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हैप्पी बर्थडे डॉ. अनुराग बत्रा: आप हैं मीडिया, ऐडवर्टाइजिंग व मार्केटिंग की 'धड़कन'
दो दशक से भी अधिक समय पहले, डॉ. बत्रा ने एक्सचेंज4मीडिया की शुरुआत की, जिससे ऐडवर्टाइजिंग, मार्केटिंग और मीडिया इंडस्ट्री को एक समर्पित आवाज मिली।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 5 months ago
लीडर दो तरह के होते हैं- कुछ वे, जो समय की लहरों पर सवार होकर रुझानों का पीछा करते हैं और कुछ वे, जो उन लहरों का रुख मोड़ देते हैं, जो वह मंच तैयार करते हैं जहां विचार जन्म लेते हैं, चर्चाएं आकार लेती हैं और भविष्य की दिशा तय होती है। डॉ. अनुराग बत्रा हमेशा से उसी श्रेणी के लीडर रहे हैं, जो राह चलते नहीं बल्कि राह बनाने का हौसला रखते हैं। उनका नेतृत्व सिर्फ रुझानों का हिस्सा नहीं रहा, बल्कि वह दीपक रहा है जिसने पूरे इंडस्ट्री को रोशनी दी और आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
BW बिजनेसवर्ल्ड के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ और एक्सचेंज4मीडिया ग्रुप के फाउंडर के रूप में उन्होंने केवल मीडिया ब्रैंड ही नहीं बनाए, बल्कि ऐसे मंच खड़े किए जहां इंडस्ट्री खुद को देख सके, खुद को चुनौती दे सके और अंततः आगे बढ़ सके। आज उनके जन्मदिन पर, यह उपयुक्त प्रतीत होता है कि हम सिर्फ एक व्यक्ति की उपलब्धियों का नहीं, बल्कि उस करियर के प्रभाव का जश्न मनाएं, जिसने भारत के मीडिया और मार्केटिंग परिदृश्य के हर कोने को छुआ है।
दो दशक से भी अधिक समय पहले, डॉ. बत्रा ने एक्सचेंज4मीडिया की शुरुआत की, जिससे ऐडवर्टाइजिंग, मार्केटिंग और मीडिया इंडस्ट्री को एक समर्पित आवाज मिली। जो एक प्लेटफॉर्म के रूप में शुरू हुआ था, वह जल्द ही एक जीवंत समूह में बदल गया जिसमें PITCH, IMPACT, Franchisee Plus, Realty Plus और समाचा4मीडिया शामिल हैं और प्रत्येक प्रकाशन ने अपनी अलग पहचान बनाई। 2013 में उन्होंने BW बिजनेसवर्ल्ड का अधिग्रहण किया, जो एक पुराना प्रकाशन था और उसे आधुनिक युग के लिए नए सिरे से गढ़ा और डिजिटल, इवेंट्स और केंद्रित समुदायों तक उसका विस्तार किया।
उनके काम को वैश्विक स्तर पर भी मान्यता मिली। उन्हें इंटरनेशनल एकेडमी ऑफ टेलीविजन आर्ट्स एंड साइंसेज (IATAS) का सदस्य चुना गया, जो 60 देशों के 900 से अधिक प्रोफेशनल्स का संगठन है। इंटरनेशनल एमी अवॉर्ड्स से उनका जुड़ाव भी उतना ही उल्लेखनीय है। उन्होंने भारत में इसके सेमी-फाइनल जजिंग राउंड की मेजबानी की, जिससे देश को विश्व स्तरीय टेलीविजन कंटेंट की वैश्विक रोशनी में लाया जा सके।
डॉ. बत्रा की आवाज अंतरराष्ट्रीय मंचों तक भी पहुंची। ऑक्सफोर्ड के सईद बिजनेस स्कूल में उन्होंने दुनिया से यह आह्वान किया कि “कॉफी नहीं, चाय की खुशबू महसूस करें”, यानी भारत के सांस्कृतिक आत्मविश्वास और बहुलवाद को उसी गर्व के साथ अपनाएं, जिस तरह अन्य देश अपने प्रतीकों को सम्मान देते हैं।
देश में, उनके योगदान विश्लेषणात्मक और दूरदर्शी दोनों रहे हैं। उन्होंने डेंटसु-e4m डिजिटल ऐडवर्टाइजिंग रिपोर्ट के माध्यम से इंडस्ट्री के रुझानों पर संवाद को दिशा दी, जिसमें भारत के ऐडवर्टाइजिंग मार्केट की वृद्धि 2023 में ₹93,166 करोड़ तक दर्ज की गई और 2025 तक इसके ₹1,12,453 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया। उनकी सरल लेकिन प्रभावी “3 Cs” की फिलॉसफी- कंटेंट, कनेक्ट और कॉन्टेक्स्ट डिजिटल व्यवधानों से जूझ रहे मार्केटर्स के लिए एक मार्गदर्शक सिद्धांत बन गई।
संस्थानों को गढ़ते हुए भी, डॉ. बत्रा ने नए उपक्रमों का समर्थन किया। एक एंजेल इन्वेस्टर की भूमिका में उन्होंने शुरुआती चरण में IWMBuzz Media जैसे डिजिटल एंटरटेनमेंट प्लेटफॉर्म (20 मिलियन मासिक विजिटर्स के साथ) और Fandrum, एक फैन कम्युनिटी स्टार्टअप में निवेश किया। ये केवल निवेश नहीं थे, बल्कि मीडिया उद्यमियों की नई पीढ़ी में उनके विश्वास का बयान थे।
बोर्डरूम और इंडस्ट्री फोरम से परे, डॉ. बत्रा हमेशा जमीन से जुड़े रहे हैं। कंप्यूटर साइंस में बी.टेक और MDI गुड़गांव से एमबीए करने वाले डॉ. बत्रा अपनी यात्रा का श्रेय अक्सर आस्था, आध्यात्मिकता और माता-पिता द्वारा दिए गए मूल्यों को देते हैं। एक दृढ़ आशावादी के रूप में वे इस विश्वास से जीते हैं कि जब आप अपने शौक को पेशा बना लेते हैं, तो काम आनंद बन जाता है। मार्गदर्शन के प्रति जुनून रखने वाले वे “रिवर्स मेंटरिंग” भी करते हैं- यानी युवा उद्यमियों से सीखते हैं, जबकि उन्हें दिशा भी देते हैं। वह FMCC के एडवाइजरी बोर्ड के चेयरमैन और अपने अल्मा मेटर MDI के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स में भी सेवा दे चुके हैं।
इन सबके बीच, जो बात उन्हें परिभाषित करती है, वह केवल पैमाना नहीं बल्कि उनका इरादा है। निर्माण करना। जोड़ना। और लगातार यह पुनः कल्पना करना कि मीडिया और मार्केटिंग इकोसिस्टम क्या हो सकता है।
उनके जन्मदिन पर, इंडस्ट्री केवल उनके नेतृत्व के पदों या सम्मानों का जश्न नहीं मनाता। वह एक ऐसे व्यक्ति का उत्सव मनाता है जिसने संवादों को संस्थानों में और संस्थानों को आंदोलनों में बदल दिया।
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