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जानिये, आज किस अखबार का पलड़ा रहा भारी

आज के समय में पाठकों को कलात्मक शीर्षक ज्यादा पसंद आते हैं

नीरज नैयर 6 years ago

फ्रंट पेज और शीर्षक किसी भी अखबार की आत्मा कहे जा सकते हैं। यदि फ्रंट पेज या शीर्षक नीरस हों तो इस बात की संभावना बेहद कम हो जाती है कि पाठक अखबार में दिलचस्पी दिखायेगा। यही वजह है कि इन दोनों पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आज वैसे तो राजधानी दिल्ली के प्रमुख अखबारों ने दो जुलाई के अंक वाला ही लेआउट कॉपी किया है, लेकिन शीर्षक के मामले में ‘नवभारत टाइम्स’ का पलड़ा भारी नजर आ रहा है।

अखबार ने राहुल गांधी के इस्तीफे की खबर को लीड बनाया है। अन्य समाचार पत्रों ने जहां सामान्य शीर्षक लगाये हैं, वहीं ‘नवभारत टाइम्स’ ने फिर कलात्मक कार्ड खेला है। अखबार का शीर्षक है ‘इस्तीफा आम कर राहुल बोले कोई और चुन लो’। ‘नवभारत टाइम्स’ के फ्रंट पेज पर आज कोई विज्ञापन नहीं है और संपादकीय टीम ने इसका भरपूर फायदा उठाया है। परंपरागत एंकर स्टोरी देने के बजाय कुछ कलात्मक करने का प्रयास किया गया है। स्पोर्ट्स न्यूज का एक बड़ा पैकेज है, जिसमें तीन खबरों को एक में समेटा गया है। उसके साथ ही पढ़ने लायक तीन छोटी-छोड़ी डबल कॉलम खबरें हैं। टॉप बॉक्स में अखबार ने हौज काजी और क्राइम रिलेटेड अन्य खबरों को रखा है। फर्स्ट हाफ का लगभग ऐसा ही लेआउट कल के अंक में भी था, यदि आज पूरे सात कॉलम टॉप बॉक्स के बजाय कोई और लेआउट बनाया गया होता तो ज्यादा अच्छा रहता।

‘हिन्दुस्तान’ के फ्रंट पेज पर कल की तरह आज भी ज्यादा जगह नहीं है, लेकिन फिर भी पाठकों के लिए खबरों का एक दमदार डोज दिया गया है। अखबार में राहुल गांधी की लीड खबर के साथ ही, कृष्णानंद राय हत्याकांड के फैसले, न्यूनतम वेतन गारंटी और राजद्रोह कानून ख़त्म नहीं होगा सहित लगभग सभी महत्वपूर्ण खबरें हैं। वॉट्सऐप और फेसबुक के ठप होने के समाचार को ‘नवभारत टाइम्स’ के इतर प्रमुखता से लगाया गया है, जो कि सही भी है। क्योंकि सोशल मीडिया से जुड़ी खबरों को पढ़ने वालों की संख्या काफी ज्यादा है। सीमित जगह में भी फ्रंट पेज की टीम ने आंखों को भाने वाला लेआउट पेश किया है। हालांकि, लीड के शीर्षक से शिकायत आज भी है, इसे कलात्मक बनाने का प्रयास नहीं किया गया है। कुछ पत्रकार गंभीर मुद्दों में सीधी-सपाट हेडलाइन रखते हैं, लेकिन आज का जमाना अलग है। आज पाठकों को कलात्मक शीर्षक पसंद आते हैं और ऐसे शीर्षक ध्यान भी जल्दी आकर्षित करते हैं।

‘दैनिक जागरण’ का फ्रंट पेज कल की तरह सामान्य ही नजर आ रहा है। कम से कम लेआउट के मामले में तो ‘दैनिक जागरण’ सभी प्रमुख अखबारों से पीछे है। आज भी अखबार का फ्रंट पेज खाली है, यानी कोई विज्ञापन नहीं है। यदि टीम चाहती तो एक आकर्षक पेज तैयार हो सकता था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। परंपरागत तरीके से ही समाचार लगाये गए। फर्स्ट हाफ में जरूर लीड खबर में राहुल गांधी के फोटो से पेज संतुलित लग रहा है, लेकिन सेकेंड हाफ पूरा सपाट है। शीर्षक, पॉइंटर, सबहेड या फिर सामान्य रंगीन बॉक्स के साथ समाचारों को प्रस्तुत किया गया है, जो बिलकुल भी आंखों को नहीं सुहाता। इस तरह की प्रजेंटेशन पहले चला करती थी, लेकिन अब लेआउट पर भी खबरों जितना ही जोर रहता है। अखबार ने ‘सुप्रीम कोर्ट के फैसले हिंदी में...’ खबर को अच्छा स्थान दिया है। जबकि ‘नवभारत टाइम्स’ ने पर्याप्त जगह होने के बावजूद इस न्यूज को प्राथमिकता नहीं दी, उसे संक्षिप्त में लगाया। यह मांग काफी समय से की जा रही थी, इस लिहाज से खबर को बड़ा स्थान मिलना ही चाहिए था। नीलू रंजन की बाईलाइन स्टोरी ‘अलगाववादियों के चेहरे बेनकाब’ में अच्छी जानकारी है, लेकिन इसमें नया कुछ नहीं है। इसका खुलासा पहले भी कई बार हो चुका है। हां, सरकार ने खरीफ फसलों का समर्थन मूल्य बढ़ाया, ये समाचार अच्छा है और इसे उचित स्थान भी दिया गया है।

दो जुलाई के अंक में सबसे अलग अंदाज में नजर आने वाले ‘अमर उजाला’ ने आज के अंक में कुछ खास कमाल नहीं दिखाया। लेआउट कल जैसा ही है, फ्रंट पेज पर सात कॉलम का टॉप बॉक्स है, जिसमें कैबिनेट के फैसले हैं। बात केवल टॉप बॉक्स की ही नहीं है, इसके बाद नीचे लीड और उसके साथ वाली खबर को भी कल जैसी प्रस्तुति दी गई है। पहली नजर में ऐसा लग रहा है जैसे कल के पेज में ही आज की ख़बरों को लगा दिया गया है। विज्ञापन के ऊपर डॉटेड बॉक्स में कृष्णानंद राय हत्याकांड के फैसले का समाचार है, जबकि लीड बाकी अखबारों की तरह राहुल गांधी ही हैं। लीड के शीर्षक में ज़रूर प्रयोग करने का प्रयास किया गया है, लेकिन वो ‘नवभारत टाइम्स’ जितना कलात्मक नहीं है। संपादकीय टीम ने हाफिज सईद पर शिकंजा कसने की खबर को फ्रंट पेज पर रखा है, मगर सुप्रीम कोर्ट के फैसले हिंदी में वाली खबर नदारद है। हाफिज सईद से जुड़ी न्यूज महत्वपूर्ण है, लेकिन देश के लिहाज से उससे ज्यादा महत्वपूर्ण खबर सुप्रीम कोर्ट की थी। इस मामले में अखबार से चूक हुई है। कुल मिलाकर कहा जाए तो आज का दिन ‘नवभारत टाइम्स’ के नाम रहा। फ्रंट पेज के लेआउट के साथ-साथ शीर्षक भी बाकी अखबारों की तुलना में दमदार हैं।

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