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कोरोना से रेडियो FM रेडियो इंडस्ट्री पर पड़ी दोहरी मार, बेलआउट पैकज की मांग
एफएम रेडियो लोगों की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। पर पहले से ही आर्थिक संकट से जूझ रहे निजी एफएम रेडियो पर कोरोना वायरस का दोहरा असर पड़ा है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 5 years ago
एफएम रेडियो लोगों की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। पर पहले से ही आर्थिक संकट से जूझ रहे निजी एफएम रेडियो पर कोरोना वायरस का दोहरा असर पड़ा है। लिहाजा इस सेक्टर पर गहराते आर्थिक संकट को देखते हुए केंद्र सरकार से तत्काल मदद करने की अपील की गई है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एफएम रेडियो ऑपरेटर्स के संगठन एसोसिएशन ऑफ रेडियो ऑपरेशंस फॉर इंडिया (एआरओआइ) ने बीते शनिवार को केंद्रीय सूचना-प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर पत्र लिखकर एफएम रेडियो क्षेत्र की बढ़ती चुनौतियों से अवगत कराया है। साथ ही इस इंडस्ट्री को मौजूदा संकट से उबारने की गुहार लगाते हुए बेलआउट पैकेज की मांग की।
एआरओआइ की अध्यक्ष अनुराधा प्रसाद ने लिखे गए पत्र में कहा है एफएम रेडियो चैनलों ने देश के सामाजिक और आर्थिक क्षेत्र में बदलाव लाने में अपनी अहम भूमिका निभाई है। इस दौरान एफएम रेडियो ने हर मौके पर सरकार के साथ सक्रिय साझेदारी की भूमिका का निर्वाह किया है, फिर चाहे वह प्राकृतिक आपदा की स्थिति हो या अन्य किसी तरह का संकट, एफएम रेडियो ने अपनी जिम्मेदारी का गरिमापूर्ण निर्वहन किया है।
अनुराधा प्रसाद ने यह भी कहा कि इस सकारात्मक नजरिये की वजह से किसी रेडियो स्टेशन के किसी भी कंटेंट को लेकर कोई ऐतराज या शिकायत कभी नहीं मिली है। इतना ही नहीं, कई रेडियो स्टेशंस को तो सरकार की ओर से आपदाओं के दौरान उनकी सकारात्मक भूमिका के लिए सम्मानित भी किया जाता रहा है।
एफएम रेडियो की इस सकारात्मक भूमिका का उल्लेख करते हुए उन्होंने आगे कहा कि एफएम सेक्टर के लिए पिछला साल काफी संघर्षपूर्ण रहा है। इन दिनों रेडियो इंडस्ट्री विज्ञापन खर्च में आयी 20 प्रतिशत की अनुमानित गिरावट से जूझ रही है। दरअसल यह गिरावट सरकारी विज्ञापन में कटौती की वजह से हुई है और इसकी वजह से एफएम रेडियो सेक्टर का संकट बढ़ गया है। इसलिए रेडियो स्टेशनों की लाइसेंस फीस के साथ प्रसार भारती के एक साल के शुल्कों को माफ करने की अपील की है।
साथ ही एआरओआइ ने एफएम रेडियो स्टेशंस के लिए सरकारी विज्ञापनों को पहले की तरह बहाल करने की भी बात कही। इसके अतिरिक्त सूचना प्रसारण मंत्री से यह भी गुहार लगाई गई है कि डीएवीपी, एनएफडीसी और बीएसएनएल जैसे सरकारी कंपनियों के विज्ञापन बकाया का भुगतान कराया जाए।
एआरओआइ ने यह भी कहा कि सभी निजी रेडियो स्टेशंस मिलकर एक साथ आगे आए हैं और सरकार से रेडियो इंडस्ट्री के सुधार की दिशा में आवश्यक कदम उठाने की मांग की है। केंद्र सरकार से की गई इस अपील में कहा गया है कि वर्तमान आर्थिक हालातों को देखते हुए, जब कोरोना जैसी महामारी भी अपना प्रकोप दिखा रही है, सरकार को रेडियो की दशा सुधारने के लिए कुछ उपाय करने चाहिए।
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