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ट्रंप भारत में iPhone बनाने के खिलाफ क्यों? पढ़िए इस सप्ताह का 'हिसाब किताब'

Apple को लुभाने के लिए भारत सरकार ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी है। भारत सरकार ने Performance Linked Incentives ( PLI) स्कीम निकाली। कंपनियों को बिक्री के अनुपात में हर साल सरकार पैसे देती है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 9 months ago

मिलिंद खांडेकर, वरिष्ठ पत्रकार।

भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव पर बयानबाज़ी के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत में iPhone बनने के बारे में भी बयान दे डाला। ट्रंप ने Apple के CEO टिम कुक से कहा कि iPhone भारत में बनाना बंद करें। उस बाज़ार के लिए बना रहे हो तो ठीक है उसे अमेरिका में मत बेचो। अमेरिका में iPhone बनाओ।

हिसाब किताब में चर्चा iPhone के बारे में। iPhone बनाने वाली कंपनी Apple अमेरिका की दूसरी सबसे बड़ी कंपनी है। मुनाफ़ा और मार्केट कैप दोनों पैमाने पर लेकिन उसका सबसे सफल प्रोडक्ट iPhone अमेरिका में बनता नहीं है। 2020 तक तो सारे iPhone चीन में बनते थे। अमेरिका- चीन के टैरिफ़ वॉर और कोरोनावायरस लॉक डाउन के बाद सभी कंपनियों ने चीन पर निर्भरता कम करना शुरू किया। चीन प्लस वन की नीति पर काम करना शुरू किया यानी चीन के साथ साथ किसी और देश में सामान बनाना शुरू किया।

इसका नतीजा है कि चीन में अब 80% iPhone बनते हैं जबकि भारत में 20%, Apple अगले साल तक भारत में 25% iPhone बनाना चाहता है। Apple को लुभाने के लिए भारत सरकार ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी है। भारत सरकार ने Performance Linked Incentives ( PLI) स्कीम निकाली। कंपनियों को बिक्री के अनुपात में हर साल सरकार पैसे देती है। भारत में मैन्यूफ़ैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए यह स्कीम लायी गई। चीन से भारत में नहीं आने का कारण कंपनियों ने यह भी बताया था कि वहाँ अड़चनें कम है, यहाँ सामान बनाना महँगा पड़ता है।

PLI स्कीम के ज़रिए सरकार ने इसकी भरपाई करने की कोशिश की है। इसका नतीजा है कि भारत में हर साल लगभग पाँच करोड़ iPhone बन रहे हैं जबकि पाँच साल पहले तक यह आँकड़ा कुछ लाख तक था। ट्रंप चाहते हैं कि अमेरिकी कंपनियाँ सामान अमेरिका में बनाएँ ताकि वहाँ नौकरियाँ मिलेगी। इसी कारण उन्होंने दूसरे देशों से आने वाले सामान पर टैरिफ़ लगाने की घोषणा की है। चीन को छोड़कर बाक़ी देशों को उन्होंने बाक़ी देशों को 90 दिन के लिए बख्श दिया था।

इसमें भारत भी शामिल है। Apple ने इसका फ़ायदा उठाकर जून तिमाही में अमेरिका में बिकने वाले सारे iPhone भारत से बनाकर मँगवा लिए। अब तो खैर अमेरिका ने चीन के साथ भी टैरिफ़ समझौता कर लिया है। Apple ने ट्रंप को खुश करने के लिए 500 बिलियन डॉलर अमेरिका में इन्वेस्टमेंट करने की घोषणा की है लेकिन इसमें iPhone बनाना शामिल नहीं है। ट्रंप चाहे कितना दबाव डाल दें Apple नहीं मानेगा। इसका एकमात्र कारण है चीन और भारत में iPhone बनाना सस्ता पड़ता है। अभी iPhone की क़ीमत $1000 डॉलर के आसपास है। अगर अमेरिका में iPhone बनाया तो क़ीमत पड़ेगी $3000, वहाँ मज़दूर महँगे हैं और भारत में सस्ते। यह इकनॉमिक्स ट्रंप की पॉलिटिक्स पर भारी पड़ेगी।

( यह लेखक के निजी विचार हैं )


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