क्विंट डिजिटल लिमिटेड के निदेशक मंडल की बैठक 9 अक्टूबर 2026 को होने जा रही है।
by
Vikas Saxena
क्विंट डिजिटल लिमिटेड के निदेशक मंडल की बैठक 9 अक्टूबर 2026 को होने जा रही है। कंपनी ने 6 अक्टूबर को शेयर बाजार को दी जानकारी में बताया कि इस बैठक में 82,61,401 आंशिक रूप से चुकता वारंट से जुड़ी फर्स्ट एंड फाइनल कॉल मनी पर विचार किया जाएगा।
कंपनी के मुताबिक, ये वारंट 10 रुपये अंकित मूल्य के हैं और इन्हें 11 सितंबर 2026 को राइट्स आधार पर जारी और आवंटित किया गया था। इन वारंट का आवंटन कंपनी की 19 अगस्त 2026 की लेटर ऑफ ऑफर के तहत किया गया था।
रिकॉर्ड डेट भी तय हो सकती है
क्विंट डिजिटल ने बताया कि बोर्ड बैठक में इन वारंट के लिए फर्स्ट एंड फाइनल कॉल मनी नोटिस पर विचार कर उसे मंजूरी दी जा सकती है। इसके साथ ही बोर्ड रिकॉर्ड डेट तय करने पर भी विचार करेगा। इसके अलावा कॉल मनी के भुगतान का कार्यक्रम और इससे जुड़े अन्य जरूरी व इससे जुड़े मामलों पर भी फैसला लिया जाएगा।
82.61 लाख वारंट पर होगी कॉल मनी
कंपनी ने अपनी सूचना में बताया है कि बैठक में 82,61,401 आंशिक रूप से चुकता वारंट के लिए फर्स्ट एंड फाइनल कॉल मनी से जुड़े मामलों पर विचार किया जाएगा। हालांकि, कंपनी ने इस सूचना में यह नहीं बताया है कि प्रति वारंट कितनी कॉल मनी देनी होगी।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शशिकुमार श्रीधरन को सर्वम एआई में प्रेसिडेंट और चीफ बिजनेस ऑफिसर नियुक्त किया गया है। वह कंपनी की बिजनेस स्ट्रैटेजी और ग्लोबल एआई ग्रोथ को आगे बढ़ाएंगे।
by
Samachar4media Bureau
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शशिकुमार श्रीधरन (Shashikumar Sridharan) को सर्वम एआई (Sarvam AI) में प्रेसिडेंट और चीफ बिजनेस ऑफिसर (President and Chief Business Officer) नियुक्त किया गया है। नई भूमिका में वह कंपनी की बिजनेस स्ट्रैटेजी को आगे बढ़ाने और ग्रोथ को मजबूत करने की जिम्मेदारी संभालेंगे। कंपनी भारत और ग्लोबल मार्केट्स में अपनी एआई (AI) पेशकशों का विस्तार कर रही है।
शशिकुमार श्रीधरन हाल ही में गूगल क्लाउड इंडिया (Google Cloud India) के मैनेजिंग डायरेक्टर (Managing Director) पद से हटे हैं। उनकी जगह गूगल क्लाउड इंडिया में डिजिटल नेटिव्स बिजनेस (Digital Natives Business) के मैनेजिंग डायरेक्टर अमित कुमार (Amit Kumar) को अंतरिम लीडर नियुक्त किया गया है। गूगल क्लाउड के एशिया पैसिफिक प्रेसिडेंट करण बाजवा (Karan Bajwa) ने लिंक्डइन (LinkedIn) पोस्ट के जरिए नेतृत्व में बदलाव की जानकारी दी थी।
सर्वम एआई हाल ही में अपनी फंडिंग को लेकर भी चर्चा में रहा है। कंपनी ने 300 मिलियन डॉलर की सीरीज बी (Series B) फंडिंग के पहले चरण में 234 मिलियन डॉलर जुटाए हैं। इस निवेश के बाद कंपनी का पोस्ट-मनी वैल्यूएशन 1.5 बिलियन डॉलर हो गया है।
इस फंडिंग राउंड में एचसीएलटेक (HCLTech) और बेसमर वेंचर पार्टनर्स (Bessemer Venture Partners) ने निवेश किया है। कंपनी के मौजूदा निवेशकों खोसला वेंचर्स (Khosla Ventures) और पीक XV पार्टनर्स (Peak XV Partners) ने भी इस राउंड में अपना समर्थन जारी रखा है। नई भूमिका में श्रीधरन का फोकस सर्वम एआई की बिजनेस स्ट्रैटेजी को मजबूत करने और भारत के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कंपनी के एआई बिजनेस के विस्तार को गति देने पर रहेगा।
डीबी कॉर्प लिमिटेड ने 30 सितंबर 2026 को खत्म हुई तिमाही के लिए शेयरों से जुड़ी एक अहम जानकारी शेयर बाजार को दी है।
by
Vikas Saxena
डीबी कॉर्प लिमिटेड ने 30 सितंबर 2026 को खत्म हुई तिमाही के लिए शेयरों से जुड़ी एक अहम जानकारी शेयर बाजार को दी है। कंपनी ने बताया कि इस तिमाही के दौरान उसे शेयरों को डिमैट कराने से जुड़ी कोई भी रिक्वेस्ट नहीं मिली।
कंपनी ने 6 अक्टूबर 2026 को बीएसई और एनएसई को दी जानकारी में बताया कि उसने सेबी के डिपॉजिटरीज एंड पार्टिसिपेंट्स रेग्युलेशन, 2018 के रेग्युलेशन 74(5) के तहत जरूरी प्रमाणपत्र जमा किया है।
यह प्रमाणपत्र कंपनी के रजिस्ट्रार और शेयर ट्रांसफर एजेंट केफिन टेक्नोलॉजीज लिमिटेड ने जारी किया है।
सभी शेयर पहले से इलेक्ट्रॉनिक रूप में हैं
केफिन टेक्नोलॉजीज की ओर से जारी प्रमाणपत्र में कहा गया है कि 30 सितंबर 2026 को खत्म हुई तिमाही के दौरान डिमैट रिक्वेस्ट प्रोसेसिंग के लिए कोई अनुरोध प्राप्त नहीं हुआ। इसका कारण यह बताया गया है कि डीबी कॉर्प के सभी शेयर पहले से ही इलेक्ट्रॉनिक यानी डिमैट रूप में रखे गए हैं।
इसलिए तिमाही के दौरान किसी शेयर को भौतिक रूप से इलेक्ट्रॉनिक रूप में बदलने के लिए कोई डिमैट अनुरोध प्राप्त नहीं हुआ।
कंपनी ने शेयर बाजार को सौंपा प्रमाणपत्र
डीबी कॉर्प ने केफिन टेक्नोलॉजीज की ओर से जारी इस पुष्टि प्रमाणपत्र को बीएसई और एनएसई के रिकॉर्ड में लेने का अनुरोध किया है। कंपनी ने यह जानकारी सेबी के डिपॉजिटरीज एंड पार्टिसिपेंट्स रेग्युलेशन, 2018 के रेग्युलेशन 74(5) के तहत दी है। कंपनी के शेयर बीएसई पर 533151 और एनएसई पर DBCORP नाम से सूचीबद्ध हैं।
गूगल जेमिनी में 9 अक्टूबर से मॉडल एक्सेस प्लान के हिसाब से बदलेगा। फ्री यूजर्स को फ्लैश-लाइट, AI प्लस यूजर्स को फ्लैश-लाइट और फ्लैश मॉडल मिलेंगे। प्रो मॉडल के लिए प्लान होगा।
by
Samachar4media Bureau
गूगल जेमिनी (Google Gemini) इस्तेमाल करने वालों के लिए 9 अक्टूबर 2026 से बड़ा बदलाव होने वाला है। कंपनी अलग-अलग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल (AI Models) का एक्सेस यूजर के प्लान के हिसाब से तय करेगी। इसका असर फ्री यूजर्स के साथ एआई प्लस सब्सक्राइबर्स पर भी पड़ेगा।
नए नियमों के बाद फ्री यूजर्स को सिर्फ फ्लैश-लाइट मॉडल (Flash-Lite Model) मिलेगा। वहीं, एआई प्लस यूजर्स फ्लैश-लाइट और फ्लैश मॉडल (Flash Model) इस्तेमाल कर सकेंगे। एआई प्लस यूजर्स को प्रो मॉडल (Pro Model) का एक्सेस नहीं मिलेगा।
भारत में एआई प्लस प्लान की कीमत 399 रुपये प्रति महीना है। इस प्लान में यूजर्स फ्लैश-लाइट और फ्लैश मॉडल इस्तेमाल कर पाएंगे, लेकिन जेमिनी प्रो जैसे ज्यादा पावरफुल मॉडल उपलब्ध नहीं होंगे। बड़े और ज्यादा पावरफुल जेमिनी मॉडल इस्तेमाल करने के लिए यूजर्स को गूगल एआई प्रो (Google AI Pro) या गूगल एआई अल्ट्रा (Google AI Ultra) लेना होगा।
गूगल एआई प्रो की कीमत 1,950 रुपये और गूगल एआई अल्ट्रा की शुरुआती कीमत 6,500 रुपये प्रति महीना है। इन दोनों प्लान में यूजर्स को फ्लैश-लाइट, फ्लैश और प्रो मॉडल का एक्सेस मिलता रहेगा।
कंपनी जेमिनी ऐप में मॉडल चुनने के तरीके में भी बदलाव कर रही है। यूजर्स हर उपलब्ध मॉडल के लिए कम, मीडियम और ज्यादा एफर्ट लेवल (Effort Level) चुन सकेंगे। ज्यादा एफर्ट लेवल पर मॉडल किसी काम को पूरा करने और बेहतर जवाब देने के लिए ज्यादा क्षमता इस्तेमाल करेगा। हालांकि, इससे यूजर्स की इस्तेमाल सीमा भी जल्दी खत्म हो सकती है।
गूगल के मुताबिक, नए एफर्ट लेवल से जेमिनी ऐप में काम करने का तरीका गूगल एआई स्टूडियो (Google AI Studio) और एंटिग्रिटी के विकल्पों जैसा होगा।
ये बदलाव कंपनी के नए जेमिनी 4 आर्गन (Gemini 4 Argon) मॉडल की घोषणा के कुछ दिनों बाद आ रहे हैं। गूगल ने आर्गन को अपना अब तक का सबसे पावरफुल एआई मॉडल बताया है। हालांकि, फिलहाल यह मॉडल कुछ खास साझेदारों के लिए उपलब्ध है। एआई प्लस यूजर्स को बदलाव की जानकारी ईमेल से मिलेगी।
नए अपडेट का एक बड़ा हिस्सा YouTube Studio को न्यूजरूम के लिए ज्यादा उपयोगी बनाने पर केंद्रित है। YouTube अपने Insights और Research फीचर्स को बढ़ा रहा है।
by
Samachar4media Bureau
यूट्यूब (YouTube) ने न्यूज ऑर्गनाइजेशंस और न्यूजरूम के लिए कई नए टूल्स पेश किए हैं। इनका मकसद न्यूज स्टोरी को बेहतर तरीके से तैयार करने, दर्शकों के व्यवहार को समझने, नियमित कमाई बढ़ाने और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए पत्रकारों की पहचान और कंटेंट के गलत इस्तेमाल से सुरक्षा देने में मदद करना है।
इन नए फीचर्स की घोषणा न्यूयॉर्क में आयोजित YouTube के 14वें न्यूज वर्किंग ग्रुप में की गई। इस कार्यक्रम में दुनिया भर के 100 से ज्यादा न्यूज पार्टनर्स शामिल हुए और डिजिटल पत्रकारिता के भविष्य पर चर्चा की गई।
YouTube के मुताबिक, प्लेटफॉर्म पर न्यूज देखने का चलन लगातार बढ़ रहा है। 2025 में दुनियाभर के यूजर्स ने 35 अरब घंटे से ज्यादा न्यूज कंटेंट देखा। इनमें से 12 अरब घंटे से ज्यादा कंटेंट कनेक्टेड टीवी पर देखा गया। इससे पता चलता है कि लोग अब सिर्फ मोबाइल और कंप्यूटर पर ही नहीं, बल्कि टीवी पर भी YouTube के जरिए न्यूज देख रहे हैं।
YouTube Studio में मिलेंगे ज्यादा डेटा और इनसाइट्स
नए अपडेट का एक बड़ा हिस्सा YouTube Studio को न्यूजरूम के लिए ज्यादा उपयोगी बनाने पर केंद्रित है। YouTube अपने Insights और Research फीचर्स को बढ़ा रहा है। इससे एडिटोरियल टीम यह समझ सकेगी कि उनकी कवरेज को दर्शकों का कैसा रिस्पॉन्स मिल रहा है और किन विषयों में लोगों की दिलचस्पी बढ़ रही है।
इसका इस्तेमाल सिर्फ वीडियो के लाइव होने के बाद व्यूज देखने तक सीमित नहीं रहेगा। न्यूजरूम यह समझ सकेंगे कि दर्शक किस तरह की खबरों और कंटेंट पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं। इसके आधार पर वे आगे की कवरेज और एडिटोरियल संसाधनों को लेकर फैसले ले सकेंगे।
वीडियो तैयार करते समय भी मिलेगा AI फीडबैक
YouTube वीडियो तैयार करने के दौरान भी फीडबैक देने वाले फीचर्स ला रहा है। ये टूल्स नैरेटिव फ्लो, पेसिंग और स्टोरीटेलिंग स्ट्रक्चर जैसे पहलुओं पर इनपुट दे सकेंगे। यानी वीडियो पब्लिश होने से पहले ही न्यूजरूम को यह समझने में मदद मिल सकती है कि कहानी को किस तरह और बेहतर तरीके से पेश किया जा सकता है।
थंबनेल की भी होगी टेस्टिंग
YouTube ने थंबनेल को लेकर भी नए फीचर्स पेश किए हैं। डायनेमिक थंबनेल के जरिए ऑडियंस के अलग-अलग हिस्सों को प्रदर्शन के आधार पर अलग वर्जन दिखाए जा सकेंगे। इससे हर दर्शक को एक ही थंबनेल दिखाने के बजाय अलग-अलग विकल्पों को आजमाया जा सकेगा।
इसके अलावा आने वाले वीडियो A/B टेस्टिंग टूल के जरिए न्यूज ऑर्गनाइजेशन अलग-अलग हुक, स्टोरीटेलिंग फॉर्मेट और विजुअल्स को टेस्ट कर सकेंगे। इससे यह तुलना करने में मदद मिलेगी कि किस तरीके से दर्शकों की बेहतर प्रतिक्रिया मिल रही है।
पुरानी खबरों को फिर से सामने लाने में मदद करेगा Ask Studio
YouTube अपने AI-पावर्ड Ask Studio का इस्तेमाल पुरानी कवरेज को दोबारा दर्शकों तक पहुंचाने के लिए भी कर रहा है। यह पुराने वीडियो को देखकर नए थंबनेल जैसे बदलाव सुझा सकता है। इससे न्यूज ऑर्गनाइजेशन की पुरानी और उपयोगी रिपोर्टिंग को दोबारा ऑडियंस के सामने लाने में मदद मिल सकती है, बजाय इसके कि नई वीडियो के आने के बाद पुरानी स्टोरी पीछे छूट जाए।
मेंबरशिप के जरिए नियमित कमाई पर भी जोर
YouTube ने न्यूज ऑर्गनाइजेशन के लिए कमाई से जुड़े फीचर्स पर भी ध्यान दिया है। प्लेटफॉर्म के मुताबिक, Channel Memberships के जरिए पिछले पांच साल में क्रिएटर्स को 1.5 अरब डॉलर से ज्यादा का भुगतान किया गया है। अब YouTube में मेंबर्स के लिए एक अलग इन-ऐप हब भी जोड़ा जा रहा है। इसमें सदस्य सिर्फ मेंबर्स के लिए उपलब्ध कंटेंट आसानी से खोज सकेंगे।
संभावित सदस्य सब्सक्राइब करने से पहले members-only वीडियो का प्रीव्यू भी देख सकेंगे। इसके अलावा YouTube members-only communities भी शुरू कर रहा है। इससे न्यूज ऑर्गनाइजेशन अपने दर्शकों के साथ ज्यादा सीधा और नियमित जुड़ाव बना सकेंगे।
AI से पत्रकारों की आवाज और चेहरे की सुरक्षा
नए अपडेट का सबसे संवेदनशील हिस्सा पत्रकारों और क्रिएटर्स की डिजिटल पहचान से जुड़ा है। जनरेटिव AI की मदद से किसी व्यक्ति के चेहरे और आवाज की नकल करना आसान हो गया है। ऐसे में YouTube पत्रकारों और क्रिएटर्स को उनकी पहचान के गलत इस्तेमाल पर ज्यादा नियंत्रण देने की दिशा में काम कर रहा है।
YouTube के पास पहले से Likeness Detection फीचर है। इसके जरिए क्रिएटर्स अपनी दृश्य पहचान यानी चेहरे के अनधिकृत इस्तेमाल को पहचान और मैनेज कर सकते हैं।
अब YouTube Speaking-Voice Detection को Facial Detection के साथ जोड़ने की योजना बना रहा है। इसका मकसद ऐसे कंटेंट को पहचानना आसान बनाना है जिसमें किसी क्रिएटर या पत्रकार के चेहरे और आवाज की नकल की गई हो।
Likeness Detection को YouTube के मोबाइल ऐप में भी लाया जाएगा। इसके बाद न्यूज क्रिएटर्स मोबाइल से ही सिस्टम सेट कर सकेंगे, अपनी पहचान के संभावित इस्तेमाल की समी`क्षा कर सकेंगे और जरूरत पड़ने पर उस पर कार्रवाई कर सकेंगे।
एक ही जगह पर न्यूज के कई पहलुओं पर फोकस
YouTube के नए टूल्स न्यूज बिजनेस के कई हिस्सों को कवर करते हैं। इनमें ऑडियंस की पसंद समझना, स्टोरी को बेहतर बनाना, अलग-अलग पैकेजिंग को टेस्ट करना, पुराने कंटेंट को दोबारा दर्शकों तक पहुंचाना, मेंबरशिप से कमाई बढ़ाना और पत्रकारों की डिजिटल पहचान की सुरक्षा शामिल है।
2025 में YouTube पर 35 अरब घंटे से ज्यादा न्यूज देखे जाने और इनमें 12 अरब घंटे से ज्यादा कनेक्टेड टीवी पर देखे जाने के आंकड़ों के बीच इन नए फीचर्स का न्यूज ऑर्गनाइजेशन के लिए महत्व बढ़ जाता है।
अब न्यूज संस्थानों के सामने इन टूल्स को एक साथ इस्तेमाल करने की चुनौती होगी- दर्शकों की पसंद समझने से लेकर खबर को बेहतर तरीके से पेश करने, उसे ज्यादा लोगों तक पहुंचाने, दर्शकों को दोबारा जोड़ने, कुछ दर्शकों को पेड मेंबर बनाने और AI के दौर में पत्रकारों की डिजिटल पहचान को सुरक्षित रखने तक।
टाइम्स ऑफ इंडिया डिजिटल (TOI Digital) ने मेघना डेका को नेशनल एडिटर और वीडियो स्ट्रैटेजी की हेड नियुक्त किया है।
by
Samachar4media Bureau
टाइम्स ऑफ इंडिया डिजिटल (TOI Digital) ने मेघना डेका को नेशनल एडिटर और वीडियो स्ट्रैटेजी की हेड नियुक्त किया है। अपनी नई भूमिका में मेघना, TOI Digital के वीडियो कारोबार की रणनीति और उसके विस्तार की जिम्मेदारी संभालेंगी। वह टाइम्स ऑफ इंडिया डिजिटल की एग्जिक्यूटिव एडिटर-वीडियो अदिति प्रसाद को रिपोर्ट करेंगी।
मेघना की जिम्मेदारी में टाइम्स ऑफ इंडिया के मौजूदा वीडियो पोर्टफोलियो के साथ-साथ नए वीडियो प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ाना शामिल होगा। खास तौर पर वह Times Axis, TOI Bharat और Defence HQ के यूट्यूब चैनलों को अलग पहचान वाले वीडियो प्लेटफॉर्म के तौर पर विकसित करने और उनका विस्तार करने पर काम करेंगी।
इसके अलावा वह संपादकीय और बिजनेस टीमों के साथ मिलकर नए वीडियो फॉर्मेट, फ्रेंचाइजी और दर्शकों से जुड़ने के नए अवसरों पर भी काम करेंगी। यह काम TOI Digital के अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स के लिए किया जाएगा।
ब्रॉडकास्ट जर्नलिज्म में 22 साल से ज्यादा का अनुभव
मेघना डेका को ब्रॉडकास्ट जर्नलिज्म में 22 साल से ज्यादा का अनुभव है। वह इससे पहले Times Now में एडिटर-आउटपुट और प्राइम-टाइम एंकर के तौर पर काम कर चुकी हैं। उन्होंने ‘Decoding Now with Meghna Deka’ और ‘Setting the Agenda’ जैसे कार्यक्रमों को एंकर किया है।
Times Now में हेड ऑफ आउटपुट के तौर पर उन्होंने पिछले करीब 8 साल तक चैनल की रणनीति को लीड किया। इससे पहले वह CNN-News18, India Today, NewsX और NDTV में भी संपादकीय भूमिकाओं में काम कर चुकी हैं और एंकरिंग की है।
वीडियो अब न्यूज देखने का अहम जरिया: अदिति प्रसाद
मेघना डेका की नियुक्ति पर अदिति प्रसाद, एग्जीक्यूटिव एडिटर-वीडियो, Times of India Digital ने कहा कि आज वीडियो इस बात का अहम हिस्सा बन गया है कि दर्शक न्यूज को कैसे खोजते और देखते हैं।
उन्होंने कहा कि मेघना ने दो दशक से ज्यादा समय न्यूजरूम में बिताया है और Times Now में प्राइम-टाइम न्यूज के प्रमुख चेहरों में रही हैं। उनके मुताबिक मेघना को अच्छी तरह पता है कि दर्शकों का ध्यान किस तरह बनाए रखा जा सकता है।
अदिति प्रसाद ने कहा कि अब लक्ष्य सिर्फ वीडियो बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि मजबूत वीडियो ब्रैंड तैयार करना है। उन्होंने कहा कि Defence HQ और Times Axis जैसे प्लेटफॉर्म्स से यह पता चला है कि दर्शकों के बीच फोकस्ड और भरोसेमंद वीडियो कंटेंट की मांग है।
'सिर्फ ज्यादा वीडियो बनाने से बात नहीं बनेगी': मेघना डेका
अपनी नियुक्ति पर मेघना डेका ने कहा कि उन्होंने वर्षों तक दर्शकों को सिर्फ हेडलाइन से आगे की पूरी कहानी समझाने की कोशिश की है और वीडियो इसके लिए एक प्रभावी माध्यम है।
उन्होंने कहा कि न्यूज वीडियो का अगला दौर सिर्फ ज्यादा से ज्यादा वीडियो बनाने से तय नहीं होगा। इसके बजाय ऐसे फॉर्मेट जरूरी होंगे, जिनकी अपनी अलग पहचान और आवाज हो और जिन्हें दर्शक दोबारा देखना चाहें।
मेघना ने कहा कि Times of India की पहुंच और भरोसे के साथ-साथ Times Axis और Defence HQ जैसे प्लेटफॉर्म पहले से दिशा दिखा रहे हैं और ऐसे समय में कुछ नया तैयार करने का यह महत्वपूर्ण मौका है।
क्विंट डिजिटल लिमिटेड ने अपने शेयरधारकों से पोस्टल बैलेट के जरिए 9 अहम प्रस्तावों पर मंजूरी मांगी है।
by
Vikas Saxena
क्विंट डिजिटल लिमिटेड ने अपने शेयरधारकों से पोस्टल बैलेट के जरिए 9 अहम प्रस्तावों पर मंजूरी मांगी है। इनमें कंपनी की अमेरिका स्थित Lee Enterprises Inc. में हिस्सेदारी पर कर्ज के लिए सुरक्षा बनाने, RB Diversified Private Limited को 120 करोड़ रुपये तक का कर्ज देने और कई संबंधित पक्षों के साथ लेन-देन से जुड़े प्रस्ताव शामिल हैं। कंपनी ने इसकी जानकारी 1 अक्टूबर 2026 को शेयर बाजार को दी है।
कंपनी ने बताया कि शेयरधारकों की मंजूरी ई-वोटिंग के जरिए ली जाएगी। इसके लिए वोटिंग 2 अक्टूबर 2026 को सुबह 9 बजे शुरू होगी और 31 अक्टूबर 2026 को शाम 5 बजे खत्म होगी।
Lee Enterprises में हिस्सेदारी को लेकर पहला प्रस्ताव
पहले प्रस्ताव में क्विंट डिजिटल ने अपनी Lee Enterprises Inc. में मौजूद हिस्सेदारी को लेकर बोर्ड को सुरक्षा बनाने की मंजूरी देने की बात कही है। कंपनी के पास Lee Enterprises के 32,44,800 शेयर हैं। कंपनी या उसकी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनियां भविष्य में कर्ज या अन्य वित्तीय सुविधा ले सकती हैं, जिसके लिए इन शेयरों को सुरक्षा के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है।
प्रस्ताव में कंपनी के बोर्ड को इन शेयरों पर गिरवी, चार्ज या दूसरी तरह की सुरक्षा बनाने की अनुमति देने की बात है। साथ ही, जरूरत पड़ने पर कंपनी अपनी इस हिस्सेदारी को बेच भी सकती है। हालांकि, दस्तावेज में साफ कहा गया है कि अभी बोर्ड ने Lee Enterprises में अपनी हिस्सेदारी बेचने का कोई फैसला मंजूर नहीं किया है। यह प्रस्ताव फिलहाल एक सक्षम मंजूरी के तौर पर रखा गया है, ताकि जरूरत पड़ने पर कंपनी वित्त जुटा सके।
RB Diversified को 120 करोड़ रुपये तक कर्ज
दूसरे प्रस्ताव में RB Diversified Private Limited को कर्ज देने के लिए शेयरधारकों की मंजूरी मांगी गई है। इसके तहत कंपनी एक या कई चरणों में कर्ज दे सकती है और किसी भी समय इस कर्ज की कुल बकाया राशि 120 करोड़ रुपये से ज्यादा नहीं होगी। कर्ज का इस्तेमाल RB Diversified अपने मुख्य कारोबार और कार्यशील पूंजी की जरूरतों के लिए करेगी।
इसी कंपनी के साथ कर्ज से जुड़े 120 करोड़ रुपये तक के संबंधित पक्ष के लेन-देन को मंजूरी देने का प्रस्ताव भी रखा गया है।
Shvaas Creations को 5 करोड़ रुपये तक कर्ज
चौथे प्रस्ताव में Shvaas Creations Private Limited को कर्ज देने की मंजूरी मांगी गई है। कंपनी के मुताबिक, Shvaas एक सहायक कंपनी और संबंधित पक्ष है।
प्रस्ताव के तहत Shvaas को उसकी फंडिंग और कार्यशील पूंजी की जरूरतों के लिए अधिकतम 5 करोड़ रुपये तक का कर्ज दिया जा सकता है। यह कर्ज असुरक्षित होगा और इसकी ब्याज दर कंपनी द्वारा लिए गए किसी भी कर्ज की सबसे ऊंची ब्याज दर से 68 बेसिस पॉइंट ज्यादा रखने का प्रस्ताव है। कर्ज की अवधि 12 महीने तक या आपसी सहमति से तय दूसरी अवधि हो सकती है।
Make A Difference Hospitality के साथ 50 करोड़ रुपये तक का समझौता
पांचवें प्रस्ताव में Make A Difference Hospitality Private Limited के साथ संबंधित पक्ष के लेन-देन को मंजूरी देने की बात है। इसके तहत कंपनी की जगह, उससे जुड़ी सप्लाई, सेवाओं और संसाधनों के इस्तेमाल को लेकर समझौता किया जा सकता है।
इस लेन-देन की कुल सीमा प्रति वर्ष 50 करोड़ रुपये तक रखी गई है।
Quintype से जुड़े कई प्रस्ताव
क्विंट डिजिटल ने अपनी सहायक कंपनियों Quintype Technologies India Limited, Quintype Technologies Inc. और Quintype Services India Private Limited के साथ जुड़े कई लेन-देन की सीमा और अवधि में बदलाव के लिए भी शेयरधारकों की मंजूरी मांगी है।
एक प्रस्ताव के तहत Quintype Technologies India Limited की ओर से Quintype Technologies Inc. को प्रोडक्ट की बिक्री, प्लेटफॉर्म लाइसेंस, होस्टिंग, मानव संसाधन, प्रशासन, वित्त, बैक-ऑफिस सपोर्ट, रिसर्च एंड डेवलपमेंट जैसी सेवाएं दी जा सकती हैं। इसके लिए 5 साल की अवधि और अलग-अलग वित्त वर्षों के लिए 25 करोड़ रुपये से 75 करोड़ रुपये तक की सालाना सीमा प्रस्तावित है।
एक अन्य प्रस्ताव में Quintype Services India Private Limited की ओर से लोगों और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े संसाधन, प्रशासन, वित्त, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, प्रोडक्ट इंजीनियरिंग, तकनीकी सहायता और ग्राहक सेवा जैसी सेवाओं का प्रावधान शामिल है। इसके लिए भी 2031 तक की अवधि और वित्त वर्ष के हिसाब से 25 करोड़ रुपये से 75 करोड़ रुपये तक की सीमा प्रस्तावित है।
RBD Real Estate को 100 करोड़ रुपये तक वित्तीय मदद
नौवें प्रस्ताव में कंपनी की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी Global Media Technologies Inc. समेत अन्य पूर्ण स्वामित्व वाली विदेशी सहायक कंपनियों को RBD Real Estate Inc. और उसकी विदेशी सहयोगी कंपनियों को कर्ज, अग्रिम या अन्य वित्तीय मदद देने की अनुमति मांगी गई है।
इसकी कुल बकाया सीमा किसी भी समय 100 करोड़ रुपये तक रखने का प्रस्ताव है। यह वित्तीय मदद तय नियमों के मुताबिक और सामान्य व्यावसायिक शर्तों पर देने की बात कही गई है।
31 अक्टूबर तक वोटिंग
क्विंट डिजिटल के शेयरधारकों के लिए ई-वोटिंग 2 अक्टूबर सुबह 9 बजे से 31 अक्टूबर शाम 5 बजे तक चलेगी। 25 सितंबर 2026 की कट-ऑफ तारीख पर कंपनी के शेयर रखने वाले सदस्य इन प्रस्तावों पर वोट कर सकेंगे।
कंपनी ने ई-वोटिंग की सुविधा के लिए सीडीएसएल की सेवाएं ली हैं। प्रस्तावों पर मतदान के बाद स्क्रूटिनाइजर रिपोर्ट के आधार पर नतीजे जारी किए जाएंगे। अगर जरूरी बहुमत से प्रस्ताव मंजूर होते हैं, तो इन्हें 31 अक्टूबर 2026, यानी ई-वोटिंग की आखिरी तारीख को पारित माना जाएगा।
ऐपल पे ने एक्सिस बैंक के साथ साझेदारी कर भारत में अपनी भुगतान सेवा शुरू की है, शुरुआत में वीजा और मास्टरकार्ड क्रेडिट कार्ड ग्राहकों को सुविधा मिलेगी, रुपे कार्ड पात्र नहीं हैं।
by
Samachar4media Bureau
ऐपल (Apple) ने भारत में अपनी पेमेंट सर्विस ऐपल पे (Apple Pay) लॉन्च कर दी है। इसके साथ ही कंपनी ने दुनिया के बड़े डिजिटल पेमेंट मार्केट्स में से एक भारत में अपनी सेवा की शुरुआत की है। इसके लिए एप्पल ने एक्सिस बैंक (Axis Bank) के साथ साझेदारी की है।
फिलहाल ऐपल पे की सुविधा एक्सिस बैंक के वीजा (Visa) और मास्टरकार्ड (Mastercard) नेटवर्क वाले क्रेडिट कार्ड ग्राहकों के लिए उपलब्ध है। भारत के घरेलू रुपे (RuPay) नेटवर्क पर जारी कार्ड अभी इस सेवा के लिए पात्र नहीं हैं।
ऐपल की ऐपल पे और ऐपल वॉलेट की वाइस प्रेसिडेंट जेनिफर बेली (Jennifer Bailey) ने कहा कि भारत की डिजिटल रूप से सक्रिय आबादी कैशलेस भविष्य को अपना रही है और सुरक्षा व प्राइवेसी के उच्च मानकों की उम्मीद करती है। उन्होंने भारत में ऐपल पे लाने को लेकर उत्साह जताया।
कंपनी के मुताबिक, ऐपल पे के जरिए स्टोर, ऑनलाइन और ऐप्स में आसानी से भुगतान किया जा सकता है। इसमें पूरा भुगतान करने, समय के साथ भुगतान करने और रिवॉर्ड्स के इस्तेमाल जैसी सुविधाएं शामिल हैं। कंपनी ने इसे सुरक्षित और प्राइवेट पेमेंट सर्विस बताया है।
दीपक सिंह को ओपनएआई में पार्टनर डायरेक्टर, इंडिया नियुक्त किया गया है। वह भारत में जीटीएम पार्टनरशिप को तैयार करने और विस्तार देने की जिम्मेदारी संभालेंगे।
by
Samachar4media Bureau
दीपक सिंह (Deepak Singh) को ओपनएआई (OpenAI) में पार्टनर डायरेक्टर, इंडिया (Partner Director, India) नियुक्त किया गया है। उन्होंने लिंक्डइन (LinkedIn) पोस्ट के जरिए अपनी नई भूमिका की जानकारी साझा की।
दीपक सिंह ने कहा कि वह ओपनएआई के साथ नई शुरुआत को लेकर उत्साहित हैं और भारत में जीटीएम पार्टनरशिप (GTM Partnerships) को तैयार करने और बड़े स्तर पर विस्तार देने में योगदान करेंगे।
दीपक के पास 23 वर्षों से ज्यादा का ईएनटी (ENT) अनुभव है, जिसमें 12 से अधिक वर्षों का अनुभव क्लाउड कंप्यूटिंग और डेटा/एआई (Cloud Computing & Data/AI) इकोसिस्टम में रहा है। उन्होंने इंटेल (Intel), हेवलेट पैकार्ड (Hewlett Packard), वीएमवेयर (VMware), अमेजन वेब सर्विसेज (Amazon Web Services) और गूगल (Google) जैसी प्रमुख कंपनियों के साथ काम किया है।
अपने करियर में दीपक भारत और सार्क क्षेत्र (SAARC Region) में एडब्ल्यूएस (AWS), गूगल क्लाउड (Google Cloud) और वीएमवेयर के शुरुआती विस्तार और बिल्ड-अप फेज (Build-up Phase) का हिस्सा रहे हैं। उन्हें अलग-अलग इंडस्ट्रीज में क्लाउड एडॉप्शन पैटर्न (Cloud Adoption Patterns) का भी अनुभव है।
ओपनएआई से पहले दीपक सिंह पालो ऑल्टो नेटवर्क्स (Palo Alto Networks) में इंडिया और सार्क के लिए सीनियर डायरेक्टर (Sr Director) के तौर पर एंटरप्राइज बिजनेस (Enterprise Business) संभाल रहे थे।
यूट्यूब, बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मेटा के बहु-राज्यीय सेटलमेंट में शामिल होने की योजना नहीं बना रहा है।
by
Samachar4media Bureau
यूट्यूब, बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मेटा के बहु-राज्यीय सेटलमेंट में शामिल होने की योजना नहीं बना रहा है। यूट्यूब के सीईओ नील मोहन ने इसकी वजह बताते हुए कहा कि प्लेटफॉर्म पहले से ही युवा यूजर्स की सुरक्षा के लिए कई कदम उठा चुका है।
मोहन ने सीएनएन से कहा, "हमने यह सुनिश्चित करने के लिए लंबे समय से निवेश किया है कि हमारे प्लेटफॉर्म पर युवा सुरक्षित रहें। यूट्यूब से आप उम्मीद कर सकते हैं कि हम इन चीजों पर लगातार ध्यान देते रहेंगे।"
मोहन ने बुधवार को यूट्यूब के सालाना ‘मेड ऑन यूट्यूब’ कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बातचीत में यह बात कही। इस कार्यक्रम में कंपनी ने क्रिएटर्स और दर्शकों के लिए नए फीचर्स की भी घोषणा की, जिसमें नए AI टूल्स और मैसेजिंग फीचर्स शामिल हैं।
मेटा ने राज्यों के साथ करीब 18 अरब डॉलर के सेटलमेंट पर सहमति जताई है। यह मामला उन आरोपों से जुड़ा है कि मेटा के प्लेटफॉर्म इस तरह डिजाइन किए गए थे, जिससे युवा यूजर्स के मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा। हालांकि, समझौते के तहत मेटा ने किसी गलत काम को स्वीकार नहीं किया है।
इस सेटलमेंट में 13 से 17 साल के यूजर्स के लिए रोजाना इस्तेमाल की समय सीमा, रात के समय इस्तेमाल पर रोक और माता-पिता के लिए ज्यादा मजबूत कंट्रोल जैसे कदम शामिल हैं।
समझौते के तहत मेटा ने कहा है कि वह सेटलमेंट की 70 प्रतिशत रकम का भुगतान करेगा। बाकी 30 प्रतिशत रकम इस बात पर निर्भर करेगी कि यूट्यूब और टिकटॉक इस समझौते में शामिल होते हैं या नहीं और इसी तरह के बदलाव लागू करते हैं या नहीं। राज्यों के अटॉर्नी जनरल ने कहा है कि अगर ये प्लेटफॉर्म समझौते में शामिल नहीं होते हैं तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
नील मोहन ने यूट्यूब के पहले से मौजूद सुरक्षा उपायों का जिक्र किया। इनमें माता-पिता के लिए ऐसा विकल्प भी शामिल है, जिससे वे यह तय कर सकते हैं कि उनके किशोर बच्चे शॉर्ट्स कितनी देर तक देख सकें। उन्होंने यह भी बताया कि यूट्यूब बच्चों की सुरक्षा से जुड़े फीचर्स पर तीसरे पक्ष के विशेषज्ञों के साथ काम करता है।
मोहन ने कहा कि यूट्यूब और मेटा एक-दूसरे से काफी अलग प्लेटफॉर्म भी हैं। उन्होंने यह भी बताया कि कंपनी घरों में टीवी पर यूट्यूब देखने के अनुभव पर ध्यान दे रही है।
टिकटॉक ने मेटा के समझौते में शामिल होने की अपील पर अभी कोई टिप्पणी नहीं की है। वहीं, कैलिफोर्निया के अटॉर्नी जनरल रॉब बोंटा के कार्यालय ने भी मोहन के इस रुख पर टिप्पणी के लिए भेजे गए अनुरोध का तुरंत जवाब नहीं दिया।
मार्च में लॉस एंजिल्स में हुई एक अलग सुनवाई में यूट्यूब और मेटा को भी जिम्मेदार ठहराया गया था। इस मामले में आरोप था कि उनके प्लेटफॉर्म की वजह से लत और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को बढ़ावा मिला। दोनों कंपनियों ने इस फैसले के खिलाफ अपील करने की योजना बनाई है।
यूट्यूब को युवा यूजर्स से जुड़े अलग-अलग मुकदमों का भी सामना करना पड़ा है। इस साल कंपनी ने टिकटॉक और स्नैप के साथ इसी तरह के दावों से जुड़े कुछ व्यक्तिगत मामलों में समझौता किया है। हालांकि, युवा यूजर्स को नुकसान पहुंचने के आरोपों को लेकर इन कंपनियों के खिलाफ लोगों, परिवारों और स्कूल जिलों की ओर से सैकड़ों मुकदमे अभी भी चल रहे हैं।
डिलिजेंट मीडिया कॉरपोरेशन लिमिटेड की 21वीं सालाना आम बैठक 25 सितंबर 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आयोजित हुई। कंपनी ने बताया कि AGM में रखे गए दोनों प्रस्ताव जरूरी बहुमत के साथ मंजूर हो गए हैं।
by
Vikas Saxena
डिलिजेंट मीडिया कॉरपोरेशन लिमिटेड की 21वीं सालाना आम बैठक (AGM) 25 सितंबर 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आयोजित हुई। कंपनी ने बताया कि AGM में रखे गए दोनों प्रस्ताव जरूरी बहुमत के साथ मंजूर हो गए हैं।
AGM दोपहर 12:30 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग/अन्य ऑडियो-विजुअल माध्यम से हुई। कंपनी ने शेयरधारकों को प्रस्तावों पर वोट करने के लिए रिमोट ई-वोटिंग और AGM के दौरान ई-वोटिंग की सुविधा दी थी।
18 सितंबर 2026 की रिकॉर्ड डेट के मुताबिक, कंपनी के कुल 84,624 शेयरधारक थे। AGM में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए प्रमोटर और प्रमोटर ग्रुप के 7 और पब्लिक कैटेगरी के 41 शेयरधारकों ने हिस्सा लिया। दस्तावेज के मुताबिक, प्रमोटर और प्रमोटर ग्रुप के 7 शेयरधारकों की संख्या उनके पास मौजूद फोलियो की संख्या के आधार पर निकाली गई है।
पहला प्रस्ताव: वित्तीय नतीजों को मंजूरी
पहले प्रस्ताव में 31 मार्च 2026 को समाप्त वित्त वर्ष के कंपनी के ऑडिट किए गए वार्षिक वित्तीय विवरण और बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स व ऑडिटर्स की रिपोर्ट को अपनाने की मंजूरी मांगी गई थी। इस प्रस्ताव के पक्ष में कुल 7,86,62,491 वोट पड़े, जबकि 604 वोट इसके खिलाफ रहे। कुल वैध वोटों में 99.999 प्रतिशत वोट प्रस्ताव के पक्ष में रहे।
रिमोट ई-वोटिंग में 169 सदस्यों ने प्रस्ताव के पक्ष में 7,86,62,486 वोट डाले, जबकि AGM के दौरान ई-वोटिंग में 3 सदस्यों ने 5 वोट प्रस्ताव के पक्ष में दिए। वहीं, रिमोट ई-वोटिंग में 15 सदस्यों ने 604 वोट प्रस्ताव के खिलाफ डाले।
दूसरा प्रस्ताव: मुकेश जिंदल की दोबारा नियुक्ति
दूसरे प्रस्ताव में मुकेश जिंदल को कंपनी के नॉन-एग्जीक्यूटिव, नॉन-इंडिपेंडेंट डायरेक्टर के तौर पर दोबारा नियुक्त करने की मंजूरी मांगी गई थी। वह रोटेशन के आधार पर रिटायर होने वाले थे और दोबारा नियुक्ति के लिए पात्र होने के चलते उन्होंने अपना नाम पेश किया था। इस प्रस्ताव के पक्ष में कुल 7,86,61,161 वोट पड़े, जबकि 2,006 वोट इसके खिलाफ रहे। कुल वोटों में 99.997 प्रतिशत वोट प्रस्ताव के पक्ष में रहे।
रिमोट ई-वोटिंग में 165 सदस्यों ने 7,86,61,156 वोट प्रस्ताव के पक्ष में डाले, जबकि AGM के दौरान ई-वोटिंग में 3 सदस्यों ने 5 वोट पक्ष में दिए। वहीं, 19 सदस्यों ने 2,006 वोट प्रस्ताव के खिलाफ डाले। स्क्रूटिनाइजर रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों प्रस्ताव शेयरधारकों ने जरूरी बहुमत के साथ मंजूर कर दिए।
मीता पुष्पल संघवी थीं स्क्रूटिनाइजर
कंपनी ने रिमोट ई-वोटिंग और AGM के दौरान हुई ई-वोटिंग की जांच के लिए एमपी संघवी एंड एसोसिएट्स एलएलपी की डिजाइनटेड पार्टनर मीता पुष्पल संघवी को स्क्रूटिनाइजर नियुक्त किया था।
शेयरधारकों के लिए रिमोट ई-वोटिंग 22 सितंबर 2026 को सुबह 9 बजे शुरू हुई और 24 सितंबर 2026 को शाम 5 बजे समाप्त हुई। 18 सितंबर 2026 की कट-ऑफ डेट तक शेयर रखने वाले वे सदस्य, जिन्होंने रिमोट ई-वोटिंग के जरिए वोट नहीं किया था, उन्हें AGM के दौरान और AGM खत्म होने के 15 मिनट बाद तक ई-वोटिंग की सुविधा दी गई थी।
AGM खत्म होने के बाद 25 सितंबर को ई-वोटिंग के नतीजे खोले गए। स्क्रूटिनाइजर ने बताया कि यह प्रक्रिया दो ऐसे गवाहों की मौजूदगी में हुई, जो कंपनी के कर्मचारी नहीं थे।