इनके सिर सजा e4m Prime Time Awards का ताज, यहां देखें पूरी लिस्ट

बहुप्रतिष्ठित ‘एक्सजचेंज4मीडिया’ समूह के प्राइम टाइम अवॉर्ड्स के छठे एडिशन का आयोजन 31 जनवरी को मुंबई में किया गया

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 01 February, 2020
Last Modified:
Saturday, 01 February, 2020
Prime Time Awards

बहुप्रतिष्ठित ‘एक्‍सचेंज4मीडिया’ (exchange4media) समूह के प्राइम टाइम अवॉर्ड्स (Prime Time Awards) के छठे एडिशन का आयोजन 31 जनवरी को मुंबई में किया गया। मुंबई के ताज सांताक्रूज होटल में आयोजित एक समारोह में विभिन्न कैटेगरी में ये अवॉर्ड्स दिए गए।

एक्सीलेंस अवॉर्ड कैटेगरी में ‘ओगिल्वी एंड माथर’ (Ogilvy & Mather) को एडवर्टाइजिंग एजेंसी ऑफ द ईयर के तहत गोल्ड से नवाजा गया। ‘ओगिल्वी’ की झोली में चार मेडल आए। वहीं, ‘मैडिसन मीडिया’ (Madison Media) और ‘एमजी मोटर’ (MG Motor) ने क्रमश: ‘मीडिया एजेंसी ऑफ द ईयर’ और ‘एडवर्टाइजर ऑफ द ईयर’ के लिए गोल्ड मेडल जीता।

‘वायकॉम18’ (Viacom18) और ‘एशियन पेंट्स’ (Asian Paints) के लिए अपने कामों की वजह से ‘मैडिसन मीडिया’ ने तीन गोल्ड जीते। वहीं, ‘एमजी मोटर’ ने ‘Best Launch/Re-Launch Strategy for a Product/Service’ और ‘Best Integrated TV campaign’ कैटेगरी में दो गोल्ड पर अपना कब्जा जमाया।

कार्यक्रम में ‘स्टार इंडिया’ (Star India) को ‘Entertainment & Media’ और ‘Best Launch/Re-Launch of a Programme/Channel’ कैटेगरी में दो गोल्ड मिले। उसे यह अवॉर्ड ‘Vivo IPL 2019-Game Banayega Name’ के तहत किए गए काम के लिए दिए गए। इसके अलावा गोल्ड जीतने वालों में ‘ओयो होटल्स एंड होम्स’ (Oyo Hotels & Homes), ‘सोलर सिनेप्लेक्स, नौचंदी मेला-ऑन ग्राउंड’ (Solar Cineplax, Nauchandi Mela-On-ground) और ‘मैन वर्सेज वाइल्ड विद बेयर ग्रिल्स एंड पीएम मोदी’  (Man vs Wild with Bear Grylls and PM Modi) शामिल रहे।  

बता दें कि क्रिएटिव, एडवर्टाइजिंग, ब्रैंड्स और मीडिया एजेंसियों के क्षेत्र में उल्‍लेखनीय कार्य करने वालों को सम्‍मानित करने के लिए एक्‍सचेंज4मीडिया की ओर से ये अवॉर्ड्स दिए जाते हैं। इनके द्वारा एक अक्टूबर 2018 से सितंबर 2019 के बीच में किए गए उल्लेखनीय कार्यों की समीक्षा के लिए एक जूरी का गठन किया गया था। जूरी के फैसले के आधार पर इन विजेताओं का चुनाव किया गया।

इन अवॉर्ड्स के विजेताओं का चयन करने के लिए ‘ग्रुप एम, साउथ एशिया’ (GroupM, South Asia) के सीईओ प्रशांत कुमार की अध्यक्षता में जूरी मीट का आयोजन भी किया गया था। जूरी के अन्य सम्मानित सदस्यों में ‘Automotive Lubricants, Gulf’ के मार्केटिंग हेड अमित घेजी,’ Rentokil PCI’ की चीफ मार्केटिंग ऑफिसर अनिंदिता चटर्जी, ’ Danone’ की मार्केटिंग डायरेक्टर दीपाली अग्रवाल, ‘Initiative’ के वाइस प्रेजिडेंट धीरेंद्र सिंह, ‘UTI Mutual Funds’ के सीनियर वाइस प्रेजिडेंट गौरव सूरी, ‘Honeywell’ की पूर्व मार्केटिंग डायरेक्टर गुरमीत कौर,’ Max’ के सीनियर वाइस प्रेजिडेंट जितेन महेंद्रा, ‘TATA AIA Life Assurance’ की चीफ मार्केटिंग ऑफिसर मृदुला शेखर, ‘Yash Raj Films’ के सीनियर वाइस प्रेजिडेंट (मार्केटिंग) मनन मेहता, ’ Kaya Clinic’ की मार्केटिंग हेड पूजा सहगल,‘Samsonite’ की असिस्टेंट डायरेक्टर (मीडिया एंड कम्युनिकेशन) प्रदन्य पोपडे, ‘Muthoot’ के ग्रुप चीफ मार्केटिंग ऑफिसर संजीव शुक्ला,’ Edelweiss’ की चीफ मार्केटिंग ऑफिसर शबनम पंजवानी,‘ Metro Brands’ की मार्केटिंग हेड श्वेतल बसु, ‘Platinum’ की डायरेक्टर (कंज्यूमर मार्केटिंग) सुजला मार्टिस, ‘IDFC First Bank’ के चीफ मार्केटिंग एंड कम्युनिकेशन ऑफिसर श्रीपाद शिंदे और ‘Sonata & SF, Titan’ के मार्केटिंग हेड उत्कर्ष ठाकुर शामिल थे।

विजेताओं की पूरी लिस्ट आप यहां क्लिक कर देख सकते हैं।

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Kent ने वापस लिया अपना यह विज्ञापन, मांगी माफी

हेल्थकेयर कंपनी ‘केंट आरओ सिस्टम्स’ (Kent RO Systems) ने तमाम आलोचनाओं के बाद अपने ‘आटा मेकर’ के विज्ञापन को बुधवार को वापस ले लिया है।

Last Modified:
Thursday, 28 May, 2020
Kent

हेल्थकेयर कंपनी ‘केंट आरओ सिस्टम्स’ (Kent RO Systems) ने तमाम आलोचनाओं के बाद अपने ‘आटा मेकर’ के विज्ञापन को बुधवार को वापस ले लिया है। यही नहीं, कंपनी ने इसके लिए माफी भी मांगी है। दरअसल, पिछले दिनों अपने आटा और ब्रेड मेकर के लिए जारी विज्ञापन में साफ-सफाई पर जोर देते हुए ऑटोमेशन (automation) की वकालत की थी। इसके साथ ही कंपनी ने नए उत्पाद में घरेलू सहायिकों के आटा गूंथने के प्रति सावधान रहने की चेतावनी दी थी।

विज्ञापन में कंपनी ने कहा था, ‘क्या आप अपनी मेड (घरेलू सहायिका) को घर पर आटा गूंथने देते हैं? उनके हाथ इंफेक्टेड हो सकते हैं’ इसके स्थान पर कंपनी ने उसके नए उत्पाद को उपयोग करने की सलाह दी थी। ऐसे में घरेलू सहायिकाओं के प्रति श्रेणीगत भेदभाव और स्त्री द्वेषी होने के चलते कंपनी को अपने इस विज्ञापन के लिए भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा था।

इसके बाद कंपनी ने अपना वह विज्ञापन वापस ले लिया है। इस बारे में कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर और चेयरमैन महेश गुप्ता ने बताया, ‘हमने केंट आटा मेकर के विज्ञापन को वापस ले लिया है और यह दोबारा दिखाई नहीं देखा। यह अंजाने में हुआ था। यह विज्ञापन गलत था और इसलिए इसे वापस ले लिया गया है। इस विज्ञापन को पब्लिश करने के लिए हमें खेद है। हम समाज के सभी वर्गों का समर्थन और सम्मान करते हैं।’  

बता दें कि इस बारे में तमाम लोगों ने टीवी पर आने वाले विज्ञापनों की प्रमाणिकता की जांच करने वाली संस्था 'ऐडवर्टाइजिंग स्‍टैंडर्ड्स काउंसिल ऑफ इंडिया' (ASCI) को भी सूचित किया था। इस मामले में ‘ASCI’ का कहना है कि उसे तमाम शिकायतें मिली थीं, लेकिन चूंकि अब इस विज्ञापन को हटा लिया गया है, इसलिए शिकायतों पर आगे कार्रवाई नहीं की गई है।

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आर्थिक पैकेज का विज्ञापन जगत पर क्या पड़ेगा असर, विशेषज्ञों ने किया आकलन

पीएम मोदी के 20 लाख करोड़ रुपए के आर्थिक पैकेज के प्रमुख पहलुओं को साझा करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एमएसएमई सेक्टर के लिए सरकार की प्रतिबद्धताओं की बात कही है

Last Modified:
Thursday, 14 May, 2020
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 20 लाख करोड़ रुपए के आर्थिक पैकेज के कुछ प्रमुख पहलुओं को साझा करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को अपने भाषण में एमएसएमई (MSME) क्षेत्र के लिए सरकार की प्रतिबद्धताओं की बात कही है। भारतीय उद्योग जगत ने इस क्षेत्र को बढ़ावा देने का स्वागत किया है, वहीं विज्ञापन जगत को भी कोरोना संकट के इस दौर में पुनरुद्धार की उम्मीद दिखाई दे रही है।

 इंडस्ट्री से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, इस पैकेज के बाद सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग की डिमांड और सप्लाई की चेन शुरू होने पर उनके द्वारा विज्ञापन पर खर्च फिर शुरू करने की संभावना है। ‘हवास ग्रुप इंडिया’ (Havas Group India) के सीईओ राणा बरुआ ने वित्तमंत्री के इस कदम का स्वागत करते हुए कहा है, ‘कुल मिलाकर यह काफी सकारात्मक और उत्साहजनक है। प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भर भारत का जो विजन तैयार किया है, मुझे लगता है कि वित्त मंत्री की घोषणा सही दिशा में है और इससे सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग को काफी फायदा होगा और इस चुनौतीपूर्ण समय में सुनिश्चित करना होगा कि कंज्यूमर के हाथ में थोड़े पैसे भी हों।’

‘Gozoop’ के सीईओ और को-फाउंडर अहमद आफताब नकवी का कहना है कि सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग को अपने टार्गेट ऑडियंस तक पहुंचने के लिए डिजिटल एडवर्टाइजिंग पर पहले के मुकाबले अधिक भरोसा है, ऐसे में डिजिटल मार्केटिंग के आगे बढ़ने की उम्मीद है। ‘लोकल के लिए वोकल’ (Local ke liye vocal) थीम डिजिटल के अलावा किसी अन्य माध्यम के लिए अधिक उपयुक्त नहीं हो सकती है। नकवी का कहना है, ‘देश में डिजिटल की पहुंच और तेजी से बढ़ेगी, जिसका मतलब है कि अधिकांश ब्रैंड्स के इनवेस्टमेंट अब डिजिटल का रुख करेंगे।’

‘Bang In The Middle’ के मैनेजिंग पार्टनर और चीफ क्रिएटिव ऑफिसर प्रताप सूथान (Prathap Suthan) का कहना है, ‘ब्रैंड्स ज्यादा समय तक एडवर्टाइजिंग से दूर नहीं रह सकते हैं। क्योंकि जब आप (ब्रैंड्स) विज्ञापन पर खर्च नहीं करते हैं तो आप दिखाई नहीं देंगे और फिर दौड़ से बाहर हो जाएंगे। उनका कहना है कि बीटूबी (b2b) ब्रैंड्स एक-दूसरे के संपर्क में रहेंगे और एक साधारण ई-मेल अथवा फोन से उनका बिजनेस दोबारा शुरू हो सकता है, लेकिन बीटूसी (b2c) ब्रैंड्स के लिए यह इतना आसान नहीं होगा। कोविड-19 के बाद विभिन्न मोर्चों पर क्लाइंट्स को आश्वासन देना होगा और उनका भरोसा जीतना होगा। आपको एडवर्टाइज करने की जरूरत है और यह भी नहीं भूलना होगा कि फेस्टिव सीजन भी आने वाला है। इस संकट से बाहर निकलने का यह सही समय है।’

‘Khaitan & Co’ के पार्टनर अतुल पांडे का भी यही मानना है। पांडे का कहना है, ‘कोविड-19 के बाद ‘MSME’ तेजी से आगे बढ़ेगा और उनके मार्केटिंग खर्च में बढ़ोतरी होगी।’ उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि जैसे ही घरेलू खपत बढ़ेगी और नए मार्केट खुलेंगे, ‘MSME’ हर संभव तरीके से बाजार में हिस्सेदारी हासिल करने की कोशिश करेगा।।

 ‘Hyper Connect Asia’ के को-फाउंडर और ग्रोथ लीड अंकुर पुजारी का करना है कि सोशल मीडिया डाटा का इस्तेमाल बाजार के ट्रेंड को समझने के लिए किया जा सकता है। सोशल मीडिया पर तमाम कैंपेन और विज्ञापन किए जाने की जरूरत है, ताकि कम निवेश में ज्यादा रेवेन्यू जुटाया जा सके। वहीं, ‘Pocket Aces’ के वाइस प्रेजिडेंट (Finance and Operations) कुणाल लखारा का कहना है, ‘MSME के लिए टर्नओवर और निवेश की सीमा बढ़ाकर नए सिरे से इसका गठन करने से हमें सरकारी योजनाओं के तहत कई संस्थाओं में बहुत सारे लाभ दिखाई देंगे और इससे देश को वापस अपने पैर जमाने में और आने वाले समय में काफी ग्रोथ करने में मदद मिलेगी।’

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The Social Street के चेयरमैन और फाउंडिंग पार्टनर प्रताप बोस ने उठाया ये बोल्ड स्टेप

एडवर्टाइजिंग इडंस्ट्री में जाना-माना नाम प्रताप बोस पूर्व में ‘द एडवर्टाइजिंग क्लब’ के प्रेजिडेंट भी रह चुके हैं

Last Modified:
Friday, 08 May, 2020
Pratap Bose

इंटीग्रेटिड एडवर्टाइजिंग एजेंसी ‘द सोशल स्ट्रीट’ के चेयरमैन और फाउंडिंग पार्टनर प्रताप बोस ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से यह खबर आई है। बता दें कि बोस एडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री का जाना-माना नाम हैं। वह पूर्व में ‘द एडवर्टाइजिंग क्लब’ (The Advertising Club) के प्रेजिडेंट भी रह चुके हैं।

बता दें कि बोस ने ‘डीडीबी मुद्रा’ (DDB Mudra) से अलग होने के बाद जून 2015 में ‘द सोशल स्ट्रीट’ की स्थापना की थी। वह ऑगिल्वी (Ogilvy) से भी जुड़े हुए थे और सीईओ के पद से इस्तीफा देने के बाद वर्ष 2008 में एजेंसी को अलविदा कह दिया था।

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ASCI: शिकायत के बाद 110 एडवर्टाइजर्स ने वापस लिए अपने विज्ञापन

'ऐडवर्टाइजिंग स्टैंखडर्ड्स काउंसिल ऑफ इंडिया' (ASCI) ने इस साल जनवरी में 342 विज्ञापनों के खिलाफ शिकायतों की जांच की

Last Modified:
Saturday, 02 May, 2020
ASCI

टीवी पर आने वाले विज्ञापनों की प्रमाणिकता की जांच करने वाली संस्था 'ऐडवर्टाइजिंग स्‍टैंडर्ड्स काउंसिल ऑफ इंडिया' (ASCI) ने इस साल जनवरी में 342 विज्ञापनों के खिलाफ शिकायतों की जांच की। ‘ASCI’  द्वारा सूचित किए जाने के बाद 110 एडवर्टाइजर्स ने अपने विज्ञापनों को हटा लिया।

‘एएससीआई’ की ‘कंज्यूमर कंप्लेंट्स काउंसिल’ (CCC) ने शेष बचे 232 विज्ञापनों का मूल्यांकन किया और 208 शिकायतों के सही ठहराते हुए इन विज्ञापनों को जांच के लिए रोका गया। इन 208 विज्ञापनों में 83 एजुकेशन सेक्टर के, 64 हेल्थकेयर सेक्टर के, आठ पर्सनल केयर के, सात रियल एस्टेट के, पांच फूड और बेवरेज कैटेगरी के व 41 अन्य कैटेगरी के थे।

जनवरी में ‘कंज्यूमर कंप्लेंट्स काउंसिल’ को ‘आईबीएफ अस्पताल’ (IVF hospitals) और ‘फर्टिलिटी क्लिनिक’ (Fertility clinics) कई भ्रामक विज्ञापन देखने को मिले। इसके अलावा रियल एस्टेट के कई विज्ञापनों में भी किए गए दावे झूठे व भ्रामक निकले।

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जानिए, क्यों HC ने हिन्दुस्तान लीवर के इस विज्ञापन पर लगा दी रोक

टीवी पर दिखाने जाए वाले विज्ञापन, अकसर दर्शकों के मस्तिष्क में गहरा प्रभाव छोड़ते हैं। वहीं कई बार भ्रामक व झूठे विज्ञापन टीवी पर दिखाए जाते रहे हैं

Last Modified:
Thursday, 23 April, 2020
delhi high court

टीवी पर दिखाने जाए वाले विज्ञापन, अकसर दर्शकों के मस्तिष्क में गहरा प्रभाव छोड़ते हैं। वहीं कई बार भ्रामक व झूठे विज्ञापन टीवी पर दिखाए जाते रहे हैं, जिन पर कार्रवाई भी होती रही है। ऐसे में एक बार फिर एक नामी-गिरामी कंपनी के विज्ञापन पर रोक लगा दी गई है, लेकिन यहां  मामला दूसरा है।  

दरअसल, दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को हिन्दुस्तान लीवर के लाइफबॉय साबुन के विज्ञापनों के प्रसारण पर रोक लगा दी, जिसमें कथित रूप से रेकिट बेनकाइजर के डेटॉल एंटीसेप्टिक लिक्विड को कथित रूप से कमतर करके दिखाया गया है।

न्यायमूर्ति राजीव सहाय एंडलॉ ने रेकिट को अंतरिम राहत देते हुए कहा कि विचारणीय विज्ञापन में ‘द्वेषपूर्ण संकेत’ हैं जो लोगों को एंटीसेप्टिक लिक्विड के उपयोग के लिए हतोत्साहित करता है।

अदालत ने कहा कि यह कमतर करके दिखाने का प्रथम दृष्टया मामला है तथा यदि कोई अंतरिम राहत नहीं दी जाती तो रेकिट को अपूरणीय क्षति होती।

अदालत ने यह भी ध्यान दिलाया कि कमतर करके दिखाने वाले इस विज्ञापन का दिसंबर 2018 के बाद से प्रसारण नहीं किया गया किंतु हिन्दुस्तान लीवर यह बयान देने के लिए तैयार नहीं था कि जब तक रेकिट बेनकाइजर की मुख्य याचिका पर फैसला नहीं हो जाता, तब तक वह इन्हें प्रसारित नहीं करेगा।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि हिन्दुस्तान लीवर विवादित विज्ञापन को प्रसारित करने से पहले रेकिट को उचित नोटिस देने को तैयार नहीं था। अदालत ने यह भी ध्यान दिलाया कि जब कलकत्ता उच्च न्यायालय ने हिन्दुस्तान लीवर को यह विज्ञापन प्रसारित करने से प्रतिबंधित किया तो वह प्रतिबंध पूरे देश के लिए था। केवल किसी एक राज्य के लिए नहीं था क्योंकि टेलीविजन पर दिखाये जाने वाले विज्ञापन का कवरेज राष्ट्रीय होता है।

रेकिट बेनकाइजर को अंतरिम राहत देते हुए अदालत ने मुख्य मामले की सुनवाई को 16 जून के लिए सूचीबद्ध किया।

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मीडिया इंडस्ट्री ने सरकार के सामने उठाया विज्ञापन में कमी का मुद्दा, रखी ये मांग

कोरोनावायरस (कोविड-19) का विपरीत असर मीडिया कंपनियों पर भी पड़ रहा है। इस महामारी के बाद से मीडिया कंपनियों को मिलने वाले विज्ञापन में काफी कमी आई है।

Last Modified:
Tuesday, 07 April, 2020
Advertising

कोरोनावायरस (कोविड-19) का विपरीत असर मीडिया कंपनियों पर भी पड़ रहा है। इस महामारी के बाद से मीडिया कंपनियों को मिलने वाले विज्ञापन में काफी कमी आई है। ऐसे में मीडिया कंपनियों की ओर से मांग उठने लगी है कि ‘विज्ञापन और दृश्य प्रचार निदेशालय’ (डीएवीपी)  व राज्यों के स्वामित्व वाली अन्य इकाइयां उनके विज्ञापन बिलों का तुरंत भुगतान करें, जिससे कंपनियों को नकदी की समस्या न हो और नौकरियों में संभावित कटौतियों को टाला जा सके।

मीडिया से जुड़े शीर्ष अधिकारियों का कहना है कि इस कदम से ऐसे दौर में मीडिया इंडस्ट्री को संभलने में मदद मिलेगी, जब विज्ञापनदाता खर्च नहीं कर रहे हैं, कई जगह भुगतान अटका हुआ है, अखबारों के मामले में सप्लाई चेन बाधित हो रही है और स्पोर्ट्स व लाइव इंटरटेनमेंट जैसे मीडिया के कई रूप ठहर से गए हैं। बता दें कि सूचना-प्रसारण मंत्रालय की नोडल एजेंसी ‘डीएवीपी’ सरकारी विज्ञापनों को जारी करती है।

‘द इकनॉमिक टाइम्स’ (ET) की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस बारे में ‘एडवर्टाइजिंग एजेंसीज एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ (AAAI) के प्रेजिडेंट आशीष भसीन का कहना है, ‘इस नाजुक समय में मैं सरकार से गुजारिश करूंगा कि वह विभिन्न विभागों, मंत्रालयों आदि पर विज्ञापन की बकाया राशि का तत्काल भुगतान करने पर विचार करे, इनमें प्रिंट, टीवी, रेडियो, आउट ऑफ होम (OOH) और इवेंट्स आदि का बकाया शामिल है।’

प्रिंट मीडिया से जुड़े एक वरिष्ठ एग्जिक्यूटिव का कहना है, ‘सरकार की ओर से मिलने वाले भुगतान में काफी अनियमितता होती है, लेकिन इस मुश्किल घड़ी में कई बिजनेस टाइम पर भुगतान करने की स्थिति में नहीं है, ऐसे में सरकार को आगे आना चाहिए और अपने ऊपर बकाया सभी भुगतान करने चाहिए। इससे इंडस्ट्री को फिर से अपने पैरों पर मजबूती से खड़े होने में मदद मिलेगी।’

वहीं, ‘जागरण ग्रुप’ (Jagran Group) की प्रेजिडेंट अपूर्वा पुरोहित का कहना है, ‘मीडिया इंडस्ट्री में अगले कुछ महीनों में कैश फ्लो का सबसे बड़ा मुद्दा बनेगा। लॉकडाउन के कारण एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू काफी प्रभावित होने वाला है। ऐसे मौके पर हम सरकार से गुजारिश करते हैं कि वह जितनी जल्दी हो सके, बकाया का भुगतान कर दे, ताकि इस सेक्टर को मुश्किल घड़ी में मदद मिल सके। समस्या का जल्द से जल्द समाधान निकालने के लिए रेडियो इंडस्ट्री और इंडियन न्यूजपेपर सोसायटी सरकार से बातचीत की प्रक्रिया में जुटे हैं।’

वहीं, ‘दैनिक भास्कर’ (Dainik Bhaskar) समूह के चीफ कॉरपोरेट सेल्स एंड मार्केटिंग ऑफिसर सत्यजीत सेन गुप्ता का कहना है, ‘अनिश्चितता भरे और इस मुश्किल समय में अखबारों का रेवेन्यू काफी दबाव में है। सरकार द्वारा बकाया राशि का भुगतान किए जाने से निश्चित रूप से मदद मिलेगी।’

‘बीसीसीएल’ (BCCL) की कंपनी ‘एंटरटेनमेंट नेटवर्क इंडिया लिमिटेड’ (Entertainment Network India Limited) के एमडी और सीईओ प्रशांत पांडे का कहना है, ‘रेडियो ब्रॉडकास्टर्स सोशल मैसेज अथवा अन्य कैंपेन के माध्यम से सरकार को सपोर्ट कर रहे हैं, लेकिन सरकार ने अभी तक पिछले बकाया का भुगतान भी नहीं किया है। कई मामलों में तो 12 महीनों का भुगतान अटका हुआ है, जबकि कई मामलों में दो साल से भुगतान नहीं हुआ है। वहीं, ‘डीएवीपी’ ने पिछले वित्तीय वर्ष में रेडियों पर विज्ञापनों में कंमी भी कर दी है। मुझे उम्मीद है कि इस सेक्टर की बेहतरी के लिए वह पहले के मुकाबले इसे बढ़ा देंगे।’

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दूरदर्शन की तरह Amul ने भी कुछ यूं लगाया पुरानी यादों पर अपना 'तड़का'

टीवी पर ‘रामायण’ (Ramayana) और ‘महाभारत’ (Mahabharat) देखकर लोग पुराने दिनों को याद कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ अमूल (Amul) ने भी अब इन यादों पर अपना तड़का डाल दिया है।

Last Modified:
Monday, 06 April, 2020
amul

कोविड- 19 (Covid- 19) को लेकर जहां पूरा देश इस समय लॉकडाउन के दौर से गुजर रहा है। लोग घरों में कैद हैं। ऐसे में घर पर मौजूद लोगों का मनोरंजन करने के लिए दूरदर्शन ने पब्लिक की डिमांड पर  80-90 के दशक के कई प्रोग्राम शुरू कर दिए हैं। टीवी पर ‘रामायण’ (Ramayana) और ‘महाभारत’ (Mahabharat) देखकर लोग पुराने दिनों को याद कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ अमूल (Amul ने भी अब इन यादों पर अपना तड़का डाल दिया है। दरअसल, अमूल ने उस दौर के अपने विज्ञापनों की पूरी सीरीज शेयर कर दी है, ताकि पुराने और यादगार पलों को पूरी तरह से जिया जा सके।

अमूल ने इन विज्ञापनों की शुरुआत रविवार सुबह कार्टून पर आधारित ‘रामायण’ और ‘महाभारत’ की  तस्वीरें शेयर करके की। एक तस्वीर में 10 सिर वाले रावण को दिखाया गया है, जबकि दूसरे में कर्ण को नदी के पास दिखाया गया है।  साथ ही लिखा है, ‘लोकप्रिय मांग के अनुसार, हम आज एक रेट्रो मोड में हैं.. 1990 के दशक के क्लासिक #Amul विज्ञापनों को आज #डीडी पर #रामायण और #महाभारत के शो में देखते हैं।’

यहां देखिए कुछ क्लासिक अमूल के ऐड विडियो-

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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कोरोना के प्रकोप के बीच बढ़ेंगे टीवी के दर्शक, पर उठा ये सवाल

कोरोना का कोहराम बढ़ता जा रहा है। पूरी दुनिया के लोगों में इस वायरस को लेकर दहशत फैली हुई है।

Last Modified:
Friday, 20 March, 2020
Channel

कोरोना का कोहराम बढ़ता जा रहा है। पूरी दुनिया के लोगों में इस वायरस को लेकर दहशत फैली हुई है। हालात यह हैं कि इस वायरस के प्रकोप से बचने के लिए लोगों पर घरों पर रहने का दबाव बढ़ गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी रविवार को ‘जनता कर्फ्यू’ यानी लोगों से बहुत आवश्यक न होने पर घरों से न निकलने की अपील की है। कई कंपनियों ने भी अपने एंप्लाईज को घर से काम (वर्क फ्रॉम होम) करने के लिए कहा है। इससे ‘इन हाउस’ एंटरटेनमेंट के अन्य रूपों के साथ-साथ टीवी की व्युअरशिप भी प्रभावित होगी। जाहिर सी बात है कि इस स्थिति में टीवी की व्युअरशिप में तो काफी इजाफा होगा, लेकिन क्या टीवी इंडस्ट्री को ऐड रेवेन्यू भी मिलेगा, यह बड़ा सवाल है।

इसके अलावा हेल्थ एडवाइजरी को ध्यान में रखते हुए प्रॉडक्शन हाउसेज ने भी आउटडोर शूटिंग रोक दी है, ऐसे में एक चुनौती यह भी है कि क्या ब्रॉडकास्टर इस स्थिति में कंटेंट के प्रवाह को बनाए रख पाएंगे। दरअसल, ‘Indian Motion Pictures Producers' Association’ (IMPPA) ने 31 मार्च तक टीवी सीरियल्स, वेब सीरीज और अन्य कार्यक्रमों की शूटिंग रोकने के लिए कहा है।  

'जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड’ (ZEEL) के चीफ ग्रोथ ऑफिसर (एड सेल्स) आशीष सहगल का मानना है कि बेशक प्रॉडक्शन प्रभावित होगा, लेकिन इसका व्युअरशिप पर प्रभाव नहीं पड़ेगा। उनका कहना है, ‘वर्ष 2009 में टीवी प्रॉडक्शन हाउसेज ने एक महीने लंबी हड़ताल की थी, उस समय फ्रेश एपिसोड प्रसारित नहीं किए गए थे। उस दौरान हम कुछ फ्रेश एलीमेंट्स के साथ पुराने एपिसोड ही प्रसारित कर रहे थे और हमें अच्छी व्युअरशिप मिली थी। मुझे नहीं लगता कि इस तरह की स्थिति आएगी, जिससे व्युअरशिप प्रभावित होगी। और अगर चीजें खराब होती हैं तो जरूरत पड़ने पर हम पुराने शो चलाएंगे।’

सहगल के अनुसार, ‘टीवी के लिए एक सकारात्मक बात यह भी है कि यदि कोई व्यक्ति धारावाहिक नहीं देखना चाहता है तो उसके पास मूवी चैनल्स का विकल्प है। ऐसे में मूवी चैनल्स की व्युअरशिप बढ़ने की संभावना है, यदि लोग शो नहीं देख रहे रहे हैं तो उनके मूवी देखने की संभावना है।’

वहीं, ‘9एक्स मीडिया’ (9X Media) के चीफ रेवेन्यू ऑफिसर पवन जेलखानी का कहना है कि सभी चैनल्स के पास हमेशा 10 से 15 दिन तक चलाने के लिए शो का एक बैंक होता है। जेलखानी के अनुसार, ‘मुझे पूरी उम्मीद है कि 31 मार्च से शूटिंग फिर से शुरू हो जाएंगी। इस दौरान टीवी की व्युअरशिप में इजाफा होगा, लेकिन हमें इस स्थिति को एक अवसर के रूप में नहीं देखना चाहिए।’   

हालांकि, मार्केट पर नजर रख रहे इंडस्ट्री के दिग्गजों का मानना है कि कोरोना के खौफ का असर मार्केट पर निश्चित रूप से पड़ेगा और इससे ऐड रेवेन्यू यानी विज्ञापन से मिलने वाला राजस्व भी काफी प्रभावित होगा। नाम न छापने की शर्त पर एक सीनियर एग्जिक्यूटिव ने बताया, ‘वास्तविक स्थिति का पता लगने में एक हफ्ते का समय लगेगा। टेलिविजन अभी भी ‘फास्ट मूविंग कंज्यूमर्स गुड्स’ (FMCG) पर निर्भर है और हमें उम्मीद है कि वहां से टीवी को विज्ञापन मिलना जारी रहेगा। हालांकि ऐसी संभावना है कि वे अपने खर्चों में भी कटौती कर सकते हैं।’

‘पिच मैडिसन रिपोर्ट 2020’ के अनुसार, टीवी पर विज्ञापन खर्च के मामले में FMCG सेक्टर का योगदान सबसे ज्यादा (49 प्रतिशत) है। हालांकि, वर्ष 2019 में इसमें एक प्रतिशत की कमी दर्ज की गई थी। टीवी पर विज्ञापन खर्च में योगदान के मामले में टेलिकॉम और ऑटो इंडस्ट्री 12 प्रतिशत और सात प्रतिशत के साथ क्रमश: दूसरे और तीसरे नंबर पर हैं।

वहीं, इंडस्ट्री से जुड़े एक अन्य विशेषज्ञ के अनुसार, ‘यह कहना मुश्किल है कि टीवी पर विज्ञापन खर्च में बढ़ोतरी होगी अथवा नहीं, लेकिन यदि इस तरह के शटडाउन की स्थिति जारी रहती है तो मूवीज और न्यूज चैनल्स पर विज्ञापन खर्च में इजाफा होगा।’

जेलखानी का कहना है कि वर्तमान हालातों का प्रभाव ऐड रेवेन्यू पर सिर्फ अगले दो हफ्ते तक रह सकता है, उससे ज्यादा नहीं। जेलखानी के अनुसार, ‘हम अभी दो से तीन खराब तिमाहियों से उबरकर बाहर आए हैं और मुझे लग रहा है कि मार्च काफी अच्छा कर रहा है। वर्तमान हालातों का असर विज्ञापन राजस्व पर सिर्फ 10 से 15 दिन रहेगा, हमें टीवी पर विज्ञापन खर्च के मामले में कोई बड़ा असर दिखाई नहीं दे रहा है।’

इस मामले में ‘Elara Capital’ के वाइस प्रेजिडेंट- रिसर्च एनालिस्ट (मीडिया) करन तौरानी का कहना है कि अगले एक पखवाड़े में टीवी की व्युअरशिप बढ़ेगी, लेकिन यह थोड़े समय के लिए ही होगी। तौरानी के अनुसार, ‘शुरुआत के 10-15 दिनों में जरूर टीवी की व्युअरशिप बढ़ेगी, क्योंकि अभी फ्रेश कंटेंट है। इस बात की संभावना है कि दर्शकों का एक नया वर्ग सामने आएगा, जिन्होंने टीवी देखना बंद कर दिया है, लेकिन यह स्थिति थोड़े समय के लिए ही होगी। नए कार्यक्रमों की शूटिंग कैंसल हो गई है। ऐसे में जब लोगों को कोई नया एपिसोड देखने के लिए नहीं मिलेगा तो वे डिजिटल कंटेंट की ओर रुख करेंगे।’

हालांकि, विज्ञापन के मोर्चे पर तौरानी को चीजें बेहतर होती नहीं दिख रही हैं। तौरानी के अनुसार,‘ मुझे नहीं लगता कि कोई सुधार होगा बल्कि यह और खराब होगा। खपत में मंदी हो रही है, विश्व स्तर पर भी बहुत सारे ब्रैंड्स विज्ञापन खर्चों में कटौती कर रहे हैं।  इस स्थिति में मुझे नहीं लगता कि  एडवर्टाइजिंग में कोई सुधार होगा। 15 दिनों के बाद जब ब्रॉडकास्टर्स के पास नए एपिसोड नहीं होंगे, तब बिजनेस पर और प्रभाव पड़ेगा।’

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इस वजह से 137 ऐडवर्टाइजर्स ने अपने विज्ञापनों को लिया वापस

ASCI द्वारा इस बारे में सूचित किए जाने के बाद 137 ऐडवर्टाइजर्स ने अपने विज्ञापनों को वापस ले लिया।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 20 February, 2020
Last Modified:
Thursday, 20 February, 2020
ASCI

टीवी पर आने वाले विज्ञापनों की प्रमाणिकता की जांच करने वाली संस्था 'ऐडवर्टाइजिंग स्‍टैंडर्ड्स काउंसिल ऑफ इंडिया' (ASCI) ने पिछले साल नवंबर में 408 विज्ञापनों के खिलाफ शिकायतों की जांच की। ASCI द्वारा इस बारे में सूचित किए जाने के बाद 137 ऐडवर्टाइजर्स ने अपने विज्ञापनों को वापस ले लिया।

इसके बाद ASCI की ‘कंज्यूमर कंप्लेंट्स काउंसिल’ (CCC) ने 271 विज्ञापनों का मूल्यांकन किया और 248 शिकायतों को सही ठहराते हुए जांच के लिए रोक दिया।

इन 248 शिकायतों में 159 एजुकेशन सेक्टर के, 44 हेल्थकयर सेक्टर के, 8 पर्सनल केयर के, 4 फूड व बेवरेज सेक्टर के और 33 अन्य कैटेगरी के विज्ञापन शामिल थे। जबकि इनमें से अधिकांश विज्ञापन भ्रामक दावे कर रहे थे।

इसके अलावा ‘कंज्यूमर कंप्लेंट्स काउंसिल’ (CCC) ने सुरक्षा मानकों की अनदेखी के कारण भी कुछ ऐडवरटाइजर्स के खिलाफ शिकायतों को जांच के लिए रोका है। वहीं, मशहूर हस्तियों द्वारा पेश किए जाने वाले कुछ विज्ञापनों को भी भ्रामक यानी गलत दावे पेश करते हुए पाया गया है।  

‘ऐडवर्टाइजिंग स्टैंडर्ड्स काउंसिल ऑफ इंडिया’ (ASCI) की सेक्रेटरी जनरल श्वेता पुरंदरे ने कहा कि उपभोक्ताओं को हर दिन बड़ी संख्या में विज्ञापन दिखाए जाते हैं। विज्ञापनों में दिखाए जाने वाले सेलिब्रिटीज द्वारा भी युवाओं और बच्चों को काफी ज्यादा प्रभावित किया जाता है। एक सही विज्ञापन का मतलब ये है कि इसमें किसी भी तरह से लापहरवाही को बढ़ावा न दिया जाए और दावे भी झूठे न पेश किए जाएं। इसके अलावा  सेलिब्रिटीज की भी ये जिम्मेदारी है कि वे जो विज्ञापन कर रहे हैं उनके दावों की प्रमाणिकता की जांच करें, ताकि लोग भ्रमित न हो।

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मीडिया में विज्ञापन खर्च को लेकर सामने आई ये रिपोर्ट

इस रिपोर्ट के अनुसार, विज्ञापन खर्च में 36 प्रतिशत शेयर के साथ टीवी सबसे बड़ा माध्यम बना रहेगा, लेकिन इसका ग्रोथ रेट 6.8 प्रतिशत बना रहेगा।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 13 February, 2020
Last Modified:
Thursday, 13 February, 2020
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मीडिया और ऐडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री को लेकर पिच मैडिसन ऐडवर्टाइजिंग रिपोर्ट (PMAR) जारी कर दी गई है। इस रिपोर्ट में विज्ञापन खर्च (Adex) के मामले में पहली छमाही यथावत रहने की भविष्यवाणी की गई है, जबकि दूसरी छमाही खासकर चौथी तिमाही काफी बेहतर रहने की उम्मीद जताई गई है। रिपोर्ट में वर्ष 2020 के लिए विकास दर 10.4 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है। 7048 करोड़ रुपए के इजाफे के साथ विज्ञापन खर्च 74650 करोड़ रुपए तक बढ़ने की उम्मीद जताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार, इसमें डिजिटल का योगदान 4387 करोड़ रुपए अथवा 62 प्रतिशत रहेगा।  

आर्थिक मंदी, ट्राई के नए टैरिफ ऑर्डर को लेकर छायी निराशा और त्योहारों के दौरान कंज्यूमर की उदासीनता की वजह से इंडस्ट्री के लिए पिछला साल काफी चुनौतीपूर्ण था। इस वजह से वर्ष 2019 के लिए अनुमानित विकास दर 13.04 प्रतिशत से गिर गई थी और ऐडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री की ग्रोथ में सिर्फ 11 प्रतिशत का इजाफा हुआ था। हालांकि, दूसरी ओर इस अवधि में विज्ञापन खर्च में 6695 करोड़ रुपए का इजाफा दर्ज किया गया था। यह पिछले एक दशक के दौरान सिर्फ एक साल में विज्ञापन खर्च में दूसरी सबसे बड़ी बढ़ोतरी थी।  

जैसा कि पिछले कई साल से हो रहा है, वर्ष 2020 में भी डिजिटल मीडियम में सबसे ज्यादा 28.4 प्रतिशत की ग्रोथ देखने को मिली है और वर्ष के अंत में विज्ञापन खर्च में 27 प्रतिशत शेयर के साथ यह लगभग 20,000 करोड़ रुपए हो चुका है।   

इस रिपोर्ट के अनुसार, विज्ञापन खर्च में 36 प्रतिशत शेयर के साथ टीवी सबसे बड़ा माध्यम बना रहेगा, लेकिन इसका ग्रोथ रेट 6.8 प्रतिशत रहेगा। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि विज्ञापन खर्च में प्रिंट के शेयर में तीन प्रतिशत की कमी देखने को मिलेगी और यह 27 प्रतिशत रह जाएगा। हालांकि इसमें अभी दो प्रतिशत की ग्रोथ दर्ज की जा रही है।

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