ओणम पर ऐडवर्टाइजर्स ने मातृभूमि समूह पर कुछ यूं 'बरसाया प्यार'

समूह की ओर से इन विज्ञापनदाताओं का आभार भी व्यक्त किया गया है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 18 September, 2020
Last Modified:
Friday, 18 September, 2020
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‘मातृभूमि’ (Mathrubhumi) समूह को इस बार ओणम सीजन (Onam season) के दौरान 1000 से ज्यादा एडवर्टाइजर्स ने अपने विज्ञापन दिए हैं। बताया जाता है कि इनमें से 200 ऐडवर्टाइजर्स केरल के स्थानीय व्यापारी रहे, जिन्होंने खासतौर पर मातृभूमि समूह को विज्ञापन दिए।

समूह की ओर से इन विज्ञापनदाताओं का आभार भी जताया गया है। इस बारे में ‘मातृभूमि’ (Mathrubhumi) समूह के मैनेजिंग डायरेक्टर एमवी श्रेयम्स कुमार का कहना है, ‘मेरा हमेशा से मानना रहा है कि प्रत्येक संकट में एक अवसर होता है। यह हमारी उत्साही और मेहनती टीम के प्रयासों का नतीजा और ऐडवर्टाइजर्स का हमारे ऊपर भरोसा है, जो हमें इतने विज्ञापन मिले हैं।’

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मीडिया में विज्ञापनों पर सरकार ने तीन साल में कितना किया खर्चा, जानें यहां

सूचना प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने लोकसभा में एक सवाल के जवाब में इसके बारे में पूरी जानकारी दी है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 08 December, 2021
Last Modified:
Wednesday, 08 December, 2021
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केंद्र सरकार ने पिछले तीन साल में प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में विज्ञापनों पर 1698.98 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। सूचना प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने लोकसभा में यह जानकारी दी है। संसद के निचले सदन में पूछे गए एक सवाल के जवाब में अनुराग ठाकुर ने बताया, ‘वर्ष 2018-19 से 2020-21 की अवधि के दौरान प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से सरकार द्वारा विज्ञापनों पर 1698.98 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।’

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि सरकारी विज्ञापनों का प्राथमिक उद्देश्य प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और आउटडोर मीडिया के माध्यम से दूरदराज और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सरकारी नीतियों और योजनाओं के बारे में बताना और उनमें जागरूकता पैदा करना है।

सूचना-प्रसारण मंत्रालय (MIB) के तहत आने वाला ‘ब्यूरो ऑफ आउटरीच एंड कम्युनिकेशन’ (BOC) विज्ञापन जारी करने और संबंधित मीडिया को पैनलबद्ध करने संबंधी नीतिगत दिशा-निर्देशों में निर्धारित मानदंडों के आधार पर विभिन्न मीडिया साधनों के माध्यम से विज्ञापन जारी करता है। ये दिशा-निर्देश ‘ब्यूरो ऑफ आउटरीच एंड कम्युनिकेशन’ की वेबसाइट  www.davp.nic.in पर भी उपलब्ध हैं।  

उन्होंने बताया कि ‘ब्यूरो ऑफ आउटरीच एंड कम्युनिकेशन’ ने एकीकृत अभियान, थीम-आधारित अभियान, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कम लागत वाले विज्ञापनों पर जोर देने, केंद्रित सामग्री के साथ कम प्रिंट स्थान का उपयोग करने और क्यूआर कोड का उपयोग करके जानकारी एम्बेड करने, लक्षित लाभार्थियों के लिए अभियानों की बेहतर स्थिति सहित विज्ञापन व्यय को युक्तिसंगत बनाने के लिए तमाम स्ट्रैटेजी शुरू की हैं।

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ममता बनर्जी बोलीं- सरकारी विज्ञापन चाहिए तो मीडिया को करना होगा ये काम!

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के एक कार्यक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 07 December, 2021
Last Modified:
Tuesday, 07 December, 2021
mamata banerjee

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के एक कार्यक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। दरअसल इस वीडियो में वह एक पत्रकार को चौंकाने वाला जवाब देती नजर आ रही है, जिसमें वह पत्रकार को विज्ञापन पाने के लिए अपनी सरकार की तारीफ करने की हिदायत देती दिखायी दे रही हैं।

वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे ग्रामीण क्षेत्र की एक महिला पत्रकार ने मुख्यमंत्री से अपने अखबार की माली हालत और आर्थिक तंगी की समस्या साझा की और बताया कि सरकार की ओर से अखबार को विज्ञापन नहीं मिलते हैं। इस पर सीएम ममता बनर्जी ने बांग्ला में जवाब देते हुए कहा कि अगर विज्ञापन चाहिए तो अखबार में सरकार के बारे में पॉजिटिव न्यूज प्रकाशित करना होगा। इतना ही नहीं वह पत्रकार को रोजाना अखबार की एक कॉपी डीएम कार्यालय में जमा करने के लिए भी कहती है। 

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक कार्यक्रम में कहा कि ग्रामीण पत्रकारों को सरकार की पॉजिटिव न्यूज दिखानी चाहिए। अगर वो ऐसा करते हैं तो मैं उस जिले के डीएम (जिलाधिकारी) से कहूंगी की उन्हें विज्ञापन दिया जाए।

उन्होंने आगे कहा, ‘सरकार के बारे में पॉजिटिव खबर दिखाने वाले पत्रकार डीएम कार्यालय या अन्य कार्यालयों में अपनी खबर को भेजें ताकि उन्हें भी पता चल सके कि अखबार में सरकार के बारे में अच्छी खबर दिखाई जा रही है। ऐसा करने वालों को विज्ञापन दिया जाए।’

दरअसल, यह पहली बार नहीं है जब मीडिया संस्थान को सरकार के हक में खबर दिखाने पर विज्ञापन देने की बात कही गई है, इससे पहले हरियाणा सरकार ने एक आदेश दिया था कि सभी जिलों से प्रकाशित/वितरित होने वाले सभी प्रकार के समाचार पत्र, पत्रिकाओं व न्यूज चैनल जोकि सरकार की निगेटिव या पॉजिटिव कवरेज कर रहे हैं उनकी लिस्ट बनाई जाए। हालांकि विवाद बढ़ने के बाद सरकार को इस आदेश को वापस लेना पड़ा था।

 

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मंत्री के अल्टीमेटम के बाद इस विवादित विज्ञापन को डिजाइनर ने लिया वापस

मशहूर फैशन डिजाइनर सब्यसाची मुखर्जी (Sabyasachi) ने देशभर में कड़ी आलोचना के बीच मंगलसूत्र वाले अपने विज्ञापन को वापस ले लिया है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 01 November, 2021
Last Modified:
Monday, 01 November, 2021
sabyasachi5487

मशहूर फैशन डिजाइनर सब्यसाची मुखर्जी (Sabyasachi) ने देशभर में कड़ी आलोचना के बीच मंगलसूत्र वाले अपने विज्ञापन को वापस ले लिया है। दरअसल यह विज्ञापन पिछले कुछ दिनों से काफी विवादों में था।  विज्ञापन की तस्वीरें इंस्टाग्राम पर पोस्ट किए जाने के बाद से ही सोशल मीडिया यूजर्स के एक वर्ग ने विज्ञापन को हिंदू संस्कृति के खिलाफ बताया और अश्लील करार देते हुए एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया। इसके बाद ट्विटर पर #Sabyasachi_Insults_HinduCulture और #BoycottSabyasachi जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे थे।

विज्ञापन को लेकर मध्यप्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने आपत्ति जताई थी और सब्यसाची को चेतावनी देते हुए कहा था कि विज्ञापन अगले 24 घंटे में नहीं हटाया तो उन पर FIR दर्ज की जाएगी।

नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि इस विज्ञापन को देखकर मेरा मन बहुत आहत है। मैं व्यक्तिगत रूप से सब्यसाजी को 24 घंटे का अल्टीमेटम देता हूं। अगर वह मंगलसूत्र का विज्ञापन नहीं हटाते हैं, तो उनके खिलाफ केस दर्ज होगा। उनके खिलाफ कार्रवाई भी होगी। साथ ही अलग से पुलिस भी भेजी जाएगी। अगर उनमें हिम्मत तो दूसरे धर्म के खिलाफ करें। 

इसके बाद सब्यसाची ने इंस्टाग्राम पर लिखा, ‘धरोहर और संस्कृति पर सतत चर्चा की पृष्ठभूमि में मंगलसूत्र विज्ञापन का मकसद समावेशिता और सशक्तिकरण पर बातचीत करना था। इस अभियान का मकसद उत्सव मनाना था और हमें इस बात का गहरा दुख है कि इससे हमारे समाज के एक वर्ग को कष्ट पहुंचा है। इसलिए हमने इस विज्ञापन अभियान को वापस लेने का निर्णय लिया हैं।’

दरअसल, सब्यसाची ने हाल ही में एक ज्वैलरी कलेक्शन लॉन्च किया, जिसका नाम 'द रॉयल बंगाल टाइगर आइकन' रखा गया। इसमें से मंगलसूत्र के विज्ञापन पर हंगामा शुरू हुआ। इस मंगलसूत्र को कंपनी ने 'द रॉयल बंगाल मंगलसूत्र 1.2' नाम दिया। इस विज्ञापन में एक महिला को कम गर्दन वाली पोशाक के साथ मंगलसूत्र पहने दिखाया गया था, जिसे एक पुरुष के साथ अकेले और अंतरंग स्थिति में चित्रित किया गया था। महिला मॉडल का नाम वर्षिता तटावर्ती बताया जा रहा है और पुरुष मॉडल का नाम प्रतेयिक जैन है।

सोशल मीडिया के बाद इस विवादित विज्ञापन को लेकर हिंदू संगठनों ने भी विरोध शुरू कर दिया था। उनका कहना है कि कोई हिंदू त्योहार आते ही क्रिएटिविटी क्यों दिखने लगती है। संगठनों का कहना है कि ये विज्ञापन हिंदू रीति-रिवाज और भावनाओं पर हमला है। हिंदू शादी जैसे पवित्र रिश्ते को ये कंपनियां बदनाम कर रही हैं।

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अपने जन्मदिन पर बॉलीवुड के महानायक ने लिया बड़ा फैसला, यूं मानी फैंस की बात

बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन का आज 79वां जन्मदिन है। इस खास दिन पर अमिताभ ने एक बड़ा फैसला किया है।

Last Modified:
Monday, 11 October, 2021
amitabh54512

बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन का आज 79वां जन्मदिन है। इस खास दिन पर अमिताभ ने एक बड़ा फैसला किया है। दरअसल, कुछ समय पहले एक पान मसाला ऐड करने के चलते उन्हें सोशल मीडिया पर खूब ट्रोल किया गया था, लेकिन तब उन्होंने इस पर खास प्रतिक्रिया नहीं दी थी, मगर अब इस मामले में अमिताभ बच्चन ने एक्शन ले लिया है। उन्होंने अब 'कमला पसंद' के साथ अपना करार खत्म कर दिया है और इसकी जानकारी उन्होंने अपने ऑफिशियल ब्लॉग पर पोस्ट शेयर कर दी है।

वजह बताते हुए अमिताभ बच्चन के ब्लॉग पर उनके ऑफिस की ओर से जारी एक पोस्ट में कहा गया है, 'कमला पसंद का ऐड प्रसारित होने के कुछ दिन बाद अमिताभ बच्चन ने ब्रैंड से संपर्क किया और पिछले सप्ताह इस करार को खत्म करने का फैसला किया था। जब अमिताभ बच्चन इस ब्रैंड से जुड़े थे, तब उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि यह सरोगेट ऐडवरटाइजमेंट के अंतर्गत आता है।'

उन्होंने कहा कि वे ऐसा इसलिए कर रहे हैं ताकि इससे नई पीढ़ी को पान मसाला का सेवन करने के लिए मोटिवेशन ना मिले। उन्होंने इस ऐड के लिए मिली फीस भी वापस कर दी है।

अमिताभ बच्चन ने कमला पसंद का ऐड किया था, जिसके बाद इसे लेकर कई सारे लोगों ने आपत्ति जताई थी। लोगों का ऐसा मानना था कि देश की सीनियर मोस्ट पर्सनैलिटी होने के नाते अमिताभ बच्चन को ऐसे ऐड नहीं करने चाहिए। नेशनल एंटी-टोबैको ऑर्गेनाइजेशन ने भी अमिताभ बच्चन से रिक्वेस्ट की थी कि बिग बी इस ऐड से अपना नाम वापस ले लें।

इसी बीच अमिताभ बच्चन से एक फैन ने पान मसाला का ऐड करने पर सवाल भी किया था। इसके जवाब में अमिताभ ने कहा था कि- 'अगर किसी संस्था को इससे फायदा हो रहा है तो फिर हमें ऐसे नहीं सोचना चाहिए कि हम ये क्यों कर रहे हैं। जैसे हम लोगों की इंडस्ट्री चलती है वैसे ही उनकी इंडस्ट्री भी चलती है। आपको ऐसा लगता है कि मुझे ये नहीं करना चाहिए लेकिन मुझे इसके लिए फीस मिली है।'

 

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अनुप्रिया आचार्य फिर चुनी गईं AAAI की प्रेजिडेंट, एग्जिक्यूटिव कमेटी में शामिल हुए ये नाम

एडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री के हितों को आगे बढ़ाने के लिए वर्ष 1945 में ‘एडवर्टाइजिंग एजेंसीज एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ का गठन किया गया था।

Last Modified:
Friday, 01 October, 2021
ANUPRIYA ACHARYA

‘Publicis Groupe’ की सीईओ (साउथ एशिया) अनुप्रिया आचार्य को एक बार फिर ‘एडवर्टाइजिंग एजेंसीज एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ (AAAI) का प्रेजिडेंट चुना गया है। इसके साथ ही ‘ग्रुप एम’ (GroupM) के सीईओ (इंडिया) प्रशांत कुमार को दोबारा से एसोसिएशन का वाइस प्रेजिडेंट चुना गया है।

इनके अलावा एसोसिएशन की एग्जिक्यूटिव कमेटी में बतौर मेंबर विवेक श्रीवास्तव (Innocean Worldwide Communications Pvt Ltd), राणा बरुआ (Havas Worldwide India Pvt Ltd), मोहित जोशी (Havas Media India Pvt Ltd), कुणाल ललानी (Crayons Advertising Pvt Ltd) और रोहन मेहता (Kinnect Media) को शामिल किया गया है।

गौरतलब है कि एडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री के हितों को आगे बढ़ाने के लिए वर्ष 1945 में ‘एडवर्टाइजिंग एजेंसीज एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ का गठन किया गया था।

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‘इंडियन सोसायटी ऑफ एडवर्टाइजर्स’ में सुनील कटारिया को फिर मिली ये बड़ी जिम्मेदारी

’इंडियन सोसाइटी ऑफ एडवर्टाइजर्स’ (ISA) की नवनिर्वाचित कार्यकारी परिषद की 27 सितंबर 2021 को हुई बैठक में उन्हें इस पद के लिए चुना गया। लगातार छठी बार इस पद के लिए चुने गए हैं सुनील कटारिया

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 28 September, 2021
Last Modified:
Tuesday, 28 September, 2021
Sunil Kataria

’इंडियन सोसाइटी ऑफ एडवर्टाइजर्स’ (ISA) की नवनिर्वाचित कार्यकारी परिषद की बैठक 27 सितंबर 2021 को हुई। इस बैठक में ’गोदरेज कंज्यूमर प्रॉडक्ट्स लिमिटेड’ के सीईओ (India and SAARC) सुनील कटारिया को एक बार फिर ’ISA’ का चेयरमैन चुना गया। उन्हें इस पद पर लगातार छठी बार चुना गया है।

इस मौके पर सुनील कटारिया का कहना था, ’ डिजिटल विज्ञापन टीवी के बाद दूसरे स्थान पर आ गया है और आगे भी बढ़ रहा है, इस वर्ष हमारा प्रयास डिजिटल मीजरमेंट के क्षेत्र में अपने प्रयासों को आगे बढ़ाने का होगा। मल्टीमीडिया मीजरमेंट बनाने के लिए ‘ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल’ (BARC) के साथ काम करने के लिए ’ISA’ सही दिशा में आगे बढ़ रही है। हम सभी संगठनों को उनकी मजबूत भागीदारी के लिए दिल से धन्यवाद देते हैं और यह निश्चित रूप से हमें नई ऊंचाइयों को छूने में मदद करेगा। मैं अपने सभी प्रयासों में आईएसए सदस्यों के समर्थन को भी धन्यवाद देता हूं।’

इसके साथ ही उन्होंने कहा, ‘विशेष रूप से कोविड-19 महामारी के संदर्भ में, मुझे अपने सभी सदस्यों, उद्योग सहयोगियों, विक्रेताओं और आईएसए सचिवालय टीम के सुरक्षित रहने, टीका लगवाने और स्वास्थ्य अधिकारियों और सरकारों के निर्देशों का पालन करने में सहयोग करने को लेकर खुशी हो रही है।’

वहीं, कार्यकारी परिषद के सदस्यों ने पिछले पांच वर्षों में ‘आईएसए’ चेयरमैन के रूप में सुनील कटारिया के योगदान के लिए उन्हें धन्यवाद दिया और 2021-22 के लिए फिर से चुने जाने पर खुशी व्यक्त की।

कार्यकारी परिषद के अन्य सदस्यों में ये नाम शामिल हैं:

Atul Agrawal, Senior Vice President – Corporate Brand and Marketing, Tata Services Limited

Narendra Ambwani, Director, Agro Tech Foods Limited

Tarun G. Arora, Chief Executive Officer & Whole Time Director, Zydus Wellness Limited

Subhadip Dutta Choudhury, Chief Executive Officer, Hawkins Cookers Limited

Paulomi Dhawan, Independent Director, Whistling Woods International

Neil George, Managing Director, Nivea India Pvt Limited

Girish Kalyanaraman, Vice President, Brand Operations, Procter & Gamble Hygiene and Health Care Limited

Chandru Kalro, Managing Director, TTK Prestige Limited

Devraj Lahiri, Chief Operating Officer - India Tobacco Division, ITC Limited

Angshu Mallick, Managing Director & CEO, Adani Wilmar Limited

Bharat V. Patel, Independent Director, Aditya Birla Sun Life AMC Limited

Anuj Poddar, Executive Director, Bajaj Electricals Limited

Ramakrishnan Ramamurthi, Advisor J. K. Enterprises

Ram Raghavan, Managing Director, Colgate-Palmolive (India) Limited

Gauravjeet Singh, General Manager – Media Services (South Asia) Media Dept, Hindustan Unilever Limited

Shashank Srivastava, Senior Executive Director (Marketing & Sales), Maruti Suzuki India Limited

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Amul Macho के खिलाफ Lux Cozi की शिकायत को ASCI ने नहीं पाया सही

दो बड़े इनरवियर ब्रैंड्स लक्स कोजी और अमूल माचो के बीच अंडरवियर-बनियान के विज्ञापन को लेकर छिड़े विवाद पर फैसला आ गया है। 

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 27 September, 2021
Last Modified:
Monday, 27 September, 2021
amul45484

दो बड़े इनरवियर ब्रैंड्स लक्स कोजी (Lux Cozi) और अमूल माचो (Amul Macho) के बीच अंडरवियर-बनियान के विज्ञापन को लेकर छिड़े विवाद पर फैसला आ गया है। भारतीय विज्ञापन मानक परिषद (ASCI) ने लक्स कोजी के टीवी विज्ञापन के खिलाफ उसकी प्रतिस्पर्धी अमूल माचो की शिकायत को खारिज कर दिया है, जिसमें उसने अपने प्रचार अभियान की चोरी का दावा किया था।

लक्स कोजी का यह विज्ञापन बॉलीवुड सितारे वरुण धवन के साथ है। ASCI की उपभोक्ता शिकायत परिषद (CCC) ने पाया कि अवधारणा और निष्पादन तत्वों के संदर्भ में दोनों विज्ञापनों में मुश्किल से कोई समानता थी और यह विज्ञापन से जुड़े संहिता का उल्लंघन नहीं था। यही वजह है कि इस शिकायत को सही नहीं पाया गया।

आदेश में कहा गया कि CCC का निष्कर्ष है, ‘विज्ञापनदाता का विज्ञापन सामान्य बनावट, कॉपी, स्लोगन, दृश्य प्रस्तुतियों, संगीत या ध्वनि प्रभावों के लिहाज से शिकायतकर्ता के पहले आ चुके विज्ञापन के समान नहीं है। ASCI संहिता का उल्लंघन नहीं किया गया है।’

भारतीय विज्ञापन मानक परिषद (ASCI) ने कहा, ‘इस शिकायत को सही नहीं पाया गया।’

बता दें कि अमूल माचो इनरवियर ब्रैंड के मालिक जे जी होजरी ने लक्स कोजी पर आरोप लगाया था कि उसके ‘टोइंग’ विज्ञापन की नकल की गई है। आरोप के मुताबिक लक्स ने अभिनेता वरुण धवन को लेकर शुरू किए नए विज्ञापन में ‘टोइंग’ की संगीत से लेकर लोकेशन तक की नकल की है।

आपको बता दें कि अमूल माचो का ‘टोइंग’ विज्ञापन  साल 2007 में शुरू किया गया था। वहीं, लक्स ने हाल ही में अभिनेता वरुण धवन को लेकर नया विज्ञापन शुरू किया है।

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जानिए, प्रिंट मीडिया में विज्ञापनों को लेकर क्या कहती है TAM AdEx की ये रिपोर्ट

‘टैम एडेक्स’ की रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई 2021 के पहले हफ्ते में पिछले साल इसी हफ्ते के मुकाबले सबसे ज्यादा 57 प्रतिशत ग्रोथ देखी गई।

Last Modified:
Friday, 20 August, 2021
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प्रिंट मीडिया के लिए सबसे खराब दौर संभवतः खत्म होने वाला है। ‘टैम एडेक्स’ (TAM AdEx) के ताजा आंकड़ों पर नजर डालें तो जुलाई 2020 के मुकाबले इस साल जुलाई (जुलाई 2021) में प्रिंट मीडिया में काफी ग्रोथ देखी गई है। इस रिपोर्ट के अनुसार प्रिंट मीडिया में प्रति पब्लिकेशन विज्ञापन स्पेस (ad space) में जुलाई 2020 के मुकाबले जुलाई 2021 में 37 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि जुलाई 2020 के मुकाबले जुलाई 2021 के पांचों हफ्तों में ऐड स्पेस में बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा, जुलाई 2021 के पहले हफ्ते में पिछले साल इसी अवधि की तुलना में अधिकतम 57 प्रतिशत की बढ़ोतरी, जबकि जुलाई 2021 के तीसरे और चौथे हफ्ते में न्यूनतम 29 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखने को मिली है। इस बीच, जुलाई 2020 की तुलना में जुलाई 2021 में श्रेणियों (categories) की कुल संख्या में पांच प्रतिशत की वृद्धि हुई और विज्ञापनदाताओं व ब्रैंड्स की कुल संख्या में 16प्रतिशत की वृद्धि हुई।

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि जुलाई 2020 के मुकाबले जुलाई 2021 में तमाम कोर्सेज और कारों ने टॉप-दो श्रेणियों में अपनी जगह बनाई रखी। टॉप-10 की चार अन्य श्रेणियों में जुलाई 2021 में चार नए प्रवेशकर्ता (entrants) शामिल हुए। ऐड स्पेस में टॉप-10 श्रेणियों की भागीदारी 41 प्रतिशत थी।

शीर्ष श्रेणियों (top categories) की बात करें तो हॉस्पिटल्स/क्लिनिक के ऐड स्पेस में सबसे ज्यादा 95 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखने को मिली, जबकि प्रॉपर्टीज/रियल एस्टेट के ऐड स्पेस में जुलाई 2020 के मुकाबले जुलाई 2021 में दोगुनी बढ़ोतरी देखी गई। इसके साथ ही प्रिंट मीडिया में पिछले साल जुलाई के मुकाबले इस साल जुलाई में 280 से ज्यादा बढ़ती हुई श्रेणियां शामिल थीं।

विज्ञापनदाताओं (advertisers) की बात करें तो प्रिंट में जुलाई 2020 और जुलाई 2021 दोनों में ‘एसबीएस बायोटेक’ (SBS Biotech) शीर्ष विज्ञापनदाता रहा। पिछले साल जुलाई के मुकाबले इस साल जुलाई में विशेषरूप से ‘टिकटॉक स्किल गेम्स’ (Tictok Skill Games) छठे नंबर पर रहा। इस बीच पिछले साल जुलाई के मुकाबले इस साल जुलाई में टॉप-10 की लिस्ट में ‘एलआईसी ऑफ इंडिया’ (LIC of India) भी इसमें शामिल रहा। जुलाई 2021 में प्रिंट में ऐड स्पेस में टॉप-10 ऐडवर्टाइजर्स ने 20 प्रतिशत शेयर जोड़ा। इसके साथ ही प्रिंट में 21000 से ज्यादा ऐडवर्टाइजर्स थे।

वहीं, यदि ब्रैंड्स की बात करे तो प्रिंट मीडिया में 24000 से ज्यादा ब्रैंड्स की मौजूदगी रही। जुलाई 2021 में प्रिंट में मारुति कार रेंज टॉप ब्रैंड्स थी जबकि इसके बाद प्रेस्टीज रेंज थी। टॉप-10 ब्रैंड्स में तीसरी, छठी, आठवीं और दसवीं रैंक पिछले साल जुलाई के मुकाबले इस साल जुलाई में एक्सक्लूसिव थीं। रैंकिंग में इस साल जुलाई में पिछले साल इसी अवधि की तुलना में सबसे ज्यादा उछाल SBI-Corporate में देखने को मिला। जुलाई 2021 में ऐड स्पेस में टॉप-10 ब्रैंड्स की हिस्सेदारी 11 प्रतिशत थी।

इस रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल जुलाई के मुकाबले इस साल जुलाई में 70 से ज्यादा नई श्रेणियां, 15900 से ज्यादा नए ऐडवर्टाइजर्स और 19100 से ज्यादा नए ब्रैंड्स देखे गए। नई कैटेगरी में सबसे ऊपर Events-BFSI थी और इसके बाद Wearable Devices का नंबर था। जुलाई में न्यू ऐडवर्टाइजर में टॉप पर Tictok Skill Games रहा, जबकि Netflix International दूसरे नंबर पर रहा। इसके अलावा जुलाई 2020 के मुकाबले जुलाई 2021 में न्यू ब्रैंड्स में Winzo Games शीर्ष पर रहा। इसके बाद Kia दूसरे नंबर पर रहा।

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जानिए, प्रचार अभियानों पर महाराष्ट्र सरकार ने पिछले 16 महीनों में कितना किया खर्चा

स्वतंत्र पत्रकार और आईटीआई एक्टिविस्ट अनिल गलगली द्वारा सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई थी इस बारे में जानकारी

Last Modified:
Monday, 05 July, 2021
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महाराष्ट्र में शिवसेना के नेतृत्व वाली ‘महाविकास अघाड़ी सरकार’ (MVA Govt) द्वारा पिछले 16 महीनों में प्रचार अभियानों (publicity campaigns) पर 155 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। स्वतंत्र पत्रकार और आईटीआई एक्टिविस्ट अनिल गलगली द्वारा सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत मांगी गई जानकारी से इस बात का पता लगा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गलगली ने सूचना एवं जनसंपर्क महानिदेशक से इस बारे में जानकारी मांगी थी, जिस पर बताया गया कि 2020 में 26 विभागों के अभियानों पर कुल 104.55 करोड़ रुपये खर्च किए गए।

इस जानकारी के अनुसार, महिला दिवस पर 5.96 करोड़ रुपये और पदम विभाग पर 9.99 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन पर 19.94 करोड़ रुपये और विशेष प्रचार अभियान पर चार चरणों में 22.65 करोड़ रुपये खर्च किए गए।

वर्ष 2021 में 12 विभागों पर 12 मार्च तक 29.79 करोड़ रुपये खर्च किए गए। राज्य स्वास्थ्य शिक्षा विभाग ने 15.94 करोड़ रुपये और जल जीवन मिशन ने 1.88 करोड़ रुपये खर्च किए। सोशल मीडिया पर 45 लाख रुपये खर्च किए गए हैं।

गलगली का कहना है कि सोशल मीडिया के नाम पर किया गया खर्च ‘संदिग्ध’ है और क्रिएटिव के नाम पर संदेह पैदा कर रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पत्र लिखकर विभागीय स्तर पर होने वाले खर्च, इसकी प्रकृति और इसके लाभार्थी की जानकारी वेबसाइट पर अपलोड करने की मांग की है।

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कोरोना की दूसरी लहर का नहीं पड़ा टीवी विज्ञापनों पर असर

कोरोना महामारी की दूसरी लहर के दौरान खपत मांग में कमी का टीवी विज्ञापनदाताओं पर कोई असर नहीं दिखा

Last Modified:
Friday, 18 June, 2021
BARC

कोरोना महामारी की दूसरी लहर के दौरान खपत मांग में कमी का टीवी विज्ञापनदाताओं पर कोई असर नहीं दिखा और इस साल अप्रैल और मई में टीवी विज्ञापनों की संख्या बढ़ने के साथ यह आंकड़ा महामारी पूर्व के वर्षों के लगभग बराबर रहा। यह जानकारी ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (बार्क) ने गुरुवार को अपनी एक रिपोर्ट में दी।

रिपोर्ट के अनुसार एक साल पहले की अवधि से तुलना करने पर टेलीवजन पर दिखाए जाने वाले विज्ञापनों की संख्या में 65 प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि हुई। हालांकि, अप्रैल 2021 की तुलना में इस साल मई में विज्ञापनों की संख्या में कमी दर्ज की गई।

नीति नियंता महामारी की दूसरी लहर की वजह से खपत मांग में लगी सेंध से उबरने की मशक्कत कर रहे हैं, जिससे कोविड-19 की पहली लहर के उलट देश के ग्रामीण हिस्से भी प्रभावित हुए। कहा जा रहा है कि दूसरी लहर अपने चरम को पार कर चुकी है और संक्रमण में आयी कमी के साथ देश के अलग-अलग हिस्सों में लॉकडाउन में ढील दी जा रही है।

बार्क में क्लाइंट पार्टनरशिप और रेवेन्यू फंक्शन के हेड आदित्य पाठक ने कहा, ‘यह साल टीवी विज्ञापनों की संख्या के लिहाज से मजबूत नोट पर शुरू हुआ। मौजूदा महामारी की वजह से अप्रैल 2021 की तुलना में मई 2021 में विज्ञापनों की संख्या में मामूली कमी हुई लेकिन मई 2020 की तुलना में इसमें 64 प्रतिशत की जोरदार वृद्धि भी दर्ज की गयी।’ उन्होंने कहा, ‘वे (टीवी विज्ञापन) पूर्ववर्ती वर्षों के बराबर बने रहे।’

अप्रैल-मई 2021 के आंकड़े को मिलाया जाए तो पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में विज्ञापनों की संख्या में 85 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी, लेकिन केवल मई 2021 की मई 2020 से तुलना करे तो यह वृद्धि 64 प्रतिशत रह जाती है।

इस साल अप्रैल और मई के दौरान विज्ञापनों की संख्या की यदि 2018 और 2019 से तुलना की जाये तो मामूली अधिक रही। कोरोना महामारी की शुरुआत मार्च 2020 से हुई थी। हालांकि मई के आंकड़ों की यदि महामारी से पहले के आंकड़ो से तुलना की जाए तो यह मामूली कम रही है।

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