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आखिर क्यों सियासी दरिद्रता की चादर ओढ़े मोदी के चरणों में लोटे नेताजी?

जिस पार्टी ने ताउम्र बीजेपी और आरएसएस को मिटाने के लिए कसमें खाई थीं, उसी पार्टी के सबसे बड़े नेता मुलायम सिंह यादव ने...

समाचार4मीडिया ब्यूरो 7 years ago

चंदन प्रताप सिंह
वरिष्ठ पत्रकार।।

जिस पार्टी ने ताउम्र बीजेपी और आरएसएस को मिटाने के लिए कसमें खाई थीं, उसी पार्टी के सबसे बड़े नेता मुलायम सिंह यादव ने बजट सत्र के आखिरी दिन  लोकसभा में गुलाटी मार दी। मुक्तकंठ से नरेंद्र मोदी के कदमों में बिछ गए, जिनके खिलाफ उनका बड़ा बेटा अखिलेश यादव खानदानी रंजिश भुलाकर बीएसपी की मायावती के साथ लोहा ले रहा है। मुल्ला मुलायम के नाम से राजनीति में बदनाम रहे मुलायम सिंह यादव ने नरेंद्र मोदी की ठाकुरसुहाती करते हुए जब ये कहा कि सबको साथ लेकर चलनेवाले मोदी ने बहुत काम किया है, इसलिए वो दिल से चाहते हैं कि मोदी फिर से पीएम बनें, तो राजनीति के जानकार नेताजी के इस बयान से भौचक्के रह गए। सभी उन कारणों की तलाश में लगे हैं कि मोदी के सामने हाथ जोड़कर सियासी दरिद्र की तरह दिखने वाले मुलायम सिंह यादव ने किसकी रक्षा के लिए भूचाल लाने वाला इस तरह का बयान दे डाला।

क्या वो इस बयान से पीएम पद की बड़ी दावेदार मायावती की राह में कांटा बो रहे हैं या फिर दूसरी बीवी साधना से हुए छोटे बेटे प्रतीक यादव और उनकी पत्नी अपर्णा यादव के सियासी राजतिलक के लिए बीजेपी में जगह बनाने के लिए चिरौरी कर रहे हैं। क्योंकि उनकी गढ़ी हुई समाजवादी पार्टी में अब उनकी कोई सुनता नहीं। पार्टी पर पहली बीवी से हुए बेटे अखिलेश यादव ने कब्जा कर रखा है। या फिर सीबीआई, ईडी और कोर्ट के डर से किसी जमाने के पहलवान रहे मुलायम सिंह यादव मोदी के कदमों में लोटने को मजबूर हुए।

मुलायम सिंह यादव अपनी नजरों से सीबीआई और ईडी की कार्रवाई देख रहे हैं, जो लालू यादव, तेजस्वी यादव, राबड़ी देवी, मीसा भारती, शैलेश, ममता बनर्जी, मायावती, अखिलेश यादव, केजरीवाल जैसे नेताओं के खिलाफ हो रही है। मुलायम सिंह यादव खुद आय से ज्यादा संपत्ति मामले में सुप्रीम कोर्ट और सीबीआई की रडार पर हैं। ये दीगर बात है कि सीबीआई ने इस मामले की फाइल बंद कर रखी है। लेकिन ये फाइल फिर किसी इशारे पर खोली भी जा सकती है। दूसरी तरफ अब तो खनन को लेकर बजरिए आईएएस बी.चंद्रकला, सीबीआई बड़े बेटे अखिलेश यादव पर शिकंजा कस रही है। या फिर वो खालिस अपने बड़े बेटे अखिलेश को सीबीआई से बचाने के लिए विपक्ष से दगा देकर मोदी के चरणों में लोटने को मजबूर हैं। ये भी हो सकता है खुद को जेल जाने से बचाने के लिए मोदीशरणम हो गए।

चुनाव के माहौल में फिर से मंदिर का मसला गरमाया जा रहा है। चैनलों पर बार-बार नेताजी का वो बयान दिखाया जाता है कि जिसमें वो खुद ये कहते हुए दिखते हैं कि नब्बे के दशक में मस्जिद बचाने के लिए उन्होंने रामभक्तों की हत्या करवाई है। वैसे इतिहास गवाह है कि चाहे राष्ट्रपति का चुनाव हो या फिर गठबंधन की राजनीति। मुलायम सिंह यादव ने हमेशा धोखे की राजनीति की है। अब इंतजार करना होगा कि मुलायम का दिल मोदी के लिए आज किन वजहों से गुलगुला हो गया है।


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