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क्यों गिर रहा है शेयर बाजार: पढ़िए इस सप्ताह का 'हिसाब किताब'
दूसरा कारण है कि अमेरिका के कॉमर्स मंत्री ने दावा किया है कि भारत ट्रेड डील करने से चूक गया। भारत को पिछले साल तीन हफ़्ते में डील फ़ाइनल करने का समय दिया गया था।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 1 month ago
मिलिंद खांडेकर, वरिष्ठ पत्रकार।
नया साल इकनॉमी के लिए तो बहुत अच्छी खबर लेकर आया कि इस वित्त वर्ष में 7.4% जीडीपी ग्रोथ होगी। महंगाई दर कम है, ग्रोथ रेट अच्छा है। कम से कम काग़ज़ पर तो अच्छे दिन आ गए हैं। फिर भी शेयर बाज़ार इस हफ़्ते क़रीब 3% गिरा। शेयर बाज़ार में 15 लाख करोड़ रुपये का नुक़सान निवेशकों को हो गया। हिसाब किताब करेंगे कि बाज़ार क्यों गिर रहा है? इसका जवाब सरकार के पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम ने दिया है।
उन्होंने तो GDP के आँकड़े पर ही सवाल उठा दिए और कहा कि ये थोड़ा बढ़ाकर दिखाया जा रहा है। उनका कहना है कि इतनी अच्छी ग्रोथ हो रही है तो विदेशी निवेशक (FII) शेयर क्यों बेच रहे हैं? इसका कारण है कि इकनॉमी की ग्रोथ तो हो रही है, पर कंपनियों के मुनाफ़े या बिक्री में उस अनुपात में बढ़ोतरी नहीं हो रही है। दूसरा कारण है अमेरिका से ट्रेड डील में और देरी की आशंका।
अमेरिका की डील फँसना अब बड़ा कारण बन गया है। वेनेजुएला पर अमेरिका के हमले से अनिश्चितता बढ़ गई। भारत के लिए इससे ज़्यादा चिंताजनक ख़बरें रहीं कि अमेरिका में कानून बनने जा रहा है जिसमें जो देश रूस से तेल ख़रीदेगा उस पर 500% टैरिफ़ लगाने का अधिकार वहाँ के राष्ट्रपति को मिलेगा। अभी भारत पर अमेरिका ने 50% टैरिफ़ लगा रखा है।
भारत ने रूस से तेल ख़रीदना कम किया है लेकिन अब तक पूरी तरह बंद नहीं किया है। कानून बनाने वाले कांग्रेस सदस्य का कहना है कि भारत, चीन और ब्राज़ील जैसे देशों के लिए यह क़ानून लाया गया है। राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने भी इसका समर्थन किया है।
दूसरा कारण है कि अमेरिका के कॉमर्स मंत्री ने दावा किया है कि भारत ट्रेड डील करने से चूक गया। भारत को पिछले साल तीन हफ़्ते में डील फ़ाइनल करने का समय दिया गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को राष्ट्रपति ट्रंप को फ़ोन करना था। उन्होंने फ़ोन नहीं किया। बाद में भारत डील के लिए तैयार हुआ तब तक देर हो चुकी थी। हालाँकि भारत के विदेश मंत्रालय ने इस दावे को ठुकरा दिया है। अमेरिका के कॉमर्स मंत्री के बयान के बाद आशंका जताई जा रही है कि डील लटक सकती है। बाज़ार इस खबर से परेशान है।
विदेशी निवेशकों ने साल के पहले हफ़्ते में 8 हज़ार करोड़ रुपये के शेयर बेच डाले। पिछले साल भर में भी उन्होंने ढाई लाख करोड़ रुपये के शेयर्स बेचे थे। रिटेल निवेशक भी बाज़ार से भाग गए हैं। ऐसे में सिर्फ म्यूचुअल फंड के भरोसे बाज़ार चल रहा है। पिछले महीने भी SIP से 30 हज़ार करोड़ रुपये की आवक हुई है। विदेशी बेच रहे है भारतीय फंड ख़रीद रहे हैं।
जानकारों का कहना है कि आने वाले हफ्तों में कंपनियों के रिज़ल्ट और बजट बाज़ार की दिशा तय करेंगे। रिज़ल्ट से पता चलेगा कि जीडीपी ग्रोथ में तेज़ी का फ़ायदा कंपनियों को मिल रहा है या नहीं। बजट पर भी बाज़ार की नज़र है कि क्या कैपिटल गेन टैक्स में कोई कटौती होगी?
( यह लेखक के निजी विचार हैं )
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