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गरीबों को मुफ्त राशन पर वर्ग विशेष को आपत्तियां क्यों: आलोक मेहता

2020 के कोविड संकट से यह योजना शुरू हुई थी। योजना की अवधि अब 5 सालों तक की बढ़ा दी गई है। अब इस योजना का लाभ 2029 तक मिलेगा।

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 10 months ago

आलोक मेहता, पद्मश्री, वरिष्ठ पत्रकार, लेखक।

देश के एक नामी मीडियाकर्मी और लेखक ने इस सप्ताह अपने कॉलम में सरकार द्वारा गरीबों को मुफ्त राशन देने की योजना पर आपत्तियां करते हुए कुछ तर्क रखे। वैसे वह नागरिक अधिकारों के समर्थक ही नहीं प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के प्रशंसक भी हैं। इसलिए उन्हें सरकार विरोधी भी नहीं कहा जा सकता है। लेकिन मुफ्त राशन बाँटने के विरुद्ध वह अकेले नहीं हैं। समाज के संपन्न और मध्यम वर्ग के अनेक लोग इस नीति की आलोचना करते हैं। लेखक की तरह वे भी कहते हैं कि इससे लोग निकम्मे हो रहे, कामकाज के बजाय मुफ्त योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं।

आलोचक इस बात पर ध्यान नहीं देते कि ग़रीब अनाज मुफ्त मिलने के बाद मेहनत मजदूरी से हुई आमदनी से बीबी बच्चों के लिए कपड़े, झोपड़ी या कच्चे मकान में जरूरी सामान, दूध पानी आदि का इंतजाम करते हैं। सरकारी स्कूल में बच्चों को मुफ्त शिक्षा और किताब मिलने से वे थोड़े शिक्षित हो जाते हैं। ग़रीब परिवार उसी अमीर या मध्यम वर्ग के लोगों के घरों, खेतों या दुकानों में काम भी करते हैं।

दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि किसानों से उचित दाम पर सरकार लाखों टन अनाज ख़रीदकर ही बाँटती है। यदि सरकार केवल ख़रीद करेगी तो अनाज को रखकर क्या लड़ेगी? इस दृष्टि से मोदी सरकार द्वारा गरीबों को मुफ्त अनाज देने की पूरी योजना को ध्यान से समझने की आवश्यकता है। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत देश में 81 करोड़ से ज्यादा लोगों को प्रति माह पाँच किलो अनाज सरकार द्वारा दिया जा रहा है। इस योजना में गरीब परिवारों को 35 किलो अनाज हर महीने निशुल्क में दिया जाता है।

2020 के कोविड संकट से यह योजना शुरू हुई थी। योजना की अवधि अब 5 सालों तक की बढ़ा दी गई है। अब इस योजना का लाभ 2029 तक मिलेगा। सरकार इस योजना में 5 साल के अंदर 11.80 लाख करोड़ रुपए खर्च करेगी। कोविड के समय लोगों का रोजगार चला गया था। और लोगों को अपना जरूरतमंद चीजों को नहीं खरीद पाए थे, और नहीं अच्छे से खाते पीते थे। उसे समय सभी परिवारों के व्यवस्था खराब हो गई थी। जिससे लोगों को बहुत ही कठिनाई का सामना करना पड़ता था। और ऊपर से उनका रोजगार भी चला गया था।

इसी कारण देश के लोगों की जरूरत के अनुसार इस योजना का प्रारंभ मार्च 2020 को ही किया गया था। सरकार ने वर्ष 2025 में गरीबी उन्मूलन और सामाजिक कल्याण के लिए योजना को नया रूप दिया है। इस नई राशन कार्ड योजना का उद्देश्य देश के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को व्यापक सहायता प्रदान करना है। यह योजना न केवल खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करेगी, बल्कि समग्र सामाजिक-आर्थिक विकास की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। देश में आज भी लाखों परिवार गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे हैं। महंगाई और बेरोजगारी जैसी समस्याओं के कारण कई परिवारों के लिए दो वक्त का भोजन जुटाना भी चुनौतीपूर्ण बन गया है।

ऐसी परिस्थितियों में, सरकार ने राशन कार्ड योजना 2025 के माध्यम से गरीब परिवारों को राहत देने का निर्णय लिया है। यह योजना पहले से चल रही सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) का एक विस्तारित और अधिक प्रभावी रूप है, जिसमें कई नए लाभ और सुविधाएँ जोड़ी गई हैं। राशन कार्ड योजना 2025 के अंतर्गत सभी पात्र लाभार्थियों को प्रति व्यक्ति हर महीने 5 किलोग्राम अनाज निःशुल्क प्रदान किया जाएगा। इसमें गेहूं, चावल और दालें शामिल हैं। यह मात्रा पहले की योजनाओं की तुलना में अधिक है और इसमें पोषण की दृष्टि से महत्वपूर्ण दालों को भी शामिल किया गया है।

सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि वितरित किया जाने वाला अनाज उच्च गुणवत्ता का हो। इसके लिए खाद्य निरीक्षण और गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली को मजबूत किया गया है। राशन की गुणवत्ता से संबंधित शिकायतों के निवारण के लिए एक विशेष हेल्पलाइन भी स्थापित की गई है। राशन कार्ड धारकों को अब हर महीने 1,000 रुपये की आर्थिक सहायता भी दी जाएगी। यह राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में डिजिटल माध्यम से स्थानांतरित की जाएगी। इस प्रक्रिया में आधार लिंकिंग और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) का उपयोग किया जाएगा, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त होगी और पारदर्शिता बढ़ेगी।

यह आर्थिक सहायता विशेष रूप से उन परिवारों के लिए वरदान साबित होगी, जिनकी आय अनियमित है या जो दैनिक मजदूरी पर निर्भर हैं। इस राशि का उपयोग वे अपनी दैनिक जरूरतों, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल और अन्य आवश्यक व्यय के लिए कर सकेंगे। राशन कार्ड योजना 2025 का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पहलू ‘वन नेशन वन राशन कार्ड’ व्यवस्था है। इस व्यवस्था के तहत, कोई भी राशन कार्ड धारक देश के किसी भी हिस्से में अपने राशन कार्ड का उपयोग कर सकता है।

यह सुविधा विशेष रूप से प्रवासी श्रमिकों के लिए लाभदायक है, जो रोजगार की तलाश में अक्सर एक राज्य से दूसरे राज्य में जाते हैं। इस योजना से पहले, प्रवासी मजदूरों को अपने गृह राज्य के बाहर राशन प्राप्त करने में कठिनाई होती थी। अब वे देश के किसी भी राज्य में अपना राशन प्राप्त कर सकेंगे, जिससे उन्हें खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित होगी और आर्थिक बोझ कम होगा। राशन कार्ड योजना 2025 में शिक्षा और कौशल विकास पर विशेष ध्यान दिया गया है। इस योजना के तहत, राशन कार्ड धारकों के बच्चों को स्कूली शिक्षा के लिए मुफ्त किताबें, यूनिफॉर्म और छात्रवृत्ति प्रदान की जाएगी।

इससे गरीब परिवारों के बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने में मदद मिलेगी और वे अपना भविष्य सुरक्षित कर सकेंगे। राशन कार्ड योजना 2025 में महिला सशक्तिकरण को विशेष महत्व दिया गया है। इस योजना के अंतर्गत, राशन कार्ड महिला सदस्य के नाम पर जारी किया जाएगा, जिससे परिवार में महिलाओं की भूमिका और महत्व बढ़ेगा। आदिवासी बहुल झारखण्ड राज्य खाद्य सुरक्षा योजना के अंतर्गत परिवार के प्रत्येक सदस्य को पांच किलो अनाज मिलता है। झारखण्ड में चावल, गेहूं, चना दाल भी दिया जाता है। सरकार को प्रति परिवार को सोयाबीन दिये जाने का भी प्रस्ताव मिला है।

अगर यह योजना लागू हो जाती है, तो प्रत्येक परिवार को चावल/गेहूं, दाल और सोयाबीन के रूप में एक सब्जी मिल सकेगी। मात्र 10 रुपये में धोती/लुंगी व साड़ी एक व्यक्ति को भोजन के साथ-साथ कपड़ों की भी आवश्यकता होती है। सरकार वर्ष में दो बार प्रति परिवार को धोती/लुंगी व साड़ी उपलब्ध करा रही है। इसके लिए मात्र 10 रुपये कार्डधारक से लिया जा रहा है। इतनी कम कीमत पर राज्य सरकार लोगों के तन ढंकने का कार्य कर रही है। किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य मिले और कल्याणकारी योजनाओं की जरूरतें पूरी हों, यह सुनिश्चित करने के लिए भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) और राज्य एजेंसियां ​​गेहूं की खरीद करती हैं।

मोटे अनाज की खरीद पर ध्यान केंद्रित करने को भी कहा गया। अप्रैल से शुरू होने वाले 2025-26 रबी विपणन सत्र के लिए 3.1 करोड़ टन गेहूं खरीद का लक्ष्य तय कर लिया गया है। सरकार ने फसल वर्ष 2024-25 (जुलाई-जून) में 11.5 करोड़ टन रिकॉर्ड गेहूं उत्पादन का लक्ष्य रखा है, इसके बावजूद खरीद लक्ष्य कम है। आधिकारिक बयान में कहा गया है कि राज्यों के खाद्य सचिवों के साथ हुई बैठक में गेहूं, धान और मोटे अनाज जैसी रबी फसलों के लिए खरीद लक्ष्य तय किया गया। विचार-विमर्श के बाद, आगामी 2025-26 विपणन सत्र के लिए गेहूं खरीद का लक्ष्य 3.1 करोड़ टन, चावल 70 लाख टन और मोटे अनाज 16 लाख टन निर्धारित किया गया।

राज्यों से आगामी विपणन सत्र में गेहूं और चावल की खरीद को अधिकतम करने के लिए सक्रिय कदम उठाने को कहा गया। राज्यों से फसलों के विविधीकरण और आहार चलन में पोषण बढ़ाने को प्रोत्साहित करने के लिए मोटे अनाज की खरीद पर ध्यान केंद्रित करने को भी कहा गया। अप्रैल से शुरू होने वाले 2025-26 रबी विपणन सत्र के लिए गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,425 रुपये प्रति क्विंटल तय किया।

किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य मिले और कल्याणकारी योजनाओं की जरूरतें पूरी हों, यह सुनिश्चित करने के लिए भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) और राज्य एजेंसियां ​​गेहूं की खरीद करती हैं। सत्र 2024-25 में सरकारी गेहूं खरीद तीन से 3.2 करोड़ टन के लक्ष्य के मुकाबले 2.66 करोड़ टन तक पहुंच गई। हालांकि यह 2023-24 में खरीदे गए 2.62 करोड़ टन से अधिक है, लेकिन यह उस वर्ष के 3.41 करोड़ टन लक्ष्य से कम है।

एक गंभीर समस्या अनाज के वितरण में सामने आई है। इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च ऑन इंटरनेशनल इकनॉमिक रिलेशंस की रिपोर्ट के मुताबिक देश से हर साल करीब 69,000 करोड़ रुपए का राशन गायब हो जाता है, जिससे देश को बड़ा नुकसान होता है। यह राशन उन 81 करोड़ जरूरतमंद लोगों के लिए आता है, जो सरकारी पर मदद पर निर्भर रहते है। इस रिपोर्ट के मुताबिक करीब 2 करोड़ टन चावल और गेहूं जरूरतमंदों तक पहुंचने से पहले ही खुले बाजार में बिक जाता है या कहीं और भेज दिया जाता है। रिपोर्ट में बताया गया कि राशन चोरी की समस्या अब पहले से कम हुई है, लेकिन अब भी यह पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

2011-12 में 46% राशन चोरी होता था, जो अब घटकर 28% पर आ गया है। यह एक चिंता का मुद्दा है, इससे देश की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ रहा है। इस तरह की गड़बड़ी रोकने के लिए सरकार ने कुछ कड़े कदम उठाए हैं। अब राशन कार्ड धारी का केवाईसी अपडेट नहीं कराया है, तो 2025 से राशन और सरकार की योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाएगा। लाखों लोगों के राशन कार्ड निष्क्रिय हो सकते हैं, जिससे वे सस्ती दरों पर मिलने वाले अनाज और अन्य सरकारी सुविधाओं से वंचित हो जाएंगे।

सरकार ने यह कदम फर्जी और अपात्र लाभार्थियों को हटाने और जरूरतमंदों तक सही तरीके से राशन पहुंचाने के लिए उठाया है। कई जगहों पर एक ही व्यक्ति के नाम से एक से अधिक राशन कार्ड जारी कराए गए हैं, जिससे राशन वितरण में गड़बड़ी हो रही है। केवाईसी प्रक्रिया से यह तय किया जाएगा कि सिर्फ योग्य और वास्तविक लाभार्थियों को ही सरकारी योजनाओं का लाभ मिले।

सवाल यह भी है कि समाज का प्रभावशाली वर्ग अपने टैक्स में कमी करवाता रहा। हर तरह की सुविधाएं लेता है। सरकारी या निजी कंपनियों के लोग सुविधा संपन्न होते जा रहे हैं। ग़रीब उनके घरों या दुकानों कारखानों खेतों में काम भी करता है। लेकिन उसे सरकारी सुविधा सहायता पर आपत्ति करता है। उसे अपने आसपास के लोगों को शिक्षित सुखी बनाने पर भी ध्यान देना चाहिए।

( यह लेखक के निजी विचार हैं )


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