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क्या ZEEL को तूफान से निपटने के लिए किसी स्ट्रैटजिक या फाइनेंशियल पार्टनर की जरूरत है?

इंडस्ट्री में इस बात को लेकर चर्चा है कि ZEEL इस तूफान का सामना कैसे करेगी।

समाचार4मीडिया ब्यूरो 1 year ago

अदिति गुप्ता, असिसटेंट एडिटर, एक्सचेंज4मीडिया ग्रुप ।।

सोनी (कल्वर मैक्स) के साथ विलय डील के असफल होने से लेकर, शेयरों में गिरावट और फिर कई मुकदमों के चलते जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (ZEEL) की मुश्किलें खत्म होती नहीं दिख रही हैं।

कई कानूनी कार्यवाहियों के उलझन फंसी ZEEL, जिसमें फंड डायवर्जन के आरोपों में सेबी की जांच हो या विलय की समापन शर्तों को पूरा नहीं करने के लिए सोनी द्वारा उसके खिलाफ मध्यस्थता का आह्वान करना हो, इंडस्ट्री में इस बात को लेकर चर्चा है कि ZEEL इस तूफान का सामना कैसे करेगी।

इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि पुनीत गोयनका के नेतृत्व वाली कंपनी को कठिन परिस्थिति से बचने के लिए एक स्ट्रैटजिक पार्टनर या फाइनेंशियल पार्टनर की आवश्यकता होगी। इनमें से कुछ का कहना है कि ZEEL के खिलाफ चल रहे मुकदमे और इस तथ्य को देखते हुए कि इंडस्ट्री में ज्यादा विकल्प नहीं बचे हैं, ZEEL को स्ट्रैटजिक पार्टनर या फाइनेंशियल पार्टनर दोनों को ही ढूंढना मुश्किल हो सकता है।

एलारा कैपिटल के सीनियर वाइस प्रेजिडेंट करण तौरानी के अनुसार, बड़े स्तर की RIL-डिज्नी मर्जर डील का सामना करते हुए सर्वाइव करने  के लिए  ZEEL को एक पार्टनर की जरूरत पड़ेगी।

करण तौरानी ने कहा, “उन्हें सर्वाइव करने के लिए एक पार्टनर की जरूरत पड़ेगी, क्योंकि उन्हें आगे भी बढ़ना है और RIL-डिज्नी की ताकत का सामना भी करना है। RIL-डिज्नी विलय को रेगुलेटरी अप्रूवल से गुजरने के बाद बड़े खिलाड़ियों के बीच प्रतिस्पर्धात्मक तीव्रता बढ़ जाएगी। इसलिए, ZEEL को वास्तव में आगे बढ़ने के लिए एक स्ट्रैटजिक पार्टनर या फाइनेंशियल पार्टनर की जरूरत पड़ सकती है।''

उन्होंने आगे कहा, “यदि आप डिजिटल पक्ष को देखें, तो अधिकांश कंपनियां घाटे में चल रही हैं और इन खिलाड़ियों के लिए घाटा बढ़ सकता है, क्योंकि बड़े लोगों की यहां बड़ी भूमिका होगी। लेकिन हम नहीं जानते कि उन्हें कौन से पार्टनर मिलेंगे, क्योंकि इंडस्ट्री में अब बहुत अधिक विकल्प नहीं हैं। इंडस्ट्री पहले से ही समेकित है।”

मार्केट में चार बड़े खिलाड़ी ZEEL, Sony, डिज्नी और रिलायंस रहे हैं। उनका यह भी मानना है कि चल रही मुकदमेबाजी से कंपनी को फाइनेंशियल पार्टनर ढूंढने में प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।    

उन्होंने कहा, “बेशक, कानूनी कार्यवाही एक अतिशयोक्ति है, लेकिन ये ऐसी चीजें हैं जो कुछ और महीनों तक जारी रहेंगी, जब तक कि हमें इसका अंतिम परिणाम नहीं मिल जाता। इन जांचों के नतीजे आने तक फाइनेंशियल पार्टनर बनाने के निर्णय में देरी हो सकती है।”  

इसी तरह का विचार साझा करते हुए, आरआर लीगल पार्टनर्स एलएलपी (RR Legal Partners LLP) के एसोसिएट पार्टनर रोहन राय ने कहा कि स्ट्रैटजिक या फाइनेंशियल पार्टनर के बिना ZEEL का अस्तित्व कानूनी कार्यवाही के बीच स्वतंत्र रूप से इससे बाहर निकलने की क्षमता पर निर्भर करता है।

उन्होंने कहा, “जी एंटरटेनमेंट (ZEEL) में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी वाले म्यूचुअल फंड (MF), शेयर की कीमतों में भारी गिरावट और सोनी की विलय की मांगों का पालन नहीं करने के कंपनी के फैसले को लेकर उठने वाली चिंताओं को दूर करने के लिए बोर्ड में बातचीत जारी है। 

उन्होंने कहा, “स्ट्रैटजिक या फाइनेंशियल पार्टनर के बिना ZEEL का अस्तित्व कानूनी कार्यवाही के बीच स्वतंत्र रूप से इससे बाहर निकलने की क्षमता पर निर्भर करता है। संभावित पार्टनर इन चुनौतियों पर विचार कर सकते हैं और वित्त वर्ष 2026 तक 2000 करोड़ रुपये से अधिक EBITDA हासिल करने की पुनीत गोयनका की प्रतिबद्धता ZEEL की कहानी में एक दूरदर्शी आयाम जोड़ती है।"

ZEEL के शेयर मूल्य में पिछले एक साल में 20.7% और पिछले छह महीनों में 43% की गिरावट देखी गई है।

TAS लॉ में सीनियर एसोसिएट शिवानी भूषण के अनुसार, "ZEEL के शेयर मूल्य में इस भारी गिरावट की वजह से ही एक स्ट्रैटजिक या फाइनेंशियल पार्टनर होना अनिवार्य है।"

भूषण ने कहा कि मर्जर को लेकर ZEEL का अंतिम प्रयास सोनी से अपने मर्जर की समाप्ति को रद्द करने का आह्वान है और यदि अनुमति दी जाती है, तो यह बिजनेस के लिए जीवनरक्षक हो सकता है। विशेषज्ञों के हवाले से कई मीडिया रिपोर्ट्स में यह संभावना जतायी गई है कि यदि NCLT इसे मंजूरी दे देता है तो ZEEL का अनुरोध व्यापार जगत में मीडिया समूह की प्रतिष्ठा में सुधार करेगा।” 

पीएसएल एडवोकेट्स एंड सॉलिसिटर्स (PSL Advocates & Solicitors) के पार्टनर सोयब कुरैशी के अनुसार, ZEEL को लीडरशिप के पुनर्गठन पर विचार करना चाहिए, डिजिटल परिवर्तन पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, गैर-प्रमुख संपत्तियों को बेचना चाहिए और अपनी लागत कम करनी चाहिए, क्योंकि ये उपाय जीवित रहने के लिए एक स्ट्रैटजिक या फाइनेंशियल पार्टनर खोजने में मदद करेंगे। 

उन्होंने कहा कि कॉस्ट कम करके प्रॉफिट बढ़ाना जरूरी है और वह भी तब जब रेवेन्यू ग्रोथ कठिन हो। यह संचालन की प्रभावशीलता को बढ़ा सकता है और वाइज इनवेस्टमेंट के लिए फंड जुटा सकता है। वहीं, गैर-प्रमुख परिसंपत्तियों या व्यावसायिक क्षेत्रों को बेचने से ZEEL को अपनी मुख्य शक्तियों पर ध्यान केंद्रित करने और ऋण कम करने या महत्वपूर्ण रणनीतिक क्षेत्रों में निवेश करने के लिए पूंजी उत्पन्न करने में सहायता मिल सकती है।

उन्होंने कहा, “चूंकि कंज्यूमर्स की प्राथमिकताएं तेजी से डिजिटल प्लेटफॉर्म की ओर बढ़ रही हैं, इसलिए भविष्य के विकास और प्रतिस्पर्धा के लिए डिजिटल परिवर्तन में निवेश करना जरूरी है। ZEEL को कंटेंट विविधता, यूजर्स के अनुभव और तकनीकी लचीलेपन पर जोर देते हुए अपने निवेश को ओटीटी प्लेटफॉर्म पर केंद्रित करने की जरूरत है। ZEEL को मौजूदा लीडरशिप टीम के प्रदर्शन और ZEEL के रणनीतिक उद्देश्यों के साथ इसके एलाइनमेंट का विश्लेषण करने की जरूरत है।"

हाल ही में, एमडी पुनीत गोयनका ने अपने शेयरधारकों से प्रतिबद्धता जताई कि वह 18-20% EBITDA मार्जिन देंगे, जो नकद आधार पर लगभग 2,000 करोड़ रुपये से अधिक होगा। 

इस साल फरवरी में जारी अपनी तिसारी तिमाही में ZEEL ने अपने परिचालन राजस्व (operating revenue) में 3% की गिरावट दर्ज की थी और कंपनी का EBITDA Q3 FY23 के 366 करोड़ रुपये से 42.9% घटकर 209.2 करोड़ रुपये हो गया।


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