एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट ने आर.एस. श्रीनिवास जैन को संयुक्त सीईओ नियुक्त किया है। 13 अक्टूबर से प्रभावी नियुक्ति के साथ उन्हें प्रमुख प्रबंधकीय अधिकारी की जिम्मेदारी भी मिली है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट लिमिटेड (SBIFML) ने आर.एस. श्रीनिवास जैन (R.S. Srinivasa Jain) को संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी (Joint CEO) और प्रमुख प्रबंधकीय अधिकारी (Key Managerial Personnel) नियुक्त किया है। उनकी नियुक्ति 13 अक्टूबर 2026 से प्रभावी हो गई है।
नियामकीय जानकारी के अनुसार, कंपनी के निदेशक मंडल (Board of Directors) ने 13 अक्टूबर को हुई बैठक में नियुक्ति को मंजूरी दी। यह फैसला नामांकन एवं पारिश्रमिक समिति (Nomination and Remuneration Committee) की सिफारिश के बाद लिया गया।
इससे पहले श्रीनिवास जैन एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट में कार्यकारी अध्यक्ष (Executive President) के पद पर थे। इस भूमिका के साथ वह रणनीति, डिजिटल एवं टेक्नोलॉजी, मार्केटिंग और निवेशक संबंध (Investor Relations) की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
उन्होंने 7 मई 2001 को कंपनी के साथ अपना सफर शुरू किया था। लंबे कार्यकाल के दौरान उन्होंने रणनीति, सूचना प्रौद्योगिकी, डिजिटल, मार्केटिंग, निवेशक संबंध, उत्पाद, अंतरराष्ट्रीय कारोबार और बिक्री समेत कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में काम किया है।
श्रीनिवास जैन को बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं और बीमा (BFSI) क्षेत्र में 34 साल से ज्यादा का अनुभव है। इसमें करीब 27 साल का अनुभव म्यूचुअल फंड उद्योग का है। संयुक्त सीईओ के रूप में नई जिम्मेदारी के साथ कंपनी के नेतृत्व में उनकी भूमिका और महत्वपूर्ण हो गई है।
बीबीडीओ ग्रुप इंडिया की कंपनी उल्का ने मैथिली मुल्लिक को एग्जीक्यूटिव क्रिएटिव डायरेक्टर नियुक्त किया है। वह चीफ क्रिएटिव एक्सपीरियंस ऑफिसर राकेश मेनन को रिपोर्ट करेंगी और क्रिएटिव काम संभालेंगी।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
बीबीडीओ ग्रुप इंडिया (BBDO Group India) की कंपनी उल्का (Ulka) ने मैथिली मुल्लिक (Maithili Mullick) को एग्जीक्यूटिव क्रिएटिव डायरेक्टर नियुक्त किया है। वह उल्का के चीफ क्रिएटिव एक्सपीरियंस ऑफिसर राकेश मेनन (Rakesh Menon) को रिपोर्ट करेंगी।
मैथिली मुल्लिक ने एफसीबी इंटरफेस (FCB Interface) के साथ करीब 12 वर्षों तक काम किया है। इसके बाद वह ऑस्ट्रेलिया गईं, जहां उन्होंने एएनजेड बैंक (ANZ Bank) की इन-हाउस एजेंसी के साथ काम किया।
अपनी नियुक्ति पर मैथिली ने कहा कि वह उल्का में पहले से कई लोगों को जानती हैं और उनके काम को करीब से देख चुकी हैं। इसी वजह से कंपनी के साथ जुड़ने का फैसला उनके लिए आसान रहा। हालांकि, उन्हें सबसे ज्यादा उत्साहित करने वाली बात उल्का की भविष्य को लेकर महत्वाकांक्षा है।
उन्होंने कहा कि कंपनी में कुछ बड़ा और वास्तव में प्रभावशाली बनाने की मजबूत इच्छा दिखाई देती है। वह इस सफर का हिस्सा बनने और उल्का को आगे बढ़ाने में योगदान देने को लेकर उत्साहित हैं।
उल्का के चीफ क्रिएटिव एक्सपीरियंस ऑफिसर राकेश मेनन ने कहा कि मैथिली रणनीतिक सोच और उस सोच को प्रभावी क्रिएटिव काम में बदलने की क्षमता का बेहतरीन संयोजन लेकर आई हैं। उन्होंने कहा कि मैथिली के साथ कई वर्षों तक काम करने के दौरान उन्होंने यह भी देखा है कि वह टीम के लोगों की क्षमताओं को बेहतर तरीके से सामने लाती हैं।
अपनी इस नई भूमिका में वे IBC24 की वेबसाइट, यूट्यूब चैनल्स और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स लीड करेंगे। निरंजन दुबे इससे पहले न्यूज18 हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे थे।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
‘न्यूज18’ हिंदी में सीनियर एसोसिएट एडिटर रहे वरिष्ठ पत्रकार निरंजन दुबे अब IBC24 से जुड़ गए हैं। उन्होंने यहां एग्जिक्यूटिव एडिटर कम डिजिटल हेड के रूप में जॉइन किया है। समाचार4मीडिया से बातचीत में निरंजन दुबे ने बताया कि अपनी इस नई भूमिका में वे IBC24 की वेबसाइट, यूट्यूब चैनल्स और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स लीड करेंगे।
निरंजन दुबे इससे पहले न्यूज18 हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे थे। वहां उन्होंने ग्रोथ एडिटर के रूप में शुरुआत की थी। इसके बाद वे फीचर्स, वीडियो को-ऑर्डिनेटर और वेब स्टोरी सेक्शन के हेड बने। बाद में उन्होंने ट्रेंडिंग, वायरल और वेब स्टोरी के साथ-साथ मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ (MP-CG) के डिजिटल ऑपरेशंस के प्रमुख की भी जिम्मेदारी संभाली।
मीडिया क्षेत्र में निरंजन दुबे को दो दशक से अधिक का अनुभव है, जिसमें 17 साल का तजुर्बा केवल डिजिटल मीडिया का है। मूल रूप से बिहार के निवासी और मध्य प्रदेश से स्कूली शिक्षा प्राप्त करने वाले निरंजन ने अपने करियर की शुरुआत 'प्रभात खबर' से की थी। इसके बाद वे '365 दिन TV' से जुड़े।
डिजिटल मीडिया में उनकी शुरुआत 'NNI लाइव' से हुई, जिसके बाद वे 'दैनिक भास्कर डॉट कॉम' (dainikbhaskar.com) से जुड़े। दैनिक भास्कर में उनका कार्यकाल साढ़े छह साल का रहा। इसके बाद उन्होंने अलीबाबा ग्रुप के न्यूज एग्रीगेटर 'UC News' और फिर टाइम्स इंटरनेट के 'News Point' में बतौर हिंदी एडिटर काम किया।
निरंजन दुबे के मुताबिक, दैनिक भास्कर में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने 'रिपोर्टिंग फ्रॉम डेस्क' का सिस्टम स्थापित किया और फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ी कई प्रमुख खबरें ब्रेक कीं। मेनस्ट्रीम डिजिटल मीडिया में पहली बार भोजपुरी सिनेमा और इंडस्ट्री पर अलग से न्यूज सेक्शन भी उन्होंने शुरू किया। इस दौरान उन्होंने लेखक चेतन भगत, अभिनेता राहुल रॉय, दिनेश लाल यादव 'निरहुआ' और कुणाल सिंह जैसी चर्चित हस्तियों के इंटरव्यू भी किए।
निरंजन दुबे को दैनिक भास्कर में लगातार 3 साल तक 'डायमंड एक्सीलेंस अवॉर्ड' से नवाजा गया। उत्कृष्ट प्रदर्शन के चलते उन्हें संस्थान में लगातार 3 बार प्रमोशन मिला और प्रबंधन की ओर से 2 बार विदेशी दौरों पर भी भेजा गया।
समाचार4मीडिया की ओर से निरंजन दुबे को उनकी नई पारी के लिए ढेरों बधाई और शुभकामनाएं।
अभिनव रस्तोगी को रेडिको खेतान में जनरल मैनेजर - मार्केटिंग नियुक्त किया गया है। वह कंपनी के साथ जुलाई 2020 से जुड़े हैं और मार्केटिंग व ब्रांड मैनेजमेंट में 15 वर्षों का अनुभव रखते हैं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
अभिनव रस्तोगी (Abhinav Rastogi) को रेडिको खेतान लिमिटेड (Radico Khaitan Limited) में जनरल मैनेजर - मार्केटिंग नियुक्त किया गया है। वह जुलाई 2020 से कंपनी के साथ जुड़े हैं और मार्केटिंग व ब्रांड मैनेजमेंट के क्षेत्र में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखते हैं।
नई जिम्मेदारी से पहले रस्तोगी अप्रैल 2023 से अप्रैल 2026 तक जॉइंट जनरल मैनेजर - मार्केटिंग के पद पर थे। इस दौरान उन्होंने संगम व्हिस्की, जैसलमेर जिन, 8 पीएम व्हिस्की, कॉन्टेसा रम और कंपनी के कई क्षेत्रीय ब्रांड्स के पोर्टफोलियो की जिम्मेदारी संभाली।
इससे पहले वह अप्रैल 2021 से मार्च 2023 तक डिप्टी जनरल मैनेजर - मार्केटिंग और जुलाई 2020 से मार्च 2021 तक असिस्टेंट जनरल मैनेजर - मार्केटिंग रहे। इन भूमिकाओं में उन्होंने कंपनी के अलग-अलग ब्रांड्स से जुड़े मार्केटिंग कार्यों का नेतृत्व किया। रस्तोगी को ब्रांड स्ट्रैटेजी, ब्रांड पोजिशनिंग, पोर्टफोलियो मैनेजमेंट, प्रॉफिट एंड लॉस (P&L), कंज्यूमर रिसर्च, मीडिया बाइंग, नए प्रोडक्ट डेवलपमेंट और इंटीग्रेटेड एडवरटाइजिंग व प्रमोशनल कैंपेन का अनुभव है।
रेडिको खेतान से पहले उन्होंने एलाइड ब्लेंडर्स एंड डिस्टिलर्स (Allied Blenders & Distillers) में पांच वर्षों से अधिक समय तक काम किया। वहां उन्होंने स्टर्लिंग रिजर्व प्रीमियम व्हिस्की, ऑफिसर्स चॉइस और ऑफिसर्स चॉइस ब्लू सहित ब्रांडी और रम श्रेणी के अलग-अलग ब्रांड पोर्टफोलियो संभाले।
करियर के शुरुआती दौर में रस्तोगी एमामी (Emami) से जुड़े थे। वहां उन्होंने नवरत्न हेयर ऑयल और नवरत्न कूल टैल्कम पाउडर जैसे ब्रांड्स की जिम्मेदारी संभाली।
यह इस फोरम का आठवां संस्करण है और पहली बार इसका आयोजन भारत में हो रहा है। तीन दिवसीय यह कार्यक्रम 13 से 15 अक्टूबर तक नई दिल्ली में आयोजित किया जा रहा है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार, 13 अक्टूबर को नई दिल्ली में आयोजित ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम (Bloomberg New Economy Forum) 2026 को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने वैश्विक अर्थव्यवस्था, तकनीक, ऊर्जा, व्यापार और बदलते अंतरराष्ट्रीय हालात पर अपनी बात रखी। यह इस फोरम का आठवां संस्करण है और पहली बार इसका आयोजन भारत में किया जा रहा है। तीन दिवसीय इस कार्यक्रम में दुनिया के 500 से अधिक सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के प्रमुख नेताओं के शामिल होने की योजना है।
इस फोरम की स्थापना ब्लूमबर्ग के संस्थापक माइकल आर. ब्लूमबर्ग (Michael R. Bloomberg) ने 2018 में की थी। वह Bloomberg L.P. और Bloomberg Philanthropies के संस्थापक हैं। इस बार फोरम की थीम ‘A World in Play: Defining the New Levers of Power’ रखी गई है। इसका उद्देश्य वैश्विक अर्थव्यवस्था के सामने मौजूद चुनौतियों पर चर्चा करना और भविष्य की आर्थिक तरक्की के लिए मिलकर काम करने के रास्ते तलाशना है।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने माइकल ब्लूमबर्ग के साथ अपने संबंधों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि ब्लूमबर्ग ने अपनी 30 साल की यात्रा का उल्लेख करते हुए उन्हें अपना मित्र बताया था। मोदी ने भारत के प्रति ब्लूमबर्ग के लगाव की सराहना की और फोरम का पहली बार भारत में आयोजन करने के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह मंच अर्थव्यवस्था, तकनीक, ऊर्जा और अंतरराष्ट्रीय मामलों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर दुनिया के प्रमुख लोगों को एक साथ लाता है।
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में ‘Power to Empower’ यानी दूसरों को सशक्त बनाने की सोच पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में तकनीक, डेटा, ज्ञान और नवाचार ताकत के बड़े स्रोत बन गए हैं। हालांकि, महत्वपूर्ण यह है कि इस ताकत का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जाता है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या तकनीक का लाभ कुछ लोगों तक सीमित रहना चाहिए या इससे लाखों लोगों के लिए नए अवसर पैदा होने चाहिए। मोदी ने कहा कि नियंत्रण करने की ताकत से आगे बढ़कर दूसरों को सक्षम बनाने, प्रतिस्पर्धा के बजाय सहयोग करने और अपनी सफलता के साथ दूसरों को भी सफल बनाने पर ध्यान देना चाहिए।
The greatest power is the power to empower! https://t.co/zG16Kh6G4b
— Narendra Modi (@narendramodi) October 13, 2026
भारत की डिजिटल व्यवस्था और ऊर्जा क्षेत्र में हुई प्रगति का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में करीब 80,000 प्रकाशन और 1,000 से अधिक टेलीविजन चैनल हैं। उन्होंने YouTube और Instagram पर भारत के करीब 50 करोड़ उपयोगकर्ताओं का भी जिक्र किया। ऊर्जा के क्षेत्र में मोदी ने बताया कि 2014 में भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता करीब 75 गीगावाट थी, जो अब बढ़कर लगभग 300 गीगावाट हो गई है। उन्होंने प्रधानमंत्री सूर्य घर और पीएम-कुसुम जैसी योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इनके जरिए सौर ऊर्जा को घरों और किसानों तक पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
वैश्विक हालात पर बात करते हुए मोदी ने कहा कि दुनिया महामारी, क्षेत्रीय युद्धों और सप्लाई चेन में बाधाओं जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है। उन्होंने चिंता जताई कि सप्लाई चेन, ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, तकनीक और भुगतान प्रणालियों का इस्तेमाल कई बार दबाव बनाने के साधन के रूप में किया जा रहा है। ऐसे माहौल में देशों के बीच भरोसा और सहयोग पहले से अधिक जरूरी हो गया है। उन्होंने कहा कि दुनिया में इस्तेमाल होने वाली हर पांच में से एक जेनेरिक दवा भारत में बनती है और देश में 2,000 से अधिक ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर काम कर रहे हैं। प्रधानमंत्री के मुताबिक, भारत की प्रगति दूसरे देशों के साथ मिलकर आगे बढ़ने और साझा अवसर पैदा करने में है।
प्रधानमंत्री ने भारत में हुए आर्थिक और कारोबारी सुधारों का भी जिक्र किया। उन्होंने वस्तु एवं सेवा कर (GST) के जरिए देश में एक साझा बाजार बनाने, दिवाला कानून लागू करने, 29 श्रम कानूनों को चार श्रम संहिताओं में समेटने और कारोबार से जुड़े सैकड़ों छोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने जैसे कदमों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत में सुधार केवल मजबूरी में नहीं किए जाते, बल्कि यह सरकार का दृढ़ विश्वास है। उन्होंने भारतीय बैंकिंग व्यवस्था की मजबूत स्थिति का भी उल्लेख किया और कहा कि अनिश्चितताओं से भरी दुनिया में भारत भरोसे और स्थिरता का विकल्प पेश करता है।
इस फोरम की आधिकारिक घोषणा के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी और माइकल ब्लूमबर्ग के अलावा कई अंतरराष्ट्रीय कारोबारी, आर्थिक और राजनीतिक हस्तियां भी इसमें शामिल हैं। इनमें इटली के पूर्व प्रधानमंत्री और यूरोपीय सेंट्रल बैंक के पूर्व अध्यक्ष मारियो द्राघी (Mario Draghi), ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री ऋषि सुनक (Rishi Sunak), अमेरिका की पूर्व वाणिज्य मंत्री जीना रायमोंडो (Gina Raimondo), Cisco Systems के चेयरमैन एवं CEO चक रॉबिंस (Chuck Robbins) और Blackstone के प्रेसिडेंट एवं COO जोनाथन ग्रे (Jonathan Gray) शामिल हैं। भारतीय उद्योग जगत से टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन, आदित्य बिड़ला समूह के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला, महिंद्रा समूह के चेयरमैन आनंद महिंद्रा और Biocon की संस्थापक एवं कार्यकारी चेयरपर्सन किरण मजूमदार-शॉ भी घोषित प्रतिभागियों में हैं। फोरम में वैश्विक अर्थव्यवस्था, भू-राजनीतिक बदलाव, तकनीकी विकास, ऊर्जा परिवर्तन और सप्लाई चेन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की जा रही है।
अमन मेहरा ने बीएनपी पारिबा में डायरेक्टर और हेड, ट्रांजैक्शन बैंकिंग सेल्स के रूप में ज्वाइन किया है। वह नॉर्थ और ईस्ट इंडिया में सेल्स ऑपरेशंस की जिम्मेदारी संभालेंगे।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
अमन मेहरा (Aman Mehra) ने बीएनपी पारिबा (BNP Paribas) में डायरेक्टर और हेड, ट्रांजैक्शन बैंकिंग सेल्स - नॉर्थ और ईस्ट इंडिया के रूप में नई जिम्मेदारी संभाली है।
मेहरा इससे पहले डीबीएस बैंक (DBS Bank) के साथ करीब 18 वर्षों तक जुड़े रहे हैं। उनके पास बैंकिंग क्षेत्र में लगभग 25 वर्षों का अनुभव है, जिसमें करीब दो दशक ट्रांजैक्शन बैंकिंग में रहे हैं। उनके अनुभव में कैश मैनेजमेंट, ट्रेड और सप्लाई चेन फाइनेंस के साथ बिजनेस लीडरशिप, क्लाइंट एंगेजमेंट और टीम डेवलपमेंट शामिल हैं।
अपने करियर की शुरुआत में मेहरा ने स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक (Standard Chartered Bank) और सिटीग्रुप (Citigroup) में भी काम किया है।
प्रदर्शन कवर करने के दौरान पत्रकारों को हिरासत में लिए जाने पर पत्रकार वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष जितेन्द्र बच्चन ने दिल्ली पुलिस की आलोचना की और प्रेस की स्वतंत्रता का मुद्दा उठाया।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ और अन्य प्रदर्शनों को कवर करने के दौरान कई पत्रकारों को पुलिस ने हिरासत में लिया। बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया। इस मामले में पत्रकार वेलफेयर एसोसिएशन (PWA) के अध्यक्ष जितेन्द्र बच्चन (Jitendra Bachchan) ने दिल्ली पुलिस की तीखी आलोचना की है।
उन्होंने कहा कि भारत का संविधान अनुच्छेद 19(1)(ए) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की गारंटी देता है और प्रेस की स्वतंत्रता को भी इसी अनुच्छेद का हिस्सा माना गया है। उनके मुताबिक, यह कानून पत्रकारों के रिपोर्टिंग करने, सत्ता में बैठे लोगों से सवाल पूछने और जनहित के मुद्दों को सामने लाने के अधिकार की रक्षा करता है।
बच्चन ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि प्रदर्शनों के दौरान मीडियाकर्मियों और वकीलों को उनके पेशेवर दायित्व निभाने से नहीं रोका जाना चाहिए। इसके बावजूद शनिवार और रविवार को प्रदर्शनों के दौरान कई पत्रकारों को हिरासत में लिया गया।
उन्होंने कहा कि कई पत्रकारों के साथ बदसलूकी की खबरें आईं। कुछ के साथ धक्का-मुक्की की गई, जबकि कुछ को अलग-अलग जगहों पर प्रोटेस्ट कवर करने के दौरान हिरासत में लिया गया। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए अच्छी स्थिति नहीं बताया और कहा कि पुलिस की प्रेस के साथ यह ज्यादती है।
जिन प्रमुख पत्रकारों को हिरासत में लिया गया था, उनमें न्यूज़लॉन्ड्री (Newslaundry) के अश्विनी कुमार सिंह (Ashwini Kumar Singh), आस्था सव्यसाची (Aastha Savyasachi) के अनमोल प्रीतम (Anmol Pritam), स्क्रॉल (Scroll) के आयुष तिवारी (Ayush Tiwari) और शोएब दानियाल (Shoaib Daniyal), नवभारत टाइम्स (Navbharat Times) के परंजॉय गुहा ठाकुरता (Paranjoy Guha Thakurta), यूट्यूबर (YouTuber) श्याम मीरा सिंह (Shyam Meera Singh), ध्रुव राठी (Dhruv Rathee), ऑल्ट न्यूज़ (Alt News) की किंजल (Kinjal), स्वतंत्र पत्रकार निधि सुरेश (Nidhi Suresh) और एम. राजशेखर (M. Rajshekhar) समेत कई अन्य पत्रकारों के नाम शामिल हैं।
प्रदर्शन और विरोध-प्रदर्शनों की कवरेज करने वाले पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर फ्री स्पीच कलेक्टिव (Free Speech Collective) ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
प्रदर्शन और विरोध-प्रदर्शनों की कवरेज करने वाले पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर फ्री स्पीच कलेक्टिव (Free Speech Collective) ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। संगठन ने पुलिस की ओर से पत्रकारों को कथित तौर पर हिरासत में लेने, उनके साथ मारपीट करने, डराने और रिपोर्टिंग में बाधा डालने की घटनाओं को रोकने के लिए अदालत से बाध्यकारी दिशा-निर्देश बनाने की मांग की है। याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से पत्रकारों समेत अन्य पेशेवरों के काम में बाधा नहीं डालने का निर्देश दिए जाने के बाद भी ऐसी घटनाएं सामने आई हैं।
याचिका के मुताबिक, प्रदर्शन की रिपोर्टिंग कर रहे पत्रकारों को कथित तौर पर घसीटा गया, उनके साथ धक्का-मुक्की की गई और उन्हें पुलिस वाहनों में बैठाकर ले जाया गया। कुछ पत्रकारों ने प्रेस कार्ड दिखाया या अपनी पहचान बताई, इसके बावजूद उनके साथ कथित तौर पर बल प्रयोग किया गया। याचिका में रिपोर्टिंग के दौरान एक मीडियाकर्मी के घायल होने का भी जिक्र है।
संगठन का कहना है कि भीड़ को नियंत्रित करने के नाम पर पत्रकारों के खिलाफ बल प्रयोग को सामान्य कार्रवाई नहीं माना जा सकता। इससे जनता तक जानकारी पहुंचाने की प्रक्रिया प्रभावित होती है और सरकारी कार्रवाई की स्वतंत्र रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों में डर पैदा होता है।
मौलिक अधिकारों की रक्षा की मांग
फ्री स्पीच कलेक्टिव ने संविधान के अनुच्छेद 14, 19(1)(a), 19(1)(d) और 21 के तहत मिले मौलिक अधिकारों को लागू कराने की मांग की है। ये अनुच्छेद कानून के सामने समानता, बोलने और अभिव्यक्ति की आजादी, देश में स्वतंत्र रूप से आने-जाने के अधिकार और जीवन व व्यक्तिगत स्वतंत्रता की सुरक्षा से जुड़े हैं।
याचिका में कथित घटनाओं की स्वतंत्र और तय समय-सीमा के भीतर जांच कराने, जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों की पहचान करने और हिरासत व बल प्रयोग की परिस्थितियों का पता लगाने के लिए पुलिस के रिकॉर्ड और वीडियो सुरक्षित रखने की मांग भी की गई है।
11 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने दिया था निर्देश
यह याचिका सुप्रीम कोर्ट के 11 अक्टूबर के उस निर्देश के बाद दाखिल की गई है, जिसमें अदालत ने कहा था कि वकीलों, पत्रकारों और अन्य पेशेवरों को अपने पेशेवर कर्तव्यों का पालन करने से किसी भी तरह नहीं रोका जाना चाहिए।
यह निर्देश मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध में हुए प्रदर्शनों के दौरान हिरासत में लिए जाने से जुड़े मामलों पर सुनवाई के बाद दिया गया था।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि अदालत के निर्देश के बाद भी पत्रकारों से जुड़ी कुछ और घटनाएं सामने आईं। संगठन का कहना है कि इससे साफ होता है कि प्रदर्शन और भीड़ नियंत्रण के दौरान पत्रकारों के साथ पुलिस के व्यवहार के लिए अलग और स्पष्ट सुरक्षा व्यवस्था जरूरी है।
10 और 11 अक्टूबर की घटनाओं का जिक्र
याचिका में 10 और 11 अक्टूबर को दिल्ली में प्रदर्शन की रिपोर्टिंग कर रहे पत्रकारों को कथित तौर पर हिरासत में लेने, घसीटने, उनके साथ धक्का-मुक्की करने और रिपोर्टिंग की जगह से दूर ले जाने की घटनाओं का जिक्र किया गया है। इसमें ऐसे मामले भी शामिल हैं, जिनमें पत्रकारों को पुलिस की कार्रवाई रिकॉर्ड करने से रोकने और एक कैमरापर्सन के घायल होने की बात कही गई है।
याचिका के अनुसार, प्रभावित पत्रकारों में Scroll, Newslaundry, Reuters, Business Standard, BOOMLive, India Today, The News Minute, Maktoob Media, The Indian Express, PTI और The Quint समेत कई मीडिया संस्थानों से जुड़े पत्रकार शामिल हैं।
प्रेस कार्ड दिखाने के बाद भी हिरासत में लेने का आरोप
याचिका में Scroll के पत्रकार आयुष तिवारी को एचकेएस सुरजीत भवन के बाहर हिरासत में लिए जाने की घटना का उल्लेख है। आरोप है कि उनके पास प्रेस पास होने के बावजूद उन्हें हिरासत में लिया गया।
इसी तरह, याचिका में Peek TV के पत्रकार वेदांता अग्रवाल और सारा खान को कनॉट प्लेस में कथित तौर पर घसीटकर हिरासत में लेने का जिक्र है। याचिका के अनुसार, दोनों ने अपने प्रेस कार्ड भी दिखाए थे।
इसके अलावा, The News Minute की पत्रकार निधि सुरेश और एक अन्य महिला पत्रकार को कई घंटे तक हिरासत में रखने का आरोप लगाया गया है। याचिका में यह भी कहा गया है कि The Hindu से जुड़ी एक महिला पत्रकार को उनकी पेशेवर पहचान स्वीकार किए जाने के बाद ही छोड़ा गया।
पत्रकारों को प्रदर्शनकारी समझने पर उठाए सवाल
याचिका में आरोप लगाया गया है कि पुलिस ने कुछ पत्रकारों को स्वतंत्र रूप से रिपोर्टिंग करने वाले लोगों के बजाय प्रदर्शन में शामिल लोगों की तरह देखा। संगठन का कहना है कि प्रदर्शनकारियों के पास मौजूद होने या मौके पर भ्रम की स्थिति के कारण पत्रकारों के खिलाफ कार्रवाई की गई।
याचिका में कहा गया है कि किसी प्रदर्शन के पास खड़े होने का मतलब यह नहीं है कि कोई पत्रकार उसमें शामिल है। खबर जुटाने के लिए पत्रकारों को कई बार प्रदर्शनकारियों के करीब खड़े होकर घटनाओं को देखना, सुनना और रिकॉर्ड करना पड़ता है।
संगठन के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों के पास मौजूद होने, कैमरा या रिकॉर्डिंग उपकरण रखने, सवाल पूछने या हिरासत की घटना रिकॉर्ड करने को बल प्रयोग या हिरासत का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए। ऐसा करने से पुलिस की कार्रवाई की निगरानी मुश्किल होती है और प्रदर्शन की रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों में डर पैदा हो सकता है।
सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेशों का भी दिया हवाला
याचिका में सुप्रीम कोर्ट के 18 अगस्त के आदेश का भी हवाला दिया गया है। उस आदेश के तहत छात्र प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की गई थी।
इस समिति को पुलिस कार्रवाई की जरूरत और उसके अनुपात, जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान, महिलाओं के खिलाफ कथित हिंसा और पुलिस की जवाबदेही जैसे मुद्दों की जांच करनी थी।
याचिका में 9 अक्टूबर को सार्वजनिक परिवहन पर लगी पाबंदियों के संबंध में हुई सुनवाई का भी उल्लेख है। उस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जरूरी सार्वजनिक परिवहन पर पूरी तरह रोक लगाना जरूरत से ज्यादा कदम लग रहा है। अदालत ने 10 अक्टूबर के प्रदर्शनों के मद्देनजर मेट्रो सेवाओं और जनता के लिए जारी की जाने वाली सूचनाओं को लेकर निर्देश दिए थे।
दिल्ली में पाबंदियों का भी जिक्र
याचिका में प्रदर्शनों के दौरान लगाई गई कई पाबंदियों का उल्लेख किया गया है। इनमें मेट्रो स्टेशन बंद करना, मध्य दिल्ली के कुछ हिस्सों में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं रोकना, बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात करना और जंतर-मंतर तक पहुंच सीमित करना शामिल है।
संगठन का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट में पहले हुई सुनवाई में पुलिस कार्रवाई और लोगों की आवाजाही पर लगी पाबंदियों जैसे मुद्दों पर विचार किया गया था, लेकिन प्रदर्शन स्थलों तक पत्रकारों की पहुंच और पुलिस कार्रवाई की रिपोर्टिंग करते समय उनके साथ कैसा व्यवहार किया जाना चाहिए, इस बारे में व्यापक व्यवस्था नहीं बनाई गई।
याचिका के अनुसार, 11 अक्टूबर के निर्देश के साथ कोई स्पष्ट कार्यप्रणाली, निगरानी की जिम्मेदारी या शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई करने की व्यवस्था नहीं होने के कारण कथित घटनाओं को रोकने में पर्याप्त मदद नहीं मिली।
पुलिस के रिकॉर्ड और वीडियो सुरक्षित रखने की मांग
फ्री स्पीच कलेक्टिव ने सुप्रीम कोर्ट से 10 अक्टूबर से पत्रकारों से जुड़ी घटनाओं के सभी जरूरी रिकॉर्ड तत्काल सुरक्षित रखने और उन्हें अदालत के सामने पेश करने का निर्देश देने की मांग की है।
इन रिकॉर्ड में शामिल हैं:
याचिका में यह जानकारी भी मांगी गई है कि अलग-अलग जगहों पर किन पत्रकारों और मीडियाकर्मियों को हिरासत में लिया गया, वहां से हटाया गया, दूसरी जगह ले जाया गया, चोट लगी या रिपोर्टिंग करने से रोका गया। साथ ही, उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए बताए गए कानूनी आधार, संबंधित अधिकारियों के नाम, हिरासत की जगह और अवधि तथा उन्हें दी गई चिकित्सा सहायता का ब्योरा भी मांगा गया है।
स्वतंत्र जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
याचिका में पत्रकारों को कथित तौर पर हिरासत में लेने, शारीरिक हिंसा करने, चोट पहुंचाने, जबरन हटाने और रिपोर्टिंग में बाधा डालने के आरोपों की जांच के लिए स्वतंत्र और समयबद्ध व्यवस्था बनाने की मांग की गई है।
इस व्यवस्था के तहत सीधे जिम्मेदार अधिकारियों के साथ-साथ निगरानी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका तय करने की मांग भी की गई है। संगठन ने कानून के अनुसार अनुशासनात्मक या दूसरी कार्रवाई करने, उचित मुआवजा देने और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाने का अनुरोध किया है।
पुलिस और पत्रकारों के बीच व्यवहार के लिए दिशा-निर्देश बनाने की मांग
फ्री स्पीच कलेक्टिव ने सुप्रीम कोर्ट से प्रदर्शन और सार्वजनिक सभाओं के दौरान पुलिस और पत्रकारों के बीच व्यवहार को लेकर बाध्यकारी दिशा-निर्देश बनाने की मांग की है।
प्रस्तावित सुरक्षा उपायों में ये बातें शामिल हैं:
याचिका में सुप्रीम कोर्ट से यह घोषित करने की भी मांग की गई है कि पेशेवर काम कर रहे पत्रकारों को मनमाने तरीके से हिरासत में लेना, जबरन हटाना, डराना, उन पर हमला करना या उनके खिलाफ दूसरे तरह का बल प्रयोग करना संविधान के अनुच्छेद 14, 19(1)(a), 19(1)(d) और 21 के तहत मिले अधिकारों का उल्लंघन है। याचिका में कहा गया है कि ऐसी कार्रवाई जनता के जानने के अधिकार पर भी अनुचित रोक लगाती है।
महिला पत्रकारों की सुरक्षा के लिए अलग याचिका
पत्रकारों के संगठन नेटवर्क ऑफ वुमेन इन मीडिया, इंडिया (NWMI) ने भी प्रदर्शन की रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों की सुरक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट में अलग याचिका दाखिल की है। इस याचिका में महिला पत्रकारों की गरिमा और सुरक्षा पर खास जोर दिया गया है।
NWMI का कहना है कि पुलिस की कथित ज्यादतियों की जांच के लिए पहले से चल रही प्रक्रिया में प्रदर्शन स्थलों तक पत्रकारों की पहुंच, उन्हें हिरासत में लेने या जबरन हटाने और खबर जुटाने के दौरान जरूरी सुरक्षा उपायों पर विशेष ध्यान नहीं दिया गया है।
संगठन ने केंद्र सरकार को यह सुनिश्चित करने का निर्देश देने की मांग की है कि सही तरीके से खबर जुटाने या रिपोर्टिंग करने वाली महिला पत्रकारों को केवल प्रदर्शन, सार्वजनिक सभा, भीड़ नियंत्रण की कार्रवाई या किसी अन्य महत्वपूर्ण सार्वजनिक घटना के पास मौजूद होने के कारण शारीरिक रूप से परेशान न किया जाए, डराया न जाए, मनमाने तरीके से हिरासत में न लिया जाए और जबरन वहां से न हटाया जाए।
ये दोनों ही याचिकाएं अधिवक्ता-ऑन-रिकॉर्ड आरती राजन के माध्यम से दाखिल की गई हैं।
दिल्ली में 10 और 11 अक्टूबर को SIR के खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों के दौरान महिला पत्रकारों के साथ कथित मारपीट, बदसलूकी व मनमाने तरीके से हिरासत में लिए जाने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
दिल्ली में 10 और 11 अक्टूबर को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों की रिपोर्टिंग के दौरान महिला पत्रकारों के साथ कथित मारपीट, बदसलूकी और मनमाने तरीके से हिरासत में लिए जाने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। नेटवर्क ऑफ वुमेन इन मीडिया, इंडिया (NWMI) ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर पत्रकारों की सुरक्षा के लिए ऐसे नियम बनाने की मांग की है, जिनका पालन करना अनिवार्य हो।
NWMI ने अपनी याचिका में दिल्ली पुलिस पर आरोप लगाया है कि राष्ट्रीय राजधानी में विरोध-प्रदर्शनों की रिपोर्टिंग कर रहीं कई महिला पत्रकारों के साथ कथित तौर पर मारपीट और बदसलूकी की गई। उन्हें अपना काम करने से रोका गया और मनमाने तरीके से हिरासत में लिया गया। संगठन के मुताबिक, इन पत्रकारों ने खुद को प्रेस का सदस्य बताया था और अपने वैध प्रेस पहचान पत्र भी दिखाए थे।
प्रेस की आजादी पर असर पड़ने की आशंका
NWMI का कहना है कि पुलिस की कथित कार्रवाई संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत मिली प्रेस की आजादी पर सीधा हमला है। संगठन ने आशंका जताई है कि इस तरह की घटनाओं से पत्रकारों में डर पैदा हो सकता है और वे अपना काम करने से हिचक सकते हैं। इसका असर खास तौर पर उन महिला पत्रकारों पर पड़ सकता है, जो घटनास्थल पर जाकर रिपोर्टिंग करती हैं।
प्रदर्शन के दौरान पुलिस और मीडिया के बीच बातचीत के लिए नियम बनाने की मांग
याचिका में सुप्रीम कोर्ट से मांग की गई है कि वह विरोध-प्रदर्शनों, धरनों और सार्वजनिक सभाओं के दौरान पुलिस और मीडिया के बीच बातचीत और व्यवहार को लेकर स्पष्ट नियम और मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तय करे। इन नियमों का मकसद रिपोर्टिंग कर रहे पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
संगठन ने अदालत से दिल्ली पुलिस को निर्देश देने की भी मांग की है कि वह अपने पेशेवर काम में लगे पत्रकारों को न तो रोके, न उनके साथ मारपीट करे और न ही उन्हें हिरासत में ले। याचिका में यह भी कहा गया है कि रिपोर्टिंग के दौरान महिला पत्रकारों को शारीरिक उत्पीड़न या मनमाने तरीके से हिरासत में लिए जाने से बचाया जाए।
10 और 11 अक्टूबर की घटनाओं की स्वतंत्र जांच की मांग
NWMI ने 10 और 11 अक्टूबर को हुई घटनाओं की स्वतंत्र जांच कराने और कथित मारपीट व हिरासत के लिए जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करने की भी मांग की है।
SIR के खिलाफ दिल्ली में हो रहे हैं प्रदर्शन
यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब SIR प्रक्रिया, मतदाता सूची से कथित तौर पर नाम हटाए जाने और चुनावी अनियमितताओं के आरोपों को लेकर दिल्ली में विपक्षी गठबंधन INDIA के दलों, युवा संगठनों और नागरिक समाज के समूहों की ओर से बड़े स्तर पर प्रदर्शन किए जा रहे हैं। इन प्रदर्शनों के दौरान पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत प्रतिबंध लगाए थे। इसके अलावा कुछ मेट्रो स्टेशनों को बंद किया गया और इंटरनेट सेवाओं पर भी पाबंदियां लगाई गईं।
सुप्रीम कोर्ट ने रविवार को इन प्रतिबंधों पर ध्यान दिया था और सामान्य सेवाएं बहाल करने का आदेश दिया था। NWMI की याचिका का मंगलवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने उल्लेख किए जाने की संभावना है।
दिल्ली व दूसरे शहरों में प्रदर्शनों की कवरेज के दौरान महिला पत्रकारों के साथ कथित मारपीट और गैरकानूनी तरीके से हिरासत में लिए जाने के विरोध में हैदराबाद में महिला पत्रकारों ने प्रदर्शन किया।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
दिल्ली और दूसरे शहरों में प्रदर्शनों की कवरेज के दौरान महिला पत्रकारों के साथ कथित मारपीट, यौन उत्पीड़न और गैरकानूनी तरीके से हिरासत में लिए जाने के विरोध में सोमवार शाम हैदराबाद में महिला पत्रकारों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी टैंक बंड स्थित अंबेडकर की प्रतिमा के पास जुटीं। उन्होंने हिरासत में लिए गए पत्रकारों को रिहा करने, उनके खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने और पुलिस के व्यवहार की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान महिला पत्रकारों ने ऐसे पोस्टर भी दिखाए, जिन पर लिखा था, “मीडिया की आजादी दबाना बंद करो” और “डर हमें चुप नहीं करा पाएगा।”
पत्रकार होने की जानकारी देने के बाद भी हमले का आरोप
प्रदर्शनकारी महिलाओं ने एक बयान में आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों और सादे कपड़ों में मौजूद पुरुषों ने पत्रकारों के प्रेस का सदस्य होने की जानकारी देने के बावजूद उन पर हमला किया। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग से जुड़े विरोध-प्रदर्शनों की रिपोर्टिंग कर रहे पत्रकारों को डराया गया और उनका काम रोकने की कोशिश की गई।
बयान में तीन महिला पत्रकारों के साथ पुलिस की ओर से कथित यौन उत्पीड़न किए जाने के आरोपों का भी जिक्र किया गया।
NHRC ने दिल्ली पुलिस से मांगी रिपोर्ट
मामले पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने दिल्ली पुलिस आयुक्त से दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। प्रदर्शनकारियों ने 11 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट की ओर से गैरकानूनी हिरासत के संबंध में दिए गए निर्देशों का भी उल्लेख किया। उनका कहना था कि अदालत को यह भरोसा दिलाए जाने के बावजूद कि पत्रकारों और दूसरे पेशेवर लोगों को अपना काम करने से नहीं रोका जाएगा, इस तरह की घटनाएं जारी हैं।
प्रेस की आजादी और महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा उठाया
महिला पत्रकारों ने कहा कि पत्रकारों पर इस तरह के कथित हमले प्रेस की आजादी के साथ-साथ महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा का भी उल्लंघन हैं। उन्होंने प्रदर्शनों में शामिल होने आई महिलाओं पर कथित हमलों की भी निंदा की।
प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि पत्रकारों को बिना किसी धमकी या हिरासत के डर के सार्वजनिक कार्यक्रमों और प्रदर्शनों की रिपोर्टिंग करने दी जाए। साथ ही, इन घटनाओं के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
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क्रिस्टन मस्करेनहास ने पब्लिसिस ग्रुप की स्टारकॉम में ग्रुप हेड के रूप में नई जिम्मेदारी संभाली है। इससे पहले वह डब्ल्यूपीपी में एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट क्लाइंट सर्विसेज पद पर थीं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
क्रिस्टन मस्करेनहास (Kristen Mascarenhas) ने पब्लिसिस ग्रुप (Publicis Groupe) की स्टारकॉम (Starcom) में ग्रुप हेड (Group Head) के रूप में नई जिम्मेदारी संभाली है। यह मीडिया और एडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री में उनकी नई पारी है।
स्टारकॉम से जुड़ने से पहले मस्करेनहास डब्ल्यूपीपी (WPP) में एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट - क्लाइंट सर्विसेज (Associate Vice President – Client Services) के पद पर थीं। उन्होंने अगस्त 2026 में यह भूमिका संभाली थी।
इससे पहले उन्होंने माइंडशेयर (Mindshare) में तीन साल से अधिक समय तक काम किया। जनवरी से अगस्त 2023 के बीच वह मर्कल सोक्राटी (Merkle Sokrati) में मैनेजर - बिजनेस स्ट्रैटेजी (Manager – Business Strategy) के पद पर भी रहीं। मस्करेनहास ने लिंक्डइन (LinkedIn) पर अपनी नई भूमिका की जानकारी साझा करते हुए इसे अपने करियर का नया अध्याय बताया।