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विशेषज्ञों ने बताया, कोरोना के बाद कैसी रहेगी मीडिया इंडस्ट्री की 'रफ्तार'
इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट्स के अनुसार, अर्थव्यस्था पटरी पर वापस लौटने के बाद विज्ञापन मिलने शुरू हो जाएंगे और डिजिटल व टीवी को इसका लाभ सबसे पहले मिलेगा
समाचार4मीडिया ब्यूरो 5 years ago
कोरोनावायरस (कोविड-19) के कारण देश में लॉकडाउन चल रहा है। ऐसे में लोग घरों पर ही हैं। तमाम लोग घरों से ही काम (work-from-home) कर रहे हैं। लॉकडाउन के दौरान टीवी और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मीडिया का इस्तेमाल अथवा खपत (Consumption) काफी बढ़ी है। हालांकि, टीवी पर व्युअरशिप में तो काफी इजाफा हुआ है, लेकिन विज्ञापन राजस्व (ad revenues) के मामले में यह उतना बेहतर नहीं कर पाया है। वहीं, इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट्स का मानना है कि लॉकडाउन के बाद किसी भी अन्य सेक्टर की तुलना में टेलिविजन और डिजिटल काफी तेजी से आगे बढ़ेगा।
‘टैम एडेक्स’ (TAM AdEx) की रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी की तुलना में डिजिटल को मिलने वाले विज्ञापनों में मार्च और अप्रैल 2020 में 11 प्रतिशत की ग्रोथ देखने को मिली है, वहीं टीवी में चार प्रतिशत और रेडियो में पांच प्रतिशत की ग्रोथ देखने को मिली है, लेकिन प्रिंट के विज्ञापनों में 26 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। यदि सिर्फ अप्रैल के डाटा पर ही नजर डालें तो पता चलता है कि विभिन्न माध्यमों को मिलने वाले विज्ञापनों में कमी आई है, लेकिन यह कमी अन्य के मुकाबले सबसे कम 26.13 प्रतिशत है। टीवी में यह गिरावट 46.15 प्रतिशत, रेडियो में 71.43 और प्रिंट में सबसे ज्यादा 84 प्रतिशत देखी गई है।
ऐड रेवेन्यू में आई गिरावट के बारे में ‘डेलॉइट इंडिया’ (Deloitte India) के पार्टनर और हेड (मीडिया एंड इंटरटेनमेंट) जेहिल ठक्कर का कहना है कि प्रिंट को छोड़कर रेडियो, डिजिटल और टीवी का इस्तेमाल (Consumption) बढ़ा है लेकिन मुद्दा यह है कि व्युअरशिप का मुद्रीकरण (monetisation) पर कितना असर पड़ा है। ठक्कर का कहना है, ‘व्युअर्स और रेटिंग के आंकड़ों में काफी इजाफा हुआ है, लेकिन मुद्दा यह है कि आप इसका विमुद्रीकरण कैसे करते हैं, यानी रेवेन्यू कैसे जुटाते हैं। अभी हम एडवर्टाइजिंग में कमी देख रहे हैं। यह ग्रोथ अर्थव्यवस्था से जुड़ी रहती है। जब अर्थव्यवस्था ठीक होनी शुरू होगी तो हमें कुछ विज्ञापन वापस मिलने शुरू हो जाएंगे। जब भी यह होगा तो मेरा मानना है कि डिजिटल और टीवी सबसे पहले रिकवर करेंगे। डिजिटल की खपत में तो पहले ही उछाल देखा जा रहा है और टीवी की बात करें तो वहां एडवर्टाइजिंग का पैसा बड़ी कंपनियों से आता है और इसका उसे लाभ मिलेगा। जो सेक्टर्स सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग (MSME) और स्थानीय विज्ञापनों पर निर्भर हैं, वे जल्दी अपनी पुरानी रफ्तार पकड़ेंगे।’
वहीं, ‘ईवाई इंडिया’ (EY India) के पार्टनर और मीडिया व एंटरटेनमेंट लीडर आशीष फेरवानी ने उन फैक्टर्स के बारे में बताया जो चुनिंदा सेक्टर्स को तेजी से अपनी पहले वाली स्थिति में लाने में मदद करेंगे। फेरवानी के अनुसार, ‘जिन माध्यमों की पहुंच ज्यादा होगी वे तेजी से रिकवर करेंगे। लॉकडाउन खत्म होने के बाद विज्ञापन मिलने शुरू हो जाएंगे। उन छोटे शहरों में जहां मेट्रो शहरों की तुलना में कोविड-19 का प्रभाव कम है, वहां से ज्यादा विज्ञापन मिलने की उम्मीद है।’ फेरवानी के अनुसार, सप्लाई चेन सामान्य होने पर जहां लाइव एंटरटेनमेंट, ट्रैवल और रेस्टोरेंट्स जैसे सेक्टर्स को पटरी पर वापस आने में थोड़ा समय लगेगा, अन्य सेक्टर्स तेजी से वापस अपने ढर्रे पर लौट आएंगे।
रिकवरी की जहां तक बात है, तमाम माध्यमों ने अपने पुराने बिजनेस मॉडल का रिव्यू शुरू कर दिया है और नए रेवेन्यू ऑप्शंस दिए हैं। जैसे-प्रिंट इंडस्ट्री में ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ ने अपने ई-पेपर के लिए सबस्क्रिप्शन शुल्क लेना शुरू कर दिया है। इस बारे में ‘मैडिसन मीडिया ओमेगा’ (Madison Media Omega) के सीईओ दिनेश सिंह राठौड़ का कहना है, ‘कंपनियां पहले से ही कई कदम उठा रही हैं। मेरा मानना है कि उन्हें कुछ नए उपाय तलाशने होंगे और मीडिया में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करना होगा।’ कोविड-19 के बाद की दुनिया में चीजें किस प्रकार बदल जाएंगी, इस बारे में राठौड़ का कहना है कि पहले की तुलना में आउट ऑफ होम(Out Of Home), सिनेमा, रेडियो और प्रिंट के मुकाबले टीवी और डिजिटल ज्यादा बेहतर प्रदर्शन करेंगे।
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