Blink Digital विवाद मामले में अमेरिका की अदालत में सुनवाई चाहता है Meta

सोशल मीडिया कंपनी मेटा और डिजिटल एजेंसी Blink Digital India Pvt Ltd के बीच विवाद अब केवल बंद किए गए खातों को दोबारा शुरू करने तक सीमित नहीं रह गया है।

Last Modified:
Wednesday, 14 October, 2026
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सोशल मीडिया कंपनी Meta और डिजिटल एजेंसी Blink Digital India Pvt Ltd के बीच विवाद अब केवल बंद किए गए खातों को दोबारा शुरू करने तक सीमित नहीं रह गया है। मामला इस बात पर भी केंद्रित हो गया है कि इस विवाद की सुनवाई भारत की अदालत में होनी चाहिए या अमेरिका की अदालत में। Meta ने बॉम्बे हाई कोर्ट में दलील दी है कि कंपनी के साथ हुए समझौतों के मुताबिक, इस तरह के व्यावसायिक विवादों की सुनवाई कैलिफोर्निया की अदालतों में होनी चाहिए।

न्यायमूर्ति संदीप वी. मार्ने की अदालत में मंगलवार को इस मामले की सुनवाई हुई। अदालत में सुनवाई 14 अक्टूबर को फिर से होगी। Blink Digital ने Meta Platforms Inc. और Facebook India Online Services Pvt Ltd से अपने चार बंद किए गए Business Manager खातों को दोबारा शुरू करने और नुकसान के बदले कुल 1,158 करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मांग की है।

Meta ने अलग-अलग समझौतों का दिया हवाला

Meta Platforms Inc. और Facebook India की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि Blink Digital के दावों को उन समझौतों के आधार पर देखा जाना चाहिए, जिनके तहत कंपनी Meta के उत्पादों और विज्ञापन सेवाओं का इस्तेमाल करती थी।

वकील ने चार तरह के समझौतों का जिक्र किया। इनमें सेवा की शर्तें (Terms of Service), व्यावसायिक शर्तें (Commercial Terms), खुद विज्ञापन चलाने से जुड़ी शर्तें (Self-Serve Advertising Terms) और अलग-अलग देशों में लागू विज्ञापन संबंधी शर्तें शामिल हैं।

Meta की ओर से कहा गया कि इन सभी समझौतों को एक साथ पढ़कर ही यह तय किया जा सकता है कि संबंधित कंपनियों की क्या जिम्मेदारियां हैं। कंपनी ने यह भी दलील दी कि Blink Digital ने अपनी याचिका में प्रतिवादियों का जिक्र सामूहिक रूप से किया है और उनके अलग-अलग संविदात्मक दायित्वों को पर्याप्त रूप से स्पष्ट नहीं किया है।

Meta ने यह भी कहा कि Facebook India, सेवा की मुख्य शर्तों और व्यावसायिक शर्तों में उस तरह पक्षकार नहीं थी, जैसा Blink Digital ने अपनी याचिका में बताया है। Meta के मुताबिक, केवल भारतीय इकाई के खिलाफ आदेश देने से खाते बहाल करने का उद्देश्य पूरा नहीं होगा, क्योंकि संबंधित मंचों और विज्ञापन व्यवस्था का संचालन एवं नियंत्रण अमेरिका स्थित Meta Platforms Inc. के पास है।

ये Meta की ओर से अदालत में रखी गई दलीलें हैं। इन्हें अदालत का फैसला या स्थापित तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।

खातों को बंद करने के अधिकार पर भी दलील

सुनवाई के दौरान Meta के वकील ने कंपनी की सेवा संबंधी शर्तों का हवाला दिया। इन शर्तों के तहत कुछ परिस्थितियों में सामग्री हटाने, सुविधाओं पर रोक लगाने, खातों को निलंबित या बंद करने और स्थायी रूप से पहुंच समाप्त करने का अधिकार दिया गया है।

Meta की ओर से कहा गया कि यदि कंपनी को लगता है कि किसी यूजर ने उसकी शर्तों या नीतियों का गंभीर, स्पष्ट या बार-बार उल्लंघन किया है, तो वह इन प्रावधानों के तहत कार्रवाई कर सकती है। वकील ने इन शर्तों का हवाला Blink Digital के चार Business Manager खातों को बहाल करने की मांग के जवाब में दिया।

खुद विज्ञापन चलाने से जुड़ी शर्तों का भी जिक्र किया गया। इनके तहत Meta विज्ञापनों को अस्वीकार या हटा सकती है। नियमों का पालन नहीं होने की स्थिति में विज्ञापन रद्द करने, खाते निलंबित करने या उन्हें बंद करने जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं, बशर्ते लागू कानून का पालन किया जाए।

इस सुनवाई में Meta की दलीलों का मुख्य जोर इन अधिकारों के संविदात्मक आधार और विवाद की सुनवाई के उचित मंच पर था। सुनवाई से जुड़ी उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, कथित नीतिगत उल्लंघनों के गुण-दोष पर मुख्य रूप से बहस नहीं हुई।

Meta क्यों चाहता है कैलिफोर्निया की अदालत में सुनवाई?

Meta के मामले का एक प्रमुख आधार यह है कि Blink Digital ने व्यावसायिक उद्देश्य से उसके उत्पादों का इस्तेमाल किया और उनसे जुड़ी शर्तों को स्वीकार किया था। कंपनी के वकील ने दलील दी कि Blink को विवाद निपटाने के लिए उन्हीं शर्तों का पालन करना चाहिए, जिन पर उसने सहमति दी थी।

वकील ने समझौतों के उन प्रावधानों का हवाला दिया, जिनके मुताबिक गैर-उपभोक्ता यानी व्यावसायिक विवादों की सुनवाई अमेरिका की कैलिफोर्निया स्थित नॉर्दर्न डिस्ट्रिक्ट की संघीय अदालत या सैन मेटियो काउंटी की राज्य अदालत में होनी चाहिए। संबंधित दावों पर कैलिफोर्निया का कानून लागू होने की बात भी कही गई।

Meta ने अमेरिका के बाहर स्थित कारोबारी यूजर्स के लिए बनाई गई व्यावसायिक शर्तों का भी हवाला दिया। कंपनी की दलील थी कि Blink Digital मंच का इस्तेमाल करने के लिए तय शर्तों को स्वीकार करने के बाद अब विवाद की सुनवाई के लिए तय अदालतों की व्यवस्था से अलग नहीं हो सकती।

सुनवाई में Meta Platforms Ireland Ltd. से जुड़े प्रावधानों पर भी चर्चा हुई। यह कंपनी खुद विज्ञापन चलाने से संबंधित शर्तों में शामिल है। Meta के वकील ने दलील दी कि Meta Platforms Inc. और Meta Platforms Ireland Ltd. से जुड़े व्यावसायिक दावों के लिए भी कैलिफोर्निया की अदालतों का प्रावधान लागू होता है।

वकील ने यह भी कहा कि यदि व्यावसायिक शर्तों और सेवा की सामान्य शर्तों में कोई अंतर हो, तो व्यावसायिक शर्तों को प्राथमिकता मिलेगी। हालांकि, उनके मुताबिक, विवाद की सुनवाई के लिए तय अदालतों के मामले में दोनों समझौतों के बीच कोई टकराव नहीं है।

यह मुद्दा इसलिए भी अहम है, क्योंकि Blink Digital अपने खाते बहाल करने की मांग कर रही है और Meta का कहना है कि ऐसा आदेश अमेरिका स्थित Meta Platforms Inc. के खिलाफ ही दिया जाना चाहिए।

Blink Digital ने खाते बहाल करने और 1,158 करोड़ रुपये मुआवजे की मांग की

Blink Digital ने अपने Business Manager खातों और Meta के मंचों पर उनसे जुड़े कंपनी पेज बंद किए जाने के बाद बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख किया था।

कंपनी ने अदालत से यह घोषित करने की मांग की है कि उसके खातों को बंद करना, हटाना या उन पर पाबंदी लगाना मनमाना, अनुचित, जरूरत से ज्यादा सख्त, गैरकानूनी और Meta की प्रकाशित शर्तों व नीतियों के खिलाफ था।

इसके अलावा, Blink Digital ने खुद को Meta के प्रबंधित एजेंसी साझेदार (Managed Agency Partner) के रूप में मान्यता देने और अपने खातों व पेजों के कामकाज में दखल रोकने के लिए स्थायी निषेधाज्ञा जारी करने की भी मांग की है। दूसरी ओर, Meta का कहना है कि Facebook India संबंधित खातों का संचालन या प्रबंधन नहीं करती थी और इन सेवाओं पर नियंत्रण अमेरिका स्थित Meta Platforms Inc. का था।

इस तरह विवाद में तीन प्रमुख सवाल सामने आए हैं। पहला, क्या Meta को अपनी शर्तों के तहत खाते बंद करने का अधिकार था? दूसरा, खातों को बहाल करने का आदेश किस कंपनी के खिलाफ दिया जा सकता है? और तीसरा, इस मामले की सुनवाई भारत में होनी

 

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YouTube पर अब सवाल पूछकर खोज सकेंगे वीडियो, मोबाइल पर आया नया AI फीचर

यूट्यूब पर अब वीडियो खोजने का तरीका बदलने जा रहा है। कंपनी ने अमेरिका में मोबाइल इस्तेमाल करने वाले यूजर्स के लिए अपने नए AI फीचर ‘Ask YouTube’ की शुरुआत की है।

Last Modified:
Wednesday, 14 October, 2026
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यूट्यूब पर अब वीडियो खोजने का तरीका बदलने जा रहा है। कंपनी ने अमेरिका में मोबाइल इस्तेमाल करने वाले यूजर्स के लिए अपने नए AI फीचर ‘Ask YouTube’ की शुरुआत की है। इसकी मदद से यूजर्स सामान्य भाषा में सवाल पूछकर अपनी पसंद के वीडियो खोज सकेंगे। इसके लिए उन्हें पहले की तरह सिर्फ कुछ शब्द लिखकर सर्च करने और नतीजों में से सही वीडियो चुनने पर निर्भर नहीं रहना होगा।

इस फीचर के जरिए यूजर्स यूट्यूब के सर्च बार में दिए गए ‘Ask’ विकल्प पर जाकर अपना सवाल लिख सकते हैं। इसके बाद उन्हें सवाल से जुड़े वीडियो, क्लिप, शॉर्ट्स और जरूरी जानकारी एक साथ दिखाई जाएगी। यह सुविधा फिलहाल अमेरिका में मोबाइल पर शुरू की गई है। इससे पहले यह वेब और टीवी डिवाइस पर उपलब्ध थी।

सवाल पूछकर खोज सकेंगे वीडियो

यूट्यूब के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नील मोहन ने सोशल मीडिया मंच X पर इस फीचर के मोबाइल विस्तार की जानकारी दी। उन्होंने कुछ उदाहरण भी साझा किए, जिनसे पता चलता है कि यूजर्स इसका इस्तेमाल किस तरह कर सकते हैं।

मसलन, कोई यूजर पूछ सकता है कि पतझड़ के मौसम में सबसे खूबसूरत रंग दिखाने वाले राष्ट्रीय उद्यान कौन-से हैं। इसी तरह, सैन फ्रांसिस्को से लॉस एंजिल्स तक तीन दिन की सड़क यात्रा की योजना बनाने या घर पर खुद अपने बालों की फ्रिंज काटने का तरीका जानने के लिए भी सवाल पूछा जा सकता है।

इस फीचर का मकसद वीडियो खोजने की प्रक्रिया को ज्यादा आसान और बातचीत जैसा बनाना है। यूजर्स पहले एक सामान्य सवाल पूछ सकते हैं और फिर उससे जुड़े अगले सवालों के जरिए अपनी जरूरत के मुताबिक जानकारी हासिल कर सकते हैं।

एक ही बातचीत में मिलेंगे वीडियो और जानकारी

‘Ask YouTube’ की मदद से किसी विषय पर जानकारी पाने के लिए हर बार नई सर्च शुरू करने की जरूरत कम हो सकती है। यह फीचर सवाल से जुड़े वीडियो, उनके छोटे हिस्से यानी क्लिप, शॉर्ट्स और लिखित जानकारी को एक साथ पेश करता है।

उदाहरण के लिए, अगर कोई यूजर सड़क यात्रा की योजना बना रहा है, तो वह पहले रास्ते से जुड़े सुझाव मांग सकता है। इसके बाद वह अपनी पसंद और जरूरत के हिसाब से आगे के सवाल पूछकर विकल्पों को सीमित कर सकता है। इस तरह यूजर सामान्य जानकारी से आगे बढ़कर अपने काम की ज्यादा खास जानकारी तक पहुंच सकता है।

अप्रैल 2026 में शुरू हुआ था परीक्षण

यूट्यूब ने इस फीचर का परीक्षण अप्रैल 2026 में शुरू किया था। इसके बाद कंपनी ने Google I/O कार्यक्रम में इसकी जानकारी दी। जुलाई तक यह अमेरिका में डेस्कटॉप पर उपलब्ध हो गया था, जबकि अगस्त में इसे टीवी डिवाइस तक भी बढ़ाया गया। अब मोबाइल पर इसकी शुरुआत के साथ फोन इस्तेमाल करने वाले यूजर्स भी इसका फायदा उठा सकेंगे।

कंपनी ने यह भी बताया है कि वह बातचीत पर आधारित AI सुविधाओं को सीधे शॉर्ट्स और लाइव स्ट्रीम के वीडियो देखने वाले पेजों पर लाने की योजना बना रही है। इससे यूजर्स वीडियो देखते समय ही उससे जुड़े सवाल पूछ सकेंगे और अतिरिक्त जानकारी हासिल कर सकेंगे।

वीडियो बनाने वालों के लिए भी अहम बदलाव

‘Ask YouTube’ का असर वीडियो बनाने वालों यानी क्रिएटर्स के लिए भी अहम हो सकता है। जब यूजर्स पूरे सवाल लिखकर वीडियो खोजेंगे, तो मंच को उनकी जरूरत और वीडियो की विषयवस्तु के बीच संबंध समझने में मदद मिल सकती है।

ऐसे में वीडियो का साफ और जानकारी देने वाला शीर्षक, विषय के अनुसार व्यवस्थित सामग्री और अलग-अलग हिस्सों के लिए बनाए गए चैप्टर उपयोगी हो सकते हैं। हालांकि, इस फीचर की शुरुआत का मतलब यह नहीं है कि इन चीजों को अपनाने से किसी वीडियो की सर्च रैंकिंग अपने आप बेहतर हो जाएगी।

Google ने भारत में क्रिएटर्स के लिए भी शुरू की सुविधा

यूट्यूब के इस कदम के बीच गूगल ने भारत में योग्य क्रिएटर्स और प्रकाशकों के लिए ‘Search Profiles’ की सुविधा भी शुरू की है। इसके जरिए वे यूट्यूब, इंस्टाग्राम, X और टिकटॉक जैसे मंचों पर अपनी मौजूदगी को एक ही प्रोफाइल में जोड़ सकते हैं। यह प्रोफाइल गूगल सर्च के जरिए लोगों को दिखाई दे सकती है।

यह सुविधा भारत, अमेरिका और कनाडा में उपलब्ध है। इसके लिए क्रिएटर की उम्र कम से कम 18 साल होनी चाहिए और किसी एक समर्थित मंच पर उसके कम से कम 10,000 फॉलोअर्स या सब्सक्राइबर होने चाहिए।

पात्र यूजर्स profile.google.com/claim पर जाकर अपने गूगल खाते से साइन इन कर सकते हैं और अपने सोशल मीडिया खातों को जोड़ सकते हैं। वे अपनी प्रोफाइल में परिचय और लिंक भी अपडेट कर सकते हैं। गूगल एक खाते के जरिए अधिकतम 10 अलग-अलग प्रोफाइल संभालने की सुविधा देता है। इससे उन क्रिएटर्स और प्रकाशकों को मदद मिल सकती है, जो कई चैनल या डिजिटल ब्रांड चलाते हैं।

हालांकि, Search Profiles बनाने से गूगल सर्च में किसी क्रिएटर की रैंकिंग सीधे बेहतर नहीं होती। यह सुविधा लोगों को क्रिएटर के अलग-अलग मंचों पर मौजूद खातों और उसके काम तक पहुंचने का एक और रास्ता देती है। इसके जरिए लोग Google Discover पर भी उनकी ऑनलाइन मौजूदगी खोज सकते हैं।

डिजिटल कंटेंट खोजने का तरीका बदलने की कोशिश

‘Ask YouTube’ और ‘Search Profiles’ दोनों का मकसद डिजिटल कंटेंट तक लोगों की पहुंच आसान बनाना है। जहां Ask YouTube यूजर्स को सवाल पूछकर वीडियो खोजने की सुविधा देता है, वहीं Search Profiles क्रिएटर्स को अपने अलग-अलग सोशल मीडिया खातों और काम को एक जगह दिखाने में मदद करता है।

फिलहाल Ask YouTube का मोबाइल विस्तार अमेरिका तक सीमित है। यूट्यूब ने इसे आगे और यूजर्स तथा क्षेत्रों तक पहुंचाने की योजना का संकेत दिया है, लेकिन भारत में इसकी शुरुआत की कोई निश्चित तारीख घोषित नहीं की गई है।

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ग्रो के 150 करोड़ रुपये के मीडिया मैंडेट के लिए पिच शुरू

डिजिटल इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म ग्रो के करीब 150 करोड़ रुपये के मीडिया मैंडेट के लिए पिच शुरू हो गई है। वित्तीय सेवाओं के बढ़ते प्रतिस्पर्धी बाजार के बीच यह प्रक्रिया सामने आई है।

Last Modified:
Tuesday, 13 October, 2026
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डिजिटल इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म ग्रो (Groww) के मीडिया मैंडेट के लिए पिच शुरू हो गई है। एक्सचेंज4मीडिया (exchange4media) को सूत्रों ने इसकी पुष्टि की है। सूत्रों के मुताबिक, इस मीडिया अकाउंट का आकार करीब 150 करोड़ रुपये है।

यह पिच ऐसे समय में शुरू हुई है, जब वित्तीय सेवाओं का बाजार लगातार प्रतिस्पर्धी हो रहा है। डिजिटल प्लेटफॉर्म नए ग्राहकों को जोड़ने, ब्रांड की पहचान मजबूत करने और देश में बढ़ते रिटेल निवेशक आधार तक पहुंच बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं।

बिलियनब्रेन गैराज वेंचर्स (Billionbrains Garage Ventures) के संचालन वाला ग्रो डिजिटल इन्वेस्टमेंट क्षेत्र में अपनी पहचान बना चुका है। प्लेटफॉर्म के जरिए ग्राहक शेयर, म्यूचुअल फंड और अन्य वित्तीय उत्पादों में निवेश कर सकते हैं। कंपनी का बिजनेस मॉडल तकनीक के जरिए निवेश को आसान बनाने पर केंद्रित है, जिसमें पहली बार निवेश करने वाले लोगों के साथ-साथ पारंपरिक निवेश सेवाओं के डिजिटल विकल्प तलाशने वाले ग्राहक भी शामिल हैं।

मीडिया मैंडेट के लिए यह पिच ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब वित्तीय सेवाओं से जुड़े ब्रांड उपभोक्ताओं का ध्यान आकर्षित करने के लिए आक्रामक प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। भारतीय पूंजी बाजार में रिटेल निवेशकों की भागीदारी बढ़ने से कई डिजिटल प्लेटफॉर्म एक ही प्रतिस्पर्धी दायरे में आ गए हैं। ऐसे में ब्रांड पोजिशनिंग, मीडिया इफेक्टिवनेस और कस्टमर एक्विजिशन पहले से ज्यादा अहम हो गए हैं।

इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म के लिए मीडिया स्ट्रैटेजी सिर्फ ब्रांड की पहुंच बढ़ाने तक सीमित नहीं रहती। वित्तीय सेवाओं की कैटेगरी में कंज्यूमर ट्रस्ट महत्वपूर्ण होने के कारण ब्रांड को विश्वसनीयता बनाए रखने और ग्राहकों के साथ लगातार जुड़ाव पर भी ध्यान देना पड़ता है। साथ ही, वित्तीय उत्पादों से जुड़े विज्ञापन में कस्टमर एक्विजिशन के लक्ष्य और जिम्मेदार कम्युनिकेशन के बीच संतुलन भी जरूरी होता है।

मीडिया मैंडेट में आमतौर पर मीडिया स्ट्रैटेजी, प्लानिंग, मीडिया बाइंग और कैंपेन ऑप्टिमाइजेशन जैसे काम शामिल होते हैं।

यह पिच डिजिटल-फर्स्ट कंपनियों के विज्ञापन निवेश में हो रहे व्यापक बदलाव के बीच भी सामने आई है। कस्टमर एक्विजिशन कॉस्ट और उपभोक्ताओं का ध्यान खींचने की बढ़ती प्रतिस्पर्धा को देखते हुए ब्रांड अब ऐसे मीडिया पार्टनर्स की तलाश कर रहे हैं, जो व्यापक पहुंच के साथ मापने योग्य बिजनेस नतीजे भी दे सकें।

एजेंसियों के लिए ग्रो जैसे प्रमुख इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म का मीडिया मैंडेट हासिल करना एक महत्वपूर्ण अवसर होगा। इससे उन्हें भारत की तेजी से प्रतिस्पर्धी कंज्यूमर-फेसिंग वित्तीय सेवा कैटेगरी में काम करने का मौका मिलेगा।

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त्योहारी सेल के पहले दो दिनों में ई-कॉमर्स कंपनियों ने बेचा 24,000 करोड़ का सामान

त्योहारी सीजन की सेल के पहले दो दिनों में ई-कॉमर्स कंपनियों ने करीब 24,200 करोड़ रुपये का GMV दर्ज किया। इस दौरान मोबाइल फोन की बिक्री सबसे ज्यादा रही।

Last Modified:
Monday, 12 October, 2026
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त्योहारी सीजन की सेल के पहले दो दिनों में ई-कॉमर्स कंपनियों ने करीब 24,000 करोड़ रुपये का सामान बेचा। कंसल्टेंसी फर्म रेडसीयर स्ट्रैटेजी कंसल्टेंट्स (Redseer Strategy Consultants) के अनुसार, ऑर्डर्स की संख्या बढ़ने से बिक्री में तेजी आई। वैल्यू के लिहाज से मोबाइल फोन सबसे आगे रहे।

रेडसीयर के अनुमान के मुताबिक, अमेजन (Amazon), फ्लिपकार्ट (Flipkart), मीशो (Meesho) और अजियो (Ajio) समेत अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर करीब 8-9 करोड़ ऑर्डर किए गए। पहले दो दिनों में 2.5 अरब डॉलर से अधिक यानी करीब 24,200 करोड़ रुपये का ग्रॉस मर्चेंडाइज वैल्यू (Gross Merchandise Value) दर्ज हुआ। इस दौरान करीब 6-6.5 करोड़ ग्राहक खरीदारी में शामिल हुए।

रेडसीयर के एसोसिएट पार्टनर निखिल दलाल (Nikhil Dalal) ने कहा कि शुरुआती दो दिनों के आंकड़े बताते हैं कि भारत में त्योहारी ई-कॉमर्स खरीदारी का दायरा बढ़ रहा है। ग्राहक मोबाइल के अलावा फैशन, इलेक्ट्रॉनिक्स और घरेलू उपकरणों पर भी खर्च कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि वैल्यू फैशन (Value Fashion) की मांग खास तौर पर मजबूत रही। छोटे शहरों और टियर-2 शहरों के ग्राहकों ने किफायती कीमतों पर त्योहारी कपड़ों की खरीदारी की। कंपनी के अनुसार, ग्रॉस मर्चेंडाइज वैल्यू सामान्य दिनों की औसत दैनिक बिक्री की तुलना में करीब छह गुना रही। अमेजन और फ्लिपकार्ट की क्विक कॉमर्स सेवाओं (Quick Commerce Services) ने भी सामान्य दैनिक औसत के मुकाबले चार से पांच गुना अधिक जीएमवी दर्ज किया।

कुल बिक्री में मोबाइल फोन की हिस्सेदारी करीब 38-40 प्रतिशत रही, जिसकी कीमत लगभग 9,100-9,600 करोड़ रुपये आंकी गई। कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स (Consumer Electronics) की हिस्सेदारी 25-27 प्रतिशत यानी करीब 6,000-6,500 करोड़ रुपये रही। वहीं, फैशन की हिस्सेदारी 15-18 प्रतिशत यानी लगभग 3,630-4,350 करोड़ रुपये रही।

कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स की बिक्री 2026 की पहली छमाही में ही 20 प्रतिशत से अधिक बढ़ चुकी थी। इसका एक कारण कीमतों में बढ़ोतरी की उम्मीद के चलते ग्राहकों का कुछ खरीदारी पहले ही कर लेना रहा। वहीं, त्योहारी सेल के पहले दो दिनों में फैशन कैटेगरी (Fashion Category) का जीएमवी सालाना आधार पर 22-25 प्रतिशत बढ़ा।

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AI ने न्यूजरूम व क्रिएटिव वर्ल्ड को क्यों हिला दिया है? भरोसे और पारदर्शिता की नई लड़ाई

हाल के दो बड़े विवाद- जर्मनी की मीडिया घटना और साहित्यिक जगत में उठा AI विवाद, ने यह सवाल और तेज कर दिया है कि क्या AI न्यूज़रूम और क्रिएटिव लेखन का भविष्य है या उसकी सीमाएं तय करना जरूरी हो गया है।

Last Modified:
Monday, 12 October, 2026
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दुनिया भर में मीडिया और साहित्यिक संस्थान अब एक ऐसे दौर से गुजर रहे हैं, जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सिर्फ एक सहायक तकनीक नहीं रहा, बल्कि एक ऐसा मुद्दा बन गया है जो भरोसे, संपादकीय जिम्मेदारी और पत्रकारिता की मूल पहचान तक को चुनौती दे रहा है। हाल के दो बड़े विवाद- जर्मनी की मीडिया घटना और साहित्यिक जगत में उठा AI विवाद, ने यह सवाल और तेज कर दिया है कि क्या AI न्यूज़रूम और क्रिएटिव लेखन का भविष्य है या उसकी सीमाएं तय करना जरूरी हो गया है।

जर्मनी के बर्लिन स्थित प्रतिष्ठित अखबार Tagesspiegel में हाल ही में एक बड़ा विवाद सामने आया, जब यह खुलासा हुआ कि अखबार के पूर्व प्रकाशक और एडिटर-इन-चीफ Stephan-Andreas Casdorff ने अपने कुछ ओपिनियन लेख AI की मदद से तैयार किए थे। इस घटना ने मीडिया जगत में हलचल मचा दी और अखबार को मजबूर होना पड़ा कि वह संबंधित लेखों को वेबसाइट से हटा दे और मामले की जांच शुरू करे। अखबार ने साफ किया कि AI का इस्तेमाल सिर्फ कुछ प्रक्रियाओं को आसान बनाने के लिए किया जा सकता है, लेकिन पत्रकारिता के मूल हिस्से यानी सोच, विश्लेषण और लेखन का नियंत्रण पूरी तरह इंसानों के पास ही रहना चाहिए।

इस घटना के बाद जर्मन मीडिया में AI के इस्तेमाल को लेकर बहस और तेज हो गई। इससे पहले भी एक और मामला सामने आया था, जब Frankfurter Allgemeine Zeitung में प्रकाशित एक गेस्ट ओपिनियन में AI के इस्तेमाल के संकेत मिले थे। यह मामला तब और गंभीर हो गया क्योंकि यह जानकारी प्रकाशन के बाद सामने आई, यानी संपादकीय जांच प्रक्रिया में इसे पकड़ा नहीं जा सका।

इस पूरे विवाद ने पत्रकारिता की बुनियादी भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मीडिया शोधकर्ता Vera Katzenberger के अनुसार, समस्या सिर्फ AI के इस्तेमाल की नहीं है, बल्कि तब होती है जब AI से तैयार कंटेंट को बिना बताए प्रकाशित किया जाता है। उनका कहना है कि पाठक अखबार इसलिए खरीदते हैं क्योंकि उन्हें लेखकों के विचार और विशेषज्ञता पर भरोसा होता है। यदि वही विचार मशीन द्वारा तैयार किए जाएं और उसका खुलासा न हो, तो यह सीधे तौर पर धोखा माना जा सकता है।

किए गए खुलासों के बाद Tagesspiegel ने अपनी एडिटोरियल पॉलिसी को दोहराया और कहा कि AI केवल सहायक भूमिका निभा सकता है, लेकिन किसी भी हालत में यह न्यूज़रूम के “core editorial work” की जगह नहीं ले सकता। इसका मतलब है कि खबरों का विश्लेषण, तथ्यों की जांच और अंतिम निर्णय हमेशा पत्रकारों के हाथ में रहेगा।

लेकिन यहां सबसे बड़ी चुनौती यह है कि AI धीरे-धीरे पत्रकारों के काम करने के तरीके में गहराई से शामिल होता जा रहा है। पहले जहां AI को सिर्फ स्पेलिंग सुधारने या डेटा प्रोसेसिंग के लिए इस्तेमाल किया जाता था, अब यह ड्राफ्ट तैयार करने, हेडलाइन सुझाने और कभी-कभी पूरे लेख लिखने तक में इस्तेमाल होने लगा है। यही वह जगह है जहां “सहायक टूल” और “लेखक” के बीच की रेखा धुंधली हो जाती है।

जर्मनी के मीडिया रेगुलेटरी ढांचे में German Press Council ने स्पष्ट किया है कि किसी भी कंटेंट की जिम्मेदारी अंततः न्यूज़रूम की ही होगी, चाहे वह कैसे भी तैयार किया गया हो। लेकिन यह संस्था यह भी मानती है कि AI-जनरेटेड कंटेंट के लिए अलग से लेबलिंग जरूरी नहीं है, क्योंकि असली मुद्दा तकनीक नहीं बल्कि सत्यता और संपादकीय जिम्मेदारी है।

इसी बीच, मीडिया इंडस्ट्री के भीतर एक अलग दृष्टिकोण भी देखने को मिल रहा है। कुछ बड़े मीडिया ग्रुप्स के CEO और एडिटर्स का मानना है कि AI को अपनाना ही भविष्य है। उनका तर्क है कि यदि AI को सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो यह रिपोर्टिंग की गति बढ़ा सकता है, लागत कम कर सकता है और डेटा विश्लेषण को बेहतर बना सकता है। लेकिन साथ ही यह भी माना जा रहा है कि बिना नियंत्रण के AI का इस्तेमाल पत्रकारिता की विश्वसनीयता को कमजोर कर सकता है।

इसी तरह का तनाव साहित्यिक जगत में भी देखा गया, जब प्रतिष्ठित पत्रिका Granta ने कॉमनवेल्थ शॉर्ट स्टोरी प्राइज की विजेता कहानियों को प्रकाशित करना बंद कर दिया। यह फैसला तब आया जब एक विजेता कहानी पर AI के इस्तेमाल का आरोप लगा। हालांकि लेखक ने इन आरोपों को खारिज किया और बताया कि उन्होंने कहानी अपने मोबाइल पर स्पीच-टू-टेक्स्ट तकनीक की मदद से लिखी थी, क्योंकि उन्हें स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हैं।

इसके बावजूद, इस विवाद ने साहित्यिक दुनिया में एक नई बहस छेड़ दी है कि क्या रचनात्मक लेखन में तकनीक का इस्तेमाल स्वीकार्य है, और यदि हां, तो इसकी सीमा क्या होनी चाहिए? प्रकाशकों का कहना है कि जहां उनके पास संपादकीय नियंत्रण नहीं होता, वहां वे अब साझेदारी से पीछे हट रहे हैं, ताकि कंटेंट की शुद्धता और पारदर्शिता बनी रहे।

AI को लेकर यह बहस सिर्फ तकनीकी नहीं है, बल्कि यह भरोसे और जिम्मेदारी का सवाल बन चुकी है। पत्रकारिता और साहित्य दोनों ही क्षेत्रों में यह चिंता बढ़ रही है कि यदि AI बिना पारदर्शिता के इस्तेमाल किया गया, तो पाठकों और लेखकों के बीच का भरोसा कमजोर हो सकता है। दूसरी ओर, यह भी सच है कि AI को पूरी तरह नजरअंदाज करना अब संभव नहीं है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में न्यूज़रूम्स को एक संतुलन बनाना होगा- जहां AI को एक टूल की तरह इस्तेमाल किया जाए, लेकिन अंतिम जिम्मेदारी हमेशा इंसान के पास ही रहे। इसके लिए साफ नियम, प्रशिक्षण और पारदर्शिता बेहद जरूरी होगी।

इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा संदेश यही है कि AI पत्रकारिता और रचनात्मक लेखन को बदल रहा है, लेकिन यह बदलाव तभी स्वीकार्य होगा जब यह स्पष्ट हो कि इंसान और मशीन की भूमिका कहां खत्म होती है और कहां शुरू होती है।

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क्विंट डिजिटल ने वॉरंट की आखिरी किस्त के लिए 6 नवंबर से शुरू की भुगतान प्रक्रिया

क्विंट डिजिटल लिमिटेड ने अपने 82,61,401 आंशिक रूप से भुगतान किए गए वॉरंट (Partly Paid-up Warrants) पर पहली और अंतिम किस्त के रूप में ₹5 प्रति वॉरंट का भुगतान मांगा है।

Last Modified:
Saturday, 10 October, 2026
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मीडिया कंपनी क्विंट डिजिटल लिमिटेड (Quint Digital Limited) ने अपने 82,61,401 आंशिक रूप से भुगतान किए गए वॉरंट (Partly Paid-up Warrants) पर पहली और अंतिम किस्त (First and Final Call) के रूप में ₹5 प्रति वॉरंट का भुगतान मांगा है। कंपनी के निदेशक मंडल ने 9 अक्टूबर, 2026 को हुई बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी। इस किस्त के तहत कंपनी कुल ₹4,13,07,005 यानी करीब ₹4.13 करोड़ जुटाएगी।

कंपनी ने यह जानकारी 9 अक्टूबर, 2026 को बीएसई लिमिटेड (BSE Limited) को दी। यह सूचना भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के लिस्टिंग से जुड़े नियमों, 2015 के नियम 30 और 42 के तहत जारी की गई है।

क्या है पूरा मामला?

क्विंट डिजिटल ने 19 अगस्त, 2026 के ऑफर लेटर के तहत राइट्स इश्यू (Rights Issue) के जरिए 82,61,401 अलग किए जा सकने वाले वॉरंट जारी किए थे। प्रत्येक वॉरंट का इश्यू प्राइस ₹10 रखा गया था। आवेदन के समय निवेशकों से प्रति वॉरंट ₹5 प्राप्त किए गए थे, जबकि बाकी ₹5 का भुगतान पहली और अंतिम किस्त के तौर पर किया जाना है। अब कंपनी ने इस बकाया राशि के भुगतान की प्रक्रिया शुरू करने का फैसला किया है।

15 अक्टूबर होगी रिकॉर्ड डेट

कंपनी ने 15 अक्टूबर, 2026, गुरुवार को रिकॉर्ड डेट (Record Date) तय किया है। इस तारीख के आधार पर उन आंशिक रूप से भुगतान किए गए वॉरंट धारकों की पहचान की जाएगी, जिन्हें पहली और अंतिम किस्त के भुगतान के लिए नोटिस भेजा जाएगा।

इन वॉरंट का आईएसआईएन (ISIN) नंबर INE641R13020 है। इनकी श्रेणी आंशिक रूप से भुगतान किए गए अलग किए जा सकने वाले वॉरंट की है।

6 से 20 नवंबर तक कर सकेंगे भुगतान

कंपनी के मुताबिक, पहली और अंतिम किस्त के भुगतान की अवधि 6 नवंबर, 2026, शुक्रवार से 20 नवंबर, 2026, शुक्रवार तक रहेगी। दोनों तारीखें इस अवधि में शामिल हैं। हालांकि, राइट्स इश्यू कमेटी को अपने विवेक के अनुसार भुगतान की अवधि बढ़ाने का अधिकार दिया गया है।

कंपनी के निदेशक मंडल ने पहली और अंतिम किस्त से संबंधित नोटिस और अन्य जरूरी दस्तावेजों को भी मंजूरी दे दी है। इस किस्त से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी संबंधित नोटिस में दी जाएगी, जिसे कंपनी आने वाले समय में आंशिक रूप से भुगतान किए गए वॉरंट धारकों को भेजेगी।

वॉरंट में कारोबार पर भी पड़ेगा असर

क्विंट डिजिटल ने स्पष्ट किया है कि उसके आंशिक रूप से भुगतान किए गए वॉरंट में शेयर बाजारों पर कारोबार 15 अक्टूबर, 2026, गुरुवार से निलंबित कर दिया जाएगा। पहली और अंतिम किस्त के भुगतान की प्रक्रिया के लिए आईसीआईसीआई बैंक लिमिटेड (ICICI Bank Limited) को बैंक के तौर पर नियुक्त किया गया है।

बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी

कंपनी के निदेशक मंडल की बैठक दोपहर 1 बजे शुरू हुई और दोपहर 3 बजकर 43 मिनट पर समाप्त हुई। बैठक में वॉरंट पर पहली और अंतिम किस्त मांगने, रिकॉर्ड डेट तय करने, भुगतान की अवधि निर्धारित करने और संबंधित नोटिस व दस्तावेजों को मंजूरी देने के फैसले लिए गए। 

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'इंडिया टुडे' ने लॉन्च किया ‘Life Tak’, रामायण पर आधारित सीरीज 18 अक्टूबर से होगी स्ट्रीम

रामायण की कहानी को नए अंदाज में पेश करेगी ‘रघुपति राघव राजा राम’, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और इंडिया टुडे ग्रुप के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ अरुण पुरी ने संयुक्त रूप से टीजर लॉन्च किया

Last Modified:
Friday, 09 October, 2026
India Today Group

‘इंडिया टुडे’ (India Today) ग्रुप ने डिजिटल फिक्शन और इंफोटेनमेंट के क्षेत्र में कदम रखते हुए अपना नया मोबाइल-फर्स्ट माइक्रोड्रामा प्लेटफॉर्म ‘Life Tak’ लॉन्च किया है। इस प्लेटफॉर्म की शुरुआत के साथ ग्रुप ने अपनी पहली प्रमुख शॉर्ट-फॉर्म सीरीज ‘रघुपति राघव राजा राम’ (RRRR) का टीजर भी जारी किया। इसका अनावरण मुंबई में आयोजित इंडिया टुडे कॉन्क्लेव 2026 के मंच पर किया गया। सीरीज का आधिकारिक टीजर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और इंडिया टुडे ग्रुप के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ अरुण पुरी ने संयुक्त रूप से लॉन्च किया।

रामायण की कहानी नए अंदाज में होगी पेश: ‘रघुपति राघव राजा राम’ में रामायण की पारंपरिक कहानी को आधुनिक और तेज रफ्तार अंदाज में पेश किया जाएगा। यह सीरीज खास तौर पर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कंटेंट देखने वाले दर्शकों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। इसमें सांस्कृतिक और पारंपरिक कहानी को आधुनिक प्रोडक्शन तकनीक के साथ जोड़ा गया है। इसका वर्टिकल वीडियो फॉर्मेट आधुनिक दर्शकों की शॉर्ट-फॉर्म कंटेंट देखने की पसंद को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

AI तकनीक पर भी रहेगा जोर: इंडिया टुडे ग्रुप के मुताबिक, यह सीरीज उसके ऐसे क्रिएटिव और टेक्नोलॉजी आधारित इकोसिस्टम की पहली पेशकश है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित विजुअल इंजीनियरिंग, स्क्रिप्ट तैयार करने वाले टूल्स और क्रिएटिव वर्ल्ड-बिल्डिंग का मेल है। इस पहल के जरिए पारंपरिक और नई कहानियों को आज के दर्शकों के लिए नए रूप में पेश किया जाएगा। ‘Life Tak’ के माध्यम से इंडिया टुडे ग्रुप सिनेमाई गुणवत्ता वाले कंटेंट को वर्टिकल वीडियो के तेजी से बढ़ते डिजिटल दौर में दर्शकों तक पहुंचाने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।

18 अक्टूबर से देख सकेंगे दर्शक: ‘रघुपति राघव राजा राम’ का प्रीमियर 18 अक्टूबर 2026 को होगा। दर्शक इसके एपिसोड ‘Life Tak’ के आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट (@lifetak), यूट्यूब और फेसबुक चैनलों के साथ-साथ आजतक ऐप पर भी देख सकेंगे।

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Meta में रवि गर्ग को मिली बड़ी जिम्मेदारी, APAC में एंटरप्राइज बिजनेस का संभालेंगे नेतृत्व

रवि गर्ग ने जुलाई 2021 से सितंबर 2026 तक वॉट्सऐप में बिजनेस मैसेजिंग एंड पेमेंट्स के कंट्री डायरेक्टर के तौर पर काम किया।

Last Modified:
Friday, 09 October, 2026
RaviGarg52130

मेटा (Meta) में रवि गर्ग को बड़ी जिम्मेदारी दी गई है। वॉट्सऐप में भारत के बिजनेस मैसेजिंग और पेमेंट्स बिजनेस का पांच साल से ज्यादा समय तक नेतृत्व करने के बाद अब वह Meta में एशिया-पैसिफिक (APAC) क्षेत्र में एंटरप्राइज बिजनेस के मैनेजिंग डायरेक्टर की भूमिका संभालेंगे।

रवि गर्ग ने जुलाई 2021 से सितंबर 2026 तक वॉट्सऐप में बिजनेस मैसेजिंग एंड पेमेंट्स के कंट्री डायरेक्टर के तौर पर काम किया। इस दौरान उन्होंने भारत में प्लेटफॉर्म की बिजनेस मैसेजिंग और पेमेंट्स सेवाओं को शुरू करने और उनका विस्तार करने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने इस कारोबार को शुरुआती स्तर से खड़ा किया और आगे बढ़ाया।

अपनी नई भूमिका में रवि गर्ग का मुख्य ध्यान एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में Meta के एंटरप्राइज बिजनेस का विस्तार करने पर होगा। कंपनियां अपने उत्पादों, सेवाओं और बाजार तक पहुंचने की रणनीतियों में बदलाव लाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को तेजी से अपना रही हैं। ऐसे में वह इस क्षेत्र के कारोबारों के बीच Meta की सेवाओं का इस्तेमाल बढ़ाने पर काम करेंगे।

उनकी जिम्मेदारी में बिजनेस मैसेजिंग, Meta Business Agents और Muse APIs सहित Meta की सेवाओं को क्षेत्र की कंपनियों तक पहुंचाना शामिल होगा।

Meta और वॉट्सऐप से पहले रवि गर्ग ने Microsoft में 13 साल तक वरिष्ठ पदों पर काम किया। वहां उन्होंने सेल्स, रणनीति, बिजनेस प्लानिंग और चैनल मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों में जिम्मेदारियां संभालीं। इसके अलावा, वह Nazara Technologies में चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (Chief Operating Officer) के पद पर भी काम कर चुके हैं। उन्होंने Sify में भी जनरल मैनेजमेंट से जुड़ी जिम्मेदारी निभाई है।

 

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Yaap Digital को 25 करोड़ रुपये की कर्ज सुविधा मंजूर, नए ऑडिटर की भी नियुक्ति

Yaap Digital Limited के बोर्ड ने 8 अक्टूबर 2026 को हुई बैठक में कई अहम फैसलों को मंजूरी दी है।

Last Modified:
Friday, 09 October, 2026
Yaap541

Yaap Digital Limited के बोर्ड ने 8 अक्टूबर 2026 को हुई बैठक में कई अहम फैसलों को मंजूरी दी है। कंपनी ने HSBC Bank से 25 करोड़ रुपये तक की वर्किंग कैपिटल डिमांड लोन/ओवरड्राफ्ट सुविधा लेने को मंजूरी दी है। इसके साथ ही कंपनी ने 25 करोड़ रुपये तक की रकम उधार लेने को भी मंजूरी दी है।

कंपनी ने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया लिमिटेड को दी जानकारी में बताया कि बोर्ड की बैठक 8 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12:30 बजे शुरू हुई और 12:50 बजे खत्म हुई। यह जानकारी सेबी के लिस्टिंग नियमों के तहत साझा की गई है।

25 करोड़ रुपये तक उधार लेने की मंजूरी

बोर्ड ने HSBC Bank से 25 करोड़ रुपये तक की वर्किंग कैपिटल डिमांड लोन/ओवरड्राफ्ट सुविधा लेने को मंजूरी दी है। इसके अलावा, कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 179 के तहत कंपनी ने 25 करोड़ रुपये तक की रकम उधार लेने को भी मंजूरी दी है।

पुराने ऑडिटर Shweta Jain & Co LLP ने दिया इस्तीफा

बोर्ड ने M/s Shweta Jain & Co LLP, Chartered Accountants के वैधानिक ऑडिटर के पद से इस्तीफे को भी संज्ञान में लिया है। कंपनी के मुताबिक, यह इस्तीफा 23 सितंबर 2026 से तत्काल प्रभाव से लागू हुआ। फर्म का रजिस्ट्रेशन नंबर 127673W/W101149 है।

कंपनी के मुताबिक, ऑडिटर ने इस्तीफे की वजह दूसरे पेशेवर कामों में व्यस्तता बताई है। ऑडिटर ने यह भी पुष्टि की है कि बताए गए कारण के अलावा इस्तीफा देने की कोई अन्य महत्वपूर्ण वजह नहीं है।

NGPC & Co. को नया वैधानिक ऑडिटर बनाया

ऑडिट कमेटी की 8 अक्टूबर 2026 को हुई बैठक में की गई सिफारिश के आधार पर बोर्ड ने M/s NGPC & Co., Chartered Accountants को कंपनी का नया वैधानिक ऑडिटर नियुक्त करने की मंजूरी दी है। यह नियुक्ति Shweta Jain & Co LLP के इस्तीफे से पैदा हुई आकस्मिक रिक्ति को भरने के लिए की गई है। हालांकि, यह नियुक्ति कंपनी के सदस्यों की मंजूरी के अधीन है।

NGPC & Co. का फर्म रजिस्ट्रेशन नंबर 145474W और पीयर रिव्यू सर्टिफिकेट नंबर 017777 है। कंपनी ने बताया कि इसकी नियुक्ति 8 अक्टूबर 2026 से की गई है।

2017 में हुई थी फर्म की शुरुआत

कंपनी द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, NGPC & Co. की स्थापना 2017 में सीए नवनीत एस. गज्जा और सीए पुष्पा यू. चांडवानी ने की थी। दोनों के पास 20 साल से ज्यादा का पेशेवर अनुभव है। सीए चंपा पुरोहित 1 अप्रैल 2024 को फर्म में पार्टनर के तौर पर शामिल हुई थीं।

यह फर्म ऑडिट एंड एश्योरेंस, अकाउंटिंग, इनकम टैक्स, जीएसटी, कंपनी कानून से जुड़े मामले, मैनेजमेंट कंसल्टेंसी, फिक्स्ड एसेट्स वेरिफिकेशन, स्टॉक वेरिफिकेशन, इंफॉर्मेशन सिस्टम ऑडिट और फेमा जैसी सेवाएं देती है।

कंपनी के अनुसार, फर्म के पास अलग-अलग क्षेत्रों में अनुभवी प्रोफेशनल्स और एसोसिएट्स हैं। यह लागू कानूनी और नैतिक नियमों के तहत गुणवत्तापूर्ण, समय पर और प्रभावी पेशेवर सेवाएं देने पर ध्यान देती है।

NGPC & Co. ने कंपनी के वैधानिक ऑडिटर के रूप में काम करने के लिए अपनी सहमति भी दे दी है। फर्म ने पुष्टि की है कि वह इस नियुक्ति के लिए योग्य है और कंपनी अधिनियम, 2013 और उसके तहत बनाए गए नियमों के अनुसार उसकी नियुक्ति पर कोई अयोग्यता लागू नहीं होती।

Gozoop Online के शेयरों के अधिग्रहण से जुड़ा फैसला

बोर्ड ने Gozoop Online Private Limited के शेयरों के Tranche 2 Acquisition के लिए शेयर बेचने वाले शेयरधारकों को नकद भुगतान करने को भी मंजूरी दी है। इसके साथ ही इस संबंध में संशोधन समझौता यानी Amendment Agreement करने को भी मंजूरी दी गई है।

कंपनी ने कहा है कि 30 मार्च 2026 को किए गए Share Purchase and Shareholders’ Agreement (SPSHA) में प्रस्तावित संशोधन समझौते से जुड़ी जानकारी संबंधित पक्षों द्वारा उस समझौते पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद साझा की जाएगी।

यह संशोधन समझौता Yaap Digital Limited यानी खरीदार, शेयर बेचने वाले शेयरधारकों और Gozoop Online Private Limited के बीच प्रस्तावित है। कंपनी ने कहा कि संशोधन समझौते के निष्पादित होने के बाद उससे जुड़ी जरूरी जानकारी सार्वजनिक की जाएगी।

Yaap Digital Limited पहले Yaap Digital Private Limited के नाम से जानी जाती थी। कंपनी की ओर से यह जानकारी कंपनी सचिव और अनुपालन अधिकारी शिवानी शिवशंकर तिवारी ने दी है।  

 

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सर्वम एआई में शशिकुमार श्रीधरन की एंट्री : ग्लोबल बिजनेस विस्तार पर रहेगा फोकस

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शशिकुमार श्रीधरन को सर्वम एआई में प्रेसिडेंट और चीफ बिजनेस ऑफिसर नियुक्त किया गया है। वह कंपनी की बिजनेस स्ट्रैटेजी और ग्लोबल एआई ग्रोथ को आगे बढ़ाएंगे।

Last Modified:
Wednesday, 07 October, 2026
sarvamAI

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शशिकुमार श्रीधरन (Shashikumar Sridharan) को सर्वम एआई (Sarvam AI) में प्रेसिडेंट और चीफ बिजनेस ऑफिसर (President and Chief Business Officer) नियुक्त किया गया है। नई भूमिका में वह कंपनी की बिजनेस स्ट्रैटेजी को आगे बढ़ाने और ग्रोथ को मजबूत करने की जिम्मेदारी संभालेंगे। कंपनी भारत और ग्लोबल मार्केट्स में अपनी एआई (AI) पेशकशों का विस्तार कर रही है।

शशिकुमार श्रीधरन हाल ही में गूगल क्लाउड इंडिया (Google Cloud India) के मैनेजिंग डायरेक्टर (Managing Director) पद से हटे हैं। उनकी जगह गूगल क्लाउड इंडिया में डिजिटल नेटिव्स बिजनेस (Digital Natives Business) के मैनेजिंग डायरेक्टर अमित कुमार (Amit Kumar) को अंतरिम लीडर नियुक्त किया गया है। गूगल क्लाउड के एशिया पैसिफिक प्रेसिडेंट करण बाजवा (Karan Bajwa) ने लिंक्डइन (LinkedIn) पोस्ट के जरिए नेतृत्व में बदलाव की जानकारी दी थी।

सर्वम एआई हाल ही में अपनी फंडिंग को लेकर भी चर्चा में रहा है। कंपनी ने 300 मिलियन डॉलर की सीरीज बी (Series B) फंडिंग के पहले चरण में 234 मिलियन डॉलर जुटाए हैं। इस निवेश के बाद कंपनी का पोस्ट-मनी वैल्यूएशन 1.5 बिलियन डॉलर हो गया है।

इस फंडिंग राउंड में एचसीएलटेक (HCLTech) और बेसमर वेंचर पार्टनर्स (Bessemer Venture Partners) ने निवेश किया है। कंपनी के मौजूदा निवेशकों खोसला वेंचर्स (Khosla Ventures) और पीक XV पार्टनर्स (Peak XV Partners) ने भी इस राउंड में अपना समर्थन जारी रखा है। नई भूमिका में श्रीधरन का फोकस सर्वम एआई की बिजनेस स्ट्रैटेजी को मजबूत करने और भारत के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कंपनी के एआई बिजनेस के विस्तार को गति देने पर रहेगा।

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क्विंट डिजिटल के बोर्ड की बैठक 9 अक्टूबर को, 82.61 लाख वारंट्स पर होगा फैसला

क्विंट डिजिटल लिमिटेड के निदेशक मंडल की बैठक 9 अक्टूबर 2026 को होने जा रही है।

Last Modified:
Wednesday, 07 October, 2026
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क्विंट डिजिटल लिमिटेड के निदेशक मंडल की बैठक 9 अक्टूबर 2026 को होने जा रही है। कंपनी ने 6 अक्टूबर को शेयर बाजार को दी जानकारी में बताया कि इस बैठक में 82,61,401 आंशिक रूप से चुकता वारंट से जुड़ी फर्स्ट एंड फाइनल कॉल मनी पर विचार किया जाएगा।

कंपनी के मुताबिक, ये वारंट 10 रुपये अंकित मूल्य के हैं और इन्हें 11 सितंबर 2026 को राइट्स आधार पर जारी और आवंटित किया गया था। इन वारंट का आवंटन कंपनी की 19 अगस्त 2026 की लेटर ऑफ ऑफर के तहत किया गया था।

रिकॉर्ड डेट भी तय हो सकती है

क्विंट डिजिटल ने बताया कि बोर्ड बैठक में इन वारंट के लिए फर्स्ट एंड फाइनल कॉल मनी नोटिस पर विचार कर उसे मंजूरी दी जा सकती है। इसके साथ ही बोर्ड रिकॉर्ड डेट तय करने पर भी विचार करेगा। इसके अलावा कॉल मनी के भुगतान का कार्यक्रम और इससे जुड़े अन्य जरूरी व इससे जुड़े मामलों पर भी फैसला लिया जाएगा।

82.61 लाख वारंट पर होगी कॉल मनी

कंपनी ने अपनी सूचना में बताया है कि बैठक में 82,61,401 आंशिक रूप से चुकता वारंट के लिए फर्स्ट एंड फाइनल कॉल मनी से जुड़े मामलों पर विचार किया जाएगा। हालांकि, कंपनी ने इस सूचना में यह नहीं बताया है कि प्रति वारंट कितनी कॉल मनी देनी होगी।  

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