वरिष्ठ पत्रकार सुमित अवस्थी ने कहा कि AI का इस्तेमाल खबरों को बेहतर बनाने के लिए किया जा सकता है, लेकिन अंतिम फैसला हमेशा पत्रकार और संपादक की समझ का होना चाहिए।
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Vikas Saxena
वरिष्ठ पत्रकार सुमित अवस्थी ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पत्रकारिता के लिए एक बेहतरीन टूल है, लेकिन इसे कभी भी संपादक नहीं बनने देना चाहिए। उन्होंने कहा कि AI का इस्तेमाल खबरों को बेहतर बनाने के लिए किया जा सकता है, लेकिन अंतिम फैसला हमेशा पत्रकार और संपादक की समझ का होना चाहिए।
समाचार4मीडिया के 'मीडिया संवाद 2026' कार्यक्रम में 'मीडिया: कल, आज और कल' विषय पर आयोजित सत्र को संबोधित करते हुए सुमित अवस्थी ने कहा कि '40 अंडर 40' जैसी पहल उन युवा पत्रकारों को पहचान देने का काम कर रही है, जो अपने काम के दम पर अलग पहचान बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि जूरी के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि देशभर से आए प्रतिभाशाली पत्रकारों में से सर्वश्रेष्ठ का चयन किया जाए।
उन्होंने कहा कि वह उस पीढ़ी से हैं, जिसने पत्रकारिता में कई बड़े बदलाव देखे हैं। एक समय था जब दूरदर्शन और आकाशवाणी के समाचार वाचकों को देखकर लोग पत्रकार बनने का सपना देखते थे। बाद में उन्हें उन्हीं लोगों के साथ काम करने का अवसर भी मिला।
सुमित अवस्थी ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को कमतर आंकना सही नहीं है। अगर युवाओं को देश, संविधान या राजनीति के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं है, तो इसके लिए केवल उन्हें दोष नहीं दिया जा सकता। यह जिम्मेदारी वरिष्ठ पीढ़ी की भी है कि वह उन्हें सही दिशा दिखाए और बेहतर तरीके से तैयार करे।
उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी वाई-फाई, सोशल मीडिया और ओटीटी के दौर में बड़ी हुई है। इसलिए उनकी सोच और दुनिया को देखने का नजरिया पहले से अलग है। ऐसे में नई पीढ़ी को समझने की जरूरत है, न कि उसकी आलोचना करने की।
पत्रकारिता में आए बदलाव का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मीडिया संस्थानों को भी आत्ममंथन करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक मीडिया युवा दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित करने की कोशिश करता रहा, लेकिन इस दौरान अपने पुराने और भरोसेमंद दर्शकों को भी खो दिया। आज का युवा वहां है, जहां उसकी पसंद का कंटेंट उपलब्ध है, इसलिए मीडिया को भी समय के साथ खुद को बदलना होगा।
उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था जब कुछ ही न्यूज चैनल होते थे और उनकी टीआरपी 60 प्रतिशत तक पहुंच जाती थी। आज चैनलों की संख्या बढ़ गई है और प्रतिस्पर्धा भी पहले से कहीं ज्यादा हो गई है। ऐसे में मीडिया के सामने अपनी विश्वसनीयता बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती है।
सोशल मीडिया पर अपनी राय रखते हुए सुमित अवस्थी ने कहा कि आज यह दुनिया में विचारों को प्रभावित करने वाला सबसे बड़ा माध्यम बन चुका है। ऐसे समय में संवाद की परंपरा को मजबूत बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत यही है कि यहां हर विचार को सामने रखने की आजादी है और यही लोकतंत्र की असली ताकत भी है।
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने AI के बढ़ते इस्तेमाल पर चिंता और उम्मीद, दोनों जाहिर कीं। उन्होंने कहा कि AI कई काम आसान कर सकता है और पत्रकारों के लिए एक उपयोगी टूल है, लेकिन उसे संपादक की भूमिका नहीं निभानी चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर AI किसी नेता की फर्जी बाइट बना दे, तो असली पत्रकार वही होगा जो सवाल पूछे और तथ्यों की जांच करे। इसलिए पत्रकारिता में तकनीक का इस्तेमाल जरूर होना चाहिए, लेकिन संपादकीय निर्णय हमेशा इंसान के हाथ में ही रहने चाहिए।
यूपी के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा है कि पत्रकार समाज और देश के हित में काम करते हैं। वे सम्मान या पुरस्कार के लिए नहीं, बल्कि अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए हर परिस्थिति में डटे रहते हैं।
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Vikas Saxena
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा है कि पत्रकार समाज और देश के हित में काम करते हैं। वे सम्मान या पुरस्कार के लिए नहीं, बल्कि अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए हर परिस्थिति में डटे रहते हैं। उन्होंने कहा कि कई बार पत्रकार युद्ध जैसी कठिन परिस्थितियों में भी अपनी जान जोखिम में डालकर लोगों तक सही जानकारी पहुंचाने का काम करते हैं।
ब्रजेश पाठक मंगलवार को नई दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (IIC) में आयोजित समाचार4मीडिया के '40 अंडर 40' सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस कार्यक्रम में देशभर से चयनित 40 वर्ष से कम आयु के युवा पत्रकारों को पत्रकारिता में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया। इस वर्ष भी प्रिंट, टीवी और डिजिटल मीडिया से जुड़े पत्रकारों को यह सम्मान प्रदान किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और एक्सचेंज4मीडिया ग्रुप के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ डॉ. अनुराग बत्रा ने सभी विजेता पत्रकारों को सम्मानित किया। इस अवसर पर हिंदुस्तान के प्रधान संपादक शशि शेखर भी मौजूद रहे।
अपने संबोधन में ब्रजेश पाठक ने युवा पत्रकारों को पत्रकारिता में उत्कृष्ट कार्य जारी रखने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि पत्रकार लोकतंत्र का मजबूत स्तंभ हैं और समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारी बहुत बड़ी है। मीडिया का दायित्व निष्पक्ष और तथ्यात्मक जानकारी लोगों तक पहुंचाना है और पत्रकार इस जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा के साथ निभा रहे हैं।
समारोह के दौरान उपमुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार युवाओं को सशक्त बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। नई शिक्षा नीति और विभिन्न रोजगार योजनाओं के माध्यम से युवाओं के लिए नए अवसर तैयार किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में निवेश, रोजगार और विकास को बढ़ावा देने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है और राज्य तेजी से विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है।
कार्यक्रम से पहले पूरे दिन 'मीडिया संवाद 2026' का आयोजन भी किया गया। 'मीडिया: कल, आज और कल' विषय पर आयोजित इस सम्मेलन में वरिष्ठ पत्रकारों, संपादकों और मीडिया विशेषज्ञों ने पत्रकारिता के बदलते स्वरूप पर विस्तार से चर्चा की। इस दौरान मीडिया के भविष्य, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), नई तकनीकों और डिजिटल दौर में पत्रकारिता की चुनौतियों एवं अवसरों पर भी विचार साझा किए गए।
डॉ. अनुराग बत्रा ने कहा कि '40 अंडर 40' सम्मान का उद्देश्य देशभर के उन युवा पत्रकारों को प्रोत्साहित करना है, जिन्होंने अपनी मेहनत, प्रतिभा और उत्कृष्ट पत्रकारिता के दम पर अलग पहचान बनाई है। उन्होंने बताया कि विभिन्न राज्यों से पत्रकारों का चयन उनके कार्य, उपलब्धियों और पेशेवर योगदान के आधार पर किया गया।
कार्यक्रम में मीडिया जगत की कई प्रमुख हस्तियों ने हिस्सा लिया। वक्ताओं ने युवा पत्रकारों से निष्पक्ष, जिम्मेदार और जनहित की पत्रकारिता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वान किया और कहा कि बदलते तकनीकी दौर में भी पत्रकारिता की विश्वसनीयता और मूल्यों को बनाए रखना सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
इससे पहले वह ब्लूमबर्गक्विंट (BloombergQuint) में एग्जिक्यूटिव वाइस प्रेजिडेंट के पद पर कार्यरत थे।
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‘एनडीटीवी इंटरनेशनल’ (NDTV International) ने विशाल श्रीवास्तव को अपना नया बिजनेस हेड नियुक्त किया है। इससे पहले वह ब्लूमबर्गक्विंट (BloombergQuint) में एग्जिक्यूटिव वाइस प्रेजिडेंट के पद पर कार्यरत थे।
ब्लूमबर्गक्विंट से पहले विशाल श्रीवास्तव CNBC TV18 में एग्जिक्यूटिव वाइस प्रेजिडेंट एवं हेड ऑफ ग्लोबल बिजनेस की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। इसके अलावा वह हिंदुस्तान टाइम्स के साथ भी काम कर चुके हैं।
विशाल श्रीवास्तव के पास ब्रॉडकास्ट और प्रिंट मीडिया से जुड़े ब्रैंड्स के साथ काम करने का 21 वर्षों का अनुभव है।
सरकार और निजी निवेशकों के सहयोग से Electronics Development Fund (EDF) ने अब तक 128 स्टार्टअप्स और कंपनियों में 1,335.77 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश कराया है
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Samachar4media Bureau
भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स स्टार्टअप इकोसिस्टम तेजी से मजबूत हो रहा है। सरकार और निजी निवेशकों के सहयोग से Electronics Development Fund (EDF) ने अब तक 128 स्टार्टअप्स और कंपनियों में 1,335.77 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश कराया है। इससे इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) के क्षेत्र में नवाचार (इनोवेशन) को बड़ा बढ़ावा मिला है।
यह जानकारी केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री Ashwini Vaishnaw ने लोकसभा में एक लिखित जवाब के दौरान दी।
आठ वेंचर फंड्स के जरिए स्टार्टअप्स तक पहुंचा निवेश
सरकार समर्थित Electronics Development Fund (EDF) ने 257.77 करोड़ रुपये का निवेश आठ पेशेवर तरीके से संचालित वेंचर कैपिटल फंड्स में किया है। इन्हें 'डॉटर फंड्स' (Daughter Funds) कहा जाता है।
इन डॉटर फंड्स ने आगे बढ़कर 128 स्टार्टअप्स और कंपनियों में कुल 1,335.77 करोड़ रुपये का निवेश किया है। ये कंपनियां स्वदेशी तकनीक, नए उत्पाद और बौद्धिक संपदा (Intellectual Property) विकसित करने का काम कर रही हैं।
स्टार्टअप्स में सीधे निवेश नहीं करता EDF
EDF की खास बात यह है कि यह सीधे किसी स्टार्टअप में निवेश नहीं करता। यह 'फंड ऑफ फंड्स' (Fund of Funds) मॉडल पर काम करता है। यानी यह SEBI में पंजीकृत वेंचर कैपिटल फंड्स को पूंजी उपलब्ध कराता है। इसके बाद ये फंड्स इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन एवं मैन्युफैक्चरिंग (ESDM) और सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में काम कर रहे संभावनाशील स्टार्टअप्स की पहचान कर उनमें निवेश करते हैं।
इस मॉडल का उद्देश्य सरकारी सहयोग और निजी क्षेत्र की विशेषज्ञता को साथ लाकर देश में एक मजबूत और टिकाऊ इनोवेशन इकोसिस्टम तैयार करना है।
किन आधारों पर चुने जाते हैं स्टार्टअप्स?
निवेश पाने वाले स्टार्टअप्स का चयन कई मानकों के आधार पर किया जाता है। इनमें नवाचार की क्षमता, स्वदेशी तकनीक का विकास, बौद्धिक संपदा (आईपी) तैयार करना, संस्थापकों की तकनीकी विशेषज्ञता और कारोबार को बड़े स्तर तक ले जाने की क्षमता शामिल है।
बेंगलुरु सबसे आगे
निवेश के मामले में कर्नाटक, खासकर बेंगलुरु, सबसे आगे रहा। यहां 128 में से 89 कंपनियों को 854.54 करोड़ रुपये का निवेश मिला। इसके बाद तेलंगाना का स्थान रहा, जहां हैदराबाद की 7 कंपनियों को 129.97 करोड़ रुपये मिले।
वहीं महाराष्ट्र में मुंबई और पुणे की 8 कंपनियों को कुल 142.48 करोड़ रुपये का निवेश मिला। इसके अलावा तमिलनाडु, दिल्ली, केरल, हरियाणा, राजस्थान, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश के स्टार्टअप्स को भी इस योजना का लाभ मिला।
कुल मिलाकर 77 कंपनियां इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन एवं मैन्युफैक्चरिंग (ESDM) क्षेत्र से हैं, जबकि 51 कंपनियां सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) सेक्टर में काम कर रही हैं।
सरकारी निवेश से कई गुना ज्यादा जुटाई निजी पूंजी
सरकार के मुताबिक, EDF की इस पहल ने निजी निवेश आकर्षित करने में भी बड़ी सफलता हासिल की है। डॉटर फंड्स ने EDF से मिले निवेश के आधार पर बाजार से करीब पांच गुना ज्यादा पूंजी जुटाई। इन स्टार्टअप्स ने अब तक सामूहिक रूप से करीब 22,553.82 करोड़ रुपये का निवेश हासिल किया है। इसके साथ ही उन्होंने 373 बौद्धिक संपदा (IP) परिसंपत्तियां तैयार की हैं या उनका अधिग्रहण किया है।
Canbank Venture Capital Funds कर रहा है संचालन
इस फंड का संचालन Canbank Venture Capital Funds Ltd. कर रही है, जबकि Ministry of Electronics and Information Technology इसमें एंकर निवेशक (Anchor Investor) की भूमिका निभा रहा है।
फंड मैनेजर नियमित रूप से डॉटर फंड्स के प्रदर्शन की समीक्षा करता है। वहीं, डॉटर फंड्स अपने पोर्टफोलियो में शामिल कंपनियों की तकनीकी प्रगति, कारोबारी प्रदर्शन और बाजार में उनकी वृद्धि पर लगातार नजर रखते हैं।
अब निवेश नहीं, निकासी के चरण में EDF
EDF ने फरवरी 2024 में अपना निवेश चरण (Investment Phase) पूरा कर लिया था और अब यह डाइवेस्टमेंट (Divestment) चरण में पहुंच चुका है।
हालांकि, अब तक के आंकड़े बताते हैं कि EDF की सबसे बड़ी उपलब्धि सिर्फ निवेश की राशि नहीं है। इस पहल ने भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स स्टार्टअप्स के लिए एक मजबूत इनोवेशन इकोसिस्टम तैयार किया है, जिससे देश की नई कंपनियों को भविष्य की तकनीकों के विकास, स्वदेशी उत्पाद बनाने और वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा करने के लिए मजबूत आधार मिला है।
सोशल मीडिया दिग्गज मेटा (Meta) ने वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही (अप्रैल-जून) के शानदार नतीजे पेश किए हैं।
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Samachar4media Bureau
सोशल मीडिया दिग्गज मेटा (Meta) ने वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही (अप्रैल-जून) के शानदार नतीजे पेश किए हैं। कंपनी की कमाई में सालाना आधार पर 28% की बढ़ोतरी हुई है। इस शानदार प्रदर्शन के पीछे सबसे बड़ी वजह कंपनी का AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) आधारित विज्ञापन कारोबार रहा, जिसने Meta की आय को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया।
हालांकि, AI और नई तकनीकों पर भारी निवेश के चलते कंपनी के मुनाफे और ऑपरेटिंग मार्जिन पर दबाव भी देखने को मिला। 30 जून 2026 को समाप्त तिमाही में Meta का कुल राजस्व (Revenue) बढ़कर 60.8 अरब डॉलर हो गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 47.5 अरब डॉलर था।
कंपनी की सबसे बड़ी आय विज्ञापनों से हुई। विज्ञापन से मिलने वाला राजस्व बढ़कर 59.36 अरब डॉलर पहुंच गया, जो एक साल पहले 46.56 अरब डॉलर था। यानी विज्ञापन कारोबार में करीब 27% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इससे एक बार फिर साफ हो गया कि Meta की कमाई का सबसे बड़ा आधार उसका विज्ञापन कारोबार ही है।
Meta के मुताबिक, AI आधारित तकनीक ने विज्ञापनों को पहले से ज्यादा प्रभावी बनाया है। कंपनी के Family of Apps (Facebook, Instagram, WhatsApp और अन्य ऐप्स) पर दिखाए गए विज्ञापनों (Ad Impressions) की संख्या में 14% की बढ़ोतरी हुई। वहीं, प्रति विज्ञापन औसत कीमत (Average Price per Ad) भी 12% बढ़ गई।
कंपनी का कहना है कि AI आधारित विज्ञापन ऑप्टिमाइजेशन और बेहतर रिकमेंडेशन सिस्टम की वजह से विज्ञापनदाताओं की मांग बढ़ी है, जिसका सीधा फायदा कारोबार को मिला।
हालांकि, AI और इंफ्रास्ट्रक्चर पर तेजी से बढ़ रहे निवेश का असर कंपनी की कमाई पर भी पड़ा। तिमाही के दौरान Meta की ऑपरेटिंग इनकम घटकर 18.78 अरब डॉलर रह गई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 20.44 अरब डॉलर थी।
इसी तरह कंपनी का ऑपरेटिंग मार्जिन भी घटकर 31% रह गया, जो एक साल पहले 43% था। वहीं, कंपनी का शुद्ध मुनाफा (Net Income) भी 14% घटकर 15.85 अरब डॉलर रह गया, जबकि पिछले साल यह 18.34 अरब डॉलर था।
Meta के कुल खर्च और व्यय (Total Costs & Expenses) में 55% की बढ़ोतरी हुई और यह बढ़कर 42.03 अरब डॉलर हो गया। इसकी बड़ी वजह कंपनी पर लगा 2.40 अरब डॉलर का कानूनी खर्च (Legal Charge) और मई 2026 में कर्मचारियों की छंटनी (Layoffs) के बाद 1.8 अरब डॉलर का सेवरेंस खर्च रहा।
कंपनी ने मार्केटिंग और बिक्री (Marketing & Sales) पर भी खर्च बढ़ाया। इस मद में खर्च बढ़कर 3.43 अरब डॉलर हो गया, जबकि पिछले साल यह 2.98 अरब डॉलर था। यानी इसमें करीब 15% की बढ़ोतरी हुई।
हालांकि, यह कंपनी के कुल खर्च का छोटा हिस्सा है, लेकिन इससे संकेत मिलता है कि Meta AI के साथ-साथ अपने प्रोडक्ट्स के विस्तार और ग्राहकों तक पहुंच बढ़ाने पर भी लगातार निवेश कर रही है।
इस तिमाही की सबसे बड़ी खासियत Meta का AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ता निवेश रहा। कंपनी ने सिर्फ तीन महीनों में 31.08 अरब डॉलर का पूंजीगत निवेश (Capital Expenditure) किया। यह पैसा मुख्य रूप से AI डेटा सेंटर, कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और अगली पीढ़ी की तकनीकों के विकास पर खर्च किया गया।
इससे साफ है कि Meta फिलहाल अल्पकालिक मुनाफे के बजाय AI को लेकर अपनी लंबी अवधि की रणनीति पर ज्यादा ध्यान दे रही है।
अगर पूरे साल की पहली छह महीने की अवधि पर नजर डालें तो तस्वीर और बेहतर दिखाई देती है। जनवरी से जून 2026 के दौरान Meta का कुल राजस्व बढ़कर 117.11 अरब डॉलर हो गया, जबकि पिछले साल यह 89.83 अरब डॉलर था।
इसी अवधि में विज्ञापन से आय बढ़कर 114.39 अरब डॉलर पहुंच गई, जो पिछले साल 87.96 अरब डॉलर थी। मार्केटिंग और सेल्स पर खर्च बढ़कर 6.34 अरब डॉलर हो गया, जबकि ऑपरेटिंग इनकम बढ़कर 41.65 अरब डॉलर और शुद्ध मुनाफा 42.62 अरब डॉलर पहुंच गया। पिछले साल इसी अवधि में यह क्रमशः 37.99 अरब डॉलर और 34.98 अरब डॉलर था।
इससे साफ है कि तिमाही स्तर पर दबाव के बावजूद लंबी अवधि में Meta की कमाई लगातार मजबूत बनी हुई है। Meta के चीफ मार्केटिंग ऑफिसर (CEO) मार्क जुकरबर्ग ने कहा कि AI न केवल कंपनी के मौजूदा कारोबार को तेज गति दे रहा है, बल्कि नए व्यावसायिक अवसर भी पैदा कर रहा है।
उन्होंने कहा कि AI की मदद से Meta का विज्ञापन कारोबार पहले से ज्यादा प्रभावी हुआ है। इससे विज्ञापनों की कीमत और ग्राहकों की भागीदारी (Engagement) दोनों बढ़ी हैं। साथ ही कंपनी भविष्य की जरूरतों को देखते हुए AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़े स्तर पर निवेश जारी रखे हुए है।
Meta के ताजा नतीजे यह साफ संकेत देते हैं कि अब AI सिर्फ विज्ञापन अभियानों (Ad Campaigns) को बेहतर बनाने का जरिया नहीं रह गया है, बल्कि डिजिटल ऐड इंडस्ट्री में कमाई बढ़ाने का सबसे बड़ा आधार बनता जा रहा है।
हालांकि, आने वाले समय में Meta के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि वह AI पर भारी निवेश जारी रखते हुए अपने शेयरधारकों की लगातार बेहतर मुनाफे की उम्मीदों को भी पूरा कर सके।
भारत में Publicis Groupe के विज्ञापन कारोबार का संचालन करने वाली प्रमुख कानूनी इकाई TLG India Private Limited ने एक बार फिर भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया है।
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इमरान फजल, असिसटेंट एडिटर, एक्सचेंज4मीडिया ।।
भारत में Publicis Groupe के विज्ञापन कारोबार का संचालन करने वाली प्रमुख कानूनी इकाई TLG India Private Limited ने एक बार फिर भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया है। कंपनी ने अपनी नई याचिका में CCI के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें उसे विज्ञापन उद्योग में कथित कार्टेलाइजेशन (मिलीभगत) की जांच में औपचारिक रूप से "Opposite Party" (विपक्षी पक्ष) के रूप में मान्यता देने से इनकार कर दिया गया था।
यह नई रिट याचिका ऐसे समय में दाखिल की गई है, जब कुछ महीने पहले ही दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था। उस समय अदालत ने TLG India को पहले अपनी शिकायत लेकर CCI के पास जाने की सलाह दी थी। कंपनी का कहना था कि जांच में जिस इकाई की पहचान की गई है, उसे लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
एक्सचेंज4मीडिया ने मार्च में सबसे पहले यह खबर प्रकाशित की थी कि Publicis Groupe हाई कोर्ट के पहले आदेश को चुनौती देने और आगे की कानूनी कार्रवाई करने की तैयारी कर रही है। इससे पहले उसकी पहली रिट याचिका का निपटारा हो चुका था।
22 जुलाई को इस मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस स्वराणा कांता शर्मा ने CCI को नोटिस जारी किया। अदालत ने आयोग की उस मांग को स्वीकार कर लिया, जिसमें उसने TLG India को मामले में "Opposite Party" के रूप में शामिल किए जाने के मुद्दे पर निर्देश प्राप्त करने के लिए समय मांगा था। कोर्ट ने सभी प्रतिवादियों को एक सप्ताह के भीतर अपना जवाब या लिखित पक्ष दाखिल करने का निर्देश दिया और मामले की अगली सुनवाई 31 जुलाई 2026 तय की।
कानूनी विवाद की पृष्ठभूमि
यह मामला उस समय शुरू हुआ था, जब CCI ने 9 अगस्त 2024 को विज्ञापन उद्योग में कथित प्रतिस्पर्धा-विरोधी गतिविधियों की जांच के लिए स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेते हुए जांच के आदेश जारी किए थे। इस आदेश में "Publicis Groupe" को भी एक "Opposite Party" के रूप में नामित किया गया था।
दिल्ली हाई कोर्ट में पहले दायर अपनी याचिका में TLG India ने कहा था कि "Publicis Groupe" केवल एक वैश्विक ब्रांड का नाम है, न कि भारत या फ्रांस में कोई कानूनी (Juridical) इकाई। इसलिए उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं की जा सकती।
कंपनी का यह भी कहना था कि जांच आदेश में केवल ब्रांड का नाम दर्ज है, लेकिन CCI के Director General (DG) लगातार TLG India और उसके कर्मचारियों को समन भेज रहे हैं। यानी व्यवहार में जांच TLG India के खिलाफ की जा रही है, जबकि उसे औपचारिक रूप से जांच में पक्षकार नहीं बनाया गया है।
TLG India की दलील
पिछली सुनवाई के दौरान TLG India की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रितिन राय ने अदालत में कहा था कि Competition Act के तहत किसी जांच का लक्ष्य किसी कानूनी रूप से मान्य "Enterprise" होना चाहिए, न कि केवल किसी ब्रांड का नाम।
उन्होंने अदालत से Publicis Groupe के नाम पर जारी समन रद्द करने, CCI द्वारा इस्तेमाल किए गए रिकॉर्ड देखने की अनुमति देने और TLG India को इस मामले में सही पक्षकार के रूप में शामिल करने की मांग की थी।
CCI का पक्ष
CCI की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता जयंत मेहता ने इस याचिका का विरोध किया था। उनका कहना था कि यह याचिका समय से पहले दायर की गई है, क्योंकि TLG India को सीधे कोई नोटिस जारी नहीं किया गया था।
आयोग ने यह भी दलील दी थी कि Competition Act में "Persons" शब्द का इस्तेमाल किया गया है, जिसका दायरा इतना व्यापक है कि उसमें किसी कॉरपोरेट समूह का हिस्सा बनने वाली संस्थाएं भी शामिल हो सकती हैं।
पहले हाई कोर्ट ने क्या कहा था
इस मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस पुरुषेन्द्र कुमार कौरव ने उस समय TLG India की याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया था। अदालत ने कहा था कि अभी तक कंपनी को कोई कानूनी नुकसान (Legal Injury) नहीं हुआ है और वह अपनी शिकायत लेकर पहले CCI के पास जा सकती है।
हालांकि, हाई कोर्ट ने कंपनी के सभी कानूनी अधिकार और दलीलें सुरक्षित रखी थीं।
CCI ने नाम बदलने की मांग ठुकराई
हाई कोर्ट की टिप्पणी के बाद TLG India ने 19 मार्च 2026 को CCI के समक्ष Rectification और/या Substitution Application दाखिल की। इसमें कंपनी ने अनुरोध किया कि जांच में "Publicis Groupe" की जगह TLG India Private Limited का नाम दर्ज किया जाए।
लेकिन CCI ने 22 अप्रैल 2026 के अपने आदेश में इस आवेदन को खारिज कर दिया। इसी फैसले को चुनौती देते हुए कंपनी ने एक बार फिर दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
नई याचिका में क्या मांग की गई है
अपनी नई याचिका में TLG India ने अदालत से CCI के 22 अप्रैल 2026 के आदेश को रद्द करने की मांग की है। साथ ही कंपनी चाहती है कि CCI अपने 9 अगस्त 2024 के मूल जांच आदेश में संशोधन करते हुए "Publicis Groupe" की जगह TLG India Private Limited को आधिकारिक "Opposite Party" घोषित करे।
कंपनी ने 9 मार्च 2026 को जारी समन और 9 जुलाई 2025 को Director General द्वारा जारी नोटिस को भी रद्द करने की मांग की है।
हाई कोर्ट से अन्य राहत की भी मांग
CCI के आदेशों को चुनौती देने के अलावा TLG India ने अदालत से कई अन्य निर्देश भी मांगे हैं।
कंपनी ने अनुरोध किया है कि जब तक उसे औपचारिक रूप से जांच में "Opposite Party" नहीं बनाया जाता, तब तक Director General उसके परिसरों से जब्त किए गए किसी भी दस्तावेज, डेटा या अन्य सामग्री का इस्तेमाल न करें।
इसके अलावा कंपनी ने मांग की है कि उसे भी जांच में शामिल अन्य "Opposite Parties" के समान सभी प्रक्रियात्मक और कानूनी अधिकार दिए जाएं, ताकि प्राकृतिक न्याय (Natural Justice) के सिद्धांतों का पालन हो सके।
याचिका में यह भी कहा गया है कि अदालत CCI को निर्देश दे कि जांच के दायरे को सभी संबंधित पक्षों के लिए समान रखा जाए और जब तक TLG India को आधिकारिक रूप से "Opposite Party" नहीं बनाया जाता, तब तक उसके या उसके कर्मचारियों के खिलाफ समन, नोटिस या किसी अन्य प्रकार की सख्त कार्रवाई न की जाए।
हाई कोर्ट ने जारी किया नोटिस
मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने याचिका पर CCI को नोटिस जारी किया, जिसे आयोग की ओर से पेश वकील ने स्वीकार कर लिया।
आयोग के वरिष्ठ वकील ने अदालत से यह कहते हुए समय मांगा कि उन्हें TLG India को "Opposite Party" के रूप में शामिल किए जाने के मुद्दे पर आयोग से निर्देश लेने हैं।
इसके बाद अदालत ने सभी प्रतिवादियों को एक सप्ताह के भीतर अपना जवाब या संक्षिप्त लिखित पक्ष दाखिल करने का निर्देश दिया। साथ ही उसकी अग्रिम प्रति याचिकाकर्ता के वकील को देने को कहा गया। मामले की अगली सुनवाई 31 जुलाई 2026 को होगी।
मामले का महत्व
ताजा घटनाक्रम से साफ है कि अब यह कानूनी विवाद केवल TLG India की पहली रिट याचिका की ग्राह्यता (Maintainability) तक सीमित नहीं रह गया है। अब मुख्य सवाल यह है कि क्या CCI अपनी जांच में सही कानूनी इकाई को "Opposite Party" के रूप में शामिल करने से इनकार कर सकती है। इस मुद्दे पर अदालत का फैसला भारत के विज्ञापन उद्योग में चल रही प्रतिस्पर्धा-विरोधी जांच (Antitrust Probe) की प्रक्रिया पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।
कंपनी सिर्फ फिल्मों की स्क्रीनिंग तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि अपने सिनेमाघरों को स्पोर्ट्स, म्यूजिक, स्टैंड-अप कॉमेडी और अन्य लाइव एंटरटेनमेंट का बड़ा केंद्र बनाना चाहती है।
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Samachar4media Bureau
देश की सबसे बड़ी मल्टीप्लेक्स चेन PVR INOX अब अपने कारोबार का दायरा बढ़ाने की तैयारी में है। कंपनी सिर्फ फिल्मों की स्क्रीनिंग तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि अपने सिनेमाघरों को स्पोर्ट्स, म्यूजिक, स्टैंड-अप कॉमेडी और अन्य लाइव एंटरटेनमेंट का बड़ा केंद्र बनाना चाहती है।
कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर अजय बिजली ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (Q1 FY27) के नतीजों के बाद हुई कॉन्फ्रेंस कॉल में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि PVR INOX का लक्ष्य अपने थिएटर नेटवर्क को सिर्फ फिल्में दिखाने वाली जगह नहीं, बल्कि लोगों के लिए आउट-ऑफ-होम एंटरटेनमेंट डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करना है।
अजय बिजली ने कहा कि कंपनी पूरे साल अपने सिनेमाघरों की स्क्रीन, लोकेशन और बड़े दर्शक वर्ग का इस्तेमाल अलग-अलग तरह के मनोरंजन कार्यक्रमों के लिए करना चाहती है।
उन्होंने बताया कि आईपीएल और फीफा वर्ल्ड कप के लाइव प्रसारण को दर्शकों से शानदार प्रतिक्रिया मिली थी। इससे कंपनी को यह भरोसा मिला कि लोग बड़े खेल आयोजनों को भी बड़े पर्दे पर देखने में दिलचस्पी रखते हैं।
स्पोर्ट्स इवेंट्स की स्क्रीनिंग के व्यावसायिक फायदे पर पूछे गए सवाल के जवाब में अजय बिजली ने कहा कि यह केवल प्रचार का हिस्सा नहीं है, बल्कि इससे कंपनी को वास्तविक कमाई भी हुई है। उन्होंने बताया कि फीफा वर्ल्ड कप फाइनल, जो आधी रात के बाद शुरू हुआ था, उसे देखने के लिए भी करीब 64,000 दर्शक PVR INOX के सिनेमाघरों में पहुंचे। इससे कंपनी की आय में भी योगदान मिला।
उन्होंने कहा कि फिल्मों का कारोबार आगे भी PVR INOX की सबसे बड़ी ताकत बना रहेगा, लेकिन इसके साथ-साथ कंपनी अपने सिनेमाघरों में खेल प्रतियोगितियां, म्यूजिक प्रोग्राम, स्टैंड-अप कॉमेडी और अन्य लाइव इवेंट्स आयोजित करने के अवसर भी लगातार बढ़ा रही है।
अजय बिजली के मुताबिक, कंपनी का प्रयास है कि फिल्मों को अपने कारोबार का केंद्र बनाए रखते हुए धीरे-धीरे ऐसे नए मनोरंजन विकल्प जोड़े जाएं, जो लंबे समय तक टिकाऊ साबित हों।
माना जा रहा है कि PVR INOX की यह रणनीति ऐसे समय में आई है, जब मल्टीप्लेक्स कंपनियां बॉक्स ऑफिस पर निर्भरता कम कर अपने थिएटरों का उपयोग सालभर अलग-अलग तरह के आयोजनों के लिए करना चाहती हैं। इससे दर्शकों को भी सिनेमाघरों में मनोरंजन के नए विकल्प मिलेंगे और कंपनी के लिए कमाई के नए रास्ते खुलेंगे।
दिल्ली पुलिस ने दावा किया है कि जंतर-मंतर पर चल रहे CJP (Cockroach Janata Party) के प्रदर्शन से जुड़ी भ्रामक और फर्जी जानकारियां सोशल मीडिया पर तेजी से फैलाई जा रही हैं।
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Samachar4media Bureau
दिल्ली पुलिस ने दावा किया है कि जंतर-मंतर पर चल रहे CJP (Cockroach Janata Party) के प्रदर्शन से जुड़ी भ्रामक और फर्जी जानकारियां सोशल मीडिया पर तेजी से फैलाई जा रही हैं। पुलिस का कहना है कि इनमें से कई पोस्ट पाकिस्तान से संचालित सोशल मीडिया अकाउंट्स के जरिए भी शेयर की जा रही थीं। ऐसे 400 से अधिक सोशल मीडिया हैंडल की पहचान कर उन्हें ब्लॉक कर दिया गया है।
शनिवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में सेंट्रल दिल्ली के डीसीपी रोहित राजबीर सिंह ने कहा कि छात्र-नेतृत्व वाले इस प्रदर्शन में सोशल मीडिया, खासकर इंस्टाग्राम, का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है। हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कई पोस्ट, वीडियो और तस्वीरें झूठी, भ्रामक और लोगों को गुमराह करने वाली हैं।
डीसीपी ने कहा कि पिछले कई दिनों से जंतर-मंतर पर Cockroach Janata Party के बैनर तले प्रदर्शन चल रहा है। आज के युवाओं के लिए सोशल मीडिया, विशेषकर इंस्टाग्राम, खबरों और अपडेट का बड़ा माध्यम बन चुका है। लेकिन हर वायरल पोस्ट या वीडियो सही हो, यह जरूरी नहीं है।
उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी जानकारी पर भरोसा करने या उसे आगे साझा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच (फैक्ट-चेक) जरूर करें। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर कोई भी जानकारी बहुत तेजी से वायरल हो जाती है और यदि वह गलत हो, तो इसका कानून-व्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है।
दिल्ली पुलिस का कहना है कि वह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लगातार नजर बनाए हुए है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, प्रदर्शन से जुड़े फेक न्यूज, एआई से तैयार किए गए वीडियो (AI-generated videos), डीपफेक और एडिट किए गए वीडियो का जवाब देने के लिए पुलिस अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट्स के जरिए लगातार तथ्यात्मक जानकारी साझा कर रही है।
पुलिस का कहना है कि उसका उद्देश्य लोगों तक सही जानकारी पहुंचाना और सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों तथा भ्रामक दावों पर रोक लगाना है, ताकि किसी तरह की गलतफहमी या कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा न हो।
सविता राज हीरेमठ ने 25 वर्षों में कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं। फिल्मों, सामाजिक अभियानों और ब्रांड निर्माण के जरिए उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई है।
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सविता राज हीरेमठ भारतीय विज्ञापन, मार्केटिंग, मीडिया और सिनेमा जगत का एक प्रतिष्ठित नाम हैं, जिन्होंने पिछले 25 वर्षों में कई ऐसे कार्य किए हैं, जिन्होंने उद्योग के साथ-साथ समाज पर भी गहरी छाप छोड़ी है।
वह उषाकाल कम्युनिकेशंस लिमिटेड (Ushakkaal Communications Ltd.) की सह-संस्थापक रही हैं और उन्होंने एमवे (Amway), सुजुकी (Suzuki), स्वारोवस्की (Swarovski), श्वार्जकोफ (Schwarzkopf), डाबर (Dabur) और हिंदुस्तान मोटर्स (Hindustan Motors) जैसे कई बड़े ब्रांड्स के लिए सफल विज्ञापन अभियान तैयार किए। उनके नेतृत्व में एजेंसी को 160 से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिले।
सविता ने केवल विज्ञापन तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि भारतीय सिनेमा में भी अपनी अलग पहचान बनाई। उन्होंने राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म 'खोसला का घोसला' (Khosla Ka Ghosla) का निर्माण किया, जिसने आम मध्यमवर्गीय परिवार की कहानी को बड़े पर्दे पर प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
यह फिल्म हिंदी की सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार जीतने में सफल रही और आज भी भारतीय सिनेमा की यादगार फिल्मों में गिनी जाती है। अब वह 'खोसला का घोसला–पार्ट 2' पर भी काम कर रही हैं।
इसके अलावा उन्होंने अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) अभिनीत फिल्म 'झुंड' (JHUND) का निर्माण किया, जो सामाजिक समानता, युवाओं के सशक्तिकरण और अवसरों पर आधारित एक महत्वपूर्ण फिल्म मानी जाती है। उनकी फिल्मों की खासियत यह रही है कि उन्होंने मनोरंजन के साथ-साथ सामाजिक संदेश को भी प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।
सविता राज हीरेमठ ने सामाजिक और राष्ट्रीय अभियानों में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी (Atal Bihari Vajpayee) और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) से जुड़े कई संचार अभियानों में भूमिका निभाई। उन्होंने 'इंडिया अनलिमिटेड' (India Unlimited) जैसे सांस्कृतिक अभियान की परिकल्पना की, जिसमें देशभर के कलाकारों ने शांति और एकता का संदेश दिया।
इसके अलावा उन्होंने एड्स जागरूकता, बालिका गोद लेने, दिव्यांगों के समर्थन और सामाजिक समावेशन जैसे कई विषयों पर अभियान चलाए। वर्ष 2020 में उन्होंने दृष्टिबाधित खिलाड़ियों के लिए आयोजित टी-20 क्रिकेट टूर्नामेंट के उद्घाटन, समापन समारोह और एंथम के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सराहना की।
वर्तमान में तांडव फिल्म एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड (Tandav Film Entertainment Pvt. Ltd.) की सह-संस्थापक और सीईओ के रूप में सविता राज हीरेमठ नई फिल्मों और वैश्विक स्तर की कहानियों पर काम कर रही हैं। उनका करियर इस बात का उदाहरण है कि दूरदर्शिता, रचनात्मक सोच और सामाजिक सरोकारों के साथ काम करके विज्ञापन, मीडिया और सिनेमा के क्षेत्र में लंबे समय तक प्रभावशाली पहचान बनाई जा सकती है।
वरिष्ठ पत्रकार सावन सेन ने करीब एक दशक तक रिपब्लिक टीवी के साथ काम करने के बाद संस्थान छोड़ दिया है।
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वरिष्ठ पत्रकार सावन सेन ने करीब एक दशक तक रिपब्लिक टीवी के साथ काम करने के बाद संस्थान छोड़ दिया है। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, अब वह CNN-News18 में एग्जिक्यूटिव एडिटर– एंटरप्राइज एंड स्पेशल इन्वेस्टिगेशंस के पद पर नई जिम्मेदारी संभालेंगे।
नई भूमिका में शावन सेन प्राइम-टाइम शो के साथ-साथ दोपहर का एक कार्यक्रम भी एंकर करेंगे। इसके अलावा रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा पर केंद्रित एक वीकेंड शो भी तैयार किया जा रहा है।
सावन सेन वर्ष 2017 में रिपब्लिक टीवी से जुड़े थे। यहां उन्होंने डिप्टी एडिटर के रूप में विशेष परियोजनाओं (स्पेशल प्रोजेक्ट्स) की जिम्मेदारी संभाली और कई प्रमुख राष्ट्रीय घटनाओं की कवरेज में अहम भूमिका निभाई।
CNN-News18 में यह सावन सेन की दूसरी पारी है। इससे पहले वह सितंबर 2012 से जुलाई 2016 तक उस समय के CNN-IBN में सीनियर कॉरेस्पोंडेंट रहे थे। इस दौरान उन्होंने अपराध, रक्षा और खुफिया एजेंसियों से जुड़े विषयों की रिपोर्टिंग की।
CNN-IBN से पहले सावन सेन द टाइम्स ऑफ इंडिया में सिविक रिपोर्टर के तौर पर काम कर चुके हैं। इसके अलावा उनका कार्यकाल द इंडियन एक्सप्रेस में भी रहा है। वर्ष 2016 में उन्होंने टाइम्स नेटवर्क में स्पेशल कॉरेस्पोंडेंट के रूप में रक्षा और खुफिया एजेंसियों की रिपोर्टिंग की और इसके बाद 2017 में रिपब्लिक टीवी से जुड़ गए।
सुप्रीम कोर्ट ने कोर्ट की कार्यवाही के ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग के दुरुपयोग पर सख्त रुख अपनाया है।
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सुप्रीम कोर्ट ने कोर्ट की कार्यवाही के ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग के दुरुपयोग पर सख्त रुख अपनाया है। शुक्रवार को कोर्ट ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए कहा कि बिना अनुमति कोर्ट की कार्यवाही के आधिकारिक वीडियो या ऑडियो को काट-छांटकर (एडिट), सोशल मीडिया पर शेयर, अपलोड, दोबारा पोस्ट या उससे कमाई (Monetisation) नहीं की जा सकेगी।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह आदेश मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने दिया।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कोई भी व्यक्ति या संस्था कोर्ट की कार्यवाही की आधिकारिक रिकॉर्डिंग का इस्तेमाल तभी कर सकेगी, जब उसे संबंधित हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल या सुप्रीम कोर्ट के सेक्रेटरी जनरल से पहले अनुमति मिल जाए।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ किया कि इस आदेश का खबरों की रिपोर्टिंग पर कोई असर नहीं पड़ेगा। मीडिया पहले की तरह कोर्ट की कार्यवाही की खबरें प्रकाशित और प्रसारित कर सकेगा। यह रोक केवल आधिकारिक ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग के इस्तेमाल और प्रसार पर लागू होगी।
यह आदेश पत्रकार हर्षिता ग्रोवर द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई के दौरान दिया गया। याचिका में कोर्ट की कार्यवाही के वीडियो क्लिप्स को एडिट कर सोशल मीडिया पर फैलाने और उनसे कमाई करने को लेकर नियम बनाने की मांग की गई थी।
याचिका में कहा गया था कि सोशल मीडिया पर अक्सर कोर्ट की कार्यवाही के छोटे-छोटे एडिटेड वीडियो शेयर किए जाते हैं, जिनमें न्यायाधीशों की टिप्पणियों को पूरे संदर्भ से अलग दिखाया जाता है। इससे लोगों तक गलत संदेश पहुंचता है और कई बार संबंधित पक्षों की छवि भी प्रभावित होती है।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी हाई कोर्ट्स को भी पक्षकार बनाया और उनसे पूछा कि कोर्ट की कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग को लेकर सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का पालन किस तरह हो रहा है। कोर्ट ने हाई कोर्ट्स से यह भी रिपोर्ट मांगी कि लगातार लाइव स्ट्रीमिंग का क्या प्रभाव पड़ा है और क्या मौजूदा व्यवस्था में बदलाव की जरूरत है।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को भी निर्देश दिया कि यदि भविष्य में इस संबंध में कोई नियामक व्यवस्था बनाई जाती है, तो उसे लागू करने की जिम्मेदारी किन मंत्रालयों की होगी, इसकी जानकारी दी जाए।
इसके अलावा, कोर्ट ने Meta और X समेत प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को भी नोटिस जारी किया है।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने कोर्ट को बताया कि उनकी मांग कोर्ट की लाइव स्ट्रीमिंग बंद करने की नहीं है। उनका कहना था कि समस्या तब पैदा होती है, जब कार्यवाही के छोटे-छोटे एडिटेड क्लिप्स सोशल मीडिया पर वायरल किए जाते हैं और वे पूरे कानूनी संदर्भ को बदल देते हैं।
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने कहा कि डिजिटल कंटेंट को नियंत्रित करना न्यायपालिका के सामने एक बड़ी चुनौती बन गया है। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा व्यवस्था में कोर्ट की लाइव स्ट्रीमिंग पर दोबारा विचार करने की जरूरत पड़ सकती है।
वहीं, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से अब वीडियो और ऑडियो में इस तरह बदलाव किया जा सकता है कि असली और नकली में फर्क करना मुश्किल हो जाए। ऐसे में कोर्ट की कार्यवाही के फर्जी या भ्रामक वीडियो फैलने का खतरा बढ़ गया है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने भी कहा कि कई बार कोर्ट की टिप्पणियों को मीडिया और सोशल मीडिया पर गलत संदर्भ में पेश किया जाता है, जिससे लोगों के बीच न्यायिक कार्यवाही को लेकर भ्रम पैदा हो सकता है।
फिलहाल, यह अंतरिम आदेश है। सुप्रीम कोर्ट इस मामले में आगे भी सुनवाई करेगा और भविष्य में कोर्ट की कार्यवाही के ऑडियो-वीडियो के इस्तेमाल को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते हैं।