दीपशिखा घोष बनीं इंडियन एक्सप्रेस डिजिटल की चीफ कंटेंट ऑफिसर

इंडियन एक्सप्रेस डिजिटल से पहले दीपशिखा घोष एनडीटीवी कन्वर्जेंस में बतौर मैनेजिंग एडिटर कार्यरत थीं, जहां उन्होंने डिजिटल कंटेंट से जुड़े कई महत्वपूर्ण दायित्व निभाए।

Last Modified:
Wednesday, 25 March, 2026
DeepShikha Ghosh


वरिष्ठ पत्रकार दीपशिखा घोष को ‘इंडियन एक्सप्रेस’ समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म इंडियन एक्सप्रेस डिजिटल का चीफ कंटेंट ऑफिसर (CCO) नियुक्त किया गया है। उन्होंने आज से यह जिम्मेदारी संभाल ली है।

कंपनी की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, दीपशिखा घोष डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय हैं और डिजिटल न्यूज़ के लगातार बदलते स्वरूप के साथ अग्रणी भूमिका निभाती रही हैं। ऑडियंस की समझ, कंटेंट स्ट्रैटेजी और डिजिटल जर्नलिज्म में उनकी गहरी पकड़ को देखते हुए उन्हें यह अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है।

बताया गया है कि संस्थान ऐसे समय में अपनी कंटेंट स्ट्रैटेजी को और मजबूत करने पर काम कर रहा है, जब मीडिया इंडस्ट्री आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सर्च में उतार-चढ़ाव और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स में तेजी से हो रहे बदलावों जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है।

इंडियन एक्सप्रेस डिजिटल से पहले दीपशिखा घोष एनडीटीवी कन्वर्जेंस में बतौर मैनेजिंग एडिटर कार्यरत थीं, जहां उन्होंने डिजिटल कंटेंट से जुड़े कई महत्वपूर्ण दायित्व निभाए।

समाचार4मीडिया की ओर से दीपशिखा घोष को उनकी नई पारी के लिए ढेरों बधाई और शुभकामनाएं।

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ब्लिंक डिजिटल ने मेटा से मांगा 1,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का हर्जाना

डिजिटल विज्ञापन एजेंसी ब्लिंक डिजिटल ने मेटा के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में मुकदमा दायर कर चार बिजनेस अकाउंट बहाल करने और 1,000 करोड़ से ज्यादा हर्जाने की मांग की है।

Last Modified:
Tuesday, 22 September, 2026
meta

डिजिटल एडवरटाइजिंग एजेंसी ब्लिंक डिजिटल इंडिया (Blink Digital India) ने मेटा (Meta) के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) का रुख किया है। एजेंसी ने अपने बिजनेस अकाउंट्स और कॉरपोरेट पेज बंद किए जाने को चुनौती देते हुए 1,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के हर्जाने की मांग की है।

ब्लिंक डिजिटल ने फेसबुक इंडिया ऑनलाइन सर्विसेज (Facebook India Online Services) और मेटा प्लेटफॉर्म्स (Meta Platforms) के खिलाफ कमर्शियल सूट (Commercial Suit) दायर किया है। इसमें चार बिजनेस मैनेजर (Business Manager) अकाउंट्स को बंद किए जाने को चुनौती देते हुए उन्हें बहाल करने की मांग की गई है।

मेटा का बिजनेस मैनेजर प्लेटफॉर्म विज्ञापन एजेंसियों को फेसबुक (Facebook) और इंस्टाग्राम (Instagram) पर कई क्लाइंट अकाउंट्स, एडवरटाइजिंग कैंपेन और बिजनेस पेज मैनेज करने की सुविधा देता है। इन अकाउंट्स के बंद होने से एजेंसियों के लिए कैंपेन मैनेजमेंट और क्लाइंट्स के एडवरटाइजिंग एसेट्स तक पहुंच प्रभावित हो सकती है।

यह मामला 17 सितंबर को जस्टिस संदीप वी. मार्ने (Justice Sandeep V. Marne) के सामने आया। मेटा की ओर से पेश वकील ने ब्लिंक डिजिटल की अंतरिम अर्जी (Interim Application) का विरोध करने के लिए हलफनामा दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा।

कोर्ट ने यह अनुरोध स्वीकार करते हुए मेटा का जवाब मिलने के बाद ब्लिंक डिजिटल को अपना जवाब दाखिल करने के लिए एक अतिरिक्त सप्ताह दिया। अंतरिम अर्जी पर अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को शाम 4:30 बजे तय की गई है।

सुनवाई के दौरान मेटा प्लेटफॉर्म्स की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता जनक द्वारकादास (Janak Dwarkadas) ने कहा कि अगली सुनवाई तक कंपनी कानून के मुताबिक ब्लिंक डिजिटल का डेटा सुरक्षित रखेगी। इस आश्वासन को 17 सितंबर के कोर्ट ऑर्डर में दर्ज किया गया है।

कोर्ट ने अभी तक अकाउंट बंद किए जाने की वैधता या ब्लिंक डिजिटल के हर्जाने के दावे पर कोई फैसला नहीं दिया है। अगली सुनवाई में ब्लिंक डिजिटल की अंतरिम राहत की अर्जी पर विचार होगा, जबकि हर्जाने से जुड़ा मुख्य कमर्शियल सूट बॉम्बे हाईकोर्ट में लंबित है।

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फेस्टिव सीजन में ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर नकली और घटिया सामान की होगी जांच

फेस्टिव सीजन में ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर नकली, तस्करी और घटिया उत्पादों की बिक्री रोकने के लिए सीबीआईसी संदिग्ध विक्रेताओं और सामान की जांच कर रही है।

Last Modified:
Tuesday, 22 September, 2026
digitalnews

फेस्टिव सीजन में बढ़ती ऑनलाइन शॉपिंग के बीच सरकार ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म (Ecommerce Platforms) पर नकली, तस्करी और घटिया सामान की बिक्री रोकने के लिए निगरानी बढ़ा दी है। इकनॉमिक टाइम्स (Economic Times) की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (Central Board of Indirect Taxes and Customs) यानी सीबीआईसी (CBIC) बड़े ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और दूसरी एजेंसियों के साथ मिलकर संदिग्ध विक्रेताओं और उत्पादों की पहचान कर रहा है।

जांच में खासतौर पर ऐसे आयातित सामान पर नजर है, जो असामान्य रूप से कम कीमत पर बेचे जा रहे हैं। इसके अलावा तस्करी के जरिए देश में आने वाले संदिग्ध उत्पादों और जरूरी सर्टिफिकेशन (Certification) या सही घोषणा के बिना बेचे जा रहे सामान की भी जांच की जा रही है।

इस निगरानी में इलेक्ट्रॉनिक सामान, घड़ियां, परफ्यूम और कॉस्मेटिक्स समेत कई कंज्यूमर प्रोडक्ट्स (Consumer Products) शामिल हैं। अधिकारी ऐसे उत्पादों की भी जांच कर रहे हैं, जिन पर जरूरी कंट्री-ऑफ-ओरिजिन (Country of Origin) की जानकारी मौजूद नहीं है।

फेस्टिव सीजन में ऑनलाइन शॉपिंग बढ़ने से डिजिटल मार्केटप्लेस और लास्ट-माइल डिलीवरी नेटवर्क (Last-Mile Delivery Network) के जरिए बड़ी मात्रा में सामान पहुंचता है। इसी वजह से सरकार का फोकस ऑनलाइन सप्लाई चेन (Online Supply Chain) में उत्पादों और विक्रेताओं की जांच पर बढ़ गया है।

सरकार तेजी से बढ़ रहे डार्क स्टोर्स (Dark Stores) के नेटवर्क की भी जांच कर रही है। क्विक-कॉमर्स और ऑनलाइन डिलीवरी में इस्तेमाल होने वाले इन हाइपरलोकल फुलफिलमेंट सेंटर (Hyperlocal Fulfilment Centres) की संख्या तेजी से बढ़ी है। इनका फैला हुआ नेटवर्क निगरानी को चुनौतीपूर्ण बना सकता है। अधिकारियों की नजर संभावित टर्नओवर और रेवेन्यू (Revenue) की अंडर-रिपोर्टिंग से जुड़ी चिंताओं पर भी है।

रिसर्च कंसल्टेंसी इन्फिसम (Infisum) के मुताबिक, भारत का ई-कॉमर्स मार्केट 2024 के 125 अरब डॉलर से बढ़कर 2030 तक करीब 345 अरब डॉलर हो सकता है। वहीं, डार्क स्टोर्स का नेटवर्क 2025 के 2,525 आउटलेट्स से बढ़कर 2030 तक करीब 7,500 आउटलेट्स तक पहुंचने का अनुमान है।

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Quint Digital के नए शेयर और वारंट्स की ट्रेडिंग को BSE की मंजूरी, 18 सितंबर से कारोबार

क्विंट डिजिटल लिमिटेड (Quint Digital Limited) ने बताया है कि उसे अपने नए शेयर और वारंट को शेयर बाजार में सूचीबद्ध कराने और उनमें कारोबार शुरू करने के लिए BSE से मंजूरी मिल गई है।

Last Modified:
Friday, 18 September, 2026
QuintDigital84

क्विंट डिजिटल लिमिटेड (Quint Digital Limited) ने बताया है कि उसे अपने नए शेयर और वारंट्स को शेयर बाजार में सूचीबद्ध कराने और उनमें कारोबार शुरू करने के लिए बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) से मंजूरी मिल गई है। कंपनी को यह मंजूरी 16 सितंबर 2026 को मिली है।

कंपनी के मुताबिक, इसके तहत 82,61,401 आंशिक रूप से चुकता (Partly Paid-Up) 10 प्रतिशत गैर-संचयी, गैर-भागीदारी और अनिवार्य रूप से परिवर्तनीय प्राथमिकता शेयर (Non-Cumulative Non-Participating Compulsorily Convertible Preference Shares) जारी किए गए हैं।

इन शेयरों का अंकित मूल्य 100 रुपये है। इसके साथ ही 82,61,401 आंशिक रूप से चुकता अलग किए जा सकने वाले वारंट्स (Partly Paid-Up Detachable Warrants) भी जारी किए गए हैं, जिनका अंकित मूल्य 10 रुपये है। इन दोनों में कारोबार शुक्रवार, 18 सितंबर 2026 से शुरू होगा।

कंपनी ने बताया कि यह मंजूरी इस मामले में पहले दी गई जानकारियों के आगे की कड़ी है। इससे पहले कंपनी ने 22 मई, 19 अगस्त, 21 अगस्त, 28 अगस्त, 11 सितंबर और 16 सितंबर 2026 को इस संबंध में शेयर बाजार को जानकारी दी थी।

BSE की ओर से जारी सूचना के मुताबिक, Quint Digital के 82,61,401 प्राथमिकता शेयर अधिकार के आधार पर जारी किए गए हैं। इनका अंकित मूल्य 100 रुपये प्रति शेयर है, जबकि अभी प्रत्येक शेयर पर 50 रुपये चुकाए गए हैं। इन शेयरों का कोड 710058 है और इन्हें QDLCCPS पहचान के साथ कारोबार के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। इनका आवंटन 11 सितंबर 2026 को किया गया था।

इसके अलावा 82,61,401 वारंट भी अधिकार के आधार पर जारी किए गए हैं। प्रत्येक वारंट का अंकित मूल्य 10 रुपये है, जिसमें से अभी 5 रुपये चुकाए गए हैं। इन वारंट का कोड 961921 है और इन्हें QDLDW पहचान के साथ कारोबार के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। इनका आवंटन भी 11 सितंबर 2026 को किया गया था। 

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सेमीकॉन 2.0 में 200 चिप डिजाइन कंपनियों को जोड़ेंगे : अश्विनी वैष्णव

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सेमीकॉन 2.0 के तहत भारत में चिप डिजाइन से जुड़ी कम से कम 200 स्टार्टअप और कंपनियों को जोड़ने का लक्ष्य बताया है।

Last Modified:
Thursday, 17 September, 2026
semicon2.0

इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री (Electronics and IT Minister) अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishnaw) ने कहा है कि सरकार सेमीकॉन 2.0 (Semicon 2.0) के तहत भारत में सेमीकंडक्टर चिप डिजाइन (Semiconductor Chip Design) से जुड़ी कम से कम 200 स्टार्टअप और कंपनियों को जोड़ने का लक्ष्य लेकर चल रही है। यह सेमीकॉन 1.0 (Semicon 1.0) में शामिल 105 से ज्यादा स्टार्टअप के आधार पर अगला कदम है।

सेमीकॉन इंडिया समिट 2026 (Semicon India Summit 2026) में वैष्णव ने बताया कि सेमीकॉन 1.0 में शामिल करीब 20 स्टार्टअप को लगभग 800 करोड़ रुपये की वेंचर कैपिटल फंडिंग (Venture Capital Funding) मिली थी। उन्होंने कहा कि इस बार सरकार का लक्ष्य पहले से काफी बड़ा है और भारत में चिप डिजाइन करने वाली कम से कम 200 स्टार्टअप और कंपनियों को इससे जोड़ने की योजना है।

सेमीकॉन 2.0 के छह पिलर (Pillars) में चिप डिजाइन पहला होगा। इसके अलावा मशीन और मटेरियल, सेमीकंडक्टर फैब, एडवांस्ड पैकेजिंग (Advanced Packaging), रिसर्च एंड डेवलपमेंट (Research and Development) और टैलेंट डेवलपमेंट (Talent Development) पर भी फोकस किया जाएगा।

मशीन और मटेरियल से जुड़े पिलर में कैपिटल इक्विपमेंट (Capital Equipment), मेंटेनेंस फैसिलिटी, केमिकल और गैस समेत पूरे सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम (Semiconductor Ecosystem) को शामिल किया जाएगा। वैष्णव ने बताया कि सम्मेलन में 28 से ज्यादा देशों की भागीदारी है।

तीसरे पिलर के तहत डिस्प्ले, मेमोरी, सिलिकॉन, कंपाउंड और लॉजिक फैब (Logic Fab) का विस्तार किया जाएगा। चौथे पिलर में एडवांस्ड पैकेजिंग पर जोर रहेगा। वैष्णव ने कहा कि ओडिशा में 3डी पैकेजिंग यूनिट (3D Packaging Unit) भी स्थापित हो रही है।

पांचवें पिलर के तहत इंडस्ट्री-लेड आरएंडडी (Industry-led R&D) पर फोकस होगा। सरकार अकादमिक संस्थानों और इंडस्ट्री को साथ लाकर एप्लाइड रिसर्च प्रोजेक्ट्स (Applied Research Projects) को बढ़ावा देगी।

टैलेंट डेवलपमेंट के तहत सेमीकॉन 1.0 में 10 साल में 85 हजार डिजाइन इंजीनियरों को ट्रेनिंग देने का लक्ष्य रखा गया था। वैष्णव के मुताबिक, चार साल में ही 70 हजार डिजाइन इंजीनियरों को प्रशिक्षित किया जा चुका है।

उन्होंने बताया कि देश की 400 से ज्यादा यूनिवर्सिटीज में कैडेंस (Cadence), सीमेंस (Siemens) और सिनॉप्सिस (Synopsys) के ईडीए टूल्स (EDA Tools) उपलब्ध हैं। इससे छात्र चिप डिजाइन करने और मोहाली स्थित सेमीकंडक्टर लेबोरेटरी (Semiconductor Laboratory) के जरिए उसे टेप-आउट (Tape-out) प्रक्रिया तक ले जाने में सक्षम हो रहे हैं।

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Jio यूजर्स को Canva का 12 महीने का फ्री सब्सक्रिप्शन, मिलेगा Pro और Pro Lite का लाभ

रिलायंस जियो (Jio) और Canva ने साझेदारी का ऐलान किया है। इसके तहत पात्र Jio यूजर्स को Canva के पेड प्लान का 12 महीने तक बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के इस्तेमाल करने का मौका मिलेगा।

Last Modified:
Thursday, 17 September, 2026
JioCanva51

रिलायंस जियो (Jio) और Canva ने साझेदारी का ऐलान किया है। इसके तहत पात्र Jio यूजर्स को Canva के पेड प्लान का 12 महीने तक बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के इस्तेमाल करने का मौका मिलेगा। यह ऑफर 16 सितंबर 2026 से शुरू हो गया है।

इस ऑफर का फायदा उन यूजर्स को मिलेगा, जो अलग-अलग चैनल के जरिए पात्र Jio रिचार्ज प्लान लेते हैं। यूजर को मिलने वाला Canva सब्सक्रिप्शन उसके रिचार्ज प्लान पर निर्भर करेगा। इसके तहत कुछ यूजर्स को Canva Pro Lite, जबकि पात्र प्लान वाले यूजर्स को Canva Pro मिलेगा।

इस साझेदारी के जरिए Jio अपने बड़े यूजर बेस को Canva के डिजाइन प्लेटफॉर्म से जोड़ रहा है। यूजर्स को प्रीमियम टेम्पलेट्स, फोटो, वीडियो, फॉन्ट और एडिटिंग टूल्स जैसे कई फीचर्स मिलेंगे। Canva हिंदी समेत कई भारतीय भाषाओं को भी सपोर्ट करता है।

Canva Pro Lite में क्या मिलेगा?

Canva Pro Lite में फोटो और वीडियो के लिए Background Remover, Magic Resize, Magic Eraser, प्रिंट के लिए तैयार फाइल एक्सपोर्ट और तीन तक Brand Kits जैसे फीचर्स मिलते हैं। इसके साथ यूजर्स को 50GB Cloud Storage भी मिलेगा।

Canva Pro में मिलेंगे ज्यादा फीचर्स

Canva Pro में Pro Lite के अलावा Content Planner जैसे फीचर्स मिलते हैं, जिसकी मदद से सोशल मीडिया पोस्ट को शेड्यूल किया जा सकता है। इसमें Canva AI का conversation-based chat-to-design फीचर, पांच तक Brand Kits, ज्यादा AI usage limits और 100GB Cloud Storage भी शामिल है।

इस साझेदारी पर रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के प्रेसिडेंट किरण थॉमस ने कहा कि Canva के जरिए AI आधारित डिजाइन टूल्स लाखों भारतीयों तक पहुंचेंगे। उन्होंने कहा कि इससे छात्र, क्रिएटर, उद्यमी और छोटे कारोबारी अपनी पसंद की भाषा में डिजिटल तरीके से काम कर सकेंगे।

Canva के को-फाउंडर और COO क्लिफ ओब्रेक्ट ने कहा कि भारत Canva के तेजी से बढ़ते बाजारों में शामिल है। उनके मुताबिक, Jio के साथ साझेदारी से देश में Canva का इस्तेमाल करने वाले लोगों की संख्या और बढ़ाने में मदद मिलेगी।

हालांकि, 12 महीने का यह ऑफर यूजर के Jio रिचार्ज प्लान की पात्रता पर निर्भर करेगा। कंपनी के मुताबिक, सामान्य प्रोडक्ट अपडेट के कारण ऑफर में बदलाव भी हो सकता है।

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UPI ट्रांजैक्शन पर शुल्क को लेकर नया नियम : 2000 रुपये तक पेमेंट रहेगा फ्री

सरकार ने छोटे डिजिटल पेमेंट को लेकर नया नोटिफिकेशन जारी किया है। इसके तहत 2000 रुपये तक के UPI और RuPay डेबिट कार्ड ट्रांजैक्शन पर कोई चार्ज नहीं लिया जा सकेगा।

Last Modified:
Tuesday, 15 September, 2026
upicharge

यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (Unified Payments Interface) यानी यूपीआई (UPI) ट्रांजैक्शन को लेकर सरकार ने नया नियम जारी किया है। वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) के डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज (Department of Financial Services) ने 14 सितंबर को गैजेट नोटिफिकेशन (Gazette Notification) जारी कर छोटे डिजिटल पेमेंट्स (Digital Payments) के लिए शुल्क से जुड़े नियम स्पष्ट किए हैं।

नोटिफिकेशन के मुताबिक, 2,000 रुपये तक के यूपीआई ट्रांजैक्शन पर बैंक या पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर (Payment System Provider) किसी भी तरह का चार्ज नहीं लगा सकते। यह रोक सीधे लगाए जाने वाले शुल्क के साथ-साथ अप्रत्यक्ष तरीके से लगाए जाने वाले चार्ज पर भी लागू होगी।

यह नियम पेमेंट करने वाले और पेमेंट पाने वाले, दोनों पर लागू है। यानी 2,000 रुपये तक के यूपीआई पेमेंट के लिए न ग्राहक से और न ही दुकानदार या व्यापारी से कोई ट्रांजैक्शन फीस (Transaction Fee) ली जा सकती है।

उदाहरण के तौर पर, अगर कोई ग्राहक किराने की दुकान पर यूपीआई के जरिए 500 रुपये का भुगतान करता है, तो इस पेमेंट के लिए ग्राहक या दुकानदार से अलग से कोई फीस नहीं ली जा सकती। यही नियम 2,000 रुपये तक के पेमेंट के लिए रुपे डेबिट कार्ड (RuPay Debit Card) से किए गए भुगतान पर भी लागू होगा।

यह नियम खास तौर पर कम वैल्यू वाले डिजिटल पेमेंट के लिए अहम है। किराना दुकानों, रेहड़ी-पटरी वालों, छोटी दुकानों और दूसरे छोटे कारोबारों में यूपीआई और डेबिट कार्ड से बड़े पैमाने पर भुगतान लिया जाता है। ऐसे में 2,000 रुपये या उससे कम के पेमेंट पर ग्राहक और व्यापारी से अलग चार्ज नहीं लिया जा सकेगा।

हालांकि, 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई ट्रांजैक्शन को लेकर नोटिफिकेशन में कोई नया फीस स्ट्रक्चर (Fee Structure) नहीं बताया गया है। इसका मतलब यह नहीं है कि 2,000 रुपये से अधिक के हर यूपीआई पेमेंट पर अब निश्चित रूप से शुल्क लगेगा। ऐसे ट्रांजैक्शन पर लागू नियम और फीस संबंधित प्रावधानों और मौजूदा चार्ज स्ट्रक्चर पर निर्भर करेंगे।

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डिजिटल न्यूज सर्कुलेशन के ऑडिट के लिए ABC ने सरकार से मांगी मंजूरी

ऑडिट ब्यूरो ऑफ सर्कुलेशंस (ABC) ने डिजिटल ऑडियंस की माप के लिए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) के सामने एक प्रस्ताव रखा है।

Last Modified:
Tuesday, 15 September, 2026
News874

कंचन श्रीवास्तव, सीनियर एडिटर, एक्सचेंज4मीडिया ।।

ऑडिट ब्यूरो ऑफ सर्कुलेशंस (ABC) ने डिजिटल ऑडियंस की माप के लिए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) के सामने एक प्रस्ताव रखा है। ABC के नवनिर्वाचित चेयरमैन मोहित जैन ने एक्सचेंज4मीडिया को यह जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि डिजिटल सर्कुलेशन और ऑडियंस की अहमियत लगातार बढ़ रही है और ऐसे में ABC अपने मौजूदा मापन ढांचे में डिजिटल को भी शामिल करने की योजना बना रहा है।

मोहित जैन के मुताबिक, ABC ने केंद्र सरकार को ‘डिजिटल न्यूज मेजरमेंट’ को व्यापक स्तर पर लागू करने का प्रस्ताव दिया है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि इसे लागू करने में समय लग सकता है, क्योंकि इसमें सरकार की मंजूरी के साथ-साथ एक नई मापन व्यवस्था तैयार करने की जटिलता भी शामिल है।

मोहित जैन ने कहा, “हमने डिजिटल न्यूज मेजरमेंट को व्यापक स्तर पर लागू करने के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव दिया है।” उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ABC के प्रमुख ग्राहकों में से एक है और सरकार भी इस मुद्दे पर बात कर रही है। उनके मुताबिक, ऑडिट में डिजिटल ऑडियंस को भी शामिल किया जाना चाहिए।

प्रिंट और डिजिटल के बीच अंतर कम करने की कोशिश

ABC का यह कदम ऐसे समय में आया है जब भारत का प्रिंट मीडिया मापन सिस्टम भी प्रिंट और डिजिटल के बीच की दूरी कम करने की कोशिश कर रहा है। 

मीडिया रिसर्च यूजर्स काउंसिल इंडिया (MRUCI) भारतीय पाठक सर्वेक्षण (IRS) को फिर से शुरू करने की दिशा में काम कर रही है। IRS आखिरी बार 2019 में जारी हुआ था। प्रस्तावित नए पायलट में प्रिंट के साथ-साथ डिजिटल रीडरशिप को भी मापने की योजना है। इससे विज्ञापनदाताओं को अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर न्यूज कंटेंट की खपत की ज्यादा मौजूदा तस्वीर मिल सकती है।

ABC और IRS की भूमिका हालांकि अलग-अलग रही है। ABC मुख्य रूप से ऑडिटेड सर्कुलेशन का आंकड़ा देता है, यानी किसी प्रकाशन की कितनी प्रतियां सर्कुलेट हो रही हैं। वहीं IRS यह पता लगाने की कोशिश करता है कि किसी प्रकाशन को कितने लोग पढ़ते या इस्तेमाल करते हैं। लेकिन अब जब ऑडियंस तेजी से प्रिंट से डिजिटल की ओर जा रही है, दोनों संस्थाओं के सामने एक बड़ा सवाल है कि मल्टी-प्लेटफॉर्म दौर में किसी पब्लिशर की कुल ऑडियंस को किस तरह मापा जाए।

ABC पहले भी कर चुका है डिजिटल मापन की कोशिश

ABC इससे पहले भी डिजिटल मापन के क्षेत्र में कदम रख चुका है। ब्यूरो ने 2016 में ABC Digital लॉन्च किया था। इसके लिए Nielsen ने PC और मोबाइल पर डिजिटल मापन का समाधान उपलब्ध कराया था। उस समय भी इसका उद्देश्य प्रिंट मापन के साथ डिजिटल ऑडियंस को समझना था, क्योंकि पाठकों का डिजिटल प्लेटफॉर्म की ओर रुझान बढ़ रहा था।

अब डिजिटल विज्ञापन भारतीय विज्ञापन बाजार का एक बड़ा हिस्सा बन चुका है। ऐसे में पब्लिशर्स के लिए वेबसाइट, ऐप और प्रिंट पर कंटेंट देखने वाली ऑडियंस की वैल्यू बताने के लिए भरोसेमंद थर्ड-पार्टी डेटा की जरूरत बढ़ गई है। इसके साथ ही यह सवाल भी उठ रहा है कि भारत में डिजिटल ऑडियंस के लिए अलग-अलग उद्देश्यों वाली कई मापन व्यवस्थाएं होंगी या फिर ABC और IRS भविष्य में एक-दूसरे के पूरक बनकर काम करेंगे।

विज्ञापनदाताओं के लिए भी जरूरी है एक साझा मापन सिस्टम

विज्ञापन इंडस्ट्री भी अलग-अलग मीडिया प्लेटफॉर्म पर ऑडियंस को मापने के लिए एक साझा व्यवस्था की जरूरत पर जोर देती रही है। फिलहाल विज्ञापनदाता अलग-अलग डेटासेट और प्लेटफॉर्म की ओर से दिए गए आंकड़ों का इस्तेमाल करते हैं। इससे अलग-अलग स्क्रीन पर ऑडियंस को एक साथ समझना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। हालांकि, ABC के लिए फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती सरकार की मंजूरी है। मोहित जैन ने कहा कि सरकार ABC के प्रमुख हितधारकों में से एक है और पूरी प्रक्रिया में समय लग सकता है।

ABC की वेबसाइट के मुताबिक, ब्यूरो के 750 से ज्यादा पब्लिशर सदस्य हैं। इनमें 562 डेली, 107 वीकली और 50 मैगजीन शामिल हैं। यदि MIB इस प्रस्ताव को मंजूरी देता है तो भारत में डिजिटल ऑडियंस के लिए दो पुराने और प्रमुख संस्थानों की ओर से मापन व्यवस्था तैयार करने की कोशिश सामने आ सकती है। एक तरफ MIB के समर्थन से ABC का डिजिटल मापन ढांचा होगा, वहीं दूसरी तरफ MRUC के जरिए IRS को फिर से शुरू करने की कोशिश चल रही है। ऐसे में सवाल यह है कि इंडस्ट्री को दो अलग-अलग सिस्टम की जरूरत है या दोनों व्यवस्थाओं को एक-दूसरे के पूरक के तौर पर विकसित किया जाना चाहिए।

सात साल से IRS का इंतजार

IRS आखिरी बार 2019 में जारी हुआ था। इसके बाद से फंडिंग, मेथडोलॉजी, रिसर्च पार्टनर और सर्वे के दायरे जैसे मुद्दों पर असहमति के चलते इसकी वापसी लगातार टलती रही है।

इंडस्ट्री के कुछ अधिकारियों का मानना है कि अब सवाल सिर्फ सर्वे को दोबारा शुरू करने का नहीं है, बल्कि यह भी तय करना जरूरी है कि पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बदले मीडिया इकोसिस्टम में एक रीडरशिप करेंसी को आखिर मापना क्या चाहिए।

पब्लिशर्स की ओर से फंड किए जाने वाले IRS को MRUC और Readership Studies Council of India (RSCI) मिलकर प्रकाशित करते हैं। इसे दुनिया का सबसे बड़ा लगातार चलने वाला रीडरशिप स्टडी बताया जाता है। इसका सालाना सैंपल साइज 2.56 लाख से ज्यादा उत्तरदाताओं का है। IRS भारत में प्रिंट और दूसरे मीडिया के इस्तेमाल, लोगों की प्रोफाइल, प्रोडक्ट ओनरशिप और उनके इस्तेमाल की तस्वीर पेश करता है। इसके सर्वे में 100 से ज्यादा प्रोडक्ट कैटेगरी भी शामिल हैं।

इस सर्वे पर करीब 40-50 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है, जिसे पब्लिशर्स के योगदान से पूरा किया जाता है। हालांकि, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, प्रिंट सर्कुलेशन में कमी और न्यूज कंजम्पशन की बदलती आदतों के बीच कुछ पब्लिशर्स इसकी उपयोगिता और निवेश पर मिलने वाले रिटर्न को लेकर आश्वस्त नहीं हैं।

एक रीजनल पब्लिशर के मुताबिक, कई पब्लिशर्स ऐसे सर्वे में पैसा लगाने से हिचक रहे हैं, जिसके नतीजे उनकी मार्केट पोजिशन को कमजोर कर सकते हैं और इससे विज्ञापन से होने वाली कमाई पर भी असर पड़ सकता है।

यह चुनौती इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि मीडिया प्लानिंग का तरीका बदल चुका है। डिजिटल प्लेटफॉर्म अब कैंपेन की लगभग रियल-टाइम माप उपलब्ध कराते हैं, जबकि रिटेल मीडिया में सीधे नतीजे मापने की सुविधा है। विज्ञापनदाता भी अब सिर्फ समय-समय पर मिलने वाली रिपोर्ट के बजाय लगातार कैंपेन को बेहतर बनाने की उम्मीद करते हैं।

इसके बावजूद प्रिंट इंडस्ट्री के लिए IRS की गैरमौजूदगी एक बड़ा मापन गैप पैदा करती है। प्रिंट सेक्टर से करीब 20,000 करोड़ रुपये का विज्ञापन कारोबार होने का अनुमान है। ऐसे में पब्लिशर्स का मानना है कि मीडिया प्लानिंग, विज्ञदाताओं का भरोसा और बाजार की तुलना के लिए एक स्वतंत्र इंडस्ट्री करेंसी जरूरी है।

फिलहाल विज्ञापनदाता ABC के सर्कुलेशन डेटा के अलावा पब्लिशर्स की अपनी रिसर्च और अलग-अलग ऑडियंस स्टडीज पर भी निर्भर हैं। अब ABC के डिजिटल ऑडियंस मापन प्रस्ताव और IRS को फिर से शुरू करने की कोशिश के बीच यह देखना अहम होगा कि भारत में डिजिटल न्यूज ऑडियंस के लिए भविष्य का मापन सिस्टम किस दिशा में जाता है।

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अब WhatsApp पर मिलेगी PF की जानकारी, EPFO ने शुरू किया आधिकारिक चैनल

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने अपने सदस्यों, पेंशनर्स और नियोक्ताओं के लिए एक नया आधिकारिक WhatsApp चैनल शुरू किया है।

Last Modified:
Tuesday, 15 September, 2026
EPFO9856

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने अपने सदस्यों, पेंशनर्स और नियोक्ताओं के लिए एक नया आधिकारिक WhatsApp चैनल शुरू किया है। इसके जरिए लोग वेबसाइट या UMANG ऐप पर लॉगिन किए बिना PF से जुड़ी जरूरी जानकारी WhatsApp के जरिए हासिल कर सकेंगे।

EPFO ने 13 सितंबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए इस नए WhatsApp चैनल की जानकारी दी। संगठन के मुताबिक, इस चैनल के जरिए सदस्यों तक जरूरी अपडेट और उपयोगी जानकारी सीधे WhatsApp पर पहुंचाई जाएगी।

कैसे काम करेगा WhatsApp चैनल?

सदस्य EPFO की ओर से साझा किए गए लिंक या QR कोड के जरिए आधिकारिक WhatsApp चैनल से जुड़ सकते हैं। इसके बाद बातचीत शुरू करने के लिए उन्हें “Hello” मैसेज भेजना होगा।

बताया गया है कि सेवा का इस्तेमाल उसी मोबाइल नंबर से किया जाना होगा, जो सदस्य के UAN (Universal Account Number) के साथ रजिस्टर्ड है। सिस्टम पहले यह जांच करेगा कि जानकारी मांगने वाला व्यक्ति उसी रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर का इस्तेमाल कर रहा है या नहीं।

नंबर का सत्यापन होने के बाद यूजर को कुछ विकल्प दिए जाएंगे। इनके जरिए वह अपनी जरूरत के मुताबिक जानकारी हासिल कर सकेगा। सिस्टम इन अनुरोधों को AI आधारित चैटबॉट के जरिए प्रोसेस कर सकता है या EPFO के रिकॉर्ड से सीधे जानकारी निकाल सकता है।

PF बैलेंस और क्लेम स्टेटस की मिल सकती है जानकारी

शुरुआती जानकारी के मुताबिक, WhatsApp के जरिए सदस्य अपने PF खाते का बैलेंस, क्लेम का स्टेटस और हाल की कुछ ट्रांजैक्शन की जानकारी देख सकते हैं। यानी PF से जुड़ी पासबुक जैसी कुछ सुविधाएं WhatsApp पर मिल सकती हैं।

हालांकि, EPFO ने अभी इस चैनल पर उपलब्ध सभी सेवाओं की पूरी आधिकारिक सूची जारी नहीं की है। साथ ही, जवाब मिलने में कितना समय लगेगा, कितनी बार जानकारी मांगी जा सकती है या मोबाइल नंबर का सत्यापन नहीं होने पर क्या प्रक्रिया होगी, इस बारे में भी अभी विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है।

ऐसे में सदस्यों को WhatsApp चैनल से जुड़ने के बाद स्क्रीन पर दिए गए विकल्पों के अनुसार ही आगे बढ़ने और सेवा से जुड़ी जानकारी के लिए EPFO के आधिकारिक अपडेट पर भरोसा करने की सलाह दी गई है।

WhatsApp के अलावा ये विकल्प भी मौजूद

जब तक WhatsApp चैनल की सभी सुविधाओं को लेकर EPFO की ओर से पूरी जानकारी सामने नहीं आती, तब तक PF बैलेंस चेक करने के मौजूदा तरीके भी इस्तेमाल किए जा सकते हैं।

सदस्य अपने UAN से रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से 7738299899 पर SMS भेजकर PF की जानकारी हासिल कर सकते हैं। इसके लिए मैसेज में “EPFOHO UAN ENG” लिखना होगा। यहां ENG की जगह अपनी पसंदीदा भाषा के पहले तीन अक्षर लिखे जा सकते हैं।

इसके अलावा, UAN से जुड़े मोबाइल नंबर से 9966044425 पर मिस्ड कॉल देकर भी PF से जुड़ी जानकारी SMS के जरिए प्राप्त की जा सकती है। वहीं, UMANG ऐप और EPFO के Member e-Sewa Portal के जरिए UAN और OTP से लॉगिन करके PF की पासबुक सहित अन्य सेवाओं का इस्तेमाल पहले की तरह किया जा सकता है।

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Quint Digital के राइट्स इश्यू में बड़ा आवंटन, 82.61 लाख CCPS और वारंट जारी

क्विंट डिजिटल लिमिटेड ने राइट्स इश्यू के तहत 82,61,401 आंशिक रूप से चुकता अनिवार्य रूप से परिवर्तनीय वरीयता शेयर ाऔर इतने ही डिटैचेबल वारंट आवंटित किए हैं।

Last Modified:
Saturday, 12 September, 2026
Quint521

क्विंट डिजिटल लिमिटेड (Quint Digital Limited) ने राइट्स इश्यू के तहत 82,61,401 आंशिक रूप से चुकता (Partly Paid-Up) अनिवार्य रूप से परिवर्तनीय वरीयता शेयर (Compulsorily Convertible Preference Shares-CCPS) और इतने ही डिटैचेबल वारंट (Detachable Warrants) आवंटित किए हैं। कंपनी के निदेशक मंडल ने 11 सितंबर 2026 को हुई बैठक में इस आवंटन को मंजूरी दी।

कंपनी ने बताया कि 100 रुपये अंकित मूल्य वाले प्रत्येक CCPS को 100 रुपये के इश्यू मूल्य पर आवंटित किया गया है। ये 10% Non-Cumulative Non-Participating Compulsorily Convertible Preference Shares हैं। प्रत्येक CCPS पर आवेदन के समय 50 रुपये का भुगतान किया गया है, जबकि बाकी राशि कंपनी की ओर से मांग किए जाने पर चुकानी होगी।

इस तरह 82,61,401 CCPS का कुल इश्यू मूल्य 82.61 करोड़ रुपये है। ये CCPS राइट्स इश्यू के तहत पात्र इक्विटी शेयरधारकों या आवेदकों, जिनमें रिनाउंसी (Renounce) भी शामिल हैं, को आवंटित किए गए हैं।

इसके साथ ही कंपनी ने 82,61,401 आंशिक रूप से चुकता डिटैचेबल वारंट भी आवंटित किए हैं। प्रत्येक वारंट का इश्यू मूल्य 10 रुपये है। आवेदन के समय प्रत्येक वारंट के लिए 5 रुपये का भुगतान किया गया है और बाकी राशि कंपनी की ओर से मांग किए जाने पर चुकानी होगी। इन वारंट का कुल इश्यू मूल्य 8.26 करोड़ रुपये है।

कंपनी के मुताबिक, इस आवंटन के बाद उसका मौजूदा पूरी तरह चुकता इक्विटी शेयर पूंजी में कोई बदलाव नहीं हुआ है। कंपनी के पास पहले की तरह 10 रुपये अंकित मूल्य वाले 4,72,08,008 पूरी तरह चुकता इक्विटी शेयर हैं, जिनकी कुल राशि 47.20 करोड़ रुपये है।

आवंटन के बाद कंपनी के पूंजी ढांचे में 82,61,401 आंशिक रूप से चुकता CCPS शामिल हो गए हैं, जिनकी कुल राशि 41.30 करोड़ रुपये है। इसके अलावा 82,61,401 आंशिक रूप से चुकता डिटैचेबल वारंट भी शामिल हैं, जिनकी राशि 4.13 करोड़ रुपये है।

कंपनी ने बताया कि यह आवंटन राइट्स इश्यू के लिए तय किए गए Basis of Allotment को अंतिम रूप दिए जाने के बाद किया गया है। इसके लिए कंपनी ने इश्यू के रजिस्ट्रार और BSE Limited, जो इस इश्यू का Designated Stock Exchange है, के साथ प्रक्रिया पूरी की।

कंपनी ने इस संबंध में SEBI के 30 जनवरी 2026 के सर्कुलर के तहत जरूरी जानकारी भी स्टॉक एक्सचेंज को उपलब्ध कराई है।

 

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महात्मा गांधी की अनकही कहानियां सामने लाएगी ‘Gandhi Gatha’, इस चैनल पर होगी प्रसारित

महात्मा गांधी के जीवन से जुड़ी ऐसी छोटी और अनकही कहानियों को सामने लाने के लिए नई सीरीज ‘Gandhi Gatha’ शुरू की जा रही है, जिनका जिक्र इतिहास की बड़ी और चर्चित घटनाओं के बीच अक्सर पीछे छूट जाता है।

Last Modified:
Thursday, 10 September, 2026
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महात्मा गांधी के जीवन से जुड़ी ऐसी छोटी और अनकही कहानियों को सामने लाने के लिए नई सीरीज ‘Gandhi Gatha’ शुरू की जा रही है, जिनका जिक्र इतिहास की बड़ी और चर्चित घटनाओं के बीच अक्सर पीछे छूट जाता है। यह सीरीज यूट्यूब चैनल Avadh Panch पर प्रस्तुत की जाएगी और इसे वरिष्ठ पत्रकार मधुकर उपाध्याय पेश करेंगे।

‘Gandhi Gatha’ का मकसद गांधी जी के जीवन को केवल बड़ी ऐतिहासिक घटनाओं, तारीखों और समय के हिसाब से बताना नहीं है। सीरीज में उनके जीवन से जुड़े उन छोटे प्रसंगों और मानवीय कहानियों पर फोकस किया जाएगा, जो उपलब्ध तो हैं, लेकिन हजारों पन्नों में दबे होने की वजह से आम लोगों तक कम पहुंच पाती हैं।

सीरीज की शुरुआत करते हुए मधुकर उपाध्याय बताते हैं कि इतिहास लिखते समय इतिहासकारों का ध्यान अक्सर बड़ी घटनाओं पर ज्यादा रहता है। इसकी एक वजह यह भी है कि बड़ी घटनाओं की तारीख, समय और उनसे जुड़े लोग आसानी से दर्ज और प्रमाणित किए जा सकते हैं। वहीं छोटी घटनाएं कई बार फुटनोट या हाशिए में दर्ज होकर रह जाती हैं।

तारीखों के बजाय कहानियों पर फोकस

‘Gandhi Gatha’ की खास बात यह होगी कि इसमें गांधी जी के जीवन की घटनाओं को किसी तय क्रम में नहीं दिखाया जाएगा। यानी कहानियां उनके जीवन की तारीख या साल के हिसाब से क्रमवार नहीं होंगी।

सीरीज की सोच यह है कि अगर गांधी जी के जीवन से साल, तारीख, दिन और समय जैसी चीजें हटा दी जाएं, तो उनके जीवन से जुड़ी ऐसी कहानियां सामने आती हैं, जिन्हें आमतौर पर पढ़ने या सुनने का मौका कम मिलता है।

मधुकर उपाध्याय के मुताबिक, गांधी जी के बारे में काफी सामग्री उपलब्ध है और उनकी बड़ी घटनाओं की जानकारी को अलग-अलग स्रोतों से जांचा जा सकता है। लेकिन छोटी कहानियों को हजारों पन्नों के बीच तलाशना आसान नहीं है। ‘Gandhi Gatha’ में इन्हीं कहानियों को खोजकर एक साथ सामने लाने की कोशिश की गई है।

‘अनलिखी नहीं, अनकही हैं ये कहानियां’

सीरीज में गांधी जी से जुड़ी कहानियों को ‘अनलिखी’ नहीं, बल्कि ‘अनकही’ बताया गया है। यानी ये घटनाएं कहीं न कहीं दर्ज हैं, लेकिन आम चर्चा और इतिहास की मुख्यधारा में इनका जिक्र कम हुआ है। इसी वजह से सीरीज में घटनाओं के समय के पारंपरिक क्रम को भी तोड़ा गया है। किसी अंक में 1930 या 1946 के बाद की घटना पहले आ सकती है, तो किसी दूसरे अंक में 1915 या गांधी जी के जीवन के किसी और दौर की कहानी सामने आ सकती है।

नोआखली की घटना में कुत्ते की कहानी भी

‘Gandhi Gatha’ में किस तरह की कहानियां दिखाई जाएंगी, इसका एक उदाहरण नोआखली से जुड़ी घटना के जरिए दिया गया है। मधुकर उपाध्याय के अनुसार, नोआखली में दंगे रोकने के लिए गांधी जी पैदल घूमे थे। इस पूरी घटना के बीच एक कुत्ते से जुड़ा प्रसंग भी है, जिसका आमतौर पर ज्यादा जिक्र नहीं मिलता।

बताया गया है कि गांधी जी को एक कुत्ता मिला और वह उन्हें अपने मालिक के घर तक ले गया। जब गांधी जी उस घर तक पहुंचे तो वहां कोई जीवित व्यक्ति नहीं था, बल्कि वहां शव पड़े थे। सीरीज में इसी तरह के छोटे, मानवीय और कम चर्चित प्रसंगों को सामने लाने की कोशिश की जाएगी।

हर दिन आएगा नया एपिसोड

‘Gandhi Gatha’ का पहला एपिसोड 20 सितंबर को आएगा। इसके बाद सीरीज में हर दिन एक नया एपिसोड पेश करने की योजना है। यानी दर्शक रोज गांधी जी के जीवन से जुड़ी एक नई कहानी सुन सकेंगे। सीरीज की शुरुआत गांधी जी के प्रिय भजन ‘वैष्णव जन तो तेने कहिए’ से होगी। यह भजन नरसी मेहता ने लिखा था। कार्यक्रम के लिए प्रसिद्ध गायिका शुभा मुद्गल ने इस भजन को गाया है। सीरीज की प्रस्तुति में इस भजन का इस्तेमाल किया जाएगा और हर एपिसोड की शुरुआत में शुभा मुद्गल की आवाज में इसे सुनाया जाएगा।

‘Gandhi Gatha’ के जरिए गांधी जी के जीवन को एक अलग नजरिए से देखने की कोशिश की गई है, जिसमें बड़ी ऐतिहासिक घटनाओं के बजाय उन छोटी कहानियों पर ध्यान दिया जाएगा, जो उनके जीवन और व्यक्तित्व के अलग-अलग पहलुओं को सामने लाती हैं।

 

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