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हैप्पी बर्थडे सुशांत सिन्हा: आपके सवालों में है संतुलन और विचारों में गहराई की आवाज
आज वरिष्ठ पत्रकार सुशांत सिन्हा का जन्मदिन है। यह महज एक तारीख नहीं, बल्कि उस आवाज का उत्सव है जो वर्षों से देश की सियासत, समाज और सिस्टम से सवाल पूछती रही है- बेबाकी से, लेकिन गरिमा के साथ।
Vikas Saxena 6 months ago
आज वरिष्ठ पत्रकार और टीवी एंकर सुशांत सिन्हा का जन्मदिन है। यह महज एक तारीख नहीं, बल्कि उस आवाज का उत्सव है जो वर्षों से देश की सियासत, समाज और सिस्टम से सवाल पूछती रही है- बेबाकी से, लेकिन गरिमा के साथ। सुशांत सिन्हा उन पत्रकारों में शुमार हैं, जिनकी भाषा में तल्खी नहीं, लेकिन सवालों में तपिश होती है।
वर्तमान में वह 'टाइम्स नाउ नवभारत' में बतौर सीनियर एंकर देश की सबसे सशक्त डिबेट्स का हिस्सा हैं और दर्शकों के बीच एक भरोसेमंद चेहरा बन चुके हैं। लेकिन इस मुकाम तक पहुंचने की उनकी यात्रा आसान नहीं रही। यह कहानी सिर्फ करियर ग्राफ की नहीं, बल्कि समर्पण, संघर्ष और उस जज्बे की है, जिसमें पत्रकारिता सिर्फ पेशा नहीं बल्कि जिम्मेदारी बन जाती है।
पत्रकारिता की नींव से राष्ट्रीय पहचान तक
पटना के सेंट जेवियर्स हाई स्कूल से शुरुआती शिक्षा लेने वाले सुशांत ने इग्नू से सूचना प्रौद्योगिकी में स्नातक किया। टेक्नोलॉजी की दुनिया से उनका मन जल्द ही सवालों की दुनिया में रम गया। पत्रकारिता में उनकी शुरुआत 2002 में 'जैन टीवी' से हुई और फिर उन्होंने लाइव इंडिया में लगभग छह वर्षों तक एंकर और प्रड्यूसर के तौर पर काम किया।
इसके बाद न्यूज24, NDTV इंडिया, इंडिया न्यूज, और फिर इंडिया टीवी- हर मंच पर उन्होंने अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। कहीं डिबेट शो को नई धार दी, तो कहीं जमीनी मुद्दों को बहस की मेज तक लाकर लोगों को सोचने पर मजबूर किया।
उनके बहुचर्चित शो ‘प्रश्नकाल’, ‘सुनो इंडिया’ और ‘जवाब तो देना होगा’ जैसे कार्यक्रमों ने देशभर में एक सजग दर्शक वर्ग तैयार किया, जो खबरों को केवल देखना नहीं, समझना चाहता है।
डिजिटल दौर की बेबाक आवाज
2021 में उन्होंने 'Sushant Sinha' नाम से एक यूट्यूब चैनल शुरू किया। यह केवल डिजिटल प्लेटफॉर्म नहीं था, बल्कि एक ऐसा मंच बना, जहां लाखों लोग उन्हें सुनते नहीं, महसूस करते हैं। आज इस चैनल पर लाखों सब्सक्राइबर्स हैं और सैकड़ों वीडियो अपलोड हो चुके हैं, जिनमें सुशांत समाज के हर उस सवाल को उठाते हैं, जिसे मुख्यधारा की बहस अक्सर नजरअंदाज कर देती है।
इस मंच ने सुशांत को न सिर्फ एक स्वतंत्र आवाज दी, बल्कि उन्हें उन दर्शकों से जोड़ा जो बिना लाग-लपेट के खबरें सुनना और समझना चाहते हैं।
सम्मान, सवाल और संवेदनशीलता
पत्रकारिता के क्षेत्र में सुशांत सिन्हा को कई सम्मान मिल चुके हैं। लेकिन उनसे जुड़ी सबसे बड़ी उपलब्धि शायद ये है कि वह दर्शकों के बीच सिर्फ एक एंकर नहीं, एक संवेदनशील विचार की तरह देखे जाते हैं। वह न शोर मचाते हैं, न दिखावे की आक्रामकता लाते हैं, बल्कि तथ्य, सवाल और दृष्टिकोण को सामने रखते हैं।
एक निजी स्पर्श, एक सार्वजनिक जिम्मेदारी
जो लोग सुशांत सिन्हा को सिर्फ टीवी पर देखते हैं, उन्हें यह जानकर सुखद आश्चर्य होगा कि कैमरे के पीछे वह बेहद सरल, विनम्र और विचारशील व्यक्ति हैं। क्रिकेट के शौकीन, किताबों के प्रेमी और विचारों के सजग संवाददाता- सुशांत का व्यक्तित्व जितना प्रोफेशनल है, उतना ही निजी तौर पर संतुलित और सधा हुआ।
उनका ट्विटर और यूट्यूब अकाउंट इस बात का सबूत है कि वह संवाद में विश्वास रखते हैं- वह संवाद जो बहस नहीं, समझदारी पैदा करता है।
आज उनके जन्मदिन पर यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि सुशांत सिन्हा उस पत्रकारिता की मिसाल हैं जो आवाज तो बनती है, लेकिन शोर नहीं। जो सवाल तो पूछती है, लेकिन गरिमा के साथ। जो पक्षधर होती है, लेकिन सच के।
जन्मदिन की ढेरों शुभकामनाएं, सुशांत सिन्हा! आप यूं ही पत्रकारिता की रोशनी बनकर देश को सवालों की दिशा दिखाते रहें और सच के पक्ष में, देश की आवाज बने रहें- निडर, निष्पक्ष और निर्भीक।
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