इस सौदे को पूरा करने के लिए भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI), भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI), आईपीएल गवर्निंग काउंसिल और अन्य नियामक संस्थाओं की मंजूरी जरूरी होगी।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) से जुड़ी एक बड़ी कारोबारी खबर सामने आई है। मित्तल परिवार ने अदार पूनावाला के साथ मिलकर आईपीएल टीम राजस्थान रॉयल्स को खरीदने के लिए अंतिम समझौता कर लिया है। इस डील की कुल वैल्यू करीब 1.65 अरब अमेरिकी डॉलर (लगभग 13,700 करोड़ रुपये) बताई जा रही है।
यह सौदा मौजूदा मालिक मनोज बडाले और उनके कंसोर्टियम के साथ तय हुआ है। इस डील में सिर्फ आईपीएल टीम राजस्थान रॉयल्स ही नहीं, बल्कि इससे जुड़ी अन्य फ्रेंचाइजी—दक्षिण अफ्रीका की पार्ल रॉयल्स और कैरेबियन की बारबाडोस रॉयल्स—भी शामिल हैं।
डील पूरी होने के बाद मित्तल परिवार के पास करीब 75 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी, जबकि अदार पूनावाला के पास लगभग 18 प्रतिशत हिस्सेदारी रहेगी। बाकी करीब 7 प्रतिशत हिस्सेदारी मौजूदा निवेशकों के पास ही बनी रहेगी। मनोज बडाले भी टीम से जुड़े रहेंगे और पुराने व नए मालिकों के बीच समन्वय की भूमिका निभाएंगे।
इस सौदे को पूरा करने के लिए भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI), भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI), आईपीएल गवर्निंग काउंसिल और अन्य नियामक संस्थाओं की मंजूरी जरूरी होगी। उम्मीद है कि यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद डील 2026 की तीसरी तिमाही (Q3) तक फाइनल हो जाएगी।
डील पूरी होने के बाद लक्ष्मी एन. मित्तल, आदित्य मित्तल, वनीशा मित्तल-भाटिया, अदार पूनावाला और मनोज बडाले राजस्थान रॉयल्स के बोर्ड में शामिल होंगे।
लक्ष्मी एन. मित्तल ने कहा कि उन्हें क्रिकेट से गहरा लगाव है और राजस्थान से पारिवारिक जुड़ाव होने के कारण वह इस टीम का हिस्सा बनने को लेकर बेहद उत्साहित हैं। वहीं आदित्य मित्तल ने आईपीएल को दुनिया की सबसे बड़ी खेल लीगों में से एक बताते हुए कहा कि राजस्थान रॉयल्स नई प्रतिभाओं को निखारने के लिए जानी जाती है और इस परंपरा को आगे बढ़ाया जाएगा।
अदार पूनावाला ने भी इस निवेश को लेकर खुशी जताई और टीम के दीर्घकालिक विकास में योगदान देने की बात कही। मनोज बडाले ने नए निवेशकों का स्वागत करते हुए कहा कि वह टीम के साथ जुड़े रहेंगे और इसके विकास में सहयोग जारी रखेंगे।
शिवांश मिश्रा ने जानी-मानी कमर्शियल वाहन कंपनी Daimler India Commercial Vehicles के साथ अपनी नई पारी शुरू की है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
शिवांश मिश्रा ने जानी-मानी कमर्शियल वाहन कंपनी Daimler India Commercial Vehicles के साथ अपनी नई पारी शुरू की है। उन्होंने कंपनी में ब्रैंड मैनेजर के तौर पर जॉइन किया है और अब वह BharatBenz ब्रैंड की जिम्मेदारी संभालेंगे। वह चेन्नई से अपना कामकाज देखेंगे।
शिवांश मिश्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लिंक्डइन (LinkedIn) पर एक पोस्ट के जरिए अपनी नई भूमिका की जानकारी साझा की। उन्होंने इस अवसर के लिए आभार जताते हुए बताया कि Daimler India Commercial Vehicles में ब्रैंड मैनेजर के तौर पर उनकी नई जिम्मेदारी शुरू हुई है। यह कदम इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल मैनेजमेंट आनंद (IRMA) के साथ करीब आठ साल की पारी के बाद आया है।
बता दें कि शिवांश मिश्रा जुलाई 2018 से जुलाई 2026 तक IRMA से जुड़े रहे। यहां उन्होंने कम्युनिकेशन मैनेजर के तौर पर काम किया और संस्थान की कम्युनिकेशन से जुड़ी जिम्मेदारियां संभालीं। उनके अनुभव में रणनीतिक संचार, कंटेंट डेवलपमेंट, मीडिया रिलेशंस और मार्केटिंग कम्युनिकेशन जैसे क्षेत्र शामिल रहे हैं।
IRMA में अपने कार्यकाल के दौरान वह संस्थान की ब्रैंडिंग, स्टेकहोल्डर एंगेजमेंट और thought leadership को मजबूत करने वाली कैंपेनिंग से जुड़े रहे। उनके प्रोफाइल के मुताबिक, उनका काम डिजिटल प्लेटफॉर्म, डेटा इनसाइट्स और human-centric messaging के जरिए रणनीतिक उद्देश्यों को हासिल करने पर केंद्रित रहा।
शिवांश मिश्रा को ब्रैंड विजिबिलिटी और ऑडियंस एंगेजमेंट, कंटेंट स्ट्रैटेजी और मीडिया पोजिशनिंग तथा क्राइसिस कम्युनिकेशन और स्टेकहोल्डर अलाइनमेंट का भी अनुभव है। वह इससे पहले फ्रीलांस राइटर के तौर पर भी काम कर चुके हैं।
उनके शुरुआती प्रोफेशनल अनुभव की बात करें तो उन्होंने BORDA - Bremen Overseas Research and Development Association में कंसल्टेंट और Reacho में कंटेंट डेवलपर और एडिटर के तौर पर काम किया है। इसके अलावा Samarthan-Centre for Development Support; Bhopal में प्रोग्राम को-ऑर्डिनेटर और राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद (Rajeevika), MoRD, GoR में यंग प्रोफेशनल की भूमिका भी निभाई है।
शिवांश मिश्रा ने IRMA से 2013 से 2015 के बीच पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन मैनेजमेंट (Rural Management) किया है। इससे पहले उन्होंने सावित्रीबाई फुले पुणे यूनिवर्सिटी से 2008 से 2011 के बीच कॉमर्स में ग्रेजुएशन (B.Com.), Accounting and Finance की पढ़ाई की।
पेप्सिको (PepsiCo) ने निधिमा एम. (Nidhima M.) को भारत, बांग्लादेश और नेपाल के लिए सीनियर डायरेक्टर-HR नियुक्त किया है। इससे पहले वह अमेजन (Amazon) में थीं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
पेप्सिको (PepsiCo) ने निधिमा एम. (Nidhima M.) को भारत, बांग्लादेश और नेपाल के लिए सीनियर डायरेक्टर–एचआर (Senior Director – HR) नियुक्त किया है। नई भूमिका में वह इन तीनों बाजारों से जुड़े मानव संसाधन कार्यों की जिम्मेदारी संभालेंगी।
पेप्सिको से जुड़ने से पहले निधिमा ने अमेजन (Amazon) में करीब चार साल काम किया। उनकी पिछली जिम्मेदारी सीनियर मैनेजर–एचआर/पीपल पार्टनर (Senior Manager – HR/People Partner) की थी, जहां वह अमेजन स्टोर्स कस्टमर एक्सपीरियंस टीमों (Amazon Stores Customer Experience teams) के साथ काम कर रही थीं।
निधिमा के पास एचआर के क्षेत्र में 19 साल से ज्यादा का अनुभव है। उनके अनुभव में एचआर बिजनेस पार्टनरिंग, ऑर्गनाइजेशन ट्रांसफॉर्मेशन, मर्जर एंड एक्विजिशन इंटीग्रेशन और सेपरेशन, रिवॉर्ड, टैलेंट मैनेजमेंट, एम्प्लॉयी रिलेशंस और स्ट्रैटेजिक रिसोर्सिंग जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
उन्होंने चेंज मैनेजमेंट, ग्लोबल ऑर्गनाइजेशन डिजाइन और एम्प्लॉयर ब्रांडिंग के क्षेत्र में भी काम किया है। अपने करियर के शुरुआती दौर में निधिमा ने रिवोल्यूट (Revolut), यूनिलीवर (Unilever) और एचएसबीसी (HSBC) समेत कई कंपनियों में अलग-अलग एचआर भूमिकाएं निभाईं।
पेप्सिको में उनकी नियुक्ति ऐसे समय हुई है, जब कंपनी भारत और आसपास के बाजारों में कारोबार को आगे बढ़ाने के साथ अपनी टीम और संगठनात्मक क्षमताओं को मजबूत करने पर ध्यान दे रही है।
खुशी सिंह दहिया (Khushi Singh Dahiya) को स्टारकॉम (Starcom) में सीनियर डायरेक्टर पद पर प्रमोट किया गया है। वह पिछले चार वर्षों से कंपनी से जुड़ी हैं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
खुशी सिंह दहिया (Khushi Singh Dahiya) को स्टारकॉम (Starcom) में सीनियर डायरेक्टर (Senior Director) के पद पर प्रमोट किया गया है। वह पिछले चार वर्षों से कंपनी के साथ जुड़ी हुई हैं। दहिया ने लिंक्डइन (LinkedIn) पोस्ट के जरिए अपने प्रमोशन की जानकारी साझा की।
इससे पहले वह स्टारकॉम में बिजनेस डायरेक्टर (Business Director) के तौर पर जिम्मेदारी संभाल रही थीं। अपनी नई भूमिका में वह इंटीग्रेटेड प्लानिंग (Integrated Planning) और मीडिया ऑडिट (Media Audit) से जुड़े कामकाज को आगे बढ़ाएंगी।
दहिया ने अलग-अलग क्लाइंट्स और इंडस्ट्रीज के लिए मीडिया प्लानिंग से जुड़े काम किए हैं। उनके अनुभव में मार्स स्नैकिंग (Mars Snacking), उबर (Uber), गाना (Gaana), ब्राउन-फॉर्मन (Brown-Forman), पर्नोड रिकार्ड (Pernod Ricard), एलजी (LG), लेंसकार्ट (Lenskart) और जंगल गेम्स (Junglee Games) जैसे ब्रांड्स शामिल हैं।
स्टारकॉम से पहले खुशी सिंह दहिया ने मैडिसन वर्ल्ड (Madison World), जेनिथ (Zenith), मैक्सस (Maxus) और हवास वर्ल्डवाइड (Havas Worldwide) जैसी कंपनियों में काम किया है।
घर-घर में पहचान से राष्ट्रीय राजनीति के बड़े चेहरे तक का सफर, महिला नेतृत्व की मजबूत छवि और यूपी में संभावित बड़ी भूमिका ने बनाया स्मृति ईरानी को BJP की अहम राजनीतिक पूंजी
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
स्मृति ईरानी एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के केंद्रीय संगठन के अहम हिस्से में लौट आई हैं। बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन ने उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव नियुक्त किया है। इसके साथ ही पूर्व केंद्रीय मंत्री की पार्टी के कोर ऑर्गनाइजेशनल स्ट्रक्चर में वापसी हुई है। बीजेपी ने 17 अगस्त को अपनी नई राष्ट्रीय टीम का ऐलान किया, जिसमें 13 राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और आठ राष्ट्रीय महासचिव शामिल हैं। यह बदलाव ऐसे समय हुआ है जब पार्टी आने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए संगठन को नए सिरे से मजबूत करने में जुटी है और उत्तर प्रदेश जैसे बेहद महत्वपूर्ण राज्य पर उसकी खास नजर है।
स्मृति ईरानी की नई भूमिका को सिर्फ BJP की राष्ट्रीय टीम में एक नियुक्ति के तौर पर देखना उनके राजनीतिक सफर और उनकी ब्रैंड वैल्यू को सीमित करके देखना होगा। उनकी वापसी दरअसल उस राजनीतिक पहचान की वापसी है, जिसे उन्होंने पिछले करीब दो दशकों में लगातार अलग-अलग भूमिकाओं के जरिए बनाया और मजबूत किया है।
एक लोकप्रिय टेलीविजन अभिनेत्री के तौर पर घर-घर में पहचान बनाने वाली स्मृति ईरानी ने राजनीति में कदम रखने के बाद संगठन, संसद, चुनावी राजनीति और केंद्र सरकार तक का लंबा सफर तय किया। टीवी की ‘तुलसी विरानी’ से लेकर BJP महिला मोर्चा की अध्यक्ष, राज्यसभा सांसद, लोकसभा सांसद, केंद्रीय मंत्री और अब राष्ट्रीय महासचिव तक की उनकी यात्रा भारतीय राजनीति में पर्सनल ब्रैंड के विकास की एक अलग मिसाल है।
‘तुलसी’ से राष्ट्रीय राजनीति के बड़े चेहरे तक: स्मृति ईरानी की सबसे बड़ी राजनीतिक पूंजी उनकी हाई रिकॉल वैल्यू है। राजनीति में आने से पहले ही ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ की तुलसी विरानी के रूप में उनकी पहचान देश के बड़े हिस्से में बन चुकी थी। लेकिन उनकी कहानी सिर्फ लोकप्रियता तक सीमित नहीं रही। उन्होंने उस पहचान को धीरे-धीरे संगठनात्मक राजनीति और सार्वजनिक जीवन की गंभीर भूमिका में बदला।
बीजेपी में सक्रिय भूमिका के बाद वह 2010 से 2013 तक पार्टी के महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष रहीं। इसके बाद राज्यसभा के रास्ते संसद में पहुंचीं और फिर लोकसभा की राजनीति में अपनी जगह बनाई। संसद और संगठन के अनुभव के बाद केंद्र सरकार में उन्हें कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी मिली।
मानव संसाधन विकास, सूचना एवं प्रसारण, कपड़ा, महिला एवं बाल विकास और अल्पसंख्यक कार्य जैसे मंत्रालयों से जुड़ी जिम्मेदारियों ने उनकी पहचान को सिर्फ एक लोकप्रिय राजनीतिक चेहरे तक सीमित नहीं रहने दिया, बल्कि उन्हें प्रशासन और नीति का अनुभव रखने वाली नेता के रूप में स्थापित किया। यही विविधता आज उनकी ब्रैंड वैल्यू को मजबूत करती है। वह सिर्फ BJP की नेता नहीं हैं, बल्कि एक ऐसी सार्वजनिक हस्ती हैं जिसे राजनीति में आने से पहले से ही देश का एक बड़ा वर्ग पहचानता रहा है।
2019 की अमेठी जीत ने बदल दी राजनीतिक पहचान: स्मृति ईरानी के राजनीतिक सफर में 2019 का अमेठी चुनाव सबसे महत्वपूर्ण पड़ावों में से एक रहा। उन्होंने कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष राहुल गांधी को हराकर राष्ट्रीय राजनीति में अपनी जगह और मजबूत कर ली। इस जीत के बाद उनकी पहचान बीजेपी के सबसे प्रभावशाली और चर्चित चुनावी चेहरों में हुई और ‘जायंट किलर’ की छवि भी मजबूत हुई।
अमेठी की उस जीत ने यह भी दिखाया कि स्मृति ईरानी केवल टीवी से मिली लोकप्रियता के सहारे राजनीति में नहीं थीं। उन्होंने एक कठिन चुनावी मुकाबले को अपनी राजनीतिक पहचान का केंद्रीय हिस्सा बना दिया। हालांकि 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्हें अमेठी से हार का सामना करना पड़ा। कांग्रेस के किशोरी लाल शर्मा ने उन्हें चुनाव में पराजित किया। इसके बाद स्मृति ईरानी संसद और केंद्र सरकार की प्रत्यक्ष भूमिका से बाहर हो गईं। लेकिन महत्वपूर्ण बात यह रही कि उनकी सार्वजनिक और राजनीतिक पहचान खत्म नहीं हुई। अब राष्ट्रीय महासचिव की नियुक्ति के साथ BJP ने उन्हें फिर अपने केंद्रीय संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी है। यही वह पहलू है जो स्मृति ईरानी की ब्रैंड वैल्यू को बाकी कई राजनीतिक चेहरों से अलग करता है। चुनावी हार के बावजूद उनकी पहचान, मीडिया विजिबिलिटी और राजनीतिक संवाद की क्षमता बनी रही।
कायम है स्मृति ईरानी का ब्रैंड? राजनीति में किसी नेता की ब्रैंड वैल्यू सिर्फ चुनाव जीतने या सरकार में पद हासिल करने से तय नहीं होती। जनता के बीच पहचान, संवाद करने की क्षमता, मीडिया में मौजूदगी, संघर्ष की कहानी, राजनीतिक नैरेटिव और अलग-अलग सामाजिक समूहों के बीच अपील, ये सभी मिलकर किसी नेता के पर्सनल ब्रैंड को बनाते हैं। स्मृति ईरानी इन सभी मोर्चों पर अपनी अलग पहचान रखती हैं।
उनके मामले में टीवी से मिली शुरुआती लोकप्रियता ने उन्हें एक असाधारण सार्वजनिक पहचान दी। संगठन में काम करने से उन्हें पार्टी की राजनीतिक और जमीनी कार्यप्रणाली का अनुभव मिला। संसद और केंद्र सरकार में अलग-अलग भूमिकाओं ने उनके प्रोफाइल को प्रशासनिक अनुभव दिया और अमेठी की चुनावी लड़ाई ने उन्हें पार्टी के आक्रामक और हाई-प्रोफाइल चुनावी चेहरों में शामिल कर दिया। यानी स्मृति ईरानी का ब्रैंड केवल एक पहचान पर निर्भर नहीं है। यह पॉपुलर कल्चर, संगठन, चुनावी राजनीति, शासन का अनुभव और महिला नेतृत्व इन सभी का मिश्रण है।
महिला नेतृत्व का मजबूत चेहरा: स्मृति ईरानी की एक बड़ी ताकत उनकी महिला मतदाताओं के बीच पहचान और महिला नेतृत्व से जुड़ा चेहरा होना भी है। BJP की राजनीति में महिला मतदाताओं की बढ़ती अहमियत के बीच स्मृति ईरानी जैसी हाई-प्रोफाइल महिला नेता पार्टी के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक और संचार पूंजी बन सकती हैं। उनका राजनीतिक सफर भी इस पहचान को मजबूत करता है। महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष से लेकर केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री तक की भूमिकाओं ने उन्हें महिला नेतृत्व और महिला-केंद्रित नीतिगत मुद्दों से जोड़ा।
ऐसे में स्मृति ईरानी की नियुक्ति को व्यापक रूप से BJP की राष्ट्रीय टीम में महिला नेतृत्व की मौजूदगी के संदर्भ में देखा जा सकता है। हालांकि उनकी अहमियत केवल महिला नेता होने तक सीमित नहीं है। उनकी सार्वजनिक पहचान और राजनीतिक संचार की क्षमता उन्हें व्यापक स्तर पर उपयोगी बनाती है।
महत्वपूर्ण है उत्तर प्रदेश? स्मृति ईरानी की नई भूमिका का सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक संदर्भ उत्तर प्रदेश हो सकता है। बीजेपी के लिए उत्तर प्रदेश का राजनीतिक महत्व किसी से छिपा नहीं है और आने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर पार्टी संगठन और सामाजिक पहुंच को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। BJP की नई राष्ट्रीय टीम में उत्तर प्रदेश से आठ नेताओं को जगह मिलने की रिपोर्टें भी सामने आई हैं।
अमेठी से उनकी राजनीतिक पहचान पहले ही उत्तर प्रदेश से गहराई से जुड़ी हुई है। 2019 में राहुल गांधी को हराने के बाद वह प्रदेश की राजनीति में BJP के सबसे पहचाने जाने वाले चेहरों में शामिल हो गई थीं। यही वजह है कि उनकी राष्ट्रीय संगठन में वापसी को उत्तर प्रदेश के आगामी राजनीतिक मुकाबले के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।
यह कहना जल्दबाजी होगी कि उन्हें उत्तर प्रदेश में कोई विशेष चुनावी जिम्मेदारी दी जाएगी, लेकिन उनकी ब्रैंड वैल्यू को देखते हुए राज्य में पार्टी के नैरेटिव, महिला मतदाताओं से संवाद और हाई-प्रोफाइल चुनावी प्रचार में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
सिर्फ संगठन नहीं, BJP के लिए एक मजबूत कम्युनिकेशन फेस: स्मृति ईरानी की एक और खासियत उनकी कम्युनिकेशन स्किल है। वह राजनीतिक मुद्दों पर आक्रामक तरीके से अपनी बात रखने और मीडिया के सामने पार्टी का पक्ष रखने के लिए जानी जाती रही हैं। यही वजह है कि उनकी उपयोगिता सिर्फ संगठन के भीतर रणनीति बनाने तक सीमित नहीं रहती। वह मंच से लेकर मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म तक BJP का राजनीतिक संदेश प्रभावी तरीके से पहुंचाने की क्षमता रखती हैं। आज जब चुनावी राजनीति में संगठन के साथ-साथ नैरेटिव और कम्युनिकेशन की भूमिका लगातार बढ़ रही है, स्मृति ईरानी का यह पक्ष उनकी ब्रैंड वैल्यू को और महत्वपूर्ण बनाता है।
उनकी लोकप्रियता का एक और पहलू यह है कि उनकी पहचान सिर्फ राजनीतिक समर्थकों तक सीमित नहीं है। टेलीविजन के दौर से बनी पहचान आज भी उनके सार्वजनिक व्यक्तित्व का हिस्सा है। इस वजह से वह उन नेताओं में हैं जिनका नाम राजनीति से बाहर के दर्शकों और आम लोगों के बीच भी तुरंत पहचाना जाता है।
स्मृति ईरानी की वापसी का संदेश: अपनी नई जिम्मेदारी मिलने के बाद स्मृति ईरानी ने सोशल मीडिया पर खुद को ‘एक सामान्य BJP कार्यकर्ता’ से राष्ट्रीय महासचिव की जिम्मेदारी तक पहुंचने की यात्रा को बेहद विनम्र और सम्मानजनक अनुभव बताया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और BJP अध्यक्ष नितिन नबीन का आभार जताते हुए कहा कि उन्हें संगठन और राष्ट्र की सेवा का एक और अवसर मिला है।
उन्होंने अपने संदेश में संगठन की सेवा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत के लक्ष्य में योगदान को अपनी जिम्मेदारी बताया। उनकी पोस्ट में राष्ट्रीय महासचिव की जिम्मेदारी मिलने को एक ‘deeply humbling’ अनुभव बताया गया।
उनका यह संदेश उनकी मौजूदा राजनीतिक ब्रैंडिंग को भी समझने में मदद करता है। केंद्रीय मंत्री के पद से बाहर होने और लोकसभा चुनाव में हार के बाद भी उन्होंने खुद को केवल एक पूर्व मंत्री या पूर्व सांसद के रूप में पेश नहीं किया। अब उनकी नई भूमिका फिर उन्हें संगठन के उस ढांचे में लेकर आई है जहां एक कार्यकर्ता से लेकर राष्ट्रीय स्तर के नेता तक की उनकी पूरी यात्रा एक साथ दिखाई देती है।
एक नेता से कहीं बड़ा राजनीतिक ब्रैंड: स्मृति ईरानी की कहानी इसलिए दिलचस्प है क्योंकि उनका पर्सनल ब्रैंड लगातार बदलते राजनीतिक दौर के साथ खुद को नए रूप में पेश करता रहा है। एक समय वह देश के सबसे लोकप्रिय टेलीविजन चेहरों में थीं। फिर BJP की महिला मोर्चा अध्यक्ष के रूप में संगठनात्मक पहचान बनाई। संसद में पहुंचीं, केंद्रीय मंत्री बनीं, अमेठी में राहुल गांधी को हराकर ‘जायंट किलर’ की पहचान हासिल की और 2024 में चुनाव हारने के बावजूद सार्वजनिक जीवन से गायब नहीं हुईं।
अब राष्ट्रीय महासचिव के रूप में उनकी वापसी उनकी राजनीतिक यात्रा का नया अध्याय है। BJP के लिए स्मृति ईरानी की अहमियत सिर्फ उनके पद या चुनावी रिकॉर्ड में नहीं, बल्कि उस पहचान में है जिसे उन्होंने टीवी, संगठन, संसद, सरकार और चुनावी राजनीति हर पड़ाव पर अलग-अलग स्तर पर मजबूत किया है। यही वजह है कि 2024 की चुनावी हार के बाद भी उनकी राजनीतिक उपयोगिता खत्म नहीं हुई और BJP ने उन्हें एक बार फिर राष्ट्रीय संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी।
हिंदुस्तान यूनिलीवर (Hindustan Unilever) के स्वामित्व वाले मिनिमलिस्ट (Minimalist) की FY26 में कुल आय बढ़कर ₹697.4 करोड़ हो गई। कंपनी ने ₹25.9 करोड़ का मुनाफा दर्ज किया।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
हिंदुस्तान यूनिलीवर (Hindustan Unilever) के स्वामित्व वाले स्किनकेयर ब्रांड मिनिमलिस्ट (Minimalist) ने वित्त वर्ष 2025-26 में मजबूत प्रदर्शन किया है। कंपनी की कुल आय बढ़कर ₹697.4 करोड़ हो गई, जो एक साल पहले ₹508.95 करोड़ थी। इस दौरान कंपनी ने ₹25.9 करोड़ का मुनाफा दर्ज किया, जबकि FY25 में उसे ₹270.5 करोड़ का घाटा हुआ था।
मिनिमलिस्ट की ऑपरेशंस से आय 36% बढ़कर ₹690.2 करोड़ पहुंच गई। वहीं, टैक्स से पहले कंपनी का मुनाफा ₹32.5 करोड़ रहा, जबकि पिछले वित्त वर्ष में उसे ₹271.9 करोड़ का नुकसान हुआ था।
FY25 के घाटे की बड़ी वजह ₹283.8 करोड़ का असाधारण खर्च था। यह खर्च अनिवार्य रूप से परिवर्तनीय प्रेफरेंस शेयरों (Compulsorily Convertible Preference Shares) के फेयर-वैल्यू एडजस्टमेंट से जुड़ा था। कंपनी का कुल खर्च भी 34% बढ़कर ₹664.9 करोड़ हो गया, जो FY25 में ₹497.1 करोड़ था। मटेरियल कॉस्ट 28% बढ़कर ₹219 करोड़ और कर्मचारियों पर खर्च 32.6% बढ़कर ₹48.5 करोड़ रहा।
अन्य खर्च कंपनी की सबसे बड़ी लागत रही, जो बढ़कर ₹416.7 करोड़ हो गई। इसमें विज्ञापन और प्रमोशन, डिस्ट्रीब्यूशन, वेयरहाउसिंग और दूसरे ऑपरेशनल खर्च शामिल हैं। मिनिमलिस्ट ने FY26 में विज्ञापन और प्रमोशन पर करीब ₹235 करोड़ खर्च किए।
FY26 मिनिमलिस्ट का हिंदुस्तान यूनिलीवर के स्वामित्व में पहला पूरा वित्त वर्ष रहा। HUL ने अप्रैल 2025 में मिनिमलिस्ट की पैरेंट कंपनी अपलिफ्टिंग साइंस (Uprising Science) में 90.5% हिस्सेदारी का अधिग्रहण किया था। यह सौदा ₹2,955 करोड़ की प्री-मनी एंटरप्राइज वैल्यू पर हुआ था।
हीरो मोटोकॉर्प (Hero MotoCorp) ने श्रीहरि मुलगुंड (Srihari Mulgund) को चीफ स्ट्रैटेजी ऑफिसर नियुक्त किया है। वह 17 अगस्त 2026 से नई जिम्मेदारी संभालेंगे।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
हीरो मोटोकॉर्प (Hero MotoCorp) ने श्रीहरि मुलगुंड (Srihari Mulgund) को चीफ स्ट्रैटेजी ऑफिसर (Chief Strategy Officer) नियुक्त किया है। उनकी नियुक्ति 17 अगस्त 2026 से प्रभावी होगी। मुलगुंड कंपनी की लीडरशिप टीम का हिस्सा होंगे और सेबी लिस्टिंग रेगुलेशंस (SEBI Listing Regulations) के तहत सीनियर मैनेजमेंट के रूप में नामित किए जाएंगे।
श्रीहरि मुलगुंड के पास ग्लोबल ऑटोमोबाइल सेक्टर में इंजीनियरिंग, प्रोडक्ट डेवलपमेंट और स्ट्रैटेजी प्लानिंग का 24 साल से ज्यादा का अनुभव है। उन्होंने अमेरिका, जापान, चीन और भारत में काम किया है, जिससे उन्हें अलग-अलग ऑटोमोबाइल बाजारों और कारोबारी माहौल की अच्छी समझ हासिल हुई है।
हीरो मोटोकॉर्प में शामिल होने से पहले मुलगुंड ईवाई-पार्थेनॉन (EY-Parthenon) में पार्टनर (Partner) थे। यहां उन्होंने इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV), बैटरी, इंटरनल कम्बशन इंजन (ICE), सप्लाई वैल्यू चेन और नई मोबिलिटी से जुड़े रणनीतिक प्रोजेक्ट्स का नेतृत्व किया।
उनके अनुभव में एइसिन ए.डब्ल्यू. (Aisin AW) और एफईवी इंक. (FEV Inc.) में महत्वपूर्ण भूमिकाएं भी शामिल हैं। इसके अलावा वह रिकार्डो स्ट्रैटेजिक कंसल्टिंग इंडिया (Ricardo Strategic Consulting, India) के प्रेसिडेंट भी रह चुके हैं।
नई भूमिका में मुलगुंड हीरो मोटोकॉर्प की कारोबारी रणनीति और भविष्य की ग्रोथ से जुड़े महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर काम करेंगे। ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और नई तकनीकों के बढ़ते महत्व के बीच उनका अनुभव कंपनी के लिए अहम माना जा रहा है।
वेमो (Waymo) ने WPP Media को उत्तरी अमेरिका और EMEA क्षेत्र के लिए मीडिया एजेंसी नियुक्त किया है। एजेंसी मीडिया रणनीति, प्लानिंग और खरीद संभालेगी।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
डब्ल्यूपीपी (WPP) को अल्फाबेट (Alphabet) की ऑटोनॉमस ड्राइविंग कंपनी वेमो (Waymo) का बड़ा मीडिया कारोबार मिला है। वेमो ने उत्तरी अमेरिका और यूरोप, मिडिल ईस्ट एवं अफ्रीका (EMEA) क्षेत्र के लिए WPP Media को अपनी मीडिया एजेंसी नियुक्त किया है।
ग्लोबल रिपोर्ट्स के मुताबिक, WPP Media अब इन दोनों क्षेत्रों में वेमो की मीडिया रणनीति, प्लानिंग और मीडिया खरीद (Media Buying) का काम संभालेगी। एजेंसी कंपनी के उन शुरुआती अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विस्तार में भी मदद करेगी, जहां वेमो अपनी सेवाएं शुरू करने की तैयारी कर रही है।
यह साझेदारी ऐसे समय हुई है जब वेमो अपने ग्लोबल मार्केटिंग प्रयासों को तेज कर रही है। कंपनी अमेरिका से बाहर नए बाजारों में विस्तार की तैयारी कर रही है और ऑटोनॉमस ड्राइविंग को आम लोगों के बीच ज्यादा पहचान दिलाने पर भी जोर दे रही है।
सुपर बाउल विज्ञापन की भी तैयारी
वेमो अपने पहले सुपर बाउल (Super Bowl) विज्ञापन अभियान के लिए क्रिएटिव एजेंसी की समीक्षा भी कर रही है। इससे संकेत मिलता है कि कंपनी सिर्फ अंतरराष्ट्रीय विस्तार ही नहीं, बल्कि आम उपभोक्ताओं के बीच अपनी ब्रांड पहचान मजबूत करने की दिशा में भी बड़ा कदम उठा रही है।
वेमो की चीफ मार्केटिंग ऑफिसर सुजैन फिलियन (Suzanne Philion) ने कहा कि कंपनी का लक्ष्य ऑटोनॉमस ट्रांसपोर्टेशन को लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का परिचित हिस्सा बनाना है। नए बाजारों में विस्तार के साथ कंपनी स्थानीय समुदायों के साथ अपने जुड़ाव को भी मजबूत करना चाहती है।
उन्होंने कहा कि WPP की वैश्विक क्षमता वेमो को अलग-अलग बाजारों में स्थानीय लोगों से बेहतर तरीके से जुड़ने में मदद करेगी। कंपनी का लक्ष्य दुनिया की सबसे भरोसेमंद ऑटोनॉमस ड्राइविंग सेवा बनना है।
WPP के लिए यह साझेदारी इसलिए भी अहम है क्योंकि वेमो तेजी से बढ़ते ऑटोनॉमस मोबिलिटी बाजार की प्रमुख कंपनियों में शामिल है। नए बाजारों में विस्तार के साथ उसके मीडिया और मार्केटिंग निवेश बढ़ने की उम्मीद है।
मिहिर संगानी (Mihir Sangani) ने WPP (WPP) से 10 साल बाद अलग होने का फैसला किया है। वह मई 2025 से एसेंसमीडियाकॉम इंडिया में बिजनेस डायरेक्टर थे।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
मिहिर संगानी (Mihir Sangani) ने डब्ल्यूपीपी (WPP) से करीब 10 साल के सफर के बाद अलग होने का फैसला किया है। वह मई 2025 से एसेंसमीडियाकॉम इंडिया (EssenceMediacom India) में बिजनेस डायरेक्टर (Business Director) की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
इससे पहले मिहिर संगानी ने मीडिया कॉम (Mediacom) के साथ करीब आठ साल काम किया था। यहां वह ग्रुप हेड (Group Head) के पद पर थे और ब्रांड्स के लिए मीडिया प्लानिंग और रणनीति तैयार करने से जुड़े काम संभालते थे।
मिहिर संगानी को मीडिया प्लानिंग (Media Planning) और ब्रांड्स के लिए प्रभावी मीडिया रणनीति तैयार करने का 10 साल से ज्यादा का अनुभव है। WPP में अपने लंबे कार्यकाल के दौरान उन्होंने अलग-अलग ब्रांड्स के साथ काम करते हुए मीडिया से जुड़ी रणनीतियों को आगे बढ़ाने में भूमिका निभाई।
एसेंसमीडियाकॉम में बिजनेस डायरेक्टर के तौर पर उनका कार्यकाल मई 2025 से शुरू हुआ था। अब करीब एक साल से ज्यादा समय बाद उन्होंने WPP से अलग होने का फैसला किया है।
जोशुआ कुशनर (Joshua Kushner) और बॉब आइगर (Bob Iger) 12.5 अरब डॉलर की डील में लॉस एंजिलिस लेकर्स (Los Angeles Lakers) खरीद सकते हैं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
अमेरिकी बास्केटबॉल की मशहूर टीम लॉस एंजिलिस लेकर्स (Los Angeles Lakers) को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वेंचर कैपिटलिस्ट जोशुआ कुशनर (Joshua Kushner) और डिज्नी (Disney) के पूर्व सीईओ बॉब आइगर (Bob Iger) इस NBA फ्रेंचाइजी को खरीदने की तैयारी में हैं। प्रस्तावित सौदे में टीम की कीमत करीब 12.5 अरब डॉलर आंकी गई है।
बॉब आइगर के पास NBA के साथ काम करने का लंबा अनुभव रहा है। डिज्नी के सीईओ रहते हुए उन्होंने ईएसपीएन (ESPN) का नेतृत्व किया और NBA के साथ मजबूत कारोबारी संबंध बनाए। उनके कार्यकाल में डिज्नी ने NBA मैचों के प्रसारण से जुड़े अरबों डॉलर के समझौते भी किए थे।
आइगर ने मार्च में डिज्नी के सीईओ पद से रिटायरमेंट लिया था। इससे पहले वह नेशनल विमेन्स सॉकर लीग (National Women's Soccer League) की टीम एंजल सिटी एफसी (Angel City FC) में भी बड़ी हिस्सेदारी ले चुके हैं।
वहीं, जोशुआ कुशनर वेंचर कैपिटल की दुनिया में एक जाना-पहचाना नाम हैं। लेकर्स को खरीदने की प्रस्तावित डील ऐसे समय सामने आई है, जब कुछ ही हफ्ते पहले कुशनर फीफा (FIFA) से जुड़े एक विवादित प्राइवेट इक्विटी प्रस्ताव को लेकर चर्चा में आए थे।
अगर यह सौदा पूरा होता है, तो 12.5 अरब डॉलर की कीमत के साथ यह खेल जगत की सबसे बड़ी टीम बिक्री में से एक होगी। हालांकि, प्रस्तावित अधिग्रहण को लेकर अभी अंतिम मंजूरी और सौदे की अन्य शर्तों की जानकारी सामने नहीं आई है।
एन चंद्रशेखरन (N Chandrasekaran) टाटा संस (Tata Sons) के चेयरमैन पद से हटने जा रहे हैं। वह फरवरी 2027 में मौजूदा कार्यकाल पूरा करने के बाद दोबारा नियुक्ति नहीं मांगेंगे।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
टाटा संस (Tata Sons) के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन (N Chandrasekaran) ने पद से हटने का फैसला किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह अपना मौजूदा कार्यकाल पूरा करेंगे, लेकिन इसके बाद दोबारा चेयरमैन पद के लिए नियुक्ति नहीं मांगेंगे। उनका कार्यकाल फरवरी 2027 में खत्म होना है।
पिछले साल अक्टूबर में टाटा ट्रस्ट्स (Tata Trusts) ने एन चंद्रशेखरन के लिए चेयरमैन के तौर पर तीसरे पांच साल के कार्यकाल को मंजूरी दी थी। यह फैसला टाटा ग्रुप (Tata Group) की रिटायरमेंट पॉलिसी से अलग था।
एन चंद्रशेखरन अक्टूबर 2016 में टाटा संस के बोर्ड में शामिल हुए थे। इसके कुछ महीनों बाद जनवरी 2017 में उन्हें टाटा संस का चेयरमैन नियुक्त किया गया था। तब से वह टाटा समूह के नेतृत्व में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
अब उनका मौजूदा कार्यकाल फरवरी 2027 में पूरा होगा। इसके बाद वह टाटा संस के चेयरमैन पद पर दोबारा नियुक्ति नहीं मांगेंगे। टाटा संस के बोर्ड की अगली बैठक 18 अगस्त को होने वाली है। ऐसे में इस बैठक को कंपनी के नेतृत्व और आगे की रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
एन चंद्रशेखरन के कार्यकाल में टाटा समूह ने कई क्षेत्रों में अपने कारोबार का विस्तार किया है। उनके पद छोड़ने के फैसले के बाद अब टाटा संस के अगले चेयरमैन को लेकर भी चर्चा तेज होने की उम्मीद है।