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इन्फ्लुएंसर्स के लिए रेटिंग व डिस्क्लेमर अनिवार्य करने की तैयारी में MIB: रिपोर्ट
भारतीय सरकार 50 लाख से अधिक फॉलोअर्स वाले सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के लिए एक आचार संहिता पेश करने की तैयारी में है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 11 months ago
भारतीय सरकार 50 लाख से अधिक फॉलोअर्स वाले सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के लिए एक आचार संहिता पेश करने की तैयारी में है। सूचना-प्रसारण मंत्रालय द्वारा संचालित इस पहल का उद्देश्य ऑनलाइन अश्लील और भद्दे कंटेंट पर अंकुश लगाना है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रस्तावित दिशा-निर्देशों के तहत इन्फ्लुएंसर्स को अपनी सामग्री की रेटिंग देनी पड़ सकती है और साथ ही डिस्क्लेमर भी शामिल करना पड़ सकता है।
यह कदम उस विवाद के बाद आया है जिसमें पॉडकास्टर रणवीर अल्लाहबादिया शामिल थे। उनके ‘इंडियाज गॉट लैटेंट’ शो पर दिए गए अनुचित बयान की व्यापक निंदा हुई, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने भी प्रतिक्रिया दी। हालांकि कोर्ट ने अल्लाहबादिया को गिरफ्तारी से सुरक्षा दी, लेकिन यह भी कहा, "उनके दिमाग में जो गंदगी थी, वह इस कार्यक्रम के जरिए उगली गई है।"
ऐसे मामलों को देखते हुए, केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कड़े नियमों की जरूरत पर जोर दिया। लोकसभा में बोलते हुए उन्होंने कहा, "सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अश्लील सामग्री पर रोक लगाने के लिए मौजूदा कानूनों को और कड़ा करने की जरूरत है।" वैष्णव ने डिजिटल युग में पारंपरिक संपादकीय जांच की अनुपस्थिति की ओर इशारा किया, जिससे अनियंत्रित और अक्सर भद्दी सामग्री सामने आ रही है। उन्होंने संसदीय स्थायी समिति से इस मुद्दे को प्राथमिकता देने और मजबूत कानूनों के लिए आम सहमति बनाने का आग्रह किया।
यह विकास उस समय हो रहा है जब कंटेंट क्रिएटर्स पिछले साल प्रस्तावित मसौदा कानून को लेकर चिंतित हैं। यह कानून प्रसारण सेवाओं को विनियमित करने का प्रयास करता है, जिससे केंद्र सरकार को प्रसारण नेटवर्क का बिना पूर्व सूचना निरीक्षण करने और उल्लंघन की आशंका होने पर उपकरण जब्त करने का अधिकार मिल सकता है। आलोचकों का कहना है कि ऐसे उपाय सेंसरशिप को बढ़ावा दे सकते हैं, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को बाधित कर सकते हैं और डिजिटल मीडिया सामग्री पर सरकारी नियंत्रण को काफी हद तक बढ़ा सकते हैं।
डिजिटल परिदृश्य के विकास के साथ, भारतीय सरकार के सामने यह चुनौती है कि वह नियमन और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाए रखे, ताकि सामग्री समाजिक मानकों के अनुरूप रहे, लेकिन व्यक्तिगत अधिकारों का उल्लंघन न हो।
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