रिलायंस और डिज्नी का बहुप्रतीक्षित विलय अपने आखिरी चरण में है। इस बीच JioStar.com नामक एक नई वेबसाइट भी लाइव हो गई है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो
रिलायंस और डिज्नी का बहुप्रतीक्षित विलय अपने आखिरी चरण में है। इस बीच JioStar.com नामक एक नई वेबसाइट भी लाइव हो गई है। हालांकि, इस वेबसाइट पर फिलहाल सिर्फ "Coming Soon" का संदेश दिख रहा है और कोई अन्य जानकारी उपलब्ध नहीं है। कंपनी की तरफ से भी इसे लेकर फिलहाल आधिकारिक जानकारी शेयर नहीं की गई है।
इस बीच कयास लगाए जा रहे हैं कि दोनों लीडिंग OTT प्लेटफॉर्म 'रिलायंस जियो' और 'डिज्नी+ हॉटस्टार' इस वेबसाइट के जरिए एक्सेस किए जाएंगे। मीडिया सूत्रों के अनुसार, संयुक्त इकाई दो अलग-अलग ऐप्स चलाने की योजना बना रही है- एक प्रीमियम सेवा, जिसे संभवतः 'डिज्नी+ हॉटस्टार' के रूप में जारी किया जाएगा और दूसरा एक फ्रीमियम मॉडल के तहत 'जियोसिनेमा'। इस ड्यूल प्लेटफॉर्म रणनीति का उद्देश्य विभिन्न प्रकार के दर्शकों को अलग-अलग कंटेंट उपलब्ध कराना है, जिससे हाई-एंड और मास-मार्केट दोनों दर्शकों को लक्षित किया जा सके।
एक मीडिया प्लानर ने बताया, "एक ही ऐप में विविध कंटेंट डालने से यूजर्स के लिए इसे नेविगेट करना मुश्किल हो सकता है, जिससे प्लेटफॉर्म छोड़ने वालों की संख्या बढ़ सकती है। कंटेंट को अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर बांटने से यूजर एक्सपीरियंस बेहतर होता है और ऐडवर्टाइजरस को भी सटीक ऑडियंस को टारगेट करने में आसानी होती है।"
स्पोर्ट्स के मामले में, सूत्रों का कहना है कि IPL और FIFA जैसे प्रीमियम इवेंट्स डिज्नी+ हॉटस्टार पर विशेष रूप से उपलब्ध रहेंगे, जबकि जियोसिनेमा पर प्रो कबड्डी लीग (PKL) जैसे रीजनल और मास-अपील वाले स्पोर्ट्स का प्रसारण किया जाएगा। इस रणनीति का उद्देश्य विभिन्न दर्शक वर्गों को लक्षित करते हुए उनकी भागीदारी बढ़ाना और विज्ञापन के अवसरों को बढ़ाना है।
JioStar के संभावित लॉन्च और इसकी रणनीतियों को लेकर दर्शकों और ऐडवर्टाइजर्स में उत्साह है। यह देखना दिलचस्प होगा कि यह नई OTT सर्विस भारतीय दर्शकों की बदलती मांगों को कैसे पूरा करती है।
ऐपल पे ने एक्सिस बैंक के साथ साझेदारी कर भारत में अपनी भुगतान सेवा शुरू की है, शुरुआत में वीजा और मास्टरकार्ड क्रेडिट कार्ड ग्राहकों को सुविधा मिलेगी, रुपे कार्ड पात्र नहीं हैं।
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Samachar4media Bureau
ऐपल (Apple) ने भारत में अपनी पेमेंट सर्विस ऐपल पे (Apple Pay) लॉन्च कर दी है। इसके साथ ही कंपनी ने दुनिया के बड़े डिजिटल पेमेंट मार्केट्स में से एक भारत में अपनी सेवा की शुरुआत की है। इसके लिए एप्पल ने एक्सिस बैंक (Axis Bank) के साथ साझेदारी की है।
फिलहाल ऐपल पे की सुविधा एक्सिस बैंक के वीजा (Visa) और मास्टरकार्ड (Mastercard) नेटवर्क वाले क्रेडिट कार्ड ग्राहकों के लिए उपलब्ध है। भारत के घरेलू रुपे (RuPay) नेटवर्क पर जारी कार्ड अभी इस सेवा के लिए पात्र नहीं हैं।
ऐपल की ऐपल पे और ऐपल वॉलेट की वाइस प्रेसिडेंट जेनिफर बेली (Jennifer Bailey) ने कहा कि भारत की डिजिटल रूप से सक्रिय आबादी कैशलेस भविष्य को अपना रही है और सुरक्षा व प्राइवेसी के उच्च मानकों की उम्मीद करती है। उन्होंने भारत में ऐपल पे लाने को लेकर उत्साह जताया।
कंपनी के मुताबिक, ऐपल पे के जरिए स्टोर, ऑनलाइन और ऐप्स में आसानी से भुगतान किया जा सकता है। इसमें पूरा भुगतान करने, समय के साथ भुगतान करने और रिवॉर्ड्स के इस्तेमाल जैसी सुविधाएं शामिल हैं। कंपनी ने इसे सुरक्षित और प्राइवेट पेमेंट सर्विस बताया है।
दीपक सिंह को ओपनएआई में पार्टनर डायरेक्टर, इंडिया नियुक्त किया गया है। वह भारत में जीटीएम पार्टनरशिप को तैयार करने और विस्तार देने की जिम्मेदारी संभालेंगे।
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Samachar4media Bureau
दीपक सिंह (Deepak Singh) को ओपनएआई (OpenAI) में पार्टनर डायरेक्टर, इंडिया (Partner Director, India) नियुक्त किया गया है। उन्होंने लिंक्डइन (LinkedIn) पोस्ट के जरिए अपनी नई भूमिका की जानकारी साझा की।
दीपक सिंह ने कहा कि वह ओपनएआई के साथ नई शुरुआत को लेकर उत्साहित हैं और भारत में जीटीएम पार्टनरशिप (GTM Partnerships) को तैयार करने और बड़े स्तर पर विस्तार देने में योगदान करेंगे।
दीपक के पास 23 वर्षों से ज्यादा का ईएनटी (ENT) अनुभव है, जिसमें 12 से अधिक वर्षों का अनुभव क्लाउड कंप्यूटिंग और डेटा/एआई (Cloud Computing & Data/AI) इकोसिस्टम में रहा है। उन्होंने इंटेल (Intel), हेवलेट पैकार्ड (Hewlett Packard), वीएमवेयर (VMware), अमेजन वेब सर्विसेज (Amazon Web Services) और गूगल (Google) जैसी प्रमुख कंपनियों के साथ काम किया है।
अपने करियर में दीपक भारत और सार्क क्षेत्र (SAARC Region) में एडब्ल्यूएस (AWS), गूगल क्लाउड (Google Cloud) और वीएमवेयर के शुरुआती विस्तार और बिल्ड-अप फेज (Build-up Phase) का हिस्सा रहे हैं। उन्हें अलग-अलग इंडस्ट्रीज में क्लाउड एडॉप्शन पैटर्न (Cloud Adoption Patterns) का भी अनुभव है।
ओपनएआई से पहले दीपक सिंह पालो ऑल्टो नेटवर्क्स (Palo Alto Networks) में इंडिया और सार्क के लिए सीनियर डायरेक्टर (Sr Director) के तौर पर एंटरप्राइज बिजनेस (Enterprise Business) संभाल रहे थे।
यूट्यूब, बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मेटा के बहु-राज्यीय सेटलमेंट में शामिल होने की योजना नहीं बना रहा है।
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यूट्यूब, बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मेटा के बहु-राज्यीय सेटलमेंट में शामिल होने की योजना नहीं बना रहा है। यूट्यूब के सीईओ नील मोहन ने इसकी वजह बताते हुए कहा कि प्लेटफॉर्म पहले से ही युवा यूजर्स की सुरक्षा के लिए कई कदम उठा चुका है।
मोहन ने सीएनएन से कहा, "हमने यह सुनिश्चित करने के लिए लंबे समय से निवेश किया है कि हमारे प्लेटफॉर्म पर युवा सुरक्षित रहें। यूट्यूब से आप उम्मीद कर सकते हैं कि हम इन चीजों पर लगातार ध्यान देते रहेंगे।"
मोहन ने बुधवार को यूट्यूब के सालाना ‘मेड ऑन यूट्यूब’ कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बातचीत में यह बात कही। इस कार्यक्रम में कंपनी ने क्रिएटर्स और दर्शकों के लिए नए फीचर्स की भी घोषणा की, जिसमें नए AI टूल्स और मैसेजिंग फीचर्स शामिल हैं।
मेटा ने राज्यों के साथ करीब 18 अरब डॉलर के सेटलमेंट पर सहमति जताई है। यह मामला उन आरोपों से जुड़ा है कि मेटा के प्लेटफॉर्म इस तरह डिजाइन किए गए थे, जिससे युवा यूजर्स के मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा। हालांकि, समझौते के तहत मेटा ने किसी गलत काम को स्वीकार नहीं किया है।
इस सेटलमेंट में 13 से 17 साल के यूजर्स के लिए रोजाना इस्तेमाल की समय सीमा, रात के समय इस्तेमाल पर रोक और माता-पिता के लिए ज्यादा मजबूत कंट्रोल जैसे कदम शामिल हैं।
समझौते के तहत मेटा ने कहा है कि वह सेटलमेंट की 70 प्रतिशत रकम का भुगतान करेगा। बाकी 30 प्रतिशत रकम इस बात पर निर्भर करेगी कि यूट्यूब और टिकटॉक इस समझौते में शामिल होते हैं या नहीं और इसी तरह के बदलाव लागू करते हैं या नहीं। राज्यों के अटॉर्नी जनरल ने कहा है कि अगर ये प्लेटफॉर्म समझौते में शामिल नहीं होते हैं तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
नील मोहन ने यूट्यूब के पहले से मौजूद सुरक्षा उपायों का जिक्र किया। इनमें माता-पिता के लिए ऐसा विकल्प भी शामिल है, जिससे वे यह तय कर सकते हैं कि उनके किशोर बच्चे शॉर्ट्स कितनी देर तक देख सकें। उन्होंने यह भी बताया कि यूट्यूब बच्चों की सुरक्षा से जुड़े फीचर्स पर तीसरे पक्ष के विशेषज्ञों के साथ काम करता है।
मोहन ने कहा कि यूट्यूब और मेटा एक-दूसरे से काफी अलग प्लेटफॉर्म भी हैं। उन्होंने यह भी बताया कि कंपनी घरों में टीवी पर यूट्यूब देखने के अनुभव पर ध्यान दे रही है।
टिकटॉक ने मेटा के समझौते में शामिल होने की अपील पर अभी कोई टिप्पणी नहीं की है। वहीं, कैलिफोर्निया के अटॉर्नी जनरल रॉब बोंटा के कार्यालय ने भी मोहन के इस रुख पर टिप्पणी के लिए भेजे गए अनुरोध का तुरंत जवाब नहीं दिया।
मार्च में लॉस एंजिल्स में हुई एक अलग सुनवाई में यूट्यूब और मेटा को भी जिम्मेदार ठहराया गया था। इस मामले में आरोप था कि उनके प्लेटफॉर्म की वजह से लत और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को बढ़ावा मिला। दोनों कंपनियों ने इस फैसले के खिलाफ अपील करने की योजना बनाई है।
यूट्यूब को युवा यूजर्स से जुड़े अलग-अलग मुकदमों का भी सामना करना पड़ा है। इस साल कंपनी ने टिकटॉक और स्नैप के साथ इसी तरह के दावों से जुड़े कुछ व्यक्तिगत मामलों में समझौता किया है। हालांकि, युवा यूजर्स को नुकसान पहुंचने के आरोपों को लेकर इन कंपनियों के खिलाफ लोगों, परिवारों और स्कूल जिलों की ओर से सैकड़ों मुकदमे अभी भी चल रहे हैं।
डिलिजेंट मीडिया कॉरपोरेशन लिमिटेड की 21वीं सालाना आम बैठक 25 सितंबर 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आयोजित हुई। कंपनी ने बताया कि AGM में रखे गए दोनों प्रस्ताव जरूरी बहुमत के साथ मंजूर हो गए हैं।
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Vikas Saxena
डिलिजेंट मीडिया कॉरपोरेशन लिमिटेड की 21वीं सालाना आम बैठक (AGM) 25 सितंबर 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आयोजित हुई। कंपनी ने बताया कि AGM में रखे गए दोनों प्रस्ताव जरूरी बहुमत के साथ मंजूर हो गए हैं।
AGM दोपहर 12:30 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग/अन्य ऑडियो-विजुअल माध्यम से हुई। कंपनी ने शेयरधारकों को प्रस्तावों पर वोट करने के लिए रिमोट ई-वोटिंग और AGM के दौरान ई-वोटिंग की सुविधा दी थी।
18 सितंबर 2026 की रिकॉर्ड डेट के मुताबिक, कंपनी के कुल 84,624 शेयरधारक थे। AGM में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए प्रमोटर और प्रमोटर ग्रुप के 7 और पब्लिक कैटेगरी के 41 शेयरधारकों ने हिस्सा लिया। दस्तावेज के मुताबिक, प्रमोटर और प्रमोटर ग्रुप के 7 शेयरधारकों की संख्या उनके पास मौजूद फोलियो की संख्या के आधार पर निकाली गई है।
पहला प्रस्ताव: वित्तीय नतीजों को मंजूरी
पहले प्रस्ताव में 31 मार्च 2026 को समाप्त वित्त वर्ष के कंपनी के ऑडिट किए गए वार्षिक वित्तीय विवरण और बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स व ऑडिटर्स की रिपोर्ट को अपनाने की मंजूरी मांगी गई थी। इस प्रस्ताव के पक्ष में कुल 7,86,62,491 वोट पड़े, जबकि 604 वोट इसके खिलाफ रहे। कुल वैध वोटों में 99.999 प्रतिशत वोट प्रस्ताव के पक्ष में रहे।
रिमोट ई-वोटिंग में 169 सदस्यों ने प्रस्ताव के पक्ष में 7,86,62,486 वोट डाले, जबकि AGM के दौरान ई-वोटिंग में 3 सदस्यों ने 5 वोट प्रस्ताव के पक्ष में दिए। वहीं, रिमोट ई-वोटिंग में 15 सदस्यों ने 604 वोट प्रस्ताव के खिलाफ डाले।
दूसरा प्रस्ताव: मुकेश जिंदल की दोबारा नियुक्ति
दूसरे प्रस्ताव में मुकेश जिंदल को कंपनी के नॉन-एग्जीक्यूटिव, नॉन-इंडिपेंडेंट डायरेक्टर के तौर पर दोबारा नियुक्त करने की मंजूरी मांगी गई थी। वह रोटेशन के आधार पर रिटायर होने वाले थे और दोबारा नियुक्ति के लिए पात्र होने के चलते उन्होंने अपना नाम पेश किया था। इस प्रस्ताव के पक्ष में कुल 7,86,61,161 वोट पड़े, जबकि 2,006 वोट इसके खिलाफ रहे। कुल वोटों में 99.997 प्रतिशत वोट प्रस्ताव के पक्ष में रहे।
रिमोट ई-वोटिंग में 165 सदस्यों ने 7,86,61,156 वोट प्रस्ताव के पक्ष में डाले, जबकि AGM के दौरान ई-वोटिंग में 3 सदस्यों ने 5 वोट पक्ष में दिए। वहीं, 19 सदस्यों ने 2,006 वोट प्रस्ताव के खिलाफ डाले। स्क्रूटिनाइजर रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों प्रस्ताव शेयरधारकों ने जरूरी बहुमत के साथ मंजूर कर दिए।
मीता पुष्पल संघवी थीं स्क्रूटिनाइजर
कंपनी ने रिमोट ई-वोटिंग और AGM के दौरान हुई ई-वोटिंग की जांच के लिए एमपी संघवी एंड एसोसिएट्स एलएलपी की डिजाइनटेड पार्टनर मीता पुष्पल संघवी को स्क्रूटिनाइजर नियुक्त किया था।
शेयरधारकों के लिए रिमोट ई-वोटिंग 22 सितंबर 2026 को सुबह 9 बजे शुरू हुई और 24 सितंबर 2026 को शाम 5 बजे समाप्त हुई। 18 सितंबर 2026 की कट-ऑफ डेट तक शेयर रखने वाले वे सदस्य, जिन्होंने रिमोट ई-वोटिंग के जरिए वोट नहीं किया था, उन्हें AGM के दौरान और AGM खत्म होने के 15 मिनट बाद तक ई-वोटिंग की सुविधा दी गई थी।
AGM खत्म होने के बाद 25 सितंबर को ई-वोटिंग के नतीजे खोले गए। स्क्रूटिनाइजर ने बताया कि यह प्रक्रिया दो ऐसे गवाहों की मौजूदगी में हुई, जो कंपनी के कर्मचारी नहीं थे।
गूगल ने Google Cloud पर टेक्स्ट को आवाज में बदलने वाले दो नए AI मॉडल पेश किए हैं। इनमें कस्टम आवाज, अलग-अलग भाषाओं और बोलने की गति बदलने की सुविधा है।
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Samachar4media Bureau
गूगल (Google) ने अपने क्लाउड प्लेटफॉर्म (Cloud Platform) पर टेक्स्ट को आवाज में बदलने वाले दो नए एआई मॉडल (AI Models) जेमिनी 3.8 फ्लैश टीटीएस (Gemini 3.8 Flash TTS) और जेमिनी 3.8 फ्लैश-लाइट टीटीएस (Gemini 3.8 Flash-Lite TTS) पेश किए हैं। दोनों मॉडल लिखे हुए टेक्स्ट को आवाज में बदलने के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं।
कंपनी ने दोनों मॉडल को अलग-अलग जरूरतों के हिसाब से तैयार किया है। फ्लैश-लाइट टीटीएस को कम खर्च और तेज काम के लिए बनाया गया है, जबकि फ्लैश टीटीएस बेहतर आवाज की गुणवत्ता पर फोकस करता है।
दोनों मॉडल में 2,000 से ज्यादा पहले से तैयार आवाजों का विकल्प मिलता है। डेवलपर्स अपनी जरूरत के हिसाब से नई आवाज भी बना सकते हैं। इसमें आवाज का टोन (Tone), एक्सेंट (Accent) और बोलने की गति बदली जा सकती है। 30 सेकंड के ऑडियो से भी नई आवाज तैयार की जा सकती है।
गूगल के मुताबिक, फ्लैश टीटीएस 130 भाषाओं में और फ्लैश-लाइट टीटीएस 101 भाषाओं में आवाज तैयार कर सकता है। इसके अलावा, आवाज को जरूरत के अनुसार बदलने की सुविधा भी मिलती है। डेवलपर्स यह तय कर सकते हैं कि कोई लाइन किस तरह और कितनी तेजी से बोली जाए।
गूगल एआई से तैयार की गई आवाज में खास वॉटरमार्क (Watermark) भी जोड़ता है। इसे इंसान सुन नहीं सकते, लेकिन कुछ एआई पहचानने वाले टूल (AI Detection Tools) इसे पहचान सकते हैं। कंपनी ऑडियो के साथ एक रिकॉर्ड भी देती है, जिससे यह पता लगाया जा सकता है कि फाइल कब बनाई गई थी।
जेमिनी 3.8 फ्लैश टीटीएस और जेमिनी 3.8 फ्लैश-लाइट टीटीएस गूगल क्लाउड पर डेवलपर्स के लिए उपलब्ध हैं। इनका इस्तेमाल ऑडियोबुक (Audiobook), वॉयस एजेंट (Voice Agent) और दूसरे ऐप बनाने में किया जा सकता है। गूगल के मुताबिक, दोनों मॉडल की आवाज की गुणवत्ता को अलग-अलग परीक्षणों में जांचा गया है। दोनों मॉडल की कीमत अलग-अलग हो सकती है।
इंडियन ब्रॉडकास्टिंग एंड डिजिटल फाउंडेशन ने पहली बार कॉम्पिटिशन कमीशन ऑफ इंडिया (CCI) की ओर से मार्च 2025 में अपने नई दिल्ली स्थित रजिस्टर्ड ऑफिस में की गई सर्च और सीजर कार्रवाई की जानकारी दी है।
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इंडियन ब्रॉडकास्टिंग एंड डिजिटल फाउंडेशन (IBDF) ने पहली बार कॉम्पिटिशन कमीशन ऑफ इंडिया (CCI) की ओर से मार्च 2025 में अपने नई दिल्ली स्थित रजिस्टर्ड ऑफिस में की गई सर्च और सीजर कार्रवाई की जानकारी दी है। IBDF ने बताया कि यह मामला अभी जांच के स्तर पर है और CCI के डायरेक्टर जनरल (DG-CCI) ने संगठन से अब तक कोई अतिरिक्त जानकारी नहीं मांगी है।
यह जानकारी IBDF के फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स में दी गई है। इसके मुताबिक, CCI की जांच शाखा ने 18 मार्च 2025 को IBDF के रजिस्टर्ड ऑफिस में बिना किसी पूर्व सूचना के सर्च और सीजर की कार्रवाई की थी। इस दौरान IBDF को पता चला कि CCI में यह मामला Suo Motu Case No. 02 of 2024 के तौर पर दर्ज है।
यह खुलासा सर्च कार्रवाई के करीब 18 महीने बाद सामने आया है। मार्च 2025 में हुई इस कार्रवाई के समय IBDF, Advertising Agencies Association of India (AAAI) और Indian Society of Advertisers (ISA) ने सार्वजनिक तौर पर इस सर्च को लेकर कोई टिप्पणी नहीं की थी।
IBDF के मुताबिक, इसके बाद संगठन ने बाहरी वकीलों की नियुक्ति की। इन वकीलों ने CCI के केस रिकॉर्ड की जांच के लिए इंस्पेक्शन रिक्वेस्ट दाखिल की। वकीलों की शुरुआती जांच के आधार पर IBDF ने बताया कि 9 अगस्त 2024 के CCI के एक आदेश में ISA, AAAI, उनके सदस्यों और IBDF के खिलाफ जांच का निर्देश दिया गया था। इसमें Competition Act, 2002 की Section 3 के प्रथम दृष्टया उल्लंघन की बात कही गई थी।
Competition Act की Section 3 ऐसे समझौतों से जुड़ी है, जिनका प्रतिस्पर्धा पर महत्वपूर्ण प्रतिकूल असर पड़ता है या पड़ने की संभावना होती है।
इंडस्ट्री संगठनों की गतिविधियों की भी जांच
CCI की जांच में यह देखा गया कि क्या ISA, AAAI और IBDF की ओर से जारी गाइडलाइंस, एडवाइजरी और व्यावसायिक तौर-तरीकों से प्रतिस्पर्धा-विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है। CCI ने खास तौर पर उन इंडस्ट्री दस्तावेजों और प्रथाओं की जांच की, जो विज्ञापनदाताओं, विज्ञापन एजेंसियों और ब्रॉडकास्टर्स के बीच संबंधों से जुड़ी थीं।
इसके बाद CCI ने कई बड़े विज्ञापन और मीडिया एजेंसियों के दफ्तरों के साथ-साथ इन इंडस्ट्री संगठनों के दफ्तरों में भी सर्च की कार्रवाई की।
CCI की ओर से यह भी आरोप लगाया गया कि उसे कमीशन और अन्य व्यावसायिक शर्तों को लेकर समन्वय के शुरुआती सबूत मिले हैं। हालांकि, ये सभी बातें अभी जांच का हिस्सा हैं और इन्हें किसी अंतिम तौर पर जिम्मेदारी तय करने का निष्कर्ष नहीं माना गया है।
समन को लेकर अदालत में मामला
IBDF ने अपने खुलासे में CCI की जांच से जुड़ी कानूनी कार्यवाही का भी जिक्र किया है। संगठन ने बताया कि एक पक्ष ने दिल्ली हाई कोर्ट में संवैधानिक रिट याचिका दायर की थी। इसके बाद कोर्ट ने समन पर रोक लगा दी थी।
एक दूसरी संवैधानिक रिट याचिका में सुप्रीम कोर्ट ने भी समन पर रोक लगा दी है। यह रोक तब तक जारी रहेगी, जब तक दिल्ली हाई कोर्ट संबंधित मामले पर फैसला नहीं करता।
IBDF ने यह भी बताया कि उसके कुछ कर्मचारियों को DG-CCI के सामने पेश होने के लिए समन मिले थे। संगठन ने इन समन को टालने की मांग करते हुए कहा कि हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में चल रही संबंधित कार्यवाही पूरी होने तक समन पर रोक रखी जाए। संगठन ने बताया कि वह फिलहाल DG-CCI के जवाब का इंतजार कर रहा है।
IBDF ने साफ किया कि मामला अभी जांच के स्तर पर है और DG-CCI ने संगठन से आगे कोई अतिरिक्त जानकारी नहीं मांगी है। इसी वजह से IBDF ने कहा कि इस मामले को लेकर अपने अलग फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स में किसी तरह के बदलाव की जरूरत नहीं समझी गई।
IBDF का यह खुलासा अब तक इस मामले में संगठन की भूमिका को लेकर सबसे स्पष्ट जानकारी देता है। इससे यह भी साफ होता है कि इंडस्ट्री संगठनों के खिलाफ CCI की कार्रवाई अभी किसी अंतिम निष्कर्ष तक नहीं पहुंची है।
फिलहाल CCI की जांच जारी है और DG-CCI ने मामले में शामिल संस्थाओं के खिलाफ अपनी कार्यवाही पूरी नहीं की है। प्रतिस्पर्धा कानून का कोई उल्लंघन हुआ है या नहीं, इस पर अंतिम फैसला कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद CCI की ओर से किया जाएगा।
डिजिटल विज्ञापन एजेंसी ब्लिंक डिजिटल ने मेटा के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में मुकदमा दायर कर चार बिजनेस अकाउंट बहाल करने और 1,000 करोड़ से ज्यादा हर्जाने की मांग की है।
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डिजिटल एडवरटाइजिंग एजेंसी ब्लिंक डिजिटल इंडिया (Blink Digital India) ने मेटा (Meta) के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) का रुख किया है। एजेंसी ने अपने बिजनेस अकाउंट्स और कॉरपोरेट पेज बंद किए जाने को चुनौती देते हुए 1,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के हर्जाने की मांग की है।
ब्लिंक डिजिटल ने फेसबुक इंडिया ऑनलाइन सर्विसेज (Facebook India Online Services) और मेटा प्लेटफॉर्म्स (Meta Platforms) के खिलाफ कमर्शियल सूट (Commercial Suit) दायर किया है। इसमें चार बिजनेस मैनेजर (Business Manager) अकाउंट्स को बंद किए जाने को चुनौती देते हुए उन्हें बहाल करने की मांग की गई है।
मेटा का बिजनेस मैनेजर प्लेटफॉर्म विज्ञापन एजेंसियों को फेसबुक (Facebook) और इंस्टाग्राम (Instagram) पर कई क्लाइंट अकाउंट्स, एडवरटाइजिंग कैंपेन और बिजनेस पेज मैनेज करने की सुविधा देता है। इन अकाउंट्स के बंद होने से एजेंसियों के लिए कैंपेन मैनेजमेंट और क्लाइंट्स के एडवरटाइजिंग एसेट्स तक पहुंच प्रभावित हो सकती है।
यह मामला 17 सितंबर को जस्टिस संदीप वी. मार्ने (Justice Sandeep V. Marne) के सामने आया। मेटा की ओर से पेश वकील ने ब्लिंक डिजिटल की अंतरिम अर्जी (Interim Application) का विरोध करने के लिए हलफनामा दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा।
कोर्ट ने यह अनुरोध स्वीकार करते हुए मेटा का जवाब मिलने के बाद ब्लिंक डिजिटल को अपना जवाब दाखिल करने के लिए एक अतिरिक्त सप्ताह दिया। अंतरिम अर्जी पर अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को शाम 4:30 बजे तय की गई है।
सुनवाई के दौरान मेटा प्लेटफॉर्म्स की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता जनक द्वारकादास (Janak Dwarkadas) ने कहा कि अगली सुनवाई तक कंपनी कानून के मुताबिक ब्लिंक डिजिटल का डेटा सुरक्षित रखेगी। इस आश्वासन को 17 सितंबर के कोर्ट ऑर्डर में दर्ज किया गया है।
कोर्ट ने अभी तक अकाउंट बंद किए जाने की वैधता या ब्लिंक डिजिटल के हर्जाने के दावे पर कोई फैसला नहीं दिया है। अगली सुनवाई में ब्लिंक डिजिटल की अंतरिम राहत की अर्जी पर विचार होगा, जबकि हर्जाने से जुड़ा मुख्य कमर्शियल सूट बॉम्बे हाईकोर्ट में लंबित है।
फेस्टिव सीजन में ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर नकली, तस्करी और घटिया उत्पादों की बिक्री रोकने के लिए सीबीआईसी संदिग्ध विक्रेताओं और सामान की जांच कर रही है।
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Samachar4media Bureau
फेस्टिव सीजन में बढ़ती ऑनलाइन शॉपिंग के बीच सरकार ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म (Ecommerce Platforms) पर नकली, तस्करी और घटिया सामान की बिक्री रोकने के लिए निगरानी बढ़ा दी है। इकनॉमिक टाइम्स (Economic Times) की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (Central Board of Indirect Taxes and Customs) यानी सीबीआईसी (CBIC) बड़े ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और दूसरी एजेंसियों के साथ मिलकर संदिग्ध विक्रेताओं और उत्पादों की पहचान कर रहा है।
जांच में खासतौर पर ऐसे आयातित सामान पर नजर है, जो असामान्य रूप से कम कीमत पर बेचे जा रहे हैं। इसके अलावा तस्करी के जरिए देश में आने वाले संदिग्ध उत्पादों और जरूरी सर्टिफिकेशन (Certification) या सही घोषणा के बिना बेचे जा रहे सामान की भी जांच की जा रही है।
इस निगरानी में इलेक्ट्रॉनिक सामान, घड़ियां, परफ्यूम और कॉस्मेटिक्स समेत कई कंज्यूमर प्रोडक्ट्स (Consumer Products) शामिल हैं। अधिकारी ऐसे उत्पादों की भी जांच कर रहे हैं, जिन पर जरूरी कंट्री-ऑफ-ओरिजिन (Country of Origin) की जानकारी मौजूद नहीं है।
फेस्टिव सीजन में ऑनलाइन शॉपिंग बढ़ने से डिजिटल मार्केटप्लेस और लास्ट-माइल डिलीवरी नेटवर्क (Last-Mile Delivery Network) के जरिए बड़ी मात्रा में सामान पहुंचता है। इसी वजह से सरकार का फोकस ऑनलाइन सप्लाई चेन (Online Supply Chain) में उत्पादों और विक्रेताओं की जांच पर बढ़ गया है।
सरकार तेजी से बढ़ रहे डार्क स्टोर्स (Dark Stores) के नेटवर्क की भी जांच कर रही है। क्विक-कॉमर्स और ऑनलाइन डिलीवरी में इस्तेमाल होने वाले इन हाइपरलोकल फुलफिलमेंट सेंटर (Hyperlocal Fulfilment Centres) की संख्या तेजी से बढ़ी है। इनका फैला हुआ नेटवर्क निगरानी को चुनौतीपूर्ण बना सकता है। अधिकारियों की नजर संभावित टर्नओवर और रेवेन्यू (Revenue) की अंडर-रिपोर्टिंग से जुड़ी चिंताओं पर भी है।
रिसर्च कंसल्टेंसी इन्फिसम (Infisum) के मुताबिक, भारत का ई-कॉमर्स मार्केट 2024 के 125 अरब डॉलर से बढ़कर 2030 तक करीब 345 अरब डॉलर हो सकता है। वहीं, डार्क स्टोर्स का नेटवर्क 2025 के 2,525 आउटलेट्स से बढ़कर 2030 तक करीब 7,500 आउटलेट्स तक पहुंचने का अनुमान है।
क्विंट डिजिटल लिमिटेड (Quint Digital Limited) ने बताया है कि उसे अपने नए शेयर और वारंट को शेयर बाजार में सूचीबद्ध कराने और उनमें कारोबार शुरू करने के लिए BSE से मंजूरी मिल गई है।
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Vikas Saxena
क्विंट डिजिटल लिमिटेड (Quint Digital Limited) ने बताया है कि उसे अपने नए शेयर और वारंट्स को शेयर बाजार में सूचीबद्ध कराने और उनमें कारोबार शुरू करने के लिए बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) से मंजूरी मिल गई है। कंपनी को यह मंजूरी 16 सितंबर 2026 को मिली है।
कंपनी के मुताबिक, इसके तहत 82,61,401 आंशिक रूप से चुकता (Partly Paid-Up) 10 प्रतिशत गैर-संचयी, गैर-भागीदारी और अनिवार्य रूप से परिवर्तनीय प्राथमिकता शेयर (Non-Cumulative Non-Participating Compulsorily Convertible Preference Shares) जारी किए गए हैं।
इन शेयरों का अंकित मूल्य 100 रुपये है। इसके साथ ही 82,61,401 आंशिक रूप से चुकता अलग किए जा सकने वाले वारंट्स (Partly Paid-Up Detachable Warrants) भी जारी किए गए हैं, जिनका अंकित मूल्य 10 रुपये है। इन दोनों में कारोबार शुक्रवार, 18 सितंबर 2026 से शुरू होगा।
कंपनी ने बताया कि यह मंजूरी इस मामले में पहले दी गई जानकारियों के आगे की कड़ी है। इससे पहले कंपनी ने 22 मई, 19 अगस्त, 21 अगस्त, 28 अगस्त, 11 सितंबर और 16 सितंबर 2026 को इस संबंध में शेयर बाजार को जानकारी दी थी।
BSE की ओर से जारी सूचना के मुताबिक, Quint Digital के 82,61,401 प्राथमिकता शेयर अधिकार के आधार पर जारी किए गए हैं। इनका अंकित मूल्य 100 रुपये प्रति शेयर है, जबकि अभी प्रत्येक शेयर पर 50 रुपये चुकाए गए हैं। इन शेयरों का कोड 710058 है और इन्हें QDLCCPS पहचान के साथ कारोबार के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। इनका आवंटन 11 सितंबर 2026 को किया गया था।
इसके अलावा 82,61,401 वारंट भी अधिकार के आधार पर जारी किए गए हैं। प्रत्येक वारंट का अंकित मूल्य 10 रुपये है, जिसमें से अभी 5 रुपये चुकाए गए हैं। इन वारंट का कोड 961921 है और इन्हें QDLDW पहचान के साथ कारोबार के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। इनका आवंटन भी 11 सितंबर 2026 को किया गया था।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सेमीकॉन 2.0 के तहत भारत में चिप डिजाइन से जुड़ी कम से कम 200 स्टार्टअप और कंपनियों को जोड़ने का लक्ष्य बताया है।
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Samachar4media Bureau
इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री (Electronics and IT Minister) अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishnaw) ने कहा है कि सरकार सेमीकॉन 2.0 (Semicon 2.0) के तहत भारत में सेमीकंडक्टर चिप डिजाइन (Semiconductor Chip Design) से जुड़ी कम से कम 200 स्टार्टअप और कंपनियों को जोड़ने का लक्ष्य लेकर चल रही है। यह सेमीकॉन 1.0 (Semicon 1.0) में शामिल 105 से ज्यादा स्टार्टअप के आधार पर अगला कदम है।
सेमीकॉन इंडिया समिट 2026 (Semicon India Summit 2026) में वैष्णव ने बताया कि सेमीकॉन 1.0 में शामिल करीब 20 स्टार्टअप को लगभग 800 करोड़ रुपये की वेंचर कैपिटल फंडिंग (Venture Capital Funding) मिली थी। उन्होंने कहा कि इस बार सरकार का लक्ष्य पहले से काफी बड़ा है और भारत में चिप डिजाइन करने वाली कम से कम 200 स्टार्टअप और कंपनियों को इससे जोड़ने की योजना है।
सेमीकॉन 2.0 के छह पिलर (Pillars) में चिप डिजाइन पहला होगा। इसके अलावा मशीन और मटेरियल, सेमीकंडक्टर फैब, एडवांस्ड पैकेजिंग (Advanced Packaging), रिसर्च एंड डेवलपमेंट (Research and Development) और टैलेंट डेवलपमेंट (Talent Development) पर भी फोकस किया जाएगा।
मशीन और मटेरियल से जुड़े पिलर में कैपिटल इक्विपमेंट (Capital Equipment), मेंटेनेंस फैसिलिटी, केमिकल और गैस समेत पूरे सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम (Semiconductor Ecosystem) को शामिल किया जाएगा। वैष्णव ने बताया कि सम्मेलन में 28 से ज्यादा देशों की भागीदारी है।
तीसरे पिलर के तहत डिस्प्ले, मेमोरी, सिलिकॉन, कंपाउंड और लॉजिक फैब (Logic Fab) का विस्तार किया जाएगा। चौथे पिलर में एडवांस्ड पैकेजिंग पर जोर रहेगा। वैष्णव ने कहा कि ओडिशा में 3डी पैकेजिंग यूनिट (3D Packaging Unit) भी स्थापित हो रही है।
पांचवें पिलर के तहत इंडस्ट्री-लेड आरएंडडी (Industry-led R&D) पर फोकस होगा। सरकार अकादमिक संस्थानों और इंडस्ट्री को साथ लाकर एप्लाइड रिसर्च प्रोजेक्ट्स (Applied Research Projects) को बढ़ावा देगी।
टैलेंट डेवलपमेंट के तहत सेमीकॉन 1.0 में 10 साल में 85 हजार डिजाइन इंजीनियरों को ट्रेनिंग देने का लक्ष्य रखा गया था। वैष्णव के मुताबिक, चार साल में ही 70 हजार डिजाइन इंजीनियरों को प्रशिक्षित किया जा चुका है।
उन्होंने बताया कि देश की 400 से ज्यादा यूनिवर्सिटीज में कैडेंस (Cadence), सीमेंस (Siemens) और सिनॉप्सिस (Synopsys) के ईडीए टूल्स (EDA Tools) उपलब्ध हैं। इससे छात्र चिप डिजाइन करने और मोहाली स्थित सेमीकंडक्टर लेबोरेटरी (Semiconductor Laboratory) के जरिए उसे टेप-आउट (Tape-out) प्रक्रिया तक ले जाने में सक्षम हो रहे हैं।