CBC के विज्ञापन नेटवर्क में कितने प्रकाशन शामिल? रिपोर्ट में सामने आई संख्या

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 में यह जानकारी दी गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, CBC ने संबंधित वित्त वर्ष के दौरान देशभर में करीब 100 प्रिंट डिस्प्ले विज्ञापन भी जारी किए।

Vikas Saxena by
Published - Friday, 30 October, 2026
Last Modified:
Friday, 30 October, 2026
CBC854


सरकारी विज्ञापनों के लिए CBC के पास 7,432 प्रकाशन सूचीबद्ध

केंद्र सरकार के विज्ञापनों और प्रचार अभियानों से जुड़े केंद्रीय संचार ब्यूरो (CBC) के नेटवर्क में 7,432 प्रकाशन सूचीबद्ध हैं। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 में यह जानकारी दी गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, CBC ने संबंधित वित्त वर्ष के दौरान देशभर में करीब 100 प्रिंट डिस्प्ले विज्ञापन भी जारी किए।

CBC केंद्र सरकार के मंत्रालयों, विभागों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और स्वायत्त संस्थाओं की विज्ञापन एवं प्रचार संबंधी जरूरतों को पूरा करता है। इसके जरिए सरकारी योजनाओं, कार्यक्रमों और नीतियों की जानकारी अलग-अलग माध्यमों से लोगों तक पहुंचाई जाती है।

प्रिंट और डिजिटल माध्यमों से प्रचार

मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, CBC प्रिंट, ऑडियो-विजुअल, आउटडोर, प्रदर्शनियों और डिजिटल माध्यमों के जरिए सरकारी जानकारी लोगों तक पहुंचाता है। इसके नेटवर्क में देशभर में 23 क्षेत्रीय कार्यालय और 148 फील्ड कार्यालय हैं।

रिपोर्ट में बताया गया है कि CBC ने डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स के जरिए भी अपनी पहुंच बढ़ाई है। इसके अलावा, ब्यूरो ने सरकारी अभियानों के लिए वेबसाइटों और अन्य डिजिटल माध्यमों के नेटवर्क का भी विस्तार किया है।

500 से अधिक अखबारों में दिए गए विज्ञापन

रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार के 11 साल पूरे होने के मौके पर CBC ने 500 से अधिक अखबारों में 20 प्रिंट विज्ञापनों के प्रकाशन का समन्वय किया। ब्यूरो ने डिजिटल इंडिया से जुड़े प्रिंट अभियान को 11 भाषाओं में भी लागू किया।

इसके अलावा, CBC ने GST से जुड़े विज्ञापन संदेशों को सोशल मीडिया के लिए तैयार किया और वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ के मौके पर चार पुस्तिकाओं की डिजाइनिंग और छपाई का काम किया।

मंत्रालय की रिपोर्ट में CBC के इन कामों को सरकार की योजनाओं और कार्यक्रमों की जानकारी लोगों तक पहुंचाने की गतिविधियों के रूप में दर्ज किया गया है।

स्रोत: सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, वार्षिक रिपोर्ट 2025-26, पेज 38-39।

Keywords: Central Bureau of Communication, CBC, Government Advertising, Empanelled Publications, Print Media, Digital Advertising, Ministry of Information and Broadcasting, India Media Industry

 

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

जानिए, पारंपरिक मीडिया से कैसे आगे बढ़ी सरकारी विज्ञापनों की दुनिया

केंद्रीय संचार ब्यूरो सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के तहत काम करता है। इसकी जिम्मेदारी केंद्र सरकार के मंत्रालयों और विभागों की योजनाओं, नीतियों और कार्यक्रमों की जानकारी लोगों तक पहुंचाना है।

Vikas Saxena by
Published - Friday, 30 October, 2026
Last Modified:
Friday, 30 October, 2026
Media4510

सरकारी विज्ञापनों और प्रचार अभियानों का दायरा अब सिर्फ अखबारों, रेडियो और टेलीविजन तक सीमित नहीं है। केंद्र सरकार का केंद्रीय संचार ब्यूरो (CBC) प्रिंट मीडिया के साथ डिजिटल माध्यमों, वेबसाइटों और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स के जरिए भी सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों की जानकारी लोगों तक पहुंचाने का काम कर रहा है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट में CBC की गतिविधियों से जुड़े आंकड़े बताते हैं कि सरकारी प्रचार के लिए प्रिंट का बड़ा नेटवर्क अब भी मौजूद है, वहीं डिजिटल माध्यमों को भी इस व्यवस्था में जगह दी जा रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी विज्ञापनों के लिए CBC के पैनल में 7,432 प्रकाशन शामिल हैं। इसके अलावा, ब्यूरो की गतिविधियों में डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स, वेबसाइटों और डिजिटल नेटवर्क के साथ काम करना भी शामिल है। इससे पता चलता है कि सरकार अपने प्रचार अभियानों के लिए अलग-अलग माध्यमों का इस्तेमाल कर रही है।

हालांकि, रिपोर्ट में डिजिटल विज्ञापनों पर हुए कुल खर्च या पिछले वर्षों के मुकाबले इसमें कितनी बढ़ोतरी हुई है, इसका तुलनात्मक आंकड़ा नहीं दिया गया है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि सरकारी विज्ञापनों में डिजिटल माध्यमों का बजट या हिस्सा कितने प्रतिशत बढ़ गया है।

CBC के पैनल में 7,432 प्रकाशन

केंद्रीय संचार ब्यूरो सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के तहत काम करता है। इसकी जिम्मेदारी केंद्र सरकार के मंत्रालयों और विभागों की योजनाओं, नीतियों और कार्यक्रमों की जानकारी लोगों तक पहुंचाना है। इसके लिए CBC प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल, बाहरी प्रचार और दूसरे माध्यमों का इस्तेमाल करता है।

मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, CBC के पैनल में 7,432 प्रकाशन सूचीबद्ध हैं। यह आंकड़ा बताता है कि सरकारी विज्ञापन व्यवस्था में अखबारों और दूसरे प्रकाशनों का नेटवर्क अब भी काफी बड़ा है।

रिपोर्ट में करीब 100 अखिल भारतीय प्रिंट डिस्प्ले विज्ञापन जारी किए जाने का भी उल्लेख है। इससे साफ है कि प्रिंट मीडिया सरकारी प्रचार अभियानों का एक महत्वपूर्ण माध्यम बना हुआ है।

500 से ज्यादा अखबारों में जारी हुए 20 विज्ञापन

मंत्रालय की रिपोर्ट में सरकार के 11 साल पूरे होने के मौके पर चलाए गए प्रिंट विज्ञापन अभियान का भी जिक्र है। इस अभियान के तहत 500 से ज्यादा अखबारों में 20 विज्ञापन जारी किए गए।

इस तरह के अभियानों में अखबारों का इस्तेमाल देश के अलग-अलग हिस्सों के पाठकों तक सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों की जानकारी पहुंचाने के लिए किया जाता है। खासकर क्षेत्रीय और स्थानीय स्तर पर अखबारों की पहुंच को देखते हुए प्रिंट मीडिया की भूमिका बनी हुई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, डिजिटल इंडिया अभियान के लिए भी 11 भाषाओं में प्रिंट विज्ञापन जारी किए गए। इसका उद्देश्य अलग-अलग भाषा क्षेत्रों के लोगों तक अभियान का संदेश पहुंचाना था। यहां यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये 11 भाषाओं वाले विज्ञापन प्रिंट माध्यम से जुड़े हैं, डिजिटल विज्ञापनों से नहीं।

डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स और वेबसाइटों को भी जोड़ रहा CBC

CBC की गतिविधियों में डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स, वेबसाइटों और डिजिटल नेटवर्क का उल्लेख भी किया गया है। इसका मतलब है कि सरकारी प्रचार के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मौजूद दर्शकों और पाठकों तक पहुंच बनाने की कोशिश की जा रही है।

आज लोग मोबाइल फोन, वेबसाइटों और सोशल मीडिया के जरिए भी खबरें और दूसरी जानकारियां हासिल करते हैं। ऐसे में डिजिटल प्लेटफॉर्म सरकारी योजनाओं और अभियानों की जानकारी पहुंचाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन सकते हैं।

CBC की आधिकारिक वेबसाइट पर डिजिटल विज्ञापन सेवाओं के लिए मीडिया एजेंसियों के पैनल के विस्तार और वेबसाइटों के पैनल से जुड़े नोटिस भी जारी किए गए हैं। 2026 में डिजिटल विज्ञापन सेवाओं के लिए एजेंसियों के चयन और वेबसाइटों के पैनल के विस्तार से संबंधित गतिविधियां दर्ज हैं। इससे डिजिटल माध्यमों के लिए CBC की संस्थागत तैयारी और कामकाज का संकेत मिलता है।

हालांकि, डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स के जरिए कितने विज्ञापन जारी किए गए, कितने लोगों तक वे पहुंचे या इस पर कितना खर्च हुआ, इसका विस्तृत आंकड़ा उपलब्ध जानकारी में नहीं दिया गया है।

सोशल मीडिया पर भी सरकारी अभियानों की मौजूदगी

वार्षिक रिपोर्ट में जीएसटी से जुड़े विज्ञापन अभियानों के लिए सोशल मीडिया पोस्ट तैयार करने का भी उल्लेख है। इसके अलावा, वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ के मौके पर चार पुस्तिकाएं प्रकाशित करने की जानकारी दी गई है।

ये उदाहरण दिखाते हैं कि सरकारी प्रचार में अलग-अलग तरह के माध्यमों और सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है। जहां अखबारों में विज्ञापन और पुस्तिकाएं प्रिंट माध्यम का हिस्सा हैं, वहीं सोशल मीडिया पोस्ट डिजिटल माध्यमों के जरिए लोगों तक संदेश पहुंचाने का तरीका हैं।

डिजिटल विज्ञापनों का खर्च कितना बढ़ा?

डिजिटल माध्यमों की मौजूदगी बढ़ने के संकेत जरूर मिलते हैं, लेकिन सरकारी विज्ञापनों के कुल खर्च में डिजिटल की हिस्सेदारी कितनी है, यह जानने के लिए अलग-अलग माध्यमों पर हुए खर्च के आंकड़े जरूरी हैं।

मार्च 2026 में राज्यसभा में CBC के डिजिटल विज्ञापनों पर खर्च को लेकर सवाल पूछा गया था। इसके जवाब में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने बताया था कि सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों की जानकारी प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक, आउटडोर, डिजिटल और सोशल मीडिया सहित अलग-अलग माध्यमों से पहुंचाई जाती है। मंत्रालय ने यह भी कहा था कि विज्ञापन खर्च संबंधित मंत्रालयों और विभागों की जरूरत के मुताबिक किया जाता है। माध्यमवार खर्च का ब्योरा CBC की वेबसाइट पर उपलब्ध बताया गया था।

इस जवाब से यह तो स्पष्ट होता है कि सरकार कई माध्यमों के जरिए विज्ञापन जारी करती है, लेकिन इससे डिजिटल विज्ञापन खर्च में साल-दर-साल बढ़ोतरी का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

कुल मिलाकर, CBC की गतिविधियां बताती हैं कि सरकारी प्रचार व्यवस्था में प्रिंट मीडिया का बड़ा नेटवर्क अब भी कायम है और डिजिटल प्लेटफॉर्म को भी इसमें शामिल किया जा रहा है। 7,432 सूचीबद्ध प्रकाशनों से प्रिंट की पहुंच का अंदाजा मिलता है, जबकि वेबसाइटों, डिजिटल नेटवर्क और कंटेंट क्रिएटर्स से जुड़ी गतिविधियां प्रचार के बदलते तरीकों की ओर इशारा करती हैं। डिजिटल माध्यमों की वास्तविक हिस्सेदारी कितनी बढ़ी है, यह जानने के लिए खर्च और पहुंच के तुलनात्मक आंकड़ों का सामने आना जरूरी होगा। 

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

वॉकी-टॉकी के भ्रामक विज्ञापन को लेकर Hogar Technologies को 1 लाख का जुर्माना

वॉकी-टॉकी के विज्ञापनों में जरूरी नियामकीय जानकारी नहीं देने पर केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने Hogar Technologies and Innovations LLP पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।

Samachar4media Bureau by
Published - Monday, 26 October, 2026
Last Modified:
Monday, 26 October, 2026
CCPA6412

वॉकी-टॉकी के विज्ञापनों में जरूरी नियामकीय जानकारी नहीं देने पर केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने Hogar Technologies and Innovations LLP पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। कंपनी के विज्ञापनों में उपकरणों की ऑपरेटिंग फ्रीक्वेंसी, लाइसेंस की जरूरत और नियामकीय मंजूरी से जुड़ी जानकारी स्पष्ट रूप से नहीं दी गई थी।

उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, यह कार्रवाई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर वॉकी-टॉकी की भ्रामक जानकारी और नियमों का पालन नहीं करने वाली लिस्टिंग के खिलाफ चल रही व्यापक कार्रवाई का हिस्सा है।

16,970 से ज्यादा लिस्टिंग पर उठे सवाल

CCPA ने विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर 16,970 से ज्यादा ऐसी लिस्टिंग की पहचान की है, जिनमें जरूरी नियमों से जुड़ी जानकारी का अभाव था। इस मामले में प्राधिकरण ने अमेजन, फ्लिपकार्ट, मीशो, मेटा, जियोमार्ट, इंडियाMART और ट्रेडइंडिया समेत 13 ई-कॉमर्स कंपनियों को नोटिस जारी किए हैं।

अब तक प्राधिकरण 12 कंपनियों या संस्थाओं के खिलाफ अंतिम आदेश जारी कर चुका है। इन पर भ्रामक विज्ञापनों और अनुचित व्यापार व्यवहार के मामलों में कुल 58 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।

इनमें अमेजन, फ्लिपकार्ट, मीशो, मेटा और ट्रेडइंडिया पर 10-10 लाख रुपये का जुर्माना शामिल है। इसके अलावा सात अन्य संस्थाओं पर 1-1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।

कंपनी ने क्या दी सफाई?

कार्रवाई के दौरान Hogar Technologies ने कहा कि उसके पास जरूरी नियामकीय मंजूरियां हैं और उसकी वेबसाइट का मुख्य उद्देश्य सीधे ऑनलाइन बिक्री करने के बजाय उत्पादों की जानकारी देना है।

हालांकि, CCPA ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। प्राधिकरण का कहना है कि जरूरी मंजूरी होने के बावजूद कंपनियों की जिम्मेदारी है कि वे खरीदारी से पहले उपभोक्ताओं को उत्पाद से जुड़ी पूरी और स्पष्ट जानकारी दें।

प्राधिकरण के मुताबिक, यदि वॉकी-टॉकी की फ्रीक्वेंसी और लाइसेंस संबंधी शर्तों की जानकारी नहीं दी जाती, तो ग्राहक यह मान सकते हैं कि वे जरूरी अनुमति के बिना भी उस उपकरण का कानूनी रूप से इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे वे कानूनी परेशानी में पड़ सकते हैं।

वॉकी-टॉकी के इस्तेमाल के लिए क्या हैं नियम?

मंत्रालय के मुताबिक, निर्धारित शर्तों के अधीन 446.0 से 446.2 मेगाहर्ट्ज फ्रीक्वेंसी रेंज में काम करने वाले व्यक्तिगत मोबाइल रेडियो उपकरणों को लाइसेंस से छूट है। लेकिन इस रेंज से बाहर काम करने वाले उपकरणों पर संबंधित नियामकीय नियम लागू होते हैं।

मंत्रालय ने यह भी बताया कि अमेजन, फ्लिपकार्ट, मेटा और ट्रेडइंडिया जैसी कुछ कंपनियों ने CCPA के जुर्माने के आदेशों को न्यायिक मंचों पर चुनौती दी है।

CCPA ने दोहराया है कि वॉकी-टॉकी के विज्ञापनों और ऑनलाइन लिस्टिंग में ऑपरेटिंग फ्रीक्वेंसी, लाइसेंस की जरूरत और अन्य नियामकीय जानकारी स्पष्ट रूप से दी जानी चाहिए, ताकि उपभोक्ता सही जानकारी के आधार पर फैसला ले सकें।

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

AAAI: नॉर्थ इंडिया चैप्टर के चेयरमैन बने कुणाल ललानी, संतोष कुमार को को-चेयर की जिम्मेदारी

एएएआई के इस नवगठित चैप्टर का उद्देश्य उत्तर भारत में विज्ञापन इंडस्ट्री से जुड़े लोगों और संस्थानों के बीच क्षेत्रीय जुड़ाव बढ़ाना तथा स्थानीय नेतृत्व को मजबूत करना है।

Samachar4media Bureau by
Published - Saturday, 24 October, 2026
Last Modified:
Saturday, 24 October, 2026
AAAI...

भारतीय विज्ञापन उद्योग के प्रमुख संगठन ‘एडवरटाइजिंग एजेंसीज एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ (AAAI) ने अपने नए नॉर्थ इंडिया चैप्टर की जिम्मेदारी कुणाल ललानी और संतोष कुमार को सौंपी है। द क्रेयॉन्स नेटवर्क के मैनेजिंग डायरेक्टर कुणाल ललानी को चैप्टर का चेयरमैन बनाया गया है, जबकि इनोशन वर्ल्डवाइड कम्युनिकेशंस के सीओओ संतोष कुमार को को-चेयर नियुक्त किया गया है।

एएएआई के इस नवगठित चैप्टर का उद्देश्य उत्तर भारत में विज्ञापन इंडस्ट्री से जुड़े लोगों और संस्थानों के बीच क्षेत्रीय जुड़ाव बढ़ाना तथा स्थानीय नेतृत्व को मजबूत करना है। एएएआई के अध्यक्ष डॉ. संदीप गोयल ने इस पहल को क्षेत्रीय स्तर पर जुड़ाव बढ़ाने और स्थानीय नेतृत्व को सशक्त बनाने की संगठन की प्रतिबद्धता से जोड़ा है। उन्होंने कहा कि कुणाल ललानी की रणनीतिक सोच और संतोष कुमार की डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन से जुड़ी विशेषज्ञता के साथ यह चैप्टर क्षेत्र में आपसी सहयोग, इनोवेशन और पेशेवर विकास को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

चेयरमैन की जिम्मेदारी मिलने पर कुणाल ललानी ने कहा कि नॉर्थ इंडिया चैप्टर का नेतृत्व करना उनके लिए सम्मान की बात है। उनके मुताबिक, इस मंच के जरिए विज्ञापन एजेंसियों को सीखने, आपस में सहयोग करने और नवाचार को बढ़ावा देने के अवसर उपलब्ध कराने पर ध्यान दिया जाएगा।

उन्होंने उत्तर भारत के विज्ञापन बाजार की विशिष्ट परिस्थितियों को ध्यान में रखकर काम करने की जरूरत पर भी जोर दिया। ललानी ने कहा कि उत्तर भारत में कई सक्रिय विज्ञापनदाता और विज्ञापन एजेंसियां हैं। ऐसे में इस चैप्टर के माध्यम से एजेंसी लीडर्स को एक साथ लाने, क्षेत्रीय प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने और क्षेत्र के अनुभवों को राष्ट्रीय उद्योग मानकों को आकार देने में योगदान देने का प्रयास किया जाएगा।

वहीं, चैप्टर के को-चेयर संतोष कुमार ने कहा कि वह कुणाल ललानी और विज्ञापन उद्योग के साथ मिलकर उत्तर भारत में एजेंसियों के लिए एक जीवंत इकोसिस्टम विकसित करने की दिशा में काम करने को लेकर उत्साहित हैं। उन्होंने बताया कि इस पहल के तहत ऐसे कार्यक्रमों पर ध्यान दिया जाएगा, जो प्रतिभाओं के विकास, रचनात्मकता और कारोबारी वृद्धि को मजबूती दें।

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

Crayons Advertising ने एम्प्लॉयीज को दिए 80,000 ESOP, शेयर खरीदने का मिलेगा मौका

क्रेयॉन्स ऐडवर्टाइजिंग लिमिटेड (Crayons Advertising Limited) ने अपने एम्प्लॉयीज को प्रोत्साहित करने के लिए 80,000 एम्प्लॉयी स्टॉक ऑप्शन प्लान (ESOP) देने की मंजूरी दी है।

Vikas Saxena by
Published - Friday, 23 October, 2026
Last Modified:
Friday, 23 October, 2026
Crayons8745

क्रेयॉन्स ऐडवर्टाइजिंग लिमिटेड (Crayons Advertising Limited) ने अपने एम्प्लॉयीज को प्रोत्साहित करने के लिए 80,000 एम्प्लॉयी स्टॉक ऑप्शन प्लान (ESOP) देने की मंजूरी दी है। कंपनी की नामांकन और पारिश्रमिक समिति (Nomination and Remuneration Committee) ने 22 अक्टूबर, 2026 को हुई बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी।

कंपनी ने यह विकल्प Crayons Advertising Limited Employee Stock Option Scheme–2025 के तहत पात्र एम्प्लॉयीज को दिए हैं। प्रत्येक विकल्प के बदले कंपनी का एक इक्विटी शेयर हासिल किया जा सकेगा, जिसका अंकित मूल्य 10 रुपये है।

4 साल तक में मिल सकेंगे शेयर

कंपनी की योजना के तहत विकल्पों पर अधिकार मिलने की अवधि (Vesting Period) अनुदान की तारीख से एक साल बाद शुरू होगी और समिति के फैसले के अनुसार अधिकतम चार साल तक चल सकती है। विकल्पों पर अधिकार मिलने के बाद कर्मचारी संबंधित विकल्पों का इस्तेमाल कर सकेंगे। इसके लिए उन्हें तय कीमत, लागू कर और अन्य शुल्क, यदि कोई हों, का भुगतान करना होगा।

कंपनी के मुताबिक, विकल्पों पर अधिकार मिलने के बाद कर्मचारी उनका इस्तेमाल संबंधित अवधि से अधिकतम दो साल के भीतर कर सकेंगे।

शेयर की कीमत कैसे तय होगी?

एम्प्लॉयीज को शेयर खरीदने के लिए कितनी कीमत चुकानी होगी, यह योजना के तहत समिति तय करेगी। यह कीमत बाजार भाव से जुड़ी होगी। समिति इसमें उचित छूट भी दे सकती है, लेकिन शेयर खरीदने की कीमत किसी भी स्थिति में कंपनी के शेयर के 10 रुपये के अंकित मूल्य से कम नहीं होगी।

यह योजना पात्र एम्प्लॉयीज को नए शेयर जारी करके लागू की जाएगी। इसके तहत सभी 80,000 विकल्पों पर अधिकार मिलने और उनका इस्तेमाल किए जाने की स्थिति में कंपनी के 10 रुपये अंकित मूल्य वाले 80,000 इक्विटी शेयर जारी हो सकते हैं। 

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

AAAI ने बनाई पहली क्रिएटिव काउंसिल, जोसी पॉल को सौंपी कमान

इस पहल का उद्देश्य भारतीय विज्ञापन जगत में रचनात्मकता को बढ़ावा देना और नई प्रतिभाओं, स्वतंत्र एजेंसियों व क्षेत्रीय प्रतिभाओं को आगे बढ़ने के अवसर देना है।

Samachar4media Bureau by
Published - Monday, 19 October, 2026
Last Modified:
Monday, 19 October, 2026
Josy Paul

देश में विज्ञापन एजेंसियों के राष्ट्रीय संगठन द एडवरटाइजिंग एजेंसीज एसोसिएशन ऑफ इंडिया (AAAI) ने अपनी पहली क्रिएटिव काउंसिल का गठन किया है। संगठन ने यह पहल अपने नए 2026-27 एजेंडे के तहत की है। इस काउंसिल का नेतृत्व बीबीडीओ ग्रुप इंडिया के चेयरमैन और ग्रुप चीफ क्रिएटिव ऑफिसर जोसी पॉल करेंगे। इस पहल के जरिए भारतीय विज्ञापन जगत में रचनात्मकता के स्तर को बेहतर बनाने और विज्ञापन उद्योग को मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा।

AAAI के मुताबिक, इस काउंसिल का उद्देश्य रचनात्मक क्षेत्र से जुड़ी अलग-अलग आवाजों को एक मंच पर लाना है। इसमें स्वतंत्र विज्ञापन एजेंसियों, क्षेत्रीय प्रतिभाओं और उभरते पेशेवरों को भी शामिल होने के अवसर मिलेंगे। काउंसिल के माध्यम से आपसी सहयोग, नए प्रयोग, मार्गदर्शन और विभिन्न क्षेत्रों व पीढ़ियों के बीच विचारों के आदान-प्रदान को बढ़ावा दिया जाएगा।

इस पहल पर जोसी पॉल ने कहा कि क्रिएटिव काउंसिल प्रतिभाओं को निखारने, विविधता का सम्मान करने और नए विचारों को आगे बढ़ाने का अवसर है। उनकी योजना अलग-अलग पीढ़ियों के बीच संवाद, प्रयोग, बहस, प्रदर्शन, वाचन और फिल्मों की स्क्रीनिंग जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देने की है।

इसके साथ ही विज्ञापन जगत से बाहर के लोगों को भी इस पहल से जोड़ा जाएगा। इनमें कलाकार, वैज्ञानिक, फिल्म निर्माता, डिजाइनर, उद्यमी और विचारक शामिल होंगे, जो रचनात्मक समुदाय के सामने नए नजरिए रख सकेंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि रचनात्मकता के माध्यम से उद्योग को एकजुट करने और आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

गौरतलब है कि जोसी पॉल के काम को 25 से अधिक कान्स लायंस पुरस्कार मिल चुके हैं, जिनमें ग्रां प्री और कई गोल्ड पुरस्कार शामिल हैं। एरियल का ‘शेयर द लोड’ अभियान लगातार दो बार वॉर्क (WARC) की ओर से दुनिया का सबसे प्रभावी अभियान घोषित किया गया था। यह अभियान लंबे समय तक ब्रैंड निर्माण और प्रभावशीलता के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उदाहरण बना हुआ है।

इस बारे में AAAI के नवनिर्वाचित अध्यक्ष डॉ. संदीप गोयल ने कहा कि संगठन के इतिहास में पहली बार रचनात्मकता को उसके संस्थागत ढांचे में सबसे प्रमुख स्थान दिया जा रहा है। उनके मुताबिक, जोसी पॉल के नेतृत्व में क्रिएटिव काउंसिल अगली पीढ़ी की प्रतिभाओं को मार्गदर्शन देने और भारत की स्वतंत्र व क्षेत्रीय विज्ञापन एजेंसियों की विविधता को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि विज्ञापन इंडस्ट्री ऐसे नए दौर में प्रवेश कर रही है, जहां स्ट्रैटेजिक इनोवेशन और रचनात्मक उत्कृष्टता को साथ लेकर आगे बढ़ा जाएगा।

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

त्योहारों में विज्ञापनों पर करोड़ों का दांव: डिजिटल क्यों बना ब्रैंड्स की पहली पसंद?

भारत में त्योहारी सीजन अब सिर्फ खरीदारी का मौसम नहीं रहा। यह विज्ञापन उद्योग का सबसे बड़ा इम्तिहान भी बन गया है। इस बार ब्रैंड्स भारी रकम लगाने की तैयारी में हैं, लेकिन पैसा लगाने का तरीका बदल गया है।

Vikas Saxena by
Published - Saturday, 17 October, 2026
Last Modified:
Saturday, 17 October, 2026
festivseason5498

भारत में त्योहारी सीजन अब सिर्फ खरीदारी का मौसम नहीं रहा। यह विज्ञापन उद्योग का सबसे बड़ा इम्तिहान भी बन गया है। इस बार ब्रैंड्स भारी रकम लगाने की तैयारी में हैं, लेकिन पैसा लगाने का तरीका बदल गया है। टीवी की जगह स्क्रीन, ऐप और क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म ले रहे हैं।

कितना बड़ा है बाजार

डेटम इंटेलिजेंस के अनुसार 2026 में भारत का त्योहारी विज्ञापन खर्च ₹60,000–62,000 करोड़ रहने का अनुमान है, जबकि 2025 में यह लगभग ₹53,000 करोड़ था। यानी बढ़त 13 से 17 प्रतिशत है। यह रकम देश के कुल विज्ञापन खर्च का 34–35% है। साल के विज्ञापन बजट का करीब एक तिहाई हिस्सा कुछ हफ्तों में सिमट जाता है। l 

ये पूर्वानुमान हैं, अंतिम खर्च नहीं। एक्सचेंज4मीडिया ने 12 अक्टूबर की रिपोर्ट में लिखा कि ये अनुमान हाल के शेयर बाजार की गिरावट, RBI की सख्ती और कमजोर मानसून से पहले के हैं। 

टीवी, प्रिंट और डिजिटल की हिस्सेदारी

डेटम के पूर्वानुमान में डिजिटल की हिस्सेदारी 67.8% है। उसके बाद टेलीविजन 16.1% और प्रिंट 10.7% पर हैं। बाकी करीब 5.4% में आउटडोर, रेडियो और अन्य माध्यम आते हैं। स्टोरीबोर्ड18, के मुताबिक डिजिटल के हिस्से में ₹40,680–42,036 करोड़ आते हैं। इसी आधार पर बाकी माध्यमों का मोटा अनुमान यह बनता है।

  • डिजिटल: ₹40,680–42,036 करोड़
  • टेलीविजन: लगभग ₹9,660–9,980 करोड़
  • प्रिंट: लगभग ₹6,420–6,630 करोड़
  • अन्य: लगभग ₹3,240–3,350 करोड़

हर तीन रुपये में से करीब दो अब डिजिटल पर जा रहे हैं। टीवी और प्रिंट मिलाकर लगभग 27% पर हैं।

टीवी पर दबाव

TAM AdEx के 1 जुलाई से 28 सितंबर 2026 के आंकड़ों में टीवी विज्ञापन गतिविधि का सूचकांक 91.4 रहा, यानी पिछले साल से 8.6% कम। प्रिंट 94.7 पर रहा, रेडियो 101.1 पर लगभग स्थिर और डिजिटल 124.5 पर, यानी 24.5% ऊपर। ध्यान रहे कि यह अवधि पूरी तरह त्योहारी नहीं है। साथ ही TAM AdEx गतिविधि मापता है, भुगतान की गई दरें या चैनलों की आय नहीं। इसलिए 8.6% की गिरावट को सीधे राजस्व में उतनी ही कमी नहीं माना जा सकता। 

गिरावट की एक वजह रेटिंग व्यवस्था का ठप होना भी है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के निर्देश पर BARC ने 2 जुलाई से रेटिंग निलंबित कर रखी है। ताजा दर्शक-आंकड़ों के बिना प्रसारकों के लिए प्रीमियम दरें सही ठहराना मुश्किल है, और विज्ञापनदाता ऊंचे दाम देने से हिचक रहे हैं।  

इसी रिपोर्ट में बदलते रुझान भी दिखते हैं। टीवी पर खाद्य एवं पेय श्रेणी की हिस्सेदारी 20% से बढ़कर 22.7% हुई, जबकि रेकिट और हिंदुस्तान यूनिलीवर का संयुक्त हिस्सा 28.1% से घटकर 25.5% रह गया। प्रिंट में बैंकिंग, फाइनेंस और निवेश 13.8% से बढ़कर 18.4% के साथ पहले नंबर पर आ गया, जबकि ऑटोमोबाइल 16.7% से घटकर 13.2% पर रहा। डिजिटल में सेवा क्षेत्र का हिस्सा 42.4% से बढ़कर 44% हुआ। 

ब्रैंड्स के बजट में बदलाव

सबसे बड़ा बदलाव खरीद के बिंदु के पास विज्ञापन देने की होड़ है। डेटम के अनुसार त्योहारी कॉमर्स और रिटेल मीडिया पर खर्च लगभग ₹11,500 करोड़ रहने का अनुमान है, जो पिछले साल से 27% ज्यादा है। यह कुल त्योहारी खर्च का करीब 19% बैठता है। 

क्विक कॉमर्स सबसे तेज है। इन प्लेटफॉर्म पर त्योहारी विज्ञापन खर्च ₹2,200 करोड़ का अनुमान है, यानी 50% की बढ़त, और यह कॉमर्स व रिटेल मीडिया पूल का लगभग पांचवां हिस्सा है। डेटम की रिपोर्ट के अनुसार 35% ऑनलाइन रिटेल खरीदार उत्पाद क्विक कॉमर्स ऐप पर खोजते हैं। बिजनेस स्टैंडर्ड के मुताबिक FMCG, ब्यूटी और गिफ्टिंग श्रेणियां क्विक कॉमर्स के त्योहारी विज्ञापन का 70% तक हैं।   

इसके दो पहलू खटकते हैं। पहला, महंगाई: डेटम के हवाले से छपी रिपोर्टों के मुताबिक क्विक कॉमर्स पर त्योहारी विज्ञापन दरें 30–40% बढ़ी हैं। दूसरा, बड़ा फायदा: डेटम के संस्थापक के हवाले से रिपोर्टों में कहा गया है कि क्विक कॉमर्स के 80% कारोबार पर करीब 20% ब्रैंड्स का कब्जा है। 

खर्च बढ़ने के कारण

पहला, खरीद से सीधा जुड़ाव। मीडिया विशेषज्ञ हेमा मलिक के मुताबिक विज्ञापन देखने और खरीदने के बीच का फासला सिकुड़ रहा है, इसलिए कॉमर्स मीडिया का महत्व बढ़ रहा है। दूसरा, नतीजे नापने की सुविधा: डिजिटल में अभियान के दौरान ही प्रदर्शन दिखता है, इसलिए ब्रैंड्स ROAS (विज्ञापन खर्च पर कमाई) पर जोर दे रहे हैं। तीसरा, टीवी की मापन-समस्या। चौथा, त्योहार पर निर्भरता: जब साल का एक तिहाई विज्ञापन इसी मौसम में होता है, तो हर ब्रैंड ज्यादा दृश्यता चाहता है।  

सतर्कता का दौर

तस्वीर पूरी तरह गुलाबी नहीं है। RBI ने रेपो रेट 25 आधार अंक बढ़ाकर 5.50% किया है और रुख 'न्यूट्रल' से 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' की ओर मोड़ा है। मौसम विभाग के अनुसार मानसून की बारिश दीर्घकालिक औसत की करीब 87% रही, यानी लगभग 13% की कमी। गोल्डमेडल इलेक्ट्रिकल्स के किशन जैन ने अगस्त 2026 में ग्रामीण महंगाई 5.23% बताई। 

वेंचुरा सिक्योरिटीज के अनुमान से बड़े पैक 5–6% महंगे हो सकते हैं, जबकि छोटे पैक में मात्रा 2–7% घट सकती है। पारले विज्ञापन खर्च में कुछ कटौती की बात कर रही है, जबकि गोल्डमेडल ने अपना त्योहारी बजट पिछले साल जितना ही रखा है। एजेंसी जगत का अनुमान है कि बड़ी कटौती के बजाय अतिरिक्त निवेश पर चयनशीलता दिखेगी। प्राथमिकता परफॉर्मेंस-आधारित डिजिटल, रिटेल मीडिया और क्षेत्रीय टारगेटिंग को मिलेगी, जबकि टीवी और आउटडोर पहुंच के लिए रहेंगे। 

अनुमानों में मतभेद भी हैं। डेटम 13–17% बढ़त बता रहा है, जबकि हेमा मलिक त्योहारी खर्च में सिंगल-डिजिट के ऊंचे स्तर की बढ़त देखती हैं। पब्लिसिस मीडिया साउथ एशिया के सीईओ भी 2026 में कुल विज्ञापन खर्च में उच्च एकल अंक की वृद्धि देखते हैं। दोनों बातें साथ सही हो सकती हैं, क्योंकि पूरे साल की बढ़त और सिर्फ त्योहारी सीजन की बढ़त अलग आंकड़े हैं। 

डिजिटल का जोखिम

मफिल्टरआईटी के सीटीओ धीरज गुप्ता का अनुमान है कि बच्चों के कंटेंट पर विज्ञापन दिखने से होने वाली बर्बादी सामान्य दिनों के 4–5% से बढ़कर त्योहारों में 10–12% हो सकती है। उनके मुताबिक YouTube पर हर हजार इम्प्रेशन की लागत ₹100–150 से बढ़कर ₹150–200 तक जा सकती है। स्टोरीबोर्ड18 की गणना में पूरे डिजिटल हिस्से पर यह दर लगाने से ₹4,068–5,044 करोड़ दांव पर बैठते हैं। यह अधिकतम जोखिम का आकलन है, पक्की बर्बादी नहीं।  

त्योहारी विज्ञापन बाजार ₹60,000–62,000 करोड़ तक पहुंचने की राह पर है, जो पिछले साल के करीब ₹53,000 करोड़ से बड़ा है। इसका लगभग 68% डिजिटल के पास जा रहा है, जबकि टीवी की गतिविधि 2025 की तुलना में 8.6% घटी और डिजिटल की 24.5% बढ़ी। ब्रैंड्स अब सिर्फ पहुंच नहीं, बिक्री और नतीजे खरीद रहे हैं, इसीलिए रिटेल मीडिया और क्विक कॉमर्स सबसे तेज बढ़ रहे हैं। असली परीक्षा आगे है। कमजोर मानसून, महंगा कर्ज और लागत का दबाव मांग को कमजोर करें, तो ब्रैंड्स और चुन-चुनकर खर्च करेंगे।

 

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

AAAI ने बनाई नई मीडिया काउंसिल, कार्तिक शर्मा को सौंपी कमान

इस पहल का उद्देश्य मीडिया क्षेत्र से जुड़ी विशेषज्ञता और भागीदारी को बढ़ाना तथा इंडस्ट्री के भविष्य से जुड़े फैसलों में सदस्य एजेंसियों की आवाज को मजबूत करना है।

Samachar4media Bureau by
Published - Thursday, 15 October, 2026
Last Modified:
Thursday, 15 October, 2026
Kartik

देश में विज्ञापन एजेंसियों का प्रतिनिधित्व करने वाला राष्ट्रीय संगठन एडवर्टाइजिंग एजेंसिज एसोसिएशन ऑफ इंडिया (AAAI) ने वर्ष 2026-27 के अपने एजेंडे के तहत मीडिया काउंसिल बनाने की घोषणा की है। इस काउंसिल की अध्यक्षता ओम्निकॉम मीडिया इंडिया के कार्तिक शर्मा करेंगे। इस पहल का उद्देश्य मीडिया क्षेत्र से जुड़ी विशेषज्ञता और भागीदारी को बढ़ाना तथा इंडस्ट्री के भविष्य से जुड़े फैसलों में सदस्य एजेंसियों की आवाज को मजबूत करना है।

नई मीडिया काउंसिल बड़े मीडिया नेटवर्क, स्वतंत्र एजेंसियों और क्षेत्रीय कारोबार से जुड़ी एजेंसियों को एक साझा मंच उपलब्ध कराएगी। इस मंच पर मीडिया कारोबार से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी। काउंसिल की प्राथमिकताओं में ऑडियंस रिसर्च और मेजरमेंट, पारदर्शिता और जवाबदेही, मीडिया ट्रेडिंग के बदलते तौर-तरीके, प्रतिभाओं का विकास और मीडिया प्लानिंग व बाइंग पर तकनीक के प्रभाव जैसे विषय शामिल हैं।

काउंसिल विज्ञापनदाताओं, मीडिया मालिकों, रिसर्च संस्थानों और इंडस्ट्री के अन्य हितधारकों के साथ रचनात्मक संवाद को बढ़ावा देने की दिशा में भी काम करेगी। इसके अलावा, बदलते ऑडियंस व्यवहार, नए मीडिया प्लेटफॉर्म और क्लाइंट्स की बदलती अपेक्षाओं के अनुरूप एजेंसियों को तैयार करने के लिए ज्ञान और अनुभव साझा करने पर जोर दिया जाएगा।

CTV और क्रॉस-स्क्रीन मेजरमेंट पर भी होगा काम: AAAI मीडिया काउंसिल के अध्यक्ष कार्तिक शर्मा ने नई बोर्ड टीम को बधाई देते हुए कहा कि अनुभवी लोगों, उद्यमशील सोच और विविध नजरियों का एक साथ आना उत्साहजनक है। उन्होंने काउंसिल का नेतृत्व करने का अवसर देने के लिए AAAI का आभार जताया और कहा कि वह अगली पीढ़ी के नेताओं के साथ काम करने के लिए उत्सुक हैं। उनके मुताबिक, इन नेताओं के नए विचार और महत्वाकांक्षा काउंसिल के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने और भारतीय विज्ञापन जगत के लिए अधिक मजबूत व भविष्य के अनुरूप मीडिया इकोसिस्टम तैयार करने में अहम होंगे।

कार्तिक शर्मा ने बताया कि काउंसिल का फोकस भारत में स्थानीय और वैश्विक ज्ञान साझेदारियों के माध्यम से विश्वस्तरीय लर्निंग सिस्टम उपलब्ध कराने, इंडस्ट्री के स्तर पर सहयोग और विचारों के आदान-प्रदान के लिए एक प्रमुख वार्षिक मंच तैयार करने तथा नए विषयों पर विचार और व्यावहारिक गाइडलाइन विकसित करने पर रहेगा। इन विषयों में कनेक्टेड टीवी (CTV) और क्रॉस-स्क्रीन मेजरमेंट भी शामिल हैं।

गौरतलब है कि कार्तिक शर्मा ओम्निकॉम मीडिया इंडिया के सीईओ हैं। यह कंपनी ओम्निकॉम ग्रुप का हिस्सा है। उन्हें मीडिया रणनीति, कम्युनिकेशन प्लानिंग, बिहेवियरल इकोनॉमिक्स, एनालिटिक्स और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में 30 साल से अधिक का अनुभव है। कारोबार की वृद्धि को आगे बढ़ाने और मीडिया इंडस्ट्री के विकास में योगदान देने का भी उनका अनुभव है।

वह AAAI के बोर्ड और BARC की डिसिप्लिनरी कमेटी में भी शामिल हैं। इसके अलावा, वह मीडिया रिसर्च यूजर्स काउंसिल इंडिया (MRUCI) के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सदस्य हैं। इससे पहले वह TAM मीडिया रिसर्च और इंडियन रीडरशिप सर्वे में अहम पदों पर काम कर चुके हैं। उन्हें वर्ष 2026 में IAA मीडिया इन्फ्लुएंसर ऑफ द ईयर और 2025 में e4m इन्फ्लुएंसर ऑफ द ईयर के सम्मान से नवाजा गया है।

इंडस्ट्री के विचार-विमर्श और सीखने का मंच बनेगी काउंसिल: संदीप गोयल

वर्ष 2026-27 के लिए AAAI के अध्यक्ष डॉ. संदीप गोयल ने नई मीडिया काउंसिल को लेकर कहा कि यह इंडस्ट्री का ऐसा साझा मंच और सीखने का केंद्र बने, जहां विज्ञापन जगत के मीडिया विशेषज्ञ नए विचारों पर चर्चा करें, पुराने तौर-तरीकों को चुनौती दें और अपने अनुभवों से मिली सीख अगली पीढ़ी के स्टोरीटेलर्स और ब्रैंड निर्माण से जुड़े लोगों तक पहुंचाएं।

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

डॉ. संदीप गोयल की अध्यक्षता में AAAI का नया बोर्ड घोषित, कई प्रमुख नाम शामिल

भारतीय विज्ञापन उद्योग को साथ लाने की तैयारी, AAAI के नए बोर्ड में स्वतंत्र एजेंसियों, क्षेत्रीय कारोबार और बड़ी विज्ञापन कंपनियों को जगह

Samachar4media Bureau by
Published - Wednesday, 14 October, 2026
Last Modified:
Wednesday, 14 October, 2026
aaai

भारतीय विज्ञापन उद्योग के प्रमुख संगठन ‘एडवरटाइजिंग एजेंसीज एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ (AAAI) ने वर्ष 2026-27 के लिए अपने नए बोर्ड की घोषणा की है। रेडिफ्यूजन ब्रैंड सॉल्यूशंस के डॉ. संदीप गोयल AAAI के अध्यक्ष और अनदर आइडिया के जयदीप गांधी इसके उपाध्यक्ष हैं। नए बोर्ड में अलग-अलग आकार की एजेंसियों, विशेषज्ञता वाले कारोबारों और विभिन्न क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व शामिल है। संगठन का उद्देश्य उद्योग के विभिन्न वर्गों को प्रतिनिधित्व देना और उनके बीच सहयोग को मजबूत करना है।

स्वतंत्र और क्षेत्रीय एजेंसियों को प्रतिनिधित्व: इस वर्ष स्वतंत्र एजेंसियों की ओर से बोर्ड में रतन बत्रा प्राइवेट लिमिटेड के पुनीत बत्रा, पैम एडवरटाइजिंग के सुनील छाबड़ा, 3 ब्रदर्स एंड फिल्स के हेमेंद्र पारेख, नवनीतलाल एंड कंपनी के देवांग एम. गांधी और सिचुएशंस एडवरटाइजिंग एंड मार्केटिंग के अंजन चटर्जी शामिल हैं। क्षेत्रीय विज्ञापन कारोबारों का प्रतिनिधित्व स्टैंडर्ड पब्लिसिटी की प्रियंका चटर्जी, स्लोका एडवरटाइजिंग के के. श्रीनिवास, मैत्री एडवरटाइजिंग के सी. मुथु और क्रेयॉन्स एडवरटाइजिंग के कुनाल ललानी करेंगे।

बोर्ड में सहयोजित सदस्य के रूप में शामिल अंजन चटर्जी ने विज्ञापन क्षेत्र में अपने करियर के साथ ओह! कलकत्ता और मेनलैंड चाइना जैसे रेस्तरां ब्रैंड भी विकसित किए हैं। उनका अनुभव उद्यमिता, ब्रैंड निर्माण और उपभोक्ता अनुभव से जुड़े पहलुओं को बोर्ड के काम में शामिल करेगा।

रचनात्मकता, रणनीति और मीडिया विशेषज्ञता पर जोर: नए बोर्ड में बीबीडीओ इंडिया के जोसी पॉल और ऑर्चर्ड एडवरटाइजिंग के अमितेश राव भी शामिल हैं। दोनों विज्ञापन क्षेत्र के अनुभवी नाम हैं और अपनी रचनात्मक एवं रणनीतिक विशेषज्ञता से बोर्ड के काम में योगदान देंगे। वहीं, लियो बर्नेट के ललातेंदु दास मीडिया क्षेत्र की विशेषज्ञता को मजबूत करेंगे।

बोर्ड में निरंतरता और संस्थागत अनुभव को भी महत्व दिया गया है। इस क्रम में आर. के. स्वामी के श्रीनिवासन के. स्वामी, मैडिसन कम्युनिकेशंस के सैम बलसारा, डब्ल्यूपीपी मीडिया के प्रशांत कुमार, मैट्रिक्स पब्लिसिटीज एंड मीडिया इंडिया के विष्णुदास हरदासानी, एफसीबी उल्का एडवरटाइजिंग के धीरज सिन्हा, ओगिल्वी एंड माथर की हेफ्जीबा पाठक, इनोशन वर्ल्डवाइड कम्युनिकेशन के संतोष कुमार, एवरेस्ट ब्रैंड सॉल्यूशंस की तान्या गोयल, प्लेटिनम एडवरटाइजिंग के अजीत वर्गीज, ओम्निकॉम मीडिया के कार्तिक शर्मा, हवास मीडिया के मोहित जोशी और पब्लिसिस कम्युनिकेशंस की अनुप्रिया आचार्य संगठन के साथ अपना जुड़ाव जारी रखेंगे। इसके अलावा, शशि सिन्हा और विक्रम सखूजा विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में संगठन के काम में अपना अनुभव और विचार साझा करेंगे।

प्रमुख विज्ञापन और मीडिया नेटवर्क भी बोर्ड में शामिल: AAAI के नए बोर्ड में ओगिल्वी, रेडिफ्यूजन, इनोशन और साची एंड साची जैसी प्रमुख पूर्ण-सेवा विज्ञापन एजेंसियों का प्रतिनिधित्व बना रहेगा। वहीं, डब्ल्यूपीपी मीडिया, ओम्निकॉम मीडिया, हवास मीडिया, पब्लिसिस मीडिया और मैडिसन जैसे बड़े मीडिया कारोबारों की विशेषज्ञता भी बोर्ड को मिलेगी।

क्रिएटिविटी, मीडिया और एआई-टेक्नोलॉजी पर नई पहल की तैयारी: AAAI के अध्यक्ष डॉ. संदीप गोयल ने नए बोर्ड को लेकर कहा कि इसमें स्थापित इंडस्ट्री लीडर्स के अनुभव, स्वतंत्र उद्यमियों की ऊर्जा और विज्ञापन क्षेत्र की प्रतिभाओं को एक साथ लाया गया है। उन्होंने कहा कि संगठन की कोशिश है कि भारतीय विज्ञापन उद्योग की विविधता को बोर्ड में सही प्रतिनिधित्व मिले और स्वतंत्र एजेंसियों को अपनी बात रखने तथा भागीदारी बढ़ाने के अधिक अवसर मिलें।

डॉ. गोयल के मुताबिक, संगठन आने वाले सप्ताह में रचनात्मकता, मीडिया, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और टेक्नोलॉजी से जुड़ी कुछ नई पहलों की घोषणा करेगा। इन पहलों में स्वतंत्र एजेंसियों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। संगठन के अनुसार, बोर्ड में व्यापक प्रतिनिधित्व का उद्देश्य उद्योग के भीतर सहयोग को मजबूत करना है। साथ ही, प्रतिभाओं के विकास, कारोबार की वृद्धि और तकनीकी बदलावों से पैदा होने वाले अवसरों पर AAAI के काम को दिशा देना भी इसका हिस्सा है।

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

त्योहारों में स्थानीय रंग: क्षेत्रीय पर्व बने विज्ञापन जगत का नया बड़ा दांव

ब्रैंड अब हर राज्य की भाषा, परंपरा और भावना के हिसाब से अलग योजना बना रहे हैं। साथ ही अर्थव्यवस्था की ताजा चुनौतियों ने सीजन पर अनिश्चितता भी डाल दी है।

Vikas Saxena by
Published - Tuesday, 13 October, 2026
Last Modified:
Tuesday, 13 October, 2026
Marketing541

दिवाली को भारत का सबसे बड़ा विज्ञापन मौसम माना जाता रहा है। पर इस साल की कहानी कुछ और बता रही है। ओणम बीत चुका है, नवरात्र चल रहा है, और दुर्गा पूजा व दिवाली आने वाली हैं। ब्रैंड अब हर राज्य की भाषा, परंपरा और भावना के हिसाब से अलग योजना बना रहे हैं। साथ ही अर्थव्यवस्था की ताजा चुनौतियों ने सीजन पर अनिश्चितता भी डाल दी है।

मार्केट का आकार: अनुमान अलग-अलग

पिच मैडिसन ऐडवर्टाइजिंग रिपोर्ट 2026 के मुताबिक भारत का विज्ञापन खर्च 2026 में 1,74,605 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है, जो 2025 के 1,55,105 करोड़ रुपये से 12-13% अधिक है। डिजिटल की हिस्सेदारी 42% से बढ़कर 46% हो गई है।  

त्योहारी विज्ञापन पर अनुमान काफी बिखरे हुए हैं। 'इम्पैक्ट' मैगजीन के अनुसार देश का कुल विज्ञापन मार्केट 2026 में करीब 9.7% बढ़ने की उम्मीद है, पर त्योहारी विज्ञापन पर अनुमान 3-5% से 15% तक फैले हैं। मुद्रा की रुपाली चावन 10-12% वृद्धि मानती हैं। आर.के. स्वामी मीडिया ग्रुप के के. सत्यनारायणन 15% वृद्धि की उम्मीद रखते हैं। द इंटरमेंटलिस्ट के फाउंडर शिवाशीष तरकस 3-5% का अनुमान रखते हैं और 4% को अपना आधार मानते हैं।  

डेटम इंटेलिजेंस ने सीजन शुरू होने से पहले त्योहारी विज्ञापन खर्च 60,000-62,000 करोड़ रुपये और 13-17% वृद्धि का अनुमान दिया था, जिसमें डिजिटल की हिस्सेदारी 67.8% थी। डिजिटल की हिस्सेदारी पर भी आंकड़े अलग हैं। पिच मैडिसन का 46% पूरे साल के विज्ञापन खर्च का है, डेंटसू इंडिया का 50-55% त्योहारी मीडिया निवेश का, और डेटम का 67.8% उसके अपने त्योहारी अनुमान का। इसलिए इन आंकड़ों को सीधे जोड़ा या तुलना नहीं किया जा सकता।  

"दिवाली अकेला त्योहार नहीं रहा"

22फीट की मैनेजिंग पार्टनर शिखा दावेसर के अनुसार भारत बेहद बंटा हुआ मार्केट है और एक त्योहार मनाने का तरीका क्षेत्र-दर-क्षेत्र बदल जाता है। इसलिए उनकी कंपनी की त्योहारी योजना अब राष्ट्रीय ब्रीफ से नहीं, मार्केट की सांस्कृतिक समझ से शुरू होती है। मैसूर की साइकिल प्योर अगरबत्ती के मैनेजिंग डायरेक्टर अर्जुन रंगा ने कहा कि उत्तर भारत में दिवाली बड़ा पर्व है, जबकि पूर्वी भारत के उपभोक्ताओं के लिए दुर्गा पूजा उतना ही अहम है। 

बाटा इंडिया के बद्री बेरीवाल के मुताबिक बाटा के त्योहारी बजट का एक बड़ा हिस्सा क्षेत्रीय मार्केटिंग में जा रहा है, जिसमें पूर्व में दुर्गा पूजा और दक्षिण में ओणम जैसे अवसर शामिल हैं। इसके लिए कंपनी मार्केट-विशेष कलेक्शन और स्थानीय चेहरों का इस्तेमाल कर रही है।  

ओणम (बीत चुका): राष्ट्रीय ब्रैंड्स की शुरुआती परीक्षा

ओणम के बाद एक्सचेंज4मीडिया (26 अगस्त) की रिपोर्ट में मीडिया एजेंसियों ने कहा कि इस साल ओणम ने राष्ट्रीय आकार की हलचल पैदा की। मुद्रा की स्ट्रैटेजी प्रमुख एट्रेयी चक्रवर्ती के अनुसार ओणम त्योहारी सीजन की शुरुआती घंटी बनता जा रहा है, खासकर राष्ट्रीय ब्रैंड्स के लिए। ओम्निकॉम मीडिया इंडिया के अजय वर्गीज ने बताया कि उनकी एजेंसी को ओणम के दौरान केरल के मौसमी बजट में आमतौर पर 15-20% की बढ़त दिखती है। लक्ष्या मीडिया ग्रुप के युवराज अग्रवाल के मुताबिक क्लाइंट अब समझते हैं कि राष्ट्रीय फिल्म को मलयालम में डब करना कैंपेन नहीं कहलाता, और ब्रीफ मलयालम-प्रथम, केरल की जड़ों वाले काम की मांग करते हैं।

सीजन से पहले के अनुमान इस तरह थे। मनोरमा ऑनलाइन का अनुमान था कि ओणम पर विज्ञापन खर्च पिछले साल से 10-15% बढ़ेगा और ओणम महीने की गतिविधि सामान्य महीने से कम से कम 60% ज्यादा रहेगी। वर्स इनोवेशन के सह-संस्थापक उमंग बेदी के अनुसार उनके मलयालम प्लेटफॉर्म पर ओणम 2025 में राष्ट्रीय और वैश्विक विज्ञापनदाताओं का हिस्सा लगभग 68% इम्प्रेशन और 84% त्योहारी राजस्व रहा। यह आंकड़ा पिछले साल का है और सिर्फ वर्स प्लेटफॉर्म का, पूरे केरल मार्केट का नहीं। मीडिया केयर ब्रैंड सॉल्यूशंस के यासिन हमीदानी के अनुसार इंडस्ट्री अनुमानों में 2025 में केरल के त्योहारी विज्ञापन खर्च में डिजिटल की हिस्सेदारी लगभग 40-45% थी।

आउटडोर पर ओणम से पहले (17 अगस्त) मालाबार ऐडवर्टाइजिंग के विष्णुजीत पी.के. ने ओणम से जुड़े OOH खर्च में पिछले साल से लगभग 15-20% वृद्धि का अनुमान दिया था। डीजीटीओओएचएल की शिवालिका आनंद का अनुमान भी 15-20% था, जबकि सृष्टि मीडिया के मनदीप मल्होत्रा का 10-15%। अग्रवाल के अनुसार ओणम शुरू होते समय राज्य में कोई प्रीमियम आउटडोर साइट खाली नहीं बची थी।  

माध्यमों के हिस्से पर विशेषज्ञ एकमत नहीं थे। मातृभूमि के नवीन एस ने टीवी का हिस्सा 35-40% रहने की उम्मीद जताई थी, जबकि मलयाला मनोरमा के वरघीस चांडी ने प्रिंट का हिस्सा लगभग 35% और टीवी का लगभग 30% बताया था। मुद्रा की चक्रवर्ती के अनुसार कुछ योजनाओं में लीनियर टीवी और डिजिटल वीडियो का अनुपात 80:20 से बदलकर 60:40 हो गया। लक्ष्या के अग्रवाल ने बताया कि बार्क रेटिंग्स बंद होने से विज्ञापनदाता टीवी से भागे नहीं, पर पिछले साल के बेंचमार्क के आधार पर कीमतों पर ज्यादा मोलभाव करते रहे।  

नवरात्र: मांग की पहली असली परीक्षा

नवरात्र के साथ त्योहारी तिमाही की रफ्तार तेज होती है। एक्सचेंज4मीडिया के मुताबिक अब Q4 नौ हफ्तों की रिले रेस जैसा है, जो नवरात्र के आसपास से शुरू होकर दशहरा, करवा चौथ और दिवाली से होते हुए नए साल तक चलता है। पिछले साल को आधार बनाएं तो हकुहोदो डेटा लैब्स इंडिया की सीईओ श्वेता शर्मा के अनुसार GST 2.0 का लागू होना नवरात्र की शुरुआत के साथ मेल खा गया था और रेडसीर के आंकड़ों में पहले 11 दिनों में 60,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का GMV हुआ, जो 20-22% बढ़ा। उनके मुताबिक इस साल उस ऊंचे आधार के सामने कम वृद्धि दर गणित का मामला है, कमजोरी का संकेत नहीं।

टीजीटीएचआर के सीईओ राहुल वेंगलिल के अनुसार इस साल खरीदारी में देरी दिख रही है, इसलिए दिवाली लगभग हर ब्रैंड के लिए अहम होगी। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले साल GST बदलावों के कारण त्योहार से पहले एक महीने की सुस्ती रही थी, जबकि इस साल वृद्धि सकारात्मक है, हालांकि ब्रैंड्स पर मार्जिन का दबाव बना हुआ है। 

दुर्गा पूजा (17-21 अक्टूबर): पूर्वी भारत की परीक्षा

दुर्गा पूजा 17 से 21 अक्टूबर तक चलेगी। पिछले साल (22 सितंबर 2025) की स्टोरीबोर्ड18 की रिपोर्ट में पल्प स्ट्रैटेजी की अंबिका शर्मा ने कहा था कि कई राष्ट्रीय ब्रैंड त्योहारी बजट का लगभग 8-10% पूजा के लिए रखते हैं, जबकि बंगाल और पूर्व की क्षेत्रीय बड़ी कंपनियों के लिए यह 25-30% तक हो सकता है। मीडिया केयर के यासिन हमीदानी ने उसी रिपोर्ट में कहा था कि FMCG, फैशन, ज्वेलरी और इलेक्ट्रॉनिक्स ब्रैंड त्योहारी बजट का 20-30% पूजा को देते हैं। ये दोनों आंकड़े पिछले साल के हैं और अलग-अलग श्रेणियों के बारे में हैं। 

पूजा के आउटडोर कारोबार पर एक्सचेंज4मीडिया की 1 अक्टूबर की रिपोर्ट में कोलकाता की अरुण साइन सर्विस के निदेशक राहुल बिस्वास ने पश्चिम बंगाल में 10 दिनों के पूजा OOH कारोबार को 800-1,000 करोड़ रुपये बताया। उन्होंने साफ किया कि कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं है और यह उनके पिछले 3-4 साल के कारोबार पर आधारित अनुमान है।  

लक्ष्या मीडिया के युवराज अग्रवाल के अनुसार 2024 में आरजी कर घटना के बाद ब्रैंड्स ने पूजा खर्च में अनुमानतः 25-35% की कटौती की थी, और 2025 में पूजा विज्ञापन 18-25% के अनुमानित उछाल के साथ लौटा। उन्होंने यह भी कहा कि पूजा का ज्यादातर खर्च स्पॉन्सरशिप या एक्टिवेशन बजट में गिना जाता है, इसलिए वह OOH के आंकड़ों से बाहर रह जाता है। ब्रैंड्स के स्तर पर साड़ी ब्रैंड सुता ने कोलकाता में OOH निवेश लगभग 3-4 लाख से बढ़ाकर 5-6 लाख रुपये (करीब 50%) कर दिया है। 

सरकार भी पूजा को ब्रैंड बना रही है। यूएनआई के अनुसार पश्चिम बंगाल सरकार का कैंपेन 'बिश्वजुड़े बांगालिर आबेग' टाइम्स स्क्वायर, बुर्ज खलीफा और पिकाडिली लाइट्स के साथ राज्य के 1,000 प्रमुख पंडालों तक जाएगा और इसका लक्ष्य 2 अरब व्यूज/इम्प्रेशन है।  

डिजिटल, क्रिएटर और दिवाली की तैयारी

डेंटसू इंडिया का अनुमान है कि त्योहारी मीडिया निवेश में डिजिटल की हिस्सेदारी 50-55%, टीवी की 25-30%, प्रिंट की 8-10% और OOH/DOOH की 6-8% रहेगी। क्योरूज के अनुसार भारत में त्योहारी इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग का खर्च 2026 में 900 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है, जो पिछले साल के लगभग 700 करोड़ से 29% अधिक है। 

 त्योहारी सीजन पर नया दबाव

त्योहारों से ठीक पहले अर्थव्यवस्था से तीन झटके आए हैं। एक्सचेंज4मीडिया की 12 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार आरबीआई ने रेपो दर 25 आधार अंक बढ़ाकर 5.50% की और रुख 'न्यूट्रल' से 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' (सोच-समझकर सख्ती) कर लिया। इसके बाद सेंसेक्स 1,000 से ज्यादा अंक गिरा, और मौसम विभाग के अनुसार मानसून में लगभग 13% की कमी रही। ब्याज दर बढ़ने से कर्ज महंगा हो सकता है, शेयर बाजार की गिरावट से भरोसा डगमगा सकता है और कमजोर मानसून से ग्रामीण मांग पर असर पड़ सकता है। ये तीनों बातें ऐसे समय आई हैं जब त्योहारी मांग विज्ञापन बजट की दिशा तय करती है। 

कंपनियों की लागत भी बढ़ रही है। रिपोर्ट के अनुसार गोदरेज कंज्यूमर और डाबर जैसी बड़ी FMCG कंपनियों ने जुलाई-सितंबर तिमाही में कच्चे माल की महंगाई से मार्जिन पर दबाव की बात कही है। पारले प्रोडक्ट्स के सीएमओ मयंक शाह ने पिछले महीने कहा था कि कंपनी इंतजार की नीति पर है और विज्ञापन खर्च में कुछ तर्कसंगत कटौती होगी। गोल्डमेडल इलेक्ट्रिकल्स के किशन जैन के अनुसार शेयर बाजार की अस्थिरता से ज्यादा असर मानसून की कमी का पड़ेगा, खासकर ग्रामीण और कीमत-संवेदनशील बाजारों में। उन्हें मांग में मामूली गिरावट की आशंका है, बड़ी सुस्ती की नहीं, और उनकी कंपनी ने त्योहारी विज्ञापन बजट पिछले साल जितना ही रखा है। 

फिलहाल बड़े पैमाने पर कटौती के संकेत नहीं हैं। डेंट्सूएक्स के अनिल सोलंकी के अनुसार मांग में एकसमान सुस्ती की जगह असमान वृद्धि दिखेगी। जरूरी और किफायती उत्पाद प्रीमियम व बड़ी खरीदारी वाली श्रेणियों से बेहतर टिकेंगे। उनका अनुमान है कि विज्ञापन खर्च मोटे तौर पर मजबूत रहेगा, पर ब्रैंड अतिरिक्त निवेश में ज्यादा चयनात्मक होंगे और परफॉर्मेंस-आधारित डिजिटल, रिटेल मीडिया और क्षेत्रीय टार्गेटिंग को तरजीह देंगे। यानी असर कुल बजट से ज्यादा इस बात पर दिख सकता है कि पैसा कहां और कितनी सावधानी से लगाया जाए। सीजन से पहले के अनुमान, जैसे डेटम इंटेलिजेंस का 13-17% वृद्धि वाला अनुमान, इन ताजा घटनाओं से पहले बने थे। रिपोर्ट के अनुसार यह इस पर निर्भर करेगा कि आने वाले हफ्तों में उपभोक्ता मांग, कीमतें और कंपनियों का खर्च कैसे बदलते हैं।

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

Veritaas Advertising पर लागू नहीं होंगे कॉरपोरेट गवर्नेंस के नियम, कंपनी ने दी जानकारी

विज्ञापन क्षेत्र की कंपनी वेरिटास ऐडवर्टाइजिंग लिमिटेड (Veritaas Advertising Limited) ने कहा है कि उस पर भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के कॉरपोरेट गवर्नेंस से जुड़े कुछ नियम लागू नहीं होते।

Vikas Saxena by
Published - Tuesday, 13 October, 2026
Last Modified:
Tuesday, 13 October, 2026
Veritaas32

विज्ञापन क्षेत्र की कंपनी वेरिटास ऐडवर्टाइजिंग लिमिटेड (Veritaas Advertising Limited) ने कहा है कि उस पर भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के कॉरपोरेट गवर्नेंस से जुड़े कुछ नियम लागू नहीं होते। कंपनी ने 10 अक्टूबर, 2026 को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) को इसकी जानकारी दी।

कंपनी ने बताया कि सेबी के लिस्टिंग दायित्वों और जानकारी देने से जुड़े नियम, 2015 के नियम 15 के तहत उसे कॉरपोरेट गवर्नेंस से जुड़े निर्धारित प्रावधानों का पालन करने से छूट मिली हुई है। यह छूट 30 सितंबर, 2026 को समाप्त तिमाही के लिए लागू है।

NSE Emerge पर लिस्टेड है कंपनी

वेरिटास ऐडवर्टाइजिंग ने अपने पत्र में बताया कि उसके शेयर NSE Emerge प्लेटफॉर्म पर लिस्टेड हैं। इसी आधार पर कंपनी ने कहा कि उस पर संबंधित कॉरपोरेट गवर्नेंस प्रावधान लागू नहीं होते।

सेबी के नियमों के मुताबिक, कुछ निर्धारित शर्तों को पूरा करने वाली कंपनियों को कॉरपोरेट गवर्नेंस से जुड़े प्रावधानों से छूट मिल सकती है। इनमें ऐसी कंपनियां शामिल हैं, जिनकी चुकता इक्विटी शेयर पूंजी 10 करोड़ रुपये से अधिक नहीं है और पिछले वित्त वर्ष के अंतिम दिन उनकी कुल संपत्ति 25 करोड़ रुपये से अधिक नहीं है। इसके अलावा, SME एक्सचेंज पर अपने निर्धारित शेयर सूचीबद्ध कराने वाली कंपनियां भी इस नियम के दायरे में आती हैं।

किन नियमों से संबंधित है छूट?

कंपनी ने अपने पत्र में सेबी के नियमों के तहत कॉरपोरेट गवर्नेंस से जुड़े कई प्रावधानों का उल्लेख किया है। इनमें निदेशक मंडल, उसकी समितियों, निदेशकों की जिम्मेदारियों और कंपनी के कामकाज में पारदर्शिता से संबंधित नियम शामिल हैं।

वेरिटास ऐडवर्टाइजिंग के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर देबज्योति बनर्जी ने यह जानकारी जारी की है। कंपनी ने यह पत्र NSE के लिस्टिंग विभाग को भेजा है।

English Keywords

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए