भारत का गेमिंग विजन: सुरक्षित खेल, स्किल का मेल

केंद्र सरकार ने शुक्रवार 1 मई से Promotion and Regulation of Online Gaming (PROG) Rules, 2026 को लागू कर दिया है। ये नियम PROG Act, 2025 की नींव पर बने हैं, जिसे संसद ने अगस्त 2025 में पास किया था।

Vikas Saxena by
Published - Saturday, 02 May, 2026
Last Modified:
Saturday, 02 May, 2026
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1 मई 2026- यह तारीख भारत के ऑनलाइन गेमिंग इतिहास में एक नए अध्याय की शुरुआत है। केंद्र सरकार ने शुक्रवार 1 मई से Promotion and Regulation of Online Gaming (PROG) Rules, 2026 को लागू कर दिया है। ये नियम PROG Act, 2025 की नींव पर बने हैं, जिसे संसद ने अगस्त 2025 में पास किया था। लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों से पास होकर 22 अगस्त 2025 को राष्ट्रपति की मंजूरी मिली थी। 22 अप्रैल 2026 को इन नियमों को आधिकारिक गजट में अधिसूचित किया गया और 1 मई 2026 से यह पूरे देश में लागू हो गए हैं।

सरकार का इरादा साफ है- एक तरफ भारत को ग्लोबल गेमिंग हब बनाना, दूसरी तरफ मनी गेम्स की तबाही से नागरिकों को बचाना। यह नीति से जमीन तक का सफर है- कानून बना, नियम बने और अब अमल शुरू।

 मनी गेम्स पर पूर्ण प्रतिबंध- क्यों लिया यह कड़ा कदम?

नए कानून का सबसे बड़ा और सबसे चर्चित पहलू है- ऑनलाइन मनी गेम्स पर पूर्ण प्रतिबंध। अब कोई भी प्लेटफॉर्म, चाहे स्किल-बेस्ड हो या चांस-बेस्ड, अगर उसमें असली पैसे दांव पर लगते हैं या जीतने की उम्मीद होती है, तो वह बैन की श्रेणी में आएगा। फैंटेसी क्रिकेट, ऑनलाइन रमी, पोकर जैसे ऐप्स- सब बंद।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक भारत में लगभग 45 करोड़ लोग मनी गेमिंग से प्रभावित रहे हैं और हर साल ₹20,000 करोड़ से अधिक का नुकसान इन प्लेटफॉर्म्स पर हो रहा था। कर्नाटक में मात्र 31 महीनों (जनवरी 2023–जुलाई 2025) में 32 सुसाइड केस, कर्नाटक में 3 वर्षों में 18 और तमिलनाडु में हाल के वर्षों में 30 से अधिक आत्महत्याएं- ये आंकड़े खुद बोलते हैं।

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) ने अपनी ICD-11 (बीमारियों का अंतरराष्ट्रीय वर्गीकरण) में “Gaming Disorder” को एक मान्यता प्राप्त मानसिक विकार के रूप में शामिल किया है। यह तब डायग्नोज किया जाता है जब किसी व्यक्ति का गेमिंग व्यवहार इतना बढ़ जाए कि उसके व्यक्तिगत, पारिवारिक, सामाजिक, शैक्षणिक या पेशेवर जीवन पर गंभीर असर पड़ने लगे। ध्यान देने वाली बात यह है कि WHO की यह परिभाषा सामान्य “गेमिंग बिहेवियरr” पर लागू होती है, न कि खास तौर पर “मनी गेमिंग” पर।

दूसरी तरफ, मनी गेमिंग इंडस्ट्री में मनी लॉन्ड्रिंग, फ्रॉड और अवैध ट्रांजैक्शन जैसी समस्याएं लंबे समय से चिंता का विषय रही हैं। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल सरकारी हलफनामे में दावा किया गया कि रियल मनी गेमिंग से जुड़े मामलों में बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी, मनी लॉन्ड्रिंग, सीमा पार अवैध फंड फ्लो और यहां तक कि आतंकवादी फंडिंग के खतरे भी सामने आए हैं।

Mahadev App case में प्रवर्तन निदेशालय ने ₹6,000 करोड़ से ज्यादा के मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क का खुलासा किया। इस नेटवर्क में हवाला ऑपरेटर, बेनामी अकाउंट्स और विदेशों में भेजे जा रहे संदिग्ध फंड शामिल थे। इसके अलावा नवंबर 2025 में ED ने WinZO, GamesKraft और Pocket 52 पर भी फ्रॉड, बॉट के जरिए गेम में हेरफेर और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों में छापेमारी की थी।

इन्हीं जोखिमों को देखते हुए PROG Act 2025 के तहत बैंकों और पेमेंट गेटवे के लिए सख्त नियम बनाए गए हैं। इस कानून की धारा 7 के अनुसार, बैंक, फाइनेंशियल संस्थान या फंड ट्रांसफर से जुड़ी कोई भी संस्था मनी गेमिंग से जुड़े किसी भी लेन-देन को प्रोसेस, अनुमति या सुविधा नहीं दे सकती। अगर कोई संस्था ऐसा करती पाई जाती है, तो उस पर 3 साल तक की जेल और ₹1 करोड़ तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

तीन कैटेगरीज- कौन सा गेम कहां आता है?

नए ऑनलाइन गेमिंग नियमों में गेम्स को तीन कैटेगरीज में बांटा गया है, ताकि यूजर्स को आसानी से समझ आ सके कि कौन सा गेम सुरक्षित है और कौन जोखिम भरा।

ई-स्पोर्ट्स: ये पूरी तरह स्किल-बेस्ड गेम्स होते हैं, जिन्हें National Sports Governance Act के तहत मान्यता मिलती है। इन गेम्स को OGAI (Online Gaming Authority of India) में रजिस्टर कराना जरूरी होता है। इसमें खिलाड़ी अपनी रणनीति और कौशल के दम पर खेलते हैं।

ऑनलाइन सोशल गेम्स: ये गेम्स आमतौर पर मनोरंजन या सीखने के लिए बनाए जाते हैं। इनमें किसी तरह का पैसे का दांव नहीं होता, इसलिए इन्हें सुरक्षित माना जाता है। ऐसे गेम्स को सरकार से अनुमति मिलती है और ये रोजमर्रा के यूज के लिए होते हैं।

ऑनलाइन मनी गेम्स: इन पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। चाहे गेम स्किल पर आधारित हो या किस्मत पर, अगर उसमें असली पैसे का दांव लगता है तो वह बैन रहेगा।

नियमों के तहत हर गेम की जांच करीब 90 दिनों के भीतर की जाएगी, ताकि यह तय किया जा सके कि वह किस कैटेगरी में आता है। एक और जरूरी बात यह है कि जो गेम मनी गेम्स की कैटेगरी में आ जाएंगे, वे कभी भी ई-स्पोर्ट्स के तौर पर मान्यता के लिए आवेदन नहीं कर सकते। यही प्रावधान इन नियमों को काफी सख्त बनाता है।

Online Gaming Authority of India (OGAI)- नई नियामक संस्था

PROG Rules 2026 का सबसे अहम ढांचागत बदलाव है- Online Gaming Authority of India (OGAI) का गठन। यह MeitY के अधीन दिल्ली में स्थित एक डिजिटल-फर्स्ट नियामक संस्था होगी। इसमें गृह मंत्रालय, वित्त, सूचना एवं प्रसारण, खेल मंत्रालय और विधि विभाग के प्रतिनिधि होंगे, यानी यह एक बहु-मंत्रालयी, बहु-क्षेत्रीय संस्था है।

OGAI के काम में शामिल हैं: गेम्स का वर्गीकरण करना, निषिद्ध मनी गेम्स की आधिकारिक सूची जारी करना, यूजर शिकायतें सुनना, ई-स्पोर्ट्स के लिए डिजिटल रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट जारी करना (10 साल तक वैध), बैंकों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ समन्वय करना, और 90 दिनों के भीतर केस का निपटान करना।

यूजर सेफ्टी- बच्चों और परिवार की सुरक्षा

नए नियमों में यूजर सेफ्टी को सबसे ऊपर रखा गया है। हर रजिस्टर्ड प्लेटफॉर्म को अनिवार्य रूप से ये सुविधाएं देनी होंगी: उम्र की जांच (Age Verification), नाबालिगों के लिए एक्सेस पर रोक (Age-Gating), समय सीमा (Time Limits), पैरेंटल कंट्रोल, यूजर रिपोर्टिंग टूल, काउंसलिंग सपोर्ट और फेयर-प्ले मॉनिटरिंग। शिकायत के लिए दो-स्तरीय प्रणाली लागू होंगी- पहले प्लेटफॉर्म पर 30 दिन, फिर OGAI के पास अतिरिक्त 30 दिन।

बच्चों की सुरक्षा इस पूरे कानून की मूल भावना है। एज वेरिफिकेशन और पैरेंटल कंट्रोल अनिवार्य बनाकर सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि ऑनलाइन गेमिंग एक सुरक्षित और जिम्मेदार डिजिटल स्पेस बने।

इंडस्ट्री पर असर- रुकावट या नई शुरुआत?

भारत का ऑनलाइन गेमिंग मार्केट 2024 में ₹23,200 करोड़ का रहा और 2027 तक ₹31,600 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है (11% CAGR)। मनी गेमिंग बैन के तुरंत बाद RMG प्लेटफॉर्म्स को 90 दिनों के भीतर लिस्टेड RMG कंपनियों को $840 मिलियन (लगभग ₹7,000 करोड़) से अधिक का राइट-डाउन झेलना पड़ा और 400 से अधिक कंपनियों के 2 लाख नौकरियों पर असर की चिंता भी जताई गई।

हालांकि गेमिंग स्टार्टअप जगत में माहौल सकारात्मक भी है। BITKRAFT Ventures के अनुसार भारत का गेमिंग मार्केट FY25 में $2.4 बिलियन से बढ़कर FY30 तक $4.4 बिलियन (18% CAGR) हो सकता है। स्पष्ट नियमों से निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और ई-स्पोर्ट्स, गेम डेवलपमेंट स्टूडियो, कंटेंट क्रिएशन में नई नौकरियां आएंगी।

ई-स्पोर्ट्स को बढ़ावा- करियर और एक्सपोर्ट के नए रास्ते

जहां मनी गेम्स पर ताला लगा है, वहीं ई-स्पोर्ट्स के लिए दरवाजे खुल रहे हैं। National Sports Governance Act, 2025 के तहत ई-स्पोर्ट्स को अब एक आधिकारिक खेल का दर्जा मिल गया है। कर्नाटक, तमिलनाडु, राजस्थान, बिहार, नागालैंड, तेलंगाना और केरल जैसे राज्य ई-स्पोर्ट्स इकोसिस्टम बनाने में जुटे हैं। Indus Battle Royale जैसे भारतीय गेम्स अब ग्लोबल कंपटीशन में उतर रहे हैं- यह खपत से निर्माण की तरफ बड़ा बदलाव है।

कानून तोड़ने पर क्या होगा?

नए नियमों में साफ कहा गया है कि अगर कोई ऑनलाइन मनी गेम चलाता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। ऐसे मामलों में 3 साल तक की जेल और 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

अगर कोई बार-बार नियम तोड़ता है, तो सजा और भी बढ़ जाएगी। ऐसे मामलों में 5 साल तक की जेल और 2 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लग सकता है।

भ्रामक विज्ञापन या गलत तरीके से प्रमोशन करने पर भी कार्रवाई होगी। इसमें अलग-अलग स्तर की पेनल्टी लगाई जाएगी और जरूरत पड़ने पर प्लेटफॉर्म को ब्लॉक भी किया जा सकता है।

अगर कोई बैंक या पेमेंट सिस्टम ऐसे मनी गेम्स के ट्रांजैक्शन को सपोर्ट करता है, तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है और उसका लाइसेंस तक रद्द किया जा सकता है।

शिकायतों के निपटारे के लिए भी समय तय किया गया है। कोशिश होगी कि हर शिकायत को 90 दिनों के अंदर डिजिटल तरीके से सुलझा लिया जाए।

इसके अलावा, राज्य, जिला और थाना स्तर पर साइबर सेल के अधिकारियों को जांच का अधिकार दिया गया है। अगर कोई प्लेटफॉर्म गैरकानूनी पाया जाता है, तो उसे IT Act 2000 के तहत ब्लॉक किया जा सकता है। वहीं, अगर किसी को फैसले से शिकायत है, तो वह सीधे सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकता है।

सोशल और फैमिली इम्पैक्ट

मनी गेम्स ने भारतीय परिवारों को भीतर से तोड़ा है। परिवारों की जमापूंजी खत्म, युवा इंटरनेट गेमिंग डिसऑर्डर के शिकार और कई मामलों में तो खुदकुशी तक नौबत आई। "परिवारों ने अपनी बचत खो दी। युवा लत में फंस गए। आर्थिक तनाव से जुड़ी कई हृदयविदारक घटनाएं हुईं"- यह सरकार के प्रेस स्टेटमेंट के शब्द हैं। नए नियम इस त्रासदी पर विराम लगाने की कोशिश हैं।

टेक्नोलॉजी और AI की भूमिका

PROG Rules 2026 प्लेटफॉर्म्स से अपेक्षा करते हैं कि वे AI-बेस्ड सेफ्टी टूल्स अपनाएं- फेयर-प्ले मॉनिटरिंग, बिहेवियरल एनालिटिक्स और यूजर रिपोर्टिंग सिस्टम। OGAI खुद एक डिजिटल-फर्स्ट ऑफिस के रूप में काम करेगा, जिसमें पूरी रजिस्ट्रेशन, शिकायत और पेनल्टी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। प्लेटफॉर्म आर्किटेक्चर और पेमेंट स्ट्रक्चर की समीक्षा भी OGAI करेगी।

ग्लोबल तुलना- भारत vs दुनिया

भारत के ये नियम दुनिया में सबसे कड़े प्रयोगों में से एक हैं। जहां यूरोपीय देश रियल-मनी गेमिंग को लाइसेंस-बेस्ड रेगुलेशन के ज़रिये नियंत्रित करते हैं, वहीं भारत ने पूर्ण प्रतिबंध का रास्ता चुना। ब्रिटेन का Gambling Commission, ऑस्ट्रेलिया का ACMA, अमेरिका के राज्य-स्तरीय नियम- इन सबसे अलग भारत का मॉडल अपनी 140 करोड़ की आबादी और असमान डिजिटल साक्षरता को ध्यान में रखकर बनाया गया है। आलोचक मानते हैं कि यूजर्स अब offshore प्लेटफॉर्म की तरफ जा सकते हैं- यह एक असली चुनौती है जिसपर सरकार को ध्यान देना होगा।

आगे का रास्ता- चुनौतियां और संभावनाएं

PROG Act 2025 और Rules 2026 सही दिशा में एक बड़ा कदम हैं, लेकिन असली परीक्षा अब शुरू होती है। OGAI को जल्द से जल्द गेम्स की सूची जारी करनी होगी। ई-स्पोर्ट्स खिलाड़ियों और टीमों के लिए फाइनेंशियल फ्रेमवर्क अभी भी अस्पष्ट है- यह एक खुला मुद्दा है। इंडस्ट्री की मांग है कि सरकार ग्रासरूट टैलेंट, गेमिंग स्टूडियो और डिजिटल एक्सपोर्ट के लिए ठोस इंसेंटिव दे।

अगर OGAI तेज, पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से काम करे, तो भारत सच में ग्लोबल गेमिंग हब बन सकता है- जहां ई-स्पोर्ट्स को क्रिकेट जैसा सम्मान मिले और गेमिंग एक जिम्मेदार, सुरक्षित और समृद्ध इंडस्ट्री बने।

 

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‘जागरण न्यू मीडिया’ को अलविदा कह ‘NDTV’ की डिजिटल टीम में शामिल हुए विनय सक्सेना

पत्रकार विनय सक्सेना ने ‘एनडीटीवी’ (NDTV) के साथ मीडिया में अपनी नई पारी का आगाज किया है। उन्होंने इस समूह की डिजिटल टीम (हिंदी) में बतौर चीफ सब एडिटर जॉइन किया है।

Samachar4media Bureau by
Published - Friday, 19 June, 2026
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Friday, 19 June, 2026
Vinay Saxena

पत्रकार विनय सक्सेना ने ‘एनडीटीवी’ (NDTV) के साथ मीडिया में अपनी नई पारी का आगाज किया है। उन्होंने इस समूह की डिजिटल टीम (हिंदी) में बतौर चीफ सब एडिटर जॉइन किया है।

इस बारे में विनय सक्सेना ने खुद सोशल मीडिया पर जानकारी शेयर की है। अपनी फेसबुक पोस्ट में उन्होंने लिखा, ‘NDTV India के साथ नई पारी की शुरुआत।’ NDTV से जुड़ने से पहले वह जागरण न्यू मीडिया में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत थे। अप्रैल 2023 से जून 2026 तक उन्होंने इस जिम्मेदारी का निर्वहन किया।

विनय सक्सेना प्रिंट और डिजिटल दोनों माध्यमों में काम कर चुके हैं। जागरण न्यू मीडिया से पहले वह वन इंडिया हिंदी में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं, जहां उन्होंने विभिन्न संपादकीय भूमिकाओं में काम किया। इसके अलावा वह डीबी डिजिटल (दैनिक भास्कर समूह) में सब एडिटर और राजस्थान पत्रिका में क्रिएटिव कंटेंट राइटर की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं।

मूल रूप से लखनऊ के रहने वाले विनय सक्सेना ने अपनी स्कूली और उच्च शिक्षा के बाद पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से की। इसके बाद उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री हासिल की।

समाचार4मीडिया की ओर से विनय सक्सेना को उनकी नई पारी के लिए ढेरों बधाई और शुभकामनाएं।

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Penske Media खरीदेगी Vox Media के बड़े ब्रैंड्स, डिजिटल मीडिया में बढ़ी ताकत

अमेरिकी मीडिया कंपनी Penske Media Corporation (PMC) ने Vox Media के कई लोकप्रिय ब्रैंडों का अधिग्रहण करने पर सहमति जताई है।

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Published - Friday, 19 June, 2026
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Friday, 19 June, 2026
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डिजिटल मीडिया जगत में एक बड़ा सौदा हुआ है। अमेरिकी मीडिया कंपनी Penske Media Corporation (PMC) ने Vox Media के कई लोकप्रिय ब्रैंडों का अधिग्रहण करने पर सहमति जताई है। इस डील के तहत The Verge, Eater, SB Nation, Popsugar, The Dodo, Punch और Thrillist जैसे चर्चित डिजिटल ब्रैंड अब PMC के पोर्टफोलियो का हिस्सा बन जाएंगे।

इसके अलावा, Vox Media का प्रीमियम विज्ञापन मार्केटप्लेस Concert और फर्स्ट-पार्टी डेटा प्लेटफॉर्म Forte भी इस सौदे में शामिल हैं। गौरतलब है कि इस डील से पहले भी PMC, Vox Media की सबसे बड़ी शेयरधारक कंपनी थी। हालांकि सौदे के बाद Vox Media के मौजूदा शेयरधारकों की नई कंपनी में अल्पांश हिस्सेदारी बनी रहेगी।

PMC ने इस अधिग्रहण के लिए PMX नाम से एक नई सहायक कंपनी बनाई है। इस नई इकाई में PMC के मौजूदा प्रतिष्ठित ब्रैंड जैसे Billboard, Variety, Rolling Stone, WWD, The Hollywood Reporter, Deadline, Robb Report, Artforum, Sportico, SHE Media, StyleCaster, ARTnews, FN, IndieWire और VIBE को Vox Media के अधिग्रहित ब्रैंडों के साथ जोड़ा जाएगा। इस तरह PMX के पास कुल मिलाकर 25 से अधिक बड़े मीडिया टाइटल्स का पोर्टफोलियो होगा।

कंपनी का कहना है कि इस विलय के बाद वह डिजिटल मीडिया क्षेत्र की सबसे बड़ी पब्लिशिंग कंपनी बन जाएगी। संयुक्त रूप से यह नेटवर्क हर महीने दुनिया भर में करोड़ों पाठकों और दर्शकों तक पहुंचेगा, सालाना 300 से अधिक लाइव इवेंट आयोजित करेगा और विज्ञापन तकनीक के क्षेत्र में भी मजबूत स्थिति रखेगा।

इस नई कंपनी PMX की कमान रायन पॉले संभालेंगे, जो हाल तक Vox Media के अध्यक्ष थे। मीडिया, संपादकीय, व्यापारिक और संचालन नेतृत्व में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले पॉले न्यूयॉर्क से काम करेंगे और PMC के चेयरमैन एवं सीईओ जे पेंस्के तथा कंपनी के अध्यक्ष क्रेग पेरो को रिपोर्ट करेंगे।

वहीं PMC में रणनीति और संचालन के कार्यकारी उपाध्यक्ष टॉम फिन को PMX का मुख्य परिचालन अधिकारी (COO) बनाया गया है। इसके अलावा कंपनी के वरिष्ठ वित्तीय अधिकारी केनेथ डेलालकाज़ार अब PMX के मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी संभालेंगे।

PMC के संस्थापक और सीईओ जे पेंस्के ने कहा कि उन्हें Vox Media की टीम और उसके ब्रैंडों का स्वागत करते हुए बेहद खुशी हो रही है। उन्होंने रायन पॉले को मीडिया और तकनीक क्षेत्र का अनुभवी नेता बताते हुए कहा कि वह PMX के अगले विकास चरण का नेतृत्व करने के लिए पूरी तरह उपयुक्त हैं।

PMC के अध्यक्ष क्रेग पेरो ने कहा कि Vox Media के ये ब्रैंड कंपनी के मौजूदा पोर्टफोलियो को और मजबूत करेंगे। इससे कंटेंट की विविधता बढ़ेगी, पाठकों की पहुंच का विस्तार होगा और कंपनी के लाइव इवेंट कारोबार को भी नई ताकत मिलेगी।

रायन पॉले ने कहा कि यह मीडिया उद्योग के सबसे मजबूत ब्रैंड पोर्टफोलियो में से एक है, जिसने न केवल इतिहास बनाया है बल्कि आज भी संस्कृति और समाज को प्रभावित कर रहा है। उन्होंने कहा कि आगे का लक्ष्य इन प्रतिष्ठित ब्रैंडों को और मजबूत बनाना, पत्रकारिता की गुणवत्ता बनाए रखना तथा दर्शकों और समुदायों के साथ गहरा जुड़ाव कायम रखना होगा।

इस सौदे में Vox Media के लिए वित्तीय सलाहकार की भूमिका LionTree ने निभाई, जबकि कानूनी सलाहकार के रूप में Clifford Chance US ने काम किया।

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हिंदुस्तान डिजिटल को बाय बोलकर अब NDTV Digital (Hindi) से जुड़े सूर्य प्रकाश

करीब पांच वर्षों तक हिंदुस्तान डिजिटल से जुड़े रहे वरिष्ठ डिजिटल पत्रकार सूर्य प्रकाश ने नई जिम्मेदारी संभालते हुए NDTV India की डिजिटल टीम में कदम रखा है।

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Published - Thursday, 18 June, 2026
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Thursday, 18 June, 2026
Surya Prakash

डिजिटल मीडिया जगत के अनुभवी पत्रकार सूर्य प्रकाश ने अपने नए सफर की शुरुआत की है। उन्होंने हाल ही में NDTV India की डिजिटल टीम में डिप्टी एडिटर के रूप में नई जिम्मेदारी संभाली है। इसकी जानकारी उन्होंने सोशल मीडिया के जरिये साझा की।

सूर्य प्रकाश ने अपने पोस्ट में लिखा कि पत्रकारिता के सफर में एक नया पड़ाव आया है और वह अब NDTV India की डिजिटल टीम का हिस्सा बन गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बीते पांच वर्षों से उनकी पेशेवर पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हिंदुस्तान डिजिटल का साथ अब छूट गया है और अब नई पारी की शुरुआत हो रही है।

सूर्य प्रकाश पिछले करीब पांच वर्षों से हिंदुस्तान डिजिटल से जुड़े हुए थे। वह वहां एसोसिएट एडिटर के रूप में कार्यरत थे और लाइव हिंदुस्तान के न्यूज ऑपरेशंस की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, वायरल और मौसम से जुड़ी खबरों के कंटेंट ऑपरेशंस में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

सूर्य प्रकाश को डिजिटल मीडिया क्षेत्र में एक दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर में हिंदुस्तान डिजिटल, इंडियन एक्सप्रेस समूह, नवभारत टाइम्स डॉट कॉम, टाइम्स इंटरनेट, अमर उजाला और दिव्य हिमाचल जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में विभिन्न जिम्मेदारियां निभाई हैं।

मास कम्युनिकेशन और पत्रकारिता की पढ़ाई करने वाले सूर्य प्रकाश की कंटेंट स्ट्रेटेजी, सोशल मीडिया स्ट्रेटेजी, एनालिटिक्स और एसईओ जैसे क्षेत्रों में भी विशेषज्ञता है।

पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो सूर्य प्रकाश ने दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता एवं जनसंचार में ग्रेजुएशन और हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है।

उन्होंने जम्मू कश्मीर में हाइब्रिड वारफेयर जैसे महत्वपूर्ण टॉपिक पर हाल ही में पीएचडी की उपाधि भी प्राप्त की है। समाचार4मीडिया की ओर से सूर्य प्रकाश को उनकी नई पारी के लिए ढेरों बधाई और शुभकामनाएं।

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AI से बने विज्ञापनों की मानवीय समीक्षा जरूरी: 'ओपनएआई' ने जारी किए नए नियम

'ओपनएआई' (OpenAI) ने अपनी नई Ad Tools Terms जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि AI से तैयार विज्ञापनों की अंतिम जिम्मेदारी विज्ञापनदाताओं और मार्केटर्स की होगी।

Samachar4media Bureau by
Published - Thursday, 18 June, 2026
Last Modified:
Thursday, 18 June, 2026
openaiindia

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence-AI) आधारित विज्ञापन तेजी से विज्ञापन उद्योग का हिस्सा बन रहे हैं, लेकिन 'ओपनएआई' (OpenAI) ने अपनी नई Ad Tools Terms में साफ कर दिया है कि AI द्वारा तैयार किए गए विज्ञापनों की जिम्मेदारी पूरी तरह विज्ञापनदाताओं और मार्केटर्स की होगी।

कंपनी ने विज्ञापन निर्माण, ऑडियंस टार्गेटिंग, कस्टम ऑडियंस, कन्वर्जन मापन और AI आधारित क्रिएटिव टूल्स जैसी कई नई सुविधाएं पेश की हैं, लेकिन किसी भी जोखिम या गलती की जवाबदेही उपयोगकर्ताओं पर ही रहेगी।

नई नीति के अनुसार विज्ञापनदाताओं को AI द्वारा तैयार कंटेंट की सटीकता, उपयुक्तता और कानूनी अनुपालन की जांच स्वयं करनी होगी। 'ओपनएआई' (OpenAI) ने चेतावनी दी है कि AI जनरेटेड कंटेंट कभी-कभी गलत, भ्रामक, अपूर्ण या किसी विशेष उद्देश्य के लिए अनुपयुक्त हो सकता है। इसलिए किसी भी विज्ञापन को प्रकाशित करने से पहले मानवीय समीक्षा को अनिवार्य माना गया है।

कंपनी ने ऑडियंस डेटा के उपयोग को लेकर भी कड़े नियम लागू किए हैं। विज्ञापनदाता केवल उसी ग्राहक डेटा का उपयोग कर सकेंगे, जिसके लिए उनके पास स्पष्ट अनुमति और कानूनी आधार हो। डेटा ब्रोकर्स से प्राप्त ऑडियंस डेटा के इस्तेमाल पर रोक लगाई गई है। इसके अलावा जाति, धर्म, राजनीतिक विचार, स्वास्थ्य स्थिति, यौन अभिरुचि, बायोमेट्रिक जानकारी और अन्य संवेदनशील व्यक्तिगत डेटा के आधार पर टार्गेटिंग की अनुमति नहीं होगी।

'ओपनएआई' (OpenAI) ने यह भी स्पष्ट किया है कि उसके टूल्स का इस्तेमाल फर्जी समर्थन (Endorsement), भ्रामक सामग्री, अनधिकृत पहचान या सिंथेटिक मीडिया तैयार करने के लिए नहीं किया जा सकता। कंपनी ने विज्ञापन प्रदर्शन, पहुंच, कन्वर्जन या व्यावसायिक परिणामों की कोई गारंटी भी नहीं दी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह नीति दर्शाती है कि AI भले ही विज्ञापन निर्माण को आसान बना रहा हो, लेकिन पारदर्शिता, सटीकता और कानूनी जिम्मेदारी की अंतिम जवाबदेही अब भी इंसानों और ब्रांड्स पर ही रहेगी।

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'टेलीग्राम' बैन के बाद CEO का दावा: 'रिलायंस' कर रही है BGP हाइजैकिंग

भारत में 'टेलीग्राम' पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध के बाद सीईओ पावेल ड्यूरोव (Pavel Durov) ने 'रिलायंस इंडस्ट्रीज' (Reliance Industries) पर इंटरनेट कनेक्टिविटी में दखल देने का आरोप लगाया है।

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Published - Thursday, 18 June, 2026
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Thursday, 18 June, 2026
telegram

RE-NEET परीक्षा से पहले भारत सरकार द्वारा 'टेलीग्राम' (Telegram) पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। 'टेलीग्राम' (Telegram) के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी पावेल ड्यूरोव (Pavel Durov) ने दावा किया है कि पेपर लीक की समस्या का समाधान किसी ऐप को बैन करना नहीं है, क्योंकि लीक सामग्री किसी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए साझा की जा सकती है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर किए गए एक पोस्ट में ड्यूरोव ने 'रिलायंस इंडस्ट्रीज' (Reliance Industries) पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि कंपनी BGP हाइजैकिंग (BGP Hijacking) नामक तकनीक का इस्तेमाल कर 'टेलीग्राम' (Telegram) की इंटरनेट कनेक्टिविटी को प्रभावित कर रही है। उनके अनुसार यह समस्या केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि कुछ अन्य देशों में भी उपयोगकर्ताओं को ऐसी दिक्कतों का सामना करना पड़ा है।

ड्यूरोव ने यह भी आरोप लगाया कि 'रिलायंस' (Reliance) के कारोबारी संबंध 'मेटा' (Meta) के साथ हैं, जो 'व्हाट्सऐप' (WhatsApp), 'फेसबुक' (Facebook) और 'इंस्टाग्राम' (Instagram) जैसे प्लेटफॉर्म संचालित करती है। हालांकि उन्होंने अपने आरोपों के समर्थन में कोई ठोस सार्वजनिक प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया।

गौरतलब है कि 'नेशनल टेस्टिंग एजेंसी' (National Testing Agency-NTA) के अनुसार RE-NEET 2026 परीक्षा से पहले कुछ 'टेलीग्राम' (Telegram) समूहों में संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी मिली थी। इसके बाद सरकार ने 'सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम' (Information Technology Act) के तहत कार्रवाई करते हुए प्लेटफॉर्म पर अस्थायी प्रतिबंध लगाया।

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बढ़ते साइबर खतरों के बीच 'सॉफ्टबैंक' और 'ओपनएआई' ने शुरू की नई सेवा

'सॉफ्टबैंक' और 'ओपनएआई' ने जापान में AI आधारित साइबर सुरक्षा सेवा शुरू करने की घोषणा की है। इसका उद्देश्य कंपनियों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को उन्नत साइबर हमलों से सुरक्षित रखना है।

Samachar4media Bureau by
Published - Wednesday, 17 June, 2026
Last Modified:
Wednesday, 17 June, 2026
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साइबर अपराधों और डिजिटल हमलों के बढ़ते खतरे के बीच जापान की प्रमुख टेक कंपनी 'सॉफ्टबैंक' (SoftBank) ने 'ओपनएआई' (OpenAI) के साथ मिलकर नई AI आधारित साइबर सुरक्षा सेवा शुरू करने की घोषणा की है। इस पहल का उद्देश्य कंपनियों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को तेजी से विकसित हो रहे साइबर खतरों से सुरक्षित रखना है।

टोक्यो में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान 'सॉफ्टबैंक' (SoftBank) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मासायोशी सोन (Masayoshi Son) ने कहा कि साइबर सुरक्षा अब जापान के लिए एक गंभीर चुनौती बन चुकी है। उनके अनुसार, आज के साइबर हमले पहले की तुलना में कहीं अधिक जटिल, तेज और खतरनाक हो गए हैं, जिससे कंपनियों और सरकारी संस्थानों को बड़े जोखिम का सामना करना पड़ रहा है।

नई सेवा को जापान की लगभग 3,000 बड़ी कंपनियों और संस्थाओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इनमें हवाई अड्डे, बिजली आपूर्ति नेटवर्क, परिवहन प्रणाली और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे से जुड़ी संस्थाएं शामिल हैं।

सेवा के तहत सबसे पहले किसी संगठन की डिजिटल सुरक्षा का विस्तृत आकलन किया जाएगा। इसके बाद AI की मदद से सिस्टम में मौजूद कमजोरियों और संभावित सुरक्षा खामियों की पहचान कर उन्हें दूर करने के लिए आवश्यक सुरक्षा सुझाव और पैच उपलब्ध कराए जाएंगे।

यह परियोजना 'सॉफ्टबैंक' (SoftBank) और 'ओपनएआई' (OpenAI) के संयुक्त उपक्रम 'एसबी ओएआई जापान' (SB OAI Japan) के तहत संचालित की जाएगी। इस संयुक्त उपक्रम की स्थापना जापानी बाजार के लिए विशेष AI सेवाएं विकसित करने के उद्देश्य से की गई थी।

कार्यक्रम में 'ओपनएआई' (OpenAI) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सैम ऑल्टमैन (Sam Altman) वीडियो संदेश के माध्यम से जुड़े, जबकि कंपनी के मुख्य शोध अधिकारी मार्क चेन (Mark Chen) ने प्रत्यक्ष रूप से भाग लिया।

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Waka Waka से Dai Dai तक: जब FIFA World Cup के गानों ने जीता दुनिया का दिल

फुटबॉल विश्व कप के इतिहास में अगर किसी एक गाने को सबसे बड़ा और सबसे लोकप्रिय वर्ल्ड कप एंथम कहा जाए, तो वह निस्संदेह शकीरा का "वाका वाका" है।

Samachar4media Bureau by
Published - Saturday, 13 June, 2026
Last Modified:
Saturday, 13 June, 2026
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आर्येंद्र खान, कॉरेस्पोंडेंट, एक्सचेंज4मीडिया ग्रुप ।।   

फुटबॉल विश्व कप के इतिहास में अगर किसी एक गाने को सबसे बड़ा और सबसे लोकप्रिय वर्ल्ड कप एंथम कहा जाए, तो वह निस्संदेह शकीरा का "वाका वाका (This Time for Africa)" है। यह गाना आज भी बाकी सभी विश्व कप गीतों से काफी आगे माना जाता है। "वाका वाका" के नाम Spotify पर सबसे ज्यादा स्ट्रीम किए गए FIFA World Cup Song का Guinness World Record दर्ज है। वहीं, YouTube पर इसे 4 अरब से अधिक बार देखा जा चुका है।

साल 2019 तक यह गाना दुनिया भर में 1.5 करोड़ से ज्यादा डिजिटल डाउनलोड हासिल कर चुका था, जिससे यह इतिहास के सबसे ज्यादा बिकने वाले डिजिटल सिंगल्स में शामिल हो गया। यह गीत ऐसे समय आया जब YouTube एक वैश्विक प्लेटफॉर्म के रूप में तेजी से उभर रहा था और इसी लहर पर सवार होकर "वाका वाका" ने सांस्कृतिक इतिहास में अपनी स्थायी जगह बना ली।

हालांकि इसकी सफलता का सफर विवादों से पूरी तरह अछूता नहीं रहा। जब FIFA ने अफ्रीकी महाद्वीप में पहली बार आयोजित होने वाले विश्व कप के लिए कोलंबियाई पॉप स्टार शकीरा को आधिकारिक गीत रिकॉर्ड करने के लिए चुना, तो कई लोगों ने इसका विरोध किया। उनका कहना था कि उद्घाटन समारोह में अफ्रीकी कलाकारों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। इसके बाद FIFA और शकीरा की टीम ने दक्षिण अफ्रीका के Afro-fusion बैंड Freshlyground को भी इस गीत का हिस्सा बनाया।

इसके अलावा इस गीत पर साहित्यिक चोरी यानी प्लेजरिज्म के आरोप भी लगे। दावा किया गया कि इसका कोरस कैमरून के समूह Golden Sounds के 1980 के दशक के लोकप्रिय गीत "Zangaléwa" से लिया गया है। बाद में Sony Music और शकीरा की मैनेजमेंट टीम ने अदालत के बाहर समझौता किया और Zangaléwa के रचनाकारों को सह-लेखक का श्रेय दिया गया।

इन विवादों के बावजूद "वाका वाका" की लोकप्रियता पर कोई असर नहीं पड़ा। 16 साल बाद भी जब कोई विश्व कप का नाम लेता है, तो सबसे पहले लोगों के दिमाग में यही धुन गूंजती है।

‘La Copa de la Vida’ जिसने बदल दिया वर्ल्ड कप म्यूजिक का इतिहास

1998 के फ्रांस विश्व कप के लिए रिकी मार्टिन का गीत "La Copa de la Vida (The Cup of Life)" आधुनिक वर्ल्ड कप एंथम का शुरुआती बिंदु माना जाता है।

इस गीत ने लैटिन पॉप और अंग्रेजी पॉप संगीत को एक साथ जोड़ दिया। यह सिर्फ विश्व कप का आधिकारिक गीत नहीं था, बल्कि इसी ने रिकी मार्टिन को क्षेत्रीय स्पेनिश भाषा के स्टार से वैश्विक सुपरस्टार बना दिया। 1990 और 2000 के दशक में लैटिन पॉप संगीत की जो वैश्विक लहर देखने को मिली, उसकी शुरुआत काफी हद तक इसी गीत से मानी जाती है।

गीत में इस्तेमाल हुआ "Ole, Ole, Ole" का नारा बाद में दुनिया का सबसे लोकप्रिय फुटबॉल नारा बन गया। आज भी FIFA के लिए बनने वाले लगभग सभी गीत किसी न किसी रूप में इसी फॉर्मूले को दोहराने की कोशिश करते हैं।

‘Un'estate italiana’ से शुरू हुआ वर्ल्ड कप एंथम का दौर

1990 के इटली विश्व कप का गीत "Un'estate italiana (Notti Magiche)" वह मोड़ था जहां से आधुनिक वर्ल्ड कप एंथम की अवधारणा शुरू हुई।

यह गीत पूरे यूरोप में लोकप्रिय हुआ और एक सांस्कृतिक पहचान बन गया। इसी गीत ने वह फॉर्मूला तैयार किया जिसे बाद में लगभग हर वर्ल्ड कप गीत ने अपनाया- द्विभाषी कोरस, स्टेडियम में गूंजने वाली धुन और समापन समारोह में प्रस्तुति।

इटालिया 90 वास्तव में पहला FIFA World Cup था जिसने आधिकारिक गीत को औपचारिक रूप से अपनाया। 36 साल बाद भी "Notti Magiche" की शुरुआती धुन सुनकर फुटबॉल प्रेमियों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं।

‘We Are One’ ने दिखाई ब्राजील की रंगीन झलक

2014 विश्व कप के लिए पिटबुल, जेनिफर लोपेज और ब्राजीलियाई स्टार क्लाउडिया लिट्टे ने मिलकर "We Are One (Ole Ola)" पेश किया। अंग्रेजी, स्पेनिश और पुर्तगाली भाषाओं के मेल से बना यह गीत काफी भव्य और ऊर्जावान था। YouTube पर इसे एक अरब से ज्यादा बार देखा जा चुका है।

हालांकि "वाका वाका" के मुकाबले इसे उतनी भावनात्मक और सांस्कृतिक पहचान नहीं मिल सकी। कई लोगों के लिए यह वह दौर था जब वर्ल्ड कप गीत एक संगीत आयोजन की बजाय ब्रांड प्रमोशन जैसा महसूस होने लगा।

‘Dai Dai’ के साथ शकीरा की ऐतिहासिक वापसी

2026 विश्व कप के लिए शकीरा एक बार फिर आधिकारिक गीत "Dai Dai" के साथ लौटी हैं। हालांकि अभी इसकी लोकप्रियता का अंतिम मूल्यांकन करना जल्दबाजी होगी, लेकिन इसकी टीम और पैमाना इसे शीर्ष वर्ल्ड कप गीतों में शामिल करने के लिए पर्याप्त माना जा रहा है।

इस गीत में Afrobeats, Dance-Pop और Reggaeton का मिश्रण है। शकीरा ने इसे वैश्विक एकता के संदेश के साथ तैयार किया है। गीत के सह-लेखकों में Ed Sheeran भी शामिल हैं और इसके कोरस में कई भाषाओं का इस्तेमाल किया गया है।

"Dai Dai" का अर्थ इतालवी भाषा में "Come On, Come On" यानी "आगे बढ़ो, अपना सर्वश्रेष्ठ दो" होता है। इस गीत के साथ शकीरा विश्व कप संगीत के चार अलग-अलग दौरों का हिस्सा बनने वाली पहली कलाकार बन गई हैं।

‘Gloryland’ को नहीं मिला उसका हक

1994 विश्व कप अमेरिका में आयोजित हुआ और इसी के साथ आया "Gloryland"। रॉक, आरएंडबी और सोल संगीतकार Daryl Hall तथा संगीत समूह Sounds of Blackness द्वारा प्रस्तुत इस गीत में Gospel संगीत का प्रभाव साफ दिखाई देता था।

सैक्सोफोन की मधुर धुनों से सजा यह गीत गर्मजोशी, ईमानदारी और अमेरिकी सांस्कृतिक पहचान से भरपूर था। बावजूद इसके, वर्ल्ड कप एंथम की चर्चाओं में इसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है।

‘Dreamers’ बना कतर विश्व कप का सरप्राइज हिट

2022 विश्व कप के दौरान BTS के सदस्य Jung Kook और कतरी गायक Fahad Al Kubaisi का गीत "Dreamers" सबसे चर्चित गीतों में से एक बन गया।

Jung Kook के वैश्विक फैनबेस ने इस गीत को सोशल मीडिया पर जबरदस्त लोकप्रियता दिलाई। इतना ही नहीं, गीत में भावनात्मक गहराई भी थी, जिसकी वजह से समय के साथ इसकी लोकप्रियता और बढ़ी। कई लोगों का मानना है कि यह उस विश्व कप के मुख्य आधिकारिक गीत से भी ज्यादा सफल साबित हुआ।

‘The Time of Our Lives’ का अनोखा प्रयोग

2006 विश्व कप के लिए Il Divo और Toni Braxton ने मिलकर "The Time of Our Lives" रिकॉर्ड किया। कागज पर यह साझेदारी बेहद असामान्य लगती थी, लेकिन परिणाम काफी हद तक सफल रहा। गीत में ओपेरा और पॉप संगीत का मिश्रण था, जो उस समय की संगीत शैली को दर्शाता था।

‘Live It Up’ उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सका

2018 विश्व कप के लिए Will Smith, Nicky Jam और Era Istrefi का गीत "Live It Up" काफी चर्चा में रहा। कई लोगों को लगा था कि Will Smith जैसे स्टार की मौजूदगी इस गीत को ऐतिहासिक बना देगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। गीत लोकप्रिय तो हुआ, लेकिन टूर्नामेंट खत्म होने के कुछ महीनों बाद ही लोगों की यादों से धुंधला पड़ गया।

इसके विपरीत, उसी विश्व कप के दौरान Coca-Cola के अभियान से जुड़ा K'naan का "Wavin' Flag" लोगों के दिलों में कहीं ज्यादा गहराई से बस गया।

‘Hayya Hayya’ छाया में रह गया

2022 विश्व कप में FIFA ने पहली बार एक मल्टी-सॉन्ग एल्बम फॉर्मेट अपनाया और "Hayya Hayya (Better Together)" उसका प्रमुख गीत था। हालांकि यह गीत अपने पूर्ववर्ती विश्व कप गीतों की छाया से बाहर नहीं निकल सका और समय के साथ लोगों की यादों में Jung Kook का "Dreamers" उससे ज्यादा मजबूत स्थान बनाने में सफल रहा।

शुरुआती दौर के गीतों ने रखी नींव

पॉप संगीत के दौर से पहले विश्व कप के गीत आज की तरह बड़े एंथम नहीं होते थे। वे अधिकतर ऑर्केस्ट्रा धुनों, मार्चिंग म्यूजिक और यादगार रिकॉर्डिंग्स के रूप में तैयार किए जाते थे। 1962 में चिली विश्व कप के लिए Los Ramblers का "El Rock del Mundial" पहला व्यापक रूप से मान्यता प्राप्त आधिकारिक गीत माना जाता है।

1966 में इंग्लैंड के "World Cup Willie" ने पहली बार पॉप संगीत जैसी पहचान बनाई। वहीं 1978 विश्व कप की थीम प्रसिद्ध संगीतकार Ennio Morricone ने तैयार की थी।

ये गीत Spotify प्लेलिस्ट के लिए नहीं, बल्कि स्टेडियम और इतिहास के लिए बनाए गए थे। इन्हें असफलता नहीं बल्कि उस नींव के रूप में देखा जाना चाहिए, जिस पर आज का पूरा वर्ल्ड कप म्यूजिक उद्योग खड़ा है।

फुटबॉल के साथ-साथ संगीत का भी महाकुंभ

1962 की ऑर्केस्ट्रा धुनों से लेकर 2026 के Afrobeats फ्यूजन तक, विश्व कप गीत पिछले 64 वर्षों से यह दिखाते रहे हैं कि कौन-सा संगीत शैली दुनिया को सबसे ज्यादा जोड़ सकती है, जो सफर स्थानीय रिकॉर्डिंग्स से शुरू हुआ था, वह आज एक विशाल मनोरंजन उद्योग का रूप ले चुका है। अब विश्व कप संगीत में एल्बम, हाफटाइम शो, ब्रांड पार्टनरशिप और बौद्धिक संपदा (IP) से जुड़े समझौते भी शामिल हो चुके हैं।

आज स्थिति यह है कि विश्व कप के संगीत की रणनीति और फुटबॉल की रणनीति दोनों लगभग समान महत्व रखती हैं।

और अगर "वाका वाका" ने दुनिया को कुछ सिखाया है, तो वह यह है कि सही समय पर आया एक सही गीत सिर्फ टूर्नामेंट ही नहीं, बल्कि पूरी पीढ़ी और एक पूरे दौर से भी ज्यादा समय तक याद रखा जा सकता है।

 

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टीवी से मोबाइल तक: क्या यूट्यूब बन रहा है नई पत्रकारिता का सबसे बड़ा मंच?

भारत में खबरें देखने और समझने का तरीका तेजी से बदल रहा है। कुछ साल पहले तक ज्यादातर लोग खबरों के लिए अखबार और टीवी न्यूज चैनलों पर निर्भर थे, लेकिन अब मोबाइल स्क्रीन उनकी पहली पसंद बनती जा रही है।

Vikas Saxena by
Published - Saturday, 13 June, 2026
Last Modified:
Saturday, 13 June, 2026
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भारत में पत्रकारिता का तरीका तेजी से बदल रहा है। कुछ साल पहले तक खबरों के लिए लोग अखबार और टीवी न्यूज चैनलों पर निर्भर रहते थे। बड़े-बड़े न्यूज स्टूडियो, तेज आवाज में बहस करते एंकर और “ब्रेकिंग न्यूज” की होड़ टीवी पत्रकारिता की पहचान बन चुके थे। लेकिन अब यह तस्वीर तेजी से बदल रही है।

आज बड़ी संख्या में लोग मोबाइल पर खबरें देखना और समझना पसंद कर रहे हैं। बदलाव सिर्फ प्लेटफॉर्म का नहीं है, बल्कि खबर पेश करने के तरीके का भी है। अब दर्शक शोर-शराबे और लंबी बहसों की बजाय ऐसे लोगों को सुनना पसंद करते हैं जो सरल भाषा में, सीधे और तथ्यों के साथ अपनी बात रखें। वे ऐसे कंटेंट को ज्यादा पसंद कर रहे हैं जो उन्हें जानकारी देने के साथ किसी विषय को आसानी से समझाए भी।

यहीं से “क्रिएटर जर्नलिज्म” यानी क्रिएटर आधारित पत्रकारिता का दौर शुरू हुआ है। यह पत्रकारिता बड़े टीवी स्टूडियो तक सीमित नहीं है, बल्कि यूट्यूब चैनलों, पॉडकास्ट और दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए लोगों तक पहुंच रही है।

भारत में यूट्यूब अब केवल मनोरंजन का मंच नहीं रह गया है। यह खबरों, विश्लेषण, एक्सप्लेनर वीडियो, इंटरव्यू और जनमत का एक बड़ा माध्यम बन चुका है। यही वजह है कि आज पारंपरिक मीडिया संस्थानों और स्वतंत्र कंटेंट क्रिएटर्स के बीच दर्शकों का ध्यान आकर्षित करने की सीधी प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है।

भारत और यूट्यूब: दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल दर्शक वर्ग

भारत आज यूट्यूब का सबसे बड़ा बाजार माना जाता है। स्टैटिस्टा और गूगल ऐड्स के अनुमान के मुताबिक 2026 में भारत में यूट्यूब की विज्ञापन पहुंच करीब 51 से 52 करोड़ यूजर्स के आसपास है। यानी दुनिया में सबसे ज्यादा यूट्यूब दर्शक भारत में मौजूद हैं।

दुनियाभर में यूट्यूब के करीब 2.5 से 2.7 अरब मंथली एक्टिव यूजर्स माने जाते हैं। भारत का योगदान इसमें लगातार बढ़ रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह है सस्ता मोबाइल इंटरनेट, किफायती स्मार्टफोन और क्षेत्रीय भाषाओं के कंटेंट की तेज बढ़त।

कुछ साल पहले तक यूट्यूब को केवल गानों, कॉमेडी वीडियो या मनोरंजन मंच के तौर पर देखा जाता था। लेकिन अब लोग यहां न्यूज, राजनीति, करेंट अफेयर्स, वित्त, शिक्षा और सामाजिक मुद्दों पर भी बड़ी संख्या में वीडियो देख रहे हैं।

भारत में डिजिटल ऑडियंस खास तौर पर “वीडियो-फर्स्ट” हो चुकी है। यानी लोग खबरें पढ़ने से ज्यादा देखना पसंद कर रहे हैं। रॉयटर्स इंस्टीट्यूट की डिजिटल न्यूज रिपोर्ट भी बताती है कि भारत समेत कई देशों में सोशल मीडिया और वीडियो प्लेटफॉर्म्स न्यूज देखने का बड़ा माध्यम बनते जा रहे हैं।

यही वजह है कि आज यूट्यूब क्रिएटर्स का प्रभाव कई टीवी एंकरों के बराबर या कुछ मामलों में उससे भी ज्यादा दिखाई देता है।

क्रिएटर पत्रकारिता: नए दौर के डिजिटल पत्रकार

भारत में यूट्यूब आधारित पत्रकारिता की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां दो तरह के लोग दिखाई देते हैं।

पहला वर्ग उन पत्रकारों का है जिन्होंने टीवी न्यूज छोड़कर स्वतंत्र डिजिटल प्लेटफॉर्म शुरू किए। दूसरा वर्ग उन युवाओं का है जो कभी किसी न्यूज रूम का हिस्सा नहीं रहे, लेकिन उन्होंने रिसर्च आधारित कंटेंट और एक्सप्लेनर वीडियो के जरिए बड़ी ऑडियंस बना ली।

रवीश कुमार: टीवी से डिजिटल तक

पूर्व एनडीटीवी पत्रकार रवीश कुमार इस बदलाव का बड़ा उदाहरण हैं। 2022 में एनडीटीवी छोड़ने के बाद उन्होंने अपना यूट्यूब चैनल शुरू किया। कुछ ही समय में उनका चैनल भारत के सबसे बड़े स्वतंत्र न्यूज प्लेटफॉर्म्स में शामिल हो गया।

डिजिटल ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म्स के मुताबिक उनके चैनल के सब्सक्राइबर्स करोड़ों में हैं और उनके वीडियो अरबों बार देखे जा चुके हैं। रवीश कुमार की लोकप्रियता यह दिखाती है कि दर्शक सिर्फ बड़े मीडिया ब्रांड को नहीं, बल्कि भरोसेमंद चेहरों को भी फॉलो करते हैं।

अजीत अंजुम: ग्राउंड रिपोर्टिंग का डिजिटल चेहरा

वरिष्ठ पत्रकार अजीत अंजुम भी उन बड़े नामों में शामिल हैं जिन्होंने डिजिटल पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान बनाई है। लंबे समय तक टीवी न्यूज इंडस्ट्री में काम करने के बाद उन्होंने यूट्यूब को अपना मुख्य मंच बनाया।

अजीत अंजुम की खास पहचान उनकी ग्राउंड रिपोर्टिंग और चुनावी कवरेज मानी जाती है। वे अक्सर छोटे शहरों, गांवों और आम लोगों के बीच जाकर रिपोर्टिंग करते हैं। यही वजह है कि उनकी पत्रकारिता को “ग्राउंड कनेक्टेड जर्नलिज्म” कहा जाता है।

उनके यूट्यूब चैनल पर लाखों सब्सक्राइबर्स हैं और चुनाव, राजनीति, किसान आंदोलन, बेरोजगारी और सामाजिक मुद्दों पर उनके वीडियो को बड़ी संख्या में देखा जाता है।

डिजिटल दौर में अजीत अंजुम की सफलता यह दिखाती है कि दर्शक आज भी फील्ड रिपोर्टिंग और जमीनी पत्रकारिता को महत्व देते हैं। जहां टीवी न्यूज पर स्टूडियो बहसों का दबदबा बढ़ा है, वहीं यूट्यूब पर ग्राउंड रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों को अलग पहचान मिल रही है।

पुण्य प्रसून बाजपेयी: टीवी के तेज तेवर से डिजिटल पत्रकारिता तक

वरिष्ठ पत्रकार पुण्य प्रसून बाजपेयी भी उन चर्चित चेहरों में शामिल हैं जिन्होंने टीवी न्यूज से आगे बढ़कर डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर मजबूत उपस्थिति बनाई। लंबे समय तक विभिन्न न्यूज चैनलों में एंकरिंग और राजनीतिक विश्लेषण करने के बाद उन्होंने यूट्यूब और डिजिटल माध्यमों पर अपनी अलग पहचान बनाई।

पुण्य प्रसून बाजपेयी अपने तीखे राजनीतिक विश्लेषण, सत्ता से सवाल पूछने की शैली और गहरे मुद्दों पर आधारित कार्यक्रमों के लिए जाने जाते हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आने के बाद उन्होंने लंबे फॉर्मेट वाले वीडियो, विश्लेषण और समसामयिक मुद्दों पर आधारित कंटेंट के जरिए बड़ी ऑडियंस तैयार की।

उनके वीडियो खास तौर पर उन दर्शकों के बीच लोकप्रिय हैं जो टीवी की तेज बहसों की बजाय विस्तार से मुद्दों को समझना चाहते हैं।

पुण्य प्रसून बाजपेयी का उदाहरण यह भी दिखाता है कि डिजिटल पत्रकारिता ने अनुभवी टीवी पत्रकारों को एक नया मंच दिया है, जहां वे बिना समय की पाबंदी के अपनी बात रख सकते हैं और सीधे दर्शकों से जुड़ सकते हैं।

ध्रुव राठी: एक्सप्लेनर पत्रकारिता का बड़ा चेहरा

ध्रुव राठी भारत के सबसे चर्चित डिजिटल क्रिएटर्स में गिने जाते हैं। उनके वीडियो राजनीति, प्रशासन, पर्यावरण, अर्थव्यवस्था और सामाजिक मुद्दों पर आधारित होते हैं। उन्होंने यूट्यूब पर “एक्सप्लेनर फॉर्मेट” को लोकप्रिय बनाया। यानी जटिल मुद्दों को आसान भाषा, ग्राफिक्स और रिसर्च के जरिए समझाना।

उनके अलग-अलग चैनलों और बहुभाषी ऑडियंस को मिलाकर करोड़ों सब्सक्राइबर्स हैं। कई रिपोर्ट्स के मुताबिक उनके वीडियो पर अरबों व्यूज आ चुके हैं। ध्रुव राठी की सफलता ने यह साबित किया कि यूट्यूब पर लंबी और रिसर्च आधारित पत्रकारिता भी बड़े स्तर पर सफल हो सकती है।

नितीश राजपूत: हिंदी डिजिटल ऑडियंस की नई पसंद

नितीश राजपूत ने हिंदी ऑडियंस के बीच एक्सप्लेनर और करेंट अफेयर्स वीडियो के जरिए मजबूत पहचान बनाई है। उनके वीडियो खास तौर पर युवा दर्शकों में लोकप्रिय हैं क्योंकि वे कठिन विषयों को सरल हिंदी में समझाने की कोशिश करते हैं।

डिजिटल एनालिटिक्स प्लेटफॉर्म्स के मुताबिक उनके सब्सक्राइबर्स करोड़ों के करीब पहुंच चुके हैं और उनके वीडियो लगातार हाई एंगेजमेंट हासिल करते हैं।

बरखा दत्त और मोजो स्टोरी

टीवी पत्रकारिता का बड़ा नाम रही बरखा दत्त ने भी डिजिटल प्लेटफॉर्म “मोजो स्टोरी” शुरू किया। कोविड महामारी के दौरान ग्राउंड रिपोर्टिंग और फील्ड पत्रकारिता की वजह से इस प्लेटफॉर्म को काफी पहचान मिली। यूट्यूब पर मोजो स्टोरी ने स्वतंत्र डिजिटल पत्रकारिता का एक अलग मॉडल पेश किया।

फेय डिसूजा: शांत और तथ्य आधारित पत्रकारिता

मिरर नाउ की पूर्व एग्जिक्यूटिव एडिटर फेय डिसूजा भी डिजिटल पत्रकारिता की बड़ी आवाज बन चुकी हैं। उनकी सबसे बड़ी खासियत यह मानी जाती है कि वे सनसनीखेज पत्रकारिता से दूर रहकर शांत और तथ्य आधारित रिपोर्टिंग करती हैं।

डिजिटल ऑडियंस के एक बड़े वर्ग को यह तरीका ज्यादा भरोसेमंद लगता है।

आखिर दर्शक टीवी न्यूज से दूर क्यों जा रहे हैं?

यह सवाल सबसे महत्वपूर्ण है। आखिर ऐसा क्या हुआ कि लोग टीवी छोड़कर मोबाइल पर न्यूज देखने लगे?

इसकी कई वजहें हैं।

  1. शोर और बहस से थक चुकी ऑडियंस

पिछले कुछ वर्षों में टीवी न्यूज पर लगातार आरोप लगते रहे हैं कि वहां तथ्यों से ज्यादा चीख-पुकार दिखाई देती है। प्राइम टाइम बहसों में कई बार चर्चा से ज्यादा आरोप-प्रत्यारोप देखने को मिलते हैं। इससे दर्शकों का एक वर्ग धीरे-धीरे टीवी से दूर हुआ। इसके मुकाबले यूट्यूब क्रिएटर्स लंबे फॉर्मेट में बिना रुकावट अपनी बात रखते हैं।

  1. मोबाइल-फर्स्ट पीढ़ी

भारत की नई डिजिटल पीढ़ी मोबाइल पर ही कंटेंट देखती है। आज बड़ी संख्या में युवा ऑडियंस टीवी नहीं देखती। उनके लिए यूट्यूब, इंस्टाग्राम और पॉडकास्ट ही सूचना के मुख्य स्रोत बन चुके हैं।

  1. व्यक्तिगत पसंद वाला कंटेंट

यूट्यूब एल्गोरिदम दर्शक की पसंद के हिसाब से कंटेंट दिखाता है। अगर कोई व्यक्ति राजनीति देखता है तो उसे उसी तरह के वीडियो ज्यादा दिखाई देते हैं। यही वजह है कि यूजर्स अपने पसंदीदा क्रिएटर्स से जुड़ाव महसूस करते हैं।

  1. लंबे फॉर्मेट वाले वीडियो

टीवी न्यूज में समय सीमित होता है। लेकिन यूट्यूब पर क्रिएटर्स 20 मिनट, 40 मिनट या एक घंटे तक किसी मुद्दे को विस्तार से समझा सकते हैं। यही वजह है कि एक्सप्लेनर पत्रकारिता तेजी से लोकप्रिय हुई है।

आईपीएल और डिजिटल बदलाव

भारत में मनोरंजन और खेल देखने का तरीका भी तेजी से बदल रहा है। इंडस्ट्री रिपोर्ट्स और मीडिया ट्रैकिंग डेटा बताते हैं कि आईपीएल जैसे बड़े आयोजनों में डिजिटल दर्शकों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जबकि पारंपरिक टीवी की वृद्धि धीमी पड़ रही है। जियोस्टार और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स के मुताबिक आईपीएल के दौरान करोड़ों यूजर्स डिजिटल माध्यमों पर मैच देख रहे हैं।

इसका मतलब साफ है- दर्शक गए नहीं, बल्कि मंच बदल गया है। जहां पहले पूरा परिवार टीवी के सामने बैठता था, अब हर व्यक्ति अपने मोबाइल पर अलग-अलग कंटेंट देख रहा है।

 

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‘जोहो’ ने लॉन्च किया पहला स्वदेशी सर्वर ‘नाथू ला’ : विदेशी कंपनियों को मिलेगी चुनौती

‘जोहो’ (Zoho) ने अपना पहला स्वदेशी सर्वर प्लेटफॉर्म ‘नाथू ला’ लॉन्च किया है। कंपनी का दावा है कि यह सर्वर बिजली की खपत और रखरखाव लागत को कम करेगा।

Samachar4media Bureau by
Published - Friday, 12 June, 2026
Last Modified:
Friday, 12 June, 2026
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भारतीय टेक कंपनी ‘जोहो’ (Zoho) ने अपने पहले स्वदेशी सर्वर प्लेटफॉर्म ‘नाथू ला’ (Nathu La) को लॉन्च कर दिया है। अब तक मुख्य रूप से सॉफ्टवेयर समाधान देने वाली कंपनी का यह कदम भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

खास बात यह है कि ‘नाथू ला’ (Nathu La) को बेंगलुरु या चेन्नई जैसे बड़े टेक केंद्रों में नहीं, बल्कि ‘जोहो’ (Zoho) के नागपुर स्थित सेंटर में डिजाइन किया गया है। इसे तैयार करने में कंपनी के ‘सेतु प्रोग्राम’ (Setu Program) से जुड़े युवा इंजीनियर्स ने ‘इंटेल’ (Intel) की टीम के साथ मिलकर काम किया। सर्वर में ‘इंटेल ज़िऑन 6’ (Intel Xeon 6) प्रोसेसर का उपयोग किया गया है।

कंपनी ने इस सर्वर का नाम हिमालय के प्रसिद्ध पहाड़ी दर्रे ‘नाथू ला’ के नाम पर रखा है, जो मजबूती और रणनीतिक महत्व का प्रतीक माना जाता है। ‘जोहो’ (Zoho) इस सर्वर को बाजार में बेचने की बजाय अपने 16 वैश्विक डेटा सेंटर्स (Global Data Centers) में इस्तेमाल करेगी। कंपनी का मानना है कि कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर (Computing Infrastructure) पर अपना नियंत्रण भविष्य की तकनीकी जरूरतों के लिए बेहद अहम है।

कंपनी के अनुसार, ‘नाथू ला’ (Nathu La) सामान्य सर्वर्स की तुलना में 12 से 18 प्रतिशत तक कम बिजली की खपत करेगा। साथ ही रखरखाव लागत में 20 से 30 प्रतिशत तक की बचत संभव होगी। फिलहाल कंपनी ने कुछ सौ सर्वर तैनात किए हैं और साल के अंत तक इनकी संख्या 2,000 तक पहुंचाने की योजना है। AI के बढ़ते उपयोग के कारण सर्वर लागत में तेज बढ़ोतरी के बीच ‘जोहो’ (Zoho) का यह स्वदेशी समाधान उद्योग के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है।

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'Zomato' की पैरेंट कंपनी 'Eternal' को GST विभाग का 9.63 करोड़ रुपये का नोटिस

‘जोमैटो’ (Zomato) की पैरेंट कंपनी ‘इटरनल’ (Eternal) को आंध्र प्रदेश GST विभाग से 9.63 करोड़ रुपये का टैक्स, ब्याज और जुर्माने से जुड़ा नोटिस मिला है। कंपनी ने कहा है कि उसका पक्ष मजबूत है।

Samachar4media Bureau by
Published - Thursday, 11 June, 2026
Last Modified:
Thursday, 11 June, 2026
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‘जोमैटो’ (Zomato) की पैरेंट कंपनी ‘इटरनल’ (Eternal) को आंध्र प्रदेश के GST विभाग से 9.63 करोड़ रुपये की कर देनदारी (Tax Liability) से जुड़ा नोटिस मिला है। कंपनी ने बुधवार को नियामकीय फाइलिंग (Regulatory Filing) में इसकी जानकारी दी। फाइलिंग के मुताबिक, आंध्र प्रदेश के डिप्टी कमिश्नर (ST), स्टेट स्पेशल सर्किल-I (State Special Circle-I) ने अप्रैल 2023 से मार्च 2024 की अवधि के लिए 6.49 करोड़ रुपये की GST मांग को मंजूरी दी है। इसके अलावा 2.50 करोड़ रुपये ब्याज (Interest) और 64.87 लाख रुपये जुर्माना (Penalty) भी लगाया गया है।

कंपनी का कहना है कि मामले में उसका पक्ष मजबूत है और इससे किसी वित्तीय प्रभाव (Financial Impact) की उम्मीद नहीं है। कंपनी ने अपनी फाइलिंग में कहा, "हमें विश्वास है कि इस मामले में हमारा पक्ष मजबूत है और कंपनी पर इसका कोई वित्तीय असर पड़ने की संभावना नहीं है।" आदेश के तहत कुल देनदारी लगभग 9.63 करोड़ रुपये बनती है, जिसमें टैक्स, ब्याज और जुर्माना शामिल है।

दूसरी ओर, कंपनी के वित्तीय नतीजों में जनवरी-मार्च तिमाही (Q4 FY26) के दौरान मजबूत वृद्धि देखने को मिली। इस अवधि में कंपनी का कर पश्चात लाभ (Profit After Tax - PAT) 346.15 प्रतिशत बढ़कर 174 करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि एक साल पहले समान अवधि में यह 39 करोड़ रुपये था। हालांकि पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का PAT घटकर 366 करोड़ रुपये रह गया, जो पिछले वित्त वर्ष में 527 करोड़ रुपये था।

कंपनी का परिचालन राजस्व (Revenue from Operations) चौथी तिमाही में 196.4 प्रतिशत बढ़कर 17,292 करोड़ रुपये पहुंच गया, जो एक साल पहले 5,833 करोड़ रुपये था। पूरे वित्त वर्ष में यह आंकड़ा बढ़कर 54,364 करोड़ रुपये रहा। कंपनी के फूड डिलीवरी बिजनेस (Food Delivery Business) यानी ‘जोमैटो’ (Zomato) ने तिमाही राजस्व में 33.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। यह बढ़कर 2,737 करोड़ रुपये हो गया, जबकि एक साल पहले यह 2,054 करोड़ रुपये था।

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