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पत्रकारों की सुरक्षा के लिए तैयार हुए ब्लूप्रिंट में क्या है खास, जानें यहां
प्रत्येक जिले में मीडिया प्रोटेक्शन यूनिट स्थापित करने का भी रखा गया प्रस्ताव
समाचार4मीडिया ब्यूरो 6 years ago
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस आफताब आलम की अध्यक्षता में गठित एक कमेटी ने छत्तीसगढ़ में पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक बिल तैयार किया है। बिल तैयार करने के लिए फरवरी में इस कमेटी का गठन किया गया था।
यदि इस बिल को लागू किया जाता है तो इस तरह के मामलों की जांच डिप्टी एसपी से कम रैंक वाले पुलिस अधिकारी से नहीं कराई जाएगी। कमेटी द्वारा तैयार इस बिल में पत्रकारों के उत्पीड़न को संज्ञेय लेकिन जमानती अपराध बनाया गया है। इस बिल को तैयार करने वाली कमेटी के सदस्यों का कहना है कि इसमें प्रत्येक जिले में मीडिया प्रोटेक्शन यूनिट स्थापित करने का प्रस्ताव भी दिया गया है।
इस बिल को राज्य सरकार के पास नवंबर में जमा कराया जा सकता है। बताया जाता है कि यह बिल अभी फाइनल नहीं है। तमाम पत्रकारों के साथ ही प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया और एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया जैसे संगठनों से विचार-विमर्श के बाद ही इस बिल को अंतिम रूप दिया जाएगा।
इस बिल में पत्रकारों की सुरक्षा के मामले में अपनी जिम्मेदारियों से किनारा करने वाले लोक सेवकों (Public Servants) के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान भी रखा गया है। इस तरह के मामलों में लापरवाही बरतने पर उन्हें एक साल तक की जेल हो सकती है। यही नहीं, माओवादी प्रभावित बस्तर क्षेत्र में काम कर रहे पत्रकारों के लिए इसमें अलग प्रावधान शामिल किए गए हैं।
इस बिल का मसौदा तैयार करने वाली कमेटी के सदस्य के अनुसार, इस बिल में मीडिया पर्सन की व्याख्या भी की गई है। इसके पीछे कारण बताया गया है कि बस्तर इलाके में कई ऐसे पत्रकार काम कर रहे हैं, जो विभिन्न वेबसाइट्स के लिए काम करते हैं अथवा तमाम पत्रकारों को कॉलमिस्ट के तौर पर देखा जाता है, पत्रकार के तौर पर नहीं।
इस बिल के अनुसार, पिछले छह माह के दौरान जिस किसी के कम से कम छह आर्टिकल डिजिटल अथवा प्रिंट मीडिया में पब्लिश हुए हों अथवा किसी मीडिया संस्थान से जिसे तीन महीने के भीतर तीन आर्टिकल्स का भुगतान हुआ हो, वह मीडियाकर्मी है।
कमेटी के सदस्य और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के सलाहकार रुचिर गर्ग का कहना है, ‘इस बिल पर चर्चा की शुरुआती प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अब हमें इसे अंतिम रूप देने के बारे में चर्चा करनी है। चर्चा के बाद ही इस पर कोई निर्णय लिया जाएगा।’
‘छत्तीसगढ़ प्रोटेक्शन ऑफ मीडियापर्सन्स एक्ट’ के नाम से तैयार इस बिल के अनुसार, बिल को अंतिम रूप दिए जाने के बाद सरकार मीडियकार्मियों की सुरक्षा के लिए एक कमेटी गठित करेगी। राज्य स्तर पर गठित यह कमेटी मीडियाकर्मियों की सुरक्षा से जुड़ी शिकायतों से निपटेगी। इस बिल के अनुसार, कमेटी के सदस्यों के रूप में पत्रकारों को दो साल के लिए नियुक्त किया जाएगा और कोई भी सदस्य लगातार दो से अधिक कार्यकाल के लिए इस पद पर नहीं रह सकेगा।
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