होम / विचार मंच / अनुरंजन झा बोले- उमेश कुमार को खशोगी बनाने की तैयारी में तो नहीं हैं त्रिवेंद्र रावत

अनुरंजन झा बोले- उमेश कुमार को खशोगी बनाने की तैयारी में तो नहीं हैं त्रिवेंद्र रावत

हाल में एक तथाकथित स्टिंग के मामले से फिर चर्चा में आए न्यूज चैनल ‘समाचार प्लस’ के...

समाचार4मीडिया ब्यूरो 7 years ago

अनुरंजन झा

वरिष्ठ पत्रकार ।।

कहां हैं उमेश कुमार?

हाल में एक तथाकथित स्टिंग के मामले से फिर चर्चा में आए न्यूज चैनल ‘समाचार प्लस’ के सीईओ और एडिटर-इन-चीफ उमेश कुमार पिछले तीन दिनों से उत्तराखंड पुलिस के साथ कहां हैं? किसी को खबर नहीं है। न उनके घरवालों को, न उनके दफ्तर वालों को, न ही उस प्रदेश की पुलिस को जो उन्हें उनके घर से गिरफ्तार करके ले गई थी, न ही उस प्रदेश की पुलिस को, जिस पर उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी थी और न ही उस प्रदेश की पुलिस यानी झारखंड की पुलिस को जो उनको रांची की अदालत में एक दूसरे मामले में पेश करने के लिए गिरफ्तार करने देहरादून आई थी।

नेशनल प्रेस दिवस पर एक तरफ जहां भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली अपनी बातों से देश की जनता और पत्रकार बिरादरी को यह जताने की कोशिश कर रहे थे कि देश में अभिव्यक्ति की स्वंतत्रता पर कोई अंकुश नहीं है और अगर मीडिया की प्रतिष्ठा प्रभावित होती है तो उसमें कहीं न कहीं उसकी अपनी कमजोरी ही शामिल होती है। जेटली ने यह भी कहा कि वाणी की स्वतंत्रता पर खतरे की कोई गंभीर शिकायत न होना दर्शाता है कि प्रेस स्वतंत्र रूप से काम कर रही है। चलिए हम जेटली जी की दोनों बातें मान लेते हैं तो जेटली जी को यह जवाब देना चाहिए कि दो साल पहले जब उत्तराखंड में हरीश रावत की सरकार एक स्टिंग के बाद बर्खास्त हुई थी, वो सही था या यह कि उनकी ही पार्टी के मौजूदा मुख्यमंत्री ने उसी स्टिंग करनेवाले पत्रकार के खिलाफ अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी, वो सही है।

हरीश रावत की सरकार बर्खास्त होते ही अरुण जेटली ने बाकायदा प्रेस कॉन्फ्रेंस करके देश को बताया था कि भारतीय लोकतंत्र में पहली बार हुआ है कि किसी खबर के आधार पर कोई सरकार बर्खास्त हुई है और यह लोकतंत्र और पत्रकारिता की जीत है। तो आखिर इन दो सालों में क्या हो गया कि वही पत्रकार उनकी पार्टी के दूसरे नेताओँ की नजर में चुभने लगा। जिस दिन अरुण जेटली प्रेस की आजादी की दुहाई दे रहे थे, उसी दिन देहरादून की अदालत ने उमेश कुमार को जमानत दी, लेकिन उसके बाद भी राज्य की पुलिस ने उनको रिहा नहीं किया और रात में बिना बताए किसी दूसरे राज्य की पुलिस को सौंप दिया।देहरादून से रांची पहुंचने में तीन दिन गुजर गए 16-17-18 नवंबर, लेकिन अभी तक उमेश कुमार झारखंड नहीं पहुंचे हैँ।

चलिए मान लेते हैं कि उमेश कुमार के किसी अपने ही मातहत ने उन पर गंभीर आरोप लगाए और पुलिस ने गिरफ्तार किया। उमेश कुमार ने अदालती लड़ाई लड़ी और पिछले दिनों हाईकोर्ट ने उत्तराखंड सरकार की कितनी किरकिरी की, यह सबने देखा। हम अदालत के विचाराधीन मामले पर कोई प्रश्न नहीं उठा रहे, लेकिन जब अदालत ने 16 नवंबर को उनको जमानत दे दी, तब भी राज्य पुलिस ने कागजी कार्रवाई का बहाना बनाकर यह कहते हुए टाल दिया कि कल सुबह रिहा करेंगे, जबकि उनकी रिहाई के आदेश पांच बजे पुलिस और जेल प्रशासन के हाथों में पहुंचाए जा चुके थे। अगली सुबह मालूम हुआ कि पिछली रात को ही दूसरे मामले में ट्रांजिट वारंट पर दूसरे प्रदेश यानी झारखंड की पुलिस रांची ले गई। उमेश कुमार की लड़ाई गंभीर दिखाई देने लगी, यह तो तय ही था कि जब मुख्यमंत्री की सीधी लड़ाई हो तो कुछ अनहोनी होगी ही। उमेश कुमार के परिजन रांची में उनका इंतजार करने लगे, लेकिन यहां अत्याचार का आलम कुछ इस तरह समझिए कि सोलह नवंबर की देर शाम देहरादून से निकले उमेश कुमार को पुलिस 18 नवंबर की देर शाम तक रांची लेकर नहीं पहुंच पाई है। उनके परिजन और वकील दोनों राज्यों की पुलिस से जानने की कोशिश कर रहे हैं, झारखंड के प्रशासन ने यह कह दिया कि हमारे कोई अधिकारी या कर्मचारी उऩको लेने उत्तराखंड नहीं गए और उनको उत्तराखंड की पुलिस ही यहां लेकर आएगी, लेकिन सच की जानकारी किसी को नहीं है कि आखिर उमेश कुमार हैं कहां। जेटली जी को इस पर ध्यान देना चाहिए कि पत्रकारिता की जुबान बंद करने की कोशिश इस कदर भी नहीं हो।

अगर उमेश कुमार ने गलत किया है तो देश की अदालत उनको सजा देगी, लेकिन इस तरह से सत्ता का दुरुपयोग करके उनको गायब करना आपातकाल की ही निशानी है। पिछले सालों में देश भर में जिस तरह पत्रकारों के साथ व्यवहार हुआ है और उऩकी जान गई है, वह तो चिंतित करती ही है, लेकिन एक वाई श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त पत्रकार का प्रशासन की नाक के नीचे इस कदर गायब होना हमें तो सऊदी अरब की हाल की घटना की याद दिलाता है। सत्ता में बैठे लोगों से हम तो यही कहेंगे कि गलत का साथ मत दीजिए, कानून का पालन कीजिए, न्यायाधीश को अपना काम करने दीजिए, लेकिन गलत मत कीजिए। अब जो हो रहा है, वह गलत हो रहा है और गलत के खिलाफ आवाज ज्यादा दिनों तक आप दबा नहीं सकते।


टैग्स पत्रकार उमेश कुमार अनुरंजन झा
सम्बंधित खबरें

AI पर नियंत्रण करना भी बेहद आवश्यक: रजत शर्मा

प्रधानमंत्री मोदी ने कम शब्दों में कई बड़ी बातें कहीं। भारत एआई में विश्व का अग्रणी बनना चाहता है, हमारे देश के पास दिमाग़ भी है, युवा शक्ति भी है और सरकार का समर्थन भी है।

5 hours ago

रामबहादुर राय-पत्रकारिता क्षेत्र में शुचिता और पवित्रता के जीवंत व्यक्तित्व

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के वे शीर्ष नेताओं में थे। जब पत्रकारिता में आए तो शीर्ष पत्रकार बने। आज की भारतीय पत्रकारिता में उन सरीखे सम्मानित और सर्वस्वीकार्य नाम बहुत कम हैं।

5 hours ago

भविष्य को आकार देने की कोशिश कर रहा है भारत: राहुल कंवल

यदि कुछ समय के लिए राजनीति को अलग रख दें, तो एक बात स्पष्ट है। भारत की एआई रणनीति (AI strategy) की सफलता में हमारे सामूहिक भविष्य का एक महत्वपूर्ण हिस्सा निहित है।

1 day ago

मधुसूदन आनंद हमेशा यादों में बने रहेंगे : अनिल जैन

आनंद जी ने जर्मनी में 'डायचे वेले' (द वाॅयस ऑफ जर्मनी) में कुछ सालों तक काम किया और वे 'वाॅयस ऑफ अमेरिका' के नई दिल्ली स्थित संवाददाता भी रहे।

1 day ago

प्रवक्ता, अहंकार और संवाद की संवेदनहीनता का सबक: नीरज बधवार

चूंकि समाज के अवचेतन में अंग्रेज़ी को लेकर एक हीन भावना मौजूद है, इसलिए जो व्यक्ति अंग्रेज़ी में प्रभावशाली ढंग से बोल लेता है, वह अक्सर खुद को विद्वान भी मान बैठता है।

2 days ago


बड़ी खबरें

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की फैक्ट-चेकिंग यूनिट मामले में याचिका फिर से की बहाल

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने उस याचिका को फिर से बहाल कर दिया है, जिसमें केंद्र ने बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी।

1 hour ago

वरिष्ठ पत्रकार आलोक मेहता की किताब ‘Revolutionary Raj’ का लोकार्पण आज

वरिष्ठ पत्रकार और पद्मश्री सम्मानित आलोक मेहता अपनी नई कॉफी-टेबल बुक “Revolutionary Raj – Narendra Modi’s 25 Years” का लोकार्पण 21 फरवरी 2026 को करने जा रहे हैं।

1 hour ago

प्रसार भारती ने WAVES पर सैटेलाइट टीवी चैनलों को जोड़ने के लिए आवेदन की आखिरी तारीख बढ़ाई

प्रसार भारती ने अपने OTT प्लेटफॉर्म WAVES पर सैटेलाइट टीवी चैनलों को जोड़ने के लिए आवेदन की आखिरी तारीख बढ़ा दी है।

43 minutes ago

WBD डील पर Paramount को शुरुआती राहत, अमेरिका में एंटीट्रस्ट अवधि पूरी

Warner Bros. Discovery को खरीदनें को लेकर बड़ी कंपनियों के बीच जोरदार मुकाबला चल रहा है। अब देखना होगा कि आखिर यह डील किसके हाथ लगती है

1 hour ago

OpenAI के CEO ने पीएम मोदी से की मुलाकात, भारत को बताया AI का बड़ा केंद्र

पीएम मोदी ने दुनिया भर के निवेशकों और टेक कंपनियों को भारत आने का न्योता दिया। उन्होंने कहा कि भारत के पास प्रतिभाशाली युवा हैं, जिनमें AI के क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की ताकत है।

1 hour ago