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बड़े-बड़े मीडिया संस्थान कर गए चूक, कुछ ने मानी गलती
ये घटना मीडिया संस्थानों के लिए फिर से एक सबक है कि सोशल मीडिया के दौर में जल्दबाजी के साथ-साथ आंख-कान खुले रखना भी जरूरी है
समाचार4मीडिया ब्यूरो 6 years ago
सोशल मीडिया के दौर में मीडिया संस्थानों पर खबर ब्रेक करने का दबाव इस कदर बढ़ गया है कि कई बार स्थिति अर्थ से अनर्थ तक पहुंच जाती है। दीपावली पर अयोध्या की जगमग को लेकर भी अधिकांश मीडिया संस्थान और कुछ पत्रकार बड़ी गलती कर बैठे। मामले ने जब तूल पकड़ा और ‘अनर्थ’ के पीछे छिपे ‘अर्थ’ की तलाश की गई तो शर्मिंदगी के सिवा कुछ सामने नहीं आया।
हालांकि, एक-दो पत्रकारों ने बड़प्पन दिखाते हुए अपनी गलती स्वीकार भी की, जिसमें ‘द क्विंट’ की पत्रकार अस्मिता नंदी शामिल हैं। दरअसल, योगी सरकार ने इस बार अयोध्या में भव्य दीपोत्सव का आयोजन करने का निर्णय लिया, जिसका खर्चा सरकारी खजाने से किया जाना था। पांच लाख से ज्यादा दीये जलाने सहित सम्पूर्ण आयोजन पर 132.70 लाख के व्यय की बात कही गई, लेकिन ज्यादातर मीडिया संस्थान और पत्रकार इस गुणा-भाग में गलती कर बैठे। 132.70 लाख यानी 1.33 करोड़ को 133 करोड़ बताया गया। इसके बाद दीपोत्सव पर इतनी बड़ी रकम खर्च करने को लेकर उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार की आलोचना होने लगी।
ऑल्टन्यूज (altnews) की रिपोर्ट की मानें तो एनडीटीवी, लाइव हिन्दुस्तान, टाइम्स ऑफ इंडिया, इंडियन एक्सप्रेस, मुंबई मिरर, एबीपी न्यूज और जनसत्ता जैसे नामी मीडिया हाउस भी 1.33 करोड़ को 133 करोड़ बना गए। पत्रकार राहुल पंडिता ने तो बाकायदा एक गरीब बच्ची की फोटो दिखाते हुए योगी सरकार के इस कदम पर तीखा तंज किया। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, ‘500,000 दीयों को जलाने के लिए 20,000 लीटर तेल इस्तेमाल किया गया। इस आयोजन पर कुल लागत आई 133 करोड़। ये गरीब लड़की घर ले जाने के लिए इन दीयों से तेल निकालने का प्रयास कर रही है। उसकी आंखों में नजर आ रहे खौफ को महसूस करें, क्या हम इस तरह राम राज्य स्थापित करेंगे’? राहुल के इस ट्वीट को न्यूज24 की एसोसिएट एडिटर साक्षी जोशी ने भी बिना जांच-पड़ताल के रीट्वीट किया और योगी सरकार को निशाना बना बैठीं।
Exactly what I meant while wishing Diwali worth 133 crore to UPites.
— Sakshi Joshi (@sakshijoshii) October 29, 2019
See a picture speaking thousand words... https://t.co/2kvxX6cvwv
गौर करने वाली बात यह है कि उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से इस संबंध में बाकायदा एक प्रेसनोट जारी किया गया था, साथ ही सरकारी वेबसाइट पर भी इसकी जानकारी अंकित थी। इसके बावजूद मीडिया हाउस इतनी बड़ी गलती कर बैठे। सरकार की प्रेस रिलीज में साफ तौर पर कहा गया है कि ‘वर्ष 2019 में आयोजन पर लगभग 132.70 लाख रुपए के व्यय का अनुमान है। इस मेले के आयोजन पर होने वाले व्ययभार का वहन शासन द्वारा धनराशि की उपलब्धता के आधार पर किया जाएगा’।
वैसे, दैनिक जागरण और पंजाब केसरी इस गुणा-भाग में सफल रहे। दोनों ने उतना ही खर्चा बताया, जितना सरकार ने बताया था। ये घटना मीडिया संस्थानों के लिए फिर से एक सबक है कि सोशल मीडिया के दौर में जल्दबाजी के साथ-साथ आंख-कान खुले रखना भी जरूरी है। वरना इसी तरह गलतियां होती रहेंगी और मीडिया की विश्वसनीयता पर सवाल उतरे रहेंगे।
UP govt approved estimated budget of Rs 1.33 cr NOT Rs 133 cr for ‘Deepotsav’; media misreports पर क्लिक कर आप इस रिपोर्ट को पढ़ सकते हैं।
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