्या भी बढ़ रही है। इससे कंपनियों को यह समझने में मदद मिल रही है कि भारतीय उपभोक्ता सिर्फ मुफ्त कंटेंट ही नहीं चाहता, बल्कि सही कंटेंट और खास अनुभव के लिए भुगतान भी कर सकता है।

अब सिर्फ ग्रोथ नहीं, सही तरीके से ग्रोथ जरूरी

PwC की रिपोर्ट से साफ संकेत मिलता है कि भारतीय मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री अब एक नए दौर में प्रवेश कर रही है। पहले जहां ज्यादा से ज्यादा दर्शक और सब्सक्राइबर जुटाना प्राथमिकता थी, वहीं अब कमाई, यूजर को बनाए रखना, तकनीक, क्षेत्रीय कंटेंट और उपभोक्ता का भरोसा ज्यादा अहम हो गया है।

आने वाले वर्षों में वही कंपनियां बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं, जो नई तकनीक और कंटेंट के साथ मजबूत कारोबारी अनुशासन बनाए रखें और अपने दर्शकों का भरोसा कायम रखें। यानी भारतीय मीडिया इंडस्ट्री की अगली कहानी सिर्फ Scale की नहीं, बल्कि Sustainable Value की होगी।

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ZEE का बड़ा कदम: प्रमोटर ग्रुप को 2.40 करोड़ वारंट आवंटित, मिले ₹75.79 करोड़

जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज (ZEE) ने प्रमोटर ग्रुप की कंपनी Sunbright Mauritius Investments Limited को 2,40,59,266 पूरी तरह कन्वर्टिबल वारंट आवंटित किए हैं।

Last Modified:
Friday, 28 August, 2026
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जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज (ZEE) ने प्रमोटर ग्रुप की कंपनी Sunbright Mauritius Investments Limited को 2,40,59,266 पूरी तरह कन्वर्टिबल वारंट आवंटित किए हैं। कंपनी ने यह आवंटन तरजीही आधार (Preferential Issue) पर किया है। इस आवंटन के तहत ZEE को वारंट सब्सक्रिप्शन के रूप में ₹75.78 करोड़ मिले हैं।

कंपनी ने शेयर बाजार को दी जानकारी में बताया कि यह आवंटन 27 अगस्त 2026 को Preferential Issue and Allotment Committee के प्रस्ताव के आधार पर किया गया। इससे पहले कंपनी के बोर्ड ने 1 जुलाई 2026 को प्रस्ताव को मंजूरी दी थी, जबकि सदस्यों ने 31 जुलाई 2026 को हुई Extra Ordinary General Meeting में विशेष प्रस्ताव के जरिए इसे मंजूरी दी थी।

₹126 प्रति वारंट की कीमत

ZEE ने प्रत्येक वारंट की कीमत ₹126 तय की है। इसमें ₹31.50 का वारंट सब्सक्रिप्शन मूल्य और ₹94.50 का वारंट एक्सरसाइज मूल्य शामिल है। कंपनी को वारंट जारी करते समय कुल कीमत का 25 प्रतिशत यानी ₹31.50 प्रति वारंट मिल चुका है। 2,40,59,266 वारंट के हिसाब से कंपनी को कुल ₹75,78,66,879 प्राप्त हुए हैं। बाकी 75 प्रतिशत यानी ₹94.50 प्रति वारंट का भुगतान वारंट धारक को वारंट को शेयर में बदलते समय करना होगा।

एक वारंट के बदले मिलेगा एक शेयर

हर वारंट को भविष्य में ZEE के एक पूरी तरह चुकता इक्विटी शेयर में बदला जा सकेगा। वारंट धारक 27 अगस्त 2026 से अधिकतम 18 महीने के भीतर एक या कई चरणों में इन वारंट को शेयरों में बदलने का अधिकार रखता है।अगर वारंट धारक 18 महीने की तय अवधि में इस अधिकार का इस्तेमाल नहीं करता है, तो ऐसे वारंट समाप्त हो जाएंगे और सब्सक्रिप्शन के समय कंपनी को दी गई रकम जब्त हो जाएगी।

अभी शेयर पूंजी में कोई बदलाव नहीं

ZEE ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल इन वारंट के आवंटन से कंपनी की चुकता शेयर पूंजी (Paid-up Share Capital) में कोई बदलाव नहीं हुआ है। शेयर पूंजी में बदलाव तब होगा, जब वारंट को इक्विटी शेयरों में बदला जाएगा।

वारंट के पूरी तरह कन्वर्ट होने पर कंपनी के 2,40,59,266 नए इक्विटी शेयर जारी होंगे। प्रत्येक शेयर का अंकित मूल्य ₹1 होगा और जारी कीमत ₹126 प्रति शेयर होगी, जिसमें ₹125 का प्रीमियम शामिल है।

Sunbright Mauritius Investments को मिला आवंटन

इस पूरी प्रक्रिया में सिर्फ एक निवेशक शामिल है। Sunbright Mauritius Investments Limited को सभी 2.40 करोड़ वारंट आवंटित किए गए हैं।

कंपनी के अनुसार, 21 अगस्त 2026 को हुए पिछले आवंटन के बाद Sunbright Mauritius Investments Limited के नाम 20,94,47,805 शेयर थे, जो पूरी तरह कमजोर आधार (Fully Diluted Basis) पर 17.90 प्रतिशत हिस्सेदारी के बराबर हैं। 27 अगस्त को आवंटित किए गए नए वारंट के पूरी तरह शेयरों में बदलने के बाद इसकी हिस्सेदारी में 1.40 प्रतिशत का अतिरिक्त हिस्सा जुड़ेगा।

कंपनी ने यह गणना इस आधार पर की है कि वर्तमान में जारी सभी कन्वर्टिबल वारंट भविष्य में पूरी तरह इक्विटी शेयरों में बदल जाएंगे।

₹126 की कीमत तय करने में वैल्यूएशन रिपोर्ट का इस्तेमाल

ZEE ने बताया कि वारंट की ₹126 प्रति यूनिट कीमत तय करते समय SEBI के नियमों के मुताबिक रजिस्टर्ड वैल्यूअर से प्राप्त प्राइसिंग रिपोर्ट और वैल्यूएशन रिपोर्ट को ध्यान में रखा गया है। यह पूरा इश्यू Preferential Issue on Private Placement Basis के तहत किया गया है और इसके लिए Companies Act, 2013 तथा SEBI ICDR Regulations के लागू प्रावधानों का पालन किया गया है।

कंपनी के लिए क्या मायने रखता है?

इस सौदे से ZEE को अभी ₹75.79 करोड़ की रकम मिली है। हालांकि, वारंट के शेयरों में बदलने पर कंपनी को बाकी 75 प्रतिशत राशि भी मिलेगी। इससे भविष्य में कंपनी की इक्विटी पूंजी बढ़ेगी और प्रमोटर ग्रुप की हिस्सेदारी भी बढ़ सकती है।

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PVR INOX ला सकता है शेयर बायबैक, 31 अगस्त को बोर्ड बैठक में होगा फैसला

मल्टीप्लेक्स कंपनी PVR INOX Limited अपने इक्विटी शेयरों के बायबैक यानी शेयरों की वापस खरीद पर विचार करने जा रही है।

Last Modified:
Thursday, 27 August, 2026
PVRInox541

मल्टीप्लेक्स कंपनी PVR INOX Limited अपने इक्विटी शेयरों के बायबैक यानी शेयरों की वापस खरीद पर विचार करने जा रही है। कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंजों को दी जानकारी में बताया कि इस प्रस्ताव पर फैसला लेने के लिए 31 अगस्त 2026, सोमवार को कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक होगी।

कंपनी ने बताया कि बैठक में 10 रुपये अंकित मूल्य वाले इक्विटी शेयरों के बायबैक के प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा। इसके साथ ही बायबैक से जुड़े अन्य जरूरी और संबंधित मामलों पर भी चर्चा होगी।

PVR INOX ने यह जानकारी SEBI Listing Regulations, 2015 के Regulation 29(1)(b) के तहत दी है। कंपनी ने कहा है कि 31 अगस्त को होने वाली बोर्ड बैठक खत्म होने के तुरंत बाद इसके नतीजे और लिए गए फैसले के बारे में स्टॉक एक्सचेंजों को जानकारी दी जाएगी।

2 सितंबर तक ट्रेडिंग विंडो बंद

शेयर बायबैक से जुड़े बोर्ड फैसले को देखते हुए कंपनी ने अपने अधिकारियों और संबंधित लोगों के लिए सिक्योरिटीज में ट्रेडिंग विंडो भी बंद कर दी है। कंपनी के मुताबिक, 25 अगस्त से 2 सितंबर 2026 तक कंपनी के नामित व्यक्तियों और उनके करीबी रिश्तेदारों के लिए कंपनी की सिक्योरिटीज में कारोबार की अनुमति नहीं होगी।

यह कदम SEBI (Prohibition of Insider Trading) Regulations, 2015 और कंपनी की इनसाइडर ट्रेडिंग को लेकर बनी आचार संहिता के तहत उठाया गया है।

निवेशकों की नजर बोर्ड के फैसले पर

PVR INOX के बायबैक प्रस्ताव की खबर के बाद अब निवेशकों की नजर 31 अगस्त को होने वाली बोर्ड बैठक पर रहेगी। हालांकि, कंपनी ने अभी यह नहीं बताया है कि अगर बायबैक को मंजूरी मिलती है तो कितने शेयर वापस खरीदे जाएंगे, बायबैक की कीमत क्या होगी या इसके लिए कितनी रकम खर्च की जाएगी।

इन सभी जानकारियों पर बोर्ड की बैठक में फैसला होने के बाद स्थिति साफ होगी। कंपनी के मुताबिक, बैठक के नतीजे की जानकारी बैठक समाप्त होने के तुरंत बाद स्टॉक एक्सचेंजों को दी जाएगी।

 

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हैप्पी बर्थडे विवेक मल्होत्रा: मीडिया और मार्केटिंग की दुनिया में बनाई एक अलग पहचान

कुछ प्रोफेशनल करियर बनाते हैं। लेकिन विवेक मल्होत्रा जैसे लोग विरासत गढ़ते हैं- ब्रैंड्स, रणनीतियों और विचारों की ऐसी विरासत, जो इंडस्ट्री और दर्शकों दोनों पर एक स्थायी छाप छोड़ती है।

Last Modified:
Thursday, 27 August, 2026
Vivek Malhotra Ji

कुछ प्रोफेशनल करियर बनाते हैं। लेकिन विवेक मल्होत्रा जैसे लोग विरासत गढ़ते हैं- ब्रैंड्स, रणनीतियों और विचारों की ऐसी विरासत, जो इंडस्ट्री और दर्शकों दोनों पर एक स्थायी छाप छोड़ती है। उनके जन्मदिन पर आज यह सही समय है कि हम ठहरकर उस सफर का जश्न मनाएं, जो कभी साधारण नहीं रहा।

विवेक मल्होत्रा आज इंडिया टुडे ग्रुप में ग्रुप CMO और COO (स्ट्रैटेजी) के रूप में वह शख्सियत हैं, जिनका सफर मीडिया और मार्केटिंग की दुनिया में एक दशक से भी ज़्यादा गहरे अनुभव और नेतृत्व का साक्षी रहा है। उनके करियर की कहानी सिर्फ पदों और जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं, बल्कि उस जुनून की दास्तान है जिसने हर भूमिका को एक नई दिशा दी। चाहे टीवी टुडे में मार्केटिंग और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन को नई पहचान देना हो, या फिर कंज़्यूमर रेवेन्यू को मज़बूत बनाना, विवेक मल्होत्रा ने हर बार साबित किया है कि वह बदलाव के दौर में सिर्फ परिस्थितियों को संभालते नहीं, बल्कि उन बदलावों को गढ़ते भी हैं। उनकी सोच और रणनीतियां हमेशा यह बताती हैं कि असली लीडर वही है, जो रास्ता बनने से पहले ही उसे देख ले और दूसरों के लिए वह राह आसान कर दे।

विवेक मल्होत्रा को अलग पहचान उनकी क्रॉस-मीडिया विजन देती है। उन्होंने ऐसे उपक्रमों का नेतृत्व किया है जो टेलीविजन, प्रिंट, डिजिटल, कनेक्टेड डिवाइसेज और ब्रैंड अनुभवों में इनोवेशन तक फैले हुए हैं। उनका काम मीडिया के हर कोने को छू चुका है- BloombergUTV में उन्होंने मार्केटिंग, पीआर और रिसर्च को संभाला, Star News में उन्होंने इनसाइट जनरेशन को उपभोक्ता अनुप्रयोग के साथ जोड़ने की शक्ति को खोजा। वहीं CNBC-TV18 में उन्होंने रणनीति, राजस्व और मार्केटिंग के बीच भारत की सबसे स्पष्ट कार्यात्मक सीमाओं में से एक को आकार देने में मदद की, जिससे दीर्घकालिक इनोवेशन को दिशा मिली।

डेटा-आधारित इनसाइट में गहरा विश्वास रखने वाले विवेक मल्होत्रा IAMAI के डिजिटल ऐडवर्टाइजिंग काउंसिल का हिस्सा रहे हैं, IRS तकनीकी समिति के सदस्य रहे हैं और भारत के सबसे बड़े उपभोक्ता शोध अध्ययनों में योगदान दिया है। वह ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) के बोर्ड में भी सेवा दे चुके हैं और न्यूयॉर्क में ऐडवर्टाइजिंग रिसर्च फाउंडेशन से भी जुड़े रहे हैं।

उनका ट्रैक रिकॉर्ड कई साहसी पहलों से भरा है- भारत का पहला कनेक्टेड डिवाइसेज स्ट्रीम लॉन्च करना, हिन्दुस्तान टाइम्स काला घोड़ा फेस्टिवल और एजेंडा आजतक जैसी पहल की शुरुआत करना और इंडिया टुडे तथा न्यूजX जैसे प्रतिष्ठित ब्रैंड्स को विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर विस्तार देना। चाहे वह IPL जैसी स्पॉन्सरशिप हो, इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग में इनोवेशन हो या YouTube, Facebook और उभरते डिजिटल इकोसिस्टम्स पर उपभोक्ता यात्राओं को नए सिरे से परिभाषित करना- विवेक ने लगातार ऐसे रास्ते खोजे हैं जिनसे ब्रैंड्स हमेशा आगे बने रहें।

बोर्डरूम की चर्चाओं, समितियों की बैठकों और रणनीति के भारी-भरकम कागज़ों से आगे बढ़कर, विवेक मल्होत्रा की असली पहचान उनकी निरंतर खुद को नया गढ़ने की क्षमता है। वे सिर्फ ब्रांड्स को नहीं, बल्कि लोगों के दिलों में जगह बनाने वाली यादों और अनुभवों को भी नया जीवन देते हैं।

समाचार4मीडिया की ओर से विवेक मल्होत्रा को उनके जन्मदिन की ढेरों बधाई और शुभकामनाएं। 

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NCLT से सुभाष चंद्रा को राहत, ₹22,006 करोड़ के दावों पर ₹6.5 करोड़ की रिपेमेंट योजना मंजूर

नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने जी ग्रुप के फाउंडर और चेयरमैन डॉ. सुभाष चंद्रा की संशोधित रिपेमेंट योजना को मंजूरी दे दी है।

Last Modified:
Thursday, 27 August, 2026
DrSubhashChandra5412

नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने जी ग्रुप के फाउंडर और चेयरमैन डॉ. सुभाष चंद्रा की संशोधित रिपेमेंट योजना को मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत ₹22,006.57 करोड़ के स्वीकार किए गए दावों के मुकाबले सिर्फ ₹6.5 करोड़ का भुगतान किया जाएगा। इस फैसले से कर्जदाताओं को उनके स्वीकार किए गए बकाये का करीब 0.03 प्रतिशत ही वापस मिलेगा।

NCLT के सदस्य (न्यायिक) निलेश शर्मा ने मंगलवार को ट्रिब्यूनल के तीसरे सदस्य के तौर पर यह आदेश पारित किया। इसके साथ ही Insolvency and Bankruptcy Code (IBC) की धारा 114 के तहत रिपेमेंट योजना को लागू करने का रास्ता साफ हो गया है।

यह फैसला NCLT की मूल दो सदस्यीय बेंच के विभाजित फैसले के बाद आया है। दोनों सदस्यों की राय अलग होने के बाद NCLT के अध्यक्ष ने निलेश शर्मा को तीसरे सदस्य के रूप में नियुक्त किया, ताकि विवादित मुद्दों पर फैसला किया जा सके।

यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ट्रिब्यूनल ने कर्जदाताओं की आपत्तियों के बावजूद समाधान योजना को मंजूरी दी है। कर्जदाताओं ने योजना के तहत प्रस्तावित बेहद कम रिकवरी पर सवाल उठाए थे। यह आदेश यह भी बताता है कि IBC के तहत जरूरी कर्जदाता मंजूरी मिलने के बाद किसी रिपेमेंट योजना की समीक्षा करते समय NCLT की भूमिका कितनी सीमित है।

कर्जदाताओं ने ₹6.5 करोड़ के भुगतान को दी चुनौती

LIC Housing Finance (LICHFL) ने इस योजना के खिलाफ सबसे प्रमुख आपत्ति दर्ज कराई थी। कंपनी ने दलील दी थी कि प्रस्तावित रिकवरी “व्यवहारिक नहीं है और कानूनन भी सही नहीं है।”

NCLT के आदेश में दर्ज दलीलों के अनुसार, डॉ. चंद्रा के खिलाफ स्वीकार किए गए कुल दावे करीब ₹22,006.57 करोड़ थे। इसके मुकाबले रिपेमेंट योजना में कर्जदाताओं के लिए ₹6.25 करोड़ और प्रक्रिया से जुड़े खर्च के लिए ₹25 लाख का प्रस्ताव रखा गया था। इस तरह कुल प्रस्तावित राशि ₹6.5 करोड़ थी।

LICHFL के लिए स्वीकार किए गए दावे और प्रस्तावित भुगतान के बीच अंतर काफी बड़ा था। उसका स्वीकार किया गया दावा ₹1,322.39 करोड़ था, जबकि प्रस्तावित भुगतान सिर्फ ₹38.09 लाख था। यह उसके कुल स्वीकार किए गए बकाये का करीब 0.028 प्रतिशत है।

LICHFL ने दलील दी कि इतनी मामूली रिकवरी योजना को मंजूरी देने का आधार नहीं बन सकती।

कर्जदाता ने प्रस्तावित ₹6.5 करोड़ के भुगतान की निश्चितता पर भी सवाल उठाया। उसने बताया कि रिपेमेंट योजना में इस राशि को अंतिम राशि के बजाय केवल संकेतात्मक बताया गया था। कर्जदाता के अनुसार, इससे प्रस्ताव अस्थायी और अंतिम रूप से तय नहीं माना जा सकता और इसलिए ट्रिब्यूनल इसे मंजूरी नहीं दे सकता।

NCLT ने कर्जदाताओं के व्यावसायिक फैसले को माना अहम

हालांकि, तीसरे सदस्य वाली बेंच ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया और कर्जदाताओं के वोटिंग परिणाम को काफी महत्व दिया। विरोध करने वाले कर्जदाताओं के पास कुल वोटिंग शेयर 20 प्रतिशत से भी कम था, जबकि रिपेमेंट योजना को 80.81 प्रतिशत वोटिंग शेयर रखने वाले कर्जदाताओं का समर्थन मिला था।

ट्रिब्यूनल ने कहा कि उसकी भूमिका कर्जदाताओं के व्यावसायिक फैसले को अपनी इस राय से बदलना नहीं है कि समझौते के तहत मिलने वाली राशि पर्याप्त है या नहीं।

NCLT ने कहा, “कर्जदाताओं का व्यावसायिक फैसला कानून के दायरे में रहता है, उससे बाहर नहीं।”

144 पन्नों के इस आदेश में यह भी कहा गया कि दिवालिया समाधान प्रक्रिया में Adjudicating Authority की भूमिका निगरानी करने, सुधारात्मक कार्रवाई करने और न्यायिक समीक्षा तक सीमित है। जब तक कानून विशेष रूप से इसकी मांग न करे, उसकी भूमिका जांच करने वाली संस्था की नहीं है।

ट्रिब्यूनल ने कहा, “NCLT कर्जदाताओं की व्यावसायिक समझ को अपनी समझ से नहीं बदलता और न ही ऐसे आरोपों की व्यापक जांच करता है, जिनके समर्थन में भरोसेमंद सामग्री मौजूद नहीं है। उसकी भूमिका निगरानी, सुधारात्मक और न्यायिक है, न कि जांच करने वाली, जब तक कानून इसकी मांग न करे।”

व्यक्तिगत दिवालियापन और डॉ. चंद्रा की संपत्ति की वैल्यू

ट्रिब्यूनल ने यह भी देखा कि डॉ. चंद्रा की निजी संपत्ति की कीमत कितनी है और प्रस्तावित समाधान से कर्जदाताओं को कितना फायदा मिल सकता है। आदेश के अनुसार, Resolution Professional की ओर से किए गए मूल्यांकन में डॉ. चंद्रा की व्यक्तिगत संपत्ति की कीमत रिपेमेंट योजना के तहत दी जा रही राशि से काफी कम बताई गई थी।

ट्रिब्यूनल ने माना कि रिपेमेंट योजना को खारिज करने से जरूरी नहीं कि विरोध करने वाले कर्जदाताओं को इससे ज्यादा पैसा मिल जाए। इसके बजाय, डॉ. चंद्रा को दिवालिया प्रक्रिया में भेजा जा सकता है, जिससे वित्तीय स्थिति सुधारकर कर्ज चुकाने की उनकी क्षमता और सीमित हो सकती है।

ट्रिब्यूनल ने कहा कि अगर रिपेमेंट योजना मंजूर होती है और डॉ. चंद्रा का दिवालियापन मामला सुलझ जाता है, जिससे वह दोबारा वित्तीय स्थिरता की स्थिति में आ सकें, तो कर्जदाताओं के पास मुख्य कर्जदारों से अपनी रकम वसूलने का बेहतर मौका हो सकता है।

NCLT ने कहा, “अगर योजना मंजूर होती है और कर्जदार का दिवालियापन सुलझ जाता है और वह दोबारा अपने पैरों पर खड़ा हो जाता है, तो आपत्ति करने वाले कर्जदाताओं के पास मुख्य कर्जदारों से अपना कर्ज सीधे वसूलने का बेहतर मौका होगा।” इस सोच में योजना के तहत मिलने वाली तत्काल रिकवरी की तुलना दिवालिया प्रक्रिया से मिलने वाली कम या अनिश्चित रिकवरी की संभावना से की गई है।

मंजूर योजना का पालन विरोध करने वाले कर्जदाताओं को भी करना होगा

इस आदेश का एक अहम हिस्सा IBC की धारा 115 के तहत मंजूर रिपेमेंट योजना के सभी कर्जदाताओं पर लागू होने से जुड़ा है। NCLT ने कहा कि एक बार योजना मंजूर हो जाने के बाद यह इसमें शामिल सभी कर्जदाताओं पर लागू होगी, जिसमें वे कर्जदाता भी शामिल हैं जिन्होंने योजना के खिलाफ वोट किया था। इसका मतलब है कि विरोध करने वाले कर्जदाता मंजूर की गई भुगतान शर्तों को खारिज करके योजना से बाहर अपने पूरे पुराने दावे की अलग से वसूली नहीं कर सकते।

ट्रिब्यूनल ने कहा, “एक बार धारा 114 के तहत रिपेमेंट योजना मंजूर हो जाने के बाद, उसका बाध्यकारी प्रभाव कोड की धारा 115 के तहत तय होता है। Adjudicating Authority यानी NCLT ऐसी योजना को केवल उन कर्जदाताओं पर लागू नहीं कर सकता, जिन्होंने इसके पक्ष में वोट किया है और विरोध करने वाले कर्जदाताओं को अपने पूरे मूल कर्ज की स्वतंत्र रूप से वसूली करने की अनुमति नहीं दे सकता।”

आदेश में आगे कहा गया कि धारा 115 मंजूर रिपेमेंट योजना को चुनिंदा कर्जदाताओं पर लागू करने की अनुमति नहीं देती।

ट्रिब्यूनल ने कहा, “इसलिए मंजूर योजना में शामिल सभी कर्जदाताओं पर यह लागू होगी, चाहे उन्होंने इसका समर्थन किया हो या विरोध। विरोध करने वाले कर्जदाताओं को योजना से बाहर जाकर पूरा कर्ज वसूलने की छूट देना कानून की व्यवस्था को कमजोर करेगा और कर्जदाताओं के साथ असमान व्यवहार होगा।”

इस फैसले से उन कर्जदाताओं के लिए स्थिति काफी स्पष्ट हो जाती है, जो जरूरी वोटिंग सीमा हासिल कर चुकी रिपेमेंट योजना के खिलाफ वोट करते हैं। एक बार ट्रिब्यूनल से मंजूरी मिलने के बाद योजना में शामिल सभी कर्जदाताओं पर समान रूप से लागू होगी।

कर्जदाताओं की संशोधित सूची तैयार होगी

योजना को मंजूरी देते हुए ट्रिब्यूनल ने Resolution Professional को निर्देश दिया कि आदेश में बताए गए बाहर किए गए दावों को हटाने के बाद कर्जदाताओं की संशोधित और अंतिम सूची तैयार करके रिकॉर्ड पर रखी जाए। Resolution Professional को मंजूर रिपेमेंट योजना की राशि के दोबारा वितरण से जुड़े जरूरी कदम भी उठाने होंगे।

NCLT ने कहा, “ऊपर दिए गए निष्कर्षों को देखते हुए, Personal Guarantor की ओर से पेश की गई रिपेमेंट योजना को मेरी राय में Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 की धारा 114 के तहत मंजूरी दी जानी चाहिए।” ट्रिब्यूनल ने दोहराया कि IBC की धारा 115 के अनुसार मंजूर योजना सभी कर्जदाताओं पर लागू होगी, चाहे उन्होंने इसका समर्थन किया हो या विरोध। अब मामला मूल डिवीजन बेंच के पास जाएगा, जो Companies Act, 2013 की धारा 419(5) के तहत बहुमत की राय के आधार पर औपचारिक आदेश जारी करेगी।

सुभाष चंद्रा से जुड़ा यह फैसला भारत में तेजी से विकसित हो रहे व्यक्तिगत दिवालियापन और बैंकruptcy के व्यापक ढांचे के बीच आया है। खास तौर पर कॉरपोरेट कर्ज के प्रमोटर्स और Personal Guarantors पर इसके इस्तेमाल को लेकर यह मामला महत्वपूर्ण है। यह फैसला कर्जदाताओं की ज्यादा रिकवरी की उम्मीद और IBC के सामूहिक कर्जदाता निर्णय तथा ऐसे समाधान पर जोर के बीच के अंतर को दिखाता है, जहां लिक्विडेशन या दिवालियापन से शायद ज्यादा फायदा न मिले।

हालांकि, डॉ. चंद्रा के मामले में कर्जदाताओं के लिए तत्काल रिकवरी उनके कुल स्वीकार किए गए दावों का बेहद छोटा हिस्सा है। ₹22,006.57 करोड़ के मुकाबले ₹6.5 करोड़ की रिकवरी होगी। यानी रिकवरी करीब 0.03 प्रतिशत है, जबकि करीब 99.97 प्रतिशत राशि का हेयरकट होगा।

 

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हैप्पी बर्थडे डॉ. अनुराग बत्रा: मीडिया से लेकर रिश्तों तक, हर मोर्चे पर बनाई अलग पहचान

भारतीय मीडिया में किसी व्यक्ति के करियर को अक्सर इस आधार पर देखा जाता है कि उसने कितने बड़े मीडिया ब्रैंड शुरू किए, कितनी कंपनियों का अधिग्रहण किया और कितनी बड़ी ऑडियंस तैयार की।

Last Modified:
Thursday, 27 August, 2026
DrAnnuragBatra5421

भारतीय मीडिया में किसी व्यक्ति के करियर को अक्सर इस आधार पर देखा जाता है कि उसने कितने बड़े मीडिया ब्रैंड शुरू किए, कितनी कंपनियों का अधिग्रहण किया और कितनी बड़ी ऑडियंस तैयार की। इन पैमानों पर डॉ. अनुराग बत्रा का सफर निश्चित रूप से काफी बड़ा है। लेकिन उनकी पहचान की पूरी कहानी सिर्फ इन उपलब्धियों से नहीं समझी जा सकती। उनकी असली ताकत लोगों, संस्थानों और विचारों के बीच पुल बनाने में नजर आती है।

डॉ. अनुराग बत्रा 54 साल के हो गए हैं और आज भी भारतीय मीडिया जगत में सबसे ज्यादा पहचाने जाने वाले नेटवर्किंग प्रोफेशनल्स में शामिल हैं। उनसे होने वाली एक बातचीत कई बार किसी नए परिचय, अवसर, सलाह या ऐसे सुझाव में बदल जाती है, जो किसी के करियर की दिशा बदल सकता है। मीडिया इंडस्ट्री में जहां अलग-अलग समूहों और संस्थानों के बीच प्रतिस्पर्धा रहती है, वहीं अलग-अलग लोगों और विचारधाराओं के बीच रिश्ते बनाए रखना उनकी खासियत रही है।

एक्सचेंज4मीडिया से शुरू हुआ सफर

पहली पीढ़ी के उद्यमी डॉ. बत्रा ने कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई की और इसके बाद एमडीआई गुरुग्राम से मैनेजमेंट की शिक्षा हासिल की। उन्होंने उस समय एक्सचेंज4मीडिया की शुरुआत की, जब विज्ञापन, मार्केटिंग और मीडिया से जुड़ी ट्रेड जर्नलिज्म अभी काफी सीमित क्षेत्र था।

धीरे-धीरे एक्सचेंज4मीडिया एक ऐसे प्रोफेशनल प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित हुआ, जहां मीडिया, विज्ञापन और मार्केटिंग इंडस्ट्री से जुड़े लोग एक-दूसरे से जुड़ सके। रिपोर्टिंग, मैगजीन, कॉन्फ्रेंस, अवॉर्ड्स और अलग-अलग विशेषज्ञ प्लेटफॉर्म के जरिए इसने एजेंसियों, ब्रैंड्स, ब्रॉडकास्टर्स, पब्लिशर्स और डिजिटल कंपनियों को एक मंच पर लाने का काम किया।

डॉ. बत्रा की खास सोच यह रही कि केवल मीडिया प्रॉपर्टी बनाने के बजाय एक पूरा समुदाय तैयार किया जाए। यही सोच आगे चलकर उनके काम का आधार बनी।

IMPACT, PITCH और samachar4media जैसे ब्रैंड्स का विस्तार

उनके नेतृत्व में एक्सचेंज4मीडिया का विस्तार IMPACT, PITCH और samachar4media जैसे ब्रैंड्स तक हुआ। इसके अलावा कई फोरम और सम्मान कार्यक्रमों के जरिए इंडस्ट्री के स्थापित नामों के साथ-साथ नई प्रतिभाओं को भी अपनी पहचान बनाने का मौका मिला।

यह मॉडल आगे चलकर आधुनिक B2B मीडिया की बदलती जरूरतों के काफी करीब दिखाई दिया, जहां सिर्फ खबरें देना ही नहीं, बल्कि इंडस्ट्री के लोगों को जोड़ना और उनके लिए नेटवर्क तैयार करना भी महत्वपूर्ण हो गया है।

BW Businessworld का अधिग्रहण बना बड़ी चुनौती

साल 2013 में डॉ. बत्रा ने BW बिजनेसवर्ल्ड का अधिग्रहण किया। यह उनके करियर का एक अलग तरह का परीक्षण था। Businessworld एक पुराना और प्रतिष्ठित मैगजीन ब्रैंड था, जिसके पास लंबा इतिहास और मजबूत पहचान थी। लेकिन उस समय प्रिंट मीडिया की तरह इसे भी बदलते बाजार और डिजिटल दौर की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा था।

डॉ. बत्रा ने Businessworld को सिर्फ एक पुरानी मैगजीन के तौर पर आगे बढ़ाने के बजाय इसे एक बड़े नेटवर्क में बदलने की दिशा में काम किया। डिजिटल प्रोडक्ट्स, इवेंट्स और अलग-अलग सेक्टर पर केंद्रित कम्युनिटीज के जरिए BW का विस्तार शिक्षा, स्वास्थ्य, हॉस्पिटैलिटी, टेक्नोलॉजी, सस्टेनेबिलिटी समेत कई क्षेत्रों तक किया गया।

तेज रफ्तार के साथ युवाओं के लिए खुले दरवाजे

हालांकि कंपनियां, ब्रैंड्स, कॉन्फ्रेंस और संस्थाएं डॉ. बत्रा की उपलब्धियों का एक बड़ा हिस्सा हैं, लेकिन उनके व्यक्तित्व का दूसरा पहलू भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

करीबी लोग उन्हें तेज रफ्तार से काम करने वाला, लगातार नए आइडिया सोचने वाला और अपनी टीम से ऊंची उम्मीदें रखने वाला लीडर बताते हैं। कई बार वह मौजूदा काम के पूरा होने से पहले ही अगली संभावना पर सोचने लगते हैं।

लेकिन उनकी इसी तेजी के साथ लोगों के लिए उनकी उपलब्धता भी दिखाई देती है। पद या वरिष्ठता उनके लिए किसी युवा रिपोर्टर, नए उद्यमी या करियर के मुश्किल दौर से गुजर रहे प्रोफेशनल से बातचीत में बड़ी रुकावट नहीं बनती।

लोगों की मदद का कोई औपचारिक हिसाब नहीं

डॉ. बत्रा को करीब से जानने वाले लोग उनकी मदद करने की आदत का भी जिक्र करते हैं। यह मदद कई तरह से सामने आती है- किसी के लिए समय निकालना, फोन करना, सही व्यक्ति से परिचय कराना या किसी ऐसे व्यक्ति पर भरोसा जताना, जिसे अभी इंडस्ट्री में ज्यादा लोग नहीं जानते।

उनकी मदद से जुड़े कई किस्से सार्वजनिक तौर पर सामने नहीं आते। ऐसा कोई औपचारिक रिकॉर्ड भी नहीं है कि उन्होंने कितने लोगों को मुश्किल समय में सहयोग दिया। लेकिन जिन लोगों को उन्होंने किसी मोड़ पर समर्थन दिया, उनके अनुभवों का असर उनकी छवि और लोगों के बीच उनकी विश्वसनीयता में साफ दिखाई देता है।

आध्यात्मिकता भी उनके जीवन का अहम हिस्सा

मीडिया की दुनिया में लगातार व्यस्त रहने के बावजूद डॉ. बत्रा के व्यक्तित्व में आध्यात्मिकता का भी महत्वपूर्ण स्थान है। उन्हें करीब से जानने वाले लोगों के मुताबिक, उनके लिए धर्म और आध्यात्मिकता सिर्फ धार्मिक परंपराओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन्हें मानसिक स्थिरता और जमीन से जुड़े रहने का आधार भी देती है।

लगातार यात्राओं, सार्वजनिक कार्यक्रमों और नए कामों के बीच यह विश्वास उनके अंदर कृतज्ञता, विनम्रता और सेवा की भावना को मजबूत करता है। शायद यही वजह है कि उनके जीवन में रिश्तों, लोगों को याद रखने और जरूरत के समय मदद करने को खास महत्व मिलता है।

रिवर्स मेंटरिंग’ में भी विश्वास

डॉ. बत्रा के लिए मेंटरशिप सिर्फ दूसरों को सलाह देने का नाम नहीं है। वह लंबे समय से ‘रिवर्स मेंटरिंग’ की बात करते रहे हैं। यानी जहां वरिष्ठ व्यक्ति युवाओं को सलाह देता है, वहीं वह खुद भी युवा उद्यमियों और नई पीढ़ी से सीखता है। यह सोच उनके व्यक्तित्व का एक महत्वपूर्ण पहलू बताती है। उनके लिए अनुभव का मतलब यह नहीं कि सीखना बंद हो जाए। वह मानते हैं कि नई पीढ़ी के पास भी ऐसी सोच और जानकारी होती है, जिससे वरिष्ठ लोग काफी कुछ सीख सकते हैं।

एमडीआई, इंडस्ट्री संस्थाओं और उद्यमिता से जुड़े प्लेटफॉर्म्स के साथ उनका जुड़ाव भी इसी सोच को आगे बढ़ाता है।

आज भी पत्रकार और इंटरव्यूअर की भूमिका में सक्रिय

डॉ. बत्रा की पहचान सिर्फ मीडिया मालिक या उद्यमी की नहीं है। वह आज भी पत्रकार और इंटरव्यूअर के तौर पर सक्रिय नजर आते हैं। उनकी बातचीत मीडिया से लेकर उद्यमिता, नीति, टेक्नोलॉजी और कारोबार तक अलग-अलग विषयों पर होती है। उनके लेखन और इंटरव्यू में बहस को आगे बढ़ाने और स्थापित सोच पर सवाल उठाने की कोशिश भी दिखाई देती है।

54 की उम्र में भी अगली मंजिल की तलाश

54 साल की उम्र में डॉ. अनुराग बत्रा का सफर अभी भी पूरी तरह सक्रिय और नई संभावनाओं की तलाश में दिखाई देता है। उन्होंने मीडिया में कई बड़े संस्थान और ब्रैंड खड़े किए हैं, लेकिन ऐसा लगता है कि उनका ध्यान पिछली उपलब्धियों पर रुकने के बजाय अगली संभावना तलाशने पर ज्यादा है।

उनकी विरासत में निश्चित तौर पर एक्सचेंज4मीडिया और BW बिजनेसवर्ल्ड जैसे बड़े नाम शामिल होंगे। लेकिन उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि शायद इससे भी आगे जाकर देखी जाएगी- उन लोगों में जिन्हें उन्होंने आगे बढ़ने का मौका दिया, उन करियर में जिन्हें उन्होंने गति दी, उन समुदायों में जिन्हें उन्होंने एक साथ जोड़ा और उन लोगों की यादों में, जिन्हें मुश्किल समय में उनका साथ मिला।

उनके जन्मदिन पर इससे बेहतर सम्मान शायद यही हो सकता है कि डॉ. अनुराग बत्रा ने सिर्फ मीडिया संस्थान नहीं बनाए, बल्कि लोगों के बीच रिश्ते और जुड़ाव बनाने को अपने जीवन का सबसे बड़ा काम बनाया।

 

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‘नेटवर्क18’ में दीपिका कपूर की वापसी: मिली यह बड़ी जिम्मेदारी

इससे पहले दीपिका कपूर वर्ष 2018 से 2025 तक नेटवर्क18 के साथ काम कर चुकी हैं। अपने पहले कार्यकाल के दौरान उन्होंने कंपनी में विभिन्न भूमिकाएं निभाईं।

Last Modified:
Thursday, 27 August, 2026
Dipika Kapoor

देश के प्रमुख मीडिया नेटवर्क्स में शुमार ‘नेटवर्क18 मीडिया एंड इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड’ ने दीपिका कपूर को अपने इंडियन लैंग्वेज क्लस्टर के लिए नेशनल डिजिटल स्ट्रैटेजी और आईपी हेड नियुक्त किया है। दीपिका कपूर की यह नेटवर्क18 के साथ दूसरी पारी होगी।

इससे पहले दीपिका कपूर वर्ष 2018 से 2025 तक नेटवर्क18 के साथ काम कर चुकी हैं। अपने पहले कार्यकाल के दौरान उन्होंने कंपनी में विभिन्न भूमिकाएं निभाईं।

दीपिका कपूर ने लिंक्डइन पर अपनी नई नियुक्ति की जानकारी साझा करते हुए कहा कि वह नेटवर्क18 में नए प्रोडक्ट्स तैयार करने, इनोवेटिव डिजिटल आईपी बनाने और कंटेंट, टेक्नोलॉजी व कम्युनिटीज के मेल पर नए अवसर तलाशने को लेकर उत्साहित हैं।

नेटवर्क18 में अपनी वापसी से पहले वह ‘इंडिया टुडे’ में जनरल मैनेजर (मार्केटिंग) के पद पर कार्यरत थीं। दीपिका कपूर को डिजिटल मीडिया स्ट्रैटेजी, परफॉर्मेंस मार्केटिंग, रीडर रेवेन्यू, मार्केटिंग एनालिटिक्स, कैंपेन मैनेजमेंट, अकाउंट मैनेजमेंट और नए प्रोडक्ट्स लॉन्च करने का काफी अनुभव है। पूर्व में वह ‘लोकोवीडा’ और ‘अमर उजाला पब्लिकेशंस’ जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ भी काम कर चुकी हैं।

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Prime Focus का UAE में विस्तार, DNEG ने अबू धाबी में बनाई नई कंपनी

मीडिया और एंटरटेनमेंट सेक्टर की कंपनी Prime Focus Limited ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है।

Last Modified:
Thursday, 27 August, 2026
PrimeFocus523

मीडिया और एंटरटेनमेंट सेक्टर की कंपनी Prime Focus Limited ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। कंपनी की अप्रत्यक्ष सहायक कंपनी DNEG S.a.r.l ने अबू धाबी में एक नई पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी बनाई है। इसका नाम DNEG Middle East FZ LLC (DNEG ME) रखा गया है।

Prime Focus ने स्टॉक एक्सचेंज को दी जानकारी में बताया कि उसे 26 अगस्त 2026 को DNEG S.a.r.l से इस नई कंपनी के गठन की जानकारी मिली। DNEG Middle East को 25 अगस्त 2026 को Creative Media Authority (CMA), Abu Dhabi, UAE में रजिस्टर किया गया है। कंपनी का रजिस्ट्रेशन नंबर 1642 है।

UAE में एनीमेशन और पोस्ट-प्रोडक्शन कारोबार बढ़ाएगी

Prime Focus के मुताबिक, DNEG Middle East को खास तौर पर एनीमेशन, पोस्ट-प्रोडक्शन और मार्केटिंग एवं कम्युनिकेशंस से जुड़ा कारोबार करने के लिए बनाया गया है। नई कंपनी के जरिए UAE में इन क्षेत्रों से जुड़े कारोबार को आगे बढ़ाने पर फोकस किया जाएगा।

DNEG Middle East की होल्डिंग कंपनी DNEG S.a.r.l है, जो Prime Focus Limited की अप्रत्यक्ष सहायक कंपनी है। इस तरह DNEG Middle East भी Prime Focus की अप्रत्यक्ष सहायक कंपनी होगी।

50 शेयरों के साथ हुई शुरुआत

कंपनी की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, DNEG S.a.r.l ने नई कंपनी के गठन के समय 1 UAE दिरहम (AED) के 50 शेयर सब्सक्राइब किए हैं। इस तरह नई कंपनी में शुरुआती सब्सक्रिप्शन की कुल रकम AED 50 रही।

DNEG Middle East, DNEG S.a.r.l की 100 फीसदी स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है।

जरूरी मंजूरियां ली गईं

Prime Focus ने बताया कि नई कंपनी के गठन के लिए संबंधित अधिकारियों से जरूरी मंजूरियां ली गई हैं। कंपनी के अनुसार, DNEG Middle East को लागू नियमों के तहत जरूरी रेगुलेटरी और सरकारी प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद स्थापित किया गया है।

UAE में विस्तार की दिशा में कदम

DNEG दुनिया की जानी-मानी विजुअल इफेक्ट्स और क्रिएटिव टेक्नोलॉजी कंपनियों में शामिल है। नई कंपनी के गठन से Prime Focus समूह को UAE और मध्य पूर्व के बाजार में एनीमेशन, पोस्ट-प्रोडक्शन और मार्केटिंग एवं कम्युनिकेशंस से जुड़े कारोबार को बढ़ाने का एक नया आधार मिल सकता है।

Prime Focus ने यह जानकारी SEBI के LODR Regulations के Regulation 30 के तहत स्टॉक एक्सचेंजों को दी है। कंपनी ने नई सहायक कंपनी के नाम, गठन की तारीख, कारोबार, होल्डिंग कंपनी, शेयरहोल्डिंग और शुरुआती निवेश समेत जरूरी जानकारी भी साझा की है।

 

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Basilic Fly Studio में चार प्रस्तावों को मंजूरी, निदेशकों की नई जिम्मेदारियों पर लगी मुहर

विजुअल इफेक्ट्स और एनीमेशन कंपनी Basilic Fly Studio Limited के शेयरधारकों ने कंपनी के चार अहम प्रस्तावों को मंजूरी दे दी है।

Last Modified:
Thursday, 27 August, 2026
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विजुअल इफेक्ट्स और एनीमेशन कंपनी Basilic Fly Studio Limited के शेयरधारकों ने कंपनी के चार अहम प्रस्तावों को मंजूरी दे दी है। ये सभी प्रस्ताव पोस्टल बैलट के जरिए रिमोट ई-वोटिंग के माध्यम से शेयरधारकों के सामने रखे गए थे। कंपनी ने बताया कि मतदान की प्रक्रिया 23 अगस्त 2026 को पूरी हुई और सभी चार प्रस्ताव जरूरी बहुमत के साथ पास हो गए।

कंपनी ने 25 अगस्त को स्टॉक एक्सचेंज को दी जानकारी में बताया कि मतदान के नतीजे SEBI Listing Regulations के Regulation 30 और 44(3) के तहत जारी किए गए हैं।

मैनेजिंग डायरेक्टर से जुड़े प्रस्ताव को मंजूरी

शेयरधारकों ने पहले प्रस्ताव के तहत कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर बालाकृष्णन से जुड़े Material Related Party Transaction को मंजूरी दी है। इस प्रस्ताव के तहत बालाकृष्णन को कंपनी की सब्सिडियरी One of Us Ltd में ग्लोबल चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर के पद पर नियुक्ति/जिम्मेदारी संभालने की मंजूरी दी गई है। यह प्रस्ताव ऑर्डिनरी रिजॉल्यूशन के रूप में पास हुआ।

पूर्णकालिक निदेशक की भूमिका को भी मंजूरी

दूसरे प्रस्ताव में कंपनी की पूर्णकालिक निदेशक (Whole-Time Director) सुंदरम योगालक्ष्मी से जुड़े Material Related Party Transaction को मंजूरी दी गई है। इसके तहत उन्हें कंपनी की सब्सिडियरी One of Us Ltd में ग्लोबल बिजनेस स्ट्रैटजी ऑफिसर की जिम्मेदारी संभालने की मंजूरी दी गई। इस प्रस्ताव को भी शेयरधारकों ने ऑर्डिनरी रिजॉल्यूशन के जरिए मंजूरी दी।

दोनों निदेशकों की नियुक्ति की शर्तों में बदलाव को मंजूरी

तीसरे प्रस्ताव में बालाकृष्णन के कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर के रूप में नियुक्ति/जारी रहने की शर्तों में बदलाव को मंजूरी दी गई है। इस प्रस्ताव को स्पेशल रिजॉल्यूशन के रूप में पास किया गया। चौथे प्रस्ताव में Sundaram Yogalakshmi के पूर्णकालिक निदेशक के रूप में नियुक्ति/जारी रहने की शर्तों में बदलाव को मंजूरी दी गई। इसे भी शेयरधारकों ने स्पेशल रिजॉल्यूशन के जरिए मंजूरी दी।

इस तरह कंपनी के दोनों प्रमुख निदेशकों से जुड़े चारों प्रस्ताव शेयरधारकों के समर्थन से पास हो गए।

4,659 शेयरधारक थे रिकॉर्ड डेट पर

कंपनी की ओर से जारी Voting Results के मुताबिक, 17 जुलाई 2026 की कट-ऑफ डेट पर Basilic Fly Studio के कुल 4,659 इक्विटी शेयरधारक थे। चूंकि सभी प्रस्ताव पोस्टल बैलट के जरिए पास किए गए, इसलिए किसी फिजिकल मीटिंग या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शेयरधारकों की उपस्थिति लागू नहीं थी।

स्क्रूटिनाइजर की रिपोर्ट भी जारी

कंपनी ने पोस्टल बैलट के Voting Results के साथ Scrutinizer's Report भी जारी की है। यह रिपोर्ट 24 अगस्त 2026 की है। कंपनी के मुताबिक, मतदान प्रक्रिया और स्क्रूटिनी की कार्रवाई Companies Act, 2013 की संबंधित धाराओं और Companies (Management and Administration) Rules, 2014 के तहत की गई।

Basilic Fly Studio ने बताया कि पोस्टल बैलट के नतीजे और Scrutinizer's Report कंपनी की वेबसाइट के साथ-साथ National Securities Depository Limited (NSDL) के e-Voting पोर्टल पर भी उपलब्ध हैं।

कंपनी ने कहा है कि इन नतीजों को SEBI Listing Regulations के तहत जरूरी अनुपालन के तौर पर स्टॉक एक्सचेंज के रिकॉर्ड में लिया जाए और उचित तरीके से प्रसारित किया जाए। 

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Firstpost ने लॉन्च किया ‘Firstpost Flaunt’, लग्जरी की दुनिया को नए अंदाज में करेगा पेश

पत्रकारों की एक टीम द्वारा तैयार किया गया Firstpost Flaunt ऐसे दर्शकों के लिए तैयार किया गया है, जो लग्जरी और बेहतर जीवनशैली को समझते और पसंद करते हैं।

Last Modified:
Wednesday, 26 August, 2026
First Flaunt

‘नेटवर्क18’ (Network18) समूह के प्रमुख डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म ‘फर्स्टपोस्ट’ (Firstpost) ने लग्जरी की दुनिया पर केंद्रित अपना नया प्रीमियम एडिटोरियल डेस्टिनेशन ‘Firstpost Flaunt’ लॉन्च किया है। यह नया प्लेटफॉर्म ट्रैवल, कार और बाइक, घड़ियां, स्पिरिट्स और होम्स के जरिए समकालीन लग्जरी से जुड़े कंटेंट को पेश करेगा।

पत्रकारों की एक टीम द्वारा तैयार किया गया Firstpost Flaunt ऐसे दर्शकों के लिए तैयार किया गया है, जो लग्जरी और बेहतर जीवनशैली को समझते और पसंद करते हैं। यह प्लेटफॉर्म समकालीन लग्जरी को आकार देने वाले विचारों, अनुभवों, शिल्पकला और व्यक्तित्वों को सामने लाएगा।

Firstpost Flaunt के जरिए पाठकों को लग्जरी की दुनिया की खास जानकारियां मिलेंगी। इसमें यह समझने की कोशिश की जाएगी कि किसी अनुभव को खास और आकर्षक क्या बनाता है, कुछ वस्तुएं लोगों का ध्यान क्यों खींचती हैं और नई पीढ़ी के उपभोक्ताओं के लिए लग्जरी किस तरह बदल रही है।

Firstpost की मजबूत डिजिटल मौजूदगी, करीब 22 मिलियन सोशल मीडिया फॉलोअर्स और 700 से अधिक व्यूज प्रति माह के साथ Firstpost Flaunt को दुनियाभर की लग्जरी से जुड़ी चीजों के लिए एक वन-स्टॉप डेस्टिनेशन के तौर पर तैयार किया गया है।

इस प्लेटफॉर्म पर दुनिया के चर्चित डेस्टिनेशंस और प्रॉपर्टीज से जुड़े खास अनुभवों से लेकर दुनियाभर की कारों और बाइक्स की फर्स्ट-हैंड ड्राइव तक को शामिल किया जाएगा। इसके अलावा घड़ी निर्माण की कला, बेहतरीन स्पिरिट्स और अन्य लग्जरी विषयों को भी कंटेंट का हिस्सा बनाया जाएगा।

Firstpost Flaunt में इमर्सिव स्टोरीटेलिंग के साथ जानकारीपूर्ण सुझाव, विशेषज्ञों के नजरिए और खास विजुअल नैरेटिव पर जोर रहेगा। इसका 360-डिग्री कंटेंट पैकेज लॉन्ग-फॉर्म आर्टिकल्स और वीडियो, शॉर्ट रील्स, फोटो गैलरी और अन्य फॉर्मेट में उपलब्ध होगा।

फर्स्टपोस्ट के चीफ कंटेंट ऑफिसर बिनॉय प्रभाकर ने कहा कि Firstpost Flaunt के जरिए पाठकों को उस शिल्पकला, विरासत और अनुभवों को देखने का अलग नजरिया मिलेगा, जो लग्जरी लाइफ को खास बनाते हैं। उन्होंने कहा कि यह एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जो जिज्ञासु है, लेकिन पारंपरिक या तयशुदा अंदाज में नहीं चलता। यह विशेष सेक्शन आकांक्षाओं और हाई-एंड लिविंग को सेलिब्रेट करेगा और Firstpost की स्टोरीटेलिंग क्षमताओं को असाधारण अनुभवों, वस्तुओं और विचारों की दुनिया से जोड़ेगा।

Firstpost Flaunt प्रीमियम ब्रैंड्स के लिए भी प्रभावशाली दर्शकों तक पहुंचने के नए अवसर तैयार करेगा। इसके तहत एडिटोरियल पार्टनरशिप, ब्रांडेड स्टोरीटेलिंग, वीडियो, सोशल-फर्स्ट कंटेंट और इमर्सिव एक्सपीरियंस जैसे माध्यमों के जरिए ब्रैंड्स को जोड़ा जाएगा।

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