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मैगजीन इंडस्ट्री के सपोर्ट के लिए AIM प्रतिनिधियों ने की अश्विनी वैष्णव से मुलाकात
देशभर के 40 से अधिक प्रकाशकों का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन एसोसिएशन ऑफ इंडियन मैगजीन्स (AIM) के एक प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में सूचना-प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात की।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 10 months ago
देशभर के 40 से अधिक प्रकाशकों का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन एसोसिएशन ऑफ इंडियन मैगजींस (AIM) के एक प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में सूचना-प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात की। इस बैठक में AIM ने मैगजीन इंडस्ट्री को प्रभावित कर रहे कई नियामक और लॉजिस्टिक मुद्दों की ओर सरकार का ध्यान खींचते हुए इसके अस्तित्व पर मंडरा रहे संकट को लेकर चिंता जताई। इससे पहले 17 अप्रैल को सौंपे गए एक मेमोरेंडम में AIM ने नए कानूनों में अस्पष्ट श्रेणियों से लेकर पारंपरिक डिस्ट्रीब्यूशन व्यवस्था में आई रुकावटों तक कई अहम चुनौतियों को चिन्हित किया।
AIM की सबसे बड़ी चिंता 2023 में लागू हुए प्रेस एंड रजिस्ट्रेशन ऑफ पीरियॉडिकल्स (PRP) एक्ट को लेकर है। इस कानून में "न्यूजपेपर" और "पीरियॉडिकल्स" की अलग-अलग श्रेणियां बनाई गई हैं, जबकि 1867 का पुराना प्रेस एंड रजिस्ट्रेशन ऑफ बुक्स (PRB) एक्ट मैगजीन को अखबारों की श्रेणी में शामिल करता था। AIM के अनुसार, इस बदलाव ने मंत्रालयों में भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है कि पत्रिकाओं को पहले जो लाभ दिए जाते थे, वे अब जारी रहेंगे या नहीं।
AIM के डायरेक्टर और Delhi Press के एग्जिक्यूटिव पब्लिशर व Caravan के एडिटर अनंत नाथ ने बैठक के बारे में बताते हुए कहा, “नए प्रेस रजिस्ट्रेशन एक्ट में ‘न्यूजपेपर’ और ‘पीरियॉडिकल्स’ नाम से दो नई परिभाषाएं दी गई हैं, जबकि पुराने PRB एक्ट में केवल न्यूजपेपर की परिभाषा थी और मैगजीन उसी में आती थी। अब जब मैगजीन को पीरियॉडिकल्स में डाला गया है, तो इससे अलग-अलग मंत्रालयों में पॉलिसी को लेकर भ्रम पैदा हो गया है।”
अनंत नाथ ने बताया कि इस बदलाव से रेलवे, डाक विभाग और कस्टम्स जैसे मंत्रालयों में मैगजीन इंडस्ट्री को मिलने वाले लाभ प्रभावित हुए हैं, क्योंकि उनके नियमों में सिर्फ "न्यूजपेपर" को ही लाभ मिलता है। “अब वे कह रहे हैं कि मैगजीन न्यूजपेपर नहीं है, इसलिए हम लाभ नहीं दे सकते।”
AIM ने इस पर स्पष्टता और मौजूदा लाभों को जारी रखने की मांग की है। “हमने आग्रह किया कि या तो एक्ट में बदलाव किया जाए या फिर अन्य मंत्रालयों को इस बारे में नोटिफिकेशन भेजा जाए ताकि पत्रिकाओं को पहले की तरह लाभ मिलते रहें।”
अनंत नाथ के अनुसार, मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस मुद्दे को गंभीरता से लिया और कहा कि यह अनजाने में हुई चूक थी और सरकार या तो एक्ट में संशोधन करेगी या फिर मंत्रालयों को जरूरी निर्देश जारी करेगी।
डिस्ट्रीब्यूशन प्रणाली में आ रही दिक्कतें भी चर्चा का एक प्रमुख विषय रहीं। नाथ ने बताया कि रेलवे स्टेशनों पर पत्रिकाओं की उपलब्धता में भारी गिरावट आई है क्योंकि पारंपरिक रिटेल नेटवर्क लगभग खत्म हो चुका है। इसके समाधान के लिए AIM ने रेलवे के डिजिटल प्लेटफॉर्म्स जैसे IRCTC या प्रीमियम ट्रेनों (शताब्दी, वंदे भारत, राजधानी) में पत्रिकाओं की बिक्री के सुझाव दिए।
अनंत नाथ ने बताया कि मंत्री ने इन सुझावों को गंभीरता से लिया और आगे इन पर काम करने को कहा।
AIM ने IRCTC वेबसाइट पर एक मैगजीन स्टोर विजेट शुरू करने का भी प्रस्ताव रखा, जिससे इसके व्यापक यूजर बेस का फायदा उठाते हुए सब्सक्रिप्शन बढ़ाया जा सके। AIM, ONDC नेटवर्क ऐप्स और IRCTC के जरिए एक डिजिटल मैगजीन स्टोर तैयार करने पर काम कर रहा है, जहां IRCTC को कमीशन भी मिलेगा।
इसके अलावा, AIM ने सरकार के नए डिजिटल प्लेटफॉर्म WAVES पर भी एक मैगजीन स्टोर की संभावनाएं रखीं। अनंत नाथ ने बताया कि मंत्री इस प्रस्ताव पर भी बेहद सकारात्मक थे क्योंकि सरकार WAVES को एंटरटेनमेंट, न्यूज और इनफॉर्मेशन के एक प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित करना चाहती है।
AIM ने सरकारी स्कूलों, कॉलेजों और पुस्तकालयों में पत्रिकाओं के सब्सक्रिप्शन को बढ़ावा देने की भी अपील की। “तमिलनाडु, तेलंगाना और अब कर्नाटक सरकार ने इस दिशा में पहल की है और यह एक बड़ा राजस्व स्रोत बन रहा है,” नाथ ने कहा। उन्होंने बताया कि वे शिक्षा मंत्री को पत्र लिखकर इस उद्देश्य के लिए बजट आवंटन की मांग करेंगे।
अंत में AIM ने लॉजिस्टिक्स और डिस्ट्रीब्यूशन कॉस्ट को लेकर चिंता जताई। “रेलवे की नई पॉलिसी में ऐसा संकेत मिला था कि शायद पत्रिकाओं को छूट वाली दरों पर शिपमेंट की सुविधा बंद कर दी जाए, लेकिन मंत्री ने साफ किया कि ऐसा कोई कदम नहीं उठाया जाएगा।”
इन तमाम चर्चाओं और सुझावों के माध्यम से AIM मैगजीन इंडस्ट्री के लिए नीतिगत स्पष्टता, संस्थागत समर्थन और आधुनिक डिस्ट्रीब्यूशन विकल्पों की निरंतरता सुनिश्चित करने की दिशा में काम कर रहा है।
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